शनिवार, 19 जनवरी 2013

किस बात का हो रहा है चिंतन!


किस बात का हो रहा है चिंतन!

(लिमटी खरे)

एक बहुत पुरानी कहावत है, जबरा मारे रोन ना दे, अर्थात कोई आपको जमकर जबर्दस्त मारे और फिर रोने भी ना दे। जब से कांग्रेस की कमान श्रीमति सोनिया गांधी के हाथों आई है उसके बाद से कमोबेश यही स्थिति देश की होती जा रही है। मंहगाई, भ्रष्टाचार, अनाचार, व्यभिचार, अलगाववाद, नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद और ना जाने क्या क्या घट रहा है। केंद्र सरकार और सोनिया गांधी दोनों ही आंख बंद करके बैठे हैं। एक बात पर केंद्र सरकार की दाद देना पड़ेगा, विपक्ष को मैनेज कर जिस दिलेरी से केंद्र सरकार द्वारा मंहगाई बढ़ाई जा रही है वह तारीफेकाबिल है। 1974 फिर 1998 में पचमढ़ी और 2003 में शिमला में हुए चिंतन शिविर के एक दशक बाद पुनः जयपुर में कांग्रेस के नेताओं ने सर जोड़कर चिंता करना आरंभ किया है। इस चिंतन शिविर में आम आदमी के बजाए कांग्रेस की सरकार कैसे बने और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री कैसे बनाया जाए इस बारे में ज्यादा चिंता होती दिख रही है।

सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस को चिंतन शिविर की आवश्यक्ता क्यों आन पड़ी वह भी पंद्रह साल में दो मर्तबा, पंद्रह साल से तो सोनिया गांधी ही कांग्रेस की अगुआई कर रही हैं। जाहिर है कि सोनिया गांधी की रीतियां नीतियां कांग्रेस के लिए आत्मघाती ही साबित हो रही हैं। यक्ष प्रश्न तो यह है कि कांग्रेस को किस बात का चिंतन करना चाहिए, अपने नेतृत्व की दिशा का या देश के आम आदमी की दशा का अथवा राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने के जतन का।
चालीस बरस में कांग्रेस का यह चौथा चिंतन शिविर है, और सोनिया की अगुआई में चल रही कांग्रेस का दूसरा। 1998 में पचमढ़ी में हुए चिंतन शिविर में कांग्रेस ने सभी का साथ छोड़कर अकेले ही चलने का निर्णय लिया। कांग्रेस का यह निर्णय भी आत्मघाती ही साबित हुआ। कांग्रेस को छः साल इंतजार में काटने पड़े। इसके बाद कांग्रेस के रणनीतिकारों ने सोनिया गांधी को समझाया और फिर 19 दलों के साथ कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई।
इसके बाद विपक्ष को लगातार मैनेज कर कांग्रेस ने साढे आठ साल तो काट लिए हैं पर अब काफी मुश्किल दिख रहा है समय काटना। कांग्रेस के नेताओं ने इस दौरान सिर्फ और सिर्फ अपनी ही चिंता की कांग्रेस के कार्यकर्ता ठगे से महसूस करते रहे। नेताओं की सोच थी कि पैसा कमा लो और उसी पैसे के दम पर अगला चुनाव भी जीत लिया जाएगा। नेता यह भूल रहे हैं कि चुनाव पैसे के बल पर नहीं वरन कार्यकर्ताओं के बल पर जीते जाते हैं।
कांग्रेस के सामने एक बात तो तय ही नजर आ रही है कि कांग्रेस द्वारा अगला चुनाव मनमोहन सिंह के चेहरे को आगे कर कतई लड़ा नहीं जाएगा। कांग्रेस को एक नए साफ सुथरे चेहरे की दरकार है। रही राहुल गांधी की बात तो बड़े नेताओं ने 2004 के उपरांत राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने की बात बार बार कहकर सोनिया गांधी के सामने अपनी उपस्थिति और नौकरी पक्की की जाती रही है।
राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए या नहीं यह उनका नितांत निजी मामला है। कांग्रेस के प्रबंधकों ने मीडिया को मैनेज कर सोनिया और राहुल को खूब धोके में रखा। राहुल की छवि प्रधानमंत्री की बना दी गई सोनिया और राहुल के सामने। यह तो भला हो सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स वालों का कि राहुल, सोनिया और मनमोहन सिंह की असलियत सबके सामने आई और सोशल मीडिया की उपस्थिति राहुल और सोनिया को भी स्वीकार करना ही पड़ा।
इस बार चिंतन शिविर में एक बार फिर राहुल गांधी को कांग्रेस की बागडोर सौंपने की बात जोर शोर से उठने के पुख्ता इंतजामाता हैं। राहुल गांधी कुछ धरातल पर उतरते दिख रहे हैं। उन्हें सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स से भान हो चला है कि वे कितने पानी में हैं। राहुल गांधी खुद कांग्रेस की कमान संभालते हैं या फिर सोनिया की खड़ाउं ही कुर्सी पर रखकर राज करते हैं यह तो समय ही बताएगा, किन्तु राहुल गांधी अभी राजनैतिक तौर पर परिपक्व दिख नहीं रहे हैं।
राहुल गांधी को इस बात को भली भांति समझ जाना चाहिए कि देश में दो तिहाई मतदाता युवा है। युवाओं का रोष और असंतोष राहुल गांधी हाल ही में देख चुके हैं। आज अगर कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को बतौर प्रधानमंत्री प्रस्तुत कर दिया जाता है तो विपक्ष के साथ ही साथ देश भी कांग्रेस से पूछ उठेगा कि आखिर बतौर सांसद राहुल गांधी ने नौ बरसों में अपने संसदीय क्षेत्र और देश के लिए क्या किया। कितने प्रश्न पूछे, कितनी चर्चाओं में भाग लिया, कितने आंदोलनों में जनता का साथ दिया, कितने मामले सदन में उठाए?
आज युवाओं के मन में कसक है राहुल के प्रति। भले ही कांग्रेस का मैनेज्ड मीडिया राहुल गांधी की पीआर और इमेज बिल्डिंग में लगा हो पर युवा तो यह पूछ रहे हैं कि जब कड़कड़ाती ठण्ड में दिल्ली में गेंग रेप के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठियां भांजी जा रही थीं, ठण्डा पानी फेंका जा रहा था तब युवा हृदय सम्राट राहुल गांधी वातानुकूलित कक्ष में बैठकर क्या जेम्स बांड की नई मूवी देख रहे थे?
युवाओं को उनका उत्तर मिल गया है कि राहुल गांधी अभी पालीटिकल मेच्योर नहीं हैं। वे आज भी चाबी वाले गुड्डे ही हैं। उनके शिक्षक और सलाहकार जितनी चाबी भरते हैं वे उतना ही चल पाते हैं। सियासी फिजां में तो यहां तक कहा जा रहा है कि अगर नेहरू गांधी परिवार के कुलदीपकों राहुल और वरूण गांधी को बिठाकर शास्त्रार्थ करवा दिया जाए तो वरूण गांधी के सामने राहुल गांधी बौने साबित हो जाएंगे।
कांग्रेस को अगर चिंतन करना ही है तो राहुल गांधी की चापलूसी छोड़कर उसे इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि आखिर क्या वजह है कि कांग्रेस अब एक भी एसा नेता नहीं दे पा रही है जो विदेश तो छोड़िए देश में ही सर्वस्वीकार्य हो। कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिए कि उसने पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी जैसे नेता दिए हैं जिनकी स्वीकार्यता देश ही नहीं वरन् विदेशों में भी थी।
कांग्रेस को चिंतन इस बात का करना चाहिए कि आखिर क्या वजह है कि देश में मंहगाई इस कदर बढ़ती जा रही है। जबकि वित्त मंत्री और खुद प्रधानमंत्री अर्थशास्त्री हैं। देश में एक के बाद एक सामने आते घपले घोटालों के बारे में चिंता की जानी चाहिए। कांग्रेस को इस बात पर चिंता करना चाहिए कि उसके लिए गठबंधन धर्म नहीं राष्ट्र धर्म सर्वोपरि हो। विकास की दुहाई देने वाली सोनिया गांधी को यह सोचना चाहिए कि विकास कितना बेतरतीब हुआ है।
कांग्रेस को इस बात का चिंतन करना चाहिए कि आखिर क्या वजह है कि अखंड भारत पर राज करने वाली कांग्रेस को अब केंद्र में बैसाखियों की जरूरत महसूस होने लगी है। गठबंधन के सहयोगी दल जब तब कांग्रेस की कालर पकड़कर हड़काने की जुर्रत कैसे करने लगे? क्या कारण है कि अब मुट्ठी भर राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है? कांग्रेस के हाथ से जनाधार रेत की तरह कैसे फिसल गया?
कांग्रेस को इस बात का चिंतन करना चाहिए कि जिन सांसदों को उसने मंत्री बनाया है वे अपने अपने राज्यों कांग्रेस को किस पायदान पर लाकर खडा कर रहे हैं? मंत्रियों के राज्यों में कार्यकर्ता क्या इनके परफार्मेंस से खुश हैं? कांग्रेस को चाहिए कि वे अपने बड़े नेताओं को दो टूक शब्दों में यह टारगेट दे दे कि जो बड़ा नेता अपने अपने क्षेत्र से ज्यादा सांसदों को जिताकर लाएगा उसे उस आधार पर ही मंत्री बनाकर मंत्रालय दिया जाएगा।
कांग्रेस को चिंतन इस बात का करना चाहिए कि आखिर क्या कारण है कि सोनिया गांधी के हाथ कमान आने के उपरांत कांग्रेस ने एक भी एसा नेता (खुद सोनिया भी) नहीं दिया है कि जिसकी अपील का देशव्यापी असर पड़े। आखिर नैतिक मूल्य और सरकार की छवि इस कदर क्यों गिरी कि आज प्रधानमंत्री की देश के नाम अपील बेअसर हो रही है? आज कांग्रेस के सामने राहुल गांधी को महिमा मण्डित करने की आवश्यक्ता क्यों आन पड़ी?
कांग्रेस को इस बात पर भी चिंतन करना चाहिए कि पिछले सवा सौ सालों से ज्यादा समय से कांग्रेस नाम का संगठन ही देश को एक सूत्र में पिरोए हुए था। आज वह संगठन भी छिन्न भिन्न ही नजर आ रहा है। यह सच है कि भारत गणराज्य में लोकतंत्र राजनीति की बुनियाद पर ही खडा है पर आज राजनीति किस अंधेरी सुरंग में कदम बढा चुकी है। आज कांग्रेस को यह चिंतन करना होगा कि कैसे नैतिक मूल्यों को स्थापित किया जाए? कैसे देश के प्रति प्रेम पैदा किया जाए? कैसे विकास के प्रति अलख जगाई जाए?
कांग्रेस को अपने इतिहास में झांककर देखना होगा, यह काम खलिस कांग्रेसी ही कर सकता है। सोनिया गांधी तो विदेश से यहां आकर बसीं हैं, उन्हें कांग्रेस के इतिहास की ज्यादा मालुमात किताबी ज्ञान से हो सकती है, पर सोनिया गांधी ने वो समय नहीं देखा जब सत्तर के दशक में सिनेमाघरों में न्यूजरील में भाखड़ा नंगलडेम कैसे बना, कैसे भारत का निर्माण हो रहा है जैसी चीजें दिखाइ्र जाती थीं।
आज के युवा को यह नहीं पता कि 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दिन है। युवाओं को यह पता है कि 2 अक्टूबर को ड्राई डे (इस दिन शराब नहीं बिकती) है? आखिर किस दिशा में धकेल रहे हैं हम अपने आने वाली पीढ़ी को? क्या यही दिग्भ्रमित पीढ़ी संभालेगी भारत गणराज्य का नेतृत्व? कांग्रेस को अपने एतिहासिक दायित्व को समझना ही होगा।
कांग्रेस को चाहिए कि वह राहुल चालीसा का गान करने के बजाए देश को दिशा और दशा देने वाले एतिहासिक दायित्वों को याद कर एक बार पुनः उसका निर्वहन पूरी ईमानदारी से करे। नेहरू गांधी परिवार ने देश को काफी कुछ दिया है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है किन्तु उस परिवार की वर्तमान पीढ़ी को महज उसी अधार पर महिमा मण्डित कर देश को सर्वनाश की ओर ढकेलना समझदारी तो किसी भी दृष्टिकोण से नहीं कही जा सकती है।
यह सच है कि भ्रष्टाचार चरम पर है। कांग्रेसी भी इससे आजिज आ चुके हैं। इसका जीता जागता उदहारण जयपुर में देखने को मिला। सोनिया गांधी अपने उद्बोधन में भ्रष्टाचार पर जमकर बोल रही थीं। बताते हैं इतने में भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक की अघोषित उपाधि पाने वाले मनमोहन सिंह ने एक पर्ची सोनिया गांधी को भेजी जिसमें लिखा था कि मदाम आप अपनी ही सरकार को जो साढे आठ साल से सत्ता में है को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। सोनिया कुछ रूकीं और विषय से विषयांतर किया। अब निश्चित तौर पर भाषण लिखने वाले की खैर नहीं है।

इसी बात पर प्रवीण श्रीवास्तव सोम्य जी की एक कविता का उल्लेख करना चाहूंगा -

माँ तुझे सलाम .....

एक माँ के लिए बेटे की ताजपोशी बन गया राष्ट्रीय मर्ज़!
आखिर कौन चुकाने आएगा वतन की माटी का क़र्ज़!!
हम तो बेचौन हैं शीश नमन करने को उस माँ के चरणों में!!!
जिसने बेटा कुर्बान कर अदा किया भारतीय होने का फ़र्ज़!!!!

(साई फीचर्स)

तेल कंपनियां घाटे या मुनाफे में


तेल कंपनियां घाटे या मुनाफे में

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों का अर्थशास्त्र बहुत दिलचस्प है. अगर कच्चे तेल की मौजूदा कीमत 110 डालर प्रति बैरल (एक बैरल= करीब 160 लीटर) है और प्रति डालर रूपये की कीमत है 54.8 रूपये है। इस अर्थशास्त्र के बारे में सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर बहस चल पड़ी है।
कहा जा रहा है कि उसकी कीमत का सामान्य अर्थशास्त्र यह बनता है कि एक बैरल कच्चे तेल की कीमतरू 110.54 डालर यानी  5970 रूपए प्रति बैरल। इस हिसाब से प्रतिलीटर की कीमत आती है 37 रूपए 31 पैसे। इस के शोधन और परिवहन पर प्रति लीटर 3 रूपए का खर्य आता है।
इसके अलावा उसकी मार्केटिंग कमीशन और अन्यय व्यय पर दो रूपए प्रति लीटर का खर्च आता है। इस लिहाज से प्रतिलीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 42 रूपए 31 पैसे आती है। जबकि बाजार में दोगने से अधिक कीमत पर बिकता है। इस लिहाज से केंद्र और राज्यों की सरकारें पचास फीसदी का टेक्स वसूलती हैं। अब बताएं कि तेल कंपनियां घाटे में हैं या मुनाफे में। आखिर अंडर-रिकवरी के दावों और कीमतें तय करने में पारदर्शिता क्यों नहीं है? घाटे के दावों के बावजूद तेल कंपनियों को साल दर साल मुनाफा कैसे हो रहा है?
फेसबुक पर कहा गया है कि पेट्रोल के बाद अब डीजल की कीमतों को डी-रेगुलेट करने की हड़बड़ी क्यों है? कहीं यह पिछले दरवाजे से रिलायंस से लेकर एस्सार तक के लिए बाजार खोलने की तैयारी तो नहीं है? आखिर उनके पेट्रोल पम्प बहुत दिनों से बंद पड़े हैं और चुनाव भी नजदीक हैं?क्या राज्य क्या केन्द्र सब सरकार मिल बाट कर जनता को लूट कर खजाना भरने पे लगे है और फालतू की योजनाओ पे पैसा पार्टी फंड और नेताओ की जेब मे जा रहा है किसी को जनता की फिकर क़हाँ?अब वक़्त है सिर्फ अपने वोट से कुछ नही होगा लोगो को भी सही उम्मीदवार को चुनने के लिये कहना परेगा भविष्य की जिम्मेदारी खुद पूरा करना होगा!!

भट्टारई हाजिर हों!

भट्टारई हाजिर हों!

(गौरव वर्मा)

काठमांडू (साई)। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायालय की अवमानना के लिए प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई को न्यायालय के समक्ष पेश होने को कहा है। उन पर एक पत्रकार और रेडियो नेपाल के रिपोर्टर देकेन्द्र राज थापा की हत्या से जुड़े मामले की जांच में दखल देने का आरोप है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायालय ने एटॉर्नी जनरल मुक्ति नारायण प्रधान को भी इस मामले में हाजिर होने को कहा है। न्यायालय ने एक सप्ताह के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। भट्टाराई के पास कानून मंत्रालय का प्रभार भी है। कथित माओवादियों ने २००४ में थापा का अपहरण कर लिया था। चार साल बाद उनका शव जंगल से बरामद हुआ था।

बर्फबारी ने रोकी राहें


बर्फबारी ने रोकी राहें

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। देश भर में कहीं कहीं भारी बर्फबारी तो कहीं शीतलहर चरम पर है। जम्मू काश्मीर में राजमार्ग तीसरे दिन भी बंद है। उधर हिमाचल में बर्फबारी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के देश भर के ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार मकर संक्रांति के उपरांत ठण्ड ने एक बार फिर अपना असर दिखाना आरंभ कर दिया है।
जम्मू से साई ब्यूरो से विनोद नेगी ने बताया कि कश्मीर घाटी में जवाहर सुरंग पर भारी बर्फबारी और अन्य स्थानों पर जमीन धंसने के कारण तीन सौ किलोमीटर लंबा श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग आज तीसरे दिन भी बंद है। सड़क सुधार में लगे सरकारी कर्मचारियों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सीमा सड़क संगठन राजमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए चौबीसों घंटे काम में लगा हुआ है। खराब मौसम के कारण काम में बाधा आ रही है।
हालात देखकर लगता है कि मौसम के खुलने के उपरांत ही सडक का उपयोग किया जा सकेगा। वैसे दो दिनों से लगातार जवाहर टनल के दोनों तरफ सेताजी नाला, नवगाम, नवरमुंडा, कांजीगुंड और पटनीटाप में सड़क पर २ से ४ फुट बर्फ जमा हुई है। जिसके कारण जम्मू और श्रीनगर के अलावा मार्ग के मुख्य जगहों पर छोटे और माल से भरे वाहनों को ट्रैफिक पुलिस ने रोक दिया।
उधर, भारी बर्फबारी के कारण जहां सड़क पर यात्रा करने वालों को जबरदस्त मुश्किलात का सामना करना पड् रहा है। वहीं इस बर्फबारी से बारामूला कांजीगुंड रेल सर्विस मुताशिर हुई है। सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि कि मौसम में बेहतरी आने के बाद सड़क पर वाहनों को श्रीनगर की तरफ अनुमति दी जाएगी।
हिमाचल प्रदेश से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से रीता वर्मा ने बताया कि राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में दो दिन से रुक-रुक कर बर्फबारी होने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हिमपात वाले क्षेत्रों में सड़क यातायात में बाधा आई है और बिजली तथा पानी की आपूर्ति पर काफी असर पड़ा है।
उधर, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास स्थित नौगाम सेक्टर में भारी बर्फबारी की वजह से शुक्रवार को थल सेना के दो जवानों की मौत हो गई। सेना के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नौगाम सेक्टर में पदम चौकी पर खराब मौसम की वजह से दो जवान मारे गए।श् उन्होंने कहा कि संचार व्यवस्था में बाधा की वजह से मृत्यु का सही कारण नहीं पता चल सका।

अब एमआईएम के निशाने पर बापू


अब एमआईएम के निशाने पर बापू

(जाकिया जरीन)

हैदराबाद (साई)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के एक विधायक ने अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को टारगेट किया है। पार्टी के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और विधायक ने महात्मा गांधी को लपेटे में ले लिया। एमआईएम के विधायक सैयद अहमद पाशा कादरी ने आंध्र प्रदेश स्टेट असेंबली में महात्मा की गांधी की मूर्ति पर निशाना साधा है।
कादरी ने ताना मारते हुए कहा,कि निजाम ने स्टेट असेंबली की इमारत बनवाई थी लेकिन यहां क्या हो रहा है? यहां महात्मा गांधी की मूर्ति लगवा दी गई। इमारत निजाम ने खड़ी की लेकिन मूर्ति गांधी की लगाई गई। कादरी आंध्र प्रदेश विधानसभा में चारमीनार से विधायक हैं। वह गुरुवार को करीमनगर डिस्ट्रिक्ट में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। कादरी ने कहा कि हमने हिन्दुस्तान में कई शानदार इमारतें बनाईं हैं। इन्होंने क्या किया है? हमलोगों ने ताजमहल, लाल किला, कुतुबमीनार, मक्का मस्जिद और चारमीनार बनाए हैं। उन लोगों ने हिन्दुस्तान में क्या बनवाया है?
कादरी ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि वह एमआईएम और उसके नेताओं को टारगेट कर रही है। गौरतलब है कि अकबरुद्दीन ओवैसी नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप में जेल में बंद हैं। कादरी के भाषण के खिलाफ करीमनगर डिस्ट्रिक्ट में बीजेपी के जगित्याल यूनिट के अध्यक्ष राजू ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

शासन की योजनाओं से लाभ उठाकर अपने जीवन को सवारें: कुलस्ते


शासन की योजनाओं से लाभ उठाकर अपने जीवन को सवारें: कुलस्ते

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। जिले के लखनादौन तहसील मुख्य्ाालय्ा के शासकीय्ा उत्कृष्ट उज्चतर माध्य्ामिक विद्यालय्ा के प्रांगण में य्ाहां संपन्न खंडस्तरीय्ा अन्त्य्ाोदय्ा मेले सह जिलास्तरीय्ा लोक कल्य्ााण शिविर में करीब ८ हजार हितग्राहिय्ाों को कुल ४ करोड ४५ लाख रूपय्ो से अधिक की आर्थिक सहाय्ाता राशि एवं सामग्रिय्ाों का वितरण किय्ाा गय्ाा। इस अवसर पर राज्य्ासभा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते मुख्य्ा अतिथि के रूप में मौजूद थे। कायर््ाक्रम की अध्य्ाक्षता लखनादौन विधानसभा क्षेत्र्ा की विधाय्ािका श्रीमती शशि ठाकुर ने की। इस मौके पर अतिथिय्ाों द्वारा प्रतिकात्मक रूप से सभी विभागों के तीन-तीन हितग्राहिय्ाों को आर्थिक सहाय्ाता राशि के चैक, बचत पत्र्ा एवं सहाय्ाक उपकरण आदि वितरित किय्ो गय्ो। मेले में नारी सम्मान दिवस के मौके पर विधाय्ािका श्रीमती शशि ठाकुर ने मुख्य्ामंत्र्ाी शिवराज सिंह चौहान के जनता के नाम संदेश का वाचन किय्ाा और सभी को महिला अपराधों की रोकथाम एवं महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता जगाने के लिय्ो शपथ भी दिलाई। कायर््ाक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में लखनादौन की जनपद अध्य्ाक्षा श्रीमती राजेश्वरी उइके, नगर परिषद की अध्य्ाक्षा श्रीमती सुधा राय्ा, नगर परिषद के पूर्व अध्य्ाक्ष मुनमुन राय्ा, जिला पंचाय्ात सदस्य्ा श्रीमती रैनवती मानेश्वर, अपर कलेक्टर आर।बी।प्रजापति के अलावा जिला पंचाय्ात की मुख्य्ा कायर््ापालन अधिकारी श्रीमती प्रिय्ांका दास, एस।डी।एम। लखनादौन सुश्री लता पाठक, शासकीय्ा विभागों के जिला एवं जनपदस्तरीय्ा अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधिगण तथा बडी संख्य्ाा में ग्रामीणजन उपस्थित थे। मेले का आय्ाोजन जनपद पंचाय्ात एवं नगर परिषद लखनादौन द्वारा किय्ाा गय्ाा था।    
कायर््ाक्रम को संबोधित करते हुए राज्य्ासभा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि इस मेले के माध्य्ाम से करीब ८ हजार हितग्राहिय्ाों का लाभान्वित होना इस बात का प्रतीक है कि सरकार के लोक कल्य्ााणकारी कायर््ाक्रमों का लाभ कितनी तेजी से मिल रहा है। उन्होंने कहा कि म।प्र। सरकार प्रदेश के हर विकासखंड में अंत्य्ाोदय्ा मेला लगा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे शासन की विविध य्ाोजनाओं का लाभ लेकर अपने आजीविका के साधन बढाय्ो, स्वरोजगार करें और अपने जीवन को सवारें। कुलस्ते ने बताय्ाा कि मध्य्ाप्रदेश सरकार प्रदेश के हर किसान के खेत में पानी पहुंचाने का भरसक प्रय्ाास कर रही है और लखनादौन क्षेत्र्ा में भी सिंचाई के विकास की अपार संभावना है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे स्वंय्ा का और अपने समाज का विकास करें, प्रदेश और देश के विकास में भागी बने।
अध्य्ाक्षीय्ा भाषण में लखनादौन विधाय्ािका श्रीमती शशि ठाकुर ने कहा कि मध्य्ाप्रदेश सरकार समाज के सभी वर्गो को विकास की मुख्य्ा धारा से जोडने का काम कर रही है। किसानों का कल्य्ााण और उनका हित हमारी सरकार की प्राथमिकता है। अभी हाल ही में मध्य्ाप्रदेश को माननीय्ा राष्ट्रपति द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार से नवाजा गय्ाा है, य्ाह हमारी सरकार की उपलब्धि है, प्रदेश के किसानों की लगन, परिश्रम और हाड-तोड मेहनत का प्रतिफल है उन्होंने बताय्ाा कि पिछले चार सालों में लखनादौन विधानसभा क्षेत्र्ा में करीब पज्चीस करोड रूपय्ो की लागत के विकास/निर्माण कायर््ा हुए हैं। हम इस क्षेत्र्ा के सर्वागीण विकास के लिय्ो प्रतिबद्व हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने लोकसेवा गारंटी कानून के रूप में जनता को एक अमोघ अस्त्र्ा दे दिय्ाा है। उन्होंने कहा कि य्ाह पहली सरकार है, जिसने लोगों की भलाई के लिय्ो ऐसा कानून बनाय्ाा है। कायर््ाक्रम को अपर कलेक्टर प्रजापति एवं जनपद पंचाय्ात लख्रनादौन की अध्य्ाक्षा श्रीमती उइके ने भी संबोधित किय्ाा।
लखनादौन में संपन्न इस खंडस्तरीय्ा अन्त्य्ाोदय्ा मेले सह जिला स्तरीय्ा लोक कल्य्ााण शिविर में जनपद पंचाय्ात लखनादौन द्वारा शासन की विभिन्न य्ाोजनाओं के तहत पात्र्ा पाय्ो गय्ो कुल ७ हजार ९६५ हितग्राहिय्ाों को ४ करोड ४५ लाख ४६ हजार १६८ रूपय्ो की आर्थिक सहाय्ाता राशि के चेक, लाडली लक्ष्मी य्ाोजना के बचत पत्र्ा, विकलांगों को सहाय्ाक उपकरणों के रूप में ट्राय्ासिकल, श्रवण य्ांत्र्ा व अन्य्ा सामग्रिय्ाां वितरित की गई। नगर परिषद लखनादौन द्वारा ११॰॰ हितग्राहिय्ाों को लाभान्वित किय्ाा गय्ाा। मेले में बताय्ाा गय्ाा कि एक अप्रैल से नवंबर १२ तक लखनादौन जनपद क्षेत्र्ा के कुल एक लाख ४३ हजार ५८३ हितग्राहिय्ाों को शासन की कई य्ाोजनाओं के अंतर्गत करीब १२ करोड ५॰ लाख २२ हजार ८५९ रूपय्ो की सहाय्ाता राशि के चेक एवं सामग्री आदि का वितरण किय्ाा जा चुका है। खंडस्तरीय्ा अन्त्य्ाोदय्ा मेले में सामाजिक न्य्ााय्ा विभाग के कलापथक दल द्वारा शासकीय्ा य्ाोजनाओं के प्रचार-प्रसार के प्रेरक गीत प्रस्तुत किय्ो गय्ो। मेले में शासकीय्ा विभागों द्वारा विविध जनकल्य्ााणकारी य्ाोजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई तथा जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा करीब दो हजार से अधिक लोगों को विभिन्न शासकीय्ा य्ाोजनाओं से संबंधित प्रचार साहित्य्ा का वितरण किय्ाा गय्ाा।  

6 ग्राम स्मैक व 900 ग्राम चुरापोस्त बरामद


6 ग्राम स्मैक व 900 ग्राम चुरापोस्त बरामद

(राज कुमार अग्रवाल)

कैथल (साई)। सीआईए पुलिस ने एक शातिर मादक पदार्थ तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी इससे पुर्व भी मादक पदार्थ तस्करी मामले में न्यायालय द्वारा सजायाब किया जा चुका है। आरोरी के कब्जा से 16 ग्राम स्मैक व 900 ग्राम चुरापोस्त बरामद किया गया, तथा आज न्यायालय में पेश करने उपरांत आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पीआरओ ने बताया एएसआई अजीत राय की टीम को गुप्त सुचना मिली थी, कि चीका की तरफ से आने वाली बस में एक व्यक्ति सीवन में बेचने के लिए मादक पदार्थ ला रहा है। बस स्टैंड सीवन के पास ही पुलिस ने आरोपी सतनाम ङ्क्षसह वासी डेरा बलकार ङ्क्षसह खरकां को काबु कर डीएसपी मुख्यालय टेकनराज शर्मा के समक्ष जब नियम अनुसार कार्यवाही करते हुए तलाशी ली, तो उसके कब्जा से 16 ग्राम स्मैक तथा 900 ग्राम चुरापोस्त बरामद हुआ। थाना सीवन में मामला दर्ज करते हुए आरोपी को मादक द्रव्य पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया।

अवैध देशी कट्टा तथा 2 जिंदा कारतुस बरामद


अवैध देशी कट्टा तथा 2 जिंदा कारतुस बरामद

(ब्यूरो कार्यालय)

कैथल (साई)। थाना कलायत पुलिस ने गस्त व नाकाबंदी दौरान एक कुख्यात अपराधी के कब्जा से अवैध देशी कट्टा तथा 2 ङ्क्षजदा कारतुस बरामद किए है। आरोपी युवक हत्या के मामले में अदालत द्वारा उम्रकैद का सजायाब किया हुआ है, जो पैरोल छुट्टी लेने उपरांत समय पर वापिस हिसार जेल नहीं पहुंचा। दोषी के खिलाफ थाना सदर नरवाना में कैदी सदाचार अधिनियम अंतर्गत मामला दर्ज है, जिस बारे वहां की पुलिस को सुचित कर दिया गया है। बढसिकरी में अपनी मौसी की लड़की के पास छिपने के लिए आ रहे अरोपी को शस्त्र अधिनियम अंतर्गत गिरफ्तार कर आज न्यायालय में पेश करने उपरांत 1 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस प्रवक्ता नें बताया सबइंस्पेक्टर रामपाल अपनी टीम सहित बडसिकरी कैनाल पुल पर नाकाबंदी किए हुए थे। मटौर की तरफ से पैदल आ रहे एक संदिग्ध युवक ने पुलिस टीम को देखकर कन्नी काटनी चाही तो मुस्तैद पुलिस ने उसे मौका पर काबु कर लिया। पुछताछ करने पर उसकी पहचान ओमप्रकाश उर्फ बागड़ी वासी दनौदा खुर्द जिला जींद के रुप में हुई। तलाशी दौरान आरोपी के कब्जा से 315 बोर का अवैध पिस्तौल व 2 ंिजदा कारतुस बरामद हुए। थाना कलायत में मामला दर्ज करते हुए आरोपी को शस्त्र अधिनियम अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। प्रवक्ता ने बताया उपरोक्त आरोपी के खिलाफ थाना ईसराना जिला पानीपत में 6 जनवरी 02 को हत्या व शव खुर्दबुर्द करने के आरोप में मामला दर्ज है। इस मामले में न्यायालय ने 24 जुलाई 08 को आरोपी को उम्रकैद व 6 हजार रुपये जुर्माना का सजायाब किया था, तथा दोषी इस समय हिसार जेल में सजा काट रहा था। 22 नवम्बर  2012 को वह कारावास से पैरोल छुट्टी पर आया था, जिसे 14 दिसम्बर को वापिस हिसार कारावास में उपस्थित होना था। प्रवक्ता ने बताया कलायत पुलिस के सबइंस्पेक्टर रामपाल ने शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर किसी सम्भावित अप्रिय वारदात को टालने में कामयाबी हासिल की है।

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

बेलगाम जुबानें फड़कते बाजू!


बेलगाम जुबानें फड़कते बाजू!

(लिमटी खरे)

नेताओं को अपना मुंह खोलने के पहले संयंम बरतना बेहद जरूरी है। नेताओं के मुंह से निकली वाणी उनके समर्थकों, अनुयाईयों के लिए पत्थर की लकीर होती है। नेताओं द्वारा कही गई बात से बवाल मच सकता है। भारत पाकिस्तान की सीमा पर भारतीय सैनिक के सर काटे जाने के उपरांत देश में जमकर हंगामा मचा। इसके पहले गेंग रेप के मामले में भी हंगामा हुआ था। गेंग रेप के समय देश में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर था, इसलिए किसी भी दल के नेता ने कुछ बोलने का साहस नहीं जुटाया। अब जब मृत सेनिक की बेवा अपने पति के सर को लाने के लिए अनशन पर बैठी तब नेताओं की तंद्रा टूटी और बयानबाजी आरंभ हुई। सुषमा स्वराज ने पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना बयान देकर ठहरे हुए पानी में हलचल मचा दी। उधर, सहिष्णु का लबादा ओढ़े भारत की छवि नपुंसक की बनती जा रही है। इंटरनेशनल मंच पर पाकिस्तान की हरकतें जग जाहिर हैं इसलिए भारत बचा हुआ है, वरना हिना रब्बानी ने तो सुषमा स्वराज के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देकर भारत पर उकसाने का आरोप मढ़ ही दिया था।

भारत पाक सीमा पर युद्ध विराम का उल्लंघन अनेकों बार हुआ है। एक दशक में यह तीसरी बार हुआ है कि भारतीय जवानों के सर काटकर ले गए पाकिस्तान के जवान। कठोर कार्यवाही के आदेश ना दिए जाने पर जवानों का मनोबल टूटा और खबरों के अनुसार उन्होंने सौ घंटे तक बिना भोजन लिए ही अपनी ड्यूटी पूरी की। भारत सरकार इस बात पर ही अपनी पीठ थपथपाती रही कि उसने पाकिस्तान को चेता दिया, उसने पाकिस्तान के राजदूत को तलब कर अपनी नाराजगी का इजहार कर दिया।
यह स्वीकार्य मान्यता है कि भारत देश सहिष्णु, सभी धर्मों का आदर करने वाला, सहनशील, पडोसी धर्म निभाने वाला, सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला, सत्य का साथी है। अब यह भी कहा जाने लगा है कि सहिष्णुता की आड में हमने नपुंसकता को ओढ़ लिया है। दुनिया को दिखाने के चक्कर में हम अपनी असली पहचान खोते जा रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ भारत के पास सैकड़ों सबूत हैं जिनसे साबित किया जा सकता है कि पाकिस्तान द्वारा ही भारत के अंदर आतंकवाद फैलाकर अस्थिरता की कोशिशें जारी हैं।
बावजूद इसके भारत बार बार कभी क्रिकेट के बहाने, कभी उदार वीजा नीति के बहाने, कभी सड़क, कभी रेल मार्ग के बहाने पाकिस्तान से दोस्ती की पहल करता ही आ रहा है। प्रचीन किंवदंती का जिकर यहां लाजिमी होगा। एक साधु नदी किनारे से गुजर रहे थे। नदी में उन्होंने एक बिच्छू को बहाव में संघर्ष करते देखा। उनसे नहीं रहा गया। उन्होंने बिच्छू को हाथ में उठाकर बाहर निकालना चाहा।
बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया। फिर वह पानी में गिर पड़ा। साधु ने दोबारा उठाया फिर वही हुआ। पांच सात बार डंक के असर से साधू का हाथ शून्य पडने लगा तो उन्होंने दूसरे हाथ का प्रयोग किया। अंततः वे काफी देर बाद बिच्छू को नदी से बाहर निकालने में सफल हो ही गए। यह सब कुछ एक व्यक्ति देख रहा था। उसने साधू से पूछा -‘‘भंते, बिच्छू आपको बार बार डंक मार रहा था। आप उसे पानी में ही छोड़ देते ना मरने के लिए, क्यों बार बार आपने कष्ट सहा।‘‘
साधु ने मुस्कुराकर जवाब दिया -‘‘पुत्र, दरअसल, डंक मारना बिच्छू की फितरत है और बचाना हमारा धर्म।‘‘ तातपर्य यह कि हम बार बार दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं और पाकिस्तान बार बार डंक मारने से बाज नहीं आता है। जब स्थिति यह है तो आखिर हम ही क्यों बार बार दोस्ती का हाथ बढ़ाएं। इस मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का स्टेंड सही है कि पाकिस्तान को वे गुजरात में ना तो खेलने देंगे और ना ही व्यापारिक गतिविधियों में भागीदार बनने देंगे।
इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज का बयान आश्चर्यजनक ही माना जाएगा कि भारतीय जवान का सर नहीं ला सकते तो कम से कम दस पाकिस्तानियों के सर ले आओ। सुषमा स्वराज दिल्ली की सीएम रही हैं। सांसद हैं उनका संसदीय जीवन लंबा है। सुषमा स्वराज को गंभीर नेताओं की श्रेणी में गिना जाता है। सबसे बड़ी बात वे महिला हैं।
पकिस्तान की इस बर्बरता पर उनका उद्वेलित होना स्वाभाविक है, किन्तु उनसे इस तरह के गैरजिम्मेदाराना बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती। सुषमा स्वराज के इस तरह की बयानबाजी से भाजपा के युवाओं के बाजू फड़कने लगेंगे और वे कुछ कर गुजरने के लिए कुछ भी कर डालेंगे। इसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या पाकिस्तान सीमा में घुसना हंसी खेल है, कि वहां से लोगों के सर काटकर लाए जाएंगे।
वहीं, दूसरी ओर सुषमा स्वराज के बयान के बाद ही पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी अपना मुंह खोला और कह ही दिया कि भारत युद्ध भड़काने का प्रयास कर रहा है। सुषमा के बयान के कारण ही पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चढ़ने का मौका मिल गया। हिना रब्बानी खार ने यह तक कह डाला कि पाकिस्तानी हुकूमत किसी भी तरह के युद्ध ना करने की नीति पर कायम है।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की तर्ज पर खार ने कहा कि अगर कोई ठेठ पाकिस्तानी सरकार होती तो इसका जवाब वह जैसे को तैसा की तर्ज पर देती। लेकिन हमारी सरकार ने पिछले कुछ दिनों में भारत द्वारा दिए आक्रमक बयानों पर शांतिपूर्वक प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के दो सैनिक मरे और भारत का कहना है कि उनके भी दो सैनिक मरे हैं। पाकिस्तान सरकार युद्ध की स्थिति को रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है।
यह तो वैश्विक स्तर पर सभी पाकिस्तान को अच्छी तरह से जानते हैं वरना खार के बयान से तो भारत को बैकफुट पर आने पर मजबूर होना ही पड़ता। नरेंद्र मोदी के तल्ख रवैए और सरकार के कुछ हद तक सख्त हुए तेवरों से पाकिस्तान ने अपने आप को पीछे कर बातचीत की पेशकश की है।
इस संबंध में जनरल विक्रम सिंह का बयान तारीफे काबिल रहा। जनरल ने दो टूक शब्दों में कमोबेश यही बात कही कि पाकिस्तान अगर अपनी हरकतें बंद नहीं करता है तो भारत को अपने तरीके से कदम उठाने का पूरा हक है। माना जा रहा है कि जनरल का यह बयान हुक्मरानों की सहमति के उपरांत ही मीडिया में आया है।
वैसे देखा जाए तो मंच से बोलते समय तालियों की गड़गड़हाट सुनने को बेचेन राजनेता अक्सर अपना संयम तोड़ देते हैं। कभी कभी तो सुर्खियों में बने रहने भी नेताओं द्वारा आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता है। मामला चाहे उत्तर भारतीयों को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे का हो या फिर शिवसेना प्रमुख स्व.बाला साहब ठाकरे का। दोनों ही नेताओं ने जात पात और क्षेत्रवाद की बात कहकर लोगों के मन मस्तिष्क में जहर बो दिया है। कहने का तातपर्य महज इतना ही है कि किसी भी बारे में बयान देने के पहले नेताओं को कम से कम यह तो सोच लेना चाहिए कि उनके बयानों की प्रासंगिकता क्या है और सभ्य समाज पर उनकी बयानबाजी का क्या असर पडने वाला है।

चुनावी साल में सो रहे शिव के गण!


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 39

चुनावी साल में सो रहे शिव के गण!

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। इस साल के अंत में मध्य प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में जनकल्याणकारी नीतियों की लंबी लाईन लगा रखी है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता का ग्राफ दिनों दिन उपर ही उठ रहा है। विपक्ष चाहकर भी शिवराज पर हमले नहीं कर पा रहा है। इन परिस्थितियों में इस साल गणतंत्र दिवस पर मध्य प्रदेश की झांकी ना होना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि देश के हृदय प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ अभियान का आगाज किया। इसके उपरांत 2007 में लाडली लक्ष्मी योजना का श्रीगणेश किया जिसमें लगभग साढ़े तेरह लाख बच्चियां अब तक लाडली लक्ष्मी बन चुकी हैं। महिलाओं पर आधारित तेजस्वनी योजना के तहत स्वसहायता समूहों का गठन भी किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान के खाते की सबसे सुपर डुपर हिट योजना है मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना। इस योजना पर आधारित झांकी अगर इस साल गणतंत्र दिवस पर राजपथ से गुजरती तो निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में भाजपा को जमकर लाभ होता। इस योजना में उत्तराखण्ड, उड़ीसा, गुजरात, जम्मू काश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडू, झारखण्ड, कर्नाटक और महाराष्ट्र का चयन किया गया है।
इन राज्यों में जब तीर्थ दर्शन योजना की रेलगाडी जाती और उसकी जमकर पब्लिसिटी करवाई जाती तो निश्चित तौर पर इसका लाभ वहां भाजपा को मिल सकता था। इन राज्यों में भाजपा की स्थानीय इकाई अगर तीर्थ यात्रियों का स्वागत करती तो इसका संदेश बहुत ही अच्छा जा सकता था, विडम्बना ही कही जाएगी कि मध्य प्रदेश के सरकारी नुमाईंदे और शिवराज सरकार के अंगों ने इस दिशा में विचार ही नहीं किया।
देश की राजधानी दिल्ली के मंहगे व्यवसायिक इलाके कनाट सर्कस के बाराखम्बा रोड़ स्थिति मध्य प्रदेश आवासीय आयुक्त के कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 2013 के अंत में चुनाव होने हैं और फिर अगली सरकार किसकी बनती है अगले साल गणतंत्र पर प्रदेश की झांकी क्या बनेगी यह बात भविष्य के गर्भ में है, किन्तु इस बार गणतंत्र दिवस पर चुनावी साल होने के बाद भी इसका फायदा मध्य प्रदेश के सरकारी नुमाईंदों ने शिवराज सिंह को नहीं लेने दिया, जो आश्चर्य का विषय ही माना जा रहा है। सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क के फील्ड पब्लिसिटी में पदस्थ एक अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि उनका तबादला दिल्ली से वापस कर दिया गया था, इसलिए पिछले दो सालों से उन्होंने इस मामले में अपनी दिलचस्पी ना दिखाते हुए झांकी के प्रोग्राम से किनारा ही कर रखा है।

मौसम ने पल्टी मारी, बरसा कहर


मौसम ने पल्टी मारी, बरसा कहर

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। मौसम में आई अचानक गर्मी से राहत महसूस कर रहे देशवासियों के सामने एक बार फिर से परेशानी उतपन्न हो गई है। देश के अनेक स्थानों में बर्फ, ओले, मवाठे गिरने से मौसम में ठण्डक घुल गई है। मैदानी इलाकों में भी सुर्खा यानी ठण्डी हवाओं ने लोगों को घरों में दुबके रहने पर मजबूर कर दिया है।
जम्मू से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से विनोद नेगी ने बताया कि कश्मीर घाटी में इस मौसम की सबसे भारी बर्फ गिरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। घाटी मे बिजली सप्लाई में भी रूकावट आई है। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है और कई इलाकों में बर्फानी तूदे गिराने की चेतावनी जारी की गई है। श्रीनगर शहर भी बर्फ की चादर में लिपटा हुआ है। श्रीनगर- जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए भी दूसरे दिन भी बंद है। प्रशासन ने घाटी में सड़कों से बर्फ हटाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।
साई ब्यूरो ने मौसम विभाग के हवाले से खबर दी है कि जम्मू कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बर्फीले तूफान की चेतावनी दी है। साथ में हिमस्खलन का अंदेशा भी जताया है। बर्फबारी का सबसे ज्यादा असर पुंछ इलाके में पड़ा है, जहां दो से दस फीट तक बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। जम्मू-कश्मीर से भी भारी बर्फबारी की खबर है। स्नो ऐंड एवलांच स्टडी इस्टेबलिशमेंट (सासे) ने सेना को चेतावनी जारी करते हुए कश्मीर के बर्फीले इलाकों में अलर्ट रहने को कहा है। डिवीजनल डिजास्टर मैनेजमेंट कश्मीर ने कुछ इलाकों में हिमस्खलन की चेतावनी भी जारी की है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद कर दिया गया। प्रदेश में औसतन 2 फीट तक बर्फ गिरी है।
जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को कश्मीर घाटी समेत पीर पंजाल के ऊंचे पर्वतों पर हल्की बारिश के साथ बर्फबारी हुई। काजीकुंड में 6.2 मिलीमीटर हिमपात हुआ। यहां मौसम विभाग ने और बर्फबारी की संभावना जताई है। भारी बर्फबारी के कारण 294 किलोमीटर लंबे श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिया गया है। यह कश्मीर को शेष देश से जोडऩे वाला एकमात्र सड़क मार्ग है।
राज्य में ताजा हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश हुई है। न्यूनतम तापमान माइनस से सामान्य की ओर लौट आया है। उधर, भारी बारिश और बर्फबारी के बाद शिमला में भी अधिकतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। यहां का अधिकतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस रहा। लद्दाख में भीषण ठंड जारी है। उधर, मैदानी इलाकों में हुई बारिश एवं बर्फीली हवाएं चलने से ठंड में इजाफा हुआ है। खुश्क मौसम की वजह से कड़ाके की ठंड झेल रहे वादी के लोगों को राहत मिली है। श्रीनगर में तापमान माइनस से उभर कर 0.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है।
उधर, शिमला से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से रीता वर्मा ने बताया कि समूचा हिमाचल प्रदेश भी भीषण शीतलहर की चपेट में है। राजधानी शिमला सहित कुफ्री, नारकंडा, मनाली और डलहौजी जैसे पर्यटन स्थलों में भी बर्फबारी हुई। वहीं, हिमाचल प्रदेश के शिमला सहित कुफरी, नारकंडा, मशोबरा, चौल में दिनभर हिमपात होता रहा। यहां 10 से 12 सेंटीमीटर बर्फ पड़ी। मनाली, शाली, चौल और सोलन जिले में भी सुबह हल्का हिमपात हुआ। निचले इलाकों में बारिश हुई। धुंध की वजह से भारत-तिब्बत रोड पर यातायात प्रभावित रहा।
शिमला में अधिकतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस लुढ़ककर 6.3 डिग्री सेल्सियस हो गया। सुबह शिमला का न्यूनतम तापमान 0 डिग्री तक पहुंचा। सुंदरनगर का न्यूनतम तापमान 4.4, भुंतर 2.8, कल्पा -3.2, धर्मशाला 9.4, मंडी 2.5, नाहन 8.7 और सोलन 5 डिग्री सेल्सियस था। प्रदेश के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश से लंबे समय से सूखी जमीन तर हो गई है। किसानों के चेहरों पर रौनक है। सेब बागबान बाग-बाग हो गए हैं। मायूस दिख रहे पर्यटन व्यवसायियों के फिर दिन निकल पड़े हैं। हो भी क्यों न पहाड़ों पर उम्मीद के फाहों की बरसात जो हुई है।
 पहाडिय़ों पर ताजा बर्फबारी से हिमाचल प्रदेश में शीतलहर बढ़ गई है। गुरुवार शाम पांच बजे तक मनाली में आधा फुट बर्फ दर्ज की गई। यहां सैलानियों का आगमन भी शुरू हो गया है। पर्यटन स्थल नगर, जगतसुख, रांगड़ी, रोहतांग सहित ग्रांफू व कोकसर, धुंधी जोत, मकरवेद व शिकरवेद की पहाडिय़ों, हनुमान टिब्बा, इंद्र किला, हामटा, भृगु जोत, दशौहर लेक में भी भारी बर्फबारी हो रही है। जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में हवाई सेवा भी ठप हो गई है। केलांग में चार मरीज है। इनमें से एक ही हालत नाजुक है। प्रशासन ने हवाई सेवा मांगी है। लेकिन मरीजों को मौसम खराब होने के चलते दो दिन तक और इंतजार करना पड़ सकता है। शिमला के डीएम ट्रैफिक एचके गुप्ता ने बताया कि रामपुर डिपो की बस को वाया बसंतपुर शिमला भेजा गया। बर्फबारी के चलते यातायात व्यवस्था ठप रही। इसके अलावा रोहतांग और मनाली आदि क्षेत्रों में भारी हिमपात के बाद यातायात ठप हो गया है।
उत्तर भारत में मौसम फिर से बदल गया है। दिल्ली के अलावा मैदानी इलाकों में कई जगहों पर सीजन में पहली बार ओले गिरे हैं जबकि पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है। दिल्ली में गुरुवार शाम से ही रुक-रुककर बरसात शुरू हो गई हुई और देखते ही देखते कई जगह ओले पड़ने लगे। मौसम विभाग की मानें ठंड एक बार फिर तेज हो सकती है।
उत्तर प्रदेश समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से दीपांकर श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई। यह बारिश गेहूं समेत सभी फसलों के लिए लाभदायक है। मुजफ्फरनगर में 3.4 और मेरठ में 1.7 मिलीमीटर बारिश हुई। गुजरात में भी कच्छ-भुज, सौराष्ट्र और बनासकांठा इलाकों में बारिश हुई। हालांकि इस बारिश से राज्य में नमक उद्योग को नुकसान की आशंका है।
वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर से साई ब्यूरो सचिन धीमान ने बताया कि जिले में दस साल बाद बीस मिनट तक आसमान से ओले बरसते रहे और सड़कों पर बर्फ के टुकड़ों की चादर बिछ गई। ओलों से फसलों को नुकसान होने का खतरा है। इस बीच पहाड़ों पर कई जगह बर्फबारी जारी है।
इसके पहले बुधवार की रात और गुरुवार के दिन में हिमाचल में बर्फबारी के चलते 2 दर्जन से ज्यादा सड़कें बंद हो गईं। प्रदेश के कई इलाकों में 2 फुट तक बर्फ जम गई। कश्मीर में सेना को हिमस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश से हाल बेहाल है। यूपी के कई इलाकों में बारिश हुई और ओले भी गिरे। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर बढ़ने की वजह से मौसम में यह बदलाव आया है। 48 घंटों में मौसम और बिगड़ सकता है। हिमाचल और उत्तराखंड में अगले 48 बर्फबारी की चेतावनी दी गई है।
आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ठंड फिर जोर पकड़ सकती है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने से गुरुवार को जम्मू कश्मीर में ताजा हिमपात हुआ। वहीं मैदानी इलाकों में बारिश हुई। कई जगह ओले भी पड़े। राजस्थान में जयपुर, शेखावाटी क्षेत्र में, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और मध्यप्रदेश के ग्वालियर, मुरैना और नई दिल्ली में बारिश के साथ ओले गिरे।
 मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार बुधवार को आया पश्चिमी विक्षोभ के तूफान से नीचे की हवा सतह से 8 किमी. तक आसमान में उठ गई। 3500 मी. से ऊपर नमी और पानी की बूंद बर्फ बन जाती है। नमी घुलने के कारण बनी बूंदें बर्फ के टुकड़ों में बदलने से ओलावृष्टि हुई। विक्षोभ के कारण जिन स्थानों पर हवा 3500 मी. से कम ऊंचाई पर उठी, वहां बूंदें जमी नहीं और बारिश के रूप में बरसी।
राजस्थान से साई ब्यूरो से शैलेन्द्र ने बताया कि मौसम विभाग ने अगले 36 घंटे में उतरी राजस्थान और खासकर जयपुर, बीकानेर और जोधपुर संभाग में मेघ गर्जना और आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की है। जयपुर में अगले 24 घंटे में बादल छाने और हल्की बौछारों की संभावना व्यक्त की गई है।
राजस्थान में मौसम का मिजाज फिर बदल गया। कई स्थानों पर बारिश हुई और ओले गिरे। जयपुर में रात करीब सवा दस बजे पांच्यावाला, वैशालीनगर, सीकर रोड, झोटवाड़ा, कालवाड़, मुरलीपुरा सहित कई इलाकों में आंधी चली। इस दौरान बेर के आकार तक के ओले गिरे। रात 11 बजे तक फुहारें गिरती रहीं। यहां तापमान १४.८ डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जोधपुर और चूरू सहित शेखावाटी के कई हिस्सों में बारिश हुई। कई जगह ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने आगामी ३६ घंटों में उत्तरी राजस्थान में फिर बारिश की संभावना जताई है।
गुडगांव से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से अनेशा वर्मा ने बताया कि हरियाणा में गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे एकाएक मौसम ने करवट बदली। पहले हल्की बूंदाबांदी हुई, फिर अचानक अंधियारी छा गई। मौसम का यह परिवर्तन शहरी व ग्रामीण क्षेत्र दोनों स्थानों पर रहा। कुछ देर बाद जब अंधियारी छठी और मौसम साफ हुआ तब फिर बारिश की फुहारें गिरना शुरू हुईं। ऐसे में खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हैरानी तब हुई जब पानी के साथ-साथ तेज गति से ओलावृष्टि होने लगी। आसमान से सफेद मोती झडऩे का यह नजारा पांच से छह मिनट तक रहा।
मुजफ्फरनगर से साई ब्यूरो प्रमुख सचिन धीमान के अनुसार सुबह अचानक बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ शुरू हुई बारिश दोपहर बाद तक रूक रूक कर चलती रही। दोपहर करीब दस बचे हल्की धूप निकली लेकिन अचानक काले बादल छा गये और देखते ही देखते आसमान से आलों की बारिश शुरू हो गई। करीब दस मिनट तक जबरदस्त ओलावृष्टि होती रही। नगर की सड़कें ओलों की चादरों से बिछ गई। आधा इंच के करीब मोटे ओलों को देखकर नागरिक हैरान हो गये। इसके बाद करीब दो बजे फिर धूप निकली जिससे मौसम ठीक हुआ लेकिन तीन बजे के बाद फिर बर्फीली हवाओं ने नागरिकों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया।
कई दिन की लगातार ठंड के बाद पिछले दो दिनों से मौसम में कुछ गर्मी थी गत दिवस भी मौसम ठीक ठाक रहा। रात्रिमें तारे भी निकले लेकिन अचानक गुरूवार की सवेरे मौसम का मिजाज अचानक बदल गया और आसमान में काली घटा के बीच बरसात शुरू हो गयी। थोड़ी-थोड़ी देर बाद पड़ रही बरसात के कारण सड़कों पर पानी और कीचड़ हो गया। ग्यारह बजे के आसपास मौसम खुला लेकिन उसके थोडी देर बाद ही अचानक ही आसमान में काले-काले बादल छा गये। इन बादलों से बारिश की बूंदों की बजाये बर्फ की बौछार शुरू हो गयी। कंचे के आकार के ओले सड़कों पर दूर-दूर तक बिछ गये। पूरी सड़क पर रूई सी बिछी महसूस होने लगी। लेकिन बाद में थोड़ी सी बौछार के बाद ही आसमान फिर पूरी तरह से साफ हो गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बरसात के बाद पाला पूरी तरह से धुल जायेगा। हालांकि अभी ठंड से निजात नहीं मिलेगी। अगले एक सप्ताह तक सर्दी का प्रकोप जारी रहने की उम्मीद है।