रविवार, 8 जनवरी 2012

मौसम की मार से उत्तर भारत कंपकपाया


मौसम की मार से उत्तर भारत कंपकपाया



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। बारिश, ओले, मवाठे और बर्फबारी ने देश को हाड गलाने वाली ठंड के आगोश में ला दिया है। देश भर में सप्ताहांत में लोग घरों में ही दुबके रहे। चारों ओर से शीतलहर चलने के समाचार आ रहे हैं। दिल्ली में कोहरे के चलते मानो जनजीवन थम सा गया हैं सड़क, रेल और विमान सेवाओं पर इसका जबर्दस्त प्रभाव पड़ा है। आने वाले दिनों में भी ठण्ड से निजात मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
राजधानी दिल्ली में भी रातभर बारिश के कारण शीतलहर ने शनिवार दिन में भी अपना पुरजोर एहसास कराया। धूप कुछ देर के लिए ही निकली। कहीं कम, कहीं ज्यादा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी बारिश हुई। कोहरे के चलते शनिवार को आइजीआइ एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन प्रभावित हुआ। 24 घंटे के दौरान 11 उड़ानें रद हुई, जबकि 86 विमान आधे से चार घंटे की देरी से रवाना हुए व उतरे। उड़ानें रद होने से हवाई यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शनिवार को आइजीआइ एयरपोर्ट पर पूरे दिन कोहरा छाया रहा। सामान्य दृश्यता 300 मीटर थी जबकि शाम में न्यूनतम दृश्यता 200 के करीब पहुंच गई। इस दौरान विमानों को सामान्य तरीके से उतारा गया। अन्य शहरों में खराब मौसम की वजह से आठ जबकि ऑपरेशन कारण से तीन उड़ानें रद हुईं। वहीं, कोहरे के चलते 13 व अन्य कारणों से 73 विमानों का संचालन देरी से हुआ। मुंबई, भोपाल, रांची, लखनऊ, कोलकाता, अमृतसर, चंड़ीगढ़ व रांची रूट के विमान सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
उधर कश्मीर घाटी में भारी वर्षा से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कश्मीर घाटी का आज तीसरे दिन भी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने की वजह से देश के बाकी हिस्सों से सड़क संपर्क कटा हुआ है। भारी हिमपात के कारण कल बिजली, पानी, इंटरनेट और संचार सेवाओं पर बुरा असर पड़ा।
 उधर, हिमाचल प्रदेश में कई हिस्सों में कल फिर हिमपात हुआ। शिमला, धर्मशाला, मैकलायडगंज, मनाली और डलहौज$ी में १५ से ३० सेंटीमीटर तक हिमपात हुआ। नूरपुर और कांगड़ा में ४० वर्ष के बाद कल बर्फ गिरी। उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित है। राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात जारी है।
देश के सीमांत जिलों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के दूर-दराज के इलाकों में हिमपात से कई सम्पर्क मार्ग बंद हो गए हैं और सैंकड़ों गांव का जिला मुख्यालयों से सम्पर्क कट गया है। इसके अलावा खराब मौसम का असर राज्य के कुछ अन्य प्रमुख राजमार्गों पर भी पड़ा है। बर्फबारी से जहां मसूरी और नैनीताल आने वाले पर्यटक और व्यवसायी खुश हैं, वहीं दूर-दराज के ऊंचाई वाले इलाकों में लोगों की मुसीबतें बढ़ गईं हैं।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और वादी कश्मीर के सभी प्रमुख हिल स्टेशन को बर्फबारी ने निहाल कर दिया है। सैलानियों की तो मानो मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई है। दूसरा पहलू यह है कि भारी बर्फबारी के कारण दुश्वारियां भी खड़ी हो गई हैं। कश्मीर में बर्फीले तूफान का खतरा बढ़ गया है। घाटी का सड़क एवं हवाई संपर्क भंग हो गया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सूरज बादलों और कोहरे की ओट लिए रहा। शीतलहर गलन बढ़ाती रही।
हिमाचल प्रदेश में पहाड़ के साथ निचले इलाके भी शनिवार को बर्फ से लद गए। शिमला, मनाली, चायल, कसौली, सिरमौर जिला के चूड़धार, चंबा, डलहौजी, बनीखेत और करीब 67 साल बाद कांगड़ा, देहरा, पालमपुर, नूरपुर, ज्वालामुखी, ऊना जिले के चिंतपूर्णी तथा हमीरपुर जिले के कई भागों में दो से तीन ईच तक बर्फ गिरी। मौसम विभाग ने अगले 36 घंटे के दौरान प्रदेश में भारी बर्फबारी व बारिश की चेतावनी दी है। राजधानी शिमला में सैलानियों ने हिमपात के बीच रिज मैदान, माल रोड, कुफरी व फागू में बर्फ के साथ खूब अठखेलियां कीं।
जम्मू-कश्मीर मेंलगातार हो रही भारी बर्फबारी के बाद अब बर्फीले तूफान का खतरा पैदा हो गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने तूफान की चेतावनी देते हुए लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है। श्रीनगर में हिमपात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोगों के घर, पेड़-पौधे सभी बर्फ में पूरी तरह ढक गए हैं। यहां चार से पांच इंच हिमपात रिकॉर्ड किया गया। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, युसमर्ग, दक्सुम, अहरबल, शोपियां, कुलगाम, गांदरबल, कंगन, बड़गाम, बारामूला, कुपवाड़ा, अफरवट, जवाहर सुरंग, पंचतरनी, अमरनाथ गुफा में पांच फीट बर्फ गिर चुकी है।
उत्तराखंड की चोटियों को बर्फ से ढक दिया तो सूबे के लगभग सभी निचले क्षेत्रों में बारिश दे डाली। कुमाऊं में मुनस्यारी, रानीखेत, कौसानी, नैनीताल व अल्मोड़ा में बर्फ गिरी है। नैनीताल में बर्फबारी के बाद अच्छी वर्षा हुई। बर्फबारी व वर्षा के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ठिठुरन बढ़ने के साथ ही बर्फबारी ने मुसीबत भी बढ़ाई है। गढ़वाल क्षेत्र बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धामों के साथ ही चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग जिलों की पहाड़ियां बर्फ से सज-संवर गई हैं। मंसूरी के आस-पास के क्षेत्र हिमाच्छादित हो गए हैं।
पहाड़ पर बर्फ ने मैदानी इलाकों में शीतलहर झोंक दिया है। बारिश ने ठिठुरन और बढ़ा दी है। मैदान में मौसम के बदले मिजाज का असर यह है कि न्यूनतम तापमान तो 3 से लेकर 5 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चढ़ रहा है। लेकिन अधिकतम तापमान भी 3 से लेकर 7 डिग्री सेल्यिस तक लुढ़क गया। नतीजतन गलन बढ़ गई है।
श्रीनगर से साई संवाददाता ने बताया कि भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-जम्मू हाइवे रविवार को लगातार तीसरे दिन बंद रहा, जबकि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) करीब 300 किलोमीटर इस लंबे हाइवे पर यातायात बहाल करने के लिए अपने कर्मचारियों व तंत्र के साथ रास्ते से बर्फ हटाने के काम में जुटा रहा।
संगठन के चीफ इंजिनियर ब्रिगेडियर टी. पी. एस. रावत ने कहा, कि राजमार्ग के पंथाल इलाके में शनिवार रात को हुई बर्फबारी के कारण बर्फ की करीब 15 फुट मोटी तह जम गई। हमने रविवार सुबह से इसे साफ करना शुरू किया। रावत ने कहा, कि तेज हवा के साथ हुई हल्की बर्फबारी के कारण बनिहाल क्षेत्र में सड़क पर बड़ी मात्रा में बर्फ एकत्र हो गई। हमने यहां भी राजमार्ग साफ करने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि रविवार दोपहर तक वे जम्मू और रामबान के बीच 150 किलोमीटर सड़क पर यातायात बहाल करने में कामयाब रहेंगे। रामबान से बनिहाल तक शेष हाइवे पर यातायात शाम तक बहाल हो जाने की उम्मीद है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक मार्ग अवरूद्ध ही था।
उधर, हिमाचल प्रदेश के जनजातीय व दुर्गम क्षेत्रों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। किन्नौर जिला देश के अन्य भागों से कट गया है। यहां बिजली-पानी की आपूर्ति बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 120 गांवों को जोड़ने वाले 44 संपर्क मार्ग बंद हैं। इन मार्गाे में हिमाचल पथ परिवहन निगम की 30 बसें फंसी हुई हैं। कांगड़ा व कुल्लू हवाई अड्डों से विमान सेवा ठप रही। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। हाइवे पर जगह-जगह फंसे वाहनों को सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचाने का काम जारी है। श्रीनगर में बिजली की आपूर्ति शुक्रवार से ठप है। नतीजत इंटरनेट एवं मोबाइल सेवा भी ठप रही। विमानों का आवागमन रद रहा।
उत्तराखंड में गंगोत्री-यमुनोत्री राजमार्ग राड़ी से आगे बंद हो गया है। घनसाली-रुद्रप्रयाग मार्ग, चंबा-मसूरी मार्ग, और पांडुकेश्वर-जोशीमठ मार्ग बंद हो गए हैं। इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उत्तरकाशी जिले में भटवाड़ी, पुरोला व नौगांव ब्लॉक के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले मार्ग भारी बर्फबारी से अवरुद्ध हो गए हैं।
देहरादून से साई संवाददाता राजीव सक्सेना ने खबर दी है कि प्रदेष के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात और अन्य स्थानों पर बारिष से आम जन-जीवन बाधित हो गया है।ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से कई सड़कें बन्द हो गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार मौसम की खराबी से राज्य में चुनावी गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग के निदेषक आनन्द शर्मा ने सरकारी समाचार एजेंसी  को बताया है कि अगले चौबीस घंटों के दौरान मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि बारिष और बर्फ से किसानों और औद्यानिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
प्राप्त सूचना के अनुसार राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों मंे हिमपात और कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश से ठण्ड बढ़ गई है, जिससेराज्य के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में मुष्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबन्धन केंद्र के अनुसार बर्फबारी के कारण उत्तरकाषी में धरासू-बड़कोट राष्ट्रीय राजमार्ग राड़ी के निकट बन्द है, जबकि ऋषिकेष-गंगोत्री मार्ग हर्षिल के पास अवरुद्ध है। इसके अलावा सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अन्य कई रास्ते भी बन्द हो गए हैं। इस बीच, नैनीताल, मसूरी, धनोल्टी, चकराता में बर्फबारी से पर्यटकों और व्यवसायियों की खुषियां बढ़ गई हैं। 
साई के चमोली संवाददाता ने बताया है कि जिले में बीती रात से हो रही बर्फबारी व वर्षा के चलते जिला कड़ाके की ठण्ड की चपेट में आ गया है। बदरीनाथ, फूलों की घाटी, हेमकुण्ड साहिब, तुंगनाथ और रुद्रनाथ सहित अन्य ऊंची चोटियों पर हिमपात व निचले इलाकों मंे रुक-रुक कर हो रही वर्षा से तापमान में भारी गिरावट आई है।
उधर, विष्व स्कीइंग केंद्र औली में भी हिमपात होने से पर्यटकों व स्कीयरों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है, लेकिन एषिया की सबसे लम्बी रोप-वे के यहां बीते एक वर्ष से खराब होने के कारण पर्यटक व स्कीयर रोप-वे का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं, जिससे पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोष व्याप्त है। रोपवे के ठप पड़े होने से गढ़वाल मण्डल विकास निगम को भी करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
साई के नैनीताल संवाददाता के अनुसार वहां आज सुबह से ही बर्फबारी हो रही है और बर्फबारी का आनन्द लेने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां पहंुच रहे हैं। सरोवर नगरी में बारापत्थर, स्नोव्यू, किलबरी रोड, आदि पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ हो रही है। उधर, वर्ष के प्रारम्भ में अच्छी बर्फबारी को देखकर होटल व्यवसायियों के चेहरे खिल उठे हैं। इस बीच, रुद्रप्रयाग, टिहरी, चम्पावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में कहीं बर्फबारी तो कहीं बारिष के समाचार हैं। 
साई के गुडगांव संवाददाता ने बताया कि हरियाणा के सभी स्कूल आने वाली 16 जनवरी तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के साई ब्यूरो का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर पिछले चौबीस घंटों के दौरान रूक-रूक कर हुई बंूदाबांदी और बर्फीली हवाओं के कारण शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। हालांकि आमतौर पर रात और दिन के तापमान मे ं वृद्धि दर्ज की गई है। कल भी इटावा  दिन के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है। कल भी इटावा में सबसे कम न्यून में सबसे कम न्यूनतम  तम तापमान चार दशमलव दो डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इस दौरान इलाहाबाद में दो दशमलव दो मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई जबकि लखनऊ में एक दशमलव सात मिलीमीटर वर्षा हुई।
शिमला साई ब्यूरो ने खबर दी है कि प्रदेश की उपरी पहाड़ियों पर पिछले चार दिनों से हिमपात लगातार जारी है जिससे समुचा प्रदेश ठंड की चपेट में आ गया है तथा आम जनजीवन अस्त-व्यवस्त हो गया है। शिमला, मनाली, डलहौजी सहित धर्मशाला में भी हिमपात हुआ जबकि कांगड़ा जिले के शाहपुर, नुरपुर गग्गल, हमीरपुर तथा उना के चिंतपूर्णी में हिमपात होने से लोग अचंभे मेें पड़ गए। उल्लेखनीय है कि लगभग 6 दशकों बाद इन क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है।
भारी हिमपात होने से चंबा तथा मनाली शेष राज्यों से कट गया है। मनाली में अभी तक डेढ फुट बर्फ गिर चुकी है और अभी भी हिमपात जारी है। जनजातीय इलाकों में भारी बर्फबारी के साथ-साथ न्यूनतम तापमान भी काफी गिर गया है। अनेक इलाकों में तामपान शून्य से 24 डिग्री सैल्सियस तक नीचे चल रहा है।
इस बीच मौसम विभाग ने आने वाले 24 घंटों के दौरान प्रदेश भर में भारी बर्फबारी व वर्षा होने की संभावना के राजधानी दिल्ली में भी रातभर बारिश के कारण शीतलहर ने शनिवार दिन में भी अपना पुरजोर एहसास कराया। धूप कुछ देर के लिए ही निकली। कहीं कम, कहीं ज्यादा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी बारिश हुई।
इस बीच बागवानी व तकनीकी शिक्षा मंत्री नरेन्द्र बरागटा  ने कहा है कि भारी बर्फबारी के दृष्टिगत जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिमला, ठियोग, रामपुर, चौपाल तथा रोहडू के दंडाधिकारियों के साथ वे लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और साथ ही राष्ट्रीय उच्च मार्ग के मुख्य अभियन्ता और लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियन्ताओं को भी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। बरागटा ने कहा कि सड़कों पर यातायात की बहाली के लिए लगभग 35 जे.सी.बी और बुल्डोजर तैनात किए गए हैंे और चौपाल से नेरवा मार्ग को खोलने के लिए टिप्पर और बड़ी मशीनें भेज दी गई हैं। इसी प्रकार ठियोग से रोहडू व रामपुर मार्गाें पर भी बड़ी मशीनें तैनात की गई हैं। 
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने राज्य तथा जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश में भारी हिमपात को देखते हुए लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों को पेयजल, बिजली, अनाज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति नियमित रूप से की जाए।
देश के हृदय प्रदेश से नंद किशोर जाधव ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश में पाले और ओले की वजह से नष्ट हुई फसलों का 1400 करोड़ रुपए का मुआवजा स्वीकृत करने का आग ह किया है। कल देवास में बैंक नोट प्रेस के कार्य क्र म में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी से ये मुआवजा राशि मंजूर करने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रदेश की वार्षि क वृद्धि दर पिछले वर्ष दस प्रतिशत रही है। कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है।

विदिशा जिला ईकाई के अध्य्क्ष घोषित


विदिशा जिला ईकाई के अध्य्क्ष घोषित



(अंशुल गुप्ता)

भोपाल (साई)। वर्किग जर्नलिस्ट य्ाूनिय्ान के प्रदेश अध्य्ाक्ष श्री राधाबल्लभ शारदा ने भोपाल एवं विदिशा जिला ईकाई के पदाधिकारिय्ाो की निय्ाुक्ति की। प्रंातीय्ा कायर््ाालय्ा तुलसीनगर भोपाल स्थित एक सादे समारोह में प्रदेश अध्य्ाक्ष राधाबल्लभ शारदा ने महेन्द्र सिह पवार को भोपाल जिलाध्य्ाक्ष, सीताराम मालवीय्ा को विदिशा जिलाध्य्ाक्ष, सलील मालवीय्ा को  भोपाल उपाध्य्ाक्ष एवं जमुनाप्रसाद झ्ाा को भोपाल जिला महासचिव निय्ाुक्त किय्ाा। इस अवसर पर प्रंातीय्ा उपाध्य्ाक्ष कृष्ण गोपाल शर्मा,अमिताभ शर्मा,सईद खान,नरेन्द्र विश्वकर्मा उपस्थित थे। विजय्ा शर्मा,रामनिवास करोठिय्ाा,संजय्ा पण्डित,पकंज शर्मा ने नवनिय्ाुक्त पदाधिकारिय्ाो को वधाई दी है एवं प्रदेश अध्य्ाक्ष राधाबल्लभ शारदा का आभार ज्ञापित किय्ाा है।

फतेह बहादुर की बदली


फतेह बहादुर की बदली



(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रधान गृह सचिव फतेह बहादुर और पुलिस महानिदेशक बृज लाल का तबादला कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार योजना और चिकित्सा शिक्षा संबंधी मुख्य सचिव मनजीत सिंह को प्रधान गृह सचिव बनाया गया है जबकि वरिष्ठ आई पी एस अधिकारी अतुल राज्य के नये पुलिस महानिदेशक होंगे।
राज्य के सभी प्रमुख विपक्षी दल इन अधिकारियों पर सत्तारूढ़ दल बहुजन समाजपार्टी की पक्ष में पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का अरोप लगाते हुए इन्हें हटाने की मांग करते रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने बहुजन समाजपार्टी प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी की सार्वजनिक ढंग से लगाई मूर्तियों को ढकने के भी निर्देश दिए हैं। ये सभी मूर्तियां पूरे विधानसभा चुनाव के दौरान ढकीं रहेंगी।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त डाक्टर एस वाई कुरैशी ने कहा है कि इसे जल्द लागू कर दिया जाएगा क्योंकि यह मामला आदर्श आचार-संहिता से जुड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित सभी विपक्षी दलों ने आयोग के इस निर्णय का स्वागत किया है। सत्तारूढ़ बहुजन समाजवादी पार्टी ने इसे दलित रोधी करार देते हुए इसे एकतरफा लिया गया निर्णय कहा है।

शिवलिंगी, निःसंतान महिलाओं के लिये वरदान


शिवलिंगी,  निःसंतान महिलाओं के लिये वरदान



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। शिवलिंग की तरह दिखने वाले बीजों की इस बेल को अक्सर खेत खलिहानों, आँगन के बाडों और जंगलों में देखा जा सकता है। इसका वानस्पतिक नाम ब्रायोनिया लेसिनियोसा है। पातालकोट के गोंड और भारिया जनजाति के लोग इस पौधे को पूजते है, इन आदिवासियों का मानना है कि संतानविहीन दंपत्ती के लिये ये पौधा एक वरदान है।
इन आदिवासीयों द्वारा शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड के साथ पीसकर निरूसंतान महिला को खिलाया जाता है, महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। आदिवासी महिलाएं इसकी पत्तियों की चटनी बनाती है, इनके अनुसारे ये टॉनिक की तरह काम करती है।
पत्तियों को बेसन के साथ मिलाकर सब्जी के रूप में भी खाया जाता है, आदिवासी भुमकाओं (हर्बल जानकार) के अनुसार इस सब्जी का सेवन गर्भवती महिलाओं को करना चाहिए जिससे होने वाली संतान तंदुरुस्त पैदा होती है। डाँग- गुजरात के आदिवासी शिवलिंगी के बीजों का उपयोग बुखार और बेहतर सेहत के लिये करते है।
इन आदिवासियों का भी मानना है कि शिवलिंगी न सिर्फ़ साधारण रोगों में उपयोग में लायी जाती है अपितु ये नर संतान प्राप्ति के लिये भी कारगर है, हलाँकि इस तरह के दावों को आधुनिक विज्ञान नकार सकता है लेकिन इन आदिवासी हर्बल जानकारों के दावों को एकदम नकारना ठीक नही।

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शनिवार, 7 जनवरी 2012

षणयंत्र में कमल नाथ का साथ दे रहे हरवंश: भोजराज


षणयंत्र में कमल नाथ का साथ दे रहे हरवंश: भोजराज



(अखिलेश दुबे)

सिवनी(साई)। मोहगॉंव से खवासा तक जहॉं सड़क खराब होने के कारण आये दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं जाम लग रहे हैं वहॉं की सड़क की मरम्मत के लिये एनएचएआई मात्र 39 लाख 80 हजार रूपये जारी कर रही है और सिवनी नगर के अंदर की नेशनल हाइवे के लिये जहॉं यह संभावना ही नहीं है कि बहुत तेज गति से कोई वाहन चला सके वहॉं की सड़क मरम्मत के लिये एनएचएआई 1 करोड़ 31 लाख 44 हजार रूपये जारी कर रही है। ये भी केन्द्रीय मंत्री श्री कमलनाथ का षड़यंत्र है और सबकुछ जानते हुए हरवंश सिंह उनका साथ दे रहे हैं। इस आशय के आरोप जनमंच के सदस्य श्री भोजराज मदने द्वारा लगाये गये हैं।
श्री मदने ने कहा कि एनएचएआई द्वारा हितवाद में सिवनी जिले के अंदर की सड़क का जो विज्ञापन जारी किया गया है वहीं कमलनाथ और हरवंश सिंह के षड़यंत्र की पुष्टी करता है। इस विज्ञापन में सिवनी नगर के अंदर की जो एनएच है उसकी मरम्मत के लिये 1 करोड़ 31 लाख 44 हजार रूपये स्वीकृत किये गये हैं जो कि मात्र 64 किलोमीटर है वहीं मोहगॉंव से लेकर खवासा तक की सड़क जो कि 20 किलोमीटर लंबी है जहॉं सबसे ज्यादा एक्सीडेंट हो रहे हैं उसकी मरम्मत के लिये मात्र 39 लाख 80 हजार रूपये जारी किये गये है जिससे कि कोई ठेकेदार काम करने ही नहीं आ रहा है।
श्री मदने ने कहा कि यह बहुत ही स्वभाविक और समझने वाली बात है कि शहर के अंदर नगर पालिका क्षेत्र में बस-ट्रक पलटने की संभावना बहुत कम है अभी तक एक भी बस ट्रक या वाहन नगर सीमा के अंदर गड्ढों के कारण नहीं पलटा है क्योंक यहॉं रात दिन ट्रेफिक का इतना रश रहता है कि ड्रायवर तेज गति से वाहन चला ही नहीं पाते वहीं इसके विपरीत मोहगॉंव कुरई खवासा तक की जो सड़क है वह बहुत जर्जर हालत में है, आये दिन वहॉं एक्सीडेंट हो रहे हैं, जाम लग रहे हैं ऐसे में वहॉं की सड़क के मरम्मत कार्य के लिये एनएचएआई को ज्यादा पैसा देना चाहिये ताकि वहॉं का काम अच्छा।
श्री मदने ने कहा कि एनएचएआई ने मोहगॉंव कुरई खवासा की सड़क के मरम्मत के लिये मात्र 39 लाख 80 हजार रूपये दिये हैं जिसमें 39 गड्ढे भी नहीं भर पायेंगे क्योंकि कहीं कहीं तो स्थिति यह है कि सड़क ही नहीं है तो कहीं कहीं गड्डों का आकार इतना बड़ा है कि छोटी कारें पूरी की पूरी घुस जाती है, ट्रक पलट जाते हैं। और सिवनी नगर की एनएच जिसके लिये एनएचएआई ने 1 करोड़ 31 लाख 44 हजार रूपये दिये हैं यहॉं सड़क सुधारे जाने की जरूरत तो है किन्तु सड़क सुधारे जाने की प्राथमिकता मोहगॉंव,कुरई,खवासा की सड़क के मुकाबले 10 प्रतिशत भी नहीं है।
श्री मदने ने कहा कि 39 लाख 80 हजार रूपये में मोहगॉंव से लेकर खवासा तक की 20 किलोमीटर की सड़क की मरम्मत नहीं की जा सकती और अगर एन।एच।ए।आई। मरम्मत करवा भी देगी तो भी सड़क कुछ ही समय बाद पुनः पहले जैसी स्थिति में आ जायेगी क्योंकि जो हैवी व्हीकल्स हैं वो नागपुर जाने कगे लिये मोहगॉंव से लेकर खवासा तक की जो सड़क है उससे गुजरेंगे ही गुजरेंगे इसीलिये एनएचएआई को वहॉं की सड़क के लिये ज्यादा पैसा जारी करना चाहिये फिर शहर के अंदर तो सब सुविधाए सुलभ है किन्तु शहर के बाहर सड़को पर न लाइटिंग हैं न तत्काल वहॉं पर्याप्त पुलिस बल पहुँच सकता न एम्बुलेंस न जे।सी।बी। कि पलटे हुए ट्रक या बस को उठाया जाकर रोड मूवेबल बनायी जा सके।
श्री मदने ने हरवंश सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि हरवंश सिंह सब कुछ जानते हैं और केन्द्र में उनकी सरकार है वे सबकुछ करने में सक्षम भी हैं किन्तु जानबूझकर उनके द्वारा मोहगॉंव से लेकर खवासा तक की सड़क के काम को लटकाया जा रहा है ताकि किसी दिन कोई पुल पुलिया टूट जाये और महाकौशल का महाराष्ट्र से संपर्क ही टूट जाये ऐसी स्थिति में ट्रक वालों के पास छिंदवाड़ा होते हुए महाराष्ट्र में प्रवेश करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचेगा और कमलनाथ की जो इच्छा है वह पूरी हो जायेगी।श्री मदने ने कहा कि हरवंश सिंह चाहते तो खवासा से लेकर सिवनी तक की सड़क भी तभी बन गयी होती जब बंडोल से लेकर लखनादौन तक की सड़क का काम हुआ था। पर उन्होंने वैसा नहीं चाहा।

प्रार्थी को गुमराह कर आरोपी का साथ दे रही बरघाट पुलिस


प्रार्थी को गुमराह कर आरोपी का साथ दे रही बरघाट पुलिस

चाचा को और दिखा देना भैया ध्यान से



(रोहित सक्‍सेना)

सिवनी,(साई)। एक पीड़ित युवती का पिता थाने रिपोर्ट लिखाने आया, तो थानेदार द्वारा यह कहकर उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी लड़की आयेगी तभी रिपोर्ट लिखी जायेगी। थानेदार की बात सुन वह गरीब थाने से पुनः अपने गांव पहुँचा जहॉं को ही एक वर्ग ने उसे ऐसा डराया-धमकाया कि वह थाने तो छोड़ो घर से भी बाहर नहीं निकल पाया।
यह मामला बरघाट थाना अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर का है। जहॉं एक प्रभावशाली धनाड्य राजेश पिता झालसिंह उम्र 35 वर्ष द्वारा ग्राम की ही एक नाबालिक लड़की की अस्मत उसके माता पिता के सूने में लूट ली गयी और बताने पर जान से मारने की धमकी दी गयी।
एक स्थानीय दैनिक संवाद कुंजके अनुसार द्वारा जब ग्राम के ही सरपंच पति तामसिंह देशमुख से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिवस गांव का ही राजेश हिरनखेड़े जो पहले से ही शादीशुदा है के द्वारा गांव के एक गरीब परिवार की नाबालिक लड़की के घर पहुँचा और उसकी अस्मत लूट ली। सरपंच ने बताया कि इस दौरान पीड़िता के माता पिता मजदूरी करने गये थे।
घटना की जानकारी पीड़ित लड़की ने अपने परिजनों को दी। पीड़ित पिता द्वारा अपने 02-03 सहयोगियों के साथ बरघाट थाने जाकर जब इसकी रिपोर्ट शाम के समय लिखानी चाही तो थानेदार द्वारा यह कहकर उन्हें वहॉं से भगा दिया कि जाओ और जाकर लड़की को लेकर आओ।
ग्रामीणों में ऐसी चर्चा है कि इस मामले में थानेदार द्वारा राजेश हिरनहेड़े से लंबी रकम लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया है। जब इस संबंध में बरघाट थाना प्रभारी श्री आरबी पांडे से चर्चा की गयी तो उन्होंने बताया कि मैंने लड़की के पिता से यह कहा था कि जाओ और जाकर लड़की को साथ ले आओ मुआयजा कराया जाकर रिपोर्ट दर्ज की जायेगी।
रिपोर्ट न लिखने के बाद लड़की के परिजन अपने गांव पहुँचे। तब तक पंवार समाज की एक मीटिंग हो रही थी जिसमें पीड़ित परिजनों को भी बुलाया गया और सभी पंवार समाज के लोगों ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए यह तय किया कि आरोपी राजेश हिरनखेे को 05 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जाता है जो राशि पंवार समाज के खाते में जमा होगा। इसके बाद मीटिंग स्थगित कर दी गयी। इस घटना के बाद न तो पीड़ित परिजनों को थाने जाने दिया जा रहा है और न ही इस बात की जानकारी किसी को बताने का दबाव व धमकी दी जा रही है।
यहॉं यह भी उल्लेखनीय है कि पुलिस पिता के बयाने के आधार पर आरोपी के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कर सकती थी और लड़की का मुलायजा बाद में भी कराया जा सकता था किन्तु नाबालिग से बलात्कार जैसे मालमे को पुलिस द्वारा प्रार्थी को गुमराह कर उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी जो कि अपने आप में एक अपराध है।

पेंच नेशनल पार्क देश का सर्वश्रेष्ठ हन्टिंग ग्राउण्ड बन गया है: तिवारी


पेंच नेशनल पार्क देश का सर्वश्रेष्ठ हन्टिंग ग्राउण्ड बन गया है: तिवारी



(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। बेस्ट मेन्टेन्ड इको फ्रेण्डली टूरिज्म और प्रभावकारी प्रबंधीय मूल्यांकन जैसे पुरस्कार प्राप्त कर चुके पेंच प्रोजेक्ट टाईगर रिजर्व की उपलब्धियां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। पेंच पार्क में पदस्थ कुछ अधिकारियों के भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण पेंच राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास का क्षेत्र देश का सर्वश्रेष्ठ हंटिंग ग्राउन्ड बन गया है। इस आशय की बात जनमंच के सदस्य संजय तिवारी ने अपनी विज्ञप्ति के माध्यम से कही है।
पेंच लैण्ड स्केप के अंतर्गत आने वाले पेंच पार्क से सटे दक्षिण वनमंडल के क्षेत्र में 1995 से 2009 तक वन्यप्राणियों के शिकार के 129 प्रकरण सिवनी के न्यायालय में लंबित हैं जिसमें 7 बाघ, 05 तेन्दुए समेत दुर्लभ बायसन के शिकार भी शामिल हैं। पिछले दो महीनों में पेंच पार्क के आसपास के क्षेत्रों से चार से ज्यादा बाघ और तेन्दुओं की खाल पुलिस के द्वारा जप्त होने के बाद भी पेंच पार्क प्रशासन सुस्त पड़ा है। सूत्र बताते हैं कि बाघों की खालों का अंतर्राष्ट्रीय तस्कर संसारचंद और उसके भाई कल्याण का तैयार किया गया नेटवर्क अभी भी पेंच राष्ट्रीय उद्यान और  उसके आसपास के क्षेत्र में सक्रिय है।
पेंच राष्ट्रीय उद्यान के द्वारा बाघों की मौत के अधिकृत आंकड़े अपनी पोल स्वयं खोलते नजर आते हैं। पेंच पार्क प्रशासन वर्ष 2002-2010 के बीच पार्क और इससे सटे क्षेत्रों में 9 बाघों की मौत की पुष्टि स्वाभाविक मृत्यु के तौर पर करता है जबकि सच्चाई यह है कि पार्क के अंदर और इससे सटे क्षेत्रों में बाघों और तेन्दुओं को फंदे में फंसाकर, जहर देकर एवं बिजली करंट से पार्क प्रशासन के 400 से ज्यादा कर्मचारियों और
अधिकारियों की नाक के नीचे मारा जा रहा है। वेटरनरी से पदस्थापना पर नियुक्त डॉक्टर द्वारा तैयार की गयी मृत बाघ व तेन्दुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अमूमन संदिग्ध रहती है। जवान बाघ के पानी में डूबकर मरने के बिरले उदाहरण पेंच राष्ट्रीय उद्यान में ही देखने को मिलते हैं।
पेंच राष्ट्रीय उद्यान के आसपास बाघों और तेन्दुओं के शिकार के मामले पकड़े जाने पर पेंच पार्क के अधिकारियों का सीधा उत्तर होता है मारे गये बाघ और तेन्दुये पेंच राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से बाहर के हैं जबकि यही पेंच पार्क प्रशासन पेंच लैण्ड स्केप के अंतर्गत इन बाघों को अपनी गिनती में शामिल करता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण आयोग के अधिकारी डॉ। राजेश गोपाल पेंच राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास के क्षेत्रों में 64 बाघों की उपस्थिति का जिक्र करते हैं परंतु सच्चाई यह है कि जो बाघ और तेन्दुए पार्क के संरक्षित और सुरक्षा वाले क्षेत्र से बाहर आ जाते हैं उनकी शिकारियों के हाथ बचने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। यही डॉ। राजेश गोपाल राष्ट्रीय उद्यानों के आस पास के क्षेत्रों में मानवीय दखल कम करने के लिये धारा 144 लगाने की सलाह भी देते हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले दस में से नौ पर्यटकों को उद्यान में बाघ के दर्शन के बिना ही लौटना पड़ता है।
बाघों के संरक्षण और संवर्धन के नाम पर पेंच राष्ट्रीय उद्यान को भारी भरकम राशि प्राप्त होती है। सिर्फ प्रोजेक्ट टाईगर योजना के अन्तर्गत पिछले 18 वर्षों में 27 करोड़ रूपये एवं वर्ष 1996 से 2005 तक इंडिया ईको डेव्हलपमेंट प्रोजेक्ट के अन्तर्गत लगभग 28 करोड़ रूपये की राशि पेंच राष्ट्रीय उद्यान को प्राप्त हो चुकी है। स्पष्ट है सरकार बाघों को बचाने के लिये धन की कमी नहीं कर रही है लेकिन भ्रष्टाचार और अफसरशाही के कारण पेंच पार्क को मिलने वाले धन का एक बड़ा हिस्सा कुछ भ्रष्ट वन अधिकारियों की जेबों में जा रहा है।
दिसंबर 2011 में पेंच पार्क में वन्यप्राणियों के शिकार और इसके कानूनी प्रावधानों को लेकर आयोजित कार्यशाला में पेंच राष्ट्रीय उद्यान के उपसंचालक ओ।पी। तिवारी यह नहीं बता पाये कि गिरफ्त में आये कितने वन्य प्राणियों के शिकारियों को वे न्यायालय से सजा दिलवा पाये। पार्क के डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर को शिकार के मामले वाले न्यायालयीन प्रकरणों में कोई रूचि नहीं है जिस कारण अपनी जान को जोखिम में डालकर खतरनाक हथियारों से लैस शिकारियों को पकड़ने वाले पेंच पार्क में पदस्थ छोटे स्तर के साहसी वन कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिरते जा रहा है।

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

वन मंत्रालय से पावर प्लांट के प्रथम चरण की अनुमति एक अजूबा!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 46

वन मंत्रालय से पावर प्लांट के प्रथम चरण की अनुमति एक अजूबा!

पानी की स्वीकृति लिए बिना कैसे पनपते पेड़

फरवरी 2011 को पानी के लिए हुआ समझौता, नहीं हुआ वृक्षारोपण



(लिमटी खरे)
नई दिल्ली (साई)। मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की आदिवासी बहुल्य घंसौर तहसील में स्थापित किए जाने वाले कोल आधारित पावर प्लांट के द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संयंत्र क्षेत्र में वृक्षारोपण न किए जाने के बावजूद भी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की अनुशंसा पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 600 मेगावाट के प्रथम चरण की स्वीकृति मिलना अपने आप में एक अजूबे से कम नहीं है।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका राजनैतिक क्षेत्र में भी इकबाल बुलंद है, के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा दो चरणों में लगाए जा रहे कोल आधारित पावर प्लांट के संयंत्र प्रबंधन द्वारा जमा कराए गए प्रपत्रों से साफ हो जाता है कि इस संयंत्र की स्थापना के दोनों चरणों में निर्माण अवस्था से प्रदूषण फैलना आरंभ हो जाएगा।
सूत्रों की मानें तो इसके निर्माण का काम वर्ष 2009 से ही आरंभ हो गया है। इस संयंत्र के निर्माण के पहले सबसे अधिक जरूरी यह बात थी कि संयंत्र क्षेत्र के आस पास वाले क्षेत्र में संयंत्र प्रबंधन द्वारा पर्याप्त मात्रा में वृक्षारोपण किया जाए, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। सूत्रों ने कहा कि इस हेतु संयंत्र प्रबंधन ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि वह संयंत्र के निर्माण के पहले ही वृक्षारोपण का काम आरंभ कर देगा।
सूत्रों ने कहा कि जेपीएल के दूसरे चरण की लोकसुनवाई में संयंत्र प्रबंधन ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के आला अधिकारियों के समक्ष इस बात को स्वीकार किया था कि 22 नवंबर 2011 अर्थात निर्माण आरंभ होने के दो वर्षों बाद तक संयंत्र प्रबंधन द्वारा वृक्षारोपण नहीं किया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए आहूत लोकसुनवाई में ही संयंत्र प्रबंधन ने स्वयं के द्वारा नियमों के माखौल उड़ाने की बात कही गई और जिला प्रशासन सिवनी तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के आला अधिकारी मंुह ताकते बैठे रहे।
उधर, मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के सूत्रों का कहना है कि चूंकि वृक्षारोपण के उपरांत इन्हें बड़ा करने के लिए पानी की आवश्यक्ता होती। चूंकि मध्य प्रदेश सरकार से पानी लेने के लिए संयंत्र प्रबंधन का अनुबंध नहीं हुआ था अतः इन पौधों को पानी कैसे दिया जाता। अगर यह पानी दूर से लाया जाता तो यह काफी हद तक मंहगा साबित होता, संभवतः यही कारण था कि पर्यावरण बचाने और प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक वृक्षारोपण संयंत्र प्रबंधन द्वारा वर्ष 2009 से 2011 तक नहीं करवाया गया।
मध्य प्रदेश सरकार के जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा जल संसाधन विभाग, मध्य प्रदेश शासन के पत्र क्रमांक वृपनिम/31/रास्/162/08/86 दिनांक 06 फरवरी 2009 द्वारा 23 एमसीएम/वर्ष की जल अनुमति प्राप्त की जा चुकी है। सूत्रों ने आगे बताया कि मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड और मध्य प्रदेश सरकार के नर्मदा वैली विकास प्राधिकरण के मध्य 21 फरवरी 2011 को 16.88 एसीएम पानी हर साल रानी अवंती बाई सागर परियोजना के बरगी बांध से निकालने हेतु समझौता भी हो चुका है।
कुल मिलाकर सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में पर्यावरण बिगड़े, प्रदूषण फैले, क्षेत्र झुलसे या आदिवासियों के साथ अन्याय हो इस बात से मध्य प्रदेश सरकार के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को कुछ लेना देना नहीं है। यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

भाजपा की जमानत पर चल रहे हैं मनमोहन!


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 68

भाजपा की जमानत पर चल रहे हैं मनमोहन!

यूपीए की दयनीय स्थिति का लाभ उठाने में भाजपा असफल



(लिमटी खरे)


नई दिल्ली (साई)। एक के बाद एक गल्तियों, घपलों, घोटालों के बाद भी विपक्ष में बैठी भाजपा ताकतवर तरीके से विरोध प्रदर्शित नहीं कर पा रही है जिसका पूरा पूरा लाभ वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह द्वारा उठाया जा रहा है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने न जाने कितने मौके भारतीय जनता पार्टी को घर बैठे बिठाए दिए जिसका लाभ उठाकर भाजपा चाहती तो प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की रूखसती के मार्ग प्रशस्त कर सकती थी, वस्तुतः सारे मौके भाजपा ने देखते ही देखते गंवा दिए।
यूपीए की दूसरी पारी में जितने मामले सामने आए उनका लाभ भाजपा द्वारा अगर सलीके से लिया जाता तो आज देश में भाजपा के जनाधार में विस्फोटक बढ़ोत्तरी दर्ज हो सकती थी। भाजपा के आला नेताओं ने कांग्रेस की कमजोरियों का फायदा देश के हित में नहीं उठाया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। घपले घोटालों के मामलों में जेल गए नेता आज मलाई काट रहे हैं। जेल के औचक निरीक्षण में भी वे बेहद निश्चिंत और आराम फरमाते नजर आए।
पिछले साल मनमोहन सिंह के संकटमोचक बने मानव संसाधन विकास तथा संचार मंत्री कपिल सिब्बल की जुबान अनेक मर्तबा फिसली पर भाजपा ने उनकी अनदेखी कर मनमोहन सिंह को परोक्ष तौर पर मजबूती ही प्रदान की है। पिछले साल के आरंभ में मनमोहन सरकार के ट्रबल शूटर कपिल सिब्बल ने मीडिया मे बयान दे डाला कि टू जी घोटाले से कोई नुकसान ही नहीं हुआ है। विपक्ष ने सरकार को इसके लिए कटघरे में खड़ा नहीं कर पाना अपने आप में एक अचंभा ही माना जाएगा। कपिल सिब्बल देश के जिम्मेदार संचार मंत्री के पद पर हैं और उनका हास्यास्पद बयान भी भाजपा में जोश का संचार नहीं कर पाया।
इसके बाद देश भर के जनाक्रोश का शिकार बने कपिल सिब्बल को घेरने में नाकाम रही भाजपा से निराश लोगों ने जब लोगों ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल को आड़े हाथों लिया तब उनकी नींद में खलल पड़ा और उन्होंने जब इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने की पेशकश की तब भी भाजपा नहीं चेती।
सियासी गलियारों में अब यह बात तैरने लगी है कि कांग्रेस और भाजपा मिलकर नूरा कुश्ती का प्रहसन कर रही है, जिससे देश की जनता अपने आप को छला सा महसूस कर रही है। देश के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री समझे जाने वाले डॉक्टर मनमोहन सिंह को घेरने में जब भाजपा नाकामयाब ही रही तब लोगों को अब लगने लगा है कि मनमोहन सिंह अंत्तोगत्वा भाजपा की जमानत पर ही देश चला रहे हैं।


(क्रमशः जारी)

अभी भी मुर्दे गिनने में लगे हुए हैं हरवंश सिंह: भोजराज


अभी भी मुर्दे गिनने में लगे हुए हैं हरवंश सिंह: भोजराज



(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नागपुर रोड में गड्ढों के कारण हुई दुर्घटना के कारण जितनी भी जाने गयी हैं उसके लिये कमलनाथ के साथ साथ हरवंश सिंह भी बराबर के दोषी हैं और वे अभी भी मुर्दे गिनने में लगे हुए हैं. इस रोड का सुदृढ़ीकरण जल्द से जल्द हो इसके लिये कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. जबकि प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस.के. सिंघई एन.एच.ए.आई. के चीफ जनरल मेनेजर को आगाह कर चुके हैं कि यह मार्ग यातायात के लायक बचा ही नहीं है इसके पुल पुलिया भी जर्जर हो चुके हैं. इस आशय की बात जनमंच के सदस्य श्री भोजराज मदने द्वारा एक स्थानीय समाचार पत्र से चर्चा के दौरान कही गयी है.
श्री मदने ने कहा कि दिनांक 01 मई 2010 को विस उपाध्यक्ष श्री हरवंश सिंह ने केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ को एक पत्र लिखा था जिसका मजमून यह था कि लखनादौन-खवासा फोरलेन मार्ग का विस्तार हो रहा है उस विस्तारित मार्ग का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. इसमें जिला मुख्यालय समेत कई बड़े नगर व कस्बों को बायपास किया गया है. जिनमें से लखनादौन, गणेशगंज, छपारा, बंडोल, सिवनी, गोपालगंज प्रमुख हैं. इन बायपास से शहर के अंदर जाने वाले पुराने मार्गों की हालत अत्यंत जर्जर एवं खराब है. पत्र के अंत में हरवंश सिंह ने निवेदन किया था कि इन नगरों के अंदर जाने वाले जो कि पूर्व से ही एन.एच.-7 है को सुदृढ़ीकरण कर सुगम यातायात (स्मूथ राइडिंग सरफेस) बनाये जाने हेतु निर्देशित करें.
श्री मदने ने कहा कि हरवंश सिंह के उक्त पत्र के कारण ही आज तक सिवनी से खवासा तक की सड़क जर्जर हालात में है और लोगों की जाने जा रही हैं. अगर हरवंश सिंह पहले से ही जिले के अंदर खवासा से लेकर लखनादौन तक की पुरानी जीएन रोड जो कि अभी भी एनएच है को सुधारे जाने हेतु जोर दिया होता तो पूरा काम एकसाथ होता किन्तु उन्होंने अपने पत्र में मात्र लखनादौन, गणेशगंज, छपारा, बंडