सोमवार, 12 दिसंबर 2011

तपस्वियों की जन्मभूमि है महाकौशल प्रांत


0 महाकौशल प्रांत का सपना . . . 8

तपस्वियों की जन्मभूमि है महाकौशल प्रांत

महर्षि, ओशो, शंकराचार्य जैसी विभूतियों को जन्मा है महाकौशल ने



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारत गणराज्य का हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश वैसे तो कभी का आत्मनिर्भर हो चुका होता, किन्तु राजनैतिक इच्छा शक्ति के अभाव में आज भी यह हर मोर्चे पर जूझ ही रहा है। हृदय प्रदेश में महाकौशल प्रांत भी है जिसे प्रथक करने का आंदोलन अब जोर पकड़ने लगा है। महाकौशल प्रांत में न जाने कितने तपस्वी हुए हैं जिनके तप अनुभव आदि से देश विदेश में शांति और संपन्नता ने द्वार खटखटाए हैं।

महाकौशल प्रांत के गर्भ से अनेक एसी महान विभूतियों ने जन्म लिया है जिन्होंने देश विदेश में अध्यात्म, तप, त्याग और बलिदान का मार्ग दिखाते हुए लोगों में सकारात्मक उर्जा का संचार किया है। इन विभूतियों में सनातन पंथी हिन्दु धर्म के द्विपीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का नाम सबसे उपर आता है। शंकराचार्य ही महाराज पिछले चार दशकों से ज्यादा समय से देश को दिशा देने का काम कर रहे हैं। समय समय पर उनके बातए मार्ग पर चलकर लोक पुण्य अर्जित करते हैं।

माना जाता है कि परमपूज्य शंकराचार्य जी की पादुका पूजन मात्र से ही वेतरणी को पार किया जा सकता है। सिवनी जिले का यह सौभाग्य ही माना जाएगा कि जगतगुरू का अवतरण सिवनी जिला बना। जिस तरह भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का साक्षी मथुरा वृंदावन बना उसी तरह जगतगुरू की बाल क्रीड़ाओं का साक्षी सिवनी जिला बना। मानवता और धर्म का सार बताने वाले दिव्य महापुरूष के द्वारा निर्मित और पूजित पूजन स्थलों में आज भी धर्मध्वाजा शान से लहराती दिख जाती है।

देश विदेश में अपने बौद्धिक कौशल का लोहा मनवाकर विश्व को शांति के मार्ग पर चलने का पथ दिखाने वाले आध्यात्मिक गुरू महर्षि महेश योगी (महेश श्रीवास्तव) भी इसी महाकौशल की माटी में अवतरित हुए हैं। वे महाकौशल की प्रस्तावित राजधानी जबलपुर की विभूति हैं। महर्षि महेश योगी ने अपने आध्यात्मिक कौशल के बल पर न केवल भारत वरन समूचे विश्व में भारत का डंका बजाया है। आज उनके द्वारा स्थापित महार्षि विद्या मंदिर देश के कमोबेश हर जिले में विद्यार्थियों के विद्यार्जन का जरिया बने हुए हैं, जिनमें करोड़ों विद्यार्थी लाभान्वित हुए बिना नहीं हैं। प्रायमरी से लेकर स्नातकोत्तर तक हर स्तर का शिक्षण महर्षि के विद्यालयों में संभव है।

यह महज संयोग नहीं है कि इस तरह की महान विभूतियों का अवतरण महाकौशल प्रांत में हुआ, यह इस धरा का सौभाग्य ही माना जाएगा कि देश विदेश में प्रथक तरीके से आध्यात्म का पाठ पढ़ाने वाले चर्चित आचार्य रजनीश भी नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में ही अवतरित हुए। ओशो ने समूचे विश्व में अपनी आध्यात्मिक चेतना का लोहा मनवाया। महाराष्ट्र के पूना शहर को अपनी कर्मस्थली के तौर पर चुनकर उन्होंने देश में भी आध्यात्मिक चेतना का जो संचार किया वह अनवरत जारी है।

इसके साथ ही साथ दिल्ली को कर्मस्थली बनाने वाले स्वामी प्रज्ञानंद अपने आध्यात्मिक संदेशों से देश विदेश में कीर्ति फैला रहे हैं वे भी जबलपुर जिले से हैं। राजस्थान के जयपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले स्वामी प्रज्ञनानंद जी भी सिवनी जिले के केवलारी तहसील के साठई गांव में अवतरित हुए हैं। जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज से दीक्षित स्वामी प्रज्ञनानंद जी के शिष्य देश भर फैले हुए हैं। उनके मधुर कंठ से निकलने वाली भागवत कथा का आनंद लेते हुए श्रृद्धालु इतने भाव विभोर हो उठते हैं कि कथा के पंडाल में ही भक्तिमय नृत्य आरंभ हो जाता है।

इन समस्त विभूतियों के बारे में जिकर करने का ओचित्य महज इतना ही है कि महाकौशल की माटी को कर्मभूमि बनाने वाले जनसेवकों को इस माटी के महत्व के बारे में बताया जा सके। महाकौशल की माटी से चुनाव जीतकर राजनीतिक पायदान चढ़ने वाले नेताओं को यह बताया जा सके कि वे किस पावन धरा को अपनी कर्मभूमि बनाए हुए हैं। अब वक्त आ गया है जब इन जनसेवकों को अपनी माटी का कर्ज उतारकर प्रथक महाकौशल के आंदोलन में जान फूॅकना होगा।

(क्रमशः जारी)

लोकसभा में गूंजेगा झाबुआ पावर के पावर प्लांट का मामला!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 29

लोकसभा में गूंजेगा झाबुआ पावर के पावर प्लांट का मामला!

दो विभागों के लिए एक दर्जन प्रश्नों की तैयारी


(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छटवीं अनूसूची में अनुसूचित आदिवासी विकासखण्ड घंसौर में डलने वाले 1260 (कागजों पर 1200) मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट का मामला लोकसभा में उठाया जा सकता है। उक्ताशय के संकेत सांसदों के निवास साउथ ब्लाक में निवासरत एक संसद सदस्य के करीबी सूत्रों ने दिए हैं।

सूत्रों ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात किए जाने का मामला एक कांग्रेसी संसद सदस्य ने उठाने का मन बना लिया है। इस हेतु वे आवश्यक प्रपत्र एकत्रित करने में जुट गए हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जिस स्थान पर यह संयंत्र संस्थापित होने वाला है वहां के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और पड़ोसी भाजपाई सांसद के.डी.देशमुख ने इस बारे में संसद में मौन साध रखा है।



लोकसभा परिसर में चहलकदमी कर रहे मध्य प्रदेश के एक संसद सदस्य ने मीडिया के एक वरिष्ठ सदस्य से इस बारे में चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से गौतम थापर द्वारा आदिवासियों के हितों के साथ खेलने की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बारे में जानकारियां एकत्र कर रहे हैं और संसद में ध्यानाकर्षण में इस बात को उठाने का प्रयास करेंगे। इस बारे में उन्होंने आदिवासी विकास विभाग से संबंधित पांच तो वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से संबंधित आठ बिंदुओं पर तैयारी भी आरंभ कर दी है।

मीडिया के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार आदिवासियों के नाम पर सालों से राजनीति करने वाली कांग्रेस और भाजपा के क्षेत्रीय सांसदों द्वारा इस मसले को आखिर उठाया क्यों नहीं जा रहा है? गौरतलब है कि परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा का आधा हिस्सा आरक्षित मण्डला और बाकी हिस्सा बालाघाट संसदीय क्षेत्र में मिला दिया गया है। गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा 1200 मेगावाट का प्रस्तावित जो कागजों पर अब 1260 मेगावाट का हो चुका है, का कोल आधारित संयंत्र छटवीं अनुसूची में अधिसूचित आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में डाला जा रहा है। यह सिवनी जिले का हिस्सा है और मण्डला संसदीय क्षेत्र में आता है। मण्डला से आदिवासी समुदाय के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और जिले के शेष भाग के सांसद भाजपा के के.डी.देशमुख हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सिवनी जिले में परिसीमन के उपरांत बचे चार विधानसभा क्षेत्रों में एक में कांग्रेस और तीन पर भाजपा का कब्जा है। संयंत्र वाला हिस्सा लखनादौन विधानसभा का हिस्सा है यहां की भाजपा विधायक श्रीमति शशि ठाकुर खुद भी आदिवासी समुदाय से हैं। वहीं दूसरी ओर सिवनी से भाजपा की श्रीमति नीता पटेरिया, बरघाट से भाजपा के कमल मस्कोले तो केवलारी से कांग्रेस के हरवंश सिंह ठाकुर विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष हैं।

(क्रमशः जारी)

शर्मा, बनर्जी की नजदीकी खल रही है त्रिवेदी को


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 51

शर्मा, बनर्जी की नजदीकी खल रही है त्रिवेदी को

उद्योगपति मंत्री के कहने पर हुए रेल मंत्री शांत



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। त्रणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो श्रीमति ममता बनर्जी और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा की नजदीकी देखकर त्रणमूल के एक वरिष्ठ सांसद के पेट में मरोड़ उठना आरंभ हो गया है। अब आनंद शर्मा पर सीधा विदेश निवेश यानी एफडीआई के मामले में भरमाने के आरोप लगने लगे हैं। गुरूवार को संपन्न हुई मंत्रीमण्डल की बैठक में रेलमंत्री दिनेश त्रिवदी ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में न केवल का बहिष्कार किया वरन् एफडीआई पर अपनी पार्टी का पुराजोर विरोध भी दर्ज करवाया।

पीएमओ के सूत्रों ने बताया कि कैबनेट बैठक में उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री को बताया कि एफडीआई के मसले पर उन्होंने उड़ीसा के निजाम नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से चर्चा कर उन्हें राजी कर लिया है। उन्होंने कहा कि बैठक के कुछ घंटे पूर्व ही प्रगति मैदान में उनकी और ममता बनर्जी की चर्चा के दौरान सुश्री बनर्जी ने इस मसले पर कांग्रेस को समर्थन का भरोसा जतलाया था।

सूत्रों ने कहा कि जैसे ही आनंद शर्मा ने यह बात कही वैसे ही रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी आपा खो बैठे और हत्थे से उखड़ते हुए कहने लगे कि आप एसा कैसे कह सकते हैं। वे इस कैबनेट में सुश्री ममता बनर्जी के निर्देश पर एफडीआई के विरोध के लिए विशेष तौर पर हाजिर हुए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी फाईलें समेटी और बैठक छोड़कर बाहर आ गए। बाद में मूलतः उद्योगपति जनसेवक मंत्री कमल नाथ ने दिनेश त्रिवेदी को समझा बुझाकर वापस कैबनेट में लाया गया।

सूत्रों ने आगे कहा कि एफडीआई के मसले पर वैसे भी मंत्रीमण्डल दो भागों में बंटा नजर आ रहा था। एफडीआई के समर्थन में वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह, पलनिअप्पम चिदंबरम, प्रणव मुखर्जी, शरद पवार, कमल नाथ, सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, विलास राव देशमुख, आनंद शर्मा आदि थे तो इसका विरोध करने वालों में ए.के.अंटोनी, जयराम रमेश, दिनेश त्रिवेदी, के.वी.थामस जैसे चेहरे थे।

सूत्रों की मानें तो एफडीआई के मसले पर कांग्रेसनीत संप्रग सरकार की कैबनेट की बैठक बाद में उत्तर प्रदेश चुनाव पर केंद्रित दिखी जब जयराम रमेश ने यह कहा कि अगर एफडीआई लागू किया जाता है तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस चारों खाने चित्त गिर जाएगी। इसके बाद मामला एफडीआई से हटकर यूपी चुनाव पर आकर टिक गया। शरद पंवार तो यहां तक बोल गए कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का वजूद ही कहां रह गया है। एक मंत्री ने तो दबी जुबान से चुटकी लेते हुए यह तक कह डाला कि कांग्रेस (आनंद शर्मा), और त्रणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) के बीच सहमति बनना दिनेश त्रिवेदी को खल रहा है।

(क्रमशः जारी)

सौ साल की हो गई बेदिल वालों की दिल्ली


सौ साल की हो गई बेदिल वालों की दिल्ली



(एडविन अमान)

नई दिल्ली। आज दिल्ली वासी यह बात कह सकते हैं कि दिल्ली दिल वालों की है या बेदिल वालों की यह बात खोजते खोजते उन्हें एक सदी बीत गई है। दिल्ली को राजधानी बने सौ साल हो गए। इन सौ सालों में यहां का इतिहास बदला, भूगोल बदला, संस्कृति बदली, लोग बदले, स्वाद बदला, समाज बदला, साधन बदले और अब भी बदलती जा रही है दिल्ली। दिल्ली की एक बात नहीं बदली और वह है दिल्ली की बदहाली। राजधानी बनने से आज तक दिल्ली बुरी तरह बदहाल नजर आती रही है।

जब जार्ज पंचम ने एक निहायत ही बेनाम सी जगह बुराड़ी में दरबार सजाकर कोलकाता की जगह दिल्ली को देश की राजधानी बनाने की घोषणा की थी तो उस समय यह शहर शाही अंदाज में डूबा था। तब यहां की आबादी पांच लाख से भी कम थी और आज सौ साल के बाद इस महानगर की आबादी एक करोड़ सढ़सठ लाख से ज्यादा है। यहां की जनसंख्या में हर साल पांच लाख का इजाफा हो रहा है।

वैसे तो दिल्ली राजधानी 1911 में ही बन गई थी लेकिन 1930 के बाद जब नए ढंग से सज-संवर कर तैयार हुई तो लाहौर, कलकत्ता और मुंबई की तरह इसने भी नई दुनिया में अपनी पहचान बनाई। सत्ता का गढ़ तो था ही, कारोबार के लिहाज से भी दिल्ली खास हो गई। इतनी खास कि हर कोई यहां आने को तैयार था। शहर में पश्चिमी जीवनशैली का रंग घुलने लगा। मनोरंजन के नए अड्डे बने। अंग्रेज अधिकारी और उनके कारिंदे अपने साथ अंग्रेजी खानों का जायका लेकर दिल्ली आए।

पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक के चटपटे और मीठे स्वाद से अलग कनॉट प्लेस के इलाके में वेंगर्स और गेलॉर्ड जैसे रेस्तरांओं ने यहां के स्वाद को भी बदला। 1947 में विभाजन के बाद हजारों की संख्या में यहां आए विस्थापितों के साथ एक बार दिल्ली पर पंजाबियत का रंग चढ़ा।

पुरानी दिल्ली के स्वाद की गलियों में? मालदार दिल्ली में नेताओं के बंगले में? संसद में बनते नियमों में? रोजगार की तलाश में यहां आए लोगों के सपनों में? डिस्को में बन चुके मनोरंजन के नए मुहावरों में? सरकारी दफ्तरों के बाबुओं के आश्वासनों में? बस के इंतजार में खड़े लोगों के गुस्से में? या फिर किसी के सपनों की कीमत लगते दलालों में? कभी दिल्ली सात शहर हुआ करती थी। अब इसके कई रंग हैं। हर रंग की अपनी अलग कहानी है। क्योंकि इस शहर ने 100 सालों में जो भोगा है और जो देखा है वह कम नहीं।

कमल नाथ याद रहे सोनिया को भूल गए कांग्रेसी


कमल नाथ याद रहे सोनिया को भूल गए कांग्रेसी

सोनिया के जन्मदिन पर पसरी रही खामोशी



(नंद किशोर)

भोपाल। मध्य प्रदेश में अनेक जिलों में कांग्रेस के नेताओं को अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी का जन्म दिन भी याद नहीं रहा। अपने अपने क्षेत्र के क्षत्रपों के जन्म दिवसों पर तो कांग्रेस के नेताओं द्वारा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की उपस्थिति में केक काटकर फटाके फोड़कर खुशियों का इजहार किया गया, किन्तु जब कांग्रेस की नेशनल प्रेजीडेंट श्रीमति सोनिया गांधी के जन्म दिन की बारी आई तो कांग्रेस की जिला ईकाई रजाई तानकर सोती ही रही।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलों में सोनिया गांधी के जन्म दिन को लेकर कोई उत्साह नहीं देखा गया। अपने अपने सूबाई क्षत्रपों के जन्म दिन के पहले रक्तदान, फलवितरण जैसे प्रोग्रामों की एडवांस में सूचना देने वाली विज्ञप्ति जारी करने वाले कांग्रेस के वीर सोनिया के जन्म दिन पर क्यों खामोश रहे इस बारे में कयास लगाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के क्षत्रपों और कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि सोनिया अब बीमार हैं और वे ज्यादा दिन अध्यक्ष पद नहीं संभाल पाएंगी इसलिए अब उनके जन्म दिन पर खर्च करने का क्या ओचित्य!

वहीं दूसरी ओर अब कांग्रेस के नेताओं की आंखें इस बात पर टिक गईं हैं कि क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया जिलों से सोनिया गांधी के जन्म दिन के प्रोग्राम का सचित्र विवरण और पेपर कटिंग बुलवाई जाएंगी? ताकि अपने नेशनल प्रेजीडेंट के जन्म दिन को भुलाने वाली जिला इकाईयों पर कोई कार्यवाही की जा सके। इस मामले को प्रदेश प्रभारी महासचिव बी.के.हरिप्रसाद के संज्ञान में भी लाया जा रहा है कि कमल नाथ के प्रभाव वाले एक जिले में भी सोनिया गांधी का जन्मदिन नहीं मनाया गया।

तकनीकि महाविद्यालयों में भी होंगे छात्रसंघ चुनाव


तकनीकि महाविद्यालयों में भी होंगे छात्रसंघ चुनाव



(अंशुल गुप्ता)

भोपाल। मध्य प्रदेश के तकनीकि शिक्षण संस्थानों में भी अब प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे। निजी इंजीनियरिंग कालेज को इसकी जद में रखा गया है अथवा नहीं इस बारे में अभी कुहासा बरकरार ही है। इस आशय की घोषणा तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने राजधानी के एसवी पॉलीटेक्निक में आयोजित एल्युमिनी मीट में की।

प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी छात्र संघ चुनाव होंगे। प्रदेश में 223 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं जिनमें दस लाख से भी ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भी करीब दस साल बाद इसी साल से प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होना शुरू हुए हैं।

महाविद्यालयों में प्रत्यक्ष चुनाव के दरम्यान होने वाली हिंसा और पैसे के दुरूपयोग को देखकर सरकार ने पूर्व में इस तरह के चुनावों को बंद करवाकर मेरिट के आधार पर चुनावों के द्वारा छात्रसंघ का गठन किया जाता था। इस की प्रक्रिया में होनहार छात्रों को आगे आने का मौका अवश्य ही मिलता था किन्तु छात्रसंघ की जवाबदारी उसकी पढ़ाई में आड़े आती थी।

रविवार, 11 दिसंबर 2011

सिवनी के हा‍की प्रेमियों के लिए खुशखबरी



सिवनी के पूर्व विधायक एवं महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष नरेश दिवाकर का सपना अब आकार लेने लगा है। बस स्‍टेंड के पास एस्‍टोटर्फ का हाकी का मैदान पूर्णता की ओर है। मन में अभिलाषा थी कि इस मैदान को देखा जाए। देखकर अदभुत ही लगा। बरबस ही मन ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को ढेर सारी शुभकामनाएं दे डाली। हाकी के इस गढ सिवनी के लिए यह निश्चित तौर पर नरेश दिवाकर की एक अभिनव उपलब्धि ही मानी जाएगी। जबलपुर एक्‍सप्रेस के संपादक वाहिद कुरैशी और मित्र संजय नायक इस मैदान का अवलोकन कर रहे हैं।

शनिवार, 10 दिसंबर 2011


0 महाकौशल प्रांत का सपना . . . 7

राकेश सिंह ने परोक्ष तौर पर किया महाकौशल प्रांत का इशारा

तारामण्डल और विज्ञान केंद्र की उठाई मांग



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भविष्य में यदि महाकौशल प्रांत का सपना आकार लेता है तो निश्चित तौर पर उसकी राजधानी हृदय प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर को ही बनाया जाएगा। यहां से वर्तमान में भाजपा के संसद सदस्य राकेश सिंह ने लोकसभा में जबलपुर के विकास के आयामों को गढ़ने की तो कोशिश की गई है किन्तु महाकौशल को प्रथक प्रांत बनाने के लिए वे अब भी मौन ही धारण किए हुए हैं। अगर महाकौशल प्रांत अस्तित्व में आता है तो राकेश सिंह इस प्रांत की राजधानी के संसद सदस्य होने का गौरव पा सकते हैं।

संसद में जबलपुर के सांसद राकेश सिंह ने मांग रखी कि जबलपुर वर्तमान युग में युवा पीढ़ी को विज्ञान की दृष्टि से जागरूक एवं सक्षम बनाने के लिये जबलपुर में विज्ञान केन्द्र (साइंस सेंटर) एवं इसके साथ ही तारामंडल (प्लेनेटेरियम) स्थापित किया जाये। लोकसभा में उन्होंने कहा कि जबलपुर प्राचीन काल से ही शिक्षा के बड़े केन्द्र के रूप में विख्यात रहा है, यहां पर विज्ञान केन्द्र और तारामंडल की स्थापना से विद्यार्थियों के साथ ही युवा वर्ग को काफी लाभ होगा।

श्री सिंह ने कहा कि जबलपुर पूर्वी मध्यप्रदेश का प्रमुख केन्द्र है। यहां पर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, पशु चिकित्सा विश्व विद्यालय एवं आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के साथ ही साथ ट्रिपल आईटी जैसे शैक्षणिक संस्थान हैं। वन विभाग का उष्ण कटिबंधीय अनुसंधान संस्थान एवं राष्ट्रीय खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जैसे शोध संस्थान हैं। इसके साथ ही रक्षा उत्पादन की पांच बड़ी इकाइयां जीसीएफ, जीआईएफ, व्हीएफजे, 506 आर्मी वर्कशॉप के साथ-साथ सेना का सप्लाई डिपो, एमईएस, सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर, आर्मी आयुध कोर (कॉलेज ऑफ मेटेरियल मैनेजमेंट), जे एंड के तथा जीआरसी के ट्रेनिंग सेंटर भी स्थित है।

इसके साथ ही यह एक बड़े पर्यटन केन्द्र के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा यह संभागीय मुख्यालय भी है। बावजूद इसके बच्चों और युवा पीढ़ी को बौद्धिक व व्यावहारिक रूप से विज्ञान के प्रति जागरूक बनाने के लिये कोई विश्व स्तरीय संस्थान नहीं है। जिसकी वर्तमान समय में महती आवश्यकता है। सांसद श्री सिंह ने कहा कि नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम द्वारा देश के विभिन्न भागों में साइंस सेंटरों की स्थापना का कार्य किया जाता है। इस केन्द्र की स्थापना के लिये जबलपुर एक उपयुक्त स्थान है और इस केन्द्र के साथ यदि तारामंडल भी स्थापित होगा तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जायेगी।
सांसद राकेश सिंह निश्चित तौर पर साधुवाद के पात्र माने जा सकते हैं कि उन्होंने महाकौशल के मुख्यालय जबलपुर को और अधिक समृद्ध करने के प्रयास किए हैं। महाकौशल के समस्त राजनैतिक दलों के अन्य क्षत्रपों, सांसद और विधायकों से अब उम्मीद बेमानी ही होगी। महाकौशल से केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, के.डी.देशमुख, बसोरी सिंह मसराम, उदय प्रताप सिंह, गोविंद प्रसाद मिश्रा, राकेश सिंह, जितेंद्र सिंह बुंदेला, श्रीमति राजेश नंदनी सिंह, देवराज सिंह पटेल सांसद हैं, पर किसी ने इस बारे में आवाज नहीं उठाई है, इसलिए सांसद राकेश सिंह से ही अपेक्षा है कि वे प्रथक महाकौशल प्रांत का आंदोलन छेड़ें और महाकौशल के निवासियों को उनका वाजिब हक दिलवाएं।

(क्रमशः जारी)

कितने मेगावाट की इकाई लगा रहा है झाबुआ पावर!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 28

कितने मेगावाट की इकाई लगा रहा है झाबुआ पावर!

विज्ञापन में 660 तो कागजों पर 600 मेगावाट का है जिकर



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के मशहूर औद्योगिक घराने आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में शमिल आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के ग्राम बरेला में स्थापित किए जाने वाले पावर प्लांट के बारे में धीरे धीरे रहस्यों पर से पर्दा उठता जा रहा है। आवंथा समूह के मालिक गौतम थापर और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के बीच की जुगलबंदी भी सामने आती जा रही है।



सिवनी जिले की घंसौर तहसील में 22 अगस्त 2009 और 22 नवंबर 2011 को आहूत लोकसुनवाई में मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के कोल आधारित पावर प्लांट का कार्यकारी सारांश देखने पर यह बात उभरकर सामने आती है कि 18 हजार 400 करोड़ रूपयों की मिल्कियत के स्वामी गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में शामिल आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में दो चरणों में छः छः सौ मेगवाट के कोल आधारित पावर प्लांट की स्थापना की जा रही है।



जब इसके संबंध में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर द्वारा सीधे सीधे चुनिंदा समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किया जाता है तो यह बात उभरकर सामने आती है कि जनसुनवाई छः सौ मेगावाट के बजाए 660 मेगावाट की है। कंपनी 600 मेगावाट के पावर प्लांट डालने का दावा करती है तो लोकसुनवाई 660 मेगावाट की होती है। लोकसुनवाई स्थल पर भी जिस डायस पर मण्डल के अफसरान के साथ जिला प्रशासन के प्रतिनिधि बैठे थे उसके पीछे के बोर्ड पर भी 660 मेगावाट का ही उल्लेख किया गया था। यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल जबलपुर द्वारा इस अतिरिक्त 60 मेगावाट का उल्लेख करने का क्या ओचित्य है। यह साठ मेगावाट का लाभ वह आखिर गौतम थापर को पहुंचाने पर आमदा क्यों है? क्या एमओयू 600 मेगावाट का हुआ है और कर बचाने के लिए 660 मेगावाट की जनसुनवाई करवा दी गई है!

वैसे देखा जाए तो मण्डल को यह विज्ञापन अपने चुनिंदा समाचार पत्रों को सीधे जारी करने के बजाए मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग अथवा केंद्र सरकार के विज्ञापन दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के माध्यम से जारी किया जाना चाहिए था। चूंकि यह विज्ञापन सीधे ही चुनिंदा समाचार पत्र (इनमें संयंत्र की स्थापना वाले सिवनी जिले का एक भी समाचार पत्र शामिल नहीं है, जबकि सिवनी से प्रकाशित होने वाले अनेक समाचार पत्र मध्य प्रदेश के जनसंपर्क संचालनालय और डीएवीपी के विज्ञापन पेनल में हैं) में जारी करने के पीछे षणयंत्र की ही बू आ रही है।

मण्डल के जबलपुर कार्यालय द्वारा 660 मेगावाट के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा परियोजना को जारी टी.टो.आर. पत्र दिनांक 8 दिसंबर 2010 एवं 6 सितम्बर 2011 में लोक सुनवाई के निर्देश का हवाला दिया गया है। इस विज्ञापन में साफ उल्लेख है कि इसे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाईट डब्लूडब्लूडब्लू डॉट एमपीपीसीबी डॉट एनआईसी डॉट इन पर भी देखा जा सकता है।

मजे की बात यह है कि पूर्व में 22 अगस्त 2009 की जनसुनवाई के बारेे में शोर शराबा होने पर मण्डल ने इसे पांच दिन पूर्व 17 अगस्त को अपलोड किया था, वहीं दूसरी ओर 22 नवंबर 2011 की जनसुनवाई के बारे में मण्डल ने इसकी जनसुनवाई की तारीख भी एक दिन के उपरांत 23 नवंबर को अपलोड किया। इस तरह यह साफ जाहिर हो रहा है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल निहित स्वार्थों के चलते गौतम थापर की देहरी पर जाकर मुजरा कर रहा है।

(क्रमशः जारी)

ईमानदार नहीं सत्ता के लिए समझौता कर रहे हैं मनमोहन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 50

ईमानदार नहीं सत्ता के लिए समझौता कर रहे हैं मनमोहन

सहयोगियों को लूट की दी खुली छूट



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारत गणराज्य की स्थापना के उपरांत अब तक के सबसे कमजोर और लाचार प्रधानमंत्री के बतौर उभरे कथित तौर पर ईमानदार छवि के धनी डॉ.मनमोहन सिंह ने सत्ता की मलाई चखते रहने के लिए समझौतावादी रवैया अपनाया हुआ है। अपने संगी साथियों को देश को लूटने की खुली इजाजत देकर उन्होंने देश के नागरिकों के साथ बहुत ही बड़ा धोखा किया है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के मंत्रियों द्वारा मचाई गई लूट को चुपचाप देखकर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी और विपक्ष में बैठी भाजपा ने भी परोक्ष तौर पर मनमोहन सिंह का पूरा पूरा साथ दिया है।

संप्रग के दूसरे कार्यकाल में एक के बाद एक घपले घोटाले सामने आते रहे और विपक्ष सहित सोनिया, राहुल और खुद मनमोहन खामोश बैठे रहे। मामला चाहे कामन वेल्थ गेम्स घोटाले का हो, टूजी, एयर इंडिया, रिलायंस गैस माईन्स, आदर्श सोसाईटी, एस बेण्ड या कोई और बड़ा घोटाला हर मामले में देश को प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर चलाने वाले खामोश बैठे रहे।

अपने असफल बचाव में वजीरे आजम ने चुनिंदा संपादकों की टोली के सामने खुद को मजबूर जतला दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि गठबंधन की कुछ मजबूरियां होती हैं। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस की नजर में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी सहित विपक्ष की महान मूर्तियों ने साबित कर दिया कि जनादेश प्राप्त और पिछले दरवाजे से संसद की राजनीति करने वालों के लिए राष्ट्र धर्म से बढ़कर गठबंधन धर्म है। इन परिस्थितियों में भला मनमोहन सिंह को आखिर ईमानदार कैसे कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री को भले ही उनके चंपू ईमानदार जतलाने का जतन कर रहे हों पर सच्चाई यह है कि मनमोहन सिंह अघोषित तौर पर भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक के बतौर स्थापित हो चुके हैं।

(क्रमशः जारी)

सर्द हवाओं का रूख मध्य भारत की ओर


सर्द हवाओं का रूख मध्य भारत की ओर

बढ़ सकती है एकाध दिन में ठंड



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर की पर्वतश्रंखलाओं में भारी बर्फबारी के चलते पहाड़ बर्फ की सफेद धवल चादर ओढ़ चुके हैं। हिमालय की ओर से आने वाली हवाओं का रूख अब मैदानी इलाकों की ओर होने लगा है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि शनिवार दोपहर तक मध्य प्रदेश में पारा गिर सकता है।

जम्मू ओर कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हुए हिमपात का असर राजधानी दिल्ली पर पड़ा है और इस मौसम में पहली बार लोगों को सर्दी का अहसास हुआ। शुक्रवार सुबह से ही दिल्ली कोहरे की चादर में लिपटी रही। दिन चढ़ने पर भी कोहरा का असर ज्यादा कम नहीं हुआ और शाम को एक बार फिर कोहरा बढ़ गया। रात होते ही कोहरे ने दिल्ली के लगभग सभी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

शुक्रवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अब तक ठंड से राहत पा रहे दिल्लीवाले अब ठंड झेलने के लिए तैयार रहें। शनिवार से राजधानी में ठंड और बढ़ेगी और अगले तीन दिन में न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। ठंड के साथ साथ कोहरे का भी असर राजधानी पर दिखेगा। जम्मू कश्मीर में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ से शुक्रवार को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों में ठंड बढ़ गई है। राजधानी के कुछ इलाकों में बृहस्पतिवार की रात और शुक्रवार की सुबह बारिश भी हुई।

रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित

कोहरे के असर से शुक्रवार को 40 ट्रेनें आंशिक व पूर्ण रूप से रद रहीं, जबकि 116 ट्रेनों का परिचालन घंटों की देरी से हुआ। कई गाड़ियां 20 घंटे की देरी से गंतव्य तक पहुंचीं। पुरी से नई दिल्ली आने वाले पुरी, नई दिल्ली एक्सप्रेस का परिचालन 15 घंटे, फरक्का का 13 घंटे, महाबोधि एक्सप्रेस का 11 घंटे तथा डिब्रूगढ़ एवं हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे लेट रही।

हवाई सेवाएं बाधित

कोहरे से विमान सेवा भी  बुरी तरह से प्रभावित रहीं। आधी रात तीन बजे से सुबह नौ बजे के बीच इंदिरा गांधी विमानतल से लखनऊ जाने वाली गो एयरलाइंस व भोपाल जाने वाली जेट लाइट की फ्लाइट रद रही। लखनऊ व भोपाल से दिल्ली आने वाली गो एयर व जेट लाइट फ्लाइट का भी संचालन नहीं हो सका। जबकि दूसरे शहरों से यहां आने वाली नौ फ्लाइट रद कर दी गई। यही नहीं दो दर्जन से ज्यादा विमान 45 मिनट से ज्यादा की देरी से उड़े।

थ्री के मामले में आईडिया ने बाजी मारी


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  36

थ्री के मामले में आईडिया ने बाजी मारी

कागजों पर ही है थ्री जी की कनेक्टिविटी



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कम्पनी आइडिया सेल्युलर ने पिछले दिनों जम्मू एवं कश्मीर में अपनी 3जी सेवा पेश की। सुरक्षा की दृष्टि से जम्मू काश्मीर में प्री पेड मोबाईल सेवा प्रतिबंधित रखी गई है। आईडिया ने यह साफ नहीं किया है कि थ्री जी इंटरनेट सुविधा पोस्टपेड होगी या प्री पेड। अब तक इस पर कुहासा न हट पाना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आदित्य बिड़ला समूह की आईडिया सेल्यूलर कम्पनी आरंभ में जम्मू काश्मीर की घाटी क्षेत्र के श्रीनगर में और जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में 3जी सेवा शुरू करेगी। बाद में इसका दूसरे स्थानों में भी विस्तार का प्रस्ताव है। इस सेवा के तहत उपभोक्ताओं को तेज गति इंटरनेट, विडियो कानफ्रेंसिंग, मोबाइल टीवी और आइडियामॉल एप्लीकेशन स्टोर सेवा का लाभ उठाने का दावा किया जा रहा है।

आरोपित है कि देश भर में जिन स्थानों पर आईडिया ने थ्री जी सेवा लॉच की है, वहां नेटवर्क की समस्या से दो चार होने के कारण उपभोक्ताओं को धीमी गति का इंटरनेट या बार बार नेट डिस्कनेक्ट होने की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। अनेक उपभोक्ताओं ने आईडिया के मंहगे नेट सेटर लेने के बाद इसकी घटिया सेवाओं से आज़िज आकर अपना कनेक्शन ही बदल दिया है। आईडिया नेट सेटर जीपीआरएस बेस्ड भी है किन्तु इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि उपभोक्ता इस नेट सेटर में आईडिया की सिम के अलावा और किसी की सिम का उपयोग नहीं कर सकता है, क्योंकि यह डिवाईस लाक होती है। आईडिया के जम्मू काश्मीर में थ्री जी सुविधा की इस अभिनव पेशकश के साथ आइडिया की 3जी सेवा देश के 20 सर्किलों में 1,600 शहरों तक पहुंच गई।

(क्रमशः जारी)

शिवराज पर होगा नस्तियां निपटाने का भार


शिवराज पर होगा नस्तियां निपटाने का भार

सीएम मंत्री नहीं रोक पाएंगें फाईलें



(नंद किशोर)

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार नस्तियों के चलन को भी लोकसेवा प्रदाय गारंटी कानून के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। ऐसा होने पर मुख्यमंत्री व मंत्री से लेकर अफसर तक सभी के लिए समय सीमा के भीतर फाइलों को निपटाना कानूनन जरूरी हो जाएगा। ऐसा हुआ तो दफ्तरों में फाइलों के ढेर नहीं दिखेंगे। आने वाले समय में यह व्यवस्था लागू होते ही मुख्यमंत्री पर काम का बोझ इस कदर बढ़ जाएगा कि उन्हें समय सीमा में नस्तियों का निराकरण हर हाल में करना अनिवार्य हो जाएगा।

लोक सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जवाबदेही विषय पर राज्य सरकार और यूएनडीपी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वर्कशॉप में इस बात का संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तय किया जाएगा कि कौन-सी फाइल किसके पास कितने समय तक रहनी चाहिए। अगर किसी फाइल पर मुख्यमंत्री कोई फैसला नहीं लेते हैं तो इसका नुकसान अंततः राज्य को उठाना पड़ता है।

बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि लोक सेवाओं के बदले लोगों से एक टोकन शुल्क लिया जाना चाहिए, ताकि इसे लेकर आम जनता गंभीर रहे और उसे अपनी भी जिम्मेदारियों का एहसास होता रहे। इस तरह के कई सुझाव लोकसेवा प्रदान करने की समूची प्रक्रिया को मजबूत करने और इसमें जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।