सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

वन माफिया और राजस्व की सांठ गांठ से करोड़ों के वारे न्यारे


वन माफिया और राजस्व की सांठ गांठ से करोड़ों के वारे न्यारे

अवैध कटाई को हवा धुंध में गिरे बताने का चल रहा है खेल

मण्डला में कलेक्टर करते है एसे वृक्षों को राजसात

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी। देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले में वन माफिया और राजस्व विभाग की सांठ गांठ से करोड़ों रूपयों के वारे न्यारे हो रहे हैं। राजस्व विभाग की मिली भगत से जिले में वन माफिया द्वारा अवैध कटाई चरम पर है। जिले के आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड घंसौर में इस वक्त करोड़ों रूपयों की वन संपदा अवैध तौर पर कटी हुई पड़ी है, जिसे वन माफिया राजस्व विभाग के साथ मिलकर एक नंबर में करने की जुगत लगा रहा है।

वन विभाग के सूत्रों का दावा है कि राजस्व विभाग के तहसीलदार की शह पर वन माफिया के हौसले बुलंदी पर हैं। सूत्रों का कहना है कि वन माफिया द्वारा निजी भूमि पर लगी बेशकीमती वन संपदा को अवैध रूप से काट दिया जाता है। इसके उपरांत राजस्व विभाग के कारिंदों द्वारा इसे हवा धुंध आंधी में गिरा हुआ प्रमाणित कर दिया जाता है। इसके बाद आरंभ होता है सारा खेल। वन विभाग द्वारा राजस्व के इस प्रमाणपत्र के मिलते ही इन गिरे हुए वृक्षों पर हेमर लगाकर इन्हें एक नंबर की लकड़ी में तब्दील कर दिया जाता है।

इस पूरी कार्यवाही में तहसीलदार द्वारा भूमि स्वामी पर नाम मात्र का फाईन लगा दिया जाता है। इस फाईन के बाद यह अवैध तरीके से काटी गई पूरी  की पूरी लकड़ी पूरी तरह से वेध हो जाती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसके बाद यह कटी हुई लकड़ी सीधे वन विभाग के डिपो पहुंच जाती है, इसकी ग्रेडिंग की जाकर इसके अलग अलग लाट बनवा दिए जाते हैं।

वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि चूंकि तहसीलदार को ही राज्य सरकार द्वारा अधिकार दिए गए हैं अतः यह मामला जिला कलेक्टर की जानकारी तक पहुंच ही नहीं पाता है और करोड़ों अरबों रूपए के वारे न्यारे हो जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि बिना अनुमति के काटे गए झाड़ों को राजस्व की धारा 240 और 241 के तहत राजसात करने का अधिकार दिया गया है। सीमावर्ती मण्डला जिले में जिला कलेक्टर ने इस तरह की लकड़ी को राजसात करने के सख्त आदेश जारी किए हुए हैं।

व्याप्त चर्चाओं के अनुसार एक चक में अवैध तरीके से काटे गए इस तरह के झाड़ों के लिए पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक प्रति प्रकरण दो दो हजार रूपए, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और तहसीलदार एक एक हजार रूपए, वन विभाग के रेंजर पांच सौ रूपए घन मीटर, अनुविभागीय अधिकारी वन एक हजार रूपए घन मीटर, डिपो में ग्रेडिंग के लिए वहां तैनात अमला ग्रेड के हिसात से अपना हिस्सा निर्धारित करता है। अपेक्षा व्यक्त की जा रही है कि जिला कलेक्टर अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर जिले में अवैध ट्री फालिंग के लिए राजस्व की धारा 240 और 241 के तहत राजसात की कार्यवाही को सख्ती से लागू करवाएं।

घोटाला पुरूष बने शरद पंवार!


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

घोटाला पुरूष बने शरद पंवार!


कोई विकास पुरूष बनता है तो कोई युग पुरूष पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पंवार तो घोटाला पुरूष की अघोषित संज्ञा पा गए हैं। इंटरनेट पर इन दिनों शरद पंवार के घोटालों की चर्चाएं जोरों पर हैं। शरद पंवार कांड के नाम से एक फोटो फेसबुक सहित अनेक सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें लवासा, रायगढ़, पुणें में लेण्ड स्केम, ललित मोदी के साथ आईपीएल क्रिकेट का घोटाला, अब्दुल तेल घी (तेलगी) के साथ स्टेम्प पेपर घोटाला, गेंहंू खरीदी और शक्कर घोटाला, शहीद बलवा, आदिमत्थू राजा संग टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, अजीत पंवार के साथ महाराष्ट्र बैंक घोटाला, इंडोसल्फान, पप्पू कालानी को संरक्षण देना, प्रफुल्ल पटेल के साथ एयर इंडिया घोटाले का जिकर मिल रहा है। पवार साहेब या कोई भी राजनेता अब इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया को जैसा मर्जी चाहे मैनेज कर लें पर ब्लाग या सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स तो उन्हें नंगा कर ही देगी।

भूटान नरेश ने की सोनिया की तोहीन

हाल ही में हुई भूटान नरेश की शादी में हिन्दुस्तान के दिग्गज प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल और देश की सबसे ताकतवर महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को न्योता नहीं भेजा। भूटान नरेश ने युवाओं के प्रतीक पुरूष राहुल गांधी और भाजपा की वसुंधरा राजे सिंधिया के पुत्र दुष्यंत को अवश्य ही आमंत्रित किया। अमूमन भारतीय संस्कृति के हिसाब से घर में माता पिता के जीवित रहते किसी भी कार्यक्रम का निमंत्रण उनके नाम से ही आता है। उनके अवसान के उपरांत फिर बेटा या बेटी को निमंत्रण भेजा जाता है। भूटान नरेश ने सोनिया को नहीं न्योता उधर राहुल गांधी इस बात की परवाह किए बिना ही कूदकर उनके विवाह में शरीक हो गए। जब इस मामले में किरकिरी होना आरंभ हुआ तब कांग्रेस के मीडिया मैनेजर डैमेज कंट्रोल में जुटे।

एसे बन रहा शिवराज का स्वर्णिम एमपी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान देश के हृदय प्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने में जुटे हुए हैं। शिवराज सिंह चौहान द्वारा समय समय पर कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को कोसने की औपचारिकता पूरी की जाती है। हाल ही में योजना आयोग के द्वारा मानव विकास प्रतिवेदन पेश किया गया। इसमें मध्य प्रदेश की स्थिति पिछड़े राज्यों में बदतर ही प्रतीत हो रही है। करोड़ों अरबों रूपए बर्बाद कर केंद्र पोषित समग्र स्वच्छता अभियान की कलई उस वक्त खुल गई जब इस प्रतिवेदन में यह कहा गया कि मध्य प्रदेश में पचहत्तर फीसदी घरों में पक्के शौचालय नहीं हैं। सीएजी अगर इस ओर गौर फरमाए तो मध्य प्रदेश में कामन वेल्थ घोटालें से कई गुना बड़ा घोटाला समग्र स्वच्छता अभियान में उजागर हो सकता है।

वामदलों की पेशानी पर चिंता की लकीरें

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं का चैन गायब हो चुका है। नेशनल पार्टी का दर्जा छिनने के बाद अब यह पार्टी सूबाई पार्टी की फेहरिस्त में शामिल हो चुकी है। सत्ता के मद में चूर रहे वाम दलों के नेताओं की नींद अब टूटी है जब उनके नीचे से धरातल ही खिसक चुका है। वाम दल अब आत्म मंथन कर रहे हैं कि किस तरह अपनी साख बचाई जाए। पार्टी के अंदर मंत्रणाओं के दौर आरंभ हैं। पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक मार्च में पटना में प्रस्तावित है। यह बैठक हंगामेदार होने की उम्मीद है। इसमें पार्टी की वर्तमान स्थिति के बारे में गहन विचार विमर्श होने की उम्मीद है। इसमें पार्टी को नया मुखिया मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि वर्तमान उप सचिव सुदावरम सुधाकर ही पार्टी के नए मुखिया होंगे।

हृदय प्रदेश में नए डीजीपी की तलाश आरंभ

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए दो साल का वक्त बचा है। इसके लिए सूबे के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने अफसरशाही जमावट आरंभ कर दी है। एमपी के पुलिस विभाग के मुखिया का चयन भी इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली में चल रही चर्चाओं के अनुसार शिवराज सिंह चौहान ने अपने कांग्रेसी मित्रों से पूछकर अब पुलिस महानिदेशक पद के लिए सुरेंद्र सिंह को इस पद पर काबिज करवाने का मन बना लिया है। 1980 बैच के अधिकारी सुरेंद्र सिंह वैसे तो दिग्विजय सिंह के काफी पसंदीदा अफसर बताए जा रहे हैं। काफी विचार विमर्श के बाद अब इस पद पर उनके नाम पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। शिवराज सिंह की चौकड़ी सुरेंद्र सिंह के नाम के लिए संघ के आला नेताओं को भी सिद्ध करने का जतन करने में जुट रहे हैं। पुलिस विभाग के वर्तमान मुखिया एस.के.राउत अगले साल फरवरी माह में सेवानिवृत होने वाले हैं।

आखिर क्यों हैं स्वामी के नजदीक मन

नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) के घोषित विरोधी सुब्रम्हणयम स्वामी इन दिनों भाजपा और प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के आंखों के तारे बने हुए हैं। सोनिया के विरोध के बावजूद भी प्रधानमंत्री न जाने क्यों उन्हें बेहद भाव दे रहे हैं। जानकारो ंका कहना है कि आग और पानी का समन्वय बनाते हुए वजीरे आजम द्वारा एक तरफ सोनिया गांधी को तो दूसरी तरफ उनके विरोधी स्वामी को साधे हुए हैं। पिछले दिनों गांधी जयंती के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने स्वामी को सोनिया के समकक्ष बिठाकर कांग्रेस की आला कमान की बुराई मोल ले ली। कांग्रेस के हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सोनिया को पीएम का यह कदम बुरी तरह नागवार गुजर रहा है। हो सकता है पीएम की बिदाई का सबब भी यही बन मुद्दा बन जाए।

यूपी फतह है कांग्रेस की फर्स्ट प्रायारिटी

कांग्रेस किसी भी कीमत पर उत्तर प्रदेश में अपना परचम लहराना चाह रही है। इसके लिए वह साम, दाम, दण्ड और भेद की नीति अपनाना चाह रही है। एक मर्तबा उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों को लुभाकर मुलायम सिंह ने सत्ता हासिल की थी। यही बात कांग्रेस के रणनीतिकारों को यह बात जमी और कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुसलमानों को आरक्षण देने के संकेत दिए। सलमान खुर्शीद के मन में यूपी का निजाम बनने की हसरत कुलांचे भर रहीं हैं। यही कारण है कि वे उत्तर प्रदेश के मामलों में अब ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हें। कहा जा रहा है कि अगर इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन नहीं सुधारा तो आने वाले आम चुनावों में विपक्ष के हाथों में अनजाने में ही सोनिया और राहुल को घर संभालने की नसीहत का मुद्दा मिल सकता है। कांग्रेस विपक्ष को अवसर देने के पक्ष में कतई नहीं दिख रही है।

घपलों घोटालों से आहत हैं राजमाता

संप्रग की दूसरी पारी में इतने घपले और घोटाले उजागर हुए हैं कि कांग्रेस की छवि पर पूरी तरह बट्टा लग गया है। इससे कांग्रेस की राजमाता बुरी तरह आहत नजर आ रही हैं। आज सोनिया गांधी के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे आखिर भरोसा करें तो किस पर। उन्हें सलाह देने वाले सारे नेता कांग्रेस के बजाए खुद को स्थापित करने की जुगत में ही लगे हुए हैं। मनमोहन सिंह पर भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक होने की छाप लग चुकी है। मनमोहन खुद को बेबस और लाचार साबित कर अपना दामन बचा चुके हैं। इस परिस्थिति में इस सबका ठीकरा कांग्रेस पर ही फूट रहा है। सोनिया को इस बात का डर सता रहा है कि अगर कांग्रेस की छवि नहीं सुधरी तो आने वाले समय में युवराज राहुल गांधी की ताजपोशी कैसे हो सकेगी?

आईपीएस नहीं आईएएस बैठेगा टीसी की कुर्सी पर

मध्य प्रदेश में सत्रह साल के उपरांत परिवहन आयुक्त की कुर्सी पर भारतीय पुलिस सेवा के बजाए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की पदस्थापना होने वाली है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के मध्य प्रदेश काडर के दिल्ली में पदस्थ अधिकारियों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार परिवहन आयुक्त एस.एस.लाल की बिदाई अब सुनिश्चित ही है। 2013 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान की पोस्टस पर अपने चुनिंदा अधिकारियों को बिठाने की कवायद में जुट गए हैं। विधानसभा चुनावों के वक्त इंदौर कलेक्टर रहे राकेश श्रीवास्तव को जनसंपर्क आयुक्त बनाकर शिवराज ने उनके प्रति अनुराग जता दिया था। चर्चा है कि जल्द ही उन्हें परिवहन आयुक्त के मलाईदार पद पर बिठाया जाएगा, ताकि फंड मेनेजमेंट भी संभाला जा सके।

एमपी कांग्रेस में मीनाक्षी गुट का उदय!

मध्य प्रदेश में कांग्रेस कई गुटों में बटी है। कमल नाथ, सिंधिया, दिग्गी राजा, पचौरी, श्रीनिवास तिवारी, भूरिया आदि न जाने कितने गुट अस्तित्व में हैं। हाल ही में एमपी कांग्रेस कमेटी में नए गुट का अभ्युदय हुआ है। यह गुट है मीनाक्षी नटराजन का। कांग्रेस की नजरों में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन ने दबे पांव सियासत करना आरंभ किया है। मीनाक्षी अपने चहेतों को अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी में न केवल स्थान दिलवा रही हैं वरन् गुमनाम चेहरों को भी धो पोंछकर सामने लाना चाह रही हैं। इसी तारतम्य में इंदौर के एक शैक्षणिक संस्था चलाने वाले व्यवसाई को लगे हाथ वीटो का प्रयोग कर मीनाक्षी ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सचिव बनवा दिया है। एमपी के कांग्रेसी क्षत्रप बेबस हैं क्योंकि मीनाक्षी की दखल राहुल गांधी के किचिन तक जो ठहरी।

क्या आड़वाणी सन्यास लेंगे?

देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में इन दिनों एक ही बात पर चर्चा चल रही है कि क्या राजग का पीएम इन वेटिंग पद छोड़ चुके भाजपा के कथित लौह पुरूष लाल कृष्ण आड़वाणी सन्यास की घोषणा करेंगे। तिरासी बसंत देख चुके भाजपा के वयोवृ; नेता आड़वाणी के मन में अभी भी प्रधानमंत्री बनने की उत्कंठ इच्छा है। यही कारण है कि वे यात्रा पर यात्रा किए जा रहे हैं। एक तरफ तो सियासी पार्टियां युवाओं को आगे लाने की हिमायत करती हैं वहीं दूसरी ओर जब अमली जामा पहनाने की बारी आती है तो वे इससे कन्नी काट लेती हैं। राजनैतिक तौर पर सक्रियता अगर देखी जाए तो हर दल में साठ से ज्यादा उम्र वाले ही मलाईदार पदों पर बैठे हुए हैं। आड़वाणी भी नब्ज टटोल रहे हैं अगर उन्हें कुछ नहीं मिला तो वे निसंदेह वे सन्यासी हो जाएंगे।

बच्चे और दलित हैं आताताईयों के निशाने पर

देश में बच्चों और दलित आदिवासियों पर बलशालियों की नजरें तिरछी हैं। यह कहना हमारा नहीं है, इस बात को कह रहे हैं भारत गणराज्य के जिम्मेदार गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम। भारत में अपराध 2010 का विमोचन करते हुए चिदम्बरम ने ये तथ्य उजागर किए। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों पर अगर गौर फरमाया जाए तो भयावह सच्चाई सामने आती है। बच्चों के खिलाफ अपराध में दस दशमलव तीन तो अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध में आठ दशमलव पांच की बढोत्तरी दर्ज की गई है। यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि इन भयावह आंकड़ों के बाद भी देश के जिम्मेदार गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम की रीढ़ में सिहरन भी पैदा नहीं हो रही है, तो फिर देश किस अंधी सुरंग और अंतहीन में चल पड़ा है।

कांग्रेस का किसान, भाजपा का किसान

देश का अन्नदाता है किसान, किसान न तो किसी सियासी दल का कारिंदा होता है और न ही उसे किसी से कोई लेना देना ही होता है। वह तो बस धरती का सीना चीरता है और फसल उगाता है। जब उसकी फसल किसी प्राकृतिक आपदा का शिकार हो जाती है तब वह विचलित होता है। सियासी दलों के नेताओं ने किसान को ही भाजपा और कांग्रेस में बांट दिया है। पिछले दिनों मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव जुुलानिया के सामने किसानों की हुई दुर्दशा को विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर देखते रहे। शायद वे सोच रहे होंगे कि ये किसान तो भाजपा के हैं इनसे हमें क्या लेना देना? यही कारण है कि वे सर्किट हाउस में किसानों की बेईज्जती चुपचाप अपने कमरे में बैठकर देखते रहे। सवाल यह है कि किसान किस दल का सदस्य है कांग्रेस या भाजपा का? वह तो अन्नदाता है साहेब।

पुच्छल तारा

देश में घपले घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजनेता फावड़े क्या जेसीवी कंपनी की संूड वाली मशीन से पैसा खीचने में लगे हैं। देश में अराजकता का आलम है। चंद लोग पकड़े गए और तिहाड़ जेल में बंद हैं। राजा दिग्विजय ंिसह उन्हें छोड़ने की वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया और युवराज राहुल खामोश हैं। क्या हो रहा है इस देश में कोई बताने को तैयार नजर नहीं आ रहा है। इन परिस्थितियों में महाराष्ट्र के अमरावति से लक्ष्मी पाटिल ने एक ईमल भेजा है। लक्ष्मी लिखती हैं -‘‘ब्रेकिंग न्यूज!!!!!! स्विस बैंक ने जल्द ही दिल्ली के तिहाड़ जेल में जहां सारे घपले, घोटालेबाज बंद हैं में अपने बैंक के एटीएम को खोलने का फैसला लिया है।‘‘

रविवार, 30 अक्टूबर 2011

घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी


घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी

थापर ग्रुप के पावर प्लांट डलने के मार्ग प्रशस्त

जनसेवकों का मौन सन्दिग्ध

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश की ख्यातिलब्ध थापर ग्रुप ऑफ कम्पनी समूह के एक प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील को झुलसाने की तैयारी पूरी कर ली है। वर्ष 2009 में 22 अगसत को बिना किसी मुनादी के गुपचुप तरीके से घंसौर में सम्पन्न हुई जनसुनवाई के बाद अब इसकी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गईं हैं। अब मामला केन्द्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय के पाले में आ चुका है।

गौरतलब है कि झाबुआ पावर प्लांट कंपनी द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर सिवनी जिले की घंसौर तहसील के बरेला ग्राम में 1200 मेगावाट का एक पावर प्लांट लगाया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में यहां 600 मेगावाट की इकाई प्रस्तावित है। कोयला मन्त्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस कंपनी को अभी कोल लिंकेज प्रदान नहीं किया गया है।

केन्द्रीय उर्जा मन्त्रालय के भरोसेमन्द सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना के लिए 3.20 एमटीपीए से अधिक के ईंधन की आवश्यक्ता होगी एवं इस संयन्त्र में पानी की आपूर्ति रानी अवन्ति बाई सागर परियोजना जबलपुर, (बरगी बांध) के सिवनी जिले के भराव वाले इलाके गडघाट और पायली के समीप से किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रतिघंटा 3262 मीट्रिक टन पानी पी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस संयन्त्र का बायलर पूरी तरह कोयले पर ही आधारित होगा। इसके लिए कोयले की आपूर्ति साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के अनूपपुर, शहडोल स्थित खदान से की जाएगी।

कंपनी के सूत्रों का कहना है कि थापर ग्रुप की इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए 360 एकड गैर कृषि एवं मात्र 20 एकड कृषि भूमि का क्रय किया गया है। सरकार से 220 एकड भूमि भी लिया जाना बताया जाता है। कहते हैं कि जिन ग्रामीणों की भूमि खरीदी गई है उन्हें भी मुंह देखकर ही पैसे दिए गए हैं। कहीं कंपनी को जमीन अमोल मिल गई है तो कहीं अनमोल कीमत देकर। कंपनी के सूत्रों ने आगे बताया कि कंपनी ने जिन परिवारों की भूमि अधिग्रहित की है, उन परिवारों के एक एक सदस्य को नौकरी दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है। वहीं चर्चा यह है कि स्थानीय लोगों को या जमीन अधिग्रहित परिवार वालों को अनस्किल्ड लेबर के तौर पर नौकरी दे दी जाएगी, और शेष बचे स्थानों पर बाहरी लोगों को लाकर संयत्र को आरम्भ कर दिया जाएगा।

इस समूचे मामले में सिवनी जिले के जनसेवकों की चुप्पी आश्चर्यजनक है। इस संयन्त्र की चिमनी लगभग एक हजार फिट उंची होगी, जिसके अन्दर कोयला जलेगा। यहां उल्लेखनीय होगा कि संयन्त्र से निकलने वाली उर्जा और कोयले की तपन को सह पाना आसपास के ग्रामीणों और जंगल में लगे पेड पौधों के बस की बात नहीं होगी। इसके लिए न तो मध्य प्रदेश सरकार को ही ठीक ठाक मुआवजा मिलने की खबर है, और न ही आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के निवासियों के हाथ ही कुछ राहत लग पा रही है। कहा जा रहा है कि झाबुआ पावर लिमिटेड कंपनी द्वारा जनसेवकों को शान्त रहने के लिए उनके मंह पर भारी भरकम बोझ रख दिया है, ताकि घंसौर को झुलसाने के उनके मार्ग प्रशस्त हो सकें।

अपने मन के मंत्री भी नहीं बना पाए मन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 13

अपने मन के मंत्री भी नहीं बना पाए मन

मजबूर और बेबस वजीरे आजम से छुटकारा चाह रही कांग्रेस

भस्मासुर की छवि बन चुकी है मनमोहन सिंह की

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। सबसे अधिक समय तक नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) से इतर वजीरे आजम की कुर्सी संभालने वाले कमजोर, लाचार और बेबस प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की छवि कांग्रेस के अंदर भस्मासुर की बन चुकी है। कांग्रेसी अपने आप को जीवित रखने के लिए अब मनमोहन सिंह का मन से छुटकारा चाह रहे हैं। प्रधानमंत्री ने दांव चलते हुए अपने आप को कमजोर और बेबस साबित कर सब कुछ सोनिया गांधी के इशारों पर होने का संकेत देकर सभी को चौंका दिया है।

वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन ंिसह इस बात को भी प्रचारित करवा रहे हैं कि 2004 से अब तक वे अपने पसंद का कुनबा यानी मंत्रीमण्डल नहीं बनवा पाए हैं। वे जिसे भी मंत्री बनाना चाह रहे थे उसके लिए सोनिया ने हरी झंडी नहीं दी। रही बात घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार की तो वे खुद प्रधानमंत्री तो हैं पर उनकी चलती ही नहीं है इसलिए वे क्या कर सकते हैं। इशारों ही इशारों में मनमोहन सिंह ने ठीकरा श्रीमति सोनिया गांधी के सर फोड दिया।

जैसे ही घपले घोटालों की बात उजागर हुई प्रधानमंत्री ने अपना पल्ला झाड़कर संपादकों की टोली के सामने अपने आप को निरीह साबित कर दिया। फिर क्या था सभी की तोप का मंुह सोनिया की ओर घूम गया। जब यह बात सोनिया जुंडाली तक पहुंची वैसे ही सभी नहा धोकर मनमोहन की मुक्ति के मार्ग खोजने में जुट गए। कांग्रेस के अंदर मनमोहन की छवि भस्मासुर की बन चुकी है। कहा जा रहा है कि मनमोहन इस तरह तो कांग्रेस को समूल समाप्त कर ही दम लेंगे।

कांग्रेसी अब इस बात को प्रचारित करवा रहे हैं कि अगर मनमोहन बेबस, लाचार और कमजोर हैं तो फिर क्या वजह है कि वे प्रधानमंत्री की कुर्सी से चिपके हुए हैं। अपनी ईमानदार छवि के चलते उन्हें तो त्यागपत्र देकर राजनीति से किनारा कर लेना चाहिए था। वस्तुतः मनमोहन सिंह ने एसा किया नहीं। इससे साफ हो जाता है कि मनमोहन सिंह ईमानदार नहीं वरन् भ्रष्टचार के ईमानदार संरक्षक के तौर पर उभरकर सामने आए हैं।

(क्रमशः जारी)

रथ यात्रा से उत्साहित हैं लालू यादव


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 7

रथ यात्रा से उत्साहित हैं लालू यादव

नितिश कुमार का राजनैतिक अंत देख रहे हैं लालू यादव

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। तिरासी बसंत पार कर चुके एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा से तीन लोग प्रसन्न नजर आ रहे हैं। अव्वल तो उनकी पुत्री प्रतिभा दूसरे अनंत कुमार और तीसरे हैं लालू प्रसाद यादव। लालू इसलिए प्रसन्न हैं क्योंकि बिहार के निजाम नितीश कुमार द्वारा आड़वाणी की रथ यात्रा को झंडी दिखाने से अल्प संख्यक नितीश से नाता तोड़ सकते हैं।

बिहार की सत्ता से उखाड़ फेंके गए राजद सुप्रीमो लालू यादव का शनि 2009 से भारी चल रहा है। 2009 के चुनावों में उनकी पार्टी औंधे मुंह गिरी और वे केंद्र तथा बिहार दोनों ही जगह सत्ता की मलाई चखने से वंचित रह गए। सत्ता से बाहर रहने के कारण राजग में फंडिंग का अभाव हो रहा है और लालू यादव का कुनबा टूट टूट कर बिखर रहा है।

इन दिनों लालू प्रसाद यादव के चेहरे की लालिमा एक बार फिर बढ़ती दिख रही है। लालू यादव को विश्वास है कि नितीश कुमार द्वारा जब एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा को झंडी दिखाई गई उसके बाद से ही मुसलमीन (मुस्लिम समुदाय) नितीश कुमार से खफा हो गया है। अब मुस्लिम समुदाय के पास बिहार में लालू प्रसाद यादव से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। गौरतलब है कि 1990 में लालू प्रसाद यादव ने ही आड़वाणी की यात्रा को रोका और गिरफ्तार किया था, जिसके परिणामस्वरूप विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार धराशाई हुई थी।

(क्रमशः जारी)

5 रूपए की सिम में 15 का बैलेंस!


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  9

5 रूपए की सिम में 15 का बैलेंस!

टारगेट पूरा करने तरह तरह के हथकंडे अपना रहा आईडिया

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मोबाईल की दुनिया में धूम मचाने वाली आदित्य बिरला की आईडिया सेल्यूलर द्वारा अपने टीम मैनेजर्स को दिए गए भारी भरकम लक्ष्य को पूरा करने की गरज से आईडिया के टीम प्रबंधकों द्वारा देश भर में अपने उपभोक्ताओं को तरह तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि पांच रूपए में सिम खरीदने में पंद्रह रूपए का बेलेंस मिल रहा है। इसके लिए आईडिया की टीम द्वारा उपभोक्ताओं की निर्धारित औपचारिकताएं भी पूरी नहीं करवाई जाने की शिकायतें मिलीं हैं।

मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा बिना किसी औपचारिकता को पूरा किए ही पांच रूपए में सिम दिए जाने की खबरें मिल रहीं हैं। इस सिम में पंद्रह रूपए का बैलेंस भी मिल रहा है। मजे की बात तो यह है कि उपभोक्ता द्वारा जब औपचारिकताओं की फोटो कापी दी जाती है तो उपभोक्ताओं से एक के बजाए दो फोटो की मांग की जाती है।

इतना ही नहीं उपभोक्ता के कस्टमर आईडेंटीफिकेशन फार्म के जमा होते ही उसकी सिम चालू कर दी जाती है। भले ही उसके द्वारा दिया गया पते का प्रमाण पत्र या जन्म तिथि फर्जी हो। आईडिया में इतनी मुगलई मची हुई है कि उपभोक्ता को अगर शिकायत करना हो तो उसे कोई यह बताने को राजी नहीं होता है कि उसकी शिकायत कहां दर्ज की जाएगी।

(क्रमशः जारी)

शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

नारिलय में निकला फूल


घपलों घोटालों से आहत हैं राजमाता


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 12

घपलों घोटालों से आहत हैं राजमाता

भ्रष्टाचार से कांग्रेस की छवि तार तार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की दूसरी पारी में न केवल अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह वरन् कांग्रेस की छवि तार तार हो चुकी है। कांग्रेस की हाईकमान को अब चिंता इस बात की सता रही है कि आने वाले समय में कहीं देश भर में कांग्रेस का नामलेवा ही न बचे। इससे बचने के लिए सबसे अहम बात मनमोहन सिंह से छुटकारा पाना ही है, जिसके लिए रोड़मेप तैयार किया जा रहा है कि किस तरह मनमोहन से पिंड छुड़ाया जाए।

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि मनमोहन सिंह को बदलने से चंद दिनों में ही लोग भ्रष्टाचार घपले घोटालों को भूल जाएंगे। इसके अलावा मनमोहन को हटाने से जनता में यह संदेश भी चला जाएगा कि भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक मनमोहन सिंह को कांग्रेस ने हटा दिया है, इससे साफ है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की पोषक नहीं है।

कांग्रेस आलाकमान को चह चिंता खाए जा रही है कि 2जी स्पेक्ट्रम, इसरो के एस.बेण्ड, कामन वेल्थ, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर थॉमस की नियुक्ति प्रकरण, बीस हजार करोड़ का अनाज घोटाला, पेंतीस हजार करोड़ रूपए का सरकारी बैंकों के आवास ऋण का महाघोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला, हसन अली का प्रकरण, स्विस बैंक का काले धन का मामला आदि ने कांग्रेस की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है उससे उबरा कैसे जाए?

विपक्ष को लगे हाथ एक बेहतरीन मौका मिला है। कांग्रेस से पूरी तरह ‘सेट‘ विपक्ष ने इस मामले में अपनी धार बोथरी कर रखी है फिर भी बाबा रामदेव और अण्णा हजारे के कारण कांग्रेस को बुरी तरह नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दोनों ही के कारण विपक्ष को भी तल्ख तेवर अपनाने पड़े और भाजपा, वामदलों को मजबूरी में कांग्रेस और संप्रग सरकार को भ्रष्टचार की गंगोत्री की उपाधि भी देना पड़ा।

(क्रमशः जारी)

आखिर सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे आड़वाणी


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 6

आखिर सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे आड़वाणी

सरकार बनी तो पीएम नहीं तो बेटी को राजपाट सोंपने की तैयारी में आड़वाणी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और लौह पुरूष का अघोषित खिताब पाने वाले लाल कृष्ण आड़वाणी के मन में प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना अभी भी कुलाचें मार रही हैं। रथ यात्रा के बहाने समूचे देश की नब्ज टटोलने निकले आड़वाणी एक तीर से कई निशाने साध रहे हैं। अगर सरकार बनी तो वजीरे आजम का पद हथिया लेंगे और अगर औंधे मुंह गिरी भाजपा तब भी आड़वाणी के हाथों में लड्डू ही होगा। वे रथ यात्रा के बहाने अपनी पुत्री को राजनैतिक तौर पर स्थापित कर चुकेंगे।

भारतीय जनता पार्टी के अंदर ही अंदर एक बात खदबदा रही है कि आखिर उमर के इस पड़ाव में आड़वाणी सन्यास की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं। भाजपा के अंदरखाते से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो आड़वाणी राजनीति के चतुर सुजान हैं और वे एक तीर से अनेक निशाने साधने में महारथ हासिल करते हैं।

आड़वाणी जुंडाली में चल रही चर्चाओं के अनुसार रथ यात्रा के उपरांत आड़वाणी इसका आंकलन करेंगे कि अगली बार भाजपा की सरकार बन पाएगी कि नहीं। अगर उन्हें यकीन हुआ कि सरकार राजग की बैसाखी पर खड़ी हो सकती है तो वे प्रधानमंत्री बनने की अपनी महात्वाकांक्षा को फिर दुहरा देंगे। यही कारण है कि आड़वाणी अपने राजनैतिक वनवास की आधिकारिक घोषणा करने से हिचक रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि अगर राजग की सरकार नहीं भी बनती है तो भी आड़वाणी अपनी पुत्री प्रतिभा को अपनी राजनैतिक विरासत सौंपकर प्रतिभा का राजतिलक कर देंगे। आड़वाणी के करीबी सूत्रों का कहना है कि आड़वाणी ने अभी यह तय नहीं किया है कि वे गुजरात के गांधी नगर की अपनी लोकसभा सीट पर 2014 में लोकसभा चुनाव खुद लड़ेंगे या फिर अपनी पुत्री को यह सीट सौंप देंगे।

(क्रमशः जारी)

कहां से दे रहा है अपने कारिंदो को आकर्षक वेतना आईडिया


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  8

कहां से दे रहा है अपने कारिंदो को आकर्षक वेतन आईडिया

सिम का गोरखधंधा मचा है आईडिया में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता बिरला सेल्युलर की आईडिया कंपनी अपने मुलाजिमों को आकर्षक वेतन भत्ते, कमीशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। महज पांच रूपए की सिम बेचकर यह कंपनी हजारों रूपए मासिक के हजारों कर्मचारी कैसे पाल रही है यह शोध का ही विषय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि लोगों की जेब में सीधा डाका डालकर आईडिया कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को पाला जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक आईडिया कंपनी द्वारा अपने कार्य क्षेत्र में विस्तार के लिए जिस दल का उपयोग किया जा रहा है। उस टीम के प्रबंधक याीन टीम मैनेजर को कंपनी द्वारा मोटी पगार, आकर्षक कमीशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इन टीम मैनेजर्स पर महज पांच रूपए की सिम बेचने के लिए निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी द्वारा इतना ज्यादा दबाव बनाया जाता है कि ये टीम मैनेजर्स अपने उपभोक्ताओं को मौखिक तौर पर न जाने कितने लुभावने वायदे कर देते हैं।

सेल्युलर बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार पांच पांच रूपए एकत्र करने के बाद आईडिया कंपनी आखिर अपने एक टीम मैनेजर को पेंतालीस से पचास हजार रूपए का वेतन और अन्य सुविधाएं कैसे मुहाया करवाई जा रही हैं। इसका तातपर्य यह हुआ कि एक माह में एक हजार सिम बेचने पर उस टीएम का वेतन निकलेगा। समूची टीम का वेतन अगर जोड़ लिया जाए तो हर माह लगभग दस हजार सिम बेचने पर यह निकलेगा। इतनी मात्रा में सिम बेचने के बाद बिकने वाली सिम से संचित धन कंपनी के खाते में जाएगा। आईडिया की उत्तरोत्तर प्रगति लोगों के लिए शोध का विषय ही बनी हुई है।

(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

यूपी में मुस्लिम कार्ड खेल सकती है कांग्रेस


यूपी में मुस्लिम कार्ड खेल सकती है कांग्रेस

राहुल इफेक्ट को उभार रही है कांग्रेस

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वाले सूबे उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की छवि को एक बार फिर उकेरने का प्रयास किया जा रहा है कांग्रेस द्वारा। इसके साथ ही साथ कांग्रेस द्वारा सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश में मुस्लिम कार्ड खेलने का मन बनाया जा रहा है।

पिछले दिनों केंद्रीय कानून और अल्प संख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस तरह के संकेत देते हुए कहा कि नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिमों को आरक्षण अनुदान देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। सलमान खुर्शीद ने इस बारे में इशारों ही इशारों में मुसलमानों के लिए आंध्र माडल की वकालत भी कर डाली।

उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने की गरज से कांग्रेस द्वारा हर संभव प्रयास करने के संकेत भी मिल रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल और केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कमर कस ली है।

कहा जा रहा है कि अगर इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन नहीं सुधारा तो आने वाले आम चुनावों में विपक्ष के हाथों में अनजाने में ही सोनिया और राहुल को घर संभालने की नसीहत का मुद्दा मिल सकता है। कांग्रेस विपक्ष को अवसर देने के पक्ष में कतई नहीं दिख रही है।

उधर कांग्रेस का सबसे प्यारा और ब्रम्हास्त्र नंबर दो राहुल गांधी (कांग्रेस के पास पहला ब्रम्हास्त्र प्रियंका वढ़ेरा है) की छवि को एक बार फिर उकेरने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि अभी राहुल इफेक्ट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राहुल ब्रांड को एक बार फिर चमकाने की जुगत में जुट चुके हैं कांग्रेस के रणनीतिकार।

ठाकुर लाबी को गोलबंद कर रहे हैं दिग्विजय सिंह


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 11

ठाकुर लाबी को गोलबंद कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

मन से मन नहीं बैठ पा रहा है दिग्गी राजा का

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह और कुंवर अर्जुन सिंह के उपरांत कांग्रेस की राजनीति के अघोषित चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। दिग्विजय सिंह के कदमों को देखकर लोग भले ही उन्हें भस्मासुर की संज्ञा दे रहे हों किन्तु मनमोहन को रास्ते से हटाने के लिए उनके कदमों को समझ रहे हैं अनेक रणनीतिकार।

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (श्रीमति सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के सूत्रों का कहना है कि दरअसल दिग्विजय सिंह द्वारा मनमोहन की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे हैं। विश्व के खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफनाने का विरोध कर दिग्गी राजा ने मनमोहन को संकट में डाल दिया था। साथ ही ओसामा को ओसामा जी कहकर उन्होंने जो चाल चली उससे मनमोहन सिंह को अमेरिका के सामने जवाब देना मुश्किल कर दिया।

इसके अलावा क्षत्रिय नेता राजा दिग्विजय सिंह द्वारा ठाकुर नेताओं को एक छत के नीचे लाने की चाल चली जा रही है। पूर्व सांसद विश्वजीत सिंह, एआईसीसी सचिव जितेंद्र सिंह, अमर सिंह जैसे नेताओं के माध्यम से दिग्विजय सिंह लाबिंग का प्रयास कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ठाकुर लाबी के दबाव में मनमोहन सिंह के तख्ता पलट की तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं।

(क्रमशः जारी)

बल्ले बल्ले हैं अनंत कुमार


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 5

बल्ले बल्ले हैं अनंत कुमार

येदियुरप्पा समर्थक फटक भी न पाएंगे रथ यात्रा में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अपनी पुत्री प्रतिभा को महिमा मण्डित करने के लिए हो रही एल.के.आड़वाणी की रथ यात्रा से अनंत कुमार काफी पुलकित नजर आ रहे हैं। अनंत कुमार के घुर विरोधी कर्नाटक के निर्वतमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके समर्थकों को रथ के आसपास न फटकने के पुख्ता इंतजाम भी कर दिए गए हैं।

इस रथ यात्रा में आड़वाणी की पुत्री प्रतिभा के साथ ही साथ रथ के सारथी अनंत कुमार भी पूरे देश में अपने आप को लगे हाथ स्थापित करने की जुगत में हैं। अनंत कुमार वैसे तो भाजपा में जाना पहचाना चेहरा है, पर फिर भी हालात देखकर एसा प्रतीत हो रहा है मानो वे खुद को स्थापित करना चाह रहे हैं।

गौरतलबह है कि आड़वाणी की रथ यात्रा 31 अक्टूबर को कर्नाटक में प्रवेश करने वाली है। अनंत कुमार के करीबी सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक भाजपा के चीफ ई.एस.ईश्वरप्पा ने अनंत कुमार से मंत्रणा कर यह तय कर लिया कि न तो येदियुरप्पा और न ही उनके लग्गू भग्गूओं को रथ के आसपास फटकने दिया जाएगा।

समस्या यह आ रही थी कि अगर मीडिया ने पूछा कि येदियुरप्पा के समर्थक नजर नहीं आ रहे हैं तब यह जवाब दे दिया जाएगा कि यह तो पार्टी की कोर कमेटी को तय करना है कि किसे रथ यात्रा में बुलाया जाए और किसे नहीं।

(क्रमशः जारी)

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  7

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में

आकर्षक लुभावने प्रलोभनों से घेरा जा रहा है उपभोक्ताओं को

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी आदित्य बिरला सेल्यूलर की आईडिया द्वारा उपभोक्ताओं को लुभाने तरह तरह के लुभावने आकर्षक प्रलोभनों का सहारा लिया जा रहा है। इसमें सबसे अधिक आपत्तिजनक तथ्य यह उभरकर सामने आ रहा है कि सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इन सिम की वेधानिक जांच के बिना ही कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं, जिससे असमाजिक तत्व और जरायमपेशा लोगों द्वारा इसके दुरूपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा कस्टमर आईडेंटीफिकेशन फार्म में औपचारिकताएं देखे बिना और पर्याप्त दस्तावेज के बिना ही कस्टमर की सिम एक्टीवेट कर दी जाती है। भले ही औपचारिकताओं के अभाव में दो तीन दिन के उपरांत सिम बंद हो जाए पर पहले तीन दिन तो सिम का भरपूर उपयोग उपभोक्ता द्वारा किया जा सकता है।

आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि आईडिया के आउट लेट्स में जब उपभोक्ताओं द्वारा अपने दस्तावेज की छाया प्रति जमा करवाई जाती है तो उनके दस्तावेज की और छाया प्रति कर उनके नाम से छद्म कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं। देश भर में आईडिया कंपनी की वेध सिम से ज्यादा अवैध सिम प्रचलन में होना बताया जा रहा है।

(क्रमशः जारी)

चित्रगुप्त जयंती


चित्रगुप्त जयंती


इसके अलावा कायस्थ समाज में इसी दिन अपने आराध्य देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। कायस्थ लोग स्वर्ग में धर्मराज का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त का पूजन सामूहिक रूप से तस्वीरों अथवा मूर्तियों के माध्यम से करते हैं। वे इस दिन कारोबारी बहीखातों की पूजा भी करते हैं। उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसी दिन 'गोधन' नामक पर्व मनाया जाता है जो भाईदूज की तरह होता है।


यमद्वितीया पर्व की मान्‍यता






पर्व की मान्यता

भारतीय में जितने भी पर्व त्यौहार होते हैं वे कहीं न कहीं लोकमान्यताओं एवं कथाओं से जुड़ी होती हैं। इस त्यौहार की भी एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार। यमी यमराज की बहन हैं जिनसे यमराज काफी प्रेम व स्नेह रखते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक बार जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा सत्कार की। बहन के सत्कार से यमराज काफी प्रसन्न हुए और उनसे कहा कि बोलो बहन क्या वरदान चाहिए। भाई के ऐसा कहने पर यमी बोली की जो प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे वह यमपुरी न जाए। यमी की मांग को सुनकर यमराज चिंतित हो गये। यमी भाई की मनोदशा को समझकर यमराज से बोली अगर आप इस वरदान को देने में सक्षम नहीं हैं तो यह वरदान दीजिए कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करे और मथुरा के विश्राम घट पर यमुना के जल में स्नान करे उस व्यक्ति को यमलोक नहीं जाना पड़े। इस पौराणिक कथा के अनुसार आज भी परम्परागत तौर पर भाई बहन के घर जाकर उनके हाथों से बनाया भोजन करते हैं ताकि उनकी आयु बढ़े और यमलोक नहीं जाना पड़े। भाई भी अपने प्रेम व स्नेह को प्रकट करते हुए बहन को आशीर्वाद देते है और उन्हें वस्त्र, आभूषण एवं अन्य उपहार देकर प्रसन्न करते हैं।


अथ चित्रगुप्‍त कथा


भाई दूज (भातृद्वितीया ) की मान्‍यता

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भाईदूज में हर बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं। भाई अपनी बहन को कुछ उपहार या दक्षिणा देता है। भाईदूज दिवाली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। इस त्योहार के पीछे एक किंवदंती यह है कि यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को इसी दिन दर्शन दिया था, जो बहुत समय से उससे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर में भाई यम के आगमन पर यमुना ने प्रफुल्लित मन से उसकी आवभगत की। यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी। इसी कारण इस दिन यमुना नदी में भाई-बहन के एक साथ स्नान करने का बड़ा महत्व है। इसके अलावा यमी ने अपने भाई से यह भी वचन लिया कि जिस प्रकार आज के दिन उसका भाई यम उसके घर आया है, हर भाई अपनी बहन के घर जाए। तभी से भाईदूज मनाने की प्रथा चली आ रही है। जिनकी बहनें दूर रहती हैं, वे भाई अपनी बहनों से मिलने भाईदूज पर अवश्य जाते हैं और उनसे टीका कराकर उपहार आदि देते हैं। बहनें पीढियों पर चावल के घोल से चौक बनाती हैं। इस चौक पर भाई को बैठा कर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं।