सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

नर्मदा कुंभ में आएंगे देश भर से लाखों श्रद्धालु

नर्मदा कुंभ में आएंगे देश भर से लाखों श्रद्धालु
 
(मनोज मर्दन त्रिवेदी)
 
सिवनी -: जिस अभूतपूर्व आयोजन के लिए पिछले छ: माह से युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही है वह क्षण अब निकट आ गया है। और आगामी १०,११ एवं १२ फरवरी को  आयोजित होने वाला नर्मदा सामाजिक कुम्भ के पूर्व विभिन्न धार्मिक आयोजन प्रारंभ हो गये हैं, ३ फरवरी को विशाल और ऐतिहासिक अद्भुत नजारा मण्डला में दिखाई दिया और इसी कि साथ नर्मदा सामाजिक कुम्भ का आगाज हुआ है निमित्त कुम्भ स्थल पर वृंदावन से पधारे अतुलकृष्ण भारद्वाज महाराज द्वारा रामकथा की रस धार प्रवाहित की जा रही है तथा रात्रि के समय श्री कृष्णलीला पर आधारित रास लीला का नैनाभिराम चित्रण किया जा रहा है। कुम्भ स्थल पर ९ फरवरी से वंशावली लेखकों को भी आमंत्रित किया गया है। जिनका सम्मेलन ९फरवरी को होगा। नर्मदा कुम्भ आयोजन धार्मिक महत्व बढ़ाने के साथ ही राष्ट्रीय एकता और समरसता जैसे पवित्र उद्देश्य को लेकर आयोजित किया गया है नर्मदा सामाजिक कुम्भ में शामिल होने वाले लगभग ३० लाख श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या को दृष्टिगत रखते हुए  व्यवस्थाएं की गई हैं।
स्नानार्थियों के लिए सुरक्षा:-
लगभग ३० लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की अनुमानित संख्या को दृष्टिगत रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सहित स्नान करने के लिए घाटों का निर्माण किया गया है। प्रत्येक घाट में लगभग ५० श्रद्धालु प्रति मिनिट स्नान करेंगे। इसके साथ रपटा स्थित घाटों में हजारों श्रद्धालु एक साथ स्नान कर सकते हैं कुम्भ की दृष्टि से नर्मदा का जल स्तर बढ़ाने के लिए एनिकट का निर्माण किया गया है, जिससे नर्मदा का जल स्तर बढ़ा हैं। किसी भी प्रकार की दुर्घटना घटित न हो इसके लिए स्थानीय ६० गोताखोर तैनात किये गये हैं। इसके साथ ही चप्पे - चप्पे पर कड़ी पुलिस व्यवस्था, कुम्भ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए तैनात की गई है।
इसके पूर्व भी आयोजित हुए  हैं ऐसे कुम्भ:-
धर्म ग्रन्थों के आधार पर आयोजित होने वाले कुम्भों के अतिरिक्त पवित्र तीर्थ स्थलों पर अनेक उद्देश्यों को लेकर कुम्भ आयोजित किये गये हैं। राजिम मथुरा एवं पांच साल पूर्व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा सन् २००६ में गुजराज के ढांड़ जिले में साबरी कुम्भ का आयोजन किया जा चुका है जिसमें १० लाख श्रद्धालु शामिल हुए थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निर्देशन में यह दूसरा कुम्भ मण्डला मेंं आयोजित हो रहा है।
व्यापक व्यवस्था:-
कुम्भ के लिए ३५०० एकड़ जमीन पर रानीदुर्गावती पूरम बसाया गया है, इसके साथ ही ठहरने के लिए ५० नगर बसाये गये है, हर नगर की क्षमता ५००० नागरिकों के लिए रहेगा लगभग २.५० लाख श्रद्धालु  यहां हर दिन रूकेंगे ऐसा अनुमान लगाया है शेष श्रद्धालु रात्रि के समय घर लौट जायेंगे भोजन के लिए राजस्थान से विशेष रसोयें बुलाये गये हैं जो लाखों श्रद्धालुओं को सीमित समय में भोजन पकाकर खिलाने की महारत रखते हैं। १५ लाख व्यक्ति यहां भोजन करेगा इसके लिए ८ कम्यूनिटि किचिन बनाये गये हैं प्रत्येक किचिन में २ लाख व्यक्तियों को लिए खाना पकाया जायेगा। सुरक्षा के इंतेजामों का जायजा पुलिस महानिदेशक संतोष राउत ने भी पिछले दिनों लिया है। कुम्भ के दौरान मंडला में व्यापक सुरक्षा व्यवथा रहेगी और क्षेत्र में पुलिस जवान तैनात किये गये हैं।
पहुंचने वाले अतिथि:-
कुम्भ शुभारम्भ के साथ ही अनेक अतिथि और वक्ता कुम्भ में पहुंचेंगे संघ संचालक मोहन भागवत आचार्य गोविंद देव गिरी, अशोक सिंघल, विजय कौशल जी महाराज,महामण्डलेश्वर हरानंद जी बालक दास जी महाराज, परम पूज्य शंकराचार्य, वासुदेवानंद जी महाराज, संत बालक दास जी महाराज, सत्यमित्रानंद जी महाराज, आचार्य किशोर दिलीपसिंह जूदेव, साध्वी ऋतम्भरा, प्रवीण तागोडिय़ा, इंद्रेश पूर्व संघ चालक, कुप्पी सुदर्शन, विष्णु कोकजे, सुरेश सोनी, लक्ष्मीकांत चावला, सहित भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एवं अन्य राजनैतिक हस्तियां कार्यक्रम में शामिल होंगी।
 
यातायात व्यवस्था:-
 
कुम्भ के दौरान म.प्र. के पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालुओं के लिए विशेष यातायाव व्यवस्थाएं  की गई हैं। मण्डला के पड़ोसी जिलों से कुम्भ मेें पहुंचने वालों के लिए यात्री किराये में भी छूट वाहन संचालकों द्वारा प्रदान की जा रही है। कुम्भ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

रविवार, 6 फ़रवरी 2011

मथुरा, ब्रज व राजिम में भी भर चुका है मण्डला जैसा कुम्भ

मथुरा, ब्रज व राजिम में भी भर चुका है मण्डला

 जैसा कुम्भ-राजेन्द्र मिश्र

सिवनी यशो-: कुम्भ शब्द का प्रयोग देश के चार पवित्र स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन के बाद अब मण्डला में पहली बारे अब मण्डला में पहली बार हो रहा है यह कहना पूरा सच नहीं है। इसके पूर्व भी प्रति छ: वर्ष में मथुरा, ब्रज एवं राजिम में आयोजित होने वाले पर्व में  कुम्भ शब्द का प्रयोग किया जा चुका है। आगामी दिनों में मण्डला में तीन दिनों के आयोजन को सामाजिक कुम्भ का नाम दिया गया है। यह भी पूरी तरह स्पष्ट है कि मण्डला का यह आयोजन पवित्र धाम प्रयोग, हरिद्वार नासिक और उज्जैन जैसा धाॢमक कुम्भ नहीं है।
उक्ताशय की बात प्रख्यात ज्योर्तिविद पंडित राजेन्द्र प्रसाद मिश्र के द्वारा कही गई है। आपने कहा है कि धार्मिक रूप से प्रचलित कई शब्दों का प्रयोग अनेकानेक सामाजिक राजनैतिक संगठनों के द्वारा अवसर विशेष अथवा आयोजनों के दौरान किये जा चुके हैं और किये जाते हैं। उस समय उन शब्दों के प्रयोग पर लोगों का विरोध क्यों नहीं हुआ और आज ऐसा कयों किया जा रहा है? श्री मिश्र ने कहा है कि निश्चित रूप से मण्डला के इस आयोजन में कुम्भ शब्द का उपयोग भी केवल व्यवहारिक है। धार्मिक विधान या आस्था की गूढ़ता से उसका कोई गहरा सम्बन्ध नहीं है तथापि यह भी सत्य है कि सनातन संस्कृति के प्रकाण्ड विद्वान री मण्डन मिश्र जो आगे चलकर शंकराचार्य सुरेश्वाचार्य के नाम से विख्यात हुए की जन्मस्थली मण्डलों में पतित पावनी माँ नर्मदा की जयंती के उपलक्ष्य में होने वाला यह आयोजन कई दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि तीन दिवसीय इस आयोजन में अनेक विद्वान संत महात्मा और श्रद्धालुजन यहां एकत्रित होंंगे और पवित्र भावना से लोगों का यह एक त्रिकरण वहां के वातावरण में पवित्रता लाकर उस तीर्थ की महत्वता को ही बढ़ाएगा। मूलत: आदिवासी और पिछड़े तथा सामाजिक समरसता से कटे यहां के लोगों के लिए यह एक ऐसा अवसर होगा जो उन्हें एक नई दिशा प्रदान करने वाला भी सिद्ध होगा इसीलिए इस सामाजिक कुम्भ का विरोध किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता।

भूतल परिवहन मंत्रालय ने हृदय प्रदेश से किया किनारा



निजाम बदलते ही एमपी से भेदभाव आरंभ
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय के निजाम बदलते ही विभाग ने देश के हृदय प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार करना आरंभ कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा भले ही तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ पर मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव के आरोप लगाए जाते रहे हों, पर मध्य प्रदेश के खाते में कमल नाथ ने कुछ न कुछ अवश्य ही डाला है।
सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री के आला दर्जे के सूत्रों का कहना है कि विभाग के नए निजाम की प्राथमिकता पर अब राजस्थान सर्वोपरि हो गया है, इसलिए अब योजनाएं, मद, फंड, कार्यप्रणाली, विस्तार आदि में राजस्थान को प्राथमिकता मिलना आरंभ हो गया है। उत्तर प्रदेश क झांसी से चंदेलों के समय की सुप्रसिद्ध मूर्तिकारी के लिए प्रसिद्ध खजुराहो के बीच का सड़क निर्माण कार्य राष्ट्रीय सड़क प्राधिकरण ने रोक दिया है। एनएचएआई द्वारा मध्य प्रदेश में प्रस्तावित फोरलेन मार्गों को अब निचली प्राथमिकता पर रख दिया गया है। सूत्रों ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश मंे स्वीकृत हुए नेशनल हाईवे के निर्माण चाहे वे टू लेन हों या फोरलेन की समयावधि भी अब अनिश्चित ही समझी जानी चाहिए।
गौरतलब होगा कि मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व में मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ को जिम्मेदार ठहराकर अनेक बार जनता के बीच जाकर अभियान चलाने और प्रधानमंत्री से मिलने की बात कही गई थी, जिसे अमली जामा कभी नहीं पहनाया गया। अब जबकि एनएचएआई द्वारा साफ तौर पर मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव किया जा रहा है, तब मध्य प्रदेश भाजपा और शिवराज सरकार क्या स्टंेड लेती है, लोगों की नजरें इस पर आकर टिक गईं हैं।

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

मोबाईल टावर बनाम खतरे की मीनारें


खतरे की तरंगें 
मलाई काट रही मोबाईल कंपनियां फैला रहीं अजब प्रदूषण
 
मानव जीवन से खिलवाड़ करती मोबाईल कंपनियां
 
अंधा पीसे कुत्ता खाए की तर्ज पर चल रहा है मोबाईल कारोबार
 
(लिमटी खरे)

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही भारत गणराज्य में संचार क्रांति चरम पर पहुंच चुकी है। कमोबेश हर हाथ में मोबाईल ही दिखाई पड़ता है। एक समय था जब लेंड लाईन हुआ करती थी, वह भी बड़ी ही सीमित। फोन उठाईए, एक्सचेंज मिलाईए नंबर बताईए, फिर लोकल काल भी वही मिलाकर देगा। धीरे धीरे डायलिंग सिस्टम आरंभ हुआ। फिर ट्रंक काल बुकिंग, एक्सचेंज से आवाज आती थी, लाईटनिंग है, एक्सप्रेस या आर्डनरी। समय बदला राजीव गांधी के जमाने में सेम पित्रोदा ने संचार तकनीकों को बेहद उन्नत बनाया। उस दौरान कार्ड लेस फोन रखना ही स्टेटस सिंबाल होता था। आज हर हाथ में एक मोबाईल वह भी कलर स्क्रीन वाला दिखाई पड़ जाता है।
पिछले कुछ सालों में मोबाईल फोन उपभोक्ताओं की तादाद में विस्फोटक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इसी अनुपात में मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने जगह जगह टावर लगा दिए गए हैं। इन टावर को लगाने के लिए जगह के मालिक को हर माह मोटी रकम भी अदा करती हैं मोबाईल कंपनियां। इन टावर्स की स्थापना के लिए बाकायदा मानक तय किए गए हैं। विडम्बना ही कही जाएगी कि इन मानकों के पालन में मोबाईल कंपनियां पूरी तरह से संवेदनहीन ही दिखाई पड़ी हैं।
मोबाईल फोन से होने वाले रेडिएशन की वास्तविकता इसके दुष्प्रभावों को जानने के लिए अब तक हम विदेशों में हुए अध्ययन, खोज आदि पर निर्भर थे, उस संदर्भ में अब हमारे सरकारी सिस्टम ने भी अपनी तरह से आंकलन किया है। मोबाईल फोन से निकलने वाले रेडिएशन की वजह से थकान, अनिंद्रा, चक्कर आना, रक्तचाप बढ़ना, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना, तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियां, रिफलेक्शन की कमी, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, हृदय संबंधी समस्याएं, एकाग्रता की कमी, नपुंसकता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाल ही में विभिन्न मंत्रालयों की एक उच्च स्तरीय समिति आईएमसी ने इस तरह की चेतावनी के साथ ही रेडिएशन संबंधी नियम कायदों में देश की जरूरतों के हिसाब से बदलाव की सिफारिश भी की है।
समिति का कहना है कि घनी आबादी वाले इलाकों, स्कूलों, खेल के मैदानों के इर्द गिर्द मोबाईल टावर की स्थापना पर कड़े प्रतिबंध होने चाहिए। गौरतलब होगा कि इलेक्ट्रोमैग्निेटिक रेडएशन के मधुमख्खी, तितली और पक्षियों पर पड़ने वाले प्रभावों के मद्देनजर इस समिति का गठन किया गया था।
कितने आश्चर्य की बात है कि मोबाईल टावर के खतरों को भांपते हुए भी महज चंद सिक्कों की खनक के तले दबकर स्थानीय प्रशासन द्वारा सघन आबादी वाले क्षेत्रों में मोबाईल टावर स्थापित करने की छूट प्रदान कर दी जाती है। सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने पिछले साल जुलाई में इस मामले में संज्ञान लिया था। उस समय कहा गया था कि सेवा प्रदाता कंपनियों को इस आशय का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य किया गया था कि उनके द्वारा संस्थापित टावर विकिरण के निर्धारित मानकों के अनुरूप है। समयावधि बीत जाने के बाद भी मंत्रालय को सुध नहीं आई है कि उनके निर्देशों का मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने क्या हश्र किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्धारित मानकों के अनुसार मोबाईल टावर्स की फ्रिक्वेंसी तीन सौ गीगा हर्ट्ज से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए। साथ ही साथ इंटरनेशनल कमीशन फॉर नॉन आयोनाइजिंग द्वारा जारी दिशा निर्देशों में साफ कहा गया है कि इन टावर्स से हाने वाले विकिरण की तीव्रता अधिकतम छः सौ माईक्रोवॉट प्रति वर्गमीटर होना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा कव्हरेज और कंजेशन से मुक्त होने की चाह में सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा तीव्रता को साढ़े सात हजार माइक्रोवॉट प्रति वर्गमीटर से अधिक कर रखी है।
अभी कुछ दिनों पहले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में किए गए अध्ययन में मोबाईल रेडियएशन को मानव शरीर की कोशिकाओं के डिफेंस मेकेनिजम के लिए घातक माना गया था। केरल के कोल्लम ताल्लुका में पर्यावरण संगठन केरल पर्यावरण अध्ययनकर्ता एसोसिएशन ने दावा किया है कि गौरैया की संख्या रेल्वे स्टेशन, गोदाम, मानव बस्तियों में कमी हो रही है। अध्ययन में कहा गया है कि गौरैया के अंडे से बच्चे के बाहर आने में दस से चोदह दिए लग जाते हैं, लेकिन मोबाईल टावर के आसपास वाले घोसलों में अंडे तीस दिन में भी नहीं टूट पाए। तेरह साल की औसत आयु वाली गौरैया का चहकना अब कम ही देखने को मिल रहा है।
इतना ही नहीं मेरठ के लाला लाजपत राय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्रो.ए.क.ेतिवरी द्वारा भी इस बारे में शोध किया गया। इस शोध में प्रो.तिवारी ने पाया कि इंसानों के साथ ही साथ मधुमख्खी, चिडिया, यहां तक कि चूहों तक पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। उन्होने पाया कि मधुमख्खी के छत्ते, चिडिया के अंडे, और स्पर्म काउंट में कमी दर्ज की गई। इसमें पाया गया कि पराग चूसने गई मधुमख्खी लौटते समय रास्ता भटक जाती हैं, जिससे उनके छत्ते, कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा जेएनयू में इन टावर्स के नीचे रखे गए चूहों के स्पर्म में कमी दर्ज की गई।
एक आंकलन के मुताबिक भारत में वर्तमान में डेढ़ दर्जन से अधिक सेवा प्रदाता कंपनियों के साढ़े तीन लाख से ज्यादा मोबाईल टावर अस्तित्व में हैं इनकी तादाद तेजी से बढ़ रही है। माना जा रहा है कि 2014 तक इनकी संख्या पांच लाख पार कर जाएगी। यूं तो विशेषज्ञों का मानना है कि इन टावर्स के इर्द गिर्द रहने वालों को अपने अपने घरों का रेडिएशन टेस्ट करवाकर अपने घरों को रेडिएशन प्रूफ कर लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना अपनी जगह सही है, किन्तु यह कहां का न्याय है कि मुनाफा कमाएं मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियां और भोगमान भुगते देश की गरीब जनता।
पिछले साल अगस्त माह में ही केंद्रीय संचार मंत्रालय ने मोबाईल फोन टावर्स के लिए रेडीएशन की सीमा तय कर दी थी। उस समय संचार राज्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में उच्च स्तरीय समिति ने फैसला लिया था कि 15 नवंबर तक रेडिएशन उत्सर्जन की सीमा लागू कर दे अन्यथा पांच लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया था।
वैसे मोबाईल टावर्स के लिए पर्यावरण विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल, अस्पताल, सकरी तंग गलियों के आसपास टावर स्थापित न किए जाएं। इसमें मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी और जमीन के मालिक की मर्जी से टावर की संस्थापना का काम नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं टावर के पास लोगों के लिए चेतावनी बोर्ड लगाना भी अत्यावश्यक है।
मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों ने अपने एजेंट के माध्यम से टावर लगाने के खेल को अंजाम दिया जा रहा है। मामला चाहे सरकार की नवरत्न कंपनी भारत संचार निगम का हो या निजी सेवा प्रदाता का। हर मामले में कमोबेश यही आलम है। कंपनियों के एजेंट एक मीटर लेकर आपकी जमीन की जांच करेगा, फिर गांव में पांच हजार रूपए प्रतिमाह से आपके साथ बारगेनिंग आरंभ करेगा। अगर आपको पांच हजार रूपए हर महीने की आवक हो रही हो, वह भी महज चार सौ स्क्वेयर फिट जगह को देने पर तब कौन भला इंकार करेगा। इसके लिए इन एजेंट्स द्वारा एक साल का किराया आपसे अग्रिम ही मांग लिया जाता है। फिर आपके साथ पंद्रह साल का एग्रीमेंट।
बहरहाल आज के समय में मोबाईल दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया है, तब सरकार रेडिएशन के प्रति चेती है। वैसे भी देश में मंहगाई चरम पर है। सरकार को चाहिए कि सेवा प्रदाता कंपनियों पर उनके पिछले ग्राहकों की संख्या के दावों के हिसाब से ही जुर्माना आहूत करे। इस जुर्माने से ही मोबाईल टावर्स के आसपास की रिहाईश को रेडीएशन पू्रफ बनाया जाए। अभी भी समय है, अगर समय रहते सरकार नहीं चेती तो आने वाले समय में देश में आने वाली पीढ़ी ठीक उसी तरह नजर आएगी जिस तरह नागासाकी और हिरोशिमा में परमाणुबम गिरने के बाद पीढी नजर आ रही थी।

चुनाव लड़ने के बजाए परिषद से प्रवेश चाह रहे मराठा क्षत्रप


मनमोहन की राह पर पृथ्वीराज
 
बिल्डर लाबी बन गई है सबसे बड़ी चुनौति
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण को आदर्श सोसायटी घोटाले में अशोक चव्हाण की बली चढ़ने के उपरांत महाराष्ट्र की कमान सौंप दी गई है। तीन बार लोकसभा तो पिछले दो बार से राज्य सभा के रास्ते संसदीय सौंध पहुंचने वाले चव्हाण विधानसभा चुनावों के स्थान पर अब पिछले दरवाजे अर्थात विधान परिषद से चुने जाने का मन बना चुके हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाए तो चव्हाण के लिए महाराष्ट्र में 288 में से एक भी सीट सुरक्षित नहीं मिल पा रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे पृथ्वीराज चव्हाण अब महाराष्ट्र के सतारा निवासी हो गए हैं, सतारा लोकसभा चुनावों में पटकनी खाने के बाद वे वहां से विधानसभा चुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
इसके साथ ही साथ उनके लिए मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कलीना विधानसभा सीट मुख्यमंत्री के लिए छोड़ने की पेशकश कर दी है। उधर बिल्डर लाबी ने इस सीट पर मुख्यमंत्री को हराने के लिए सौ करोड़ रूपयों से ज्यादा चंदा एकत्र किए जाने की खबरों ने चव्हाण की नींद उड़ा रखी है।
चव्हाण के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राज्यसभा सीट पर सिंह के अलावा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मणिकराव ठाकरे ने नजरें गड़ा दी हैं। बतौर राज्यसभा सांसद चव्हाण का कार्यकाल अभी चार साल से अधिक का बाकी है। उधर शिवसेना के किरण पावस्कर के त्यागपत्र और गुरूनाथ कुलकर्णी के निधन से रिक्त हुई विधान परिषद की सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। चुनाव 21 फरवरी को होना तय है। चव्हाण के सामने मुसीबत यह है कि पावस्कर की सीट पर शिवसेना तो कलकर्णी के बदले एनसीपी अपना दावा पुख्ता करती नजर आ रही है।
दिल्ली की राजनैतिक फिजां में पृथ्वीराज चव्हाण के इस कदम को अच्छी नजरों से कतई नहीं देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि यह विडम्बना है कि देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन डॉ.मनमोहन सिंह को लोकसभा में मत देने का अधिकार ही हासिल नहीं है, उसी परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र के नए निजाम पृथ्वीराज चव्हाण सीधे जनादेश लेने से बचते हुए पिछले दरवाजे से विधानसभा में पहुंचना चाह रहे हैं।

छपारा को नगर पंचायत बनाओ


0 उच्च न्यायालय ने दी व्यवस्था
छपारा को नगर छः माह में नगर पंचायत बनाओ
जबलपुर (ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि छः माह के अंदर सिवनी जिले की ग्राम पंचायत छपारा को नगर पंचायत मंे तब्दील किया जाए। यह व्यवस्था माननीय उच्च न्यायालय ने छपारा निवासी मदन गोपाल श्रीवास्तव द्वारा दायर जनहित याचिका पर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मदन गोपाल श्रीवास्तव द्वारा अपने अधिवक्ता द्वय एस.बी.शुक्ला और ब्रजेश श्रीवास्तव के माध्यम से इस संबंध में तर्क रखे। तर्कों में कहा गया कि छपारा मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है, एवं 2003 में जिला कलेक्टर सिवनी द्वारा इसे ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा था।
मदन गोपाल श्रीवास्तव द्वारा रखे गए तथ्यों में कहा गया था कि छपरा नगर पंचायत बनने के लिए सारी अहर्ता रखती है, अतः इसे नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। इस संबंध में सुनवाई के उपरांत उच्च न्यायायल ने मध्य प्रदेश सरकार के स्थानीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव को आदेशित किया है, कि छः माह की समयावधि में सिवनी जिले के छपारा को ग्राम पंचायत से नगर पंचायत का दर्जा देने की कार्यवाही की जाए।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

बजट पर होगी विधानसभा चुनावों की छाया


बुनकरों को तोहफा दे सकते हैं प्रणव
 
एमपी के बुनकर भी होंगे लाभान्वित
 
बंगाल और यूपी चुनावों को देखकर बिछ रही है बिसात
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के इस साल के बजट में बुनकरों को तोहफा मिल सकता है। उत्तर प्रदेश और बंगाल चुनवों के मद्देनजर बजट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कांग्रेस आलाकमान ने भी प्रणव मुखर्जी को किसान हितैषी बजट बनाने के निर्देश दे दिए हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस साल के बजट में दम तोड़ रही हाथ करघा विधा से बेरोजगार हुए बुनकरों के लिए केंद्र सरकार कुछ विशेष तोहफा लेकर आने वाली है। गौरतलब है कि पूर्व में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, के नेतृत्व में पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बुनकरों का एक प्रतिनिधिमण्डल केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन से भेंट करने गया था, जहां उसने बुनकरों की समस्याओं से मंत्री को आवगत कराया था।
समझा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश चुनावों के पहले कांग्रेस द्वारा बुनकर विशेषकर मुस्लिम समुदाय के पिछड़े लोगों को अपने से जोड़ने की रणनीति के चलते केंद्र सरकार द्वारा उन्हें लुभाने के लिए बजट में कुछ इस तरह के प्रावधान किए जा रहे हैं ताकि थम चुके हाथ करघों की खट खट एक बार फिर सुनाई देने लगे, इसके साथ ही साथ बुनकरों के परिवारों में चूल्हा जल सके इसके भी पुख्ता इंतजाम इस बजट में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पौने दो सौ से अधिक सांसदों ने करा रखा है अवैध निर्माण


माननीयों के बंग्लों मंे है अवैध निर्माण
 
नई दिल्ली (ब्यूरो)। देश के नीति निर्धारकों को राजधानी के प्रसिद्ध वास्तुकार लुटियन के नाम पर बसे लुटियन जोन में आवंटित सरकारी आवासों पर अवैध निर्माण करा रखे हैं, वह भी तब जब केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के आला अफसरान और कर्मचारी रोजना ही इन आवासों पर दस्तक देते हैं।
संसद के दोनों सदनों के विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज और अरुण जेटली, बीजेपी संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व सांसद अर्जुन सिंह और समाजवादी पार्टी से निकाले जा चुके अमर सिंह ऐसे नेताओं की लिस्ट में शामिल हैं जिन्होंने उन्हें आवंटित किए गए लुटियन जोन के बंगलों में अवैध निर्माण करवाया है।
सूचना के अधिकार में सीपीडब्ल्यूडी ने बताया कि ऐसे कुल 182 वर्तमान अथवा पूर्व सांसद हैं जिन्होंने लुटियन जोन के बंगलों में अनधिकृत निर्माण करवाया है जबकि ऐसा करने की सख्त मनाही है। सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में विभाग की ओर से दी गई सूची में ऐसा करने वालों में बीजेपी सासंद कलराज मिश्र, आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह, जेडीयू प्रमुख शरद यावद, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, राजीव शुक्ल, मुहम्मद अजहरुद्दीन और उŸार प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती भी शामिल हैं।
कथित अनधिकृत निर्माण की सूची में बीजेपी और बीएसपी के पार्टी मुख्यालयों की भी गिनती है। सूचना में बताया गया कि इन नेताओं के बंगलों में किए गए अनधिकृत निर्माण में अतिरिक्त कमरे, शौचालय, कार्यालय, बरामदा, प्लेटफॉर्म आदि बनाया जाना शामिल है।

