शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

सिवनी : जानते बूझते घेर कर मारा


कर्र्फ्यूू में फंसे भुक्तभोगियों की आपबीती

जानते बूझते घेर कर मारा

(शिवेश)

सिवनी (साई)। 7 फरवरी को रात्रि में अचानक जिला मुख्यालय सिवनी में लगाए गए कर्फ्यू के उपरांत उपजी परिस्थितियों के बारे में स्थानीय दैनिक समाचार पत्र द्वारा लगातार लोगों की आपबीती का प्रकाशन किया जा रहा है। इसी क्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता जेपीएस तिवारी के साथ पुलिस ने जो दुर्व्यवहार किया उसकी पीड़ा का बयान उन्होंने खुद ही अपने शब्दों में किया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी के यहाँ जिले में व्याप्त तनाव की स्थिति मे विचार-विमर्श हेतु एक बैठक थी। बैठक के दौरान ही कांग्रेस पदाधिकारियों को नगर में कर्फ्यू लगने की आशंका की खबर लगी तो बैठक स्थगित कर सभी कांग्रेस जन अपने-अपने घर पहुँचने रवाना हुए। मै भी जिला संगठन मंत्री विष्णु करोसिया के साथ उनकी मोटरसाईकिल में पीछे बैठकर अपने निवास जाने के लिए रात्रि लगभग 09 बजे कलेक्ट्रेट कचहरी चौक होते हुए बस स्टेंड पहुँचा। बस स्टेंड में पुलिस फोर्स के लगभग 25-30 जवान डंडे लेकर खड़े थे। हम लोगों ने पुलिस के जवान देख अपनी गाड़ी धीरे की।  इस समय तक हमे नहीं पता था कि कर्फ्यू लग चुका है न ही हमने कोई अलाउंसमेंट सुना था। हमने अपनी गाड़ी रोक जवानों से अपना परिचय देकर घर जाने की अनुमति मांगी। इस पर वहाँ खड़े पुलिस जवानों ने अचानक हमे  घेर लिया और क्रूरतापूर्वक लाठी भांजना शुरु कर दिया। इससे मेरे हाथ की कुहनी से बहुत ज्यादा खून निकलने लगा जिसे देख करोसिया जल्दी से मुझे मोटरसाईकिल पर बैठाकर पुलिस से बचते-बचाते मुझे मेरे निवास पहुँचाया।
मेरे घावों से लगातार खून बह रहा था। इसकी सूचना मोबाईल पर जिला कांग्रेस के अन्य प्रवक्ता ओमप्रकाश तिवारी को दी गयी। नगर कांग्रेस अध्यक्ष इमरान पटेल को भी जब इस घटना की सूचना मिली तो उन्होंने म।प्र। विधानसभा उपाध्यक्ष ठा। हरवंश सिंह जी को भी घटना से अवगत कराया। हरवंश सिंह ने तत्काल पुलिस अधीक्षक से तिवारी के उपचार की व्यवस्था बनाने को कहा। फिर मेरे निवास पर थानेदार दोहरे चार पुलिस वालों के साथ पहुंचे व मुझे व मेरे पुत्र को वाहन में बैठाकर जिला अस्पताल ले गये। चिकित्सालय में ड्यूटी डाक्टर सिरसाम ने पर्ची कटवाकर खून बहते घाव में मरहम पट्टी करवाकर और टिटनेस इत्यादि के दो इंजेक्शन लगवाकर तथा दवाई-गोली देकर उसी पुलिस वाहन से घर वापिस भिजवा दिया। ड्यूटी डाँक्टर को मैने बताया था कि पुलिस वालों ने मुझे बुरी तरह डंडों से पीटा है। इन घावों के साथ ही शरीर के अन्य अंगों पर भी भारी दर्द व डंडे के निशान हैं इसके बाद भी मेरा मुलाहजा ना करके मुझे तुरंत घर भिजवा दिया गया।
कर्फ्यू लगाने के बाद बिना पर्याप्त उद्घोषणा और नागरिकों को घर पहुंचने का समय दिये बगैर सड़क से जाते निर्दोष नागरिकों पर बेवजह पुलिस लाठी चार्ज करना पुलिस बल की संवेदनहीन कार्यप्रणाली का घोतक है। दोषी पुलिस कर्मियों पर तत्काल कार्यवाही की उन्होंने जिला प्रशासन से मांग जेपीएस तिवारी ने अपनी आप-बीती मे की है।

कोई टिप्पणी नहीं: