बुधवार, 16 जनवरी 2013

किसान पुत्र ने दिलाया कृषि को सम्मान


किसान पुत्र ने दिलाया कृषि को सम्मान

(लिमटी खरे)

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ वास्तव में किसान ही है। भारत गणराज्य गांवों में ही बसता है। किसानों की क्रय शक्ति बढ़ी है, जैसे मुहावरे अब सिर्फ भाषणों तक ही सीमित रह गए हैं। नेताओं ने देश की जनता को भ्रमित करने और सत्ता की मलाई चखने के लिए इन मुहावरों और किसानों को लुभाने वाले अस्त्रों का बखूबी इस्तेमाल किया है। मध्य प्रदेश में किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान ने भले ही खेती किसानी का प्रचार प्रसार ज्यादा ना किया हो पर कृषि के मामले में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि कर्मण अवार्ड मध्य प्रदेश को दिलवाकर साबित कर दिया है कि किसान पुत्र के हाथों अगर सूबे की कमान है तो किसानों के हितों का संवर्धन सुनिश्चित है।

मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड 2011-12 सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पादन के लिए श्रेणी-1 के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए नवाजा गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से राष्ट्रपति भवन में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम अवार्ड ग्रहण किया। पुरस्कार में दो करोड़ रूपये की राशि के साथ ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये। मुख्यमंत्री चौहान के साथ प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ0 रामकृष्ण कुसमरिया और राज्य सरकार के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पंवार महाराष्ट्र सूबे से हैं जहां उनके सहयोग से राज्य में कांग्रेस काबिज है, बावजूद इसके उनके सूबे के स्थान पर देश के हृदय प्रदेश को यह सम्मान मिला है। मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर और नागालैंड को कुल अनाज उत्पादन के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए अवॉर्ड दिया गया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार और झारखंड को क्रमशः मोटे अनाज, गेहूं, धान और दालों का अधिक उत्पादन करने के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 10 राज्यों को सांत्वना पुरस्कार भी दिया गया।  यह पुरस्कार दो श्रेणियों में दिया जाता है। पहला, कुल अनाज उत्पादन और दूसरा किसी खास फसल का सबसे ज्यादा उत्पादन। इन दोनों श्रेणियों में प्रशस्ति पत्र के साथ ही क्रमशः दो और एक करोड़ रुपये का नकद ईनाम राज्य को दिया जाता है। इस अवॉर्ड की शुरुआत 2010-11 में की गई थी।
कृषि कर्मण अवार्ड के चयन को दो श्रेणियों में बांटा गया है जिसके तहत 80 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन में पिछले पांच सालों में अधिकतम उत्पादन, पिछले पांच सालों में उत्पादकता मंे सर्वोत्तम बढ़ोत्तरी, 2011-12 में उपार्जन में बढ़ोत्तरी के लिए तथा शेष 20 प्रतिशत वेबसाइट पर डाटा अद्यतन, प्रयोग/पहल, कृषि उत्पादन अभिलेखीकरण बढ़ाने के लिए किये गये नवाचार/पहल, मुख्य विभाग के साथ अंतर विभागीय समन्वय और भागीदारी और पूर्वानुमान की गुणवत्ता शामिल है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-12 के दौरान कुल 216.08 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हासिल किया जो कि अभूतपूर्व कीर्तिमान है। इससे पूर्व 2010-11 में खाद्यान्न फसलों का अधिकतम उत्पादन 166.41 लाख मीट्रिक टन था। गेहूं के उत्पादन में भी वर्ष 2011-12 में 127.53 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया गया। वहीं गेहूं की प्रति हेक्टयर अधिकतम उत्पादकता वर्ष 2010-11 में 2065 किलोग्राम थी जो वर्ष 2011-12 में 2609 किलोग्राम तक पहुंच गयी है।
इसके अलावा प्रदेश मंे कृषि विकास योजनाओं के तहत 95.87 प्रतिशत राशि का उपयोग किया गया है। राज्य में कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों की चुनौतियों के समाधान के लिए कृषि केबिनेट का गठन किया गया। कृषि केबिनेट एवं कृषि बजट में कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य, सहकारिता, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग तथा वन विभाग को शामिल किया गया।
किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों के हितों का संवर्धन करते हुए, किसानों को दिये जाने वाले सहकारी ऋणों पर ब्याज दर को घटाकर शून्य प्रतिशत किया गया है। किसानों को गेहूं के उपार्जन पर 100 रूपये प्रति क्विंटल तथा धान के उपार्जन पर 50 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया है। अनुदान राशि सीधे कृषकों के खातों में जमा कराना, अग्रिम उर्वरक भण्डारण योजना, जल क्षमता विस्तार के लिए बलराम ताल योजना, कृषि यंत्रों पर 25 प्रतिशत टॉपअप अनुदान तथा राज्य सरकार की ओर से 30 प्रतिशत टॉपअप अनुदान, यंत्रीकरण में वृद्धि के लिए कस्टम हाइरिंग केन्द्रों का विकास, तकनीक को प्रोत्साहित करना, किसान दीदी-किसान मित्र योजना का प्रभावी क्रियान्वयन आदि प्रदेश सरकार की ओर से उठाये गये अभिनव कदम हैं।
मध्य प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने साबित कर दिया है कि वे किसान पुत्र हैं और उन्हें किसानों की चिंता है, उनके मन में किसानों के प्रति संवेदनाएं हैं। मध्य प्रदेश को मिले इस पुरूस्कार से निश्चित तौर पर किसानों के बीच शिवराज सिंह चौहान और भाजपा की छवि बेहद अच्छी जाने की उम्मीद है। किसानों को महज एक फीसदी ब्याज पर ऋण दिलवाकर किसानों के हाथ शिवराज सिंह चौहान ने मजबूत ही किए हैं। (साई फीचर्स)

कोई टिप्पणी नहीं: