मंगलवार, 14 जून 2011

राजा दिल मांगे चवन्नी उछाल के . . .

राजा दिल मांगे चवन्नी उछाल के . . .

(लिमटी खरे)

कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को भले ही न लगता हो कि देश मंहगाई को मंहगाई का दावानल निगल रहा है, किन्तु हालात यही बता रहे हैं कि देश में आम आदमी की कमर मंहगाई ने तोड़ रखी है। एक रूपए को छोड़कर एक एक करके कम मूल्य के सिक्के बाजार से बाहर हो गए हैं। अब सरकार ने चवन्नी की आधिकारिक बिदाई की घोषणा भी कर दी है, फिर भी वजीरे आजम को लग रहा है कि देश में मंहगाई है ही नहीं। सवाल तो यह है कि चवन्नी बिना सवाया प्रसाद कैसे लग पाएगा? चवन्नी छाप, चवन्निया मुस्कान आदि मुहावरे मार्केट से गायब हो जाएंगे। आने वाले समय में गांव, मजरों टोलों मे चवन्नी की चाकलेट, केण्डी आदि लेने वाले गरीब गुरबों की आल औलादों को परचून या मनिहारी की दुकान वाला बनिया घुड़क कर भगा देगा। वैसे आजकल महानगरों सहित बड़े शहरों में पचास पैसे का सिक्का भी दौड़ से बाहर ही है, तथा एक के सिक्के का भी अवमूल्यन हो चुका है। अब लोग शादी ब्याह शगुन आदि में 11, 21, 51, 101 के बजाए 10, 20, 50 या 100 रूपए ही देने का रिवाज बना चुके हैं। केंद्र सरकार ने सिक्का निर्माण अधिनियम 1906 की धारा तीन के तहत पच्चीस पैस या उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को चलन से बाहर करने का निर्णय लिया है।


एक एक करके बाजार से सिक्के गायब होते जा रहे हैं। कागज के नोट का स्थान अब प्लास्टिक मनी ने ले लिया है। एक समय था जब लोग सैर सपाटा या दूसरे शहर जाते थे तो पास में आने जाने के साथ ही साथ खर्च के लिए पर्याप्त धनराशि ‘अंटी‘ में बांधकर ले जाया करते थे। आज समय बदल गया है। लोग कम ही पैसा अपने पास रखते हैं। जरूरत पड़ने पर एटीएम डेबिट या क्रेडिट कार्य के माध्यम से पैसा निकाल लिया जाता है। आज की युवा पीढ़ी के लिए आने या एक, दो, तीन, पांच, दस, बीस पैसे के सिक्के क्या होते हैं यह कोतुहल का विषय हो सकता है। अस्सी के दशक तक आते आते रूपहले पर्दे पर जब खलनायक अजीत ‘पांच हजार‘ के हीरे की स्मगलिंग करता था तब लोग उसे कोसा करते थे। आज पांच हजार की औकात क्या बची है?

एक पैसे का चैकोर, दो पैसे और दस पैसे का अष्टकोण, तीन और बीस पैसे का षटकोण, पांच पैसे का चैकोर तथा गोल चवन्नी यानी चार आने के सिक्के बाजार की शान हुआ करते थे। बीस पैसे का पीला पीतल का सिक्का जिस पर कमल का फूल बना होता था की शान देखते ही बना करती थी। 15 अगस्त 1950 से सिक्कों का आजाद भारत गणराज्य में बाजार में प्रचलन आरंभ हुआ। उस वक्त एक पैसे से लेकर एक रूपए जिसे बोलचाल की भाषा में ‘कलदार‘ भी कहा जाता था के माध्यम से खरीदी बेचना आरंभ किया गया।

एक आना मतलब छः पैसे हुआ करता था। इस लिहाज से पच्चीस पैसे को चार आना या चवन्नी, पचास पैसे को आठ आना या अठन्नी और दोनों सिक्के मिलकर होते थे बारह आने। फिर एक रूपए का मतलब सोलह आना हुआ करता था। किशोर कुमार अभिनीत सिनेमा में ‘पांच रूपैया बारह आना . . . तो राज दिल मांगे चवन्नी उछाल के. . .। जैसे गीतों की बहार हुआ करती थी गुजरे जमाने में। नायिका के ठुमके या नायक के डायलाग सुनकर दर्शक पर्दे की ओर सिक्के उछाला करते थे। अनेक एसे दृश्य हुआ करते थे जिनमें सिक्कों की खनक टाकीज में सुनाई दे ही जाती थी।

पच्चीस पैसे का लोगों से गहरा नाता है, जिसे सरकार ने बंद करने की घोषणा कर दी है। सालों से मार्केट से गायब लोगों की प्यारी चवन्नी 30 जून के बाद आधिकारिक तौर पर बाजार में नजर नहीं आने वाली। अगर पच्चीस पैसे के महत्व को अपने जीवन में देखा जाए तो सरकार का यह फैसला पीड़ादायक ही लगता है। सालों साल से ‘सवा‘ शब्द को सुनने और जीवन में महत्वपूर्ण इस सवा का अब अंत हो जाएगा। बाजार से चवन्नी के गायब होने से श्रद्धालुओं को सवा रूपए का भोग प्रसाद लगाने में तकलीफ का सामना करना पड़ेगा। आस्था के साथ ही साथ चवन्नी से लोगों का अपनापन का नाता गहरा हो चुका है। उमर दराज हो रही पीढ़ी तो इस चवन्नी का भरपूर उपयोग कर चुकी है।

चवन्नी के खत्म होने से अब पचास पैसे से कम का सामान पचास पैसे में ही दिया जाएगा पचास से अधिक का सामान अब एक रूपए का होगा। आने वाले दिनों में वस्तुओं पर मूल्य पैसों के बजाए पूरे पूरे रूपयों में ही दर्ज होगा। इसमें तीन रूपए पेंतीस पैसे के बजाए चार रूपए ही दर्ज मिलें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जिस तेज गति से मंहगाई बढ़ रही है उसे देखकर लगने लगा है कि आने वाले दिनों में अठन्नी और एक रूपए का सिक्का भी चवन्नी की तरह ही बंद कर दिया जाएगा।

देश में भारत गणराज्य के सिक्कों का प्रचालन 15 अगस्त 1950 से आरंभ किया गया। 1957 में दशमलव पद्यति के आने के बाद आना को समाप्त कर एक रूपए को सोलह आने के बजाए सौ पैसे के समतुल्य माना गया। 1963 में तीन पैसे के सिक्के की शुरूआत तो 1968 में बीस पैसे का सिक्का प्रचलन में आया। मंहगाई के बढ़ने के साथ ही 1970 में एक दो और तीन पैसे के सिक्कों को प्रचलन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 1982 में एशियाड के वक्त दो रूपए का सिक्का बाजार में उतारा गया। 1992 में चवन्नी से थोड़ा बड़ा पांच रूपए का सिक्का चलन में लाया गया। अनेक मर्तबा तो पांच रूपए और चवन्नी में बहुत ज्यादा समानता होने पर कन्फयूजन की स्थिति निर्मित हो जाती थी। 2006 में सरकार ने दस रूपए सममूल्य के सिक्के को बजार में उतारा किन्तु अचानक ही यह अघोषित तौर पर बाजार से गायब ही हो गया।

कहा जाता था कि मेरे घर कोई ‘टकसाल‘ लगी है। दरअसल सिक्के ढालने की जगह को टकसाल कहा जाता है। भारत में हैदराबाद में दो, मुंबई, कोलकता और नोएडा में एक एक टकसाल काम कर रही है। चिल्लहर की समस्या बढ़ने पर ब्रिटेन, रूस, कोरिया, कनाडा और दक्षिण आफ्रीका से भी सिक्के ढलवाए गए। वर्ष 1990 में स्टील के दाम बढ़ने पर सिक्कों की कीमतें भी बढ़ गईं। केंद्र सरकार ने सिक्का निर्माण अधिनियम 1906 की धारा तीन के तहत पच्चीस पैस या उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को चलन से बाहर करने का निर्णय लिया है, जिसकी अधिसूचना पिछले साल 20 दिसंबर को जारी की जा चुकी है। केंद्र के निर्देश पर देश के बैंक में 29 जून तक पच्चीस पैसे को बदलकर रूपए लिए जा सकते हैं। या यूं कहा जाए कि 29 जून तक पाई पाई की कीमत वसूली जा सकती है।

आजादी के पहले जिन लोगों ने आना पाई का सिक्का देखा और चलाया है, और इसके बाद दशमलव पद्यति के उपरांत पैसा और नया पैसा देखा है उनकी भावनाएं आज भी सिक्कों से बेहद जुड़ी हुई हैं। आज भी बुजुर्गवारों की जुबान पर ‘हमारे जमाने में एक आने में एक सेर घी मिलता था‘, ‘उस सस्ताई के जमाने में सवा आने में सिनेमा देखते थे‘ आदि बरकरार है। सवा, आना, पैसा को लेकर न जाने कितनी कहानियां आज भी मौजूद ही हैं। रूपए के अवमूल्यन के साथ ही लोगों ने अब शादी ब्याह, जन्म दिन आदि में शगुन के एक रूपए को देना बंद कर दिया है। अब या तो भेंट के लिफाफे पर ही एक का कलदार चस्पा होता है, या फिर यह मान लिया जाता है कि एक रूपए का लिफाफा है शेष राशि में उसमें रख देने से एक रूपए का शगुन भी पूरा हो जाएगा।

पच्चीस पैसे के सिक्के के चलन से बाहर हो जाने के बाद चवन्नी छाप, चवन्निया जैसे मुहावरे भी बाजार से गायब हो जाएंगे। आने वाली पीढ़ी चवन्नी को महज एक सिक्का मानकर ही चर्चा का हिस्सा बनाएगी। वह इस बात को कतई नहीं समझ पाएगी कि चवन्नी या पच्चीस पैसा महज एक सिक्का नहीं है, यह पूरे एक काल या समय का प्रतिनिधित्व किया करती थी। आज भी देश के अनेक हिस्सों में पच्चीस पैसे में गरीब मजदूरों के बच्चे चाकलेट, बिस्किट, कैण्डी, आईसक्रीम जैसी चीजों को खरीदा करते हैं। महानगरों में भले ही छोटे सिक्कों का चलन बंद हो गया हो पर ग्रामीण अंचलों में इनका प्रचलन जारी है। आधिकारिक तौर पर इस सिक्के की रूखसती से अब गरीब गुरूबों के बच्चों को मनिहारी या परचून की दुकान वाला मोटे पेट का बनिया हड़का कर भगा दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

एमपी में उड़ रही आरटीई की धज्जियां

एमपी में उड़ रही आरटीई की धज्जियां

सवा तीन लाख बच्चे हैं शिक्षा से महरूम

देश के एक करोड़ बच्चों को नहीं मिल पा रही है शिक्षा

शिक्षा का अधिकार कानून का उड़ रहा माखौल

शालाओं में नहीं मिल पा रहा बीपीएल को दाखिला

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार द्वारा देश के नौनिहालों को शिक्षा मुहैया करवाने के लिए शिक्षा के अधिकार काननू (आरटीई) को लागू किए जाने के बाद भी देश भर में लगभग एक करोड़ बच्चों को शिक्षा दीक्षा मुहैया करवाने में राज्यों की सरकारें पूरी तरह सुस्त ही दिखाई दे रही हैं। मध्य प्रदेश के लगभग सवा तीन लाख बच्चों ने पिछले साल स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है, जबकि राज्यों में निजी तौर पर संचालित होने वाली शालाओं के प्रबंधनों ने सरकारों से अनेक रियायतें प्राप्त कर रखी हैं।

मानव संसाधन मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वैसे तो निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकारी अधिनियम 2009 के कार्यान्वयन द्वारा सरकार द्वारा विभिन्न कदम उठाए गए हैं जिसमें निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2010, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को अध्यापकों की अहर्ताएं निर्धारित करने के लिए शैक्षिक प्राधिकरण के रूप मेें, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को पाठ्यचर्चा और मूल्यांकन प्रक्रिया निर्धारित करने हेतु शैक्षिक प्राधिकरण के रूप में और अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को अधिसूचित करना शामिल है। उधर एचआरडी मिनिस्ट्री के आला दर्जे के सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय द्वारा माॅडल नियम तैयार कर राज्यों को परिचालित कर दिए गए हैं, ताकि राज्य अपनी सुविधाओं के मुताबिक नियम बना सकें।

भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि भारतीय बाजार अनुसंधान ब्यूरो (आईएमआरबी) द्वारा वर्ष 2009 में करवाए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के अनुसार 6 से 13 साल आयु वर्ग के स्कूल न जाने वाले बच्चों की तादाद भारत भर में 81 लाख पचास हजार 618 थी। यह संख्या कुल बाल जनसंख्या का 4.28 फीसदी था।

आरटीई का पालन न करने वालों में मध्य प्रदेश छटवीं पायदान पर है। 27 लाख 69 हजार 111 बच्चों को शाला का मुंह न दिखा पाने वाला उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। दूसरे नंबर पर बिहार है जहां इनकी संख्या 13 लाख 45 हजार 697 है। राजस्थान में इनकी तादाद दस लाख 18 हजार 326 तो पश्चिम बंगाल में सात लाख छः हजार 713 बच्चों के साथ चैथी पायदान पर है। इसके बाद नंबर आता है उड़ीसा का जहां इनकी तादाद चार लाख 35 हजार 560 है। इसके बाद मध्य प्रदेश में 3 लाख 28 हजार 692 बच्चे स्कूल जाने से वंचित रहे हैं।

इसके साथ ही साथ आरटीई के अनुसार शाला को अपनी कुल छात्र क्षमता का पच्चीस फीसदी हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए सुरक्षित रखकर उन्हें प्रवेश देना अनिवार्य किया गया है। देखा जा रहा है कि मंहगे स्कूल इस नियम से पूरी तरह मुंह मोड़े हुए हैं। जिन शालाओं द्वारा इस नियम का पालन भी किया जा रहा है, उसमें भी फर्जीवाड़ा ज्यादा किया जा रहा है।

सोमवार, 13 जून 2011

सिब्बल की लास्ट प्रायारटी बना हृदय प्रदेश

सिब्बल की लास्ट प्रायारटी बना हृदय प्रदेश

चार मंत्रियों के होते भी सबसे ज्यादा पद रिक्त हैं केंद्रीय विद्यालयों में

झारखण्ड के कांग्रेसी सांसद ने उठाया राज्य सभा में सवाल

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार में मध्य प्रदेश कोटे से कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांतिलाल भूरिया और अरूण यादव के मंत्री रहने के बावजूद भी मध्य प्रदेश में संचालित होने वाले केद्रीय विद्यालयों में सर्वाधिक पद रिक्त हैं। मध्य प्रदेश के 29 लोकसभा और 11 राज्य सभा सदस्यों की इस बात की परवाह नहीं है कि वे केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करें। इस मामले में पहल की है तो झारखण्ड के राज्य सभा के कांग्रेस के सदस्य धीरज प्रसाद साहू ने।

धीरज साहू ने राज्य सभा में प्रश्न पूछा था जिसमें देश में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत संचालित होने वाले केंद्रीय विद्यालयों में प्राचार्य सहित अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों के कितने पद पद रिक्त हैं। इसके जवाब में मंत्री ने कहा था कि 31 मार्च 2010 की स्थिति में देश के केंद्रीय विद्यालयों में कुल 106 प्राचार्य, 79 उप प्राचार्य, 838 स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (पीजीटी), 1649 स्नातक प्रशिक्षित अध्यापक (टीजीटी) 444 प्राथमिक शिक्षक (पीआरटी) एवं 87 मुख्याध्यापक (एचएम) के पद रिक्त थे।

इन पदों में से मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 15 प्राचार्य, 7 उप प्राचार्य, 126 पीजीटी, 163 टीजीटी, 36 पीआरटी एवं 30 एच एम इस तरह कुल 377 पद रिक्त थे। रिक्तता में दूसरी पायदान पर 277 पदों के साथ महाराष्ट्र और तीसरे नंबर पर 265 के साथ उत्तर प्रदेश था।

मजे की बात तो यह है कि मध्य प्रदेश से 29 लोकसभा और 11 राज्य सभा सदस्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं किन्तु किसी भी सांसद ने अपने अधिकारों का प्रयोग कर प्रदेश के नौनिहालों को स्तरीय शिक्षा मुहैया करवाने की दिशा में कदम नहीं उठाया है। इतना ही नहीं एमपी कोटे के केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांति लाल भूरिया और अरूण यादव ने भी इस मामले में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल या प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह से मिलना तो दूर उनसे पत्र व्यवहार करना भी अपनी शान के खिलाफ ही समझा है।

राम और बाल किसन की ‘‘आस्था‘‘


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

राम और बाल किसन की ‘‘आस्था‘‘

राम किशन यादव उर्फ बाबा रामदेव के साथ ही साथ बाल किसन विवादों को गले लगाकर ही घूम रहे हैं। बाबा रामदेव पर कांग्र्रेस प्रहार पर प्रहार कर रही है, वहीं दूसरी ओर उनके विश्वस्त सहयोगी और राईट हेण्ड आचार्य बाल कृष्ण पर नेपाली मूल के होने का आरोप मढ़ा जा रहा है। यह विवाद अभी शांत नहीं हुआ कि एकाएक छोटे पर्दे के क्षितिज पर धूमकेतू तरह उभरे आस्था चेनल में आठ लाख शेयर में से बाल कृष्ण के पास 99.9 फीसदी अर्थात सात लाख 99 हजार 250 शेहर में हिस्सेदारी की बात फिजां में तैर गई है। इसके अन्य शेयर बाबा के एक अन्य सहयोगी मुक्तानंद के नाम पर हैं। बाल कृष्ण के पास पतांजली आयुर्वेद लिमिटेड में 92 फीसदी की हिस्से दारी भी आश्चर्यजनक ही मानी जा रही है। मजे की बात तो यह है कि आचार्य बाल कृष्ण ने रजिस्टार ऑफ कम्पनीज में अपने पिता का नाम गुप्त ही रखा है। गत दिवस बाबा रामदेव ने जब पतांजली का हिसाब किताब सार्वजनिक किया था तब उनसे उनकी अन्य कंपनियों का ब्योरा मीडिया ने मांगा था, जिस पर बाबा काफी नाराज हो गए और उन्होंने इन सारे ब्योरों को रजिस्टार कंपनीज से लेने की बात कही थी।

भारतीय रेल का डीजल खत्म

आपने सुना होगा कि सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों का तेल खत्म होने पर वे सड़कों पर ही खड़े हो जाते हैं किन्तु क्या आपने कभी सुना है कि रेल के इंजन का डीजल खत्म होने पर वह घंटो डीजल के इंतजार में खड़ी रहे। जी हां एसा ही एक मामला रेल मंत्रालय में प्रकाश में आया है। एमपी की संस्कारधानी जबलपुर से देश की व्यवसायिक राजधानी मुंबई चलने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस अचानक ही नागपुर रेल मण्डल के तहत जलगांव और भुसावल के बीच रूक गई। बाद में पता चला कि इंजन का डीजल ही सामप्त हो गया है। बिना डीजल पूरी की पूरी एयर कंडीशन्ड गरीब रथ के यात्रियों के पसीने छूट गए। चूंकि नागपुर से मुंबई का यह मार्ग पूरी तरह विद्युतीकृत है अतः डीजल की किसी को सुध ही नहीं। घंटों इंतजार किया गया तब जाकर डीजल आया और रेल आगे बढ़ी। किसी भी समझदार रेल कर्मी ने इस रेल को स्पेयर वाले बिजली के इंजन से खींचकर किसी स्टेशन तक ले जाने की जहमत भी नही उठाई। ममता के बाद मुकुल राय भी रेल को बैलगाड़ी की तरह ही हांक रहे हैं।

मनपा ने गोद लिया सुप्रिया के ट्रस्ट!

राकांपा चीफ शरद पवार की सांसद पुत्री सुप्रिया सुले के पवार चैरीटेबल ट्रस्ट को महानगर पालिका मुंबई ने गोद ले लिया है!, हालात तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं। मुंबई महानगर पालिका ने शाला की 18 कक्षाएं इस ट्रस्ट को महज पांच हजार रूपए प्रति कक्षा के हिसाब से सौंप दिया है। उल्लेखनीय है कि 13 जनवरी 2010 को शाला की कक्षाएं या इमारत के किसी भी भाग को किराए पर देने से रोक दिया था। इस आदेश के विपरीत एक बार फिर नया आदेश जारी कर सुप्रिया के इस शैक्षणिक गतिविधियों वाले ट्रस्ट को 11 महीने के लिए सौंप दिया गया है। आरोपित है कि इस इलाके में इतने बड़े कक्षों का किराया तीस से चालीस हजार रूपए प्रतिमाह है, किन्तु उससे काफी कम किराए पर सुप्रिया के ट्रस्ट को इसे सौंपने पर सवाल खड़े होने लगे हैं। समझा जा रहा है कि शरद पवार जो कि महाराष्ट्र प्रदेश के निजाम रह चुके हैं के दबाव में आकर कांग्रेस द्वारा यह कदम उठाया गया है। यह जगह मनपा स्कूल का ट्रेनिंग संेटर के रूप में चिन्हित है।

मीडिया से कन्नी काटती साध्वी

कभी भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री रहीं उमा भारती एक बार फिर भाजपा में हैं। भाजपा के आला नेताओं के द्वारा मीडिया पर्सन को ऑफ द रिकार्ड ब्रीफिंग से खफा साध्वी ने भाजपा से किनारा कर लिया था। बाद में बशक्कत वे भाजपा में दोबारा वापस आ सकीं हैं। बुरे वक्त में मीडिया से दूरियां भी उमा ने पाट ली थीं, किन्तु अब दिल्ली के बुरदलोई मार्ग पर स्थित एमपी भवन से उन्होंने इसलिए कन्नी काटी क्योंकि मीडिया के वहां होने का उन्हें अंदेशा था। पिछले दिनों एमपी भवन के कक्ष नंबर 203 को अपने लिए आरक्षित करवाने के बाद मीडिया का जमावड़ा वहां होने लगा। उमा ने चुपचाप अपना सामान वहां से बुलवा लिया और बसंतकुंज इलाके में अपने घर चली गईं। उमा करीबियों का कहना है कि भाजपा के निजाम नितिन गड़करी ने उन्हें मशविरा दिया था कि वर्तमान हालात बेहद नाजुक हैं, उनकी वापसी से उनके विरोधी सक्रिय हो चुके हैं, जिसके चलते अभी कुछ दिनों तक उन्हें मीडिया से पर्याप्त दूरी बनाकर ही रखना चाहिए।

. . . तो पीएम भी नपेंगे!

