बुधवार, 11 सितंबर 2013

हैवान पिता ने चढ़ा दी अपनी छः वर्षीया बेटी की बलि!

हैवान पिता ने चढ़ा दी अपनी छः वर्षीया बेटी की बलि!

मानसिक विक्षिप्त है या नहीं जांच के बाद पता चलेगा: एसपी, संडास जा रही थी ऋतु: गीता

(विकराल सिंह बघेल)

केवलारी (साई)। इक्कीसवीं सदी में भी टोना टोटका ग्रामीण अंचलों में सिर पर हावी है। आज केवलारी अंचल में एक नरपिशाच पिता ने हैवानियत की हदें पार करते हुए अपनी ही छः साल की पुत्री ऋतु की, गला काटकर इहलीला समाप्त कर दी। बच्ची को मारने के बाद पिता ने मंदिर के प्रांगण में ही पूजन पाठ भी आरंभ कर दिया। बाद में लोगों ने देखा और पुलिस को बुलाया तब जाकर नराधम पिता को पकडा़ जा सका।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी समुदाय के पूर्व जनपद सदस्य सुतलाल इडपाचे, निवासी ग्राम झोला द्वारा अपनी ही 6 वर्षीय बच्ची की धारदार कुल्हाड़ी से गर्दन में प्राणघातक वार कर, ग्राम के निकट स्थापित खैरमाई चबूतरा में बली चढ़ा दी। उसके पास बैठकर, वह बड़े ही शांत स्वभाव से कहता है कि अभी तो मैंने पूजा किया हंूॅं, सब ठीक हो जायेगा, माता उठेगी और बच्ची को ठीक कर देगी।

कल ही आया था ससुराल
बताया जाता है कि अपनी मासूम बेटी ऋतु की बलि चढ़ाने वाला 35 वर्षीय संतकुमार पिता जगदीश इड़पाचे एक दिन पहले ही अपने गांव झोला से ससुराल तुरर्गा आया था। झोला में राखी के दो दिन पहले से उसकी पत्नी गीताबाई व बेटी ऋतु व 10 साल का बेटा शरद रह रहे थे। मंगलवार की पूर्वान्ह 11 बजे के लगभग वह बेटी को घुमाकर लाने के बहाने गांव के पास खेतों के बीच स्थित खैरमाई के चबूतरे पर ले गया और कुल्हाड़ी का वार कर उसकी गर्दन काट दी।

लोगों को आवाज देकर बुलाया
इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि घटना की जानकारी तब लगी, जब एक ग्रामीण जंगल से लौट रहा था तो उसे आवाज देकर कहा कि जाओ मेरे ससुराल में मेरी पत्नि को बता दो कि तुम्हें पति ने खैरमाई चबूतरा में बुलाया है। ग्रामीण ने घटना स्थल पर मृत बच्ची को देख अनदेशा लगा लिया था कि इस व्यक्ति ने उसे काट डाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मौके पर सरकटी बच्ची की लाश देखकर लोग घबराकर वहां से यत्र तत्र भागने लगे।

संडास जा रही थी ऋतु
मृतिका ऋतु की पत्नि गीता ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि वह अपने पिता के घर ग्राम तुरर्गा गई हुई थी। मृितका का पिता संतलाल वहां पहुंचा। उसके उपरांत अपरान्ह जब ऋतु ने बताया कि वह संडास जाना चाह रही थी। इस पर उसके पिता ने कहा कि चलो बेटा मैं भी चलता हूं। इसके बाद मृतिका ऋतु, अपने पिता के साथ वहां से चली गई।

कुल्हाड़ी से काट दिया सिर
बताया जाता है कि आज दोपहर दो बजे की बात है, पूर्व जनपद सदस्य संतलाल इ्र्रडपाचे उम्र लगभग 40 वर्ष ग्राम झोला थाना केवलारी निवासी ने अपने ससुराल ग्राम तुरर्गा (थाना केवलारी)के पास जंगल में अपने साथ 6 वर्षीय बच्ची ऋतु इडपाचे को खैरमाई चबूतरा ले जाकर, गर्दन पर धारदार कुल्हाडी से वार करते हुए बली चढ़ा कर वहीं बच्ची के शव के पास शांत बैठा रहा। ग्रामीणांे को जानकारी लगते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

मीडिया पहुंचा पहले, पुलिस पहुंची दो घंटे बाद
भारतीय सिनेमा में पुलिस की छवि यह बनाई गई है कि वह अपराध घटित होने के काफी देर बाद घटना स्थल पर पहुंचती है। ग्राम तुरर्गा में भी बिल्कुल ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां मीडिया पहले पहुंचा और दो घंटे इंतजार के उपरांत मौके पर पुलिस पहुंची। आज खास बात यह रही कि दो घंटे तक मीडिया कर्मी ग्रामीणों के साथ घटना स्थल पर खड़े होकर केवलारी  पुलिस का इंतजार करते रहे। दो घंटे देरी से पहुंच पुलिस ने कुल्हाडी को अपने कब्जे में लेकर आरोपी को गिरफ्तार किया और थाना केवलारी ले आई। शव का पंचनामा बनाकर, पीएम कराये जाने के बाद परिजनो को साैंपा गया।

टीआई साहब पूजा करने दो-
घटना की जानकारी लगते ही केवलारी थाना प्रभारी एम.ए.कुरैशी जब मौके पर पहंुचे तो आरोपी पिता पूजा करने में जुटा हुआ था। उसने कहा टीआई साहब, बैठिए पहले मैं पूजा कर लूं।

सपने में आई देवी
कलेक्टर भरत यादव व एसपी बी.पी.चंद्रवंशी के अनुसार आरोपी पिता ने पूछताछ में बताया है कि उसे सपने में देवी आई थी, जिसके चलते उसने इस घटना को अंजाम दिया है। कलेक्टर के अनुसार आरोपी की स्थिति सामान्य है। ऐसा लग नहीं रहा कि वह मानसिक रूप से बीमार है। उसके परिजनों व ग्रामीणों ने भी पूछताछ में ऐसी ही जानकारी दी है।

गांव में पसरा सन्नाटा
घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। अपनी हंसती-खेलती बेटी को गंवाने वाली मां के रो-रोकर बुरे हाल हैं। केवलारी थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस उससे पूछताछ में जुटी है।

मौके पर पहुंचे एसडीएम
पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि केवलारी से उगली मार्ग पर झोला गांव निवासी पूर्व जनपद सदस्य श्री संतलाल इडपाचे ने 10 सितम्बर 2013 की दोपहर अपने ससुराल पक्ष के गांव तुरर्गा पहुॅचकर यहां स्थित खैरमाई मंदिर में अपनी पुत्री ऋतु इडपाचे (8) वर्ष को लेकर देवी मां के सामने उसकी बलि चढ़ा दी। इस घटना की सूचना मिलते ही केवलारी एसडीएम कौशलेन्द्र विक्रम सिंह तथा थाना प्रभारी एम.ए.कुरैशी पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुॅच गये हैं तथा आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुत्री की बलि चढ़ाने का कारण अज्ञात है।

अंधविश्वास हो सकता है कारण!
एसडीएम कौशलेन्द्र विक्रम सिंह (आईएएस) ने साई न्यूज से चर्चा के दौरान बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अंधविश्वास के चलते आरोपी पिता ने अपनी पुत्री की बलि चढ़ाई है। मृतक बालिका के शव को पोस्ट मार्टम हेतु केवलारी लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आरोपी पिता ने तुरर्गा गांव के समीप वीरान स्थल पर बने एक चबूतरानुमा खैरमाई मंदिर में अपनी पुत्री की बलि चढ़ाते हुए उसकी गर्दन को धड़ से अलग कर दिया है। बलि के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

आरोपी विक्षिप्त है अथवा नहीं इस बारे में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इस संबंध में अभी जांच जारी है।

बी.पी.चंद्रवंशी, पुलिस अधीक्षक सिवनी

डेंगू: जरूरी है सावधानी

डेंगू: जरूरी है सावधानी

(शरद खरे)

सिवनी जिले में डेंगू की दस्तक वाकई दुखदायी है। डेंगू का कहर सिवनी के निवासियों ने मीडिया के माध्यम से ही देखा और सुना होगा। डेंगू का डंक वाकई बेहद खतरनाक होता है। मलेरिया से तो जिलावासी रूबरू हो चुके हैं पर अब डेंगू का डंक उनकी परेशानी का सबब बन चुका है। स्वास्थ्य प्रशासन भले ही इस मामले में शुतुरमुर्ग के मानिंद रेत में सर गड़ाकर अपने आप को पाक साफ बताने का प्रयास कर रहा हो पर जमीनी हकीकत है हाल ही में हुई डेंगू से एक मौत!
सिवनी में मलेरिया और डेंगू के मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। ये दोनों ही मच्छर जनित रोग हैं। इसके साथ ही साथ मच्छर जनित चिकन गुनिया भी बेहद ही पीड़ा दायक रोग है। न ही नगर पालिका को, न ही स्थानीय निकाय की अन्य शाखाओं को और न ही स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रोकथाम के लिए कोई उपाय किए हैं। यही कारण है कि जिले में स्थिति भयावह हो चुकी है। जिला मुख्यालय सिवनी में जहां देखो वहां पानी के डबरे, पोखर भरे पड़े हैं। लोगों के घरों में भी पानी रूका हुआ है। कहा जाता है कि ठहरा हुआ पानी जानलेवा मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छरों के लिए उपजाऊ माहौल तैयार करता है। जिला चिकित्सालय में पानी के डबरे निश्चित तौर पर इनके लिए संजीवनी का काम ही कर रहे हैं।
कम ही लोग जानते होंगे कि भारत की आजादी वाले साल यानी 1947 में मलेरिया जैसी घातक जानलेवा बीमारी ने देश में दस लाख से ज्यादा लोगों की इहलीला समाप्त कर दी थी। दरअसल मादा एनाफिलीस़़ मच्छर जब इंसान को काटती है, तब वह एक विशेष तरह का वायरस मनुष्य के अंदर प्रविष्ट करा देती है। यही वायरस मलेरिया को जन्म देता है। इस मादा मच्छर के पास इंसानी त्वचा को भेदने के लिए एक विशेष तरह का हथियार होता है। शोध बताता है कि इसके पास पतले डंक के अंत में सुईनुमा जुड़वा अस्त्र होता है।
यह मादा, इंसान के शरीर में इसे प्रविष्ट कराकर रक्त वाहनियों की तलाश करती है। नहीं मिलने पर यह क्रम जारी रखती है। नस मिलने पर यह मादा इंसान का कुछ रक्त चूस लेती है, और फिर डंक को बाहर निकालने के पहले इसमें एक विशेष तरह का एंजाईम उसमें छोड़ देती है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह मादा मच्छर दो दिन में ही 30 से 150 तक अंडे देती है। इन अंडों को सेने के लिए उसे मानव रक्त की आवश्यक्ता होती है।
मलेरिया का स्वरूप विश्व भर में इतना विकराल हो गया है कि इसे दुनिया की तीसरे नंबर की सबसे बड़ी महामारी का दर्जा मिल गया है। कहा जाता है कि एड्स से 15 सालों में जितनी जानें जाती हैं, उतनी जान मलेरिया रोग के कारण महज एक साल में ही चली जाती हैं। मलेरिया का सबसे अधिक प्रकोप पांच साल से कम के बच्चों पर होता है। औसतन हर साल दुनिया भर में 25 लाख से अधिक लोग इस भयानक बीमारी से अपने प्राण गंवा देते हैं।
विश्व हेल्थ आर्गनाईजेशन (डब्लूएचओ) का प्रतिवेदन साफ तौर पर बताता है कि मलेरिया के मरीजों की वृद्धि की दर हर साल 16 फीसदी आंकी गई है। यह तथ्य निश्चित रूप से चिंता का विषय कहा जा सकता है। मलेरिया कितनी गंभीर बीमारी है यह इस बात से ही साफ हो जाता है कि हर साल विश्व भर में 2 अरब डालर से ज्यादा इस पर खर्च कर दिया जाता है। इतना ही नहीं मलेरिया को लेकर होने वाले शोधों पर हर साल 580 लाख डालर खर्च किया जाता है।
सिवनी में डेंगू के मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर की जा चुकी है। डेंगू से एक के बाद एक काल कलवित होने की खबरें भी आने लगी हैं। स्वास्थ्य विभाग, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, नगर पंचायत और नगर पालिकाएं अब तक इस मामले को लेकर संजीदा होती नहीं दिख रही है। बारिश अब थम चुकी है इसलिए जगह जगह जमा पानी में मच्छरों के अण्डे पनपेंगे। गिरते पानी में तो इनके बहने की संभावनाएं होती हैं पर अब रूके पानी में तो ये आसानी से अपनी वंशवृद्धि का काम कर सकते हैं।
जिला कलेक्टर के कड़े निर्देशके उपरांत दिखाने को तो स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन ने डेंगू के लार्वा की खोज कर दवा डालने का काम किया, साथ ही साथ प्रभावशाली लोगों के घरों के आसपास फागिंग मशीन का धुआं भी उड़ाया। अगर यह काम ईमानदारी से हो रहा है तो फिर क्या कारण है कि आज भी डेंगू के मरीज और लार्वा मिलने का सिलसिला जारी है। अगर लार्वा और मरीज मिल रहे हैं तो इससे साफ हो जाता है कि काम ईमानदारी से नहीं किया जा रहा है।

सरकारी नुमाईंदों की हिम्मत तो देखिए, भाजपा के दो दो विधायकों के पति सिवनी में जिला चिकित्सालय में पदस्थ हैं। एक विभाग के प्रमुख हैं तो दूसरे के पास मलेरिया विभाग का प्रभार है। बावजूद इसके मच्छर डंक पर डंक मारे जा रहे हैं। इसे क्या समझा जाए? क्या विधायक ही भाजपा के प्रति लोगों को उकसाने का जतन कर रही हैं? अगर नहीं तो कलेक्टर के निर्देशों को कचरे की टोकरी में कैसे डाला जा रहा है, और अगर नहीं डाला जा रहा है तो फिर क्या वजह है कि तीन माह बीतने के उपरांत भी डेंगू का लार्वा और मरीज लगातार मिलते ही जा रहे हैं . . .।

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

प्रदूषण के मानकों को ताक पर रख दिया झाबुआ पावर ने

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 13

प्रदूषण के मानकों को ताक पर रख दिया झाबुआ पावर ने

निर्माण कार्य और कार्यकारी अवस्था में प्रदूषण के मामले में मौन है झाबुआ पावर, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का मौन संदिग्ध

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। सफल और मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छठवीं अनूसूची में अधिसूचित आदिवासी तहसील घंसौर में डाले जा रहे 1260 मेगावाट (कागजों में 1200 मेगावाट) के पावर प्लांट में पर्यावरण के नियम कायदों मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का मौन आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 22 अगस्त 2009 को इस संयंत्र के प्रथम चरण के लिए 600 मेगावाट के पावर प्लांट की लोकसुनवाई में मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा जो कार्यकारी सारांश जमा किया गया था उसमें संयंत्र की लागत 2900 करोड़ रूपए एवं जमीन की आवश्यकता 600 हेक्टेयर दर्शाई गई थी। इस समय कार्यकारी सारांश की कंडिका क्रमांक आठ में कंपनी ने साफ किया था कि वह निर्माण कार्य के समय 181 करोड़ पचास लाख रूपए और कार्यकारी अवस्था में 9 करोड़ पांच लाख रूपए की राशि का प्रावधान पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम के लिए कर रही है।
इसके उपरांत इसके दूसरे चरण की लोकसुनवाई 22 नवंबर 2011 को संपन्न हुई। इस लोकसुनवाई के दूसरे दिन मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की आधिकारिक वेब साईट पर कंपनी का वही (22 अगस्त 2009 वाला) कार्यकारी सारांश डाल दिया गया। इसमें दूसरे चरण के लिए भी कंपनी को 600 हेक्टेयर जमीन की आवश्यक्ता दर्शाई गई है। इसमें भी कार्यकारी सारांश की कंडिका क्रमांक आठ में कंपनी ने साफ किया था कि वह निर्माण कार्य के समय 181 करोड़ पचास लाख रूपए और कार्यकारी अवस्था में 9 करोड़ पांच लाख रूपए की राशि का प्रावधान पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम के लिए कर रही है।

22 नवंबर 2011 को घंसौर के गोरखपुर में हुई लोकसुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी जबलपुर के समक्ष मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के महाप्रबंधक ए.एन.मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया था कि कंपनी अपने निर्माण के आरंभ से 22 नवंबर 2011 तक क्षेत्र में वृक्षारोपण करने में असफल रही। पीसीबी के अधिकारियों के समक्ष मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के प्रबंधन की स्वीकारोक्ति के बाद भी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के ऊपर शस्ति आरोपित न करना पीसीबी और कंपनी की मिली भगत की ओर साफ इशारा कर रही है।

डेंगू को बहुत ही हल्के में ले रहा है प्रशासन!

डेंगू को बहुत ही हल्के में ले रहा है प्रशासन!

नहीं हो रहा दवा का छिड़काव, न हो रही घरों घर लार्वा की जांच

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनंी (साई)। दो माह पहले सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के लार्वा की तादाद अब तेजी से बढ़ती जा रही है। जिला प्रशासन के कड़े निर्देशके बाद भी स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन कुछ देर को जागा फिर कुंभकर्णीय निंद्रा में जा पहुंचा है। शहीद वार्ड और विवेकानंद वार्ड की सीमा को लांघकर डेंगू के मच्छर अब महावीर और कबीर वार्ड तक कूच कर चुके हैं। हाल ही में पीपरडाही के समीप के एक ग्राम के बीस वर्षीय रामायण राम भरोस की मौत डेंगू से होना बताया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि मच्छर वार्ड की सीमा नहीं पहचानते हैं अतः इन्हें शिक्षित करना होगा कि ये अपने वार्ड को छोड़कर न जाएं। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग और पालिका प्रशासन ने पूर्व में विवेकानंद वार्ड और शहीद वार्ड में घरों घर जाकर डेंगू के लार्वा खोजकर उन्हें नष्ट करने का काम किया था।

समाचार एजेंसी ने दी थी चेतावनी
उल्लेखनीय होगा कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने इसकी पूर्व में चेतावनी दी थी कि डेंगू को हल्के में न लिया जाए। साई न्यूज ने दिल्ली के प्रकरणों के हवाले से सिवनी के जिला प्रशासन को चेताया था। साई न्यूज के हवाले से दैनिक हिन्द गजट ने 31 जुलाई को सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के चार मरीज‘, 01 अगस्त को स्थिति बेकाबू हो सकती है डेंगू, मलेरिया की‘, 03 अगस्त को पालिका हेल्थ के बीच आरोप प्रत्यारोप का सबब बना डेंगू अभियान!‘ 07 अगस्त को थम नहीं रहा डेंगू के लार्वा मिलने का सिलसिला‘‘ समाचार प्रकाशित किए थे।
इसके साथ ही साथ समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक लिमटी खरे की विशेष टिप्पणी ‘‘बुढ़िया के मरने का गम नहीं गत तो इस बात का है मौत ने घर देख लिया. .।‘‘ में भी इस बात का उल्लेख किया गया था कि अभी तक डेंगू के मरीज सिवनी में नहीं मिले थे, अब डेंगू के लक्षण मिलने का साफ तात्पर्य है कि डेंगू के लिए जिम्मेदार मच्छरों ने सिवनी में आमद दे दी है, जो चिंता का विषय है।
जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की खबरों का प्रकाशन दैनिक हिन्द गजट में किया गया उस वक्त मीडिया के कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा जा रहा था कि दैनिक हिन्द गजट द्वारा अनावश्यक ही डेंगू का डर बताया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह थी कि डेंगू की भयावहता देश की राजधानी दिल्ली में जमकर देखने को सालों से मिल रही है। इसके अलावा पिछले दिनों मण्डला में डेंगू ने जमकर कहर बरपाया था।

नहीं हो रही जांच
सिवनी में न जाने कितने घरों की छत पर पानी की टंकी खुली पड़ी हैं, जिसमें डेंगू या मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छरों का लार्वा पल रहा होगा। जैसे ही विवेकानन्द वार्ड में डेंगू के मरीज मिले, प्रशासन हरकत में आया और वहां घरों घर जाकर लार्वा की चेकिंग की गई। हजारों घरों से डेंगू का लार्वा मिलना इस बात का खतरनाक संकेत है कि डेंगू ने सिवनी शहर में बुरी तरह आमद दे दी है।

हल्के में लिए जा रहे कलेक्टर के निर्देश
जिले में अराजकता का माहौल दिख रहा है। प्रशासनिक पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। जिला कलेक्टर बार बार डेंगू मलेरिया को लेकर निर्देश दे रहे हैं, पर स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन उनके निर्देशों को बहुत ही हल्के में ले रहा है। इसी का परिणाम है कि डेंगू के मच्छर अब विवेकानंद और शहीद वार्ड से निकलकर कबीर और महावीर वार्ड तक जा पहुंचे हैं। गत दिवस महावीर वार्ड निवासी अजय गुप्ता और कबीर वार्ड में हॉस्टल निवासी सुबोध सिरोल डेंगू प्रभावित पाए गए।

26 जुलाई को हुई थी पुष्टि
सिवनी में डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी के मरीजों की पुष्टि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा की गई थी। वहीं मलेरिया से भी अब तक कुछ मौत होने की खबरें प्रकाश में आई हैं। सत्ता के मद में चूर भाजपा को भी इस दिशा में कोई पहल करने की फुर्सत नहीं है। कबीर वार्ड में समन लोधी के जवान पुत्र की बुखार से गत दिवस मृत्यु हो गई। संभावना व्यक्त की जा रही है कि इसकी मृत्यु भी डेंगू से ही हुई है।

कहां है फागिंग मशीन

एक के बाद एक डेंगू और मलेरिया के मरीज मिलने से विवेकानंद, शहीद, कबीर और महावीर वार्ड के पार्षद कटघरे में खड़े हो गए हैं। इन चारों वार्ड के पार्षद संजय डागा, इब्राहिम कुरैशी, संजय भलावी, श्रीमती तृप्ति नामदेव से शहर की जनता यह पूछना चाह रही है कि क्या उनके वार्ड में नगर पालिका परिषद् या स्वास्थ्य विभाग की फागिंग मशीन चल रही है, और अगर नहीं चल रही है तो उन्होंने अपने वार्ड के नागरिकों को डेंगू मलेरिया से बचाने के लिए क्या जतन किए हैं? अगर नहीं किए हैं तो उन्हें पार्षद की आसनी पर बैठने का हक शायद नहीं रह जाता है। शहर के पॉश इलाका माने जाने वाले बारापत्थर क्षेत्र में गाहे-बगाहे फॉगिंग मशीन का धुंआ अवश्य दिख जाता है।

हरिद्वार से आएगी मुनमुन के लिये भाजपा की टिकिट

हरिद्वार से आएगी मुनमुन के लिये भाजपा की टिकिट

रामदेव बाबा ने प्रत्येक जिले में एक सीट के समझौते पर समर्थन का दिया वचन

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी द्वारा दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों को तिलांजली देते हुए निर्दलीय प्रत्याशी रहे दिनेश राय उर्फ मुनमुन को सिवनी से टिकिट दी जा रही है। कहा जा रहा है कि बाबा रामदेव और भाजपा के बीच हुए समझौते में सिवनी की सीट बाबा के कोटे में डालकर इसे दिनेश राय को देकर भाजपा अपना पल्ला झाड़ने का जतन कर रही है। दिनेश राय उर्फ मुनमुन को भाजपा और रामदेव बाबा के संयुक्त प्रत्याशी बनने की उम्मीदों के बीच भाजपा और रामदेव बाबा के समर्थक उहापोह में ही नजर आ रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा भले ही अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं और सीनियर पदाधिकारियों का मन रखने के लिये रायशुमारी जैसी प्रक्रिया अपना कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का एक नौटंकीनुमा कार्यक्रम आयोजित कराया हो किंतु भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इस हकीकत से वाकिफ है कि उस रायशुमारी का कोई अर्थ नहीं है। इसके विपरीत पार्टी का नेतृत्व इस रायशुमारी को अपनी मनमानी करने का एक सशक्त माध्यम बना लेता है।
कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति को जहां से मैदान में उतारना हो उसे ही रायशुमारी का आधार बता दिया जाता है। जबकि टिकिट वितरण का कार्य केवल और केवल उच्चस्तरीय सैटिंग के हिसाब से होता है। ऐसा ही इस बार फिर होने वाला है। जिला मुख्यालय वाली भाजपा की सबसे अधिक विश्वसनीय सीट इस बार भी एक समझौते के तहत थाली में रखकर परोसी जा सकती है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी विधानसभा सीट का निर्धारण लगभग हो चुका है और यह सीट इस बार भी एक धार्मिक-राजनैतिक समझौते के तहत एक व्यावसायिक राजनेता को दी जा रही हैं।
वहीं, राजनैतिक हल्कों में यह बात आम हो चुकी है कि प्रदेश की चार दर्जन विधानसभा सीटों के लिये प्रत्याशी चयन का कार्य भाजपा के प्रदेश कार्यालय दीनदयाल परिसर भोपाल के बजाय भारत स्वाभिमान ट्रस्ट हरिद्वार में होगा, और उन्हीं चार दर्जन में से एक सीट सिवनी जिला मुख्यालय की भाजपा की सबसे अधिक भरोसेमंद सीट भी है।
साई न्यूज के सिवनी ब्यूरो से अय्यूब कुरैशी ने बताया कि जिले में चल रही चर्चाओं के अनुसार नगर पंचायत लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष ओैर वर्तमान अध्यक्ष के पुत्र दिनेश राय मुनमुन स्वामी रामदेव के अनन्य भक्त हैं और बाबा के पिछले प्रवास के समय उनके कार्यक्रम का समूचा खर्च उन्हीं ने वहन किया था उसके अतिरिक्त एक लाख रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी किया था। उस समय अनेक लोगों द्वारा यह आपत्ति उठाई गई थी कि स्वामी जी मदिरापान और मदिरा व्यवसाय के घोर विरोधी हैं फिर एक मदिरा व्यवसाई का सहयोग कैसे लिया जा रहा है।
किंतु इसे गुरू-चेले की आत्मीयता का ही प्रमाण माना जाएगा कि इतनी प्रामाणिक आपत्ति के बाद भी स्वामी जी ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह संयोग ही है कि प्रदेश के मुखिया भी स्वामी रामदेव के भक्तों में गिने जाते हैं। जून माह में हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया और सिवनी के स्वामी जी के सबसे प्रिय चेले का एक साथ कार्यक्रम में मौजूद रहना कोई संयोग नहीं माना जा सकता। राजनीति के जानकार लोग इस बात को जानते होंगे कि हरिद्वार में अपने गुरू की शरण में प्रदेश के मुखिया के साथ कुछ समय बिताने के बाद से ही दिनेश राय ने वापिस आते ही सिवनी विधानसभा क्षेत्र में अपना जनसम्पर्क तेज कर दिया था।
भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय दीनदयाल परिसर में यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रदेश मेें भाजपा की टिकिटों का वितरण जिस तिकड़ी के माध्यम से किया जाना है उनमें प्रदेश के मुखिया के अतिरिक्त प्रदेशाध्यक्ष और संगठन महामंत्री हैं जिनमें से संगठन महामंत्री तो दिनेश राय के वित्तीय प्रबंधन पर पहले से ही लट्टू हैं और राजनैतिक प्रबंधन के मोहपाश में प्रदेश के मुखिया को फंसा लेने के बाद अब प्रदेश भाजपा को सिवनी की टिकिट हरिद्वार के बरास्ते दिनेश राय को सौंपने के अतिरिक्त अन्य कोई चारा नहीं बचता है। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित ही यह जिला मुख्यालय में बरसों से काम करने वाले निष्ठावान और समर्पित भाजपाईयों के लिये 2008 की भांति एक और क्र्रूरतापूर्ण उपहार माना जाएगा।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो से अय्यूब कुरैशी का कहना है कि इन खबरों के फिजां में घुलते ही सिवनी में भाजपा और बाबा रामदेव के समर्थकों में सन्नाटा पसर गया है। लोगों को लग रहा है कि अगर ऐसा हो गया तो वे किस मुंह से जनता के बीच जाकर भाजपा या बाबा रामदेव का नाम लेकर वोट मांगेंगे।

मोगली की ख्याति विदेशों में!

मोगली की ख्याति विदेशों में!

(शरद खरे)

भारत गणराज्य के लोगों की स्मृति से अभी विस्मृत नहीं हुआ होगा कि नब्बे के दशक में (दूरदर्शन पर) धूम मचाने वाला हर रविवार को सुबह सवेरे ‘‘जंगल जंगल पता चला है, चड्डी पहन के फूल खिला है . . .‘‘ वाले टाईटल सांग का सीरियल ‘‘द जंगल बुक‘‘ का हीरो भेड़िया बालक मोगली देश भर के हर वर्ग, हर आयु के लोगों की पहली पसंद बन गया था। यही मोगली अब भारत से निकलकर हॉलीवुड में जाकर धूम मचा रहा है। गौरतलब है कि ब्रितानी शासनकाल में भारत के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले के जंगलों में एक बालक जो जंगली जानवरों विशेषकर भेड़ियों के बीच पला था, के अस्तित्व में होने की किवदंती आज भी फिज़ाओं में हैं। माना जाता है कि एक बालक जो जंगलों की वादियों में पला बढ़ा था, वह भेडियों की सोहबत में रहने के कारण अपनी आदतें भेडियों की तरह ही कर बैठा था, ने लंबा समय जंगलों में बिताया था।
ब्रितानी शासन में इंग्लैंड के मशहूर लेखक और कवि रूडयार्ड किपलिंग ने मोगली के जीवन को कागज पर उतारा था। किपलिंग का जन्म भारत गणराज्य की आर्थिक राजधानी मुंबई में उस वक्त हुआ था जब देश पर ब्रितानी शासक हुकूमत किया करते थे। किपलिंग के माता पिता मुंबई में ही रहा करते थे। कवि रूडयार्ड किपलिंग ने महज 13 साल की आयु से ही कविताएं लिखना आरंभ कर दिया था। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, उसी तर्ज पर किपलिंग की कविताएं तब काफी लोकप्रिय हो गईं थीं। कहा जाता है कि किपलिंग को एक बार भारत की सुरम्य वादियों के बीच देश के जंगलों की अनमोल वादियों में सैर का मौका मिला।
उसी दौरान एक फारेस्ट रेंजर गिसबॉर्न ने रूडयार्ड किपलिंग को एक बालक के शिकार करने की क्षमताओं के बारे में सविस्तार बताया। जंगली जानवारों के बीच लालन पालन होने के कारण उस बालक में यह गुण विकसित हुआ था। यहीं से किपलिंग को जंगली खूंखार जानवरों के बीच रहने वाले उस अद्भुत बालक के बारे में लिखने की प्रेरणा मिली। किपलिंग ने जंगल बुक नामक किताब में इस अनोखे बालक के जीवन को बड़े ही करीने से उकेरा है। बाद में यही बालक सबका प्यारा दुलारा मोगलीबन गया।
किपलिंग की इस किताब में मोगली के सहयोगी मित्रों और बुजुर्गों के तौर पर चमेली, भालू, का यानी सांप, अकडू पकडू, खूंखार शेरखान आदि को भी बखूबी स्थान दिया गया है। विडम्बना यह है कि भारत के जंगलों में पाए जाने वाले इस मोगली के बारे में उसकी खासियतें पहचानी तो एक ब्रितानी लेखक ने। इतना ही नहीं ब्रितानी लेखक के इस नायाब अनुभवों या काल्पनिक काम को सूत्र में पिरोकर फिल्माने का काम किया जापान ने। जापान में सिवनी के इस बालक के कारनामोें के बारे में 1989 में एक 52 एपीसोड वाला सीरियल तैयार किया गया था। ‘‘द जंगल बुक शिओन मोगली‘‘ नाम से बनाए गए इस एनीमेटिड टीवी सीरियल को जब प्रसारित किया गया तो जापान का हर आदमी मोगली का दीवाना बन गया था।
जब भारत को यह पता चला कि उसके देश की इस नायाब कला को जापान में सराहा जा रहा है, तो भारत में इसके प्रसारण का मन बनाया गया। एक साल बाद 1990 में इसी जापानी सीरियल द जंगल बुक ऑफ शिओन मोगली को हिन्दी में डब करवाया गया और फिर इस कार्टून सीरियल द जंगल बुकको दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। जैसे ही रविवार को इसका प्रसारण आरंभ किया गया, वैसे ही इस सीरियल की लोकप्रियता ने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए। इस मोगली सीरियल का टाइटल सांग जंगल जंगल बात चली है, पता चला है, चड्डी पहन कर फूल खिला है . . .को लिखा था मशहूर गीतकार गुलज़ार ने और इसे संगीत दिया था विशाल भारद्वाज ने। आज लगभग बीस साल के उपरांत यह मोगली एक बार फिर अपनी लोकप्रियता के सारे पैमाने ध्वस्त करने की तैयारी में है। यह कार्टून सीरियल एक बार फिर निर्माण हेतु तैयार है। और इसके उपरांत यह दुनिया भर में धूम मचाएगा। मोगली पर फिल्म निर्माण की जवाबदारी अब विज्जुअल इफेक्ट कंपनी डीक्यू एंटरटेनमेंट ने अपने कांधों पर ली है जो इस पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्म बनाने जा रही है। द जंगल बुक के नाम से आने वाले समय में थ्री डायमेंशनल फिल्म बनाई जाने वाली है, जो दुनिया भर में रिलीज की जाएगी।

लगभग एक सौ बीस करोड़ रूपए लागत से बनने वाली इस फिल्म का प्रोडक्शन आरंभ हो चुका है। भारत के हैदराबाद की एनीमेशन, गेमिंग और इंटरटेनमेंट कंपनी डीक्यू एंटरटेनमंेट द्वारा बनने वाली यह थ्री डी फिल्म 2014 में रिलीज को तैयार हो जाएगी, एैसा माना जा रहा है। मूलतः रूडयार्ड किपलिंग की किताब द जंगल बुक पर आधारित यह चलचित्र इन द रूख‘, ‘टाईगर‘, ‘लेटिंग इन द जंगलआदि कहानियों का निचोड़ होगा जिसमें मोगली के अपने माता पिता से बिछुड़ने, जंगल में खूंखार जानवरों के बीच पलने बढ़ने, उसके साहसिक कारनामों और फिर मानव जाति और सभ्यता में वापसी पर आधारित होगी। विडम्बना ही कही जाएगी कि भारतीय सड़क और रेल के मानचित्र पर सिवनी जिले का नाम नहीं है। कम से कम मोगली के हालीवुड जाने के साथ ही साथ सिवनी जिले को राष्ट्रीय नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान अवश्य ही मिलने की उम्मीद है। इसका लाभ अगर सिवनी के नेता उठा सकें तो सिवनी को गुलजार होने से कोई नहीं रोक सकता है।

सोमवार, 9 सितंबर 2013

उपेक्षा का परिणाम है अलगाव की भावना

उपेक्षा का परिणाम है अलगाव की भावना

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्रों में से एक जबलपुर संभाग के तीन उपेक्षित जिलों सिवनी ंिछदवाड़ा और बालाघाट को मिलाकर नये संभाग के गठन के स्वयं प्रदेश के मुखिया के ऐलान के पांच साल बीत जाने के बाद भी उस मंें लेशमात्र प्रगति न हो पाना इस अंचल के लोगों को यह सोचने पर विवश करता है कि क्या प्रदेश की सरकार इस अभागे अंचल के विकास के लिये कभी सपने में भी विचार नहीं करती?
यदि प्रदेश की सरकार या उसके स्थानीय प्रतिनिधियों ने कभी भी इस क्षेत्र के विकास के लिये विचार किया होता तो इस अभागे क्षेत्र को अपने उदय के साढ़े पांच दशक बाद भी अभागा कहने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। 55 लाख आबादी वाले तीन जिलों के विकास के लिये प्रदेश सरकार की उपेक्षा की तीव्र प्रतिज्ञा अंततः इस पिछड़े क्षेत्र के लोगों को इस बात पर विचार करने को विवश करने लगी है कि जब कोई प्रदेश सरकार उसके विकास का विचार करने को ही तैयार नहीं है तो क्यों न अपने उत्तरोत्तर और तीव्रगति के विकास के लिये नया मार्ग खोजा जाय।
संयोग या सौभाग्यवश जिस समय इस अंचल में उपेक्षा का यह दंश फैल रहा है ठीक उसी समय निकट पड़ोस में नये राज्य के गठन की संभावनायें जन्म ले रही हैं वह भी ऐसे नये राज्य की, जिसका अंग रह कर पूर्व में यह क्षेत्र विकास की सीढ़ियां लांघने की तैयारी कर रहा था ठीक उसी समय इस क्षेत्र को अपने पुराने राज्य से प्रथक कर एक ऐसे नये राज्य का अंग बना दिया गया जिसकी विशालता अपने आप में उस नये प्रदेश के विकास में बाधक थी।
एक नये प्रदेश छत्तीसगढ़ के गठन के बाद भी उस प्रदेश की विशालता में कोई अंतर नहीं आया। नवगठित छत्तीसगढ़ विकास के नये नये सोपान तय कर रहा है, वहीं राजनैतिक नेतृत्व के विद्यमान होने के बावजूद यह अभागा अंचल आज भी संभाग तक बनने को तरस रहा है, तब विकास के अन्य सोपान की कल्पना भी मूर्खता से कम नहीं मानी जा सकती।
यह सर्वविदित है कि विकास के लिये राजनैतिक सक्षम नेतृत्व की उपलब्धता प्रथम आवश्यकता होती है जो इस क्षेत्र में पर्याप्त मौजूद है। उसके बावजूद विकास का सपना साकार न होना समझ से परे है। ऐसी स्थिति में जनता को स्वयं अपने विकास की चिंता करना स्वाभाविक हो जाता है। यही कारण है कि प्रदेश सरकार के साथ साथ समूची राजनैतिक बिरादरी से लगातार उपेक्षा और तिरस्कार की शिकार हो रही इस अंचल की जनता ने अपने विकास का बीड़ा स्वयं उठाने का संकल्प लिया है और उसका सबसे उत्तम उपाय इस अंचल के लोगों को नये राज्य में संविलियन दिखाई दे रहा है।
परिणामस्वरूप इस अंचल की आम जनता अब और अधिक विलंब किये बिना अपने विकास की कल्पना को मूर्तरूप देेने के लिये पड़ोसी विदर्भ राज्य की मांग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में शामिल होने का साहसिक निर्णय लेने पर मजबूर हो जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

दिनेश राय मांग सकते हैं भाजपा के लिए वोट!

दिनेश राय मांग सकते हैं भाजपा के लिए वोट!

रजनीश की टिकिट लगभग तय, भाजपा का कमजोर प्रत्याशी होगा केवलारी विधानसभा से

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। सिवनी जिले से कांग्रेस ने केवलारी विधानसभा से पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के पुत्र रजनीश सिंह का नाम लगभग तय कर लिया है। उनका नाम बड़े नेताओं ने एक सुर में अकेला ही दिया है, जिससे लग रहा है कि उनकी टिकिट पक्की है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी को लग रहा है कि सिवनी विधानसभा में निर्दलीय रहकर कांग्रेस के प्रत्याशी प्रसन्न चंद मालू को हराने वाले दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने जिले में भाजपा के लिए वोट मांगे तो भाजपा को जबर्दस्त बढ़़त मिल सकती है।
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि हाल ही में बड़े नेताओं की रायशुमारी के उपरांत प्रदेश में छः दर्जन नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। इन 72 नामों की फेहरिस्त में विधायकों के साथ ही साथ एक हजार से कम अंतर से हारे प्रत्याशियों के नाम भी शुमार हैं। इसमें सिवनी जिले के केवलारी से हरवंश सिंह ठाकुर के सुपुत्र रजनीश सिंह का नाम केवलारी से अकेला गया है, जिससे लग रहा है कि उनकी टिकिट पक्की ही है।

हुकुम बन सकते हैं रजनीश के लिए सिरदर्द
ज्ञातव्य है कि केवलारी से रजनीश सिंह को टिकिट देने की स्थिति में कुंवर शक्ति सिंह द्वारा निर्दलीय रूप से मैदान में उतरने की हुंकार भरी गयी थी। अगर वे अपने वचन के अनुसार केवलारी में रजनीश सिंह के खिलाफ खड़े हो जाते हैं तो रजनीश सिंह को केवलारी से चुनाव लड़ने में ही पसीना आ सकता है। वहीं दूसरी ओर केवलारी से सालों से कांग्रेस को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले बसंत तिवारी की उपेक्षा भी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है।

दिया जा सकता है लाल बत्ती का लालीपॉप
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि केवलारी में रजनीश सिंह की राह आसान करने हर संभव कोशिश की जाएगी। कांग्रेस में उनको भीतराधात का सामना न करना पड़े, इसके लिए कांग्रेस के आला नेताओं द्वारा बसंत तिवारी, कुंवर शक्ति सिंह आदि को प्रदेश में सरकार बनने की स्थिति मेंलाल बत्ती की लालीपॉप थमायी जा सकती है।

कमजोर प्रत्याशी उतारेगी भाजपा!
इसके साथ ही साथ ऊपरी स्तर पर अब यह तिकड़म चल रही है कि केवलारी विधानसभा से भाजपा द्वारा डॉ.ढाल सिंह बिसेन के स्थान पर किसी कमजोर प्रत्याशी को रजनीश सिंह के सामने उतारा जाए, जिससे रजनीश आसानी से चुनाव निकाल सकें। वहीं डॉ.ढाल सिंह बिसेन को बालाघाट लोकसभा की टिकिट देने की पेशकश कर पार्टी उन्हें मना सकती है। इसका कारण यह भी है कि बालाघाट के वर्तमान सांसद के.डी.देशमुख विधानसभा में दांव आजमाना चाह रहे हैं।

दिनेश राय का भाजपा में जाना तय
इधर, भाजपा मुख्यालय में चल रही बयार के अनुसार भाजपा के शीर्ष नेता अरविंद मेनन इन दिनों नगर पंचायत लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय से पूरी तरह इत्तेफाक रख रहे हैं। अरविंद मेनन के करीबी सूत्रों का कहना है कि दिनेश राय द्वारा अपनी भाजपाई सीढ़ी (संभवतः शिवराज सिंह चौहान केबिनेट के एक मंत्री, जो संभवतः उनके बिजनेस पार्टनर भी हैं) के जरिए अरविंद मेनन को पूरी तरह शीशे में उतारा जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि दिनेश राय ने पिछले विधानसभा चुनावों में अपना खुद का परफार्मेंस, लखनादौन नगर पंचायत चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी का ही नाम वापस लेना, उनकी माता श्रीमती सुधा राय की ऐतिहासिक फतह आदि के बारे में सविस्तार अरविंद मेनन को बताया है।

दिनेश के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं मेनन
भाजपा के एक आला नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर साई न्यूज से चर्चा के दौरान कहा कि अरविंद मेनन को दिनेश राय ने इस तरह बाहुपाश में लिया है कि वे दिनेश राय के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं। कोई अगर दिनेश राय की शिकायत लेकर भी जाता है तो अरविंद मेनन यह कहकर भगा देते हैं कि सिवनी वालों का काम सिर्फ और सिर्फ शिकायत करना है।

कप प्लेट तब्दील हो जाएगा फूल में
उक्त नेता ने यह भी बताया कि अरविंद मेनन को यह घुटी पिलाई गई है कि पिछली बार दिनेश राय को लगभग तीस हजार वोट मिले थे। उनका चुनाव चिन्ह कप प्लेट था, इस बार अगर उन्हें टिकिट दी गई या उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट मांगे तो कप प्लेट पर डलने वाले सारे वोट कमल के फूल के वोट में तब्दील हो जाएंगे।

जमीनी हकीकत से अनजान!
उक्त नेता ने यह भी कहा कि शायद अरविंद मेनन सहित आला नेता जमीनी हकीकत से अनजान ही हैं। दरअसल, पिछली बार कप प्लेट को लगभग तीस हजार वोट इसलिए मिल गए थे, क्योंकि उस समय भाजपा की टिकिट सिटिंग एमएलए नरेश दिवाकर के बजाए तत्कालीन सांसद श्रीमती नीता पटेरिया को दी गई थी, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से पहले यह सीट एनसीपी को समझौते में दी जाने वाली थी, बाद में यहां से प्रसन्न चंद मालू को मैदान में उतारा गया था। दोनों ही चेहरों से कांग्रेस और भाजपा के लोग बुरी तरह खफा थे। यही कारण था कि कांग्रेस और भाजपा के अंदर भीतराघात चरम पर पहुंचा और कांग्रेस के प्रत्याशी की जमानत जप्त हो गई थी तथा भाजपा को इस क्लीन सीट को निकालने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा था।

टिकिट मिलेगी या नहीं, फैसला जल्द
वहीं, भाजपा के एक आला पदाधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि दिनेश राय को भाजपा में शामिल करने की घोषणा किसी भी क्षण की जा सकती है। अभी इस बात पर विचार चल रहा है कि दिनेश राय को अगर भाजपा में शामिल किया जाता है तो उन्हें टिकिट दी जाए अथवा नहीं। भाजपा के आला नेता दिनेश राय को एक स्थापित और बड़ा नेता मान रहे हैं। हो सकता है कि इन चुनावों में भाजपा दिनेश राय का उपयोग कर उन्हें बालाघाट लोकसभा से टिकिट देने का प्रलोभन दे दे।

अगर मिली तो रायशुमारी. . .

उधर, सिवनी से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से अय्यूब कुरैशी ने बताया कि सिवनी भाजपा में भी इस बात को लेकर मंथन आरंभ हो गया है। भाजपाईयों का कहना है कि अगर दिनेश राय को भाजपा में शामिल कर टिकिट दी जाती है तो पिछले दिनों हुई रायशुमारी का क्या औचित्य रह जाएगा, क्योंकि रायशुमारी में दिनेश राय का नाम ही सामने नहीं आया है। कार्यकर्ताओं में चल रही चर्चाओं के अनुसार अगर ऐसा हुआ तो यह कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात होगा और हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ता त्यागपत्र भी दे सकते हैं।

प्राईवेट प्रेक्टिस पर प्रतिबंध व आईएमए का रूदन!

प्राईवेट प्रेक्टिस पर प्रतिबंध व आईएमए का रूदन!

(शरद खरे)

सरकार ने शासकीय चिकित्सकों की प्राईवेट प्रेक्टिस पर प्रतिबंध क्या लगाया, इलाज के नाम पर मरीजों का गला रेतने वाले सरकारी चिकित्सकों की सांसे थमती नजर आ रही हैं। सरकारी चिकित्सक का काम क्या है? वह किस बात की मोटी पगार हर माह लेता है? जनता के हित में जारी किए गए सरकारी आदेश के खिलाफ इंडियन मेडीकल एसोसिएशन और चिकित्सा अधिकारी संघ ने रूदन आरंभ कर दिया है।
आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में जिस दिन ये चिकित्सक अध्ययन हेतु जाते हैं सबसे पहले इन्हें एक कसम दिलवाई जाती है। वह कसम क्या होती है? उसका क्या मतलब होता है? उसका पालन जीवन के हर मोड़ पर करने का वादा करते हैं ये चिकित्सक। यह इसलिए क्योंकि मानव जीवन बेशकीमती है, और इसे हर हाल में बचाना चिकित्सक का पहला दायित्व होता है। बावजूद इसके जैसे ही ये चिकित्सक सरकारी नौकरी मेें आते हैं वैसे ही ये सरकारी पगार के साथ ही साथ निजी चिकित्सा को अपना मूल कर्तव्य मान लेते हैं।
सिवनी जिले में सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त दुरूस्त हुआ करती थीं, इस बारे में प्रौढ़ हो रही पीढ़ी बेहतर जानती होगी। जबसे सुश्री विमला वर्मा को षणयंत्र के तहत कांग्रेस के ही नेताओं ने सक्रिय राजनीति से किनारा कर घर बिठाया है तबसे सिवनी जिला विकास में पिछड़ने लगा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही साथ जबसे सिवनी में सियासी कमान हरवंश सिंह ठाकुर के हाथों में आई सिवनी में जनसेवा के मायने बदलकर स्वयंसेवा होकर रह गई।
संभवतः यही कारण था कि सिवनी में चिकित्सकीय सुविधाएं बाबा आदम के जमाने में चली गईं। चिकित्सकों का सिवनी से मोह भंग होने लगा। एक वाक्ये का जिकर यहां लाजिमी होगा। डॉ.एस.के.श्रीवास्तव जैसे बेहतरीन चिकित्सक जो जिला चिकित्सालय की शान हुआ करते थे, को सियासी आकाओं की सरपरस्ती में उस वक्त के स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने इस कदर प्रताड़ित किया कि उन्होंने सिवनी से अपना तबादला भोपाल करवा लिया। इसके बाद भी आला अधिकारियों का दिल नहीं भरा, उन्हें रिलीव नहीं किया गया। बाद में उन्होंने अपने सियासी संपर्कों के सहारे तत्कालीन जिला कलेक्टर मोहम्मद सुलेमान पर दबाव बनाया और यहां से बिदाई ली।
इसके बाद सिवनी विधायक रहे नरेश दिवाकर और वर्तमान विधायक श्रीमती नीता पटेरिया ने सिवनी जिला चिकित्सालय के लिए शायद ही कुछ किया हो। सिवनी में बर्न यूनिट है, आईसीसीयू है, दोनों ही का अस्तित्व स्वास्थ्य संचालनालय में कहीं नहीं है। अब चूंकि ऊपर इसका अस्तित्व नहीं है, इसलिए इसके लिए अलग से स्टाफ नहीं है। एसटबलिशमेंट में इसका उल्लेख नहीं होने से अलग से तैनाती भला कैसे होगी? क्या इस बात से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनिभिज्ञ हैं? जाहिर है नहीं?
कितने आश्चर्य की बात है कि सिवनी का यह सौभाग्य भी है कि दो विधायकों के पति सिवनी में चिकित्सक हैं और सरकारी तैनाती में भी हैं, फिर भी सिवनी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अत्याधुनिक होने के स्थान पर बाबा आदम के जमाने की हैं। जिसका जो मन आ रहा है वह कर रहा है। सिवनी में ट्रामा यूनिट का निर्माण हो रहा है। ट्रामा यूनिट किसके लिए होता है? इसे कहां बनना चाहिए, इस बारे में भी चिकित्सा स्टाफ मौन ही है।
देश की राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरज़ंग अस्पताल के मध्य भगवान वर्धमान ट्रामा सेंटर है। इसे रिंग रोड से सटाकर ही न केवल बनाया गया है वरन् इसमें प्रवेश के लिए सड़क भी सीधी प्रथम तल तक ले जाई गई है। ऐसा इसलिए कि कोई भी दुर्घटना के घायल को बिना किसी विध्न के तत्काल इस यूनिट में पहुंचाया जा सके। विडम्बना देखिए सिवनी में यह यूनिट घुमावदार रास्ते के बाद ओपीडी के पीछे बन रहा है जिला चिकित्सालय में! वस्तुतः इसे सड़क के किनारे ही बनाया जाना चाहिए था।
वैसे भी यह जवाबदेही एनएचएआई की है कि वह सिवनी में एक ट्रामा यूनिट की संस्थापना करे। एक बार फिर हम अपने आपको असहाय पाते हैं। सियासी नुमाईंदों की नपुंसकता का नतीजा है कि आज हमारे पास एक के बजाए दो सांसद हैं। फिर भी वे संसद में सिवनी की सड़क सुविधा या चिकित्सा सुविधा जो केंद्र से जुड़ी हैं को उठाने में कतराते हैं, कि कहीं महाकौशल के कांग्रेस के क्षत्रप उनसे नाराज न हो जाएं।

बहरहाल, आईएमए और चिकित्सा अधिकारी संघ को गुहार लगाना है तो वह यह कहे कि हम घरों पर मरीजों को निःशुल्क देखेंगे क्योंकि हमें सरकार तन्ख्वाह दे रही है। साथ ही साथ जिला चिकित्सालय को आईपीएचएस के मानकों के हिसाब से तैयार किया जाए। संघ की विज्ञप्ति पढ़कर कोई भी हंस देगा, क्योंकि इसमें डॉ.एच.पी.पटेरिया के बतौर अध्यक्ष हस्ताक्षर हैं। डॉ.पटेरिया की पत्नि श्रीमती नीता पटेरिया सांसद रही हैं और वर्तमान में विधायक हैं। बावजूद इसके वे खुद मांग कर रहे हैं कि चिकित्सालयों को सुसज्जित किया जाए। अगर वे वाकई ऐसा चाह रहे होते तो श्रीमती नीता पटेरिया और सीएमओ वाय.एस.ठाकुर की पत्नि श्रीमती शशि ठाकुर सिवनी की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर विधानसभा को सर पर उठा चुकी होतीं, वस्तुतः भाजपा के राज में अब सरकारी कर्मचारी भी विज्ञप्ति जारी करने में माहिर हो चुके हैं, जमीनी हकीकत से उन्हें कोई लेना देना नहीं है।