शनिवार, 17 मार्च 2012

नाथ और स्वराज का रहा रेल बजट में बोलबाला


नाथ और स्वराज का रहा रेल बजट में बोलबाला

प्रदेश के क्षत्रप बोने ही साबित हुए दिनेश त्रिवेदी के आगे

दिल्ली भोपाल छिंदवाड़ा दौड़ सकती है राजधानी एक्सप्रेस



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। रेल किराया बढ़ाकर भले ही रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से बैर मौल लेने का स्वांग कर देश को पार्टी से उपर बता दिया हो पर रेल बजट में मध्य प्रदेश के दो क्षत्रपों ने बाजी मार ली है। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र को रेल बजट में भारी सौगात मिल गई है। मध्य प्रदेश के बाकी सांसदों ने अपने अपने क्षेत्र के विकास में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई है।
सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा में रेल मंत्री ने हाई हार्स पावर के डीजल इंजन के ट्रेक्शन आल्टरनेटर्स के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि विदिशा सदा से ही भाजपा का गढ़ रहा है। विदिशा से पहले भाजपा के शिवराज सिंह चौहान सांसद रहे हैं, इसके बाद अब सुषमा स्वराज यहां से सांसद हैं। कांग्रेस के गढ़ रहे धार, झाबुआ, मण्डला जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की न तो कांग्रेस ने ही सुध ली और ना ही केंद्र सरकार ने।
उधर छिंदवाड़ा के अजेय योद्धा कमल नाथ ने अपने प्रभावों और संपर्कों का पूरा पूरा लाभ उठाया। छिंदवाड़ा को इस रेल बजट में सबसे ज्यादा सौगातें मिली हैं। छिंदवाड़ा के परासिया को माडल रेल्वे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही साथ छिंदवाड़ा से दिल्ली सराय रोहिला चलने वाली रेलगाड़ी को अब सात दिन कर दिया गया है। पांढुर्णा सौंसर के रेल मार्ग के यातायात सर्वेक्षण के लिए वर्ष 2011 -12 के बाद अब नए वित्तीय वर्ष के लिए भी राशि का आवंटन किया गया है।
आमला से छिंदवाड़ा एकल रेल पथ के दोहरीकरण के सर्वेक्षण के लिए भी नए वित्तीय वर्ष में राशि का आवंटन किया गया है। छिंदवाड़ा से करेली होकर सागर एवं छिंदवाड़ा से गाडरवाड़ा, बड़ा मल्हारा होकर खजुराहो रेल पथ के यातायात सर्वेक्षण के लिए भी इस बजट में राशि का आवंटन किया गया है।
कमल नाथ की सबसे बड़ी उपलब्धि छिंदवाड़ा से नागपुर के निर्माणाधीन रेलखण्ड को विद्युतीकृत कराना है। इस बजट में आमला से परासिया होकर छिंदवाड़ा एवं छिंदवाड़ा नागपुर रेलखण्ड के विद्युतीकरण का प्रस्ताव है। अगर इस रेलखण्ड का विद्युतीकरण हो जाता है तो दिल्ली से भोपाल होकर छिंदवाड़ा राजधानी एक्सप्रेेस के दौड़ने के मार्ग प्रशस्त हो जाएंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के करीबी सूत्रों का कहना है कि जैसे ही इस रेलखण्ड का विद्युतीकरण हो जाएगा वैसे ही सतपुड़ा की सुरम्य वादियों वाले पातालकोट को आधार बनाकर दिल्ली से छिंदवाड़ा राजधानी एक्सप्रेस को दौड़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
यहां गौरतलब होगा कि सालों से इटारसी से जबलपुर कटनी रेखण्ड में अप डाउन दोनों ही रेल मार्ग होने के बाद भी यह विद्युतीकरण की बाट जोह रहा है। इसके साथ ही साथ सिवनी से बरघाट होकर कटंगी एवं सिवनी से छपारा लखनादौन के यातायात का सर्वेक्षण भी इस बजट में शामिल किया गया है। सिवनी से बरघाट कटंगी बालाघाट संसदीय क्षेत्र में तो छपारा लखनादौन मूलतः मण्डला संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।
इसको लेकर भी राजनीति आरंभ हो गई है। बालाघाट के भाजपा सांसद केशव दास देशमुख ने दोनों ही रेल खण्डों का सर्वेक्षण अपने ही खाते में डाल दिया है। उधर मण्डला से सांसद बसोरी सिंह मसराम इस मामले में सदा की ही भांति मौन साधे हुए हैं। बताया जाता है कि इस समय सांसद महोदय डिंडोरी जिले में अपने गृह ग्राम में मकान के निर्माण में व्यस्त हैं। बसोरी सिंह मसराम के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे अपने मकान के लिए निर्माण सामग्री छत्तीसगढ़ से आयात करवा रहे हैं, जिसका कारण अभी भी अज्ञात ही है।
गौरतलब है कि सौ साल से अधिक पुरानी छिंदवाड़ा से सिवनी नैनपुर मण्डला फोर्ट और बालाघाट से जबलपुर रेलखण्ड के अमान परिवर्तन के लिए इस बजट में राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। इस नेरो गेज को ब्राडगेज करने के मामले में सांसद केशव दास देशमुख ने मौन ही साधा हुआ है।
मध्य प्रदेश के खाते में जो अन्य सौगातों में इटारसी जबलपुर कटनी माणिकपुर रेलखण्ड का विद्युतीकरण, बीना कोटा का विद्युतीकरण, इंदौर उज्जैन देवास मक्सी, इंदौर बेतूल के यातायात सर्वेक्षण, लामटा परसवाडा बैहर का यातायात सर्वे, सागर से मालथौन ललितपुर नई रेल लाईन का यातायात सर्वे, सतना मिर्जापुर नई रेललाईन का यातायात सर्वे, के अलावा बुरहानपुर, दमोह, खण्डवा, मदन महल, उज्जैन को माडल स्टेशन बनाया जाना शामिल है।

. . . इसलिए नाराज हैं त्रिवेदी से ममता


. . . इसलिए नाराज हैं त्रिवेदी से ममता

दिनेश का कार्पोरेट कल्चर रास नहीं आ रहा ममता को



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। त्रणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के बीच रार बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस के एक केंद्रीय मंत्री के खासुलखास मुकुल राय के नए रेल मंत्री बनने के मार्ग तेजी से प्रशस्त होते दिख रहे हैं। सियासी गलियारों में अब ममता बनर्जी और दिनेश त्रिवेदी के बीच कडवाहट के कारण खोजे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी को दरअसल, दिनेश त्रिवेदी की कार्पोरेट सोच रास नहीं आ रही है।
भारत गणराज्य के इतिहास में संभवतः यह पहला ही मौका होगा जब रेल मंत्री द्वारा बढ़ाए गए यात्री किराए का उन्हीं की पार्टी द्वारा घुर विरोध किया गया हो। पहली ही बार एसा हुआ होगा जब देश के वज़ीरे आज़म को सदन में यह सफाई देना पड़ा हो कि फलां शख्स ही देश के रेल मंत्री हैं। सदन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने सरकार से साफ करने को कहा कि यह बताया जाए कि दिनेश त्रिवेदी देश के रेल मंत्री हैं या नहीं। इस पर मनमोहन सिंह को मजबूरन कहना पड़ा कि दिनेश त्रिवेदी ही देश के रेल मंत्री हैं।
ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों का कहना है कि रेल बजट तैयार होने के बाद ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी साख बचाने के चक्कर में रेल किराया बढ़ाने का विरोध करने का स्वांग रचा था। सूत्रों की मानें तो ममता को रेल बजट के बारे में सब कुछ पहले से ही पता था। पर अगर रेल मंत्री इस बात को स्वीकार करते तो बजट की गोपनीयता भंग होने के आरोपों से निपटना काफी मुश्किल होता।
सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी के संज्ञान में इस बात को लाया गया है कि दिनेश त्रिवेदी द्वारा कार्पोरेट कल्चर अपनाया जा रहा है। बड़े उद्योगपतियों से वे अपने घर पर मिलकर वारे न्यारे करने में जुटे हुए हैं। इस बात में सच्चाई कितनी है यह तो वे ही आने किन्तु ममता बनर्जी को यह भी बताया गया है कि दिनेश त्रिवेदी द्वारा त्रणमूल के कार्यकर्ताओं और ममता बनर्जी के खासुलखास लोगों से पर्याप्त दूरी बना ली गई है।
चर्चा है कि पश्चिम बंगाल में खासी दखल रखने वाले कांग्रेस के एक केंद्रीय मंत्री के बेहद करीबी मुकुल राय को रेल मंत्री बनवाने हेतु लाबिंग आरंभ हो चुकी है। इधर, ममता के करीबी सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बार रेल बजट में दिनेश त्रिवेदी ने अनेक घोषणाएं उक्त केंद्रीय मंत्री की सिफारिश पर ही की हैं। यह सब डिनर डिप्लोमेसी में ही तय हो गया था कि उक्त केंद्रीय मंत्री के इशारे पर क्या क्या किया जाना है रेल बजट में।
इधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी और त्रणमूल कांग्रेस द्वारा रेल बजट का विरोध कर एक तीर से कई निशाने साधे जा रहे हैं। पीएमओ के सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी रेल बजट का विरोध कर दिनेश त्रिवेदी को साईज में लाने के साथ ही साथ अपने हित साधना चाह रही हैं। रेल बजट पास करवाने जब कांग्रेस द्वारा त्रणमूल कांग्रेस को राजी करने का प्रयास किया जाएगा तब ममता बनर्जी केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल के लिए अच्छा खास पैकेज झटक लेंगी।

संघ ने कुलस्ते को दिया राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल


संघ ने कुलस्ते को दिया राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश में रिक्त होने वाली राज्य सभा सीटों पर घमासान तेज हो गया है। पांच सदस्य इस साल दो अप्रेल को सेवानिवृत होने वाले हैं। उनके स्थान पर नए चेहरों की तलाश भाजपा और कांग्रेस में तेज हो गई है। विधायकों की तादाद के हिसाब से इस बार एक सीट कांग्रेस तो तीन सीट भाजपा को मिलेगी और एक पर टसल रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
कांग्रेस की एक सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की दावेदारी सबसे प्रबल है। उत्तराखण्ड में सुरेश पचौरी की रणनीति कारगर रही और वहां कांग्रेस की सरकार काबिज हो गई है। गौरतलब है कि वैसे भी सुरेश पचौरी कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के बेहद करीबी और विश्वस्त हैं। पहले भी चार बार राज्य सभा के रास्ते सुरेश पचौरी चोबीस साल तक केंद्रीय राजनीति में रहे हैं। कांग्रेस द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व राज्य सभा प्रत्याशी रहे विवेक तन्खा पर एक बार फिर दांव लगाने का विचार बनाया जा रहा है।
उधर, भाजपा में सेवानिवृत्त होने वाले मेघराज जैन, नारायण सिंह, कप्तान सिंह सोलंकी, विक्रम वर्मा और अनुसुईया उईके पुनः राज्यसभा में दावेदारी के लिए लालायित दिख रहे हैं। छिंदवाड़ा मूल की राज्य सभा सदस्य अनुसुईया उईके द्वारा राज्य सभा के छः साल के कार्यकाल में छिंदवाड़ा में भाजपा को लाभ न दिला पाने के चलते उनकी पुर्नवापसी संदिग्ध ही प्रतीत हो रही है। कांग्रेस के कद्दावर नेता कमल नाथ की घुर विरोधी समझी जाने वालीं अनुसुईया उईके ने कमल नाथ के कद को भी छिंदवाड़ा में कम नहीं किया है।
दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंजके भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि नोट फार वोट कांड में प्रताड़ित हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह उईके को अनुसुईया उईके के स्थान पर राज्य सभा में भेजने के लिए संघ के आला नेताओं ने अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। शेष नामों पर अभी संघ के आला नेता सर जोड़कर बैठे हुए हैं।

बुधवार, 14 मार्च 2012

कमल नाथ तुस्सी ग्रेट हो!


कमल नाथ तुस्सी ग्रेट हो!

महाकौशल को कुछ नहीं पर छिंदवाड़ा ने मारी बाजी

सुषमा को मिला तोहफा!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद केंद्र सरकार के रेल बजट में मध्य प्रदेष की साफ तौर पर उपेक्षा होती दिखी किन्तु लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ ने अपने अपने क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित कर ही दिए। दोनों ही के संसदीय क्षेत्र पर दिनेश त्रिवेदी खासे मेहरबान दिखे।
रेल बजट में नौ साल बाद पहली बार रेल यात्री किराए में बढोतरी होगी। भारी गहमा गहमी और विरोध के बीच रेल मंत्री दिनेष त्रिवेदी ने अपना पहला रेल बजट पेष करते हुए बढ़ोतरी का ऐलान किया। पैसेंजर टिकट पर दो पैसा प्रति किलोमीटर, स्घ्लीपर में पांच पैसा प्रति किमी, एसी थ्री टियर और चेयर कार में 10 पैसा, एसी टू टीयर में 15 पैसा और एसी प्रथम श्रेणी में 30 पैसा प्रति किलोमीटर के हिसाब से रेल किराये में बढ़ोतरी होगी। प्लेटफॉर्म टिकट अब तीन की जगह पांच रुपये का मिलेगा।
त्रणमूल कांग्रेस के नुमाईंदे रेल मंत्री दिनेष त्रिवेदी ने बुधवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि 2012-13 में एक लाख युवकों को नौकरी दी जाएगी और यात्रियों की सुविधा के लिए 75 नई एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जाएंगी। 21 नई पैसेंजर ट्रेनें चलाई जाएंगी। 8 नई मेमू और 9 नई डेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी। प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों के लिए अलग ट्रेन चलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि शताब्दी रेलगाडियों की रफ्तार बढ़ाने का प्रस्ताव है। भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और लोकसभ में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिषा में डीजल इंजन का कारखाना स्थापित किया जाएगा। रेल मंत्री ने कहा कि सरकारी बजट का 10 फीसदी रेलवे पर खर्च किए जाने की जरूरत है। अगले 10 साल में रेलवे को 14 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इनमें ढाई लाख करोड़ बुनियादी ढांचे के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं। इसके अलावा स्घ्टेषन विकास निगम बनेगा।
उन्होंने कहा कि रेलवे रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी का गठन होगा। 114 नई लाइनों का सर्वे होगा। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक इसकी सूची मुहैया नहीं हो सकी है। 45 नई रूटों पर रेल लाइनें होंगी। नई लाइनों के लिए 6900 करोड़ रुपये रखे गए हैं। 4500 किमी ट्रैक का विद्युतीकरण होगा। डबल डेकर मालगाडियां चलाई जाएंगी। मालगाडियों के लिए अलग कॉरिडोर पर जोर दिया जा रहा है।
नई रेलगाडियों की घोषणा में पुरानी घोषणाओं का अता पता भी नहीं रहा। पिछले साल रेल मंत्री ने 99 नई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेने चलाने की घोषणा की थी लेकिन उसमें से 31 ट्रेनों अभी तक पटरियों पर नहीं उतरी हैं। पटरियों पर उतरने की बात तो दूर अभी तक इन ट्रेनों के लिए जरुरी कोच भी नहीं बने हैं यह बात खुद रेल मंत्रालय का रिकार्ड दर्षा रहा है। इन ट्रेनों में सात दुरतों, दो डबल डेकर एसी ट्रेन, और एक शताब्दी ट्रेन भी शामिल थी।
इस रेल बजट की सबसे बडी विषेषता यह रही कि इसमें इटारसी से मानिकपुर के रास्ते का विद्युतीकरण का प्रस्ताव है। अगर जबलपुर से इटारसी और कटनी तक रेल लाईन का विद्युतीकरण हो जाता है तो निष्चित तौर पर हाई कोर्ट के कारण दिल्ली जबलपुर राजधानी एक्सप्रेस के मार्ग प्रषस्त हो सकते हैं।
सबसे आष्चर्यजनक पहलू यह सामने आया है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र वाले सिंगल रेल लाईन वाले आमला छिंदवाड़ा रेल खण्ड और छिंदवाड़ा से कलमना (नागपुर) के निर्माणाधीन रेलखण्ड के विद्युतीकरण को वर्ष 2012 - 2013 में विद्युतीकृत होने वाली दस परियोजनाओं में शामिल किया गया है। छिंदवाडा से सिवनी होकर मण्डला और बालाघाट से जबलपुर के रेल खण्ड के अमान परिवर्तन के मसले में यह रेल बजट पूरी तरह मौन ही नजर आया।
इसके अलावा मध्य प्रदेश में हबीबगंज से इंदौर एसी डबल डेकर रोजाना, जबलपुर से सिंगरोली इंटर सिटी रोजाना एवं इंदौर से यशवंतपुर बरास्ता इटारसी साप्ताहिक रेल आरंभ की गई है। साई बाबा के दर्शनों के लिए विशा खापट्टनम, मैसूर और पंडरपुर के बीच रेल सेवा आरंभ की गई है।

