रविवार, 30 अक्टूबर 2011

घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी


घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी

थापर ग्रुप के पावर प्लांट डलने के मार्ग प्रशस्त

जनसेवकों का मौन सन्दिग्ध

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश की ख्यातिलब्ध थापर ग्रुप ऑफ कम्पनी समूह के एक प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील को झुलसाने की तैयारी पूरी कर ली है। वर्ष 2009 में 22 अगसत को बिना किसी मुनादी के गुपचुप तरीके से घंसौर में सम्पन्न हुई जनसुनवाई के बाद अब इसकी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गईं हैं। अब मामला केन्द्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय के पाले में आ चुका है।

गौरतलब है कि झाबुआ पावर प्लांट कंपनी द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर सिवनी जिले की घंसौर तहसील के बरेला ग्राम में 1200 मेगावाट का एक पावर प्लांट लगाया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में यहां 600 मेगावाट की इकाई प्रस्तावित है। कोयला मन्त्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस कंपनी को अभी कोल लिंकेज प्रदान नहीं किया गया है।

केन्द्रीय उर्जा मन्त्रालय के भरोसेमन्द सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना के लिए 3.20 एमटीपीए से अधिक के ईंधन की आवश्यक्ता होगी एवं इस संयन्त्र में पानी की आपूर्ति रानी अवन्ति बाई सागर परियोजना जबलपुर, (बरगी बांध) के सिवनी जिले के भराव वाले इलाके गडघाट और पायली के समीप से किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रतिघंटा 3262 मीट्रिक टन पानी पी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस संयन्त्र का बायलर पूरी तरह कोयले पर ही आधारित होगा। इसके लिए कोयले की आपूर्ति साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के अनूपपुर, शहडोल स्थित खदान से की जाएगी।

कंपनी के सूत्रों का कहना है कि थापर ग्रुप की इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए 360 एकड गैर कृषि एवं मात्र 20 एकड कृषि भूमि का क्रय किया गया है। सरकार से 220 एकड भूमि भी लिया जाना बताया जाता है। कहते हैं कि जिन ग्रामीणों की भूमि खरीदी गई है उन्हें भी मुंह देखकर ही पैसे दिए गए हैं। कहीं कंपनी को जमीन अमोल मिल गई है तो कहीं अनमोल कीमत देकर। कंपनी के सूत्रों ने आगे बताया कि कंपनी ने जिन परिवारों की भूमि अधिग्रहित की है, उन परिवारों के एक एक सदस्य को नौकरी दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है। वहीं चर्चा यह है कि स्थानीय लोगों को या जमीन अधिग्रहित परिवार वालों को अनस्किल्ड लेबर के तौर पर नौकरी दे दी जाएगी, और शेष बचे स्थानों पर बाहरी लोगों को लाकर संयत्र को आरम्भ कर दिया जाएगा।

इस समूचे मामले में सिवनी जिले के जनसेवकों की चुप्पी आश्चर्यजनक है। इस संयन्त्र की चिमनी लगभग एक हजार फिट उंची होगी, जिसके अन्दर कोयला जलेगा। यहां उल्लेखनीय होगा कि संयन्त्र से निकलने वाली उर्जा और कोयले की तपन को सह पाना आसपास के ग्रामीणों और जंगल में लगे पेड पौधों के बस की बात नहीं होगी। इसके लिए न तो मध्य प्रदेश सरकार को ही ठीक ठाक मुआवजा मिलने की खबर है, और न ही आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के निवासियों के हाथ ही कुछ राहत लग पा रही है। कहा जा रहा है कि झाबुआ पावर लिमिटेड कंपनी द्वारा जनसेवकों को शान्त रहने के लिए उनके मंह पर भारी भरकम बोझ रख दिया है, ताकि घंसौर को झुलसाने के उनके मार्ग प्रशस्त हो सकें।

अपने मन के मंत्री भी नहीं बना पाए मन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 13

अपने मन के मंत्री भी नहीं बना पाए मन

मजबूर और बेबस वजीरे आजम से छुटकारा चाह रही कांग्रेस

भस्मासुर की छवि बन चुकी है मनमोहन सिंह की

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। सबसे अधिक समय तक नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) से इतर वजीरे आजम की कुर्सी संभालने वाले कमजोर, लाचार और बेबस प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की छवि कांग्रेस के अंदर भस्मासुर की बन चुकी है। कांग्रेसी अपने आप को जीवित रखने के लिए अब मनमोहन सिंह का मन से छुटकारा चाह रहे हैं। प्रधानमंत्री ने दांव चलते हुए अपने आप को कमजोर और बेबस साबित कर सब कुछ सोनिया गांधी के इशारों पर होने का संकेत देकर सभी को चौंका दिया है।

वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन ंिसह इस बात को भी प्रचारित करवा रहे हैं कि 2004 से अब तक वे अपने पसंद का कुनबा यानी मंत्रीमण्डल नहीं बनवा पाए हैं। वे जिसे भी मंत्री बनाना चाह रहे थे उसके लिए सोनिया ने हरी झंडी नहीं दी। रही बात घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार की तो वे खुद प्रधानमंत्री तो हैं पर उनकी चलती ही नहीं है इसलिए वे क्या कर सकते हैं। इशारों ही इशारों में मनमोहन सिंह ने ठीकरा श्रीमति सोनिया गांधी के सर फोड दिया।

जैसे ही घपले घोटालों की बात उजागर हुई प्रधानमंत्री ने अपना पल्ला झाड़कर संपादकों की टोली के सामने अपने आप को निरीह साबित कर दिया। फिर क्या था सभी की तोप का मंुह सोनिया की ओर घूम गया। जब यह बात सोनिया जुंडाली तक पहुंची वैसे ही सभी नहा धोकर मनमोहन की मुक्ति के मार्ग खोजने में जुट गए। कांग्रेस के अंदर मनमोहन की छवि भस्मासुर की बन चुकी है। कहा जा रहा है कि मनमोहन इस तरह तो कांग्रेस को समूल समाप्त कर ही दम लेंगे।

कांग्रेसी अब इस बात को प्रचारित करवा रहे हैं कि अगर मनमोहन बेबस, लाचार और कमजोर हैं तो फिर क्या वजह है कि वे प्रधानमंत्री की कुर्सी से चिपके हुए हैं। अपनी ईमानदार छवि के चलते उन्हें तो त्यागपत्र देकर राजनीति से किनारा कर लेना चाहिए था। वस्तुतः मनमोहन सिंह ने एसा किया नहीं। इससे साफ हो जाता है कि मनमोहन सिंह ईमानदार नहीं वरन् भ्रष्टचार के ईमानदार संरक्षक के तौर पर उभरकर सामने आए हैं।

(क्रमशः जारी)

रथ यात्रा से उत्साहित हैं लालू यादव


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 7

रथ यात्रा से उत्साहित हैं लालू यादव

नितिश कुमार का राजनैतिक अंत देख रहे हैं लालू यादव

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। तिरासी बसंत पार कर चुके एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा से तीन लोग प्रसन्न नजर आ रहे हैं। अव्वल तो उनकी पुत्री प्रतिभा दूसरे अनंत कुमार और तीसरे हैं लालू प्रसाद यादव। लालू इसलिए प्रसन्न हैं क्योंकि बिहार के निजाम नितीश कुमार द्वारा आड़वाणी की रथ यात्रा को झंडी दिखाने से अल्प संख्यक नितीश से नाता तोड़ सकते हैं।

बिहार की सत्ता से उखाड़ फेंके गए राजद सुप्रीमो लालू यादव का शनि 2009 से भारी चल रहा है। 2009 के चुनावों में उनकी पार्टी औंधे मुंह गिरी और वे केंद्र तथा बिहार दोनों ही जगह सत्ता की मलाई चखने से वंचित रह गए। सत्ता से बाहर रहने के कारण राजग में फंडिंग का अभाव हो रहा है और लालू यादव का कुनबा टूट टूट कर बिखर रहा है।

इन दिनों लालू प्रसाद यादव के चेहरे की लालिमा एक बार फिर बढ़ती दिख रही है। लालू यादव को विश्वास है कि नितीश कुमार द्वारा जब एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा को झंडी दिखाई गई उसके बाद से ही मुसलमीन (मुस्लिम समुदाय) नितीश कुमार से खफा हो गया है। अब मुस्लिम समुदाय के पास बिहार में लालू प्रसाद यादव से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। गौरतलब है कि 1990 में लालू प्रसाद यादव ने ही आड़वाणी की यात्रा को रोका और गिरफ्तार किया था, जिसके परिणामस्वरूप विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार धराशाई हुई थी।

(क्रमशः जारी)

5 रूपए की सिम में 15 का बैलेंस!


