बुधवार, 28 दिसंबर 2011

साठ फीसदी अनुसूचित जनजाति रहती है संयंत्र क्षेत्र में


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 41

साठ फीसदी अनुसूचित जनजाति रहती है संयंत्र क्षेत्र में

पचास फीसदी भी नहीं है साक्षरता दर!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। सुप्रसिद्ध उद्योगपति गौतम थापर के स्वमित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं सूची में अधिसूचित मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में लगने वाले कोल आधारित पावर प्लांट के बफर क्षेत्र में साठ फीसदी से अधिक तादाद में अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं।
अनुसूचित जाति बाहुल्य इस क्षेत्र में साक्षरता की दर भी काफी कम है। जनगणना 2011 के अनुसार मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के अध्ययन क्षेत्र की कुल जनसंख्या संयंत्र के दस किलोमीटर बफर जोन की परिधि में 49 हजार 32 है। इसमें कुल पारिवारिक इकाईयों की तादाद 9468 बताई गई है।
इस बफर जोन में अनुसूचित जाति का प्रतिशत 6.98 फीसदी और जनजाति का 60.74 फीसदी है। मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड ने अपने कार्यकारी सारांश में इस क्षेत्र की साक्षरता दर 48.40 दर्शाई गई है। बताया जाता है कि यहां साक्षरता दर इससे काफी कम है। संयंत्र प्रबंधन ने इस क्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारी ‘सीएसआर‘ के लिए कुल पांच साल में कुल एक करोड़ रूपए व्यय करने की बात कही गई है।
संयंत्र के लिए लोकसुनवाई 2009 में संपन्न हुई उसके उपरांत अब तक संयंत्र प्रबंधन द्वारा इस मद में क्या कार्यवाही की गई है इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। क्षेत्र के लोग दावे से इस बात को कह रहे हैं कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा पिछले दो सालों में प्राईमरी, माध्यमिक, हाई या हायर सेकंड्री स्तर पर कोई भी पहल नहीं की गई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर भी गौतम थापर या संयंत्र प्रबध्ंान से यह पूछने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं कि आखिर संयंत्र प्रबंधन इस मामले में मौन क्यों है?

(क्रमशः जारी)

सेवकों को हाकिम बना दिया मनमोहन ने


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 63

सेवकों को हाकिम बना दिया मनमोहन ने

जनता के सेवक हो गए हैं हुक्मरान!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने निश्चित तौर पर इक्कीसवीं सदी के एसे भारत देश की कल्पना तो कतई नहीं की होगी जैसा कि वर्तमान में दिख रहा है। बेलगाम व्यवस्थाएं, अनादार, कदाचार, भष्टाचार देश पर जमकर हावी है। गणतंत्र के न जाने कितने टुकड़े होकर बिखर गए हैं। जनता की सेवा का कौल लेने वाले जनसेवक आज देश के हाकिम बन बैठे हैं।
यह सारी व्यवस्थाओं में तब्दीली एक दिन में नहीं वरन् धीरे धीरे ही आई है। कहते हैं कि अगर घर का मुखिया ही कमजोर हो जाए तो घर का हर सदस्य उच्चश्रंखल और निष्क्रीय हो जाता है। गठबंधन धर्म को राष्ट्रधर्म के उपर रखने वाले कथित ईमानदार छवि के धनी वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह बतौर प्रधानमंत्री सब कुछ गफलतें सामने से देखते रहे और मौन साधे रहे। देश को लुटता देखने उनकी क्या मजबूरी थी यह तो वे ही जाने पर क्या यह सब उचित था?
वजीरे आजम अर्थशास्त्री कहे जाते हैं बावजूद इसके देश में मंहगाई कचहरी की तारीख पर तारीख देने के बाद भी नहीं रोकी जा सकी। लोग तो अब प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर ही शक करने लगे हैं। अब प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को ईमानदार प्रधानमंत्री के बजाए भ्रष्टाचार का ईमानदार संरक्षक ज्यादा मानने लगे हैं।

(क्रमशः जारी)

. . . मतलब महाकौशल का विकास नहीं चाहते क्षत्रप!


0 महाकौशल प्रांत का सपना . . . 20 (समापन किस्त)

. . . मतलब महाकौशल का विकास नहीं चाहते क्षत्रप!

अब सारा दारोमदार, कांग्रेस भाजपा के क्षत्रपों पर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के सच्चे हृदय प्रदेश महाकौशल प्रांत में सशक्त राजनैतिक नेतृत्व होने के बाद भी संयुक्त और प्रथक मध्य प्रदेश में भी इस क्षेत्र के विकास के मार्ग न खुल पाना निश्चित तौर पर राजनैतिक नेतृत्व को नपुंसक रेखांकित करने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। केंद्र में मंत्री कमल नाथ, भाजपा के क्षत्रप प्रहलाद पटेल, फग्गन ंिसह कुलस्ते जैसे दिग्गजों के बाद भी महाकौशल अगर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है तो निश्चित तौर पर इसका यही मतलब निकाला जा सकता है कि ये क्षत्रप इस क्षेत्र से जनादेश लेकर केंद्र में राजनीति तो करना चाहते हैं पर जब अपनी कर्मभूमि के विकास की बात आती है तो ये मौन साध लेते हैं।
इसी तरह मध्य प्रदेश में राजनैतिक बिसात पर अपनी माहिर चालें चलने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के साथ ही साथ अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के पूर्व अध्यक्ष और मध्य प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर नीखरा, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन ंिसह कुलस्ते के अलावा मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी के साथ ही साथ जनता दल यूनाईटेड के संयोजक शरद यादव, हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक, दीपक सक्सेना, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वनाथ दुबे, प्रवक्ता कल्याणी पांडे, श्रीमति नेहा सिंह, रेखा बिसेन, पुष्पा बिसेन, दयाल सिंह तुमराची गौरी शंकर बिसेन, अजय बिश्नोई, देवी सिंह सैयाम, नाना माहोड़ेत्र डॉ.ढाल सिंह बिसेन, चौधरी चंद्रभान सिंह, महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष अनुसुईया उईके, विनोद गोटिया, राकेश सिंह और न जाने कितने नेताओं ने महाकौशल का पानी पीकर यहीं की माटी को अपनी कर्मभूमि बनया है।
अब तक महाकौशल अगर पिछड़ा रहा है तो इसके लिए निश्चित तौर पर सभी दलों के नेता ही जवाबदार माने जा सकते हैं, क्योंकि इनकी राजनैतिक इच्छा शक्ति महाकौशल क्षेत्र के विकास के प्रति कभी दिखाई ही नहीं पड़ी। केंद्र में सदा प्रतिनिधित्व पाने वाला महाकौशल औद्योगिक तौर पर भी आत्मनिर्भर नहीं है। आज आलम यह है कि भारतीय रेल की नजरों में भी इसे उपेक्षित ही रखा हुआ है। उच्च न्यायायल के होने के कारण बिलासुपर से नई दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस रेलगाड़ी की सुविधा है किन्तु उच्च न्यायालय होने के बाद भी राजधानी एक्सप्रेस आज भी जबलपुर के लिए सपना है। मध्य प्रदेश से रेल मंत्री के पद पर स्व.माधवराव सिंधिया विराजे और उन्होंने ग्वालियर को चमन बना दिया। कितने दुर्भाग्य की बात है कि आज तक मध्य प्रदेश की झोली में एक भी राजधानी एक्सप्रेस नहीं आ पाई है। कद्दावर नेता कमल नाथ ने अपने संसदीय क्षेत्र में बड़ी रेल लाईन का जाल बिछाना आरंभ कर दिया है। उनसे ही उम्मीद की जा सकती है कि वे नई दिल्ली से बरास्ता भोपाल होकर छिंदवाड़ा जाने के लिए एक राजधानी एक्सप्रेस को चलाने की दिशा में प्रयास कर लें ताकि मध्य प्रदेश के माथे से कम से कम राजधानी एक्सप्रेस न होने का कलंक तो धोया जा सके। रही बात विमान सुविधा की तो विमान सुविधाओं के मामले में अन्य प्रदेशों की तुलना में मध्य प्रदेश काफी हद तक पिछड़ा हुआ है।

(समाप्त)

देश भर में ठंड ने दिखाया अपना असर


देश भर में ठंड ने दिखाया अपना असर



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली सहित समूचे देश भर में ठण्ड का कहर रूकने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय प्रशासन के पर्याप्त प्रबंध न हो पाने से गरीब गुरबे ठण्ड में ठिठुरने पर मजबूर हैं। शीतलहर के जबर्दस्त प्रकोप के बावजूद भी देश के कुछ प्रदेशों में शिक्षण संस्थाओं में अब तक अवकाश घोषित नहीं किया गया है।
देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल से साई संवाददाता अंशुल गुप्ता ने बताया कि प्रदेश का ठण्ड से बुरा हाल है। आने वाले छत्तीस घंटों के दौरान प्रदेश के ग्वालियर, चम्बल, रीवा और शहडोल संभागों के क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस या उससे कम रहने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में इस दौरान मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के रीवा, शहडोल और सागर संभाग में कहीं-कहीं शीतलहर का प्रकाप रहा। इस अवधि में प्रदेश का मौसम शुष्क रहा है। राजधानी भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में आने वाले चौबीस घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
उधर जयपुर से साई संवाददाता ‘मीनल कुंजाम‘ ने बताया कि प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में शीतलहर जारी रहने से आज भी सामान्य जनजीवन के साथ ही रेल और सड़क यातायात पर असर पड़ा। श्रीगंगानगर आज प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान एक दशमलव चार डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा चूरू में एक दशमलव आठ, पिलानी में दो दशमलव सात, भरतपुर में तीन दशमलव सात, सवाईमाधोपुर में साढे पांच, वनस्थली में पांच दशमलव आठ और जैसलमेर में छः डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में कल रात का तापमान साढे सात डिग्री रहा। सीकर में भी लोगों को कंपकपाती सर्दी का सामना करना पड़ रहा है। साई संवाददाता के अनुसार पिछले चार दिनों से जारी शीतलहर के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नागौर, धौलपुर, झालावाड़, चूरु सहित कई अन्य स्थानों से हमारें संवाददाताओं ने तेज सर्दी के कारण आम जीवन प्रभावित होने की खबरें दी है। प्रदेश के एक मात्र पर्वतीय स्थल माउंट आबू में तापमान शून्य से दशमलव छः डिग्री सेल्सियस नीचे रहा।
पोर्ट ब्लेयर से साई संवाददाता हामिद हुसैन ने बताया है कि बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी मे चक्रवातीय तूफान थाने के केन्द्रित होने से द्वीप समूह के विभिन्न भागों में पिछले चौबीस घंटों के दौरान रूक-रूक कर वर्षा हुई है। मौसम कार्यालय के अनुमान में बताया गया है कि अगले चौबीस घंटों के दौरान भी मौसम खराब रहेगा। इस दौरान पैतालीस से पचपन किलोमीटर की सफ्तार से दक्षिण पूर्व और दक्षिणी हवाएॅ चलेंगी। समुद्र बहुत अशांत रहेगा। मछुवारों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।  इस बीच पोर्ट ब्लेयर बंदरगाह पर खतरे का संकेत नम्बर तीन लगा दिया गया है।  

व्हिसल ब्लोअर्स संरक्षण विधेयक पारित


व्हिसल ब्लोअर्स संरक्षण विधेयक पारित



(विपिन सिंह राजपूत)

नई दिल्ली (साई)। लोकसभा ने कल रात व्हिसल ब्लोअर्स संरक्षण विधेयक २०११ पारित कर दिया। यह विधेयक मंत्रियों सहित जनसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार या जान बूझकर पद का दुरूपयोग किए जाने की सूचना देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें सुरक्षा देने का तंत्र बनाने की मांग करता है।
लोकसभा के सूत्रों ने बताया कि इस विधेयक में भ्रष्टाचार या अधिकारों का जानबूझकर दुरूपयोग करने वाले अधिकारियों की शिकायत करने वालों को पुख्ता सुरक्षा देने की भी बात कही गई है। ऐसे मामलों को उजागर करने वालों को उचित सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही गई है वहीं इसमें झूठी या बेवजह शिकायतें करने वालों को उचित सजा देने की भी बात शामिल है।
संसदीय समिति की कुछ प्रमुख सिफारिशें स्वीकार करते हुए सरकार ने कुछ संशोधनों का प्रस्ताव रखा है। इन संशोधनों को हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इनमें से एक सिफारिश इस विधेयक का नाम बदलने से संबद्ध भी है। कैबिनेट द्वारा मंजूर एक प्रमुख संशोधन के तहत मंत्रियों, सांसदों, रक्षा सेवाओं, खुफिया एजेंसियों, बैंक अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को इस विधेयक के दायरे में रखा गया है।

चुनावों की गाईड लाईन जारी की आयोग ने


चुनावों की गाईड लाईन जारी की आयोग ने



(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। चुनावों को पारदर्शी बनाने की कवायद में निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर कहा है कि पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के दौरान धन के लेनदेन से बचें तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ी धनराशि साथ लेकर न चलने का निर्देश दें।
आयोग ने उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इस आशय का पत्र लिखा है। आयोग ने चुनावों को स्वतंत्र तथा पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राजनीतिक दलों को यह सलाह दी है। आयोग ने उम्मीदवारों को चुनावी खर्चे के लिए अलग से बैंक खाता खोलने की सलाह भी दी है।

सजने लगी है उत्तराखण्ड में राजनैतिक बिसात


सजने लगी है उत्तराखण्ड में राजनैतिक बिसात



(अर्जुन कुमार)

देहरादून (साई)। विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित होते ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। प्रदेष के दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची अगले सप्ताह जारी होने की उम्मीद है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष प्रभारी थावर चन्द गहलौत ने आज देहरादून में पत्रकारों को बताया कि अगले महीने की दस तारीख तक उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी, जिसमंे स्वच्छ छवि वाले प्रत्याषियों को तरजीह दी जाएगी।
उन्होंने कुछ मौजूदा विधायकों के फिर से उम्मीदवार  बनाए जाने के साथ ही सरकार मंे निर्दलीय और अन्य दलों के नेताओं को प्रत्याषी बनाए जाने की सम्भावना से इनकार नहीं किया है। इससे पूर्व पार्टी की स्टार प्रचारक सुषमा स्वराज ने कल देहरादून में सैनिक प्रकोष्ठ के सम्मेलन को संबोधित किया और कहा कि कांग्रेस से हिसाब-किताब बराबर करने का वक्त आ गया है। उधर, कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी पहले ही देहरादून में रैली को संबोधित करने के साथ ही पार्टी के चुनाव प्रचार का शुभारम्भ कर चुके हैं। इस बीच, बहुजन समाज पार्टी ने भी नौ और सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है।
उधर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने कहा है कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम में दिये गये प्राविधानों के अनुसार मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के पश्चात नामांकन के लिए निर्धारित अंतिम तिथि तक इस सूची में नाम शामिल करने के साथ ही संशोधित या हटाए जा सकते हैं। उन्होंने देहरादून में बताया कि नियमानुसार इस संबंध में दावे अथवा आपत्ति की
सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित है। मुख्य निवार्चन अधिकारी ने बताया कि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के पश्चात नामांकन की अंतिम तिथि से आठ दिन पूर्व तक प्राप्त दावें अथवा आपत्तियों का संबंधित ईआरओ द्वारा नियमानुसार निस्तारण किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि राज्य की सत्तर विधानसभा सीटों के लिए नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि बारह जनवरी है। जबकि, दो जनवरी को फोटोयुक्त विधान सभा निर्वाचक नामावलियों का एक जनवरी की अर्हता तिथि के आधार पर अंतिम प्रकासन किया जायेगा।
प्रशासन ने चुनावों के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां आरंभ कर दी हैं। विधानसभा चुनाव के लिए टिहरी जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों को उन्नीस जोन और तेरह सैक्टरों में बांटा गया है, जिनमें आठ सौ छह पोलिंग बूथ होंगे।  जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरुगेषन ने विधानसभा चुनाव में तैनात जोनल व सैक्टर मजिस्टेªटों को अपने क्षेत्र में पोलिंग बूथ की स्थिति व पेयजल और विद्युत जैसी तमाम जरूरी सुविधाओं की सूचना तीन दिन के अन्दर निर्धारित प्रपत्र पर देने के निर्देष दिए हैं। उन्होंने बताया कि मतदान स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से सम्पन्न कराने के लिए पुख्ता तैयारियां करने निर्देष संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके अलावा सभी जोनल व सैक्टर मजिस्टेªटों को मतदाताओं से वार्ता कर सेक्टर मजिस्टेªट रिटर्निंग ऑफीसर के माध्यम से रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि निर्वाचन के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ ही संचार की समस्या वाले क्षेत्रों में वायरलैस संचार व्यवस्था सुनिष्चित की जाएगी। निगरानी टीम  अल्मोड़ा मंे आगामी विधान सभा सामान्य निर्वाचन के सफल संचालन के लिए जिले के प्रत्येक पुलिस स्टेषन के अधीन स्थायी निगरानी टीमों का गठन किया गया है। यह जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी डीएस गर्ब्याल ने बताया कि प्रत्येक रिर्टनिंग ऑफिसर को स्थायी निगरानी टीमों का प्रभारी अधिकारी नियुक्ति किया गया है। उन्होंने बताया कि स्थाई निगरानी टीमों के लिए पुलिस बल की तैनाती पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा द्वारा की जायेगी और सम्बन्धित रिर्टनिंग आफिसर को पुलिस बल उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि उप
जिलाधिकारियों को निर्देष दिये गये है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू करते हुए उसका सख्ती से अनुपालन कराना सुनिष्चित करें। जिला निर्वाचन अधिकारी ने पॉलीथीन के प्रयोग पर विषेष सख्ती बरतने के निर्देष दिए हैं। इसके अलावा आदर्ष आचार संहिता के तहत मंत्रियों द्वारा निर्वाचन कार्य हेतु शासकीय वाहन का प्रयोग प्रतिबन्धित रहेगा। उन्होंने राज्य कर्मचारियों के चुनाव प्रचार कार्यक्रम में सहयोग को पूरी तरह प्रतिबन्धित बताते हुए कहा है कि मंत्रियों के निजी स्टाफ का उपयोग मात्र शासकीय दायित्वों के निर्वहन में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आदर्ष आचार संहिता के सम्बन्ध में विस्तृत दिषा निर्देष सभी रिर्टनिंग आफिसर, प्रभारी  अधिकारी, नोडल अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को दिये गये हैं। 

खेती किसानी को लोकप्रिय बनाने कदम उठाएं: सिंह


खेती किसानी को लोकप्रिय बनाने कदम उठाएं: सिंह

(पवन कुमार)

पोर्ट ब्लेयर (साई)। जाने माने कृषि वैज्ञानिक और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर पंजाब सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की है कि वे देश में समन्वित कृषि प्रणाली को लोकप्रिय बनाने के लिए नए कदम उठाए। पोर्ट ब्लेयर के कारी परिसर में कल आयोजित तीन दिवसीय समूह बैठक के उद्घाटन अवसर पर उन्होने कहा कि सभी वैज्ञानिक अपने नवीनतम विचारों के साथ समन्वित कृषि प्रणाली को मज़बूती प्रदान करें। उन्होने कहा कि द्वीपों में समन्वित कृषि प्रणाली की अनुकुल संभावनाए है और आधुनिक तकनिक का प्रयोग करते हुए मुर्गी पालन, बागवानी और मत्स्यकीय मे बेहतर नतीजे लाए जा सकते है।
बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप-महानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि आई.सी.ए.आर. की ओर से पूरे देश में समन्वित कृषि प्रणाली को मिशन मोड पर चलाया जा रहा है। कारी के निदेशक डॉ. अम्बास्ट ने कहा कि इस प्रणाली को अपनाकर किसान कामयाबी हासिल कर सकते है। तीन दिवसीय बैठक का आयोजन कृषि प्रणाली परियोजना अनुसंधान निदेशालय की ओर से किया गया है। इसमें  देश के विभिन्न भागों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे है।

चिकित्सकों की हड़ताल समाप्त


चिकित्सकों की हड़ताल समाप्त

(रश्मि कुलश्रेष्ठ)

जयपुर (साई)। राजस्थान में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई है। उन्होंने आज से काम पर लौटने का फैसला किया है। लेकिन इन सर्विस डॉक्टरों की हड़ताल आज आठवें दिन भी जारी है। जयपुर में कल आधी रात को रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेताओं की स्वास्थ्य मंत्री ए ए खान की बैठक के बाद हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की गई।
तीन हजार से अधिक रेजीडेंट डॉक्टरों के काम पर लौटने के बाद मेडिकल कॉलेजों और इससे जुड़े अस्पतालों में स्थिति सुधरने की आशा है। सरकार के कड़े रुख से पांच सौ से अधिक हड़ताली डॉक्टर कल काम पर लौट आए। अब तक राजस्थान अनिर्वाय सेवा अनुरक्षण विधेयक के अंतर्गत लगभग पांच सौ डॉक्टरों को गिरतार किया गया है और ६५ को निलंबित किया गया है। 

साई के डीजी अण्डमान प्रवास पर


साई के डीजी अण्डमान प्रवास पर

(अंशुल सिंह)

पोर्ट ब्लेयर (साई)। भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक देश दीपक वर्मा द्वीप समूह के चार दिवसीय दौरे पर कल पोर्ट ब्लेयर पहुंचे। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों और खेल संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में खेल प्राधिकरण से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श किया। खेल सामग्री की किल्लत झेल रहे जलक्रीड़ा और साईक्लिंग के प्रशिक्षणार्थियों की स्थिति की अेार ध्यान आकृष्ट करने पर उन्होंने कहा कि उपकरण खरीदने की प्रक्रिया जारी है और बहुत जल्द ये सामान उपलब्ध करा दिये जाएंगे। श्री वर्मा ने बताया कि कार निकोबार में साई का केंद्र खोलें जाने की योजना है। बैठक में खेल विभाग की ओर से एथेलिटिक्स, वालीबॉल, बेडमिंटन, हॉकी और तैराकी के प्रशिक्षण के लिये कोच की सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। 

संजीवनी एक्सप्रेस योजना 26 से


संजीवनी एक्सप्रेस योजना 26 से

(प्रिंस कुमार)

रायपुर (साई)। एक सौ आठ संजीवनी एक्सप्रेस की सेवाएं आगामी छब्बीस जनवरी से प्रदेश के सभी जिलों में शुरू हो जायेंगी। इसी कड़ी में आज से दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में भी संजीवनी एक्सप्रेस सेवा शुरू हो गई है। इसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान किया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल भी मौजूद थे।
इस आपातकालीन चिकित्सा सेवा के तहत् दंतेवाड़ा को सात और बीजापुर जिले को चार एम्बुलेंस उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कल वनमंत्री श्री विक्रम उसेंडी ने कांकेर जिले में संजीवनी एक्सप्रेस सेवा का शुभारंभ किया था। दंतेवाड़ा और बीजापुर को मिलाकर अब प्रदेश के चौदह जिले संजीवनी एक्सप्रेस सेवा से जुड़ गए हैं। 

कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की घोषणा नए साल में


कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की घोषणा नए साल में

(आंचल झा)

रायपुर (साई)। कांग्रेस के लंबित छह जिलाध्यक्षों व नवगठित जिलों में अध्यक्षों के लिए कवायद तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल संभावित नामों की सूची केंद्रीय नेताओं को सौंप चुके है। नए साल के पहले हफ्ते में नामों की घोषणा किए जाने संभावना है। स्थानीय स्तर पर जिलों में पद के लिए घमासान शुरू हो गया है। वहीं पुराने जिलों में नियुक्ति में देर होने के कारण कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई है। संगठन खेमे के  पदाधिकारियों को तवज्जो नहीं दिए जाने के कारण आक्रोश उभरकर सामने आया है। इससे कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने अप्रैल में पदभर ग्रहण करने के बाद संगठन स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद पेंडिंग महत्वपूर्ण जिलों रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद सहित सभी जिलों में जोरआजमाइश तेज कर दिया गया है। पटेल दिल्ली में प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद को लंबित जिलों के अलावा नवगठित जिलों के लिए भी संभावित दावेदारों की सूची सौंप चुके हैं।
उधर, संगठन व जोगी खेमे में पद के लिए जोर आजमाइश तेज कर दी गई है। जोगी ने इन जिलों के लिए अपने नाम सुझाए हैं। वहीं पूर्व में घोषित जिलाध्यक्षों के लिए जोगी खेमे का दबदबा रहा है। इस बार भी अध्यक्ष पद के लिए नाम आगे बढ़ाए गए हैं। उधर, संगठन खेमे के पदाधिकारी तवज्जों नहीं मिलने से मायूसी उभरकर सामने आई है। इन स्थानों पर पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं में एक तरह का आक्रोश देखा जा रहा है। नेता कार्यकर्ता पद को लेकर उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।पुराने दृ नए जिलों के लिए दावेदारों ने जोर आजमाइश तेज कर दी है। मुंगेली, बेमेतरा, गरियाबंद, सुकमा, बीजापुर, सुरजपुर, बलौदाबाजार जिलाध्यक्ष के लिए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। पार्टी के नेताओं से सिफारिश के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

शहरी गरीबों के लिए 60 हजार मकानों के निर्माण का रास्ता साफ


शहरी गरीबों के लिए 60 हजार मकानों के निर्माण का रास्ता साफ

(अंशुल गुप्ता)

