सोमवार, 7 नवंबर 2011

टीम राहुल आ चुकी है फुल फार्म में

टीम राहुल आ चुकी है फुल फार्म में

सोनिया जुंडाली को ढकेला जा रहा है पार्श्व में

अहमद पर भरोसा जताते युवराज

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस की नजरों में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी ने अब कांग्रेस की कमान अपने हाथों में लेना आरंभ कर दिया है। सियासी बिसात पर अब सोनिया की किचिन कैबनेट गुजरे जमाने की बात होने में देर नहीं लगने वाली है। राहुल गांधी की दो बैसाखियों के तौर पर राजा दिग्विजय सिंह के उपरांत अब सोनिया के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल अप्रत्याशित तौर पर उभर कर सामने आए हैं।

कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेने का प्रयोग उत्तर प्रदेश के चुनावों से किया जा रहा है। इसके अलावा पंजाब और उत्तराखण्ड पर भी टीम राहुल पूरी तरह चौकस नजर रखे हुए है। बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में कांग्रेस के चाणक्य रहे कुंवर अर्जुन सिंह के अवसान के उपरांत इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के चाणक्य की भूमिका में नजर आने वाले कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह पहले से ही राहुल गांधी के अघोषित राजनैतिक गुरू की भूमिका में आ चुके हैं।

राजनैतिक प्रबंधन (पालीटिकल मेनेजमेंट) और संक्रमण काल प्रबंधन (क्राईसिस मेनेजमेंट) के लिए युवराज राहुल गांधी ने इस बार अप्रत्याशित तौर पर अहमद पटेल पर भरोसा जताया है। अहमद पटेल को छोड़कर कांग्रेस में सोनिया के दरबारी इस बार हाशिए पर ही नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी इस बार अपेक्षाकृत युवाओं पर ज्यादा भरोसा करते दिख रहे हैं।

युवराज राहुल के साथ इस समय सबसे ज्यादा मीनाक्षी नटराजन, सचिन पायलट, प्रदीप जैन, अशोक तंवर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जतिन प्रसाद, संजय निरूपम, जितेंद्र सिंह, परवेज हाशिमी, रवनीत सिंह, आर.पी.एन.सिंह, जितेंद्र सिंह जैसे युवा सक्रिय और प्रभावी भूमिका में नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयोग के बाद युवराज की ताजपोशी का वक्त मुकर्रर किया जाएगा।

लालू का बिहार से मोह भंग

लालू का बिहार से मोह भंग

पश्चिम दिल्ली से चुनाव लड़ने की तैयारी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। बिहार की सत्ता से बाहर किए गए इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू प्रबंधन गुरू लालू प्रसाद यादव काफी समय से बिहार के परिदृश्य से नदारत हैं। हाालत देखकर लोग कहने लगे हैं कि पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का बिहार से पूरी तरह मोह भंग हो चुका है। लगातार दूसरी बार बिहार की सत्ता से बाहर राजद अब केंद्र में भी मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है।

गौरतलब है कि चारा घोटाला के मुख्य आरोपी लालू प्रसाद यादव को जब मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारा गया था, तब उन्होने अपनी अर्धांग्नी राबड़ी देवी को कुर्सी पर बिठा दिया था। राबड़ी देवी ने बिहार में लालू प्रसाद यादव की परछाईं बनकर राज किया। इसके बाद लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री बने और साथ ही साथ उन्होंने स्वयंभू प्रबंधन गुरू बनकर रातों रात घाटे में जा रही भारतीय रेल को कथित तौर पर पटरी पर लाकर हजारों करोड़ रूपए के लाभ में ला दिया था।

पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव की हरकतों से लगने लगा है कि मानों उन्होंने बिहार से नाता तोड़ने का मन बना लिया हो। मौका चाहे उनके अपने जन्म दिवस का हो, दीपोत्सव का या फिर बिहारियों के महापर्व छठ पूजा का, हर बार लालू बिहार से दूर रहे। उन्होंने अपना ज्यादा समय दिल्ली में ही बिताया। लालू के करीबी सूत्रों की मानें तो वे अब पश्चिम दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में पूर्वांचली विशेषकर बिहारी मतदाताओं की तादाद अधिक है।

आदिवासियों की जमीन हड़पने के लगे हैं आरोप!

0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 8

आदिवासियों की जमीन हड़पने के लगे हैं आरोप!

जमीन अधिग्रहण में जादू दिखा रहा कंपनी प्रबंधन

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में बिजली की कमी और क्षेत्र के विकास के लिए सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में स्थापित होने वाले थापर गु्रप ऑफ कंपनी के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट में आदिवासियों के साथ धोखा किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। आदिवासियों की जमीन खरीदने के साथ किए जाने वाले समझौते के मामले में कंपनी प्रबंधन मौन ही नजर आ रहा है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा आवश्यक और निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टि कर ली गई है कि झाबुआ पावर लिमिटेड की प्रस्तावित विद्युत परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। इस परियोजना से क्षेत्र का किस तरह का, कैसा और कितनी समयावधि में विकास होगा इस बारे में भी शिवराज सिंह चौहान ने मौन ही साध रखा है।

झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा ब्रितानी हुकुमत के दौरान अखण्ड भारत पर शासन करने वाले अंग्रेाजों द्वारा बनाए गए भू अर्जन अधिनियम 1894 की धारा 41 के अंतर्गत विहित प्रावधान के अनुरूप अनुबंध निष्पादित किया है। अंग्रेजों के समय भारतीयों से जमीन अधिग्रहण के दौरान हिन्दुस्तानियों को कम से कम फायदा होने की गरज से कानून बनाए गए थे। भारत गणराज्य की स्थापना के बाद आज भी देश में अनेक कानून की कंडिकाएं उन्हीं के मुताबिक जस की तस ही हैं।

जबसे झाबुआ पावर लिमिटेड ने सिवनी जिले के घंसौर में कदम रखा है उसके बाद से आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में आदिवासियों की जमीन पर लोगों की निगाहें गड़ गईं हैं। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार कंपनी ने आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनकी जमीन हड़प ली है। भोले भाले आदिवासी अब कंपनी प्रबंधन के आगे पीछे घूमकर उन लुभावने प्रस्तावों को पूरा करवाना चाह रहे हैं तो उन्हें झिड़की के अलावा और कुछ नहीं मिल रहा है।

(क्रमशः जारी)

मीडिया को लालच देने की तैयारी में मनमोहन

बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 20

मीडिया को लालच देने की तैयारी में मनमोहन

सरकारी मकानों में पत्रकारों की हिस्सेदारी ज्यादा करने का प्रस्ताव

मीडिया को धमकाने की भी है कार्ययोजना

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह अपनी कुर्सी बचाने के लिए अब आर पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं। मनमोहन सिंह जानते हैं कि अगर मीडिया उनके खिलाफ हो गया तो उनकी रूखसती पर सील लग जाएगी और वे अपने आप को बचा नहीं पाएंगे। यही कारण है कि मनमोहन सिंह जुंडाली ने अब प्रेस को बाय हुक ऑर बाय कुक मैनेज करने का प्रयास आरंभ कर दिया है। पत्रकारों को लुभाने के लिए सरकार जल्द ही अनेक प्रयास करती नजर आएगी।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) में आवासों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अस्तित्व मे आया है। पीआईबी में आवासों की संख्या साठ से बढ़ाकर सौ की जाना प्रस्तावित है। मतलब साफ है कि चालीस पत्रकारों को जल्द ही रियायती दरों पर घर देने का वायदा किया जाएगा।

पत्रकारों को वश में करने के बाद मीडिया घरानों पर मनमोहन सिंह अपना अंकुश लगाएंगे। पीएमओ के सूत्रों ने यह भी कहा कि पत्रकारों को काबू में करने के उपरांत मनमोहन सिंह इनके नियोक्ताओं की कालर पकड़कर धमकाने का जतन करेंगे। मीडिया घरानों द्वारा मीडिया की आड़ में किए जाने वाले रियल स्टेट और अन्य व्यवसाय पर भी सरकार की नजर है। सरकार द्वारा मल्टी मीडिया संचालन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही साथ लंबी अवधि के लिए दिए गए पट्टों को भी समाप्त किया जा सकता है।

(क्रमशः जारी)

आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया द्वारा ठगी

एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  16

आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया द्वारा ठगी

डायलर ट्यून भी अपने आप हो रही इंस्टाल

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मशहूर उद्योगपति आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया अपने उपभोक्ताओ के साथ ठगी कर रही है, उक्ताशय की शिकायत निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता आईडिया कंपनी के एक उपभोक्ता ने सार्वजनिक तौर पर लगाए हैं। इंटरनेट पर पड़ी एक शिकायत में इस बात का खुलासा किया गया है। इस शिकायत में कहा गया है कि उसके पैसे उसके खाते में डाले ही नहीं गए हैं। इसके साथ ही साथ डायलर ट्यून भी अपने आप ही इंस्टाल होना और उसके प्रतिमाह पैसे कटने की बात भी बताई जा रही है।

शिकायत में कहा गया है कि तीन जून को आईडिया मोबाइल नम्बर 9616501364 पर 25 रुपये का ई- टॉप अप डलवाया गया और कंपनी की तरफ़ से जवाब आया कि 23 रुपये 6 पैसे उपलब्ध करा दिए गए है। जब की वास्तविक अकाउंट में एक भी रुपया नही आया। कस्टमर केयर से बात करने पर बताया गया की सर्वर डाउन होने कारण आपके अकाउंट में 24 घंटे में रुपया आ जाएगा।

24 घंटे व्यतीत हो जाने के बाद कंपनी के कस्टमर केयर ने बताया की आप के मोबाइल में टॉप अप के बजाये टैरिफ वाउचर डाल दिया गया है जबकि वास्तव में मोबाइल अकाउंट में टैरिफ वाउचर भी नही डाला है और कंपनी के कस्टमर केयर पर टेलीफोन मिलाने पर कंप्यूटर टेप का उत्तर यह आता है की कस्टमर केयर के सभी अधिकारी व्यस्त है अभी आप की बात सम्भव नही है। इस तरह आदित्य बिरला की कंपनी आईडिया अपने उपभोक्ताओ के साथ धोखा-धडी कर रही है जिन - जिन लोगो ने प्राइवेट कंपनियों के सिम ले रखे है उनके साथ यह बड़ी - बड़ी कंपनिया धोखा - धड़ी फ्राड कर रही है। केन्द्र की कांग्रेस सरकार इन्ही कंपनियों के चंदो से चुनी गई है इसलिए कोई कार्यवाही सम्भव नही हो पाती है।

देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनके मोबाईल पर अपने आप वह ट्यून जो दूसरे व्यक्ति के डायल करने पर घंटी के स्थान पर सुनाई देती है (डायलर ट्यून) अपने ही आप इंस्टाल हो जाती है, जिसका पैसा भी अपने ही आप कटना आरंभ हो जाता है। इतना ही नहीं मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियांे ने कुछ एसा भी सिस्टम बनाकर रखा हुआ है जिससे दो दो तीन तीन डायलर ट्यन अपने आप इंस्टाल हो जाती है और उससे पैसा कटने लगता है।

(क्रमशः जारी)

राहुल मनमोहन में ठनी!


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

राहुल मनमोहन में ठनी!
कांग्रेस के भविष्य के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह में लगता है ठन गई है। अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार की उदारीकरण की नीति राहुल को भा नहीं रही है। पिछले दिनों राहुल गांधी ने उदारीकरण की तल्ख शब्दों में आलोचना करने वाले जर्मनी के एक व्याख्याता थामस पोग को न्योता दिया। मौका था राजीव गांधी इंस्टीट्यूट आॅफ कंटेपरेरी स्टडीज में व्याख्यान का। गौरतलब है कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी इसके ट्रस्टी हैं। राहुल के द्वारा उदारीकरण के आलोचक को बुलाना अपने आप में इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मनमोहन सिंह उदारीकरण के खासे हिमायती हैं। वैसे भी मनमोहन सिंह की खामोशी से राहुल गांधी बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। देश भर से राहुल गांधी को सरकार और कांग्रेस के बारे में जो फीडबैक मिल रहा है वह उत्साहजनक कतई नहीं माना जा सकता है।

शिवराज बने भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक
जिन सरकारी कर्मचारियों पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को अगला चुनाव जितवाने का भरोसा है वे सरकारी कर्मचारी ही उनका सरेआम माखौल उड़वाने में जुट गए हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर एमपी की बेटियों को महिमा मण्डित करने के लिए सरकारी होर्डिंग्स लगवाए गए। इन होर्डिंग्स में एक अजीब ही नजारा देखने को मिला। सरकारी होर्डिंग में महान कवियत्रि सुभद्रा कुमारी चैहान, कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री स्व.जमुना देवी, भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, के साथ ही साथ टीनू जोशी को भी प्रदेश की गौरवशाली पुत्री का दर्जा दिया गया है। अब लोग हैरान हैं कि लोकतंत्र के लुटेरे का खिताब पा चुके आईएएस टीनू जोशी दंपत्ति को शिवराज सरकार भला रोल माडल क्यों बना रही है।

कमल को चुभने लगा शिव का त्रिशूल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान जब भी दिल्ली यात्रा पर गए और पत्रकारों से रूबरू हुए तब तब वे कमल चालीसा (केंद्रीय मंत्री कमल नाथ का गुणगान) करना नहीं भूले। बाद बाद में नेशनल हाईवे की दुर्दशा पर वे कमल नाथ के खिलाफ हो गए थे। मध्य प्रदेश सरकार का शायद ही कोई एसा मंत्री होगा जो कमल नाथ के खिलाफ बोला हो। इस बार कमल नाथ ने तो गजब ही कर दिया। अपने संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाड़ा में उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार सड़कों की बरबादी का रोना रोती है। केंद्रीय मंत्री रहते कमल नाथ ने शिवराज सिंह को बीस हजार करोड़ रूपए दिए थे। शिवराज चुप हैं, रक्षात्मक मुद्र में खड़े दिख रहे हैं। मतलब साफ है कि केंद्र की मदद को उन्होंने घोला और पी लिया है।

मराठा क्षत्रप ने कांग्रेस से बनाई दूर
केंद्र सरकार में भागीदार राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार इन दिनों सरकार और कांग्रेस को आड़े हाथों लिए हुए हैं। पंवार न जाने क्यों फिर से कांग्रेस के घुर विरोधियों के सतत संपर्क में हैं। सोनिया गांधी को विदेशी मूल का जतलाकर यह मुद्दा हवा में उछाल पंवार ने कांग्रेस से किनारा कर एनसीपी का गठन किया था। उस वक्त पंवार को पानी पी पी कर कोसने वाले सोनिया के निष्ठावान कांग्रेसी बाद में पंवार की देहरी चूमते नजर आए। महाराष्ट्र में सत्ता पर काबिज होना हो या फिर केंद्र सरकार में भागीदारी। सारे गिले शिकवे भुलाकर कांग्रेस ने पंवार को गले ही लगाया। पंवार के उस तीर का यह असर हुआ कि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद से काफी दूर हो गईं। अब पंवार एक बार फिर नई मुहिम पर हैं। नए समीकरणों में लगने लगा है कि अगले चुनावों में नया राजग और संप्रग से इतर नया गठबंधन अस्तित्व में आ ही जाएगा।

आरटीआई से घबराई कांग्रेस
देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस अपने विरोधियों से उतनी खौफजदा नहीं है जितनी की वह सूचना के अधिकार कानून से नजर आ रही है। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) के दबाव में सरकार ने आरटीआई को आनन फानन लागू तो कर दिया है, पर यह अब उसके गले की फांस बनती जा रही है। अरविंद केजरीवाल जिस तरह सरकार पर वार पर वार करते जा रहे हैं उससे सरकार बैकफुट पर ही नजर आ रही है। सोनिया गांधी नाराज हैं क्योंकि देश भर में आरटीआई को आजीविका का साधन भी बनाया जा रहा है। जिला स्तर पर आरटीआई एक्टिविस्ट किसी के खिलाफ आवेदन देकर बाहर ही बाहर मामला रफा दफा कर देते हैं। अब सरकार जिला स्तर पर भी आरटीआई के आवेदन लगाकर वापस लेने के मामलों की तहकीकात करती नजर आ रही है।

मीडिया के प्रति गड़करी का उमड़ता प्रेम
अध्यक्ष बनने के उपरांत मीडिया से सुरक्षित अंतर ठेवाकी राजनीति करने वाले भाजपा के सरताज नितिन गड़करी अब मीडिया से गलबहियां डालने उतारू दिख रहे हैं। दीपावली मिलन समारोह में गड़करी पत्रकारों से चाहे वह छोटा हो या बड़ा सबसे समान भाव से मिलते दिखे। नागपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना चुके गड़करी चाह रहे हैं कि उनकी अध्यक्षता में ही लोकसभा चुनाव संपन्न हों। गड़करी का टर्म लोकसभा के पहले ही समाप्त हो रहा है। संघ की अगर मेहरबानी रही तो ही वे दूसरी पारी खेल पाएंगे। बहरहाल गड़करी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने दस किलो वजन घटा लिया है। मीडिया के लोग भी इस पार्टी का लुत्फ उठाते रहे क्योंकि पता नहीं गड़करी इसके बाद कब उन्हें न्योता दें।

मन के मंत्रियों ने हवा में उड़ाए 546 करोड़!
जनता के सेवक होने का दावा करते हैं सांसद विधायक। जनता की सेवा करने के बजाए जनता के द्वारा दिए गए करों से संचित राजस्व पर तबियत से एश करते हैं सांसद विधायक। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मण्डली ने जनता के गाढ़े पसीने की कमाई में से 546 करोड़ रूपए विदेश यात्रा में फूंक दिए। राजग सरकार ने पांच साल में मंत्रियों की विदेश यात्रा पर सिर्फ 268 करोड़ रूपए खर्च किए थे। प्रधानमंत्री डाॅ.मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक माने जाते हैं। उनके कार्यालय ने पीएमओ ने पांच साल में सिर्फ 85 करोड़ रूपए ही व्यय किए, यह आंकड़ा वैश्विक मंदी में मार झेल रहे गरीब भारत का है। यूपीए की दूसरी पारी में पीएमओ ने ज्यादा नहीं महज सत्तर करोड़ रूपए ही खर्च किए हैं। अभी दो साल का वक्त और बाकी है, चुनावों में यह आंकड़ा इस बार डेढ़ सौ करोड़ के उपर पहुंचने की उम्मीद है।

आड़वाणी की रथ यात्रा मतलब फ्लाप शो
7, रेसकोर्स रोड़ (प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को अपना आशियाना बनाने की तमन्ना दिल में रखने वाले भाजपा के तिरासी साल के उमर दराज नेता एल.के.आड़वाणी ने अब अपनी यात्रा का अंतिम दांव भी फेंका लेकिन वह फुस्स ही निकला। रथ यात्रा जहां जहां से भी गुजरी वहां वहां न तो वांछित भीड़ ही जुटी और न ही मीडिया ने आड़वाणी को ज्यादा तवज्जो ही दी। एक पंथ दो काज की नीति को अपनाकर आड़वाणी ने अपनी पुत्री प्रतिभा को स्थापित करने का जतन भी कर लिया और देश की नब्ज भी टटोल ली। यह सब करते समय वे खुद ही अपने कद को नीचे गिरा चुके हैं। भाजपा और संघ में चल रही चर्चाओं के अनुसार आड़वाणी ने इस यात्रा के जरिए अपनी पुत्री को जरूर स्थापित करने का प्रयास किया हो, पर उन्होंने अपनी इमेज खराब कर ली है।

टूजी स्पेक्ट्र घोटाले का सर्वाधिक फायदा आईडिया को!
आदिमत्थू राजा के कार्यकाल में हुए भारत गणराज्य के अब तक के सबसे बड़े टेलीकाम घोटाले में सबसे अधिक मलाई काटी है आदित्य बिरला कंपनी के स्वामित्व वाली मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया ने। इस मामले में एक सदस्यी जांच समिति के समक्ष अनेक सनसनीखेज बातें लाईं गईं जिससे जांच समीति इस निश्कर्ष पर पहुंची कि यह घोटाला मानो आईडिया के साथ एक अन्य मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी के इशारे पर ही किया गया हो। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले से एयरटेल और आईडिया जैसी टेलीकॉम कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा मिला है। इस मामले पर रिटायर जज शिवराज पाटिल की एक सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि टेलिकॉम मिनिस्ट्री के मनमाने फैसलों से भारती एयरटेल और आइडिया सेल्युलर जैसे ऑपरेटरों को स्पेक्ट्रम हासिल करने में मदद मिली।

वाकई मजबूर लग रहे हैं मनमोहन
प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी के बीच अब चूहा बिल्ली की लड़ाई आरंभ हो गई है। घोटालों के ईमानदार संरक्षक बन चुके डाॅ.मनमोहन सिंह से पीछा छुड़ाने की जद्दोजहद अब कांग्रेस में चल पड़ी है। उधर मनमोहन सिंह अपने आप को मजबूर और लाचार बताने से नहीं चूक रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने से अब तक वे अपने पसंद के नेताओं को मंत्री नहीं बना पए हैं। मनमोहन कई बार इशारों ही इशारों में इस बात को जतला भी चुके हैं। कांग्रेस में नरसिंहराव के बाद गैर नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) से हटकर प्रधानमंत्री बनने का रिकार्ड बना चुके मनमोहन काफी व्यथित ही नजर आ रहे हैं। जिस तरह मध्य प्रदेश के तत्कालीन निजाम राजा दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में रसातल में जा चुकी कांग्रेस अब उबर नहीं पा रही है, ठीक उसी तरह कांग्रेसियों का मानना है कि मनमोहन के नेतृत्व में देश भर में कांग्रेस की स्थिति कमोबेश यही होने के आसार बनने लगे हैं।

एमपी में दिखने लगा प्रभात!
प्रभात अर्थात सवेरा अब मध्य प्रदेश में दिखने लगा है। सख्त मिजाज भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने अंततः दिखा ही दिया कि उनका अनुशासन का डंडा, मुख्यमंत्री के ढुल मुल रवैए से कहीं ज्यादा कड़क है। उज्जैन में भाजपा उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने मुख्यमंत्री को घोषणाीवर कह मारा। फिर क्या था प्रभात झा ने तत्काल कार्यवाही कर शर्मा को चलता कर दिया। अगर वे एसा नहीं करते तो पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद होते। प्रभात झा ने परोक्ष तौर पर यह संदेश भी दे दिया है कि अप्रिय निर्णय लेने में वे शिवराज जैसे नहीं हैं। शिवराज के मंत्री बाबूलाल गौर, कैलाश विजयवर्गीय, राघव जी, सरताज सिंह आदि सरकार की कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिन्ह लगा चुके हैं। शिवराज तो अपने मंत्रियों की मुश्कें नहीं कस पाए पर प्रभात झा ने चमत्कारिक तरीके से शर्मा को रूखसत कर कड़ा संदेश दे डाला।

डीआईजी की बगावत, पागल करार!
उत्तर प्रदेश में अयोध्या को भगवान राम की जन्म स्थली के बतौर मानते हैं सनातन पंथी। कहते हैं राम की भूमि में राम राज्य रहा करता था। अब कहा जाने लगा है कि जबसे मायावती ने कमान संभाली है तबसे वहां राम का राज्य कभी का चला गया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के अग्निशमन विभाग (फायर सर्विस) में पदस्थ डीआईजी देवेंद्र दत्त मिश्र को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर पागल करार दे दिया गया। फायर विभाग में करोड़ों के घपले के आरोप लगाकर उन्होंने सनसनी फैलाई तो उन्हें मानसिक बीमार करार दे दिया गया। दुबे ने सभी नस्तियों में प्रतिकूल टिप्पणियां कर मीडिया को अपना दर्द बताया। उप महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी ने जब इस तरह के संगीन आरोप लगाए तो उसकी जांच के बजाए उन्हें ही पागल करार दिया जाना मायाराज का नायाब नमूना ही माना जा रहा है।

सबसे बड़ी रंगोली में कांग्रेंस भाजपा का मिलन
कांग्रेस और भाजपा वैसे तो विरोधी पार्टियां हैं। कभी कभी एसे मौके आते हैं जब कांग्रेस और भाजपा एक ही मंच पर दिखाई पड़ते हैं। देश के हृदय प्रदेश में भगवान शिव का जिला है सिवनी। इसके जिला मुख्यालय में एक अजूबा हुआ। युवाओं ने स्थानीय दैनिक संवाद कुंज के सहयोग से पेंतालीस हजार वर्ग फुट में सबसे बड़ी रंगोली डाली। इस विशाल रांगोली को एशिया बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्डस के लिए नामांकित किया गया है। इसमें सिवनी की प्रमुख समस्याओं ब्राडगेज, फोरलेन, पेंच परियोजना आदि को बेहतरीन तरीके से रेखांकित किया गया। यह दर्शाया गया कि कांग्रेस और भाजपा की नूरा कुश्ती में किस तरह जिले के विकास की ये परियोजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। कांग्रेस और भाजपा के विधायक यहां मौजूद रहे किन्तु दोनों ही दलों के जनसेवकों को लेश मात्र भी शर्म नहीं आई कि वे किस तरह उन्हें मिले जनादेश का अपमान कर रहे हैं।

पुच्छल तारा
डीजल पेट्रोल के दामों में आग लगी हुई है। जब चाहे तब दाम बढ़ जाते हैं। वाहन चालक परेशान हैं पता नहीं सुबह उठें और दाम बढ़े मिलें। मध्य प्रदेश से शिवी कुमारी ने एक मजेदार ईमेल भेजा है। शिवी लिखती हैं कि 23 रूपए के पेट्रोल पर 46 रूपए का कर आहूत किया है केंद्र और राज्य सरकारों ने। आम आदमी की तो कमर ही टूट चुकी है इससे। आश्चर्य तो इस बात का है कि मूल कीमत से दोगुना टेक्स लगाने के बाद भी तेल कंपनियां घाटे में कैसे हो सकती हैं। भारत गणराज्य में किसी विश्वद्यालय को इस बारे में शोध या पीएचडी अवश्य ही करवाना चाहिए।

रविवार, 6 नवंबर 2011

प्रणव की राहुल भक्ति के निहितार्थ

प्रणव की राहुल भक्ति के निहितार्थ

दिग्गी राजा का स्थान लेना चाह रहे प्रणव

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी इन दिनों राहुल गांधी के लिए हनुमान बने हुए हैं। राहुल गांधी को अगला वजीरे आजम बनवाने के प्रणव के बयानों से सियासी हलचल मच गई है। कांग्रेस के नेता ही चतुर सुजान प्रणव दा के इस तरह के बयानों के निहितार्थ सियासी गलियारों में खोजे जाने लगे। प्रणव मुखर्जी ने वैसे भी रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन पर कब्जा जमाने की अपनी अनिच्छा जाहिर की जा चुकी है।

सियासी गलियारों में अभी प्रणव के बयानों पर शोध चल ही रहा था कि खुद प्रणव मुखर्जी ने अपनी मंशा को इशारों ही इशारों में जाहिर कर दिया। कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के सूत्रों का कहना है कि पिछली मुलाकात में प्रणव मुखर्जी ने सोनिया गांधी के सामने साफ कर दिया है कि अगर राहुल गांधी पार्टी का नेतृत्व या वजीरे आजम पद संभालते हैं तो वे राहुल के लिए चाणक्य की भूमिका निभाने को सहर्ष तैयार हैं।

गौरतलब है कि वर्तमान में राहुल गांधी के अघोषित राजनैतिक गुरू और चाणक्य की भूमिका में महासचिव राजा दिग्विजय सिंह हैं। दिग्विजय सिंह की शातिर चालों के आगे प्रणव मुखर्जी की एक नहीं चल पाती है। वैसे भी प्रणव दा ने सोनिया को कह दिया है कि वे राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति बनने में दिलचस्पी नहीं रख रहे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि सोनिया मैया को प्रसन्न करने के लिए प्रणव मुखर्जी ने भावावेष में यह तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी पीएम बनते हैं तो वे राहुल के नेतृत्व में वित्त या गृह मंत्री का पद भी संभालने को तैयार हैं।

सड़क मार्ग से ही ढुलेगा कोयला

0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 7

सड़क मार्ग से ही ढुलेगा कोयला

रेल मार्ग में लोडिंग अनलोडिंग है समस्या

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश की मशहूर थापर गु्रप ऑफ कंपनीज के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में डलने वाले पावर प्लांट के लिए कोयले की सप्लाई सड़क मार्ग से होगी या रेल मार्ग से इसमें संशय बरकरार है। रेल मार्ग में बार बार लोडिंग अनलोडिंग से बचने के लिए इसे सड़क मार्ग से ही कराए जाने पर विचार किया जा रहा है।

थापर गु्रप के मित्र राजनेता द्वारा इसके मार्ग प्रशस्त किए गए हैं। मूलतः यह कोयला अनूपपुर से घंसौर लाया जाना है। कहा जा रहा है कि यह बरास्ता कटनी, जबलपुर लखनादौन लाया जाएगा। संभवतः यही कारण है कि रीवा से लखनादौन तक के नेशनल हाईवे के हिस्से को फोरलेन में तब्दील करने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।

झाबुआ पावर लिमिटेड के भरोसेमन्द सूत्रों का कहना है कि कंपनी द्वारा अन्त में सडक मार्ग से ही कोयले की सप्लाई की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके लिए बडे ट्रांसपोर्टर्स को भी तलाशा जा रहा है। आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला के इस प्रस्तावित पार प्लांट के लिए 32 लाख टन कोयला का परिवहन प्रतिवर्ष अनूपपुर से घंसौर तक होना प्रस्तावित है। हाल ही में रीवा से लखनादौन तक के राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक सात के हिस्से को भी फोल लेन में तब्दील किए जाने का प्रस्ताव आया है। कहा जा रहा है कि थापर ग्रुप ऑफ कम्पनीज के दवाब में आकर केन्द्र सरकार द्वारा इस मार्ग की मरम्मत और इसे चौडा करने की कार्ययोजना बनाई है।

सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) सदा ही एक बात का रोना रोती रहती है कि देश की सडकें उसके द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं बन पाती हैं, और जितना भार उन पर चलना चाहिए उससे कहीं ज्यादा भार परिवहन और पुलिस महकमे की कृपा से चलता है, इन परिस्थितियों में सडकों की दुर्दशा होना स्वाभाविक ही है। डर तो इस बात का है कि जब वर्तमान में लखनादौन से घंसोर मार्ग जर्जर हाल में है तब थापर ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के बरेला में प्रस्तावित संयन्त्र में लाखों टन कोयला परिवहन किया जाएगा तब तो अधमरी सडकों के धुर्रे उडने में समय नहीं लगेगा।

(क्रमशः जारी)

मीडिया पर कब्जा जमाने का ‘मन‘

बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 19

मीडिया पर कब्जा जमाने का मन

दिशाहीन हो चुकी है मनमोहन सरकार

बाजपेयी और इंदिरा के सिद्धांतों के बीच झूल रही मन सरकार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग सरकार पूरी तरह दिशाहीन होकर दौड़ रही है। जानकारों का कहना है कि मनमोहन सरकार न तो अटल बिहारी बाजपेयी के अनुरंजक दृष्टिकोण को ही अपना पा रही है और न ही प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी के सत्तावादी दृष्टिकोण को। यही कारण है कि आज सरकार में बुरी तरह भ्रम की स्थिति बन चुकी है। हर मोर्च पर विफल रही मनमोहन सरकार की भद्द हर जगह पिट रही है।

मनमोहन सरकार द्वारा मीडिया पर कब्जा करने की जुगत लगाई जा रही है। व्यवसायिक घरानों के बाद अब मीडिया घरानों की देहरियों पर कत्थक करते पत्रकारों को लुभाने के लिए सरकार द्वारा हर संभव कोशिश आरंभ हो गई है। मनमोहन के पास एक प्रस्ताव गया है जिसमें मीडिया की विभिन्न शाखाओं में क्रास होल्डिंग को गैरकानूनी बनाने का प्रस्ताव आया है। इससे इलेक्ट्रानिक न्यूज चेनल वाले अखबार नहीं चला पाएंगे और अखबार वाले चेनल नहीं चला पाएंगे।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री को मशविरा दिया गया है कि टीवी के घरानों के मालिकों को प्रलोभन देकर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया जाए और पत्रकारों को थोड़ा लोभ देकर अपने पक्ष में कर लिया जाए। वैसे भी अब पत्रकारिता को पेशा बनाने वालों में कार्पोरेट सोच और संस्कृति बुरी तरह हावी होती दिख रही है।

(क्रमशः जारी)

बिकने की तैयारी में आईडिया सेलुलर

एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  15

बिकने की तैयारी में आईडिया सेलुलर

दफ्रिका की कंपनी की है आईडिया पर नजर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी आयडिया सेलुलर अपना एक हिस्सा बेचने की तैयारी में है। इसके लिए उसके प्रतिनिधि दक्षिण अफ्रीका में एमटीएस के प्रमोटरों से बातचीत कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका की कंपनी एमटीएस से आयडिया के प्रतिनिधियों की काफी समय से बातचीत चल रही है। लेकिन अभी तक कुछ ठोस निकल कर नहीं आया है।

यद्यपि प्रत्यक्षतः तो आयडिया सेलुलर अपनी कंपनी का हिस्सा बिकने की खबरों का खंडन कर रही है फिर भी लेकिन जानकार सूत्रों ने बताया कि बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और इसमें कुछ ठोस शीघ्र ही निकल आएगा। एमटीएस ने भारत के कई राज्यों में अपना कामकाज शुरू कर दिया है लेकिन अभी तक कंपनी ठीक से अपने कदम नहीं जमा पाई है। इसलिए वह चाहती है कि किसी मजबूत कंपनी का कुछ हिस्सा खरीदकर अपने पैर जमाए।

आईडिया के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि दिखावे के चक्कर में आईडिया ने अपने एम्पलाईज को मोटा वेतन तो दिया जा रहा है किन्तु उसे उतना राजस्व नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों ने कहा कि आयडिया जमने के बावजूद उतना रेवेन्यू पैदा नहीं कर पा रही है। इसलिए वह कुछ हिस्सा बेचकर राजस्व इकट्ठा करना चाह रही है।

(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

हृदय प्रदेश में घट गई औसत आयु


हृदय प्रदेश में घट गई औसत आयु

केरल है औसत आयु के मामले में शिखर पर

एमपी में स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह लड़खड़ाईं

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। यूं तो स्वस्थ्य व्यक्ति की आयु एक सौ बरस से ज्यादा हो सकती है किन्तु रहन सहन और खान पान के चलते भारत गणराज्य में औसत आयु कम होती ही जा रही है। औसत आयु के मामले में भारत में यह आंकड़ा 63 साल पांच माह का मना गया है। देश में सबसे अधिक औसत आयु सत्तर के साथ केरल पहली पायदान पर है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में औसत आयु का आंकड़ा महज 58 साल पर ही आकर अटक गया है।

दीर्घायु हो, शतायु होजैसे आर्शीवाद भी अब कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। देश के हृदय प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह लड़खड़ा चुकी हैं। मध्य प्रदेश के जिला, संभागीय मुख्यालयों मे चिकित्सक सरकारी अस्पातालों से गायब हैं। जो थोड़े बहुत पदस्थ भी हैं वे भी अस्पताल के आसपास ही अपनी दुकानचला रहे हैं। सांसद विधायकों के नाक के नीचे यह सब हो रहा है और वे खामोशी के साथ सब कुछ देख सुन रहे हैं।

देश में औसत आयु साढ़े तिरेसठ साल की आंकी गई है। केरल में 70 तो पंजाब में 69 साल 4 माह, महाराष्ट्र में यह 67 साल दो माह, हिमाचल में 67 साल, हरियाणा और हरियाणा में छियासठ साल दो माह, कर्नाटक में 65 साल तीन माह, उत्तर प्रदेश और बंगाल में 65 साल नौ माह, आंध्र प्रदेश में 64 साल चार माह, गुजरात में 64 साल एक माह, राजस्थान में 62 साल, उड़ीसा में 59 साल 9 माह औसत आयु आंकी गई है। औसत आयु के मामले में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड फिसड्डी हैं, जहां औसत आयु महज 58 साल ही आंकी गई है।

मनमोहन और शिवराज में समानता!


मनमोहन और शिवराज में समानता!

सियासी हल्कों में दोनों को भ्रष्टाचार का ईमानदार संरक्षण किया जा रहा निरूपति

भ्रष्टाचार की गंगा के भागीरथी बने सिंहद्वय

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के अर्थशास्त्री और ईमानदार छवि के वजीरे आजम कांग्रेस के राज्य सभा सांसद डॉक्टर मनमोहन सिंह और हृदय प्रदेश के निजाम किसान पुत्र भाजपा के विधायक शिवराज सिंह चौहान के बीच असमानताएं तो सैकड़ों हैं किन्तु अब सियासी गलियारों में उनमें समानताएं खोजी जा रही हैं। एक समानता जो प्रमुखता के साथ सामने आई है वह है दोनों ही भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक के बतौर।

मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में जितने भ्रष्ट लोगों को संरक्षण दिया वह किसी से छिपा नहीं है। मनमोहन सिंह की ईमानदार छवि का लाभ उठाकर उनके सहायोगियों चाहे वे कांग्रेस के रहे हों या फिर सहयोगी दलों के, सभी ने तबियत से भ्रष्टाचार की गंगा बहाई। इस गंगा में सभी ने नहाया। इस गंगा को भ्रष्टाचार की धरती पर लाने वाले भागीरथी और कोई नहीं वरन् खुद वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह ही साबित हुए हैं।

उधर डम्पर कांड में अपनी साख पर बट्टा लगवा चुके शिवराज सिंह चौहान के सहयोगियों ने भी मध्य प्रदेश को खगल (जानवर जिस तरह हड्डी को चबा चबा कर खाता है) के खाया है। भ्रष्टाचार के सारे कीर्तिमान मध्य प्रदेश में टूटे हैं। लोकतंत्र के लुटेरे के बतौर आईएएस जोशी दंपत्ति ने शिवराज सिंह चौहान का सर नीचा करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी। कांग्रेस की कथित तौर पर रहस्यमयी चुप्पी (कांग्रेस भाजपा की नूरा कुश्ती) के चलते भ्रष्टाचार के न जाने कितने मामले दफन हो गए।

मध्य प्रदेश राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर पर प्रदेश भर में लगवाए गए होर्डिंग्स में निलंबित टीनू जोशी के चित्र चस्पा कर शिवराज सिंह सरकार ने साबित कर दिया है कि वह भ्रष्टाचार की ईमानदार संरक्षक है। गौरतलब है कि टीनू जोशी और उनके आईएएस पति अरविंद जोशी के पास अनुपात हीन आकूत दौलत मिली है। इसी भ्रष्ट जोशी दंपत्ति में टीनू जोशी को प्रदेश की गौरवशाली बेटी बताने की हिमाकत की है, शिवराज सिंह चौहान ने।

मुख्यमंत्री निवास के करीब अतिव्यस्ततम चौराहे पर लगे सरकारी होर्डिंग में महान कवियत्रि सुभद्रा कुमारी चौहान, कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री स्व.जमुना देवी, भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, के साथ ही साथ टीनू जोशी को भी प्रदेश की गौरवशाली पुत्री का दर्जा दिया गया है। इससे साफ जाहिर है कि शिवराज सिंह चौहान द्वारा भ्रष्टों की सरगना टीनू जोशी को रोल माडल बनाकर अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने की नसीहत दी जा रही है।

प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला जलेगा पावर प्लांट में


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 6

प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला जलेगा पावर प्लांट में

थापर ग्रुप के लिए सजेगा रीवा लखनादौन राजमार्ग

रेल्वे में लोडिंग अनलोडिंग की है समस्या

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश की ख्यातिलब्ध थापर गु्रप की सहयोगी कंपनी झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला में डाले जा रहे पावर प्लांट में अनूपपुर से प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला आपूर्ति किया जाएगा। वैसे तो कोलकता के दसवीं ओसी गांगुली सारनी, के मेकमेट हाउस की सातवीं मंजिल में मूल कार्यालय वाले झाबुआ पावर प्लांट ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में कोयले का परिवहन रेल मार्ग से होना दर्शाया है किन्तु कोयला ब्राडगेज से जबलपुर आकर फिर नेरो गेज से घंसौर पहंुचता है तो जबलपुर में लोडिंग अनलोडिंग में कंपनी की जेब ढीली हो जाएगी।

कंपनी की इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट में अनेक तकनीकि पेंच हैं, जिन्हें पूरी तरह से नज़र अन्दाज ही किया गया है। अव्वल तो यह कि अगर ब्राड गेज से कोयला अनूपपुर से ढुलकर जबलपुर आ भी गया तो जबलपुर के ब्राड गेज के यार्ड से उसे नेरो गेज के यार्ड तक कैसे लाया जाएगा। या तो उन्हें ब्राड गेज के यार्ड से नैरो गेज के यार्ड तक लाईन बिछानी पडेगी या फिर ट्रक के माध्यम स ेनैरो गेज तक ढोना पडेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में जब बालाघाट से जबलपुर अमान परिवर्तन का काम आरम्भ हो जाएगा तब नैरो गेज की पटरियां उखाड दी जाएंगी, एसी परिस्थिति में फिर कोयला परिवहन का वैकल्पिक साधन बच जाएगा सडक मार्ग। वैसे भी लोडिंग अनलोडिंग की प्रक्रिया झाबुआ पावर लिमिटेड के लिए काफी खर्चीली और समय की बरबादी वाली ही होगी।

उधर रेल्वे के सूत्रों का दावा है कि थापर गु्रप द्वारा अपने एक व्यसायी कम राजनेता मित्र के माध्यम से रेल्वे पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि जबलपुर से बालाघाट बरास्ता नैनपुर के रेल खण्ड का अमान परिवर्तन तत्काल जबलपुर के सिरे से आरंभ करवा दिया जाए ताकि झाबुआ पावर के कोयले के रेक सीधे घंसौर तक पहुंच सकें जिसमें उनका परिवहन व्यय कम हो सके। इसके लिए जबलपुर से घंसौर तक लाईन तुरंत ही डालने का काम भी आरंभ किया जाने वाला है।

घंसौर से जबलपुर के बीच जगह जगह पर स्लीपर भी गिरा दिए गए हैं। रेल्वे बोर्ड की हरी झंडी मिलते ही यह काम युद्ध स्तर पर जारी हो जाएगा। घंसौर से नैनुपर और बालाघाट तक का काम किस सन तक पूरा किया जा सकेगा इस मामले मं रेल्वे बोर्ड के सूत्र मौन हैं पर उनका कहना है कि थापर गु्रप के राजनैतिक और व्यवसायी मित्र ने रेल मंत्री पर इस काम को तत्काल अंजाम देने के लिए दबाव बना दिया है।

सूत्रों ने तो यहां तक कहा कि इस मामले में मण्डला सिवनी संसदीय क्षेत्र के सांसद बसोरी सिंह मसराम से भी रेल मंत्री पर दबाव बनवाया गया है, कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आदिवासी विकासखण्ड मुख्यालय घंसौर को तत्काल ही संभागीय मुख्यालय जबलपुर से रेल से जोड़ा जाए। घंसौर से नैनपुर तक का रेलखण्ड भी मसराम के संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है पर उसके लिए सांसद मसराम ने मौन ही साध रखा है। मसराम ने इस काम को नैनपुर वाले सिरे से आरंभ करवाने की बात पर भी जोर न दिया जाना आश्चर्यजनक ही माना जाएगा।

(क्रमशः जारी)

पहली बार मन से दिखाए पीएम ने कड़े तेवर


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 18

पहली बार मन से दिखाए पीएम ने कड़े तेवर

उत्तराधिकारियों को साईज में लाने की जुगत में मनमोहन

प्रणव, अंटोनी और चिदम्बरम को दी नसीहत

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अपनी रूखसती के पहले वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अब कड़े तेवर अपनाना आरंभ कर दिया है। मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए.के.अंटोनी और गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम को साईज में लाना आरंभ कर दिया है। मनमोहन सिंह के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर प्रणव, अंटोनी और चिदम्बरम का नाम सामने आ रहा है। इन तीनोें को एक सर्कुलर से बांधकर मनमोहन सिंह ने बाकी मंत्रियों को कड़ा संदेश देने का प्रयास किसा है।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि कैबनेट सचिव के माध्यम से केंद्रीय मंत्रीमण्डल के समस्त सदस्यों को भेजे गए सर्कुलर में कहा गया है कि सीसीपीए की बैठक की अध्यक्षता अब वहां मौजूद वरिष्ठतम मंत्री ही करेंगे। वर्चस्व की लड़ाई में मनमोहन सिंह ने रार और तेल फेंकते हुए यह नई व्यवस्था दी है। मनमोहन सिंह को यह खतरा है कि कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी कभी भी उन्हें 7, रेसकोर्स रोड़ (प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) से बाहर का रास्ता दिखा सकती है।

कहा जा रहा है कि सीसीपीए की बैठक में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृह मंत्र पलनिअप्पम चिदम्बरम और रक्षा मंत्री ए.के.अंटोनी आवश्यक तौर पर उपस्थित रहेंगे। इन परिस्थितियों में वरिष्ठता की जंग में ये नेता आपस में ही लहू लुहान हो जाएंगे। इस सर्कुलर के अनुसार चिदम्बरम, अंटोनी और प्रणव मुखर्जी को समकक्ष बता दिया गया है।

(क्रमशः जारी)

रीवेरीफिकेशन में सुस्ती का है आईडिया


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  14

रीवेरीफिकेशन में सुस्ती का है आईडिया

अस्सी फीसदी लोगों के दस्तावेज अधूरे!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आदित्य बिरला गु्रप की मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया ने रीवेरीफिकेशन में बेहद सुस्ती दिखाई है। रीवेरीफिकेशन के चलते आईडिया के हजारों यहां तक कि लाखों की तादाद में मोबाईल बंद होने की आशंका के चलते मोबाईल उपभोक्ताओं पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। दूरसंचार नियामक आयोग और दूरसंचार विभाग द्वारा रीवेरीफिकेशन में विलंब के कारण आईडिया की मुश्कें कसने का मानस बना लिया है।

देश के करोड़ों मोबाइल फोन ग्राहकों के लिए बुरी खबर है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि देश में करोड़ों मोबाइल फोन ग्राहकों की सर्विस कभीं भी बंद हो सकती है। ज्यादा परेशानी की बात देश के पूर्वाेत्तर राज्यों के ग्राहकों के लिए है। यहां के 1.65 करोड़ प्रीपेड मोबाइल धारकों में से करीब 80 फीसदी का कनेक्शन कभी भी कट सकता है। दरअसल री-वेरिफिकेशनप्रक्रिया के तहत प्रीपेड मोबाइल धारकों को जो दस्तावेज मोबाइल कंपनियों को मुहैया कराने थे उसकी समय सीमा समाप्त होनके के बाद भी अभी तक 80 फीसदी लोगों ने अपने दस्तावेज जमा नहीं कराए हैं।

सरकार के निर्देशों के मुताबिक री-वेरिफिकेशनके लिए जिन डॉक्यूमेंट्स की मांग की गई थी उसमें ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, शस्त्र लाइसेंस, फोटोयुक्त एवं पता के साथ डाकघर या बैंक की पासबुक शामिल हैं। लेकिन खासतौर पर पूर्वाेत्तर राज्यों के मोबाइल ग्राहक इन दस्तावेजों को जमा नहीं करवा पाए हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में देश के दूसरे हिस्सों के मोबाइल ग्राहकों ने भी इन दस्तावेजों को जमा नहीं करवाया है। जिसके चलते अब इन लोगों के मोबाइल कनेक्शन कभी भी काटे जा सकते हैं।

(क्रमशः जारी)