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  9

5 रूपए की सिम में 15 का बैलेंस!

टारगेट पूरा करने तरह तरह के हथकंडे अपना रहा आईडिया

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मोबाईल की दुनिया में धूम मचाने वाली आदित्य बिरला की आईडिया सेल्यूलर द्वारा अपने टीम मैनेजर्स को दिए गए भारी भरकम लक्ष्य को पूरा करने की गरज से आईडिया के टीम प्रबंधकों द्वारा देश भर में अपने उपभोक्ताओं को तरह तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि पांच रूपए में सिम खरीदने में पंद्रह रूपए का बेलेंस मिल रहा है। इसके लिए आईडिया की टीम द्वारा उपभोक्ताओं की निर्धारित औपचारिकताएं भी पूरी नहीं करवाई जाने की शिकायतें मिलीं हैं।

मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा बिना किसी औपचारिकता को पूरा किए ही पांच रूपए में सिम दिए जाने की खबरें मिल रहीं हैं। इस सिम में पंद्रह रूपए का बैलेंस भी मिल रहा है। मजे की बात तो यह है कि उपभोक्ता द्वारा जब औपचारिकताओं की फोटो कापी दी जाती है तो उपभोक्ताओं से एक के बजाए दो फोटो की मांग की जाती है।

इतना ही नहीं उपभोक्ता के कस्टमर आईडेंटीफिकेशन फार्म के जमा होते ही उसकी सिम चालू कर दी जाती है। भले ही उसके द्वारा दिया गया पते का प्रमाण पत्र या जन्म तिथि फर्जी हो। आईडिया में इतनी मुगलई मची हुई है कि उपभोक्ता को अगर शिकायत करना हो तो उसे कोई यह बताने को राजी नहीं होता है कि उसकी शिकायत कहां दर्ज की जाएगी।

(क्रमशः जारी)

शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

नारिलय में निकला फूल


घपलों घोटालों से आहत हैं राजमाता


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 12

घपलों घोटालों से आहत हैं राजमाता

भ्रष्टाचार से कांग्रेस की छवि तार तार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की दूसरी पारी में न केवल अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह वरन् कांग्रेस की छवि तार तार हो चुकी है। कांग्रेस की हाईकमान को अब चिंता इस बात की सता रही है कि आने वाले समय में कहीं देश भर में कांग्रेस का नामलेवा ही न बचे। इससे बचने के लिए सबसे अहम बात मनमोहन सिंह से छुटकारा पाना ही है, जिसके लिए रोड़मेप तैयार किया जा रहा है कि किस तरह मनमोहन से पिंड छुड़ाया जाए।

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि मनमोहन सिंह को बदलने से चंद दिनों में ही लोग भ्रष्टाचार घपले घोटालों को भूल जाएंगे। इसके अलावा मनमोहन को हटाने से जनता में यह संदेश भी चला जाएगा कि भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक मनमोहन सिंह को कांग्रेस ने हटा दिया है, इससे साफ है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की पोषक नहीं है।

कांग्रेस आलाकमान को चह चिंता खाए जा रही है कि 2जी स्पेक्ट्रम, इसरो के एस.बेण्ड, कामन वेल्थ, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर थॉमस की नियुक्ति प्रकरण, बीस हजार करोड़ का अनाज घोटाला, पेंतीस हजार करोड़ रूपए का सरकारी बैंकों के आवास ऋण का महाघोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला, हसन अली का प्रकरण, स्विस बैंक का काले धन का मामला आदि ने कांग्रेस की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है उससे उबरा कैसे जाए?

विपक्ष को लगे हाथ एक बेहतरीन मौका मिला है। कांग्रेस से पूरी तरह सेटविपक्ष ने इस मामले में अपनी धार बोथरी कर रखी है फिर भी बाबा रामदेव और अण्णा हजारे के कारण कांग्रेस को बुरी तरह नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दोनों ही के कारण विपक्ष को भी तल्ख तेवर अपनाने पड़े और भाजपा, वामदलों को मजबूरी में कांग्रेस और संप्रग सरकार को भ्रष्टचार की गंगोत्री की उपाधि भी देना पड़ा।

(क्रमशः जारी)

आखिर सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे आड़वाणी


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 6

आखिर सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे आड़वाणी

सरकार बनी तो पीएम नहीं तो बेटी को राजपाट सोंपने की तैयारी में आड़वाणी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और लौह पुरूष का अघोषित खिताब पाने वाले लाल कृष्ण आड़वाणी के मन में प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना अभी भी कुलाचें मार रही हैं। रथ यात्रा के बहाने समूचे देश की नब्ज टटोलने निकले आड़वाणी एक तीर से कई निशाने साध रहे हैं। अगर सरकार बनी तो वजीरे आजम का पद हथिया लेंगे और अगर औंधे मुंह गिरी भाजपा तब भी आड़वाणी के हाथों में लड्डू ही होगा। वे रथ यात्रा के बहाने अपनी पुत्री को राजनैतिक तौर पर स्थापित कर चुकेंगे।

भारतीय जनता पार्टी के अंदर ही अंदर एक बात खदबदा रही है कि आखिर उमर के इस पड़ाव में आड़वाणी सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं। भाजपा के अंदरखाते से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो आड़वाणी राजनीति के चतुर सुजान हैं और वे एक तीर से अनेक निशाने साधने में महारथ हासिल करते हैं।

आड़वाणी जुंडाली में चल रही चर्चाओं के अनुसार रथ यात्रा के उपरांत आड़वाणी इसका आंकलन करेंगे कि अगली बार भाजपा की सरकार बन पाएगी कि नहीं। अगर उन्हें यकीन हुआ कि सरकार राजग की बैसाखी पर खड़ी हो सकती है तो वे प्रधानमंत्री बनने की अपनी महात्वाकांक्षा को फिर दुहरा देंगे। यही कारण है कि आड़वाणी अपने राजनैतिक वनवास की आधिकारिक घोषणा करने से हिचक रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि अगर राजग की सरकार नहीं भी बनती है तो भी आड़वाणी अपनी पुत्री प्रतिभा को अपनी राजनैतिक विरासत सौंपकर प्रतिभा का राजतिलक कर देंगे। आड़वाणी के करीबी सूत्रों का कहना है कि आड़वाणी ने अभी यह तय नहीं किया है कि वे गुजरात के गांधी नगर की अपनी लोकसभा सीट पर 2014 में लोकसभा चुनाव खुद लड़ेंगे या फिर अपनी पुत्री को यह सीट सौंप देंगे।

(क्रमशः जारी)

कहां से दे रहा है अपने कारिंदो को आकर्षक वेतना आईडिया


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  8

कहां से दे रहा है अपने कारिंदो को आकर्षक वेतन आईडिया

सिम का गोरखधंधा मचा है आईडिया में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता बिरला सेल्युलर की आईडिया कंपनी अपने मुलाजिमों को आकर्षक वेतन भत्ते, कमीशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। महज पांच रूपए की सिम बेचकर यह कंपनी हजारों रूपए मासिक के हजारों कर्मचारी कैसे पाल रही है यह शोध का ही विषय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि लोगों की जेब में सीधा डाका डालकर आईडिया कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को पाला जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक आईडिया कंपनी द्वारा अपने कार्य क्षेत्र में विस्तार के लिए जिस दल का उपयोग किया जा रहा है। उस टीम के प्रबंधक याीन टीम मैनेजर को कंपनी द्वारा मोटी पगार, आकर्षक कमीशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इन टीम मैनेजर्स पर महज पांच रूपए की सिम बेचने के लिए निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी द्वारा इतना ज्यादा दबाव बनाया जाता है कि ये टीम मैनेजर्स अपने उपभोक्ताओं को मौखिक तौर पर न जाने कितने लुभावने वायदे कर देते हैं।