नशेलों पर शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार


नशेलों पर शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार
समिति ने सुझाए कड़े प्रावधान
नई दिल्ली (ब्यूरो)। नशे की हालत में वाहन चलाने वालों पर सरकार का शिकंजा कसने वाला है, आने वाले दिनों में नशे में वाहन चलाने के एवज में 10,000 रुपये तक का जुर्माना और एक साल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। मोटर वाहन अधिनियम में सुधार की सिफारिशो को यदि मान लिया जाता हैए तो राजधानी में शराब पीकर गाड़ी चलाना या ड्राइविंग करते हुए मोबाइल फोन पर बात करना काफी महंगा साबित हो सकता है।
अधिनियम में सुधार के सुझावों को यदि मंजूरी मिल जाती है, तो गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने वालों वालो को 1,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा। एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर गाड़ी चलाता पकड़ा जाता है, और उसके 100 एमएल खून में 150 एमजी तक शराब पाई जाती है, तो उसे छह माह से एक साल की सजा होनी चाहिए या उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए या फिर दोनों हो सकती हैं। यदि व्यक्ति के शरीर में 30 से 150 एमजी तक शराब पाई जाती हैए तो उसे छह माह की सजा या पाच हाजर रुपए का जुर्माना या अर्थदंड और जेल दोनों हो सकती हैं।
पूर्व सड़क सचिव एस सुंदर की अध्यक्षता वाली दस सदस्यीय समिति द्वारा तैयार 411 पृष्ठों की रिपोर्ट में ये सुझाव दिए गए हैं। समिति ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के सुधार के बारे में अपने सुझाव दिए हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री सी पी जोशी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। समिति ने सुझाव दिया है कि यदि गाड़ी चलाते हुए कोई व्यक्ति मोबाइल पर बात करता पकड़ा जाता है, तो उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए। साथ ही इसमें पेनल्टी अंको का प्रावधान भी होना चाहिए।

दिल्ली में रेल्वे स्टेशन की व्यस्था होगी चाक चौबंद


दिल्ली में रेल्वे स्टेशन की व्यस्था होगी चाक चौबंद
नई दिल्ली (ब्यूरो)। जब तब हई अलर्ट पर रहने वाली दिल्ली में रेल प्रशासन यात्रियों और स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी गंभीर है। स्टेशन और आसपास की हर गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। इसी के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रमुख स्टेशनों में इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम लगाया जाएगा।
पहले चरण में नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार, दिल्ली सराय रोहिल्ला, दिल्ली कैंट, शाहदरा, तिलक ब्रिज, शिवाजी ब्रिज और गाजियाबाद स्टेशन पर इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम लगाया जाएगा। हाई स्पीड रेल सेक्शन दिल्ली-आगरा रूट पर भी इसी तर्ज पर सुरक्षा व्यवस्था होगी। नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार स्टेशनों को 232 क्लोज सर्किट टीवी कैमरेए वाहनों की जांच के लिए 17 आटोमेटिक व्हीकल स्कैनर सिस्टम, लगेज-बैगेज स्कैनर, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड से लैस किया जाएगा।
रेलवे के सूत्रों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत प्लेटफार्म, फुट ओवरब्रिज व सीढिय़ों पर हाई फ्रीक्वेंसी मूविंग कैमरे और अन्य सुरक्षा उपकरण लगेंगे ताकि हर हलचल पर नजर रखी जा सके। अब तक नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर सीमित स्थानों पर ही क्लोज सर्किट कैमरे लगे हुए थे।

यूआईएडीआई से जुड़ा डाक विभाग


यूआईएडीआई से जुड़ा डाक विभाग
नई दिल्ली (ब्यूरो)। इक्कीसवीं सदी में कंप्यूटर के युग में ग्रामीण भारत में पोस्ट आफिस और डाकिए के महत्व और प्रासंगिकता को देखते हुए सरकार ने डाक विभाग को विशिष्ट पहचान संख्या से जोड़ दिया है ताकि लोगों को उनकी चिðिया समय पर मिल सके और उन्हें अपने खतों की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सके।
डाक विभाग और भारतीय विशिष्ठ पहचान संख्या (यूआईडीएआई) ने इस आशय के सहमति पत्र हस्ताक्षर किया है। लोग अब यह पता कर सकते हैं कि उनकी चिðी पते पर पहुंची है या नहीं। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने इस अवसर पर कहा कि भारत गावों का देश है। ग्रामीण भारत में आज भी डाकिया सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है। हम चाहते हैं कि सूचना के प्रवाह के इस माध्यम को प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए ताकि गावों में रहने वाले लोगों को फायदा हो।
उन्होंने कहा कि आज भी गाव में जब अपनों का हालचाल जानने के लिए लोगों की निगाहें साइकिल पर आने वाले डाकिए पर लगी रही है। हम चाहते हैं कि डाक व्यवस्था को पूरी तरह से सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए ताकि आम लोगों को फायदा हो। डाक विभाग और यूआईडीएआई के बीच यह सहयोग इसी दिशा में एक प्रयास है जो देश में समावेशी विकास सुनिश्चित करेगा।
यूआईडीएआई के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा कि डाक विभाग को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में यह गठजोड़ एक महत्वपूर्ण पहल है जिसके दायरे में चिðियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना, डाक से जुड़े साजो-सामान, प्रौद्योगिकी उन्नयन आदि आते हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से अब लोगों को इस बात का पता चल सकेगा कि उनकी चिðी कहां है। कोई भी व्यक्ति आनलाइन माध्यम से इस बात का आग्रह कर सकता है कि उनकी चिðी पते पर पहुंची है या नहीं।

मुख्य सचिवों के सम्मेलन में बोले पीएम


भ्रष्टाचार से बुरी तरह आहत हैं प्रधानमंत्री
नई दिल्ली (ब्यूरो)। घपलों और घोटालों से घिरी केंद्र सरकार में अपने सहयोगियों की कारगुजारियों से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुरी तरह आहत हैं। उन्होंने कई घोटालों के उजागर होने के मद्देनजर भ्रष्टाचार के दानव पर चिंता जाहिर करते हुए शुक्रवार को कहा कि इससे भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
राज्यों के मुख्य सचिवों के दूसरे सालाना सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यहां शुक्रवार को कहाए श्भ्रष्टाचार सुशासन की जड़ पर प्रहार करता है। यह त्वरित विकास की दिशा में रुकावट है। यह सामाजिक समावेशिकरण के हमारे प्रयासों को बेअसर नहीं तो हल्का अवश्य करता है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हमारी छवि को नुकसान पहुंचता है और हमें अपने ही लोगों में प्रतिष्ठा कम होती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती से सशक्त, साहसी और त्वरित ढंग से निपटने की जरूरत है। उन्होंने न्यायपालिका की जवाबदेही और भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने वालों की हिफाजत से सम्बद्ध संसद में पेश किए गए दो विधेयकों को भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कानून के साथ-साथ प्रशासनिक पद्धतियों में जरूरी बदलाव और प्रक्रियाओं में तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के अवसरों में कमी लाने के लिए व्यवस्थित प्रतिक्रिया लाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहाए इसके प्रमाण है कि प्रतिस्पर्धा लानेए चुनने के व्यापक मौकों और आधुनिक तकनीक से भ्रष्टाचार से सार्थक ढंग से निपटा जा सकता है।

कुंभ स्थल पर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष

नर्मदा सामाजिक कुंभ के आयोजन पूर्व निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा 

कुंभ स्थल पर आज से रामकथा प्रारंभ 
 
10,11 एवं 12 फरवरी को आयोजित कुंभ के पूर्व धर्ममय हुआ महिष्मती नगर मंडला

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी :-प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मण्डला नगर में पवित्र रेवातट पर आज से कुम्भ आयोजन की आधार शिला रख दी गई आगामी १०-११ एवं १२ फरवरी को आयोजित होने वाले सामाजिक नर्मदा कुम्भ का विधिवत प्रारंभ आज से विविध आयोजित कार्यक्रम का सिलसिला प्रारंभ हो गया।  कुम्भ मेले के प्रारंभिक चरण में आज विशाल कलश यात्राओं का आयोजन संपन्न हुआ। नगर के 4 पवित्र स्थलों से आज कलश यात्राऐं मंडला नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आयी मातृशक्तियों द्वारा निकाली गई। इस कलश यात्रा में लगभग 12 हजार महिलाओं का समावेश रहा,कलश यात्रा में गायत्री परिवार ने भी बढचढ कर हिस्सा लिया। कलश यात्रा प्रमुख  श्रीमती संपतिया उईके के कुशल निर्देशन में यात्राऐं पड़ाव श्रीराम मंदिर,विद्या चौक,संगम एवं जिला वार्ड से निकाली गईं। ये यात्राऐं कुं भ स्थल महिष्मती नगर पहुंचकर संपन्न हुईं। प्रत्येक यात्रा में सुंदर झंाकियां,लोकनृत्य भजन मंडलियों के दल भारी उत्साह के साथ शामिल हुए। आज निकली कलश यात्राओं में आदिवासी समाज के पारंपरिक सैला नृत्य का आकर्षण देखते ही बनता था। जगह-जगह यात्राओं का स्वागत हुआ पुष्प वर्षा हुई,पानी आदि की व्यवस्था भी स्थानीयजनों द्वारा की गई थी। कुं भ की दृष्टि से निर्मित महिष्मती नगर में यात्राऐं पहुंचते-पहुंचते लगभग एकाकार रूप ले चुकी थीं। चारों यात्राओं का संगम कुंभ स्थल के मुख्य मार्ग पर हुआ। कुंभ को लेकर मंडला जिला सहित डिंडोरी,जबलपुर,बालाघाट,ङ्क्षछं
दवाड़ा,सिवनी सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। सभी ने कलश यात्रा की भव्यता सुंदर झांकियों,लोक नृत्यों एवं भजन मंडलियों की प्रस्तुती को मुक्त कं ठ से सराहा। कलश यात्रा जिनमें कलशधारी मातृशक्ति का समावेश था लगभग एक किलो मीटर क तारवद्ध सुसज्जित वेशभूषा में कलश यात्रा दिखायी दे रही थी। मंडला के पावन तट पर यह ऐतिहासिक क्षण अद्वितीय था और मंडलावासियों के लिए भी। कुंभ स्थल महिष्मती नगर में समापन के पश्चात वृन्दावन से पधारे अतुल कृष्ण जी महाराज की रामकथा का भी रसपान पहुंचे श्रद्धालुओं ने किया। इस रामकथा में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी शामिल हुए और उन्होने कुंभ स्थल का भ्रमण भी किया। रोहाणी ने कथावाचक संत श्री अतुल कृष्ण जी भरद्वाज का पुष्पहार से स्वागत किया उनके साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री देवीसिंह सैयाम,पूर्व सांसद एवं भाजपा जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते, निवास विधायक रामप्यारे कुलस्ते,आयोजन समिति के राजेन्द्र जी,जिला भाजपा अध्यक्ष मंडला विजेन्द्र सिंह काकोडिय़ा,प्रफुल्ल मिश्रा,अरविंदनारायण तांबे,भोलानाथ आदि उपस्थित थे। कुं भ स्थल में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मंडला कलेक्टर के के खरे एवं पुलिस अधीक्षक वी एस चौहान भी उपस्थित थे।
कुंभ में बाहर से पहुंचने वाले एवं व्यवस्थाओं में लगे शासकीय-अशासकीय व्यक्तियों के भोजन की भी बड़ी व्यवस्थाऐं की गई हैं। कुंभ स्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुंभ में पहुंचने वाले 10,11 एवं 12 फरवरी के लिए 6 महानगरों जिनमें 51 नगर की रचना की गई है। सभी महानगरों में भोजन,स्वास्थ्य,मनोरंजन आदि की पर्याप्त व्यवस्थाऐं की गई हैं और सभी महानगरों में धार्मिक आयोजन व्यवस्थित ढंग से संचालित होंगे,परंतु मुख्य धार्मिक आयोजन महिष्मती नगर में ही होगा। आगामी 07 फरवरी से वंशावली लेखकों को भी आमंत्रित किया गया है।
आज 03 फरवरी से 09 फरवरी तक कुंभ स्थल महिष्मती नगर में नियमित रूप से दोपहर 02 बजे से शाम 05 बजे तक अतुल कृष्ण भरद्वाज रामायणी द्वारा रामकथा की अमृतवर्षा की जायेगी और रात्रि में कृष्ण लीला पर आधारित रासलीला का नियमित आयोजन 09 फरवरी तक चलेगा। 10 फरवरी से 12 फरवरी तक कुंभ में पहुंचे विभिन्न साधु,संतों और महात्माओं द्वारा धर्मगंगा का प्रवाह भी इसी स्थल से किया जायेगा।

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

कहां जमा हैं 176 लाख करोड़ रूपए?


राजा के बाद नवरत्नों पर भी कसना होगा शिकंजा
 
जनता के पैसों की होली खेलने वालों को सिखाना होगा सबक
 
भ्रष्टाचार का डर समाप्त हो गया है नेताओं, नौकरशाहों में
 
हालात नहीं सुधरे तो जनता उतर सकती है सड़कों पर
 
(लिमटी खरे)
 
अस्सी के दशक के उपरांत भारत गणराज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें तेजी से पनपना आरंभ हुईं थीं। तीस सालों में भ्रष्टाचार का यह बट वृक्ष इतना घना हो चुका है कि इसकी छांव में नौकरशाह, जनसेवक और मीडिया के सरपरस्त सुकून की सांसे ले रहे हैं, किन्तु आम जनता की सांसे इस पेड़ के नीचे सूरज की रोशनी न पहुंच पाने के कारण मचे दलदल में अवरूद्ध हुए बिना नहीं हैं।
 
भारत गणराज्य के अब तक के सबसे बड़े घोटाले अर्थात टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुख्य आरोपी अदिमुत्थू राजा को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने तेरह महीने की लंबी मशक्कत और खोज के बाद गिरफ्तार कर लिया। राजा के खिलाफ सीबीआई ने 21 अक्टूबर 2009 को टूजी मामले में जांच के लिए मामला दर्ज किया था। इसके बाद सहयोगी दलों के दबाव के चलते कांग्रेस नीत केंद्र सरकार ने इस मामले की फाईल को लटका कर रखा। विपक्ष ने जब संसद नहीं चलने दी तब कांग्रेस को होश आया और बजट सत्र में फजीहत से बचने के लिए सरकार ने सीबीआई को इशारा किया और तब जाकर कहीं राजा को सीखचों के पीछे ले जाया जा सका। राजा के साथ पूर्व टेलीकाम सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के तत्कालीन निज सचिव आर.के.चंदोलिया को भी सीबीआई ने धर लिया है।
 
टेलीकाम सहित सारे के सारे घपले घोटालों को इतिहास की पाठ्यपुस्तक के अध्याय के तौर पर ही समझा जाए। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) कोटे के मंत्री दयानिधि मारन के त्यागपत्र के उपरांत 16 मई 2007 आदिमत्थू राजा को वन एवं पर्यावरण से हटाकर संचार मंत्री बना दिया गया। 25 अक्टूबर 2007 को केंद्र ने मोबाईल सेवाओं के लिए टूजी स्पेक्ट्रम की नीलामी की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। इसके उपरांत 15 नवंबर 2008 को तत्कालीन केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रत्युष सिन्हा ने अपनी आरंभिक रिपोर्ट में इसमें अनेक खामियों का हवाला देतेह हुए दूरसंचार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की अनुशंसा की थी।
 
जब घोटाला हुआ तब केंद्र की सरकार चिर निंद्रा में लीन थी। इसके बाद बरास्ता नीरा राडिया यह घोटाला प्रकाश मंे आया। 21 अक्टूबर 2009 को सीबीआई ने टूजी स्पेक्ट्रम मामले में जांच के लिए मामला दर्ज कर लिया। इसके अगले ही दिन 22 अक्टूबर को सीबीआई ने दूरसंचार महकमे के कार्यालयों पर छापामारी की। इसके एक साल बाद 17 अक्टूबर 2010 को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूरसंचार विभाग को अनेक नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया। नवंबर 2010 में विपक्ष ने एकजुट होकर दूरसंचार मंत्री ए.राजा को हटाने की मांग कर डाली। चारों ओर से दबाव में आई केंद्र सरकार को मजबूरन 14 नवंबर को राजा का त्यागपत्र मांगना ही पड़ा। 15 नवंबर को संचार मंत्रालय का कार्यभार कपिल सिब्बल को सौंप दिया गया।
 
राजा पर आरोपों की बौछारें होती रहीं और बिना रीढ़ के समझे जाने वाले देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह इतना साहस नहीं जुटा सके कि वे राजा से तत्काल त्यागपत्र मांगकर उन्हें सीखचों के पीछे भेज सकें। यक्ष प्रश्न तो यह है कि अगर एक सौ छियत्तर लाख करोड़ रूपए का नंगा नाच नाचा गया तो वह पैसा गया कहां? राडिया मामले में अनेक मंत्रियों की गर्दन नपना अभी बाकी है। यही आलम कामन वेल्थ गेम्स का रहा। प्रधानमंत्री डॉ.सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की आंखों के सामने जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को हवा मंे उड़ा दिया गया, और ये दोनों चुपचाप ही बैठकर जनता के पैसे पर डलते डाके को देखते रहे। अनेक आरोप तो सोनिया गांधी के इटली वाले परिवार पर भी लगे हैं। जब कामन वेल्थ गेम्स आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर आरोप लगे तो उन्होंने सरकार को हड़काया कि हमाम में वे अकेले नंगे नहीं हैं। फिर क्या था, कलमाड़ी पर शिकंजा ढीला कर दिया गया। आदर्श हाउसिंग सोसायटी में नाम आने के बाद भी विलासराव देशमुख और सुशील कुमार शिंदे को सोनिया गांधी ने ए रेंक दिया है, जो आश्चर्यजनक है।
सरकार में मंत्रियों के बड़बोलेपन का आलम यह रहा कि संचार मंत्रालय का भार संभालते ही मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने तो सरकार के अब तक निष्पक्ष रहे आडीटर कैग की विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह लगा डाले। देशवासी सकते में थे, कि आखिर हो क्या रहा है? क्या सरकारी तंत्र में खोट है या सरकार चलाने वाले नुमाईंदों की नजरों में? अंततः राजा की गिरफ्तारी ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया। अब सिब्बल मुंह छुपाते घूम रहे हैं।
 
अब जबकि राजा सीखचों के पीछे हैं तब केंद्र सरकार के नुमाईंदों पर जनता के धन के अपराधिक दुरूपयोग का मामला चलना चाहिए, क्योंकि सरकार के अडियल रवैए के चलते ही संसद का शीतकालीन सत्र बह गया और देश के गरीबों के खून पसीने के लाखों करोड़ों रूपए उसमें डूब गए। सरकार के नुमाईंदों का तो शायद कुछ न गया हो, उनकी जेबें पहले से अधिक भारी हो गई हों, पर इसका सीधा सीधा बोझ तो आम जनता पर ही पड़ने वाला है।

इसके पहले आजाद भारत में अनेक मंत्रियों को सीखचों के पीछे भेजा जा चुका है। 1991 से 1996 तक संचार मंत्री रहे सुखराम इसकी जद में आ चुके हैं। पूर्व में 16 अगस्त 1996 में तत्कालीन केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम के दिल्ली स्थित आवास पर सीबीआई ने छापा मारकर उनके पास से पोने तीन करोड़ रूपए नकद बरामद किए थे। इनके हिमाचल स्थित आवास से सवा करोड़ रूपए भी मिले थे। इन्हें 18 सितम्बर 1996 को गिरफ्तार किया गया था।
 
तांसी जमीन घोटाले में तमिलनाडू की मुख्यमंत्री रह चुकी जयललिता को अक्टूबर 2000 में चेन्नई की एक अदालत ने सजा सुनाई थी। इसके अलावा अरूणाचल प्रदेश के सीएम रहे गेगांप अपांग को एक हजार करोड़ रूपए के पीडीएस घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर चार हजार करोड़ रूपयों के घोटाले का आरोप है। इन्हें सितम्बर 2009 में गिरफ्तार किया गया था, वे आज भी जेल में ही हैं। कोयला मंत्री रहे शिबू सोरेन को अपने ही सचिव के अपहरण और हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया था। सोरेन पर आरोप था कि उन्होंने अपने सचिव शशिनाथ झा के साथ यह सब किया था। अदालत के फैसले के बाद सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया था। बीसवीं सदी में स्वयंभू प्रबंधन गुरू बनकर उभरे लालू प्रसाद यादव ने तो कमाल ही कर दिया था। चारा घोटाले के प्रमुख आरोपी लालू यादव को 30 जुलाई 1997 को 134 दिनों के लिए, 28 अक्टूबर 1998 को 73 दिन के लिए, फिर पांच अप्रेल 2000 को 11 दिनों के लिए जेल भेजा गया था। इन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला है। बावजूद इसके ये सारे नेता आज भी अपनी कालर उंची करके सरकार में शामिल होने लालायित हैं।
 
कहने को तो देश की जांच एजेंसियां भ्रष्टाचारियों, कालाबाजारियों पर कड़ी कार्यवाही का दिखावा करती हैं। याद नहीं पड़ता कि सुखराम के अलावा किसी अन्य का प्रकरण परवान चढ़ पाया हो। एक दूसरे की पूंछ अपने पैंरों तले दबाकर रखने वाले सियासी दलों के नेताओं द्वारा जनता को इस तरह की कार्यवाहियों के जरिए भरमाया जाता है।

केंद्र सरकार इस बात को समझ नहीं पा रही है कि भ्रष्टाचार से आम जनता भरी बैठी है। रियाया चाह रही है कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाए जाएं। अगर केंद्र या राज्यों की सरकारांे ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए तो भरी हुई जनता सड़कों पर उतर सकती है, और तब उपजने वाली स्थिति इतनी बेकाबू होगी जिससे निपटना किसी के बूते की बात नहीं होगी।

आड़वाणी, शरद यादव के भरोसे भ्रष्टाचार अभियान


विपक्ष तलाश रहा है सर्वमान्य नेता
नितीश पर लग सकता है दांव
 
देवगोड़ा भी हो गए हैं सक्रिय
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। हर मामले में बिखर चुका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अब कांग्रेसनीत केंद्र सरकार से भिड़ने के लिए एक सर्वमान्य नेता की तलाश कर रहा है, जिसके रहते विपक्ष अपनी भूमिका को जनता के सामने मजबूती से रख सके। उधर पूर्व प्रधानमंत्री हरदनहल्ली डड्डेगोड़ा देवगोड़ा भी एनडीए और यूपीए के विकल्प बनने की कोशिश में लगे हुए हैं।
भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को घेरने में विपक्ष अभी अपने आप को सहज महसूस नहीं कर पा रहा है। भाजपा को लगता है कि सक्षम नेतृत्व के अभाव में केंद्र सरकार को घेरने में विपक्ष पूरी तरह असफल ही रहा है। भाजपा में चल रही बयार के अनुसार अब विपक्ष को एसे सर्वमान्य नेता की तलाश है जिस तरह की भूमिका राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स मामले में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने निभाई थी।
गौरतलब है कि वर्तमान में राजग की ओर से सहयोगी दलों के बीच सामंजस्य बिठाने का काम एनडीए के कार्यकारी संयोजक शरद यादव द्वारा किया जा रहा है। उधर भ्रष्टाचार के मामले में लाल कृष्ण आड़वाणी की बेदाग छवि भी राजग के लिए लाभकारी ही साबित हो रही है। कहा जा रहा है कि आड़वाणी और शरद यादव के बीच सामंजस्य के अभाव के चलते राजग बिखराव की और बढ़ रहा है।
उधर कांग्रेस के अंदरखाने से बाहर आने वाली खबरों में कांग्रेस के रणनीतिकारों के हवाले से कहा जा रहा है राजग के पास कोई योग्य नेता नहीं होने के चलते केंद्र सरकार पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों को विपक्ष भुना नहीं पाएगा। कांग्रेस के प्रबंधकों को डर है कि अगर राजग की कमान नितीश कुमार के हाथों चली जाती है तब विपक्ष का हल्ला बोल धारदार तरीके से हो सकता है।
उधर राजग के बिखरने के बाद जद एस के एच.डी.देवगोड़ा ने राजग और संप्रग का विकल्प बनने के अभियान को तेज कर दिया है। देवगोड़ा द्वारा एआईएडीएमके, वाम दल, आईएनएलडी, बीकेडी, आरएलडी जैसे दलों को साथ लेकर तीसरा मोर्चा बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

लाल ड्रेगन की नजरें रसाई पर

रसोई पर भी नजरें डाल रहा लाल ड्रेगन
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय अर्थव्यवस्था पर निरन्तर नजर रखकर उसे छिन्न भिन्न करने की फिराम में रहने वाले चीन ने अब गाजर के माध्यम से भारत के लोगों के रसोई में घुसपैठ करनी की कवायद आरंभ कर दी है। नेपाल से लगी खुली सीमा के रास्ते चीन प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य का गाजर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहा है। आसपास के भारतीय किसानों पर इसका खराब असर दिखाई देने लगा है। चीनी सीमा पर इसकी बिक्री ने धूम मचा दी है, जल्द ही देश के अन्य भागों में भी इसके पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञातव्य है कि इससे पहले चीन द्वारा सेब और प्याज को निर्यात कर भारतीय भारतीय अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने की कोशिश की जा चुकी है। उसके इस कदम से सीमाई इलाकों के किसान हलकान हैं। भारत सरकार ने भी चीन की इस साजिश को को गंभीरता से लिया है, जिसके तहत खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं।
नेपाल से लगी लगभग 1751 किमी लंबी सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र के जनपदों में इन दिनों चीनी गाजर ने धूम मचा रखी है। बेहद लाल और बड़े आकार वाली यह गाजर भारतीय क्षेत्र में 10 रुपये किग्रा बिक रही है। इसकी अपेक्षा छोटे आकार और मटमैले आकार की भारतीय गाजर को 15 रुपये किलो बिक रही है। उपभोक्ता के बीच चीनी गाजर की भारी मांग है।
भारतीय कृषि क्षेत्र पर चीन का यह आक्रमण नया नहीं है। इसके पहले वह अपने सेब के माध्यम से भारतीय बाजार पर कब्जा करने का प्रयास कर चुका है। आखिर चीन की गाजर की बिक्री का राज क्या हैए इस बारे में जिले के प्रगतिशील कृषक विजय सिंह का कहना है कि भारत सरकार औद्यानिक कृषि को बढ़ावा देने के प्रति उदासीन है, जबकि चीन अपने यहां कृषि को विज्ञान व टेक्नालाजी के बराबर महत्व दे रहा है।
गाजर तस्कर हैं सक्रिय
औसत गाजर से सुर्ख बेहद लाल रंग वाली चाइनीज गाजर चीन तिब्बत, के ल्हासा जिले से होकर नेपाल के खासा जिले में आती है। वहां से तस्करों के माध्यम से भारत नेपाल सीमा पर रात में चोरी छिपे लाकर डंप की जाती है और मौका देखकर उसे भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिया जाता है। चीनी गाजर सामान्यतः उन कच्चे मार्गाे से ट्रैक्टर ट्राली और साइकिल पर लाद कर लायी जाती है, जिनसे भारत से खाद नेपाल पहुंचाई जाती है।

अब निशाना पीएम पर साधा भाजपा ने


जेपीसी पर फिर अड़ी भाजपा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय जनता पार्टी जेपीसी से कम की मांग पर राजी होती दिखाई नहीं पड़ रही है। भाजपाध्यक्ष ने गुरुवार को कहा कि ए राजा और सुरेश कलमाड़ी को टूजी स्पेक्ट्रम तथा राष्ट्रमंडल खेल घोटालों में बली का बकरा नहीं बनाया जाए और चूंकि सभी फैसले केंद्रीय मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री ने किए हैं इसलिए संयुक्त संसदीय समिति की जाच से ही पूरी सचाई सामने आ सकती है।
पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यहा कहा कि राजा और अन्य मंत्रियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री की अनुमति से ही निर्णय किए। इसलिए देश के सामने इस बात का खुलासा होना चाहिए कि राजा का सरमायादार कौन है और इन घोटालों में और कौन कौन शामिल है। देश की जनता को यह जानने का हक है।
जेपीसी की माग दोहराते हुए उन्होंने कहा, जब तक इससे जाच नहीं कराई जाती है पूरी सचाई सामने नहीं आएगी। गडकरी ने कहा कि जब तक सारी सच्चाई सामने नहीं आती है और अंतिम बिंदु तक की जाच नहीं कराई जाती है राजा की गिरफ्तारी महज ढकोसला होगा।
काग्रेस और संप्रग पर 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में शामिल होने का आरोप लगाते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा इनके बिना इतने बड़े पैमाने पर घोटाले होना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि राजा और कलमाड़ी को बली का बकरा बना कर अन्य दोषियों की बेदाग छवि बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अपनी खाल बचाने के लिए सरकार दूसरों की बलि नहीं दे।
गडकरी ने कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन के नीतिगत निर्णय के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि मुख्य सचिव ने मंत्रियों के समूह को लिखा था कि मूल्य प्रावधान को हटा दिए जाने से देश को नुकसान होगा। अगर प्रधानमंत्री ने उस समय इस बात को मान लिया होता, तो शायद यह हालात ही पैदा नहीं होते।

हबीबुल्लाह ने संभाला कार्यभार


हबीबुल्लाह ने संभाला कार्यभार
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने गुरुवार को कार्यभार संभाल लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों एवं हितों को सुनिश्चित करना उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता होगी।
कार्यभार संभालने के उपरांत संवाददाताओं से बातचीत में हबीबुल्लाह ने कहा कि संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों के लिए जो भी जरूरी है, वह कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने सभी सदस्यों के साथ बैठक कर भविष्य की की योजनाएं बनाएंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद शफी कुरैशी थे, जिनका कार्यकाल बीते साल सितंबर में ही पूरा हो गया था। इसके बाद से यह पद खाली था। आज हबीबुल्लाह के साथ ही केकी एन दारूवाला ने आयोग के सदस्य के रूप में अपना कामकाज संभाला। कवि और लेखक दारूवाला का ताल्लुक पारसी समुदाय से है।
सच्चर कमिटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर हबीबुल्लाह ने कहा कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के बारे में पहले अध्ययन करेंगे तब ही कोई निर्णय ले पाएंगे। मालेगाव विस्फोट के संदर्भ में पकड़े गए मुस्लिम युवकों और स्वामी असीमानंद की ओर से उसमें संलिप्तता स्वीकार कर लिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि अभी मैं इस बारे में उतना ही जानता हूं, जितना आप लोग जानते हैं। मैं इस बारे में जानकारी हासिल करूंगा।
हबीबुल्लाह देश के मुख्य सूचना आयुक्त रहने के साथ ही कुछ वक्त के लिए जम्मू-कश्मीर के भी सूचना आयुक्त रह चुके हैं। 65 वर्षीय हबीबुल्लाह वर्ष 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए थे। इसके बाद से वह कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारिया निभा चुके हैं।

राजा के बाद जांच एजेंसी की नजरें कलमाड़ी पर


कलमाड़ी पर कस सकता है शिकंजा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी कांग्रेसनीत केंद्र सरकार द्वारा संसद का बजट सत्र चलाने और जनता के बीच अपनी छवि ठीक करने की कोशिश में पूर्व संचार मंत्री ए.राजा को सीखचों के पीछे पहुंचा दिया है। सूत्रों ने बताया कि कॉमनवेल्थ ऑॅर्गनाइजिंग कमिटी के अध्यक्ष पद से हटाए गए सुरेश कलमाड़ी को भी जल्दी ही गिरफ्तार किया जा सकता है। उधर कांग्रेस ने दावा किया है कि इस गिरफ्तारी से डीएमके और उसके संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ज्ञातव्य है कि मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और डीएमके चीफ करुणानिधि के बीच हुई मुलाकात में राजा का भविष्य तय हो गया था। राजा की गिरफ्तारी से डीएमके को तमिलनाडु चुनाव में और कांग्रेस को उसके साथ होने वाले केरल, असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में फायदा होने की उम्मीद है। यूपीए की प्रमुख घटक टीएमसी पश्चिम बंगाल के चुनावों को देखते हुए भ्रष्टाचार पर कड़े कदम उठाने की मांग कर रही थी।
सूत्रों के अनुसार करुणानिधि ने राजा को उनकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी थी। सरकार को उम्मीद है कि राजा की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष के तेवर ढीले होंगे और बीजेपी और लेफ्ट में बजट सत्र के नहीं चलने देने के मुद्दे पर असहमति बढ़ेगी। सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत कह चुके हैं कि संसद को ज्यादा समय तक चलने से नहीं रोका जा सकता। बीजेपी और लेफ्ट ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया था।
राजा की गिरफ्तारी के जरिए यूपीए सरकार कई निशाने साधना चाहती है। सरकार की पहली प्राथमिकता बजट सत्र चलाना है। विपक्ष अभी भी जेपीसी की मांग पर अड़ा है। बीजेपी कह रही है कि जेपीसी नहीं तो संसद में काम नहीं। मगर अब लेफ्ट को एहसास हो रहा है कि विपक्ष की सारी जगह बीजेपी घेरती जा रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव उसके लिए भी बड़ी राजनीतिक लड़ाई हैं। बीजेपी के साथ सहयोग से उसकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
लोकसभा के नेता और विŸा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बजट सत्र में विपक्ष का सहयोग मांगने के लिए 8 फरवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सरकार को उम्मीद है कि कड़ी कार्रवाइयों के बाद विपक्ष पर संसद चलने देने का दबाव बढ़ेगा।

एमपी से एक पीडिता का खुला पत्र

एमपी से एक पीडिता का खुला पत्र 


सेवा  मे
        श्रीमान पुलिस महानिरीक्षक महांेदय
        रीवा रेन्ज, रीवा


संदर्भ- श्रीमान् पुलिस महानिरीक्षक महोदय हिदयत के बावजूद आरोपीयो द्वारा पुनः घटना कारित किय जाने के सम्बन्ध वाबत।
मान्यवर,
    प्रार्थिया की याचना निम्नानुसार है।
यह की दिनांक 16.11.2010 से आज दिनांक तक थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा उच्चाधिकारियो के निर्देश के बाबजूद कोई कार्यवाही नही की गई जब की अरोपियो द्वारा मेरे साथ पांच पांच बार घटना कारित की गई जिसमे लूटपाट डकैती घर मे अपना कब्जा जमाने मारपीट करने भद्दी-भद्दी  गाली गलौज करने जान से मार देने की धमकी देने एवं घर मे घुसकर मेरे साथ मारपीट अभद्रता किया गया जिसके बाद भी थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई मामला को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया एवं अरोपियो को संरक्षण प्रदान कर उनका हौसला बुलंद किया गया जिसकी सूचना मेरे द्वारा थाना एवं सभी पुलिस अधिकारियेा को दी जा चुकी है। जिनकी छाया प्रतियां आवेदन के साथ संलग्न है।    
1ण्    यह की मेरे एवं मेरे पति के द्वारा दिये गये आवेदनो मे आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नही की गई मामला तक कायम नही किया गया जबकी मामला डकैती लूटपाट कर घर मे अपना कब्जा जमाने का है। जैसा की टी0 आई0 साहब द्वारा दिनांक 29.12.2010 को आई0 जी0 साहब के समक्ष मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह के पक्ष मे बोलने मे कोई कसर नही छोडी यहां तक की उनके द्वारा कहा गया की घटना के समय नितिन प्रताप सिंह थाने बैठा था। जबकी यह सरासर झूठ है। जबकी  उसके एवं उसके  साथियेा द्वारा मेरे घर को घेरकर दरबाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था। जिसमे आई0 जी0 साहब द्वारा मेरी मदद की गई थी ।
2ण्    यह की थाना प्रभारी सिविल लाईन के द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नही की गई मामले को दबाने का हर संभब प्रयास किया गया उनके द्वारा अधिकारियो के समक्ष भी झूठ का सहारा लेकर अरोपियो की हर संभब मदद की गई टी0 आई0 साहब द्वारा अधिकारियो से मामले को सिविल प्रकरण बताया गया । क्या किसी के घर मे डकैती डालकर सारा समान लूट ले जाना और घर मे दबंगइयी से कब्जा कर लेना सिविल प्रकरण है। क्या इस स्थित मे सीधा साधा आदमी सुरक्षित रह पायेगा। जब न्याय देने वाला ही अपराधियेा से मिल जाय।
3ण्    यह की थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा मेरे और मेरे पति के साथ अरोपियो से मिलकर सणयंत्र किया गया जिसमे दो दिन रूक जाओ कह कह कर लगभग दो माह तक चक्कर लगबाते रहे। उसके बाद  आई0 जी0 साहब के निर्देश के बाद उनके द्वारा एस0 आई0 साकेत एवं अन्य चार पांच सिपाहियो को भेजकर दिनांक 24.12.2010 को ताला तोडबाकर मेरे परिबार को घर मे रूकने को कहा गया और आदेशानुसार दो सुरक्षा गार्ड तैनात किये गयेे। जो रात 10 बजे के बाद हमको एवं हमारे परिबार को अकेला छोड़ भाग खड़े हुए जिसके बाद अरोपियो द्वारा मेरा घर घेर लिया गया और हम लोग किसी तरह जान बचाकर थाना सिविललाईन पहुचे जहां टी0 आई0 साहब मौजूद नही थे जिसके बाद सूचना मेरे पति के द्वारा उनके मोबाईल पर दी गई तब उनके द्वारा यह कहा गया की इसका जिम्मेदार मैं नही हूं और मेरे पास यही बस काम नही है कह कर फोन काट दिया गया। उसके बाद टी0आई0 का दिनांक 25.12.2010 को सुबह करीब 11बजे मेरे पति के पास फोन आया की थाने आजाओ जब मेरे पति थाना सिविललाईन पहुचे तो देखा की मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिहं एवं उसके साथ मे कई लोग मौजूद थे। जिसमे एक पत्रकार महोदय भी सामिल थे। तब टी0आई0 द्वारा मेरे पति के ऊपर दबाब बनाया गया की समझौता करके घर उसके नाम करबादो जिसमे मेरे पति कोई प्रतिक्रिया दिये बगैर वापस आ गये जिसके बाद भी टी0आई0साहब का कई वार फोन आया जिसमे वही बात कही गई जिसमे मेरे पति के द्वारा दिनांक 29.12.2010 को साफ इंकर कर दिया गया जिसके कारण टी0आई0साहब काफी नाराज हो गये उसके बाद मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह का फोन आया की अगर तुम रजिस्ट्री नही करबाओगे तेा घर भी जाऐगा और जान भी जाएगी  तब मेरे पति के द्वारा यह कहां गया की क्या तुम जबरदस्ती किसी का घर ले लोगे जिस पर उसके द्वारा फोन पर गाली गलौज की गई और बोला गया अभी तेरे घर जाकर दरबाजा तोड़ डालूगा और जो मिला उसे गोली मार दूगां। अब देखता हूं तुझे और तेरे परिबार को कौन बचाता है और इसके बाद अरोपी नितिन प्रताप सिंह एवं उसके साथियों के द्वारा मेरे घर को घेरकर दरबाजा  तोड़ने का प्रयास किया गया। और भद्दी-भद्दी गालियो का प्रयोग किया गया। उस समय हम औरते घर मे अकेली थी। हमारे अंदर दहसत भर गई किसी तरह मेरे द्वारा आई0जी0 साहब को घटना के बारे मे फोन पर अबगत कराया गया । जिनके द्वारा पुलिस फोर्स भेजकर हमारी सुरक्षा की गई।
4ण्     यह की श्रीमान पुलिश महानिरीक्षक के द्वारा दिनांक 29.12.2010 को मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह की फोटो खिचाकर हिदायत दी गई थी की आज के बाद इन्हे किसी प्रकार से परेशान नही करोगे नही तुम्हारे लिऐ अच्छा नही होगा। जिसके वाद आरोपियो द्वारा हिदायत की अबहेलना  कर दिनांक 07.01.2011एवं 08.01.2011 के दर्मियान लगभग राति 12 बजे मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह अरूण प्रताप सिंह गुड्रडा सिंह पिंकू सिंह मनोज सिंह एवं अन्य पांच छ अरोपियो द्वारा मेरे घर मे घुसकर दरबाजा तोडकर मारपीट गाली गलौज एवं जान से मार देने का प्रयास किया गया। जिसके बाद हल्ला गोहार मचाने पर किसी तरह से हमारी जान बच पाई और उक्त आरोपी गण मेरे घर से भाग गये । जिसकी सूचना मेरे द्वारा थाना प्रभारी सिविललाईन को दिनांक 08.01.2011 को दी गई है।
5ण्    यह की दिनांक 08.01.2011 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को घटना की सूचना दिये जाने के बाद उनके द्वारा थाना प्रभारी सिविल लाईन को बुलाकर कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। जिस पर उनके द्वारा यह कथन दिया गया की ये महिला झूठ बोलती है । इस प्रकार की कोई घटना इसके साथ नही घटित हुई। ये सब बनाबटी है। इसी कारण आई0 जी0 साहब द्वारा अपने कार्यालय से इसे डाटकर भगा दिया गया था। जो थाना प्रभारी द्वारा सरासर झूठ बोलकर अधिकारियो को भ्रमित करते है। इस प्रकार की मेरे साथ कभी कोई घटना घटित नही हुई । की किसी अधिकारी द्वारा मुझे डाटकर भगा दिया गया हो। इसके बाद थाना प्रभारी की आरजू मिन्नत एवं निर्देश के बाद मेरे घर जाकर मौका मुआयना किया जा कर मामले की खाना पूर्ति की गई।
6ण्    यह की इस स्थित मे जब थाना प्रभारी ही आरोपियो से मिला हो उन्हे संरक्षण दे रहा हो एवं उनके बचाब मे झूठा कथन दे रहा हो। तो प्रार्थिया को न्याय क्या देगा । मुझे यह संका होती है। की अगर मेरे अथबा मेरे परिबार की आरोपियो द्वारा हत्या भी कर दी जाय तो थाना प्रभारी सिविललाइन द्वारा आरोपियो के पक्ष मे वचाव हेतु कोई कथन दे सकते हैं । और उस स्थित मे भी मुझे न्याय नही मिल पाऐगी ।इस तरह के पुलिस अधिकारियो के खिलाफ बोलना एवं शिकायत करना भी खतरनाक साबित  हो सकता है। उनके द्वारा मुझे एवं  मेरे परिवार का किसी झूठे मामले मुकदमे मे फसाया जा सकता है।
7ण्    यह की मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह एवं उसके साथियो के खिलाफ विभिन्न थाने मे मारपीट लूट एवं डकैती के कई मामले पंजीबद्ध हैं। मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह के ऊपर जिला बदर एवं 307  जैसे मामले चलाऐ जा चुके हैं । जिसकी जानकारी सभी पुलिसा अधिकारियेां एवं  श्री मान गृह मंत्री तक को हैं। जिनके द्वारा आरेापी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का आदेश भी दिया जा चुका है। जिसके बाद भी उसके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही नही की गई जिस से उसका मनेाबल काफी बढ़ा हुआ है। और वह कोई घटना कभी भी कारित कर सकता है।
8ण्    यह की मुझे एवं मेरे परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान कराई जाये एवं मामला कायम कराया जाय । मेरे मामले की जांच किसी उच्चाधिकारी से कराई जाय। जिससे मेरे परिवार की जान माल की  सुरक्षा हो सके। इसके पहले भी मेरे द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग की जा चुकी हैं जिस पर कोई कार्यवाही नही हुई । अगर आपके द्वारा मुझे पुलिस सुरक्षा प्रदान नही की गई तो कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है।
    अस्तु उपरोक्तानुसार फरियाद कर प्रर्थना करती हूु की आरोपियो के खिलाफ मामला कायम करा कर मुझे जानमाल की सुरक्षा प्रदान करने की कृपा की जाय।
          रीवा दिनांक 18.01.2011
   प्रार्थिया
        पद्मा मिश्रा
नारेन्द्र नगर मकान नं. 17/208 थाना
सिविल लाइन जिला रीवा म0प्र0)
       हाल निवाश रतहरा पेट्रोल पंप के पास
   माकान नं0 15/1719 रतहरा रीवा (म0 प्र0)