लाजपत ने लूट लिया
जनसंपर्क ------------------ 53
प्रिंट मीडिया की
कार्यप्रणाली से वाकिफ नहीं हैं पीआरओ!
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। मध्य
प्रदेश के सिवनी जिले में जनसंपर्क विभाग की कमान संभवतः एसे अधिकारी के हाथों में
है जिन्हें प्रिंट मीडिया की कार्यप्रणाली के बारे में ज्यादा माहिती नहीं है। यही
कारण है कि सिवनी में 7 फरवरी की रात्रि लगाए गए कर्फ्यू के उपरांत प्रिंट मीडिया
और जनसंपर्क विभाग में बार बार तकरार चलती ही रही।
बताया जाता है कि 7
फरवरी को जिला मुख्यालय में तनाव फैलने के चलते अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी द्वारा
जिला मुख्यालय की सीमा में कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई थी। इसके उपरांत अगले दिन 8
फरवरी को ना तो पत्रकार ही घरों से निकल पाए और ना ही समाचार पत्रों का वितरण हो
पाया।
आठ फरवरी को दोपहर
बाद प्रशासन ने कर्फ्यू के दरम्यान पत्रकारों को पास देने की पहल की किन्तु वह पास
महज शाम पांच बजे तक ही वैध था। इस पर मीडिया में रोष और असंतोष का वातावरण बन गया, क्योंकि अगर पांच
बजे के बाद कोई घटना घटती तो उसकी रिर्पोटिंग कैसे हो पाती।
इतना ही नहीं
प्रिंट मीडिया के लिए संपादक, रिर्पोटर, कंपोजिटर, कंप्यूटर आपरेटर, प्रूफ रीडर, विज्ञापन विभाग, प्रसार विभाग, मशीन विभाग, प्लेट मेकिंग विभाग
आदि अनेक प्रभाग होते हैं जिनमें कर्मचारियों के सहयोग के बिना समाचार पत्र का
प्रकाशन संभव ही नहीं है।
प्रशासन संभवतः
सिवनी से बाहर के समाचार पत्रों को अधार बनाकर एक एक संस्थान के लिए महज दो तीन
पास ही जारी करने पर रजामंद दिख रहा था। बिना पूरी टीम के सिवनी से प्रकाशित होने
वाले समाचार पत्रों का प्रकाशन संभव नजर नहीं आ रहा था। वहीं दूसरी ओर साप्ताहिक
और दैनिक के अलावा अन्य आवधिक समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों के बारे में जनसंपर्क
विभाग पूरी तरह मौन ही नजर आया। कहा जा रहा है कि अगर जिला जनसंपर्क अधिकारी को
दैनिक समाचार पत्रों के पूरे सेटअप के बारे में मालुमात होती तो वे जिला प्रशासन
को इस बारे में आवगत कराकर मीडिया के हितों का संवर्धन अवश्य करवाते, वस्तुतः एसा हुआ
नहीं!


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