सेल्युलर बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार पांच पांच रूपए एकत्र करने के बाद आईडिया कंपनी आखिर अपने एक टीम मैनेजर को पेंतालीस से पचास हजार रूपए का वेतन और अन्य सुविधाएं कैसे मुहाया करवाई जा रही हैं। इसका तातपर्य यह हुआ कि एक माह में एक हजार सिम बेचने पर उस टीएम का वेतन निकलेगा। समूची टीम का वेतन अगर जोड़ लिया जाए तो हर माह लगभग दस हजार सिम बेचने पर यह निकलेगा। इतनी मात्रा में सिम बेचने के बाद बिकने वाली सिम से संचित धन कंपनी के खाते में जाएगा। आईडिया की उत्तरोत्तर प्रगति लोगों के लिए शोध का विषय ही बनी हुई है।

(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

यूपी में मुस्लिम कार्ड खेल सकती है कांग्रेस


यूपी में मुस्लिम कार्ड खेल सकती है कांग्रेस

राहुल इफेक्ट को उभार रही है कांग्रेस

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वाले सूबे उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की छवि को एक बार फिर उकेरने का प्रयास किया जा रहा है कांग्रेस द्वारा। इसके साथ ही साथ कांग्रेस द्वारा सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश में मुस्लिम कार्ड खेलने का मन बनाया जा रहा है।

पिछले दिनों केंद्रीय कानून और अल्प संख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस तरह के संकेत देते हुए कहा कि नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिमों को आरक्षण अनुदान देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। सलमान खुर्शीद ने इस बारे में इशारों ही इशारों में मुसलमानों के लिए आंध्र माडल की वकालत भी कर डाली।

उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने की गरज से कांग्रेस द्वारा हर संभव प्रयास करने के संकेत भी मिल रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल और केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कमर कस ली है।

कहा जा रहा है कि अगर इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन नहीं सुधारा तो आने वाले आम चुनावों में विपक्ष के हाथों में अनजाने में ही सोनिया और राहुल को घर संभालने की नसीहत का मुद्दा मिल सकता है। कांग्रेस विपक्ष को अवसर देने के पक्ष में कतई नहीं दिख रही है।

उधर कांग्रेस का सबसे प्यारा और ब्रम्हास्त्र नंबर दो राहुल गांधी (कांग्रेस के पास पहला ब्रम्हास्त्र प्रियंका वढ़ेरा है) की छवि को एक बार फिर उकेरने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि अभी राहुल इफेक्ट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राहुल ब्रांड को एक बार फिर चमकाने की जुगत में जुट चुके हैं कांग्रेस के रणनीतिकार।

ठाकुर लाबी को गोलबंद कर रहे हैं दिग्विजय सिंह


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 11

ठाकुर लाबी को गोलबंद कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

मन से मन नहीं बैठ पा रहा है दिग्गी राजा का

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह और कुंवर अर्जुन सिंह के उपरांत कांग्रेस की राजनीति के अघोषित चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। दिग्विजय सिंह के कदमों को देखकर लोग भले ही उन्हें भस्मासुर की संज्ञा दे रहे हों किन्तु मनमोहन को रास्ते से हटाने के लिए उनके कदमों को समझ रहे हैं अनेक रणनीतिकार।

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (श्रीमति सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के सूत्रों का कहना है कि दरअसल दिग्विजय सिंह द्वारा मनमोहन की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे हैं। विश्व के खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफनाने का विरोध कर दिग्गी राजा ने मनमोहन को संकट में डाल दिया था। साथ ही ओसामा को ओसामा जी कहकर उन्होंने जो चाल चली उससे मनमोहन सिंह को अमेरिका के सामने जवाब देना मुश्किल कर दिया।

इसके अलावा क्षत्रिय नेता राजा दिग्विजय सिंह द्वारा ठाकुर नेताओं को एक छत के नीचे लाने की चाल चली जा रही है। पूर्व सांसद विश्वजीत सिंह, एआईसीसी सचिव जितेंद्र सिंह, अमर सिंह जैसे नेताओं के माध्यम से दिग्विजय सिंह लाबिंग का प्रयास कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ठाकुर लाबी के दबाव में मनमोहन सिंह के तख्ता पलट की तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं।

(क्रमशः जारी)

बल्ले बल्ले हैं अनंत कुमार


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 5

बल्ले बल्ले हैं अनंत कुमार

येदियुरप्पा समर्थक फटक भी न पाएंगे रथ यात्रा में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अपनी पुत्री प्रतिभा को महिमा मण्डित करने के लिए हो रही एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा से अनंत कुमार काफी पुलकित नजर आ रहे हैं। अनंत कुमार के घुर विरोधी कर्नाटक के निर्वतमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके समर्थकों को रथ के आसपास न फटकने के पुख्ता इंतजाम भी कर दिए गए हैं।

इस रथ यात्रा में आड़वाणी की पुत्री प्रतिभा के साथ ही साथ रथ के सारथी अनंत कुमार भी पूरे देश में अपने आप को लगे हाथ स्थापित करने की जुगत में हैं। अनंत कुमार वैसे तो भाजपा में जाना पहचाना चेहरा है, पर फिर भी हालात देखकर एसा प्रतीत हो रहा है मानो वे खुद को स्थापित करना चाह रहे हैं।

गौरतलबह है कि आड़वाणी की रथ यात्रा 31 अक्टूबर को कर्नाटक में प्रवेश करने वाली है। अनंत कुमार के करीबी सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक भाजपा के चीफ ई.एस.ईश्वरप्पा ने अनंत कुमार से मंत्रणा कर यह तय कर लिया कि न तो येदियुरप्पा और न ही उनके लग्गू भग्गूओं को रथ के आसपास फटकने दिया जाएगा।

समस्या यह आ रही थी कि अगर मीडिया ने पूछा कि येदियुरप्पा के समर्थक नजर नहीं आ रहे हैं तब यह जवाब दे दिया जाएगा कि यह तो पार्टी की कोर कमेटी को तय करना है कि किसे रथ यात्रा में बुलाया जाए और किसे नहीं।

(क्रमशः जारी)

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  7

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में

आकर्षक लुभावने प्रलोभनों से घेरा जा रहा है उपभोक्ताओं को

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी आदित्य बिरला सेल्यूलर की आईडिया द्वारा उपभोक्ताओं को लुभाने तरह तरह के लुभावने आकर्षक प्रलोभनों का सहारा लिया जा रहा है। इसमें सबसे अधिक आपत्तिजनक तथ्य यह उभरकर सामने आ रहा है कि सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इन सिम की वेधानिक जांच के बिना ही कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं, जिससे असमाजिक तत्व और जरायमपेशा लोगों द्वारा इसके दुरूपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा कस्टमर आईडेंटीफिकेशन फार्म में औपचारिकताएं देखे बिना और पर्याप्त दस्तावेज के बिना ही कस्टमर की सिम एक्टीवेट कर दी जाती है। भले ही औपचारिकताओं के अभाव में दो तीन दिन के उपरांत सिम बंद हो जाए पर पहले तीन दिन तो सिम का भरपूर उपयोग उपभोक्ता द्वारा किया जा सकता है।

आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि आईडिया के आउट लेट्स में जब उपभोक्ताओं द्वारा अपने दस्तावेज की छाया प्रति जमा करवाई जाती है तो उनके दस्तावेज की और छाया प्रति कर उनके नाम से छद्म कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं। देश भर में आईडिया कंपनी की वेध सिम से ज्यादा अवैध सिम प्रचलन में होना बताया जा रहा है।

(क्रमशः जारी)

चित्रगुप्त जयंती


चित्रगुप्त जयंती


इसके अलावा कायस्थ समाज में इसी दिन अपने आराध्य देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। कायस्थ लोग स्वर्ग में धर्मराज का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त का पूजन सामूहिक रूप से तस्वीरों अथवा मूर्तियों के माध्यम से करते हैं। वे इस दिन कारोबारी बहीखातों की पूजा भी करते हैं। उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसी दिन 'गोधन' नामक पर्व मनाया जाता है जो भाईदूज की तरह होता है।


यमद्वितीया पर्व की मान्‍यता






पर्व की मान्यता

भारतीय में जितने भी पर्व त्यौहार होते हैं वे कहीं न कहीं लोकमान्यताओं एवं कथाओं से जुड़ी होती हैं। इस त्यौहार की भी एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार। यमी यमराज की बहन हैं जिनसे यमराज काफी प्रेम व स्नेह रखते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक बार जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा सत्कार की। बहन के सत्कार से यमराज काफी प्रसन्न हुए और उनसे कहा कि बोलो बहन क्या वरदान चाहिए। भाई के ऐसा कहने पर यमी बोली की जो प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे वह यमपुरी न जाए। यमी की मांग को सुनकर यमराज चिंतित हो गये। यमी भाई की मनोदशा को समझकर यमराज से बोली अगर आप इस वरदान को देने में सक्षम नहीं हैं तो यह वरदान दीजिए कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करे और मथुरा के विश्राम घट पर यमुना के जल में स्नान करे उस व्यक्ति को यमलोक नहीं जाना पड़े। इस पौराणिक कथा के अनुसार आज भी परम्परागत तौर पर भाई बहन के घर जाकर उनके हाथों से बनाया भोजन करते हैं ताकि उनकी आयु बढ़े और यमलोक नहीं जाना पड़े। भाई भी अपने प्रेम व स्नेह को प्रकट करते हुए बहन को आशीर्वाद देते है और उन्हें वस्त्र, आभूषण एवं अन्य उपहार देकर प्रसन्न करते हैं।


अथ चित्रगुप्‍त कथा


भाई दूज (भातृद्वितीया ) की मान्‍यता

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भाईदूज में हर बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं। भाई अपनी बहन को कुछ उपहार या दक्षिणा देता है। भाईदूज दिवाली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। इस त्योहार के पीछे एक किंवदंती यह है कि यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को इसी दिन दर्शन दिया था, जो बहुत समय से उससे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर में भाई यम के आगमन पर यमुना ने प्रफुल्लित मन से उसकी आवभगत की। यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी। इसी कारण इस दिन यमुना नदी में भाई-बहन के एक साथ स्नान करने का बड़ा महत्व है। इसके अलावा यमी ने अपने भाई से यह भी वचन लिया कि जिस प्रकार आज के दिन उसका भाई यम उसके घर आया है, हर भाई अपनी बहन के घर जाए। तभी से भाईदूज मनाने की प्रथा चली आ रही है। जिनकी बहनें दूर रहती हैं, वे भाई अपनी बहनों से मिलने भाईदूज पर अवश्य जाते हैं और उनसे टीका कराकर उपहार आदि देते हैं। बहनें पीढियों पर चावल के घोल से चौक बनाती हैं। इस चौक पर भाई को बैठा कर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

जुलानिया की दबंगई 05


नव दुनिया भोपाल फास्‍ट के प्रथम पेज पर सिवनी में किसान पुत्र

 शिवराज चौहान की सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव 

राधे श्‍याम जुलानिया द्वारा की गई दबंगई के फोटो प्रकाशित हुए हैं 

भाग 4

जुलानिया की दबंगई 04



नव दुनिया भोपाल फास्‍ट के प्रथम पेज पर सिवनी में किसान पुत्र शिवराज चौहान की सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधे श्‍याम जुलानिया द्वारा की गई दबंगई के फोटो प्रकाशित हुए हैं भाग 4

जलानिया की दबंगई 03



नव दुनिया भोपाल फास्‍ट के प्रथम पेज पर सिवनी में किसान पुत्र शिवराज चौहान की सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधे श्‍याम जुलानिया द्वारा की गई दबंगई के फोटो प्रकाशित हुए हैं भाग 3

जुलानिया की दबंगई 02



नव दुनिया भोपाल फास्‍ट के प्रथम पेज पर सिवनी में किसान पुत्र शिवराज चौहान की सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधे श्‍याम जुलानिया द्वारा की गई दबंगई के फोटो प्रकाशित हुए हैं भाग 2

जुलानिया की दबंगई 01

नव दुनिया भोपाल फास्‍ट के प्रथम पेज पर सिवनी में किसान पुत्र शिवराज चौहान की सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधे श्‍याम जुलानिया द्वारा की गई दबंगई के फोटो प्रकाशित हुए हैं भाग 1