भोपाल (साई)। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रि-परिषद की बैठक में एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम तथा बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पूअर के अन्तर्गत 387 करोड़ 40 लाख रुपये की शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही अब शहरी गरीबों के लिये 60 हजार आवासों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नवीनीकरण मिशन के अन्तर्गत एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम तथा बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पूअर में मध्यप्रदेश में शहरी गरीबों के लिए 60 हजार आवासीय इकाइयाँ निर्मित की जा रही हैैं। इनके मूल्य में हुई वृद्धि की प्रतिपूर्ति न होने के कारण इन मकानों का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा था। इस बाधा को दूर करने के लिये गरीबों के हित में मंत्रि-परिषद ने नगरीय निकायों को हुडको से लिये जा रहे ऋण के विरुद्ध यह प्रत्याभूति उपलब्ध करवाने का फैसला लिया।
उल्लेखनीय है कि इन आवासों के लिये मध्यप्रदेश शासन द्वारा भूमि निःशुल्क आवंटित की गई है। केन्द्र शासन द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को शहरी गरीबों के लिये उत्कृष्ट कार्य करने के फलस्वरूप पिछले वर्ष पारितोषिक भी प्रदान किया गया।
0 इन्दौर में जमीन
मंत्रि-परिषद ने इन्दौर की सुपर कारिडोर में स्थित जमीन में से 100-100 एकड़ जमीन इन्फोसिस और टीसीएस को आवंटित करने के लिये सूचना प्रौद्योगिक विभाग को प्रदान करने की सैद्धांतिक सहमति दी। यह जमीन 20 लाख प्रति एकड़ की दर से आवंटित की जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी नीति के तहत इन दोनों कम्पनियों को रियायती दर पर भूमि आवंटन के कारण इन्दौर विकास प्राधिकरण को होने वाली क्षति की भरपाई राज्य शासन द्वारा की जाएगी। क्षति का मूल्यांकन राज्य सरकार करेगी। इन दोनों कम्पनियों को यह जमीन इस शर्त पर दी जाएगी कि वे प्रति एकड़ 100 इंजीनियरों को अनिवार्य रूप से रोजगार उपलब्ध करवायेंगी। ये कम्पनियाँ 50 प्रतिशत रोजगार मध्यप्रदेश के स्थानीय निवासियों को देंगी। कम्पनियों द्वारा इन भूमियों पर स्पेशल इकानॉमिक जोन बनाया जायेगा जिसमें साफ्टवेयर निर्यात तथा आई.टी इनेबल्ड सेवाओं से संबंधित न्यूनतम 10 हजार इंजीनियर प्रति कम्पनी लगाये जायेंगे। इसके अतिरिक्त सहायक रोजगार भी निर्मित होंगे।
0 किसानों को मुआवजा
मंत्रि-परिषद ने छिन्दवाड़ा जिले की पेंच डायवर्जन परियोजना के तहत किसानों को वर्ष 2011-12 की कलेक्टर गाइड लाइन और उस पर 30 प्रतिशत धनराशि के हिसाब से मुआवजा देने का निर्णय लिया। जिन किसानों की भूमि का अर्जन पूर्व में किया गया है अथवा प्रक्रियाधीन है उन सभी को इसका लाभ मिलेगा। इससे डूब क्षेत्र के लिये 198 करोड़ रूपये का जो प्रावधान रखा गया था वह बढ़कर 301 करोड़ रुपये का हो गया है। इससे डूब क्षेत्र के 30 गाँव के किसानों को लाभ मिलेगा, जिनकी रोटी-रोजी प्रभावित हुई है।
0 अन्य निर्णय
मंत्रि-परिषद ने सहकारिता विभाग के अन्तर्गत मध्यप्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित भोपाल की नाबार्ड की देनदारियों के संबंध में 185 करोड़ 5 लाख रुपये के भुगतान निर्णय लिया गया।
मंत्रि-परिषद ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिये अर्हकारी सेवा में दो वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया। इससे योजनाओं के समन्वय, परीक्षण आदि के कार्य सुचारू रूप से हो सकेंगे और समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य होगा। इन पदों के रिक्त होने के कारण नगरीय निकायों में चल रही वृहद परियोजनाओं का पर्यवेक्षण, समन्वय तथा ई.डब्ल्यू.ओ. और लोकायुक्त संगठनों के प्रतिवेदनों पर परीक्षण संबंधी कार्रवाई मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी के न होने के कारण प्रभावित हो रही थीं।
मंत्रि-परिषद ने जिला पंचायतों में डीआरडीए प्रशासन योजना के अन्तर्गत स्वीकृत पदों में से 50 प्रतिशत संविदा पदों की अवधि पुनः पाँच वर्ष बढ़ाने का निर्णय लिया। मंत्रि-परिषद ने प्रशासनिक सेवा के तत्कालीन अपर कलेक्टर, राजगढ़ श्री एम.एम.शर्मा की 5 प्रतिशत पेंशन अस्थायी रूप से एक वर्ष की अवधि के लिये वापस लेने का निर्णय लिया। इसी प्रकार सेवानिवृत सहायक वन संरक्षक श्री ए.गीते की 10 प्रतिशत पेंशन दो वर्ष के लिये वापिस लिये जाने का निर्णय लिया गया।

छात्र-पंचायत में प्रत्येक जिले से 10 विद्यार्थी शामिल होंगे


छात्र-पंचायत में प्रत्येक जिले से 10 विद्यार्थी शामिल होंगे

(इमरान)

भोपाल (साई)। प्रदेश स्तर पर छात्र-पंचायत का आयोजन 12 जनवरी 2012 को मुख्यमंत्री निवास पर किया जाएगा। इसमें शामिल होने के लिए प्रत्येक जिले से लगभग 10 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। आयुक्त उच्च शिक्षा के अनुसार प्रत्येक शासकीय तथा अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय के छात्र संघ का अध्यक्ष, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सचिव, अग्रणी महाविद्यालय के एन.सी.सी. का अंडर आफीसर, अंडर आफीसर की अनुपस्थिति में एन.सी.सी. का वरिष्ठ विद्यार्थी केडेट, अग्रणी महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना का दल नायक, दल नायक की अनुपस्थिति में राष्ट्रीय सेवा योजना का वरिष्ठ स्वयं सेवक शामिल होगा।
अग्रणी महाविद्यालय के किसी एक विधा का सर्वाेत्तम खिलाड़ी और प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय छात्र-संघ के समस्त पदाधिकारी भी छात्र-पंचायत में शामिल होंगे। विद्यार्थियों का चयन करने एवं छात्र-पंचायत में भाग लेने के लिए भोपाल तक लाने एवं वापस ले जाने की जिम्मेदारी अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य/ कुल सचिव की होगी।
कर्मचारियों द्वारा सीधे मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों द्वारा सीधे पत्र-व्यवहार किया जाना नियमानुकूल नहीं है। आयुक्त उच्च शिक्षा ने निर्देशित किया है कि महाविद्यालयीन कर्मचारियों द्वारा उचित माध्यम से ही पत्र भेजे जाएँ। ऐसा नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जिसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा।

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

जमीन के मामले में भी गफलत है पावर प्लांट के


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 40

जमीन के मामले में भी गफलत है पावर प्लांट के

पहले छः सौ अब 812 एकड़ की हो गई दरकार!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में शामिल मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर के ग्राम बरेला में डाले जा रहे कोल आधारित पावर प्लांट के लिए कितनी जमीन चाहिए यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। कभी संयंत्र प्रबंधन इसके लिए छः सौ एकड़ भूमि की आवश्यक्ता दर्शाता है तो कभी भूमि की दरकार बढ़कर लगभग सवा आठ सौ एकड़ हो जाती है।
मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा पहले चरण के 600 मेगावाट के पावर प्लांट को डालने के लिए जो कार्यकारी सारांश जमा करवाया गया था उसके चौथे सफे पर साफ उल्लेखित था कि जेपीएल द्वारा प्रस्थापित परियोजना के लिए 36.7 फीसदी यानी 220 एकड़ सरकारी जमीन, 60 फीसदी यानी 360 एकड़ बंजर यानी खेती न होने वाली जमीन और 3.3 फीसदी यानी 20 एकड़ खेती वाली जमीन जहां नहर नहीं है की आवश्यक्ता है। इस तरह प्रथम चरण के दौरान जेपीएल ने कुल छः सौ एकड़ भूमि की आवश्यक्ता दर्शाई गई थी।
इस परियोजना के द्वितीय चरण की लोकसुनवाई तक जमीन की दरकार छः सौ एकड़ ही थी। 22 नवंबर 2011 को हुई लोकसुनवाई के बाद अचानक ही मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की मिली भगत से बदले गए कार्यकारी सारांश में जमीन की दरकार एकाएक बढ़ जाना आश्चर्यजनक ही है।
नए कार्यकारी सारांश में प्रथम चरण के लिए 406 एकड़ एवं द्वितीय चरण के लिए 406.5 एकड़ इस तरह दोनों चरणों के लिए 812.5 एकड़ भूमि की आवश्यक्ता दर्शाई गई है। बताया जाता है कि 22 नवंबर 2011 को हुई लोकसुनवाई में संयंत्र के जीएम श्री मिश्रा ने कहा था कि संयंत्र के लिए आठ सौ एकड़ भूमि खरीदी जा चुकी है और अभी सवा सौ एकड़ भूमि और खरीदा जाना शेष है।
केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर भी गौतम थापर या संयंत्र प्रबध्ंान से यह पूछने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं कि आखिर संयंत्र प्रबंधन को कितने भूभाग की इस संयंत्र के लिए दरकार है।

(क्रमशः जारी)

गठबंधन धर्म भी तरीके से नहीं निभाया मनमोहन ने


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 62

गठबंधन धर्म भी तरीके से नहीं निभाया मनमोहन ने

सहयोगी दलों को भी करना पड़ा कोर्ट कचहरी का सामना



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मनमोहन सिंह भले ही गठबंधन धर्म को राष्ट्रधर्म के उपर मानकर सर्वोपरि समझा जा रहा हो, पर सत्यता तो यह है कि वजीरेआजम डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा ठीक तरीके से गठबंधन धर्म का पालन भी नहीं किया जा सका है। सत्ता में शामिल दलों के नेताओं को भी जनता के सामने अपमान का घूंट पीकर अंततः जेल जाने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे सहयोगी दलों को भी मनमोहन सिंह फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के सहयोगी दलों के वरिष्ठ सदस्यों को साल भर लानत मलानत झेलनी पड़ी। साल भर आलम यह रहा कि कांग्रेस और सरकार में शामिल अन्य सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता या तो जेल जाते रहे या अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।
मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 2009 में दूसरी बार बनी सरकार के बाद सामने आए भ्रष्टाचार, घपले, घोटालों के बाद न केवल कांग्रेस वरन् उसके सहयोगी दल भी असहज ही महसूस कर रहे हैं। लोगों को डर है कि पता नहीं कब किसकी लाटरी लग जाए और उसे जेल जाना पड़े। कहा जा रहा है कि सहयोगी दल भी अब लामबंद होने लगे हैं कि किसी तरह मनमोहन सिंह को वजीरे आजम की कुर्सी से उतार दिया जाए।

(क्रमशः जारी)

केंद्रीय स्तर के आधा दर्जन नेता चाहें तो कल बन जाएगा महाकौशल


0 महाकौशल प्रांत का सपना . . . 19

केंद्रीय स्तर के आधा दर्जन नेता चाहें तो कल बन जाएगा महाकौशल

कांग्रेस भाजपा के पास हैं तीन तीन ताकतवर क्षत्रप



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के असली हृदय प्रदेश का रूतबा रखने वाले महाकौशल प्रांत को प्रथक बनाने के लिए संघर्ष करने के लिए केंद्रीय स्तर के आधा दर्जन नेताओं की फौज ही पर्याप्त मानी जा सकती है, जो मध्य प्रदेश विधानसभा से इसका प्रस्ताव पारित करवाकर केंद्र को भेज सकती है और अपने प्रभाव का उपयोग कर केंद्र से भी इसे पारित करवाने का माद्दा रखते हैं।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के साथ ही साथ अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के पूर्व अध्यक्ष और मध्य प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर नीखरा, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन ंिसह कुलस्ते के अलावा मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी के साथ ही साथ जनता दल यूनाईटेड के संयोजक शरद यादव अगर मन में ईमानदारी से संकल्प पारित करवा दें तो महाकौशल प्रांत बनने में समय नहीं लगने वाला।
कांग्रेस और भाजपा की मध्य प्रदेश में भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांग्रेस और भाजपा के कद्दावर नेता अगर अपने अपने समर्थक विधायकों को पाबंद कर दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रथक महाकौशल के लिए प्रस्ताव पारित करवाना है तो महाकौशल के समस्त विधायक मिलकर इस काम को अंजाम दे सकते हैं। इन विधायकों में विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी और उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर खुद महाकौशल क्षेत्र को कर्मभूमि बनाए हुए हैं अतः यह काम ज्यादा मुश्किल प्रतीत नहीं होता है।
अगर प्रथक महाकौशल का प्रस्ताव मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित हो जाता है तब केंद्र सरकार से इसे पारित करवाने में केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, कांग्रेस के क्षत्रप रामेश्वर नीखरा, भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते तथा जनता दल यूनाईटेड के संयोजक शरद यादव अपने अपने प्रभावों का बेहतर उपयोग कर इसे अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।
इस प्रांत ने पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र जैसी राजनैतिक सूझबूझ वाली हस्ती को दिया जो प्रदेश के भाल पर महाकौशल का प्रतीक पुरूष साबित हुआ। महाकौशल ने प्रदेश को स्व.द्वारका प्रसाद मिश्र जैसा सबल, सुलझा और शक्तिशाली मुख्यमंत्री दिया। इसके अलावा केंद्र में गार्गीशंकर मिश्र जैसे कद्दावर मंत्री दिए, जिनकी कर्मभूमि छिंदवाड़ा और सिवनी रही। राजनैतिक तौर पर बलात ही हाशिए में ढकेल दी गई प्रदेश और देश की तेज तर्रार मंत्री सुश्री विमला वर्मा की कर्मभूमि सिवनी ही रही है। सुश्री वर्मा के बनाए लोगों ने ही उन्हें पार्श्व में ढकेला, वरना आज वे किसी प्रांत की महामहिम राज्यपाल या देश की महामहिम राष्ट्रपति बनने की काबिलियत रखती हैं। केंद्रीय परिदृश्य में अगर देखा जाए तो कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय महासचिव और अनेक विभागों के मंत्री रहे कमल नाथ का केंद्रीय राजनीति में अपना अलग ही महत्व है। इसके अलावा प्रदेश में राजनैतिक धुरी बन चुके हरवंश सिंह ठाकुर की जन्म भूमि छिंदवाड़ा तो कर्मभूमि सिवनी है। वे आज मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर विराज मान हैं। हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह भी सिवनी जिले से ही हैं। इसके अतिरिक्त दो दशकों तक स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रहे रामेश्वर नीखरा, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक, दीपक सक्सेना, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वनाथ दुबे, प्रवक्ता कल्याणी पांडे, श्रीमति नेहा सिंह, रेखा बिसेन, पुष्पा बिसेन, दयाल सिंह तुमराची और न जाने कितने जनसेवक हैं जो प्रदेश और केंद्रीय राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं।
भाजपा भी महाकौशल प्रांत में जबर्दस्त तरीके से सक्षम ही प्रतीत होती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल वर्तमान में केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। वे भाजपा के असंगठित मोर्चे के अध्यक्ष हैं। फग्गन सिंह कुलस्ते भी केंद्रीय राजनीति में हैं और वे भी भाजपा के एक अनुसूचित जनजाति मोर्चे के नेशनल प्रेजीडेंट हैं। मंत्रियों में गौरी शंकर बिसेन, अजय बिश्नोई, देवी सिंह सैयाम, नाना माहोड़े तो पूर्व मंत्रियों में डॉ.ढाल सिंह बिसेन, चौधरी चंद्रभान सिंह आदि का शुमार है। महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर भी दो बार विधायक रहे हैं। मध्य प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमति नीता पटेरिया सिवनी से विधायक भी हैं। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष अनुसुईया उईके, विनोद गोटिया, राकेश सिंह और न जाने कितनी विभूतियां भाजपा की झोली में हैं। इतना ही नहीं एनडीए के सबसे ताकतवर स्तंभ शरद यादव की राजनीति भी महाकौशल की संभावित राजधानी जबलपुर से ही आरंभ हुई।

(क्रमशः जारी)

प्रदीप भाटिया संभालेंगे एमपी आईओ की कमान!


प्रदीप भाटिया संभालेंगे एमपी आईओ की कमान!



(अमेय)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश सूचना केंद्र की कमान जनसंपर्क के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप भाटिया ने संभाल ली है। देश की राजनैतिक राजधानी में मध्य प्रदेश सरकार की छवि बनाने की गरज से एमपी गर्वमेंट द्वारा दिल्ली के मंहगे व्यवसायिक इलाके कनाट प्लेस में बाबा खड़ग सिंह मार्ग पर स्थित मध्य प्रदेश सूचना केंद्र पिछले कुछ दिनों से चर्चाओं में है, जिसे पटरी पर लाने प्रदीप भाटिया को खासी कवायद करनी पड़ सकती है। सूचना केंद्र के वर्तमान प्रभारी सुरेंद्र द्विवेदी अगले माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
आरोपित है कि मध्य प्रदेश सूचना केंद्र द्वारा पिछले कुछ माहों से पत्रकारों को सूचना उपलब्ध करावाने के बजाए भाजपा के सांसद विधायकों की सेवा टहल में अपना विशेष ध्यान केंद्रित किया हुआ था। मध्य प्रदेश कव्हर करने वाले मीडिया पर्सन्स को सुविधाएं उपलब्ध कराने के स्थान पर सूचना केंद्र के सरकारी वाहन विधायक और सांसदों के लिए पाबंद होने के आरोप भी सार्वजनिक तौर पर लगते रहे हैं।
इतना ही नहीं मध्य प्रदेश सरकार के इस कार्यालय से भारतीय जनता पार्टी और उसके अनुषांगिक संगठनों के प्रोग्राम्स के प्रेस नोट भी सरेआम वितरित किए जाने की शिकायतें आती रहीं हैं। चर्चा है कि चूंकि कांग्रेस इस मामले में नरम रवैया अपनाए हुए है, वरना सरकारी धन के इस अपव्यय पर मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार को कब का घेरा जा सकता था।

नही थमा शीतलहर का कहर


नही थमा शीतलहर का कहर



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली सहित देश भर में शीत लहर अपने शबाब पर है। चारों ओर खून जमाने वाली ठण्ड से लोगों घरों में दुबके हुए हैं। राहत की बात है कि इस समय शालाओं में क्रिसमस के चलते शीतकालीन अवकाश चल रहे हैं, जिससे छोटे बच्चों में राहत महसूस की जा रही है। अधिकांश प्रदेशों में शालाएं दो जनवरी से खुलने वाली हैं, तब ठंड की मारक क्षमता काफी ज्यादा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
लखनउ से दीपांकर श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य के पूर्वी जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से धूप जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से धूप निकलने के बावज निकलने के बावजूद कड़ाके की ठंड पड़ रही है। गोरखपुर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। गोरखपुर और और इसके आसपास के क्षेत्रों में अच्छी धूप निकलने के बावजूद सुबह-शाम गलनभरी ठंड पड़ रही है। अन्य पूर्वी जिलों में भी रात के तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गयी है।
उधर पश्चिमी जिलों में ठंड औ उधर पश्चिमी जिलों में ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों में कुछ स्थानों पर तापमान में और गिरावट होने का अनुमान व्यक्त किया है। इस बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में घने कोहरे का प्रकोप बना हुआ है जिससे सड़क तथा रेल यातायात प्रभावित है। लम्बी दूरी  तथा रेल यातायात प्रभावित है। रेलगाड़ियां काफी विलम्ब से चल रहीं है।
जयपुर से स्वाति मीणा ने खबर दी है कि प्रदेशभर में इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। शेखावाटी अंचल में कई स्थानों पर तापमान जमाव बिन्दु से नीचे बना हुआ है। सीकर और चूरु के लोग कंपकपाती सर्दी की चपेट में है। शीतलहर का जनजीवन पर भी असर पड़ा है। घने कोहरे के कारण रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। कई रेलगाड़ियां देरी से चल रही है, जिसकी वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेघर और फुटपाथ पर रहने वालें लोगों को सर्दी से बचाने के लिए सरकार की ओर से रैन बसेरे बनाए गए है। मैदानी इलाकों में चूरु पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त शीतलहर की गिरफ्त में है। वहां आज पारा शून्य से सात दशमलव डिग्री नीचे दर्ज किय गया।
मौसम विभाग के सूत्रों के अनुसार गंगानगर और पिलानी में एक, भरतपुर में चार दशमलव नौ, बीकानेर में पांच, जैसलमेर में साढे पांच, वनस्थली में पांच दशमलव सात, रावतभाटा में 6 दशमलव चार, जयपुर में सात दशमलव एक, बूंदी में आठ दशमलव चार और डबोक में आठ दशमलव सात डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। उधर राज्य के एक मात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में भी कड़ाके की सर्दी का असर बना हुआ है। इसके बावजूद वहां पहुंचने वाले सैलानियों का उत्साह बना हुआ है और वे वहां के विभिन्न दर्शनीय स्थलों पर देखे जा सकते है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि कडाके की सर्दी को देखते हुए राजस्थान से लगती अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर सतर्कता बढा दी गई है। सीमा सुरक्षा बल के सूत्रों के अनुसार धुंध और कोहरे की वजह से घुसपैठ की आंशका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि सीमा पर तैनात बल के जवानों के साथ ही मुख्यालय से अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजा गया है। कमांडेट स्तर के अधिकारी भी मुख्यालय के बजाय सीमा पर रह कर निगरानी रखेंगे।  

पंडित की दक्षिणा पर विधायक का डाका!


पंडित की दक्षिणा पर विधायक का डाका!



(वेद बघेल)

सिवनी (साई)। माना कि मध्य प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष और सिवनी की विधायक श्रीमति नीता पटेरिया जात की ब्राम्हण हैं किन्तु उनकी मेजबानी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होने जो हरकत की है वह भाजपा के लिए शर्मसार करने को पर्याप्त मानी जा सकती है। प्रभारी मंत्री द्वारा पूजन अर्चन के उपरांत पूजा की थाली में पंडित जी की दक्षिण के रखे गए पैसे विधायक श्रीमति नीता पटैरिया द्वारा उठा लिए गए। वहां उपस्थित पंडित क्षेत्रीय विधायक के उक्त कृत्य को देखकर अचरज में पड़ गया। मीडिया कर्मियों ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद भी कर लिया।
सियासी दलों द्वारा पहले सुशासन लाने की बात कही जाती थी, फिर सख्त लोकपाल के द्वारा राम राज्य लाने के दिवा स्वप्न दिखाए जा रहे हैं। कौन नहीं चाहता है कि उसके उपर माता लक्ष्मी की कृपा न रहे। सांसद विधायकों को जनता से एकत्र किए गए करों से संचित राजस्व के खजाने खोल दिए जाते हैं। अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर मध्य प्रदेश में सिवनी जिले में आयोजित एक प्रोग्राम का नजारा जब कैमरे में कैद किया गया तो न जाने कितने लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली कि एसे कैसे सांसद विधायक मिलकर मजबूत लोकपाल लेकर आएंगे।
हुआ दरअसल यह कि परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा सीट की अंतिम सांसद और जिला मुख्यालय सिवनी को अपने आप में समाहित करने वाली सिवनी विधानसभा की विधायक श्रीमति नीता पटेरिया ने 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर अपनी विधानसभा में दो दर्जन से ज्यादा टेंकर्स बांटने का प्रोग्राम रखा। इन टेंकर्स की कीमत सवा लाख से ज्यादा बताई जा रही है जो इनके वास्तविक मूल्य से दोगने से ज्यादा है।
योजना समिति के सूत्रों का कहना है कि इसके लिए 25 टेंकर्स हेतु विधायक निधि से तीस लाख तीस हजार दो सौ रूपए जारी कर दिए गए हैं। टेंकर्स का खेल समूचे मध्य प्रदेश में सरेआम चल रहा है। बताया जाता है कि उक्त टेंकर्स मध्य प्रदेश सरकार के एक उपक्रम एमपी एग्रो के माध्यम से खरीदे गए हैं। उक्त टैंकर्स के लिए एमपी एग्रो ने कोई निविदा भी नहीं बुलाई गई है। एमपी एग्रो के सूत्रों का कहना है कि यह उसके विभाग का रजिस्टर्ड आईटम नहीं है इसलिए इसका कोई रेट फिक्स नहीं है।
सिवनी निवासी पत्रकार काबिज खान ने एक क्लिपिंग और कुछ फोटोग्राफ भेजे है जिसमें साफ दिख रहा है कि स्थानीय मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला प्रांगड़ में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री नाना माहोड थे। मां सरस्वती वंदना के उपरांत प्रभारी मंत्री मोहोड़ ने पूजन की थाली में कुछ रूपए (संभवतः दो सौ रूपए) डाले गए। इसके पीछे खड़ीं प्रोग्राम की मेजबान विधायक श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा वे पैसे उठाकर अपनी जेब में रख लिए गए।
इन परिस्थितियों में देश के सांसद विधायकों से कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे देश को मजबूत और सक्षम लोकपाल दे पाएंगे। निश्चित तौर पर विधायक श्रीमति पटेरिया का यह कृत्य मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को शर्मसार करने के लिए पर्याप्त कहा जा सकता है।
उल्लेखनीय होगा कि इसके पहले श्रीमति पटेरिया भाजपा की जिम्मेदार सांसद रहीं हैं। सांसद रहते हुए उन पर कमीशन के ढेरों आरोप सार्वजनिक तौर पर लग चुके हैं। वर्तमान में श्रीमति पटेरिया मध्य प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष भी हैं।