कामन वेल्थ गेम्स में भ्रष्टाचार का जिन्न सर चढ़कर बोला। सुरेश कलमाड़ी की टीम ने इसमें जमकर मलाई काटी। सारे नियम कायदों को सरकार की आंखों के सामने ही धता बताई। जब हो हल्ला शोर शराबा ज्यादा हुआ तब जाकर इसकी जांच को सरकार तैयार हुई और कलमाड़ी को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया। हाल ही में सूचना के अधिकार में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस सारी अंधेरगर्दी के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को पूरी पूरी जानकारी थी, किन्तु न जाने किस दबावमें पीएम शांत बैठे रहे। आरटीआई कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल को मिली जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है कि तत्कालीन खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर और पीएम डॉ.सिंह के बीच 52 खतो खिताब का आदान प्रदान हुआ है। मणिशंकर भ्रष्टाचार के इस खेल से असहमत थे। शायद यही कारण था कि ताकतवर कलमाड़ी ने उन्हें कुर्सी से हटा दिया गया था। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा मणिशंकर को दी रिपोर्ट में इस बात की आशंका व्यक्त की गई थी कि इस आयोजन के माध्यम से एक लाख करोड़ का घोटाला हो सकता है। मणिशंकर ने इस प्रतिवेदन को पीएम को सौंपा था।

कांग्रेस द्रमुका: हनीमून इज ओवर

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के प्रमुख घटक द्रमुक और कांग्रेस के बीच सबकुछ ठीक ठाक नहीं है। तमिलनाडू में हार का स्वाद चखने के बाद अब कांग्रेस ने नई रणनीति बनाना आरंभ कर दिया है। तमिलनाडू और पड्डिचेरी में मिली हार का ठीकरा अंततः द्रमुक के सर पर मढ़ ही दिया गया है। कांग्रेस के मुखपत्र कांग्रेस संदेशके ताजा अंक में इन दोनों राज्यों में मिली पराजय के लिए टू जी घोटाले को दोषी मानते हुए कहा गया है कि टू जी घोटाले का ही परिणाम था कि दोनों ही सूबों में सत्ता कांग्रेस के हाथों से फिसल गई। इसके अलावा असम, केरल और पश्चिम बंगाल के परिणामों को सकारात्मक बताया गया है। कांग्रेस को नही भूलना चाहिए कि कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में जितने घपले और घोटाले सामने आए हैं उनका असर आने वाले समय के आम चुनावों में अवश्य ही पड़ेगा।

गुड्डू ने बढ़ाई कमल नाथ की मुश्किलें

मध्य प्रदेश के कांग्रेस के सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने एमपी के ही सांसद और केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की मुश्किलंे बढ़ा दी हैं। बाबा रामदेव पर एक के बाद एक प्रहार करने वाली कांग्रेस की ओर से गुड्डू ने कमल नाथ के द्वारा बाबा रामदेव की एमपी यात्रा के दौरान छिंदवाड़ा में उनकी अगवानी पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के निशाने पर बाबा रामदेव हैं और प्रेमचंद गुड्डू उनके प्रबल समर्थक माने जाते हैं। सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने वजीरे आजम डॉ.एम.एम.सिंह और कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया को बाकायदा पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज करवाया है कि कमल नाथ ने कांग्रेस के नेतृत्व की जरा भी परवाह किए बिना योग गुरू बाबा रामदेव की अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में जाकर न केवल कांग्रेसियों से आवभगत करवाई वरन् खुद भी उनकी आगवानी की। प्रेमचंद गुड्डू के आरोपांे के बाद कमल नाथ की मुश्किलों में इजाफा होता नजर आ रहा है। वैसे हो सकता है कमल नाथ द्वारा बाबा रामदेव को समझाने का प्रयास ही किया हो।

साईं के खजाने पर सबकी नजर

पुट्टपर्थी में रहने वाले सत्य साई बाबा के निधन (अवसान) के बाद उनकी संपत्ति पर सबकी नजरें जम गई हैं। बाबा के निधन के उपरांत उनके निजी कमरे यजुर मंदिर को अब तक खोला नहीं गया है। साईं भक्तों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार सत्य साईं के इस बंद कमरे में अरबों रूपयों की दौलत है। बाबा को 28 मार्च को अस्पताल में दाखिल करवाया था और 24 अप्रेल को उनका निधन हो गया था। बाबा के अस्पताल में भर्ती होने के बाद इस कमरे में किसी ने प्रवेश नहीं किया। इसकी चाबियां पहले बाबा के केयर टेकर सत्यजीत के पास थीं, जो बाद में उन्होंने सत्य साईं संेट्रल ट्रस्ट के सचिव चक्रवर्ती को सौंप दी थीं। सरकार के किसी अधिकारी की मौजूदगी में इस कमरे को खोला जाएगा। माना जा रहा है कि शिरडी के फकीर के अवतार सत्य साईं बाबा के इस निजी आवास में उनके कपड़े साधना के सामान के अलावा और कुछ भी नहीं मिलेगा।

आतंकवादियों को भी फोन की सुविधा

देश की सुप्रसिद्ध तिहाड़ जेल प्रशासन ने अपराधियों और आतंकवादियों पर दरियादिली दिखाना आरंभ कर दिया है। तिहाड़ में बंद आतंकवादी अब अपने परिजनों से फोन पर बातचीत कर सकेंगे। कैदियों को लेण्ड लाईन के साथ ही साथ पोस्ट पेड मोबाईल नंबर पर बात करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कैदियों को जेल में आने के साथ ही दो पोस्ट पेड मोबाईल नंबर देने होंगे जिन नंबर्स की जांच जेल प्रशासन द्वारा करवाई जाएगी, फिर कैदियों को बातचीत की इजाजत दी जाएगी। जेल प्रशासन इतना मेहरबान हो गया है कि उसने आतंकवादियों के साथ ही साथ मकोका, अन्य जघन्य अपराध और देशद्रोह के मुजरिम और मुलजिम को बातचीत की सुविधा मुहैया करा दी है। कैदियों से लोकल काल के लिए एक सौ रूपए तो एसटीडी के लिए दो सौ रूपए लिए जाएंगे। कैदी सप्ताह में दो बार पांच पांच मिनिट चर्चा कर पाएंगे। यह तो रही सरकारी बात किन्तु जेल प्रशासन की इस पहल से जेल कर्मियों की बांछे खिल गईं हैं। माना जा रहा है कि चढ़ावा लेकर जेल कर्मियों द्वारा आतंकवादियों और जरायमपेशा अपराधियों के अनेक मार्ग प्रशस्त करवाए जा सकते हैं।

ममता ने छुड़ाया पुलिस का पसीना

पश्चिम बंगाल की कमान संभालने वाली ममता बनर्जी बनर्जी ने अब पश्चिम बंगाल पुलिस की नाक में दम कर रखा है। ममता को सुरक्षा मुहैया करवाने में कोलकता पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ममता के अचानक होने वाले दौरों से पुलिस बुरी तरह पस्त हो चुकी है। ममता ने बुलट पू्रफ कार की सवारी से इंकार कर दिया है, इससे पुलिस के हाथ पांव फूल गए हैं। ममता ने कड़े निर्देश दिए हैं कि यातायात के मामले में उन्हें वरीयता न दी जाए। वे रेड लाईट पर रूककर आम नागरिक की तरह ही यात्रा करेंगी। ममता की इस सादगी के चलते पुलिस की वाटलगी हुई है। ममता ने कहा है कि उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यक्ता नहीं है।

कौन भोगेगा टेलीफोन का भोगमान

समूचा जीवन भारतीय जनता पार्टी के लिए न्योछावर करने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सांसद रहते हुए टेलीफोन का देयक अब उनके उत्तराधिकारियों को ही भरना होगा। आर्बीट्रेटर के आदेश के खिलाफ न्यायालय में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आब्रीट्रेटर के आदेश को सही माना है। बतौर सांसद विजया राजे सिंधिया का टेलीफोन बिल छः लाख 71 हजार 333 रूपए था। बार बार राशि जमा करने के आग्रह पर भी बिल जमा नहीं हुआ। समायोजन के उपरांत यह राशि छः लाख 55 हजार 215 रूपए बची। उनके निधन के उपरांत बीएसएनएल ने यह राशि उनके उत्तराधिकारियों से वसूलने नोटिस जारी किया है। उनकी पुत्री यशोधरा एमपी से सांसद, वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और तीसरी पुत्री उषा राजे हैं। यक्ष प्रश्न तो यह खड़ा हो रहा है कि आखिर भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा शनैः शनैः राशि बढ़ने पर टेलीफोन कनेक्शन काटा क्यों नहीं? अगर यही आम आदमी का कनेक्शन होता तब. . .!

यूपी: गुणा गणित में लगीं पार्टियां

उत्तर प्रदेश के महाकुंभ में अपनी अपनी नैया पार लगवाने की गरज से सभी सियासी दलों ने अपने अपने सहयोगियों के साथ माहौल भांपना आरंभ कर दिया है। कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच भी सीटों के बटवारे पर चर्चा जोर पकड़ने लगी है। अजीत सिंह ने इसके लिए भारी भरकम सूची कांग्रेस को सौंपी है तो कांग्रेस ने उस पर कैंची चलाना आरंभ कर दिया है। रालोद ने कांग्रेस को साफ कर दिया है कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीट चाह रही है तो बाकी प्रदेश में वह अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवाएगी। लगे हाथ अजीत सिंह ने कांग्रेस से केंद्र में एक केबनेट और एक राज्य मंत्री का पद भी मांग लिया है। उधर छोटे क्षेत्रीय दलों ने भी इसके लिए अपने अपने स्तर पर सर्वे आरंभ करवा दिया है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा किसके साथ गठबंधन कर मैदान में उतरते हैं और सत्ताधारी बसपा की अगली रणनीति क्या रहती है?

पुच्छल तारा

स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव की टीआरपी में पिछले दिनों काफी ज्यादा उतार चढ़ाव दर्ज किया गया। बाबा और अण्णा हजारे के बीच लोकप्रियता की जंग भले ही न छिड़ी हो पर उनके समर्थक दोनों ही की टीआरपी टटोलते नजर आते हैं। बाबा रामदेव के योग करने पर रोहणी निवासी श्वेता शर्मा ने ईमेल भेजा है। श्वेता लिखती हैं कि बाबा रामदेव का दावा है कि योग से कैंसर ठीक हो सकता है, वे सतत योग करते हैं इसलिए उनकी किड़नी, दिल, लीवर वगैरा को कोई हानि नहीं होने वाली। एक सप्ताह के अनशन पर ही बाबा ढीले पड़ गए। बाबा का ब्लड प्रेशर बिगड़ गया, लीवर डैमेज हो गया। रामकिशन यादव उर्फ बाबा रामदेव यह भूल गए कि इसी योग के तप के बल पर आदि अनादिकाल से ऋषि मुनियों ने निराहार रहकर महीनों तप किया, पर उनकी सेहत कभी नहीं बिगड़ी। मतलब साफ है कि बाबा रामदेव द्वारा योग की गलत व्याख्या कर इसे भुनाने का कुत्सित प्रयास किया गया।

रविवार, 12 जून 2011

बीज विधेयक पर केंद्र एमपी में तकरार


बीज विधेयक पर केंद्र एमपी में तकरार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश में बार बार गरजने वाले निजाम शिवराज सिंह चौहान जब केंद्रीय मंत्रियों से मिलते हैं तो उनकी हुंकार का एजेंडा ही गायब हो जाता है। मध्य प्रदेश में रहकर बीज विधेयक का विरोध करने वाले शिवराज दिल्ली जाते ही इसे भूल जाते हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार बीज विधेयक 2010 लाने की तैयारी कर रही है, जिससे अमानक बीज और किसानों की क्षति को रोका जा सकेगा। यह ड्रफ्ट विधेयक राज्य सभा में पेश हो चुका है। उधर शिवराज सिंह चौहान इस मामले में साफ तौर पर कह रहे हैं कि कृषि राज्य का मसला है, केंद्र को इसमें हस्ताक्षेप नहीं करना चाहिए। मध्य प्रदेश में बार बार शिवराज सिंह चौहान केंद्र के इस कदम का विरोध कर चुके हैं।

शिवराज सिंह चौहान हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री से दिल्ली आकर मिले, तब भी उन्होंने इस बीज विधेयक पर अपना विरोध दर्ज नहीं कराया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हितों को सियासत का मुद्दा बना लिया है।

ग्रहों की चाल में फंसते बाबा रामदेव


ग्रहों की चाल में फंसते बाबा रामदेव

(चन्द्रशेखर जोशी)

देहरादून। बाबा रामदेव के दिल्ली पहुंचने पर भारत सरकार का स्वागत सत्कार देखकर कहा गया था कि ऐसा तो अमेरिका के राष्ट्रपति का सम्मान भी नहीं हुआ था। इसके बाद ४ जून को रामलीला मैदान में बाबा रामदेव को डॉ सुमन आचार्य ने महिलाओं के वस्त्र दिये जिसे पहनकर वह भागे। इसके बाद हरिद्वार में बाबा रामदेव ने रूआंसे होते हुए मीडिया से अपना दुखडा रोया। इसके बाद बाबा रामदेव अनशन पर बैठे तथा मौन व्रत पर चले गए तथा कहा गया कि अब वो किसी से कोई बात नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि जबतक उनकी मांगे नहीं मानी जायेगी वो किसी से बात नहीं करेंगे। बाबा रामदेव रोज कोई न कोई विवादास्पद बयान दे रहे हैं जिससे वह विवादित होते जा रहे हैं और जनता को भी उनका उग्रपन अब भा नहीं रहा है। उनसे वह शांत रहने की अपेक्षा कर रही है परन्तु ग्रह उन्हें शांत नहीं बैठने दे रहे हैं।
तो आपने देखा कि किस तरह स्थितियां किस कदर बदलती रही। यह सब ग्रहों की चाल थी जिसमें बाबा रामदेव कठपुतली की तरह चलते गये। ग्रहों की चाल के एक अच्छे जानकार ने नाम न छापने की शर्त पर बाबा रामदेव की ग्रहों की चाल के बारे में सम्पादक चन्द्रशेखर जोशी को बताते हुए कहा कि रामदेव जी का मंगल नीचे गिर रहा है, यानि मंगल नीच हो रहा है, शुक्र नेगेटिव जा रहा है, बुद्व नचे की ओर जा रहा है। ग्रहों की चाल के कारण उन्हें गेरूएं वस्त्र धारण करने वाले को औरतों के कपडे पहन कर भागना पडा। ग्रह उन्हें पुरूषत्व से स्त्रीत्व की ओर ले गये। अगर औरतों के कपडों की जगह सफेद धोती पहन लेते तो ज्यादा उचित होता, परन्तु ग्रहों ने उन्हें गृहस्थ के कपडे पहना दिये, यानि जो काम उन्होंने जिंदगी में कभी नहीं किया होगा वह करवा दिया। जिससे वह उपाहास का पात्र बने, अपमानित हुए।
बाबा रामदेव का सूर्य तेज है, जिससे दिल्ली में या कहीं भी वह लोगों की भीड इकटठी कर लेते हैं परन्तु चन्द्रमा की शीतलता नहीं है। इस समय बाबा रामदेव के ग्रह तेजी से अपनी चाल चल रहे हैं, उनका शनि ग्रह उनके लिए कष्टप्रद योग बना रहा है, जिसमें जेल तक की यात्रा के योग बनते हैं परन्तु शनि ग्रह तंत्र-मंत्र की साधना से साधे जाते हैं,, साधना उनको कष्टप्रद योग से बचाएंगी।
बाबा रामदेव का बुद्व नियंत्रण में नहीं है, जिससे उनके मुंह से कुछ भी निकलने वाला बयान बबाल मचा दे रहा है। सेना बनाने का मामला हो या सम्पत्ति घोषित करने का, वह विवाद में ला देता है। बुद्व नीच होने से संकट में फंसा सकता है, इसमें राष्ट्रद्रोह तक के संयोग बन जाते हैं। सेना बनाने के मामले में गृहमंत्री ने कुछ इसी तरह के संकेत भी दिये थे। वहीं बाबा रामदेव का वृहस्पति ठीक है लेकिन गुरू चंडाल योग अच्छे योग को बिगाड रहा है।

पीएम के त्यागपत्र पर बाबा की रहस्यमय चुप्पी!


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

पीएम के त्यागपत्र पर बाबा की रहस्यमय चुप्पी!

भ्रष्टाचार और काले धन पर इक्कीसवीं सदी के योग गुरू राम किशन यादव उर्फ बाबा रामदेव की चिंघाड़ से केंद्र सरकार सकते में है। बाबा रामदेव के अनशन को विफल करने सरकार ने क्या क्या जतन नहीं किए। प्रणब मुखर्जी और कपिल सिब्बल ने बाबा को रोकने जमीन आसमान एक कर दिया। कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के जहर बुझे तीर भी बाबा के आवेग को नहीं रोक सके। फिजा में खबर फैल गई कि अन्ना हजारे के मानिंद कांग्रेस के प्रबंधकों ने बाबा रामदेव को भी मैनेज करने के लिए तरह तरह के स्वांग रचे। बाबा रामदेव से कई दौर की बातचीत भी हुई। मीडिया से चर्चा में बाबा ने सदा ही कहा कि बातचीत सकारात्मक रही, पर बातचीत का मसौदा बताने से वे सदा ही हिचके। 4 और 5 जून की दर्मयानी रात में बाबा रामदेव काफी व्यथित, घबराए दिखे। कारण साफ था, कांग्रेस ने बाबा की कोई कमजोर नस दबा दी थी। बाद में बाबा ने स्त्री का वेश धारण कर वहां से गमन करना चाहा पर सफल नहीं हो पाए। पुलिस गिरफ्त में आने के बाद बाबा ने अपने गेरूए वस्त्र अचानक ही त्याग दिए, फिर वे दिखाई दिए तो सफेद कुर्ते पायजामे में। राजनैतिक वीथिकाओं में बाबा रामदेव के श्वेत धवल वस्त्रों का राज और मायने खोजे जा रहे हैं, क्यांेकि बाबा संघर्ष के दिनों में सफेद धोती कुर्ता पहना करते थे। बहरहाल इतना सब होने के बाद भी प्रधानमंत्री डाॅ.मनमोहन सिंह के त्यागपत्र पर बाबा रामदेव की चुप्पी के अनेक मतलब लगाए जा रहे हैं।

अण्णा ने सोनिया को दिखाए दांत

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता को एक जुट करने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे ने देश के वजीरे आजम डाॅक्टर मनमोहन सिंह को अण्णा हजारे ने स्वच्छ छवि वाला अच्छा इंसान बताया है। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी का नाम लिए बिना अन्ना बहुत कुछ बोल गए। बकोल अण्णा समस्या रिमोट कंट्रोल में है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में वे लोग मुसीबत पैदा कर रहे हैं जिनके हाथ में मनमोहन का रिमोट कंट्रोल है। कम समय में अण्णा हजारे राजनीति का मर्म समझ गए और फिर उन्होंने असली जड़ को भी पहचान लिया। सोनिया गांधी भले ही अपने आप को त्यागी और बलिदानी बताकर देश विदेश की तमाम पत्र पत्रिकाओं के कव्हर पेज पर स्थान पा जाएं किन्तु देश की राजनीति का रिमोट अपने हाथ में वे ही रखती हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। एक पत्रिका ने तो सोनिया पर आरोप जड़ा है कि वे सोवियत संघ के रास्ते कुछ माल को इधर से उधर भी कर रही हैं।

सिब्बल बने कांग्रेस के नए संकटमोचक

कांग्रेस में वर्तमान संकटमोचक अर्थात ट्रबल शूटर की भूमिका में मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ही नजर आ रहे हैं। जब भी कांग्रेसनीत संप्रग सरकार पर कोई संकट आ रहा है सिब्बल तारण हार की भूमिका में सामने दिख जाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने अण्णा हजारे के बाद बाबा रामदेव को अनशन न करने के लिए मनाने के लिए भी कपिल सिब्बल को ही पाबंद किया गया था। कपिल सिब्बल की फितरत से वाकिफ लोगों का कहना है कि वे बहुत ही घाघ और मंझे राजनेता है। बाबा रामदेव की मांगों को मानने के साथ ही साथ बाबा का जो पत्र सिब्बल ने मीडिया के सामने बाबा के कथित तौर पर नेपाली मूल के विश्वस्त साथी आचार्य बाल कृष्ण के उस पत्र को भी दिखा दिया जिसमें अनशन आरंभ होने के पहले ही उन्होंने अनशन समाप्ति की घोषणा कर दी थी। इस बार सिब्बल का दांव उल्टा पड़ा और बाबा रामदेव के समर्थन में देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आ गया है।

जेल के कायदे सीख गए राजा

करोड़ों रूपयों के घोटाले के आरोपी पूर्व संचार मंत्री आदिमत्थू राजा पिछले कई दिनों से तिहाड़ जेल की रोटी खा रहे हैं। पहले जेल प्रशासन ने उनके नखरे सहे फिर आम कैदी की तरह ही व्यवहार करना आरंभ कर दिया। राजा के साथ के कैदी भी राजा के साथ उसी तरह का बर्ताव कर रहे हैं जैसा अन्य कैदियों के साथ करते हैं। जेल के अंदर ‘‘पैसा ही बोलता है‘‘ की बात राजा समझ चुके हैं। कैदियों को अपना मित्र बनाने के राजा ने घर से आने वाले खाने की तादाद में इजाफा करवा दिया है। शुरूआत में चिड़चिड़े और सदमा खाए ए.राजा अब खुश नजर आ रहे हैं। साथ के कैदियों को घर का खाना खिलाकर उनके साथ सुबह की सैर और शाम को खेलकूद कर अपना समय काट रहे हैं। 17 फरवरी को गिरफ्तार कर तिहाड़ पहुंचे राजा जेल के कायदे कानून पूरी तरह सीख चुके हैं। कैदियों को घर की इडली रसम खिलाकर वे सभी को प्रसन्न कर रहे हैं, और बदले में जेल के अंदर उन्हें उनके सेल के बाकी 14 कैदी उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।

इच्छा मृत्यु मांगी बिट्टा ने!

युवक कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.एस.बिट्टा अपनों से ही बेहद खफा हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले बिट्टा के इस काम को उनकी दुकानकी संज्ञा भी अनेकों बार दी जा चुकी है, पर बिट्टा इससे डिगे नहीं। हाल ही में उन्होंने कांगे्रसनीत कंेद्र सरकार से पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। बिट्टा का आरोप है कि सरकार जानती है कि वे आतंकवाद के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। बावजूद इसके सरकार ने उनकी सुरक्षा में लगे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड चार माह पहले हटा लिए हैं। बिट्टा को आशंका है कि राजनैतिक स्वार्थ के चलते आतंकियों के हाथांे उनकी हत्या की साजिश का ताना बाना बुना जा रहा है। अपनी ही सरकार से नाराज होकर किसी कांग्रेसी का यह कदम निश्चित तौर पर अन्य कांग्रेसियों के लिए क्या संदेश दे रहा है!

ममता की दरिया दिली

ममता बनर्जी ने रेल मंत्री रहते हुए जो काम किया है वह लोग हमेशा याद रखेंगे। ममता के रेल मंत्री रहते भारतीय रेल की चाल इस कदर बिगड़ी कि उसे पटरी पर आने में कम से कम एक दशक तो लग ही जाएगा। रेल मंत्रालय में एक बार फिर अफरशाही और बाबू राज कायम हो गया है। ठेकेदारों की पौ बारह हैं। ऋषिकेश से जम्मू चलने वाली रेल जैसी अनेक रेल गाडियां हैं जिनमें रसोई यान नहीं है पर अवैध वेन्डर्स पेंट्री वालों की यूनिफार्म में लोगों को ठग रहे हैं। ममता का सपना बंगाल में रायटर बिल्डिंग पर कब्जे का था जो पूरा हो गया। भारतीय रेल भाड़ में जाती है तो जाती रहे। कांग्रेस को भी सत्ता की मलाई चखनी थी सो चख ली। पर ममता को मानना ही पड़ेगा। सीएम बनने के बाद रायटर बिल्डिंग का उन्होनंे अपने मन मुताबिक इंटीरियर करवाया। इस इंटीरियर मंे खर्च हुए दो लाख रूपए का बिल उन्होंने मुख्य सचिव समर घोष को चेक से चुका दिया है। ममता का कहना है कि जहां उन्हें दस से बारह घंटे बैठना हो वह जगह उनके मन के मुताबिक होना चाहिए, इसके लिए वे सरकार पर वित्तीय बोझ डालने के पक्ष में नहीं हैं।

यह है हृदय प्रदेश की सुरक्षा का हाल सखे

देश के हृदय प्रदेश में शिव का राज है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार किस तरह काम कर रही है, इस बात का प्रमाण अनेक घटनाओं से मिल रहा है। मध्य प्रदेश में कानून और व्यवस्था नाम की चीज बची नहीं दिख रही है। हाल ही में केद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया के इंदौर स्थित आवास पर हुई चोरी से दिल्ली में सियासत गर्मा रही है। कहा जा रहा है कि एमपी कांग्रेस के निजाम सदा से ही भाजपा के पे रोलपर काम करते आए हैं, यही कारण है कि 2003 के बाद प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार तेजी से गिरा ही है। अनेक मुद्दे हाथ लगने के बाद भी कांग्रेस उन्हें नहीं भुना पाई। हाल ही में निजाम बदला और उसके आवास पर चोरी हो गई। चोर आए बाकायदा घर में रखी बियर पी, काजू खाए और चोरी कर हो गए फरार। भूरिया इस मामले में खामोशी ओढ़े हैं। सियासी हल्कों में कहा जाने लगा है कि लगता है भूरिया भी भाजपा से मैनेज ही हो गए हैं।

बेवड़ों की आयु निर्धारण पर बिग बी को आपत्ति!

महाराष्ट्र सरकार द्वारा शराब का सेवन करने वालों की न्यूनतम आयु 25 बरस करने पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन हैरान हैं। अमिताभ का कहना है कि 21 साल में आप वोट डाल सकते हैं, सेना में नौकरी पाकर देश की सेवा कर सकते हैं, पर शराब के सेवन के लिए आप अभी बच्चे हैं तो कीजिए 25 बरस तक इंतजार। सालों पहले शराब और सिगरेट से तौबा करने वाले अमिताभ बच्चन ने फिल्म शराबी में जो अभिनय किया था उसकी तारीफ आज भी लोग मुक्त कंठ से ही किया करते हैं। इतना ही नहीं अमिताभ के जनक हरिवंश राय बच्चन जिन्होंने मदिरा को हाथ नहीं लगाया उनकी लिखी मधुशाला आज भी प्रासंगिक हैं। प्रश्न तो यह है कि अगर महाराष्ट्र की सरकार चाह रही है कि लोग शराब जैसी सामाजिक बुराई से कम से कम 25 बरस की उमर तक दूर रहें तो इसमें भला किसी को क्या आपत्ति होना चाहिए! बिग बी को तो चाहिए था कि वे इस उमर को 25 के बजाए 35 करने की वकालत करते।

अरबपति मंत्री के राजसी ठाठबाट

देश में जनसेवक कौन है, वो जो अपनी शानो शौकत दिखाने के लिए समाज में स्थान पाने लाल बत्ती चमकाए या वो जो वाकई जरूरत मंद लोगों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करे! आजादी के वक्त जरूर जनसेवक इस तरह के काम किया करते थे, अब हालात बदल गए हैं। आज के जनसेवक करोड़पति हैं और जनसेवा के माध्यम से वे ज्यादा से ज्यादा पैसा जुगाड़ने में लगे हुए हैं। भाजपा की कर्नाटक में किरकिरी करवाने वाले रेड्डी बंधुओं के ठाठ बाट देखते ही बन रहे हैं। पहले राजा महाराजाओं के लिए यह कहा जाता था कि वे सोने के सिंहासन पर बैठा करते थे, और सोने चांदी के बर्तनों में खाना खाते थे। 153 करोड़ 49 लाख रूपए की संपत्ति वाले सूबे के पर्यटन मंत्री जी.जनार्दन रेड्डी सवा दो करोड़ रूपए मूल्य की सोने की कुर्सी पर बैठते हैं और उनके घर की कटलरी भी सोने चांदी की ही है। रेड्डी को 31 करोड़ 54 लाख रूपए सालाना पगार भी मिलती है अपने व्यापार से। अब बताईए क्या इस तरह के जनसेवकों से कुछ जनसेवा की उम्मीद की जाए।

आतंकी शरणगाह बना शांति का टापू

मध्य प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश में आतंकवादियों की आवाजाही को देखकर लगने लगा है कि आतंकवादियों ने इस सूबे को अपना आरामगाह बना लिया है। मध्य प्रदेश में मालवा, निमाड़ और महाकौशल में आतंकवादियों और कट्टरपंथियों ने अपना शरणगाह बना लिया है। मालवा के प्रमुख शहर रतलाम में सिमी के गुर्गों और एटीएस के बीच हुई मुटभेड़ में एक कांस्टेबल शहीद हो गया। दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय में इसके बाद भी हलचल न दिखाई देना आश्चर्य का ही विषय माना जा सकता है। इसके पहले एमपी के ही जिला मुख्यालय सिवनी के रिहाईशी इलाके में में बारूद से डेटोनेटर बनाते एक अधेड़ के परखच्चे उड़ गए थे, इसके बाद भी खुफिया एजंेसियों की नींद नहीं टूटी। मालवा और निमाड़ में अफीम की तस्करी से मिलने वाली रकम इनके बड़े काम आती है।

हाई सिक्यूरिटी जोन में हत्या

दिल्ली के जनपथ को हाई सिक्योरिटी जोन माना जाता है। जनपथ पर पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल के सरकारी आवास के पीछे तीन युवकों ने अपने साथी को बेरहमी के साथ पीट पीट कर मार डाला। दिल्ली पुलिस आपके लिए, सदैव का नारा अब फीका सा पड़ता दिख रहा है। दिल्ली में जब पुलिस की नाक के नीचे ही इस तरह की वारदात हो रही हो तो फिर बाकी अंचलों की कौन कहे। वैसे भी सांसदों के सरकारी आवास के बारे मंे आम धारणा यही है कि साठ फीसदी सांसद कभी कभार ही दिल्ली आते हैं, इसलिए उनके केयर टेकर नौकरों द्वारा उनके आवास और आवास के साथ बने सर्वेंट क्वार्टर को तीन से चार हजार रूपए महीने में ही किराए से दे दिया जाता है। दिल्ली में किराएदारों का पुलिस वेरीफिकेशन करवाने की बात कागजों पर बार बार हो जाती है, किन्तु हकीकत में एसा कुछ होता नहीं दिखता।

ममता की राह पर मुकुल

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की दूसरी पारी में देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही माना जाएगा कि देश का रेल मंत्रालय पश्चिम बंगाल से ही चल रहा है। पहले ममता बनर्जी ने रायटर बिल्डिंग पर कब्जा जमाने के लिए बंगाल से ही रेल मंत्रालय चलाया, और फिर काबिज हो ही गईं बंगाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर। इसके बाद अब राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार मुकुल राय भी ममता बनर्जी की राह पर ही चलते हुए बंगाल से ही रेल मंत्रालय चला रहे हैं। मुकुल राय पर आरोप है कि उनके पास मंत्रालय जाने के लिए समय नहीं है, पर वे पश्चिम बंगाल को लेकर बहुत ही ज्यादा सजग नजर आते हैं। रेल मंत्री बनते ही मुकुल राय ने बंगाल की रेल परियोजनाओं की जानकारी मांगी है। रेल मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मुकुल राय ने साफ इशारा कर दिया है कि ममता बनर्जी की प्राथमिकताओं को पहले पूरा किया जाए फिर किसी अन्य काम को हाथ लगाया जाए।

पुच्छल तारा

बाजार में हाथ की रेखाओं, अंक ज्योतिष और कुंडली आदि देखकर भविष्य बताने की न जाने कितनी दुकाने खुल गईं हैं। समाचार चेनल्स ने भी भगवा वस्त्र पहने तिलक धारियों को बिठाकर अपनी दुकाने चमकाना आरंभ कर दिया है। मनुष्य को कर्म पर विश्वास करना चाहिए न कि राशियों पर। इस बात को लिखा है भोपाल मध्य प्रदेश से संदीप गुप्ता ने। संदीप लिखते हैं कि कर्म से बड़ी चीज कोई नहीं होती। राम और रावण, कृष्ण और कंस, गांधी और गोडसे, ओबामा और ओसामा के अलावा न जाने कितने उदहारण हैं जिनमें राशियां एक सी हैं, पर कर्म! कर्म एकदम अलग अलग सो विश्वास करे सिर्फ कर्म पर गांधी बनने की कोशिश करें गोडसे बनने की नहीं।

शनिवार, 11 जून 2011

इस हफ्ते आड़वाणी और नाथ का बालाघाट दौरा


इस हफ्ते आड़वाणी और नाथ का बालाघाट दौरा

कान्हा भी जाएंगे आड़वाणी

भूरिया संग कमल नाथ 13 तो आड़वाणी 16 को रहेंगे एमपी में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के दो मंत्री और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पीएम इन वेटिंग आने वाले सप्ताह में मध्य प्रदेश प्रवास पर रहेंगे। लाल कृष्ण आड़वाणी 16 जून से दो दिवसीय प्रवास पर कान्हा आ रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और कांतिलाल भूरिया 13 जून को बालाघाट प्रवास पर रहेंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एमपीसीसी चीफ भूरिया के साथ कमल नाथ विशेष विमान से दिल्ली से रवाना होकर छिंदवाड़ा पहुंचेंगे जहां से वे हेलीकाप्टर के द्वारा बालाघाट जाएंगे। बालाघाट के कटंगी में कटंगी तिरोड़ी ब्राडगेज का भूमि पूजन करने के उपरांत मंत्री द्वय वहां से जबलपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। जबलपुर से विशेष विमान से वे दिल्ली लौट जाएंगे।

उधर पूर्व उप प्रधानमंत्री एल.के.आड़वाणी का भी बालाघाट और मण्डला प्रवास होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। आड़वाणी को 16 जून को बालाघाट के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने का न्योता मिला है। यद्यपि आड़वाणी की ओर से इसकी सहमति नहीं दी गई है, तथापि उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे 16 और 17 जून को मण्डला जिले के कान्हा नेशनल पार्क का भ्रमण कर सकते हैं। उधर कान्हा नेशनल पार्क के आधिकारिक सूत्र इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि उन्हें आड़वाणी के नाम का तो पता नहीं किन्तु किसी अतिविशिष्ट हस्ती के आने के संकेत दिए गए हैं, जिसके चलते विभाग पूरी मुस्तैदी से अपने काम में जुट गया है।

शिव की बाबा गिरी से भाजपाई खफा


शिव की बाबा गिरी से भाजपाई खफा

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा बार बार बाबा रामदेव को तरजीह देने से भाजपा में दूसरी पंक्ति के नेताओं की भवें तनती प्रतीत हो रही हैं। रामलीला मैदान से बाबा रामदेव को खदेड़ने के बाद शिवराज सिंह चैहान ने बयान दिया था कि बाबा चाहें तो एमपी में आकर अनशन कर सकते हैं।

हाल ही में बाबा रामदेव को एक बार फिर महिमा मण्डित करने के लिए शिवराज सरकार ने बाबा रामदेव को शहीद चंद्रशेखर आजाद पुरूस्कार से नवाजने का मन बनाया है। 28 अप्रेल 2006 को प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित इस पुरूस्कार में नियम कायदों से छेड़छाड़ कर दी गई है। बाबा रामदेव की मध्य प्रदेश यात्रा के दौरान भी बैतूल जिले में शिवराज ने बाबा रामदेव का भरपूर साथ दिया था।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि बाबा रामदेव से सबसे अधिक खतरा कांग्रेस के बजाए भाजपा को है, इसका कारण यह है कि अगर बाबा रामदेव चुनावी समर में कूदे तो हिन्दू वोटों का ही बटवारा होना है, जिससे भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में ही सेंध लगेगी। उधर कांग्रेस भी बाबा के आरोपों से बुरी तरह तिलमिलाई है। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मिलकर बाबा को साईड लाईन करने का जतन कर रही है, इन परिस्थितियों में चैहान द्वारा बाबा को ज्यादा वजन देने से भाजपा में शिवराज के खिलाफ माहौल बनना आरंभ हो गया है।

280 लाख करोड़ का सवाल है ...














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