यह है बढ़ा किराया

उपनगरीय और साधारण द्विघ्तीय श्रेणी के यात्री किघ्राये में 2 पैसा प्रति किलोमीटर, मेल एक्सप्रेस द्वितीय श्रेणी में 3 पैसे प्रति किलोमीटर, स्लीपर श्रेणी में 5 पैसे प्रति किलोमीटर, एसी चेयर कार, एसी-3 और प्रथम श्रेणी में 10 पैसे प्रति किलोमीटर, एसी-2 में 15 पैसे प्रति किलोमीटर तथा एसी-1 श्रेणी में 30 पैसे प्रति किलोमीटर की बढोत्तरी का प्रस्ताव है।

सोमवार, 12 मार्च 2012

भूरिया के खिलाफ विद्रोह का बिगुल


भूरिया के खिलाफ विद्रोह का बिगुल

के.के.मिश्रा प्रकरण बना भूरिया के गले की फांस

छिंदवाड़ा, छतरपुर डीसीसी नहीं हुई घोषित



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। भाजपा शासित देश के हृदय प्रदेश में दिग्विजय सिंह के चहेते पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के खिलाफ अब विद्रोह का बिगुल बज गया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चारों खाने चित्त गिरने के बाद कमजोर हुए मध्य प्रदेश के कांग्रेसी क्षत्रप और कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के खिलाफ माहौल बनने से अब भूरिया भी कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के रडार पर आ चुके हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सूबे में कांतिलाल भूरिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने की मांग तेज हो गई है। कांतिलाल भूरिया पर मीडिया से पर्याप्त दूरी बनाने के आरोप अब सार्वजनिक होने लगे हैं। उनके मोबाईल 8989003535 पर लगातार घंटी बजती रहती है पर वे फोन उठाने की जहमत ही नहीं उठाते हैं। एक नहीं अनेकों पत्रकारों की यह आम शिकायत है।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ यानी सोनिया गांधी के सरकारी आवास के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि सोनिया दरबार में कांतिलाल भूरिया और शिवराज सिंह चौहन की सांठगांठ की शिकायतें पुख्ता प्रमाण के साथ पहुंच चुकी हैं। भूरिया पर शिवराज सिंह चौहान के पे रोलपर काम करने के आरोप भी लग रहे हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेशलन हेडक्वार्टर में चल रही चर्चाओं के अनुसार आधे खोके का हर महीने खेल होता है।
हाल ही में उज्जैन की विधायक कल्पना पारूलेकर द्वारा एमपी के लोकायुक्त पर संघ के आदमी होने का आरोप लगाते हुए सदन में शोर मचाया था, साथ ही प्रमाण बतौर एक फोटो भी पेश किया गया था। इसके बाद पारूलेकर को पुलिस ने धर दबोचा। इस सबके एक पखवाड़े तक कांतिलाल भूरिया की तंद्रा नहीं टूटी। भूरिया पर आरोप है कि उन्होंने तब तक कोई कदम नहीं उठाया जब तक केंद्र से उन्हें कोई निर्देश नहीं मिला।
इसके साथ ही साथ खनिज माफिया के भाजपा सरकार पर हावी होने के मामले को भी कांग्रेस नेतृत्व डंपर कांड से नहीं जोड़ पाया है। अब जबकि माननीय न्यायालय ने ही डंपर कांड में संज्ञान लिया है तब भी प्रदेश कांग्रेस शांत बैठी है। प्रशिक्षु आईपीएस नरेंद्र कुमार की सरेआम हुई हत्या के मामले में भी प्रदेश में कांग्रेस शांत ही नजर आ रही है। प्रतीकात्मक तौर पर मंगलवार 13 मार्च को प्रदेश में कांग्रेस का बंद अवश्य है पर कांग्रेस ने इसके लिए तैयारियां नहीं की हैं।
इसके अलावा भाजपा से दमखम के साथ लड़ने वाले प्रवक्ता के.के.मिश्रा पर भाजपा से मिले रहने का आरोप लगाकर उन्हें पद से प्रथक करने का मामला भी गर्मा रहा है। सूत्रों की मानें तो के.के.मिश्रा ने कांतिलाल भूरिया के भाजपा से मिले होने के प्रमाण कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के संज्ञान में लाए थे। कहा जा रहा है कि भूरिया के निज सचिव श्री कक्कड़ के पुत्र को शिवराज सिंह चौहान ने खरगोन में एक डिस्टलरी (शराब फेक्टरी) देने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस बारे में के.के.मिश्रा ने शोर शराबा मचाया था।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि भूरिया की भाजपा विशेषकर शिवराज सिंह चौहान से सांठगांठ इस कदर हावी है कि भूरिया ने एक जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष को इसलिए हटा दिया क्योंकि उसने लोकायुक्त पर संघ का हाथ होने का आरोप लगाया था। इसके अलावा अध्यक्ष बनने के बाद अब तक छिंदवाड़ा (कमलनाथ का प्रभाव क्षेत्र), टीकमगढ़ और छतरपुर (सत्यव्रत चतुर्वेदी का प्रभाव क्षेत्र) में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की घोषणा न कर पाने का मामला भी राहुल गांधी के दरबार में पहुंच चुका है।
