शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

टीम अन्ना का सीआईए से रिश्ता खोज रही है सरकार


टीम अन्ना का सीआईए से रिश्ता खोज रही है सरकार

(शेषनारायण सिंह)

नई दिल्ली (साई)।केन्द्र की सरकार इस वक्त टीम अन्ना का सीआईए कनेक्शन तलाश रही है। ऐसा वह अपनी मर्जी से नहीं कर रही है बल्कि 30 मई को दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के जवाब में उसे यह काम करना पड़ रहा है क्योंकि 30 अगस्त तक केन्द्रीय गृहमंत्रालय को अपना जवाब दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपना है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीम अन्ना के तार सीआईए से जुड़े हुए हैं और भारत में भ्रष्टाचार भगाने की सारी मुहिम सीआईए की योजना अनुसार चलाई जा रही है। जनहित याचिका दाखिल करनेवाले वकील ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि भ्रष्टाचार भगाने की यह मुहिम फोर्ड फाउण्डेशन के पैसे से चल रही है जो कि अमेरिकी खुफिया एजंसी सीआईए का फ्रंट आर्गेनाइजेशन है और दुनिया के कुछ देशों से सिविल सोसायटी नाम से मुहिम चला रही है।
इस पेटीशन में वादी ने बहुत सारे आरोप लगाए हैं जिनमें कुछ तो सहसा अविश्वसनीय लगते हैं। इसी पेटीशन में आरोप है कि टीम अन्ना के कुछ सदस्य सीआईए से सम्बंधित हैं। इस केस में केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया गया है। 30 मई 2012 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर सभी आरोपों की जांच पूरी कर ले। उसके बाद ही मनोहर लाल शर्मा के आरोपों पर माननीय हाई कोर्ट विचार करेगा। ३० अगस्त २०१२ तक जांच के नतीजे हाईकोर्ट में दाखिल किये जाने हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ३० मई २०१२ के  दिन एक फैसला सुनाया था जिसमें आदेश दिया गया था कि केंद्र सरकार वादी मनोहर लाल शर्मा की याचिका में पेश किये गए आरोपों की जांच करे। इस केस में केंद्र सरकार को प्रतिवादी नंबर  एक पर रखा गया है। केंद्र सरकार के अलावा जो अन्य लोग प्रतिवादी थे  उनके नाम हैं, फोर्ड फाउंडेशन, अन्ना हजारे, मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, शान्ति भूषण और किरण बेदी। माननीय हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पेटीशन में जो भी प्रार्थना की गयी है, उसकी जांच प्रतिवादी नंबर एक (गृह मंत्रालय), अधिक से अधिक तीन महीने में पूरी करके इस अदालत के सामने हाज़िर हों। उसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा। सरकार को जांच करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
संविधान के अनुच्छेद २२६ के तहत सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा ने पी आई एल दाखिल किया था जिसमें भारत सरकार के अलावा टीम अन्ना के कुछ सदस्यों को पार्टी बनाया था। पेटीशन में आरोप लगाया गया है कि फोर्ड फाउंडेशन एक अमरीकन ट्रस्ट है  जो दुनिया भर में सरकार विरोधी आन्दोलनों को समर्थन देता है, फंड देता है और उनके मारफत उन देशों पर अपना एजेंडा लागू करता है। फोर्ड फाउंडेशन ने रूस, इजरायल, अफ्रीका आदि देशों में सिविल सोसाइटी नाम के ग्रुप बना रखे हैं। इनके ज़रिये वे बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, कलाकारों, उद्योगपतियों और नेताओं को अपनी तरफ खींचते हैं। तरह तरह के आकर्षक नारे देकर लोगों को आकर्षित करते हैं और सरकार के खिलाफ आन्दोलन करवाते हैं।
पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि फोर्ड फाउंडेशन अमरीकी खुफिया एजेंसी सी आई ए का फ्रंट भी है। पेटीशन में लिखा है कि टीम अन्ना के लोग संयुक्त रूप से फोर्ड फाउंडेशन  से धन लेते रहे हैं,आरोप है कि फोर्ड फाउंडेशन के रीजनल डाइरेक्टर ने कुबूल किया है कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल की श्कबीरश् नाम की एनजीओ को फंड दिया था। फोर्ड फाउंडेशन के वेबसाईट से भी पता चलता है कि २०११ में ही फोर्ड फाउंडेशन ने कबीर को दो लाख अमरीकी डालर दिया था। साथ में सबूत भी पेटीशन के साथ नत्थी है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि एफसीआरए एक्ट के तहत विदेशी पूंजी पाने के लिए भारत सरकार की अनुमति लेना जरूरी होता है लेकिन फोर्ड फाउण्डेशन से पैसा लेने के मामले में टीम अन्ना ने किसी नियम का पालन नहीं किया जिसके दोषी पाये जाने पर टीम अन्ना के सदस्यों को अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत के संविधान की धारा 19 (ए) के तहत प्रावधान है कि देश में ऐसी किसी भी गतिविधि को मान्यता नहीं दी जा सकती जो विदेशी पैसे से संचालित होता हो। इसलिए अन्ना का आंदोलन सीधे सीधे संविधान की धारा 19 (ए) का उल्लंघन है क्योंकि खुद अरविन्द केजरीवाल यह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें फोर्ड फाउण्डेशन, डच एम्बेसी और यूएनडीपी से पैसा लिया है। अब सरकार के जवाब के बाद ही तय होगा कि टीम अन्ना का फोर्ड फाउण्डेशन के रास्ते सीआईए से कोई रिश्ता है या नहीं। बहरहाल, सरकार के लिए यह स्थिति कम दुविधापूर्ण नहीं है। क्योंकि अगर वे अन्ना के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सच्चाई स्वीकार कर लेते हैं तो अमेरिका नाराज होता है और अगर वे इंकार कर देते हैं तो निश्चित रूप से अन्ना और उनके साथियों का मनोबल बढ़ जाएगा।

असम के इस्लामीकरण की खतरनाक चेतावनी


असम के इस्लामीकरण की खतरनाक चेतावनी

(नवनीत / विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। भारत के उत्तर-पूर्व का राज्य असम अपने यहां हो रहे हिंसा के वजह से सुर्खियों में है। असम में जो आग जल रही है वह महाविनाश के पहले की चेतावनी की तरह है कि अगर अभी भी हम नहीं सभलें तो एक दिन यह समस्या असम को ले डूबेगी। असम के निचले जिले कोकराझाड़ से जो हिंसा शुरु हुई थी वह फैलकर पास के चिरांग और धुबड़ी जिले में पहुंच गई। असम सरकार की माने तो यह जातीय हिंसा मुस्लिम और बोडो जनजाति के बीच चल रही है। लेकिन असलियत में यह संघर्ष असमी मुस्लिम के साथ नहीं अपितु बोडो जनजाति और असम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के बीच चल रही है।
ये बांग्लादेशी घुसपैठिये एक व्यापक साजिश के तहत धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से भारत के विभिन्न हिस्सों विशेषकर उत्तर-पूर्व में अपनी तादात बढाते जा रहे है। हमारे देश का यह दुर्भाग्य है कि राजनीतिक गलियारे में इन्हें वोट बैंक के रुप देखा जाता है। इसके बारे केन्द्र सरकार व राज्य सरकार दोनों ही भलिभाति अवगत है लेकिन वोट बैंक व तुष्टीकरण के राजनीति के कारण वह हमेशा से इस पर परदा डालते आ रहे है लेकिन हालीया संर्घष ने असम में चल रही व्यपाक साजिश का चहेरा सभी के सामने रख दिया है।
दरअसल, बांग्लादेशी घुसपैठिए बड़े पैमाने पर असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, नागालैंड, दिल्ली और जम्मू कश्मीर तक लगातार फैलते जा रहे हैं। जिनके कारण जनसंख्या असंतुलन बढ़ा है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों का इस्तेमाल आतंक की बेल के रूप में हो रहा है, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और कट्टरपंथियों के निर्देश पर बड़े पैमाने पर हुई बांग्लादेशी घुसपैठ का लक्ष्य ग्रेटर बांग्लादेश का निर्माण करना है साथ भारत के अन्य हिस्सों में आतंकी घटनाओ को अंजाम देने के लिए भी इनका प्रयोग किया जा रहा है जिसके लिए भारत के सामाजिक ढांचे का नुकसान व आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है। दैनिक जागरण में छपे खबर के अनुसार सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीआइजी बरोदा शरण शर्मा इन घुसपैठियों को आने वाले समय की बड़ी समस्या मानते हैं। शर्मा सेवाकाल में लंबे समय तक बांग्लादेश सीमा पर तैनात रह चुके हैं।
हिन्दुस्तान सरकार के बोर्डर मैनेजमेण्ट टास्क फोर्स की वर्ष कि 2000 रिपोर्ट के अनुसार 15 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर चुके हैं और लगभग तीन लाख प्रतिवर्ष घुसपैठ कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हिन्दुस्तान में बांग्लादेशी मुसलमानों घुसपैठीयों की संख्या इस प्रकार है रू पश्चिम बंगाल 54 लाख, असम 40 लाख, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि में 5-5 लाख से ज्यादा दिल्ली में 3 लाख हैं; मगर वर्त्तमान आकलनों के अनुसार हिन्दुस्तान में करीब 3 करोड़ बांग्लादेशी मुसलमानों घुसपैठिए हैं जिसमें से 50 लाख असम में हो सकते है।
असम में जिन तीन जिलों में यह संघर्ष चल रहा है तो अगर उन जिलो के जनगणना विशलेषण पर एक नंजर डाले तो स्थिती अपने आप ही साफ हो जाती है। सबसे पहले कोकड़ाझाड जिले पर नंजर डाले 2001-2011 में यहां जनसंख्या मे वृद्धि दर 519ः रही और 2001 के जनगणना के अनुसार इस जिले में  मुस्लिमों की संख्या बढकर लगभग 20ः हो गई है। अगर हम असम मुस्लिम जनंसख्या में वृद्धि दर को देखे तो बंग्लादेश से सटे जिलो में यह सबसे अधिक है जिसके पिछे बंग्लादेशी घुसपैठ मुख्य कारण है। धुबड़ी जिला भी बंग्लादेश के सीमा से सटा हुआ है। 1971 में यहां मुस्लिम जनसंख्या 6446ः थी जो 1991 में बढकर 7045ः हो गई, 2001 के जनगणना के अनुसार बढकर लगभग 75ः हो गई। कमोबेश यही हाल 2004 में बने चिरांग जिले का भी है।  जनसंख्या के बढोतरी का अनुपात देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि यह जनसंख्या में सहज हुई वृद्दी नहीं है अपितु यह बंग्लादेश से आये घुसपैठियों  का नतींजा है।
असम इन देश द्रोही तत्वो के लिए के लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योकिं अगर किसी प्रकार से असम पर ये अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेते है बाकि उत्तर-पर्व के राज्यों को भारत से अलग किया जा सकता है, असम ही जो उत्तर-पर्व को शेष भारत से जोड़ता है। यहां जरुत है कि हम इस मुद्दो को वोट बैंक के लिए घर्म का चादर न उढाये। यहां विरोध मुस्लमानो से नहीं है लेकिन वोट बैंक की राजनीती के चलते जब भी इस ओर कोई आवाज उठायी जाती है इसे सांप्रदायिकता के रंग में रंग दिया जाता है। बांग्लादेशी घुसपैठ मुस्लमानों के लिए ज्यादा नुकसान देह है इनसे जो जनसंख्या में भारी असंतुलन हो रहा है उससे  बेरोजगारी की समस्या उत्पन हो रही है इसके अलावा  जो सुविधायें हमारी सरकार हमारे अपल्संख्यों को देती है वह उसमें में भी वह धीरे- धीरे हिस्सेदार बनते जा रहे है।

पंचायत ने नाबालिग से रेप की कीमत एक लाख लगाई


पंचायत ने नाबालिग से रेप की कीमत एक लाख लगाई

(सीमा श्रीवास्तव)

गोरखपुर (साई)। शर्मसार कर देने वाली एक घटना में एक नाबालिग लड़की सुमन (बदला हुआ नाम) से गांव के एक अधेड़ आदमी पन्ना लाल ने कई बार रेप किया। जब सुमन प्रेगनेंट हो गई तो पंचायत ने पन्ना लाल से 1 लाख रुपए दिलवाकर मामले को रफा-दफा करना चाहा। लड़की के पिता ने पुलिस केस किया तो आरोपी फरार हो गया।
14 साल की सुमन की मां बचपन में ही गुजर गई थी। पिता कमाने के लिए दिल्ली चले गए। सुमन गांव में अपने बाबा के साथ रहती थी। जब सुमन का पेट बढ़ने लगा तो इस मामले का खुलासा हुआ। सुमन ने गांव की महिलाओं को पूरा मामला बताया। सुमन के पड़ोस में 45 साल का पन्ना लाल अपने परिवार के साथ रहता है। पन्ना अक्सर उसे बुलाकर खाने-पीने की चीज देता था। सुमन ने बताया कि 6 महीने पहले पन्ना लाल ने उसके साथ रेप किया और यह बात किसी से न कहने की धमकी भी दी। उसके बाद से लगातार वह उसके साथ रेप करता रहा।
मामले का खुलासा हुआ तो सुमन के बाबा पुलिस के पास गए लेकिन पुलिस ने गांव में ही मामला निपटाने की सलाह दी। गांव में पंचायत ने पन्ना लाल को एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके लिए पन्ना लाल भी तैयार हो गया लेकिन तभी सुमन के पिता मौके पर पहुंच गए। पंचायत का फैसला न मानते हुए वह थाने गए। गोला पुलिस ने पन्ना लाल के खिलाफ रेप का केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज होने के साथ ही आरोपी गांव से भाग निकला।

अब तत्काल का वेटिंग टिकट भी होगा कंफर्म


अब तत्काल का वेटिंग टिकट भी होगा कंफर्म

(निधि गुप्ता)

मुंबई (साई)। क्या आप रेल से सफर करने वाले हैं? अगर हां तो इस खबर को जरूर पढें क्योंकि सरकार ने तत्काल में टिकट लेने वालों को एक और सुविधा देने का मन बना लिया है। रेलवे कुछ ऐसी गाड़ियां चुन रहा है जिनमें यात्री यदि तत्काल का वेटिंग टिकट लेंगे तो उनकी बर्थ 100 फीसदी कन्फर्म होगी। बहुत ज्यादा वेटिंग होने पर आधे-एक घंटे में स्पेशल ट्रेन चलाएंगे।
यह बात मुंबई में हुई जोनल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति (जेडआरयूसीसी) की बैठक में महाप्रबंधक महेश कुमार और अन्य अधिकारियों ने कही। इसमें बताया गया कि पश्चिम रेलवे इंदौर-अजमेर ट्रेन को पूरी क्षमता से चलाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजेगा। फिलहाल यह ट्रेन सिर्फ सात कोच से चल रही है और उज्जैन में भोपाल-अजमेर ट्रेन से जुड़कर अजमेर जाती है।

17 रुपये से कम पर जीते हैं 10 फीसदी लोग


17 रुपये से कम पर जीते हैं 10 फीसदी लोग

(रश्मि सिन्हा)

नई दिल्ली (साई)। सुधारों के दो दशक और वृद्धि का लाभ निचले तबके तक पहुंचाने के जोर शोर से किये जा रहे प्रचार प्रसार के बावजूद लगता है ग्रामीण भारत की तसवीर नहीं बदली है। यहां आज भी 10 फीसदी आबादी रोजाना 17 रुपये से कम पर गुजर-बसर को मजबूर है।
औसत मासिक खर्च 503.49 रुपये आंका गया है। वित्त वर्ष 2011-12 के लिए पारिवारिक उपभोक्ता खर्च से जुड़े सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक ग्रामीण भारत की 10 फीसदी सबसे गरीब आबादी का औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 50349 रुपये है। इस लिहाज से ग्रामीण भारत की इस 10 फीसदी आबादी का दैनिक खर्च 17 रुपये से भी कम बैठता है।
शहर में मासिक खर्च 702.26 रुपये आंका गया है। शहरी गरीबों की हालत उनसे कुछ ही बेहतर है। शहरी गरीबों का प्रति व्यक्ति दैनिक खर्च 23.40 रुपये आंका गया है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के जुलाई 2011 से जून 2012 की अवधि के दौरान किये गये 68वें दौर के सर्वेक्षण के मुताबिक सबसे गरीब 10 फीसदी शहरी आबादी का औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 702.26 रुपये है।
इससे पहले योजना आयोग ने 2009 से 11 की अवधि के लिए मार्च में जारी अपनी रिपोर्ट में शहरी क्षेत्र के गरीबों के लिये प्रति व्यक्ति 28.65 रुपये की दैनिक खर्च सीमा बतायी और ग्रामीण क्षेत्रों में 22.42 रुपये प्रतिव्यक्ति दैनिक खर्च को गरीबी की सीमा रेखा बताया था। बहरहाल, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की रिपोर्ट में सबसे गरीब 10 प्रतिशत आबादी का औसत दैनिक खर्च इस सीमा से काफी नीचे है। रिपोर्ट में कहा गया कि शहरी इलाकों में 70 फीसदी आबादी करीब 43.16 रुपये प्रति दिन व्यय करती है।
एक आंकलन के अनुसार 20 प्रतिशत का खर्च सौ रुपये से ज्यादा है। जनसंख्या की 20 फीसदी आबादी ऐसी भी है जो कि प्रतिदिन 100 रुपये से ज्यादा खर्च करती है। ग्रामीण इलाकांे की आधी आबादी रोजाना 34.33 रुपये प्रति व्यक्ति पर गुजर बसर करती है। सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण इलाकों में आधी आबादी ऐसे परिवारों से जुड़ी है जहां मासिक प्रति व्यक्ति खर्च 1,030 रुपये से कम है जबकि 40 फीसदी ग्रामीण आबादी का मासिक खर्च 922 रुपये प्रति व्यक्ति से कम है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के सर्वेक्षण का यह अनंतिम नतीजा है और यह 7,391 गांवों के 59,070 परिवारों और 5,223 शहरी ब्लॉक के 41,602 परिवारों के सर्वेक्षण पर आधारित है।

बेटियों को स्कूल भिजवाओ, ईनाम पाओ


बेटियों को स्कूल भिजवाओ, ईनाम पाओ

(अनेशा वर्मा)

फरीदाबाद (साई)। हरियाणा सरकार ने नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक नयी पहल की है। अब बेटियों को पढ़ाने वाली पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा। इनाम भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि पूरे एक लाख रु पये का मिलेगा। हरियाणा सरकार ने नारी शिक्षा और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कवायद शुरू की है।
पिछले दिनों शिक्षा विभाग की ओर से कराये गए हाउस होल्ड (घरेलू) सर्वे में यह बात सामने आयी कि अब भी बहुत से गांवों में जहां लड़कियों की शिक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे गांवों में लड़कियों की शिक्षा के लिए पंचायतों की जिम्मेदारी तय करते हुए प्रदेश सरकार ने पंचायतों को इनाम देने का फैसला किया है ताकि लड़कियों के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। जिला शिक्षा अधिकारी (डीइओ) डॉ मनोज कौशिक ने बताया कि आरटीइ के तहत 6 से 14 साल तक के बच्चों की शिक्षा को अनिवार्य किया गया है। इसी कड़ी में लड़कियों की शिक्षा पर खास जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कि सरकार नयी-नयी योजनाओं के तहत बालिका शिक्षा पर पूरा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि हाउस होल्ड सर्वे में अभी तक की रिपोर्ट में कई गांव ऐसे हैं जहां शत-प्रतिशत लड़कियां शिक्षित नहीं हैं।
गांवों में बड़ी संख्या में आज भी लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं। लिहाजा लड़कियों की शिक्षा के लिए पंचायतों की जिम्मेदारी तय की गयी है। गांव में 6 से 14 साल तक की लड़कियां शत-प्रतिशत शिक्षित मिलने पर उस पंचायत को एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। लड़कियों की शिक्षा के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए सरकार ने पंचायतों को एक लाख रु पये देने की घोषणा की है।
गांवों में चलाया जाएगा अभियान रू इस बाबत पंचायतों को जागरूक करने के लिए गांवों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। डीइओ ने बताया कि प्रदेश के दूसरे जिलों की अपेक्षा गुड़गांव की स्थिति इस मामले में ठीकठाक है। सर्वे की रिपोर्ट अभी एकत्रित नहीं की गयी है। रिपोर्ट एकत्रित करने के बाद इसे जारी किया जाएगा। रिपोर्ट के बाद गांवों में बालिका शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा।

किन्नरों को प्रतिमाह एक हजार रूपये पेंशन


किन्नरों को प्रतिमाह एक हजार रूपये पेंशन

(प्रीति सक्सेना)

चेन्नई (साई)। किन्नर समुदाय से जुडने की कोशिश के तहत तमिलनाडु सरकार ने एक योजना की घोषणा की कि जिसके तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रूपये का भत्ता दिया जायेगा। मुख्यमंत्री जे जयललिता द्वारा प्रस्तावित किन्नर पेंशन योजनाके मुताबिक चालीस से अधिक उम्र के गरीब किन्नरों को हर माह एक हजार रूपये पेंशन दी जायेगी।
एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने इस उद्देश्य के लिये 1.17 करोड रूपये आवंटित किये हैं। राज्य के 54 हजार आंगनवाडी केंद्रों को धुंआ मुक्तबनाने के लिये सरकार इस दिशा में योजना का दूसरा चरण शुरु करेगी जिस पर तीन करोड 20 लाख रुपये का खर्चा आयेगा।

शराब का ख्याल मात्र ही आपको बनायेगा आकर्षक


शराब का ख्याल मात्र ही आपको बनायेगा आकर्षक

(निधि श्रीवास्तव)

लंदन (साई)। अब न सिर्फ शराब, बल्कि उसका ख्याल ही आपको पहले से ज्यादा आकर्षक महसूस करने में मदद कर सकता है। फ्रांसीसी, अमेरिकी और नीदरलैंड के शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्लैमरस सितारों को शराब पीते हुये देखने से हम भी खुद को आकर्षक मानने लगते हैं।
शोध के दौरान एक बार में 19 पुरुषों और महिलाओं से खुद को आकर्षक महसूस करने के बारे में पूछताछ की गयी। डेली मेल के अनुसार, पूछताछ में पाया गया कि जिन्होंने ज्यादा नशा कर रखा था वे ही खुद को ज्यादा आकर्षक महसूस कर रहे थे।
अगले शोध में पाया गया कि सिर्फ शराब का ख्याल ही लोगों को खुद के बारे में ज्यादा आकर्षक महसूस करा सकता है। इसमें कुछ लोगों को बताया गया कि उन्हें जो पेय पदार्थ दिया गया है उसमें मादक पदार्थ शामिल हैं। इसके बाद पाया गया कि जिन लोगों को यह झूठ बताया गया था वह खुद को ज्यादा आकर्षक महसूस कर रहे थे। इस शोध को जर्नल ऑफ इंडिविजियुअल डिफरेंसेजमें प्रकाशित किया गया है।

करौंदा: एक अनोखा फ़ल

हर्बल खजाना ----------------- 7

करौंदा: एक अनोखा फ़ल

(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। जंगलों, खेत खलियानों के आस-पास कँटली झाडियों के रूप में करौंदा प्रचुरता से उगता हुआ पाया जाता है, हलाँकि करोंदा के पेड़ पहाड़ी भागों में अधिक पाए जाते है। इसके पेड़ कांटेदार और 6 से 7 फुट ऊंचे होते हैं। करौंदे के फ़लों में लौह तत्व और विटामिन सी प्रचुरता से पाए जाते है।
आम घरों में करौंदा सब्जी, चटनी, मुरब्बे और अ़चार के लिए प्रचलित है। करौंदे का वानस्पतिक नाम कैरिस्सा कंजेस्टा है। पातालकोट में आदिवासी करौंदा की जडों को पानी के साथ कुचलकर बुखार होने पर शरीर पर लेपित करते है और गर्मियों में लू लगने और दस्त या डायरिया होने पर इसके फ़लों का जूस तैयार कर पिलाया जाता है, तुरंत आराम मिलता है।
फ़लों के चूर्ण के सेवन से पेट दर्द में आराम मिलता है। करोंदा भूख को बढ़ाता है, पित्त को शांत करता है, प्यास रोकता है और दस्त को बंद करता है। सूखी खाँसी होने पर करौंदा की पत्तियों के रस सेवन लाभकारी होता है।
खट्टी डकार और अम्ल पित्त की शिकायत होने पर करौंदे के फ़लों का चूर्ण काफ़ी फ़ायदा करता है, आदिवासियों के अनुसार यह चूर्ण भूख को बढ़ाता है, पित्त को शांत करता है। करोंदा के फल खाने से मसूढ़ों से खून निकलना ठीक होता है, दाँत भी मजबूत होते हैं। फ़लों से सेवन रक्त अल्पता में भी फ़ायदा मिलता है। (साई फीचर्स)

(लेखक हर्बल मामलों के जाने माने विशेषज्ञ हैं)

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  7

सिम का गोरखधंधा चल रहा है आईडिया में

आकर्षक लुभावने प्रलोभनों से घेरा जा रहा है उपभोक्ताओं को

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी आदित्य बिरला सेल्यूलर की आईडिया द्वारा उपभोक्ताओं को लुभाने तरह तरह के लुभावने आकर्षक प्रलोभनों का सहारा लिया जा रहा है। इसमें सबसे अधिक आपत्तिजनक तथ्य यह उभरकर सामने आ रहा है कि सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इन सिम की वेधानिक जांच के बिना ही कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं, जिससे असमाजिक तत्व और जरायमपेशा लोगों द्वारा इसके दुरूपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा कस्टमर आईडेंटीफिकेशन फार्म में औपचारिकताएं देखे बिना और पर्याप्त दस्तावेज के बिना ही कस्टमर की सिम एक्टीवेट कर दी जाती है। भले ही औपचारिकताओं के अभाव में दो तीन दिन के उपरांत सिम बंद हो जाए पर पहले तीन दिन तो सिम का भरपूर उपयोग उपभोक्ता द्वारा किया जा सकता है।
आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि आईडिया के आउट लेट्स में जब उपभोक्ताओं द्वारा अपने दस्तावेज की छाया प्रति जमा करवाई जाती है तो उनके दस्तावेज की और छाया प्रति कर उनके नाम से छद्म कनेक्शन प्रदाय किए जा रहे हैं। देश भर में आईडिया कंपनी की वेध सिम से ज्यादा अवैध सिम प्रचलन में होना बताया जा रहा है।
(क्रमशः जारी)

रोज होगी चारा घोटाले की सुनवाई

रोज होगी चारा घोटाले की सुनवाई

(विनय राहंगडाले)

रांची (साई)। झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले से ंसंबंधित १२ लम्बित मुकदमों की सुनवाई हर रोज करने का आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश प्रकाश चन्द्र तातिया और न्यायमूर्ति जया राय की खंडपीठ ने सीबीआई की सभी विशेष अदालतों को यह आदेश दिया है। हमारे संवाददाता के अनुसार न्यायालय ने सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट को देखने के बाद अपनी नाराजगी जाहिर की।
उल्लेखनीय होगा कि झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा चारा घोटाले में सीबीआई की विभिन्न विशेष अदालतों को बचे हुए १२ मामलों की शीघ्र सुनवाई पूरी करने का निर्देश देना एक बड़ा फैसला है, क्योंकि बचे मामले अविभाजित बिहार के कुछ शीर्ष राज नेताओं से संबंधित हैं। अदालत ने एक विशेष मामले आरसी - 28/96 का उल्लेख करते हुए इसकी धीमी गति से हो रही सुनवाई पर नाराजगी जताई, ये केस बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों श्री लालू प्रसाद यादव और श्री जगननाथ मिश्रा से संबंधित हैं।

वृंदावन की विधवाओं की रिपोर्ट सुको पहुंची


वृंदावन की विधवाओं की रिपोर्ट सुको पहुंची

(आशीष माहेश्वरी)

नई दिल्ली (साई)। वृंदावन में रहने वाली विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का जायजा लेने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त सात सदस्यों की समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उच्चतम न्यायालय को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ये विधवाएं बेहद दयनीय हालात में जी रही हैं।
न्यायमूर्ति डी के जैन की पीठ को सौंपी गई आठ पृष्ठों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न गैर सरकारी संगठन इन विधवाओं का शोषण कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार विधवाओं के कल्याण के लिए किए गए उपायों का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा है और दूसरे लोग इनका लाभ उठा रहे हैं।

सीरिया द्वारा हथियारों के उपयोग पर संरा चिंतित


सीरिया द्वारा हथियारों के उपयोग पर संरा चिंतित

(एकता श्रीवास्तव)

न्यूयार्क (साई)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सीरिया सरकार द्वारा भारी हथियारों के इस्तेमाल पर गहरी चिन्ता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सेना के विमानों, लड़ाकू हैलीकॉप्टरों और भारी हथियारों के इस्तेमाल को मंजूर नहीं किया जा सकता। श्री मून ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र निगरानी मिशन के अध्यक्ष की गाड़ियों के काफिले पर रविवार को हमला किया गया, लेकिन वे बाल-बाल बच गये।
उधर, सीरिया में सरकार और विपक्ष के दावों के बावजूद अलेप्पो पर कब्जे के लिए लड़ाई जारी है। विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरियाई सैनिकों ने बख्तरबंद गाड़ियों और हैलीकॉप्टरों से सलाह-अल-दीन और सखूर में विद्रोहियों के ठिकानों पर बमबारी की है। सीरिया सरकार ने कहा है कि उसने विद्रोहियों को उनके गढ़ से खदेड़ दिया है।

वरिष्ठ नेताओं से नाराज हैं विधायक


वरिष्ठ नेताओं से नाराज हैं विधायक

(संतोष पारदसानी)

भोपाल (साई)। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई में गुटबाजी एक बार फिर चरम पर आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लगने लगे हैं। विवादों में फंसे विधायकों ने दिल्ली जाकर आला नेताओं के सामने अपनी पीड़ा का इजहार किया।
बहाली के बाद दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कल्पना परुलेकर ने आलाकमान को सफाई दी कि गुटबाजी के कारण प्रदेश को नेताओं ने उन्हें मझधार में छोड़ दिया। बहाली के लिए पहले उनसे खेद जताने वाला पत्र लिखवाया गया। बाद में बवाल मचने पर बड़े नेताओं ने इस घटनाक्रम से पल्ला झाड़ लिया।
कांग्रेसी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि चतुर्वेदी और परुलेकर सोमवार को प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव बीके हरिप्रसाद से भेंट कर जानकारी दी। चतुर्वेदी के लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुरेश पचौरी और परुलेकर के लिए केंद्रीय मंत्री कमलनाथ लॉबिंग कर रहे हैं। दोनों विधायकों और पचौरी व कमलनाथ खेमे का तर्क है कि राष्ट्रपति चुनाव पर मतदान के दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने ही मध्यस्थता की पहल की।
इन दोनों ने ही विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बहाली का रास्ता निकाला। इस दौरान बनी सहमति के बाद ही दोनों ने खेद जताने वाला पत्र लिखा। इस पत्र में भी माफी शब्द का उल्लेख नहीं है, लेकिन इसके बाद गुटबाजी के चलते उन्हें मझधार में छोड़ दिया गया। पचौरी और कमलनाथ खेमा यह सवाल भी उठा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष के बर्खास्तगी के फैसले का विशेष सत्र में विरोध क्यों नहीं हुआ?
उधर एक समाचार पत्र से चर्चा के दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने स्वीकार किया कि विधायकों के पत्र लिखने की बात उनकी जानकारी में थी। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा के माध्यम से यह पत्र विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी को भेजा गया। उन्होंने कहा कि अब बहाली हो गई है, पुरानी बातों को छोड़ आगे देखना चाहिए।
इसके साथ ही साथ नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि विशेष सत्र बहाली के एजेंडे पर बुलाया गया था। उस दौरान अन्य मामलों को उठाना उचित नहीं था, लेकिन इसका आशय यह नहीं है कि हमने उन मुद्दों को छोड़ दिया है। हम न केवल सदन के आगामी सत्रों में बल्कि सड़क पर भी इस मुद्दे को उठाएंगे।

अपराध प्रदेश बना देश का हृदय प्रदेश


अपराध प्रदेश बना देश का हृदय प्रदेश

अपराधों में इंदौर का देश में चौथा नंबर, टॉप 10 में एमपी के 4 शहर

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने उस आशंका पर मुहर लगा दी है, जो हर शहरवासी के दिल में थी। ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक क्राइम रेट के मामले में इंदौर देश के 53 बड़े शहरों में चौथे नंबर पर है। 2011 की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल इंदौर में प्रति एक लाख आबादी पर 6693 अपराध दर्ज किए गए। पिछले साल इंदौर दूसरे नंबर पर था, यह देखते हुए हमारी रैंकिंग में सुधार हुआ है फिर भी यहां अपराधों की संख्या बढ़ी है।
सिर्फ मध्यप्रदेश को देखा जाए तो यहां ग्वालियर पहले और भोपाल पांचवें नंबर पर है। 28 जून 2012 को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार संज्ञेय अपराधों की इस लिस्ट में मध्यप्रदेश देश में पांचवें नंबर पर है। बीते साल प्रदेश में 2 लाख 17 हजार 094 अपराध दर्ज किए गए। डीबी स्टार ने इसके कारणों का अध्ययन किया तो साफ हो गया कि जिस रफ्तार से शहर का महानगरीकरण हो रहा है, उस रफ्तार से पुलिस विभाग में सुधार नहीं हो रहा है।

बिहार में समाप्त हो गई जनसंहार की दहशत?


बिहार में समाप्त हो गई जनसंहार की दहशत?

(प्रतिभा सिंह)

पटना (साई)। बाथे नरसंहार की दहशत से अब बिहावासी बाहर आ गए हैं। ज्ञातव्य है कि बाथे नरसंहार में विनोद पासवान के परिवार के सात सदस्यों की हत्या हो गई थी, अपने परिवार में ये अकेले ज़िंदा बचे थे। बिहार में जनसंहारों का सिलसिला ख़त्म हुए बारह साल हो चुके हैं, लेकिन उसके निशान सम्बंधित इलाक़ों में अभी भी टीसते हुए ज़ख्मों की तरह मौजूद हैं।
उन जनसंहारों से जुड़ी हुई दहशत और नफ़रत अभी मिट नहीं पाई है। लेकिन वैसा जघन्य जाति-युद्ध फिर शुरू होने जैसा कोई स्पष्ट लक्षण भी अभी नहीं दिखता। हालांकि बिहार की राजनीति में जातीयता का ज़हर बेअसर नहीं हुआ है, इसलिए दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि ख़तरा सदा के लिए टल गया है।
हाँ, इतना ज़रूर हुआ है कि चाहे श्लाल सेनाश् हो या रणवीर सेना, दोनों पक्षों से जुड़े समाज ने मार-काट का भारी नुकसान झेलते रहने से मना कर दिया है। यह तभी संभव हुआ, जब वर्ग या जाति केन्द्रित हिंसा-प्रतिहिंसा वाले हथियारबंद दस्तों के बीच शक्ति संतुलन जैसी स्थिति बन गई।
ज्ञातव्य है कि नक्सली हमलों से बचने या नक्सलियों से मुक़ाबला करने के लिए भूमिहार समाज के लोगों ने वर्ष 1994 में भोजपुर ज़िले के बेलाउर गाँव में एक बैठक की थी। उसी बैठक में रणवीर सेना नाम से एक सशस्त्र संगठन बनाने का निर्णय हुआ था। उसका नेतृत्व ब्रह्मेश्वर नाथ सिंह श्मुखियाश् को सौंपा गया था ।
फिर तो पूरे मध्य बिहार में जातीय हिंसा-प्रतिहिंसा का भयावह दौर शुरू हो गया। राज्य सरकार ने रणवीर सेना को प्रतिबंधित कर दिया, फिर भी अगले पांच वर्षों तक मार-काट जारी रही। वर्ष 1997 के दिसंबर माह की पहली तारीख़ को अरवल ज़िले के लक्ष्मणपुर बाथे गाँव में रणवीर सेना ने दलित और पिछड़ी जातियों के 58 लोगों की हत्या कर दी।
बिहार के इस सबसे बड़े और सबसे क्रूर जनसंहार के मृतकों में औरतों और बच्चों की तादाद ज़्यादा थी। इस हत्या कांड में निचली अदालत ने 16 अभियुक्तों को मृत्यदंड और 10 अभियुक्तों को उम्रक़ैद की सज़ा दी है। इस सज़ा के ख़िलाफ़ की गई अपील हाई कोर्ट में लंबित है और आठ अभियुक्तों को हाई कोर्ट से ज़मानत मिल चुकी है।

यूपी भाजपा जुटेगी आगरा में


यूपी भाजपा जुटेगी आगरा में

(इंद्र दत्त)

आगरा (साई)। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी ने मात खा ली हो लेकिन लोकसभा चुनाव में फिर से इस राज्य में अपना झंडा बुलंद करने के लिए पार्टी आलाकमान ने अब राज्य के नेताओं की रायशुमारी करने की तैयारी की है। बीजेपी नेताओं ने इस रायशुमारी के लिए आगरा को चुना है। आगामी 5 और 6 अगस्त को होने वाली इस चिंतन बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से लेकर राज्य के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष तक हिस्सा लेंगे।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यूपी में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं और अगर बीजेपी को सत्ता में आना है तो उसे यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर कब्जा करना होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का सबसे मुख्य मकसद यह है कि राज्य के नेताओं को ऐक्टिव करना है ताकि अगले पौने दो साल के भीतर संगठन को नए सिरे से चुस्त दुरुस्त किया जा सके।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि अब राज्य में बीजेपी को बचाव के बजाए आक्रामक रणनीति बनानी चाहिए। पार्टी नेताओं को लगने लगा है कि जिस तरह से लोगों में यूपीए सरकार और राज्य की एसपी सरकार के खिलाफ नाराजगी है, उसे लोकसभा चुनाव में भुनाया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी यह भी कोशिश करेगी कि राज्य के नेताओं से यह भी कहा जाएगा कि वह लोकसभा के लिए संभावित उम्मीदवारों पर भी ध्यान दे, ताकि उन्हें वक्त रहते अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय कर दिया जाए। जिससे कि संगठन में किसी तरह का कंफ्यूजन न रहे।

नसबंदी हुई विफल!


नसबंदी हुई विफल!

(हर्ष वर्धन वर्मा)

टीकमगढ़ (साई)। राज्य सरकार द्वारा आयोजित नसबंदी शिविरों में आपरेशन के दौरान किस तरह की लापरवाही बरती जाती है। यह बात उस समय सामने आयी जब एक महिला दो बार नसंबंदी के बावजूद अब एक बार फिर गर्भवती हो गयी है। जिले के निवाडी विकासखंड के ग्राम घोगसी निवासी सोहन अहिरवार के अनुसार पूर्व में एक बेटा और बेटी होने के बाद दिसंबर 2008 में निवाडी में आयोजित नसबंदी शिविर में उसने अपनी पत्नी रामसखी का नसबंदी आपरेशन करवा दिया था।
लेकिन कुछ समय बाद उसकी पत्नी गर्भवती हो गयी। वर्ष 2009 में रामसखी ने तीसरी पुत्री को जन्म दिया। सोहन ने इसकी शिकयत निवाडी के चिकित्सकों से की और उन्होंने उसे वर्ष 2010 में आयोजित नसबंदी शिविर में पुनरू आपरेशन की सलाह दी। सोहन ने रामसखी का दिसंबर 2010 में एक बार फिर नसबंदी आपरेशन कराया।
लेकिन एक बार फिर रामसखी फिर गर्भवती हो गयी और अब वह अपनी चौथी संतान को जन्म देने वाली है। रामसखी को छह माह का गर्भ है। सोहन के पास दोनों आपरेशन के कागजात मौजूद हैं तथा उसकी मांग है कि चिकित्सकों की लापरवाही के चलते उसे दो अनचाहे बच्चें हुए हैं इसलिए उसे दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये।
इधर, टीकमगढ के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. ओ. पी. गौतम भी इसे चिकित्सकों की लापरवाही का नतीजा मानते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जायेगी। उनका कहना है इसके लिये सोहन को 30 हजार रुपये का मुआवजा भी दिया जायेगा।

बारिश में ढही गरीब की दीवार


बारिश में ढही गरीब की दीवार

(रामदास ठाकुर)

सिवनी (साई)। पिछले दिनो से जारी अनवरत वर्षा के चलते नगरीय्ा क्षेत्र्ा के महामाय्ाा वार्ड भैरोगंज निवासी एक गरीव परिवार अशोक पिता स्व देवकरन कोष्ट के मकान की मुख्य्ा पक्की दीवार के धराशाही हो जाने के कारण भर बरात मे इस परिवार को परेशानिय्ाांे का सामना करना पड रहा है। तीन पुत्र्ािय्ाो सहित एक बैटे सहित कुल छैः सदस्य्ा इस परिवार मे है तथा बाप बैटे पेपर बांटने के बाद बेटा जहां अध्य्ाय्ानरत है वही वाप दोपहर के समय्ा काम कर किसी तरह अपने परिवार का भरणपोषण करता है।
प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय्ा जनता पार्टी के लिए मर मिटने वाले इस परिवार के मुखिय्ाा अशोक ने नम आंखो से बताय्ाा कि उसका य्ाह पुस्तैनी मकान था जिसका एक कमरा पिछले वर्ष वारिश मे ढह गय्ाा था जिसके लिए उसने नगरपालिका सहित सिवनी विधाय्ाक श्रीमति नीता पटैरिय्ाा से प्रशासनिक सहय्ाोग की अपेक्षा की थी बताय्ाा जाता है कि कर्इ्र माहो तक नगरपालिका अध्य्ाक्ष य्ाह कहकर टालते रहे कि निरीक्षण टीम आय्ोगी मलवा नही उटाना निरीक्षण टीम आने के बाद प्रशासनिक सहय्ाोग मिलने की अपेक्षाा से इस परिवार द्वारा पिछले वर्ष ढहे अपने कमरे को दुरुस्त न कर दो कमरे मे किसी तरह गुजर वसर कर रहे थे कि गत दिनो एक कमरे की मुख्य्ा दीवार ढह गय्ाी। इस वारिश से घर की मुख्य्ा दीवार ढहने के बाद अव इस परिवार के छै: सदस्य्ा ८ बाई ८के एक कच्चे कमरे मे किसी तरह रह रहे है स्थिति य्ाह है कि य्ाह कमरा पूरा सामान से भर गय्ाा है ऐसी स्थिति मे इस परिवार के सदस्य्ा मोहल्ले के किसी अन्य्ा परिवारो के य्ाहां रात गुजार रहे है। शासन प्रशासन द्वारा गरीबो के लिए एक नही दर्जनो य्ाोजनाऐ संचालित की जा रही है किन्तु हैरत की बात य्ाह है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन य्ाापन करते हुए किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले इस परिवार के मुखिय्ाा जिसकी प्रदेशकी सत्ताधारी दल भारतीय्ा जनता पार्टी के कर्मट कायर््ाकर्ता के रुप मे पहचान हेै किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अभी तक शासन प्रशासन से एक रुपय्ो की मदद न दिलवा पाना सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधिय्ाो की निष्क्रिय्ाता का प्रमाण है वही नगरपालिका प्रशासन सहित नगरपालिका अध्य्ाक्ष जिसके चुनाव मे इस कायर््ाकर्ता ने जी जान लगा दिय्ाा था की ओर से भी मदद का प्रय्ाास न किय्ाा जाना इस कायर््ाकता्र के मनोबल को तोडने वाला सहाय्ाक सिद्व हो रहा है।

सलमान तेरा जवाब नहीं


सलमान तेरा जवाब नहीं

(नेहा घई पण्डित)

मुंबई (साई)। सलमान खान का भी जवाब नहीं। वह जो चाहते हैं, वही करके दिखाते हैं। गौरतलब है कि 15 अगस्त को उनकी फिल्म श्एक था टाइगरश् रिलीज होने वाली है। ऐसे में, सलमान चाहते हैं कि फिल्म के हर प्रमोशनल इवेंट्स में वह और कटरीना साथ दिखें। इसलिए उन्होंने कटरीना को शिकागो जाने से रोक दिया। दरअसल, 4 अगस्त को श्धूम 3श् की पूरी कास्ट शूटिंग के लिए शिकागो जा रही थी, लेकिन सलमान के दखल की वजह से कटरीना नहीं जा पाईं।
जब इस बारे में हमने धूम 3 के स्पोक्सपर्सन और कटरीना के मैनेजर से बात की, तो उन्होंने भी इस खबर को कंफर्म करते हुए कहा, श्यह सच है कि कटरीना 15 अगस्त के बाद शिकागो में श्धूम 3श् की कास्ट व यूनिट को जॉइन करेंगी। दरअसल, 15 अगस्त को श्एक था टाइगरश् रिलीज हो रही है और अभी वह फिल्म के प्रमोशंस में बिजी हैं। इसी वजह से वह बाद में जाएंगी।श्
वहीं एक था टाइगर से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कटरीना ने अपना जाना सिर्फ सलमान की वजह से कैंसल किया है। दरअसल, सलमान चाहते थे कि हर प्रमोशन ऐक्टिविटीज में वह कटरीना के साथ पहुंचें। आखिर वह फिल्म की लीड ऐक्ट्रेस जो हैं। ऐसा उन्होंने अपनी लास्ट फिल्म बॉडीगार्ड से सबक लेते हुए किया है। गौरतलब है कि बॉडीगार्ड की रिलीज के वक्त करीना श्रा।वनश् की शूटिंग की वजह से सलमान की फिल्म का प्रमोशन नहीं कर पाई थीं। वाह, सलमान आपका भी जवाब नहीं। अपने प्रमोशन की खातिर बेचारे आमिर की शूटिंग ही रुकवा दी