गुरुवार, 23 अगस्त 2012

सचिन का अंतिम संस्कार करते युवराज


सचिन का अंतिम संस्कार करते युवराज

(महेश रावलानी)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस की बैसाखी पर संसद की दहलीज में कदम रखने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को संसद की गरिमा का भी भान नहीं रहा। सचिन तेंडुलकर को अंतिम संस्कार करते और युवराज सिंह को कब्र खोदते देखकर आपको कैसा लगेगा? एक विज्ञापन में भारत के टॉप क्रिकेट स्टार्स ऐसा ही करते नजर आ रहे हैं।
सहारा क्यू शॉप के टीवी कमर्शल में सचिन तेंडुलकर, युवराज सिंह, महेन्द्र सिंह धोनी, वीरेंद्र सहवाग और विराट कोहली यह दिखाते नजर आ रहे हैं कि अगर आपने सहारा क्यू शॉप से खरीददारी नहीं की, तो आपको गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। विवाद शुरू होने के बाद सचिन ने इस विज्ञापन पर एतराज किया। खबर है कि बीसीसीआई ने सहारा समूह से वह विज्ञापन वापस लेने को कहा है।
इस विज्ञापन में सचिन तेंडुलकर एक मटकी लेकर ब्रेकफस्ट कर रहे परिवार का चक्कर काट रहे हैं, मानो अंतिम संस्कार से पहले की रस्म निभा रहे हों। इसी तरह से युवराज सिंह भी एक बच्चे के सामने कब्र खोद रहे हैं। अपने स्टार्स का यह रूप कई फैन्स को पसंद नहीं आया है।
खासकर सचिन तेंडुलकर, जो कि सांसद भी हैं, उनका इस तरह के अशुभ सीन वाले विज्ञापन में काम करना लोगों को पसंद नहीं आ रहा। यहां तक कि बीसीसीआई को भी इस विज्ञापन को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई ने भी इस विज्ञापन को हटाने के लिए कहा है।

मनमोहन अंडर एचीवर तो सोनिया पावरफुल!


मनमोहन अंडर एचीवर तो सोनिया पावरफुल!

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। एक तरफ तो टाईम मेग्जीन द्वारा भारत गणराज्य के वज़ीरे आज़म डॉ।मनमोहन सिंह को अंडर एचीवर का खिताब दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी को सबसे ताकतवर महिला की उपाधि से नवाजा जाता है। मशहूर अमरीकी पत्रिका फोर्ब्स ने दुनिया की 100 ताकतवर महिलाओं की सूची जारी की है, जिसमें कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को छठे स्थान पर रखा गया है।
दिलचस्प बात ये है कि इस सूची में सोनिया गांधी को अमरीका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा से ज्यादा शक्तिशाली आंका गया है। 2010 में इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर रहने वाले मिशेल को इस बार दुनिया की सातवीं सबसे शक्तिशाली महिला बताया गया है।
दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की फेहरिस्त में पहले तीन पायदानों में पिछले साल के मुकाबले कोई बदलाव नहीं दिखता है। इस बार भी फोर्ब्स ने 2005 से सत्ता में रही जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल को दुनिया की सबसे ताकतवर महिला बताया है ।उनके बाद दूसरे स्थान पर अमरीकी विदेशी मंत्री हिलेरी क्लिंटन हैं जबकि तीसरा स्थान इस बार भी ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा रुसोफ को मिला है।
इस फेहरिस्त में राजनीति, मनोरंजन और तकनीक के क्षेत्रों के अलावा गैर मुनाफे वाली संस्थाओं में अहम पदों पर कार्यरत महिलाओं को जगह दी गई है। इन महिलाओं को उनके प्रभाव, उनके पास या उनके नियंत्रण में मौजूद धन और मीडिया में उनकी मौजूदगी के आधार पर रैंकिंग दी गई है।
इसमें अन्य भारतवंशियों को भी स्थान दिया गया है। इस सूची में सोनिया गांधी के अलावा जिन भारतीय और भारतीय मूल की महिलाओं को जगह दी गई है, उनमें पेप्सी की प्रमुख इंदिरा नूई 12वें स्थान पर, आईटी कंपनी सिस्को सिस्टम्स की पद्मश्री वारियर 58वें स्थान पर, आईसीआईसाई बैंक की प्रबंधन निदेशक चंदा कोचर 59वें स्थान पर और बायोकॉन की किरन मजूमदार 80वें पायदान पर हैं।
सर्वश्रेष्ठ 10 ताकतवर महिलाओं में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की मेलिंडा गेट्स को चौथा स्थान, न्यूयॉर्क टाइम्स की कार्यकारी संपादक जिल अब्रासन को पांचवा स्थान, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्द को आठवां स्थान, अमरीका की गृह मंत्री जैनेट नैपोलिताना को नौवां और फेसबुक की मुश्य कार्यकारी अधिकारी शैरिल सैंडबर्ग को दसवां स्थान दिया गया है।
सोनिया को पिछले दिनों मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा जब प्रमुख राज्यों के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को शिकस्त मिली। उन्होंने इसके लिये कमजोर उम्मीदवार तथा राज्य पार्टी संगठन को जिम्मेदार ठहराया। पत्रिका के अनुसार उच्च आर्थिक वृद्धि को लेकर जहां एक तरफ उनकी सराहना हुई वहीं भ्रष्टाचार की अनदेखी को लेकर उनकी निंदा भी की गयी। कला की विद्वान सोनिया ने तेल पेंटिंग कंर्जेवशन में डिग्री धारक है।

इंटरनेट की आजादी का सम्मान करे भारत

इंटरनेट की आजादी का सम्मान करे भारत

(अंकिता)

न्यूयार्क (साई)। इंटरनेट की आजादी के प्रति पूर्ण समर्थन जताते हुए अमेरिका ने भारत से अपील की है कि दक्षिणी राज्यों से पूर्वाेत्तर के लोगों के बड़ी संख्या में प्रस्थान करने के कारण बने अफवाहों की जांच में सरकार मूलभूत आजादी का सम्मान करे। अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, कि अमेरिका ने यह रिपोर्ट देखी है कि पूर्वाेत्तर के लोग दक्षिणी राज्यों के शहरों से वापस लौट रहे हैं। अमेरिका ने यह भी रिपोर्ट देखी है कि वे लोग सुरक्षा की चिंता के कारण वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने कहा, कि जहां तक इंटरनेट की आजादी के बड़े मुद्दे का सवाल है, तो आपको यह पता है कि हमारी सोच क्या है। हम हमेशा इंटरनेट को पूरी आजादी के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा, कि भारत सरकार सुरक्षा के लिए इस तरह की घटनाओं की लगातार जांच करती रहती है और हम हमेशा सरकार से अपील करते हैं कि वह मानवाधिकार, मौलिक आजादी और कानून के शासन के प्रति अपनी वचनबद्धता बनाए रखें।
संवाददाताओं ने उसी समय इंटरनेट को पूरी आजादी के अमेरिकी सोच के प्रसंग में विकिलीक्स के प्रति उनके नजरिए के बारे में भी पूछ लिया। नूलैंड ने कहा,  कि विकिलीक्स का सम्बंध इंटरनेट की आजादी से नहीं था। उन्होंने कहा, कि अमेरिका ने न तो भारत सरकार को जांच करने लिए कहा, न ही अमेरिका इस जांच में भारत के साथ है। भारत सरकार ने खुद ही अफवाह के कुछ स्रोतों की जांच का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, ष्इसलिए हम यह देख रहे हैं कि यह प्रक्रिया कैसे पूरी की जाती है।ष्
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी सरकार गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी अमेरिकी कम्पनियों को गलत सूचना के स्रोत का पता लगाने के भारत सरकार के दिशानिर्देश का पालन करने के लिए कहेगी, नूलैंड ने कहा कि वह यह नहीं बता सकती कि इन कम्पनियों की भारत सरकार के साथ क्या बातचीत हुई है।

दिल्ली में भी हो सकता है गुटखा बैन


दिल्ली में भी हो सकता है गुटखा बैन

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। मुंह के कैंसर के प्रमुख कारक गुटखा पर दिल्ली सरकार भी जल्द ही बेन लगाने के मूड में दिख रही है। दिल्ली सरकार जल्द ही गुटखा पर बैन लगा सकती है। दिल्ली कैबिनेट में जल्द ही इस मामले पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि गुटखा पर बैन लगाने के लिए सरकार तेजी से प्रयास कर रही है।
सीएम श्रीमति दीक्षित ने कहा कि हमें केंद्र से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट को लागू करने के लिए पत्र मिला है। अगस्त खत्म होने से पहले इसे लागू करने के लिए सरकार सक्रिय है। पाबंदी लागू करने के संबंध में विधि विभाग ने सरकार को हरी झंडी दे दी है।
भारत में तंबाकू की लत पर डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक राजधानी की आबादी के 25 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर पाबंदी लगाने के लिए सभी राज्यों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशंस, 2011 लागू करने के लिए पत्र भेजा था।
इस कानून के तहत गुटखा एवं सभी किस्म के चबाने वाले तंबाकू उत्पादों जैसे जर्दा, गुल व बजर की बिक्री पर राज्यों में प्रतिबंध होना चाहिए। मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा व केरल ने इस रेगुलेशन के बाद गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया।

नक्सल प्रभावित इलाके में चलता फिरता चिकित्सालय


नक्सल प्रभावित इलाके में चलता फिरता चिकित्सालय

(आंचल झा)

रायपुर (साई)। नक्सल प्रभावित जिलों के ग्रामीण इलाकों में 25 अगस्त से चलता-फिरता अस्पताल अस्तित्व में आएगा। यह एक विशेष तरह की एंबुलेंस में संचालित होगा। चलता फिरता अस्पताल सुबह से शाम तक पहुंचविहीन इलाकों के हाट बाजार या इसी तरह की भीड़भाड़ वाले इलाके में बीमारों का इलाज करेगा।
स्वास्थ्य संचालनालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने यह पूरी योजना तैयार की है। एंबुलेंस में चलने वाले अस्पताल में उपचार करने के लिए एक डॉक्टर रहेगा। उसके अलावा एक पैरामेडिकल स्टाफ और जरूरी जांच करने के लिए पैथोलॉजिस्ट भी रहेगा। एंबुलेंस के भीतर छोटी सी लैब रहेगी, जिसमें सामान्य बीमारियों की जांच तत्काल की जा सकेगी। एक हिस्से में छोटा सा दवा भंडार होगा। उसमें सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार की दवाएं रहेंगी।
मरीजों का इलाज और दवाएं बिलकुल मुफ्त दी जाएगी। इलाज के दौरान गंभीर मरीज आने पर उन्हें वहीं रोका जाएगा और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने की व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के संचालक डॉ। कमलप्रीत सिंह ने बताया पहुंचविहीन इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि 25 अगस्त तक सभी 21 जिलों में यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण में शुरुआत करने के लिए 4 एंबुलेंस आ चुकी है।
अगले माह के अंत बाकी 25 एंबुलेंस भी स्वास्थ्य विभाग को मिल जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को ध्यान में रखते हुए पूरा सिस्टम प्राइवेट के माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए ठेका सौंपा जा चुका है। प्रत्येक एंबुलेंस पर महीने भर में एक लाख 56 हजार खर्च किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग केवल शासकीय सप्लाई होने वाली दवाएं ही उपलब्ध कराएगा। बाकी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सहित एंबुलेंस की व्यवस्था निजी कंपनी ही करेगी।
इस योजना को पूरी प्लानिंग के साथ शुरू किया जा रहा है। प्रत्येक नक्सल प्रभावित जिले के एक-एक गांव का ब्यौरा कलेक्ट किया गया है कि कहां-कहां और कब-कब हाटबाजार लगते हैं। उसकी सूची और टाइम टेबल ठेका लेने वाली कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी को हाट बाजार के टाइम टेबल के आधार पर काम करना होगा। प्रत्येक गाड़ी में जीपीएस सिस्टम लगा रहेगा। इससे यह मानीटरिंग की जा सकेगी कि कंपनी का चलता-फिरता अस्पताल टाइम टेबल के अनुसार सेवाएं दे रहा है या नहीं।