सोनिया के दरबा के सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के क्षत्रपों (कमल नाथ, दिग्विजय सिंह को छोड़कर) ने सोनिया गांधी से कहा है कि अगर मध्य प्रदेश में भाजपा से टक्कर लेना है तो इस तरह का ढुल मुल रवैया अख्तियार करने से काम नहीं चलने वाला है। इसके लिए नेतृत्व परिवर्तन अवश्यंभावी है। सूत्रों के अनुसार युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश की कमान सौंपने का मन राहुल गांधी का बनने लगा है। किन्तु इसमें राजा दिग्विजय सिंह अड़ंगा लगा रहे हैं।

बजट सत्र आज से


बजट सत्र आज से

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है। लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील के अभिभाषण से इसकी शुरूआत होगी। सत्र का पहला चरण इस महीने की तीस तारीख को समाप्त होगा और फिर तीन सप्ताह का अवकाश रहेगा।
इस दौरान संसदीय स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श करेंगी। सत्र का दूसरा चरण २४ अप्रैल से शुरू होगा और २२ मई तक इसके संपन्न हो जाने की संभावना है। वर्ष २०१२-१३ का रेल बजट बुधवार और केन्द्रीय आम बजट शुक्रवार को पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण बृहस्पतिवार को संसद में रखा जाएगा। इसमें देश की अर्थव्यवस्था के बारे में सरकार का आंकलन रखा जाएगा ।
बजट सत्र के हंगामेदार हाने के आसार दिख रहे हैं। वैसे बजट सत्र के शुरू होने से पहले ही कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ आपसी तालमेल को और पुख्ता करने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी थी। कई मुद्दों पर सहयोगी दलों के मतांतर को देखते हुए एक समन्वय समिति की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा था कि आपसी तालमेल बेहतर किया जाएगा। कल भारतीय जनता पार्टी और इसके सहयोगी दलों ने अलग-अलग बैठक करके यह फैसला लिया है कि बजट सत्र के दौरान महंगाई, भ्रष्टाचार, एनसीटीसी के गठन और ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बांध बनाए जाने जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। 

कांग्रेस बनाएगी बीएसपी की बैसाखी पर सरकार


कांग्रेस बनाएगी बीएसपी की बैसाखी पर सरकार

(अर्जुन कुमार)

देहरादून (साई)। उत्तराखंड में, बहुजन समाज पार्टी सरकार के गठन में कांग्रेस को समर्थन देगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूरजमल ने हमारे संवाददाता को बताया कि वे राज्य में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देंगे। सियासी बियावान में खबर है कि बहुजन समाज पार्टी राज्य में कांग्रेस के साथ सत्ता में भागीदारी चाहती है।
उत्तराखंड क्रांतिदल के एक और तीन निर्दलीयों के सहयोग से बहुमत का दावा करने वाली कांग्रेस को बसपा के समर्थन से और मजबूती मिल गई है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ३२ और भाजपा के ३१ सीटें मिली हैं। इस बीच, पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस विधायकदल के नये नेता के चुनाव में निर्दलीयों के हस्तक्षेप का मतलब बसपा के साथ आने से और आसान हो गया है।
जानकार बताते है कि राज्य के नये मुखिया के बारे में आज फैसला होने की उम्मीद है। कांग्रेस निर्दलीय और उक्रांद के विधायक के साथ राज्यपाल से मिलकर पहले ही सरकार बनाने के लिए बहुमत का दावा पेश कर चुकी है।

शिवराज हुए खनन माफिया के प्रति संजीदा


शिवराज हुए खनन माफिया के प्रति संजीदा



(नंद किशोर)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने खनन माफिया पर शिंकजा कसना शुरू कर दिया है। मुरैना जिले में भारतीय पुलिस सेवा के एक युवा अधिकारी की हत्या में खनन माफिया के कथित रूप से शामिल होने से देशभर में उठे आक्रोश के बाद राज्य सरकार ने यह कार्रवाई की।
ग्वालियर स्थित साई संवाददाता ने बताया है कि राज्य सरकार ने चम्बल क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए विशेष सशस्त्र बल के डेढ़ सौ जवान तैनात कर दिए हैं। मुरैना में पुलिस ने दो खनिज अधिकारियों पर हमलें के एक महीने पुराने मामले में कल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हमीर सिंह पटेल को गिरफ्तार कर लिया।
उधर, पन्ना जिले में शुक्रवार को अवैध उत्खनन रोकने गए सरकारी कर्मचारियों के एक दल पर हमला करने संबंध में पुलिस ने रेत माफिया और पूर्व डकैत कुबेर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। रेत माफिया ने पन्ना जिलें के अजयगढ़ में रेत के अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक पुल को तोड़ने गए अनुविभागीय दण्डाधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सहित कुछ अन्य पुलिस कर्मियों पर फायरिंग की थी।

आदिवासियों का हर्बल ज्ञान राज्यपाल के हाथों सम्मानित


आदिवासियों का हर्बल ज्ञान राज्यपाल के हाथों सम्मानित



(रजनी अर्गल)

अहमदाबाद (साई)। गुजरात प्रांत के आदिवासी बाहुल्य जिले डाँग में हर वर्ष की तरह डाँग दरबार का आयोजन जोर शोर से किया गया। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा का निर्वाहन पिछ्ले १०० वर्षों से अधिक से हो रहा है। इस दौरान यहाँ के ५ राजाओं को सरकारी पेंशन आवंटन के साथ सम्मानित भी किया जाता है। गुजरात राज्य की राज्यपाल महामहिम डॉ कमला बेनिवाल की गरिमामयी उपस्थिती और राज्य के अनेक मंत्रिमंडल सदस्यों, राजनेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों के समझ इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल के अलावा वन एवं पर्यावरण तथा आदिम जाति कल्याण केबीनेट मंत्री श्री मंगुभाई पटेल, डाँग जिला प्रभारी मंत्री रंजीतभाई गिलीटवाला, वलसाड सांसद किशनभाई पटेल, डांग तहसील विधायक विजय पटेल भी उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारियों के तौर पर गुजरात राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग के अग्र सचिव डॉ एस के नंदा और स्थानिय जिला अधिकारी प्रवीणभाई सोलंकी भी उपस्थित थे।
इस वर्ष डाँग दरबार का एक और प्रमुख आकर्षण यहाँ के हर्बल जानकारों, जिन्हे भगत कहा जाता है, का सम्मान था। अहमदाबाद- गुजरात की अभुमका हर्बल प्रा. लि. कंपनी ने इन आदिवासियों को पारंपरिक हर्बल चिकित्साओं को सफ़ल संचालित करने और उन्हे प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिकरूप से सम्मानित किया। डाँग जिले के ४ प्रमुख हर्बल जानकारों और यहाँ की भगत मंडली को राज्यपाल महामहिम डॉ कमला बेनिवाल के हाथों चेक भुगतान के अलावा, सर्टिफ़िकेट्स, शॉल और श्रीफल देकर आभार प्रकट किया गया। मनीष सिंह (डायरेक्टर, बिजनेस डेव्लपमेंट- अभुमका हर्बल) ने बताया कि पिछ्ले सात वर्षों से कंपनी डाँग जिले के आदिवासी हर्बल जानकारों को ज्ञान के संकलन का कार्य कर रही है और गत दो वर्षों से उत्पादों का खुले बाजार में आने का क्रम शुरू हुआ है और हर उत्पाद की बिक्री से मुनाफ़े का कुछ हिस्सा इन आदिवासी हर्बल जानकारों को दिया जाएगा।
आदिवासियों के पारंपरिक हर्बल ज्ञान के इस तरह के सम्मान को सराहा जाना चाहिए। कंपनी के डायरेक्टर- रिसर्च एंड डेव्लपमेंट, डॉ दीपक आचार्य का कहना है कि ये सिर्फ़ एक प्रयास है ताकि आदिवासियों की अगली पीढी को इस ज्ञान के सीखने में रूचि हो और आधुनिक विज्ञान के लिए यह ज्ञान एक महत्वपूर्ण औजार बने ताकि आम जनों तक हर्बल कारगर दवाएं आसानी से पहुँचे। ज्ञात हो कि अभुमका हर्बल भारत की इकलौती ऐसी कंपनी है जो पूर्णरूपेण आदिवासियों के ज्ञान पर आधारित उत्पादों को बाजार में लाने के लिए प्रयासरत है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ एस के नंदा, वन एवं पर्यावरण अग्र सचिव- गुजरात सरकार ने अभुमका हर्बल के इन प्रयासों को अत्यंत सराहा और कहा कि ऐसे प्रयास एक नये समाज का निर्माण करेंगें जिसमें आदिवासियों को समाज की मुख्य धारा से जोडने के साथ उनके सामाजिक मूल्यों और ज्ञान को भी सहेज कर रखा जा सकेगा।
डॉ आचार्य ने जानकारी दी कि कंपनी वर्तमान में भारत के तीन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और सवाई माधोपुर (राजस्थान) के आदिवासियों के बीच कार्य कर रही है, उत्पादों की अगली शृंखला में पातालकोट और सवाई-माधोपुर भी शामिल हो जाएंगें।

माफिया की बर्बरता के विरोध में सिवनी बंद आज: इमरान पटेल


माफिया की बर्बरता के विरोध में सिवनी बंद आज: इमरान पटेल

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। खनन माफिया और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार की जुगलबंदी से अब आम जनता के साथ ही साथ सरकारी कर्मचारियों का जीना भी मुहाल हो गया है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण मुरैना में परिवीक्षाधीन अवधि में पदस्थ भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी नरेंद्र कुमार की सरेराह की गई हत्या है। इसके बाद भी भाजपा सरकार द्वारा लगातार पीड़ित परिवार को सार्वजनिक तौर पर धमकाया जा रहा है जो निंदनीय है। उक्ताशय की बात नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल द्वारा कही गई है।
नगर कांग्र्रेस कमेटी के प्रवक्ता फिरोज खान द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इमरान पटेल ने मध्य प्रदेश सरकार की नपुंसकता और खनन माफिया से मिली भगत की कठोर शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि मुरैना में जिस तरह अपने कर्तव्यों को निभाते हुए नरेंद्र कुमार को खनिज माफिया ने अपना शिकार बनाया है उसकी निष्पक्ष जांच की जाना आवश्यक है। इमरान पटेल ने है कि भाजपा सरकार के राज में खनिज माफिया प्रदेश की छाती को खोदकर छलनी कर रहा है। इसके खिलाफ आवाज उठाने पर गोलियां ही मिल रही हैं।
इमरान पटेल ने आगे कहा कि पन्ना में भी अनुविभागीय दण्डाधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस पर खनन माफिया ने जिस तरह गोलियां बरसाईं उससे साफ हो गया है कि खनन माफिया पूरी तरह हावी हो चुका है। श्री पटेल ने प्रदेश के गृह मंत्री उमा शंकर गुप्त के बयान को गैर जिम्मेदाराना करार दिया है जिसमें गुप्ता ने कहा कि सरकार के इशारे पर ही खनिज माफिया के खिलाफ सख्ती की जा रही है। श्री पटेल ने सरकार से पूछा है कि सख्ती सरकार में रहते आठ सालों बाद क्यों की जा रही है?
नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सरेआम पीड़ित के परिजनों को धमकाकर कह रहे हैं कि सरकार के खिलाफ आरोप लगाना बंद किया जाए, वरना सरकार ने भी चूड़ियां नहीं पहन रखीं हैं। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश में अब प्रजातंत्र के बजाए जंगल राज की स्थापना हो चुकी है।
इमरान पटेल ने कहा है कि मध्य प्रदेश के जांबाज पुलिस अफसर की मौत से सारा पुलिस महकमा दुखी है। इसके अलावा राजस्व विभाग के अफसरों पर भी हमले जारी हैं। उन्होंने नगर वासियों से विनम्र अपील करते हुए कहा है कि इसके विरोध में मंगलवार 13 मार्च को बंद का आव्हान किया गया है जिसमें नगरवासियों से सहयोग की अपील की गई है। नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल ने नगर के व्यसाईयों, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों, नागरिकों से अपील की है कि भाजपा के इस गुण्डाराज के विरोध में 13 मार्च के बंद को सफल बनाएं।

शनिवार, 10 मार्च 2012

यूपी चुनाव ने दी मनमोहन को संजीवनी


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 100 (समापन किस्त)

यूपी चुनाव ने दी मनमोहन को संजीवनी

औंधे मुंह गिरी कांग्रेस से बच गई मनमोहन की कुर्सी

ममता लेंगी समर्थन वापससपा का केंद्रीय मंत्री बनना तय



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। भारत गणराज्य में देश के अब तक के सबसे कमजोर और मजबूर वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह की कुर्सी के पाए उत्तर प्रदेश चुनाव परिणामों के बाद अब सुरक्षित महसूस किए जा रहे हैं। यूपी चुनावों के परिणामों से भले ही कांग्रेस गमज़े में हो पर प्रधानमंत्री कार्यालय में खुशी की लहर दौड़ गई है। ममता बनर्जी केंद्र सरकार से समर्थन वापसी का ताना बना बुन रही हैंपर वहीं दूसरी ओर मुलायम या अखिलेश यादव का केंद्रीय मंत्री बनना तय माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश चुनावों के पहले तक यह माना जा रहा था कि अगर यूपी में कांग्रेस सौ से ज्यादा सीटें लेकर आती है तो मनमोहन सिंह से त्यागपत्र दिलवाकर राहुल गांधी को वज़ीरे आज़म की आसनी (कुर्सी) पर काबिज़ करवा दिया जाएगा। इससे उलट चुनाव परिणामों में कांग्रेस की हुई दुगर्ति को देखकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री बनने का सपना फिलहाल त्याग दिया है। अब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में हार के कारणों की खोज में लग चुकी है।
कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि इस हार से कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह का कद काफी कम हो गया है। सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह विरोधियों ने सोनिया गांधी को बताया है कि किस तरह दिग्गी राजा ने अपने दस साल के राज में मध्य प्रदेश में तत्कालीन क्षत्रपों स्व.अर्जुन सिंह (संसदीय क्षेत्र बदलकर होशंगाबाद किया)स्व.माधवराव सिंधिया (संसदीय क्षेत्र ग्वालियर से बदला)अजीत जोगी (काफी हद तक कमजोर किया)श्यामा चरण और विद्याचरण शुक्ल (नामलेवा नहीं बचा)कमल नाथ (1997 में अजेय योद्धा ने सुंदरलाल पटवा के हाथों पटखनी खाई) के अहम को तोड़ा थाठीक उसी तरह अब राहुल गांधी को भी साईज में ला दिया गया है।
इन समस्त समीकरणों के बाद भी अब सरकार पर संकट के बादल छाते दिख रहे हैं। ममता बनर्जी ने सरकार को झटका देने का मन बना लिया है। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने मीडिया से चर्चा के दौरान भी इसी तरह के कुछ संकेत दिए हैं। कांग्रेस के प्रबंधकों ने माईनस ममता के ऑप्शन पर भी विचार करना आरंभ कर दिया है। सूत्रों की मानें तो केंद्र में अब कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को केंद्र में स्थान देने का मन बना लिया है। यूपी में अखिलेश यादव की ताजपोशी के बाद अब केंद्र में मुलायम सिंह का मंत्री बनना तय है।
वैसे उत्तरप्रदेश में सपा के हाथों मिली शर्मनाक पराजय ने कांग्रेस के अंदरखाने में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस हाईकमान ने गुपचुप तरीके से हार के उन कारणों की पड़ताल आरंभ कर दी है। यूपी के नतीजों ने कांग्रेस की आगामी रणनीतियों को उलट-पुलट कर रख दिया है। नतीजों ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाधी को भी नाराज कर दिया है और मीडिया के समक्ष उन्होंने जिस प्रकार हार के कारणों को बयां कियाउसे देखने के बाद तो यही लगता है कि चुनाव में पार्टी को मिली इस पराजय के लिए सोनिया की नाराजगी का खामियाजा कई बड़े नेताओं को भुगतना पड़ सकता है।
सोनिया के इर्द गिर्द घूमने वाले नेताओं ने दिग्गी राजा की रणनीति को ही कसूरवार ठहराया है। सोनिया के कान भरने वालों ने राहुल गांधी का दलित के घर रूकनाखाना खाना आदि को भी इसके लिए कसूरवार ठहराया है। यद्यपि दिग्गी राजा की रणनीति के चलते भट्टा परसौला प्रकरण में मीडिया की सुर्खियों में राहुल गांधी आए पर उसका लाभ कांग्रेस को नहीं मिला। सूत्रों की माने तो बैठक में हार के कारणों की पड़ताल के लिए एक कमेटी गठित करते हुए सोनिया ने केंद्रीय मंत्रियों सलमान खुर्शीदबेनी प्रसाद वर्माश्रीप्रकाश जायसवाल तथा पीएल पुनिया द्वारा की गई बयानबाजी को भी बेहद गंभीरता से लिया है। टिकट वितरण में लापरवाही तथा संगठन कमजोर होने जैसी बातों का हवाला देकर सोनिया ने मीडिया के तीखे हमलों का सामना चाहे कर लिया होलेकिन इतना तय है कि इस हार के लिए कांग्रेस हाईकमान केंद्रीय मंत्रियों समेत कांग्रेस महासचिव दिग्विजय को शोकाज नोटिस जारी कर उनके विरुद्ध कुछ कड़े कदम उठा सकता हैजिसके संकेत बैठक में भी सोनिया के तेवरों को देखने में मिले हैं।
कुल मिलाकर देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश सूबे में कांग्रेस की पतली हालत से किसी को लाभ हुआ हो न हुआ होपर मनमोहन सिंह की कुर्सी कुछ समय के लिए बच जरूर गई है। अब पीएमओ में पुलक चटर्जी सहित सोनिया के विश्वस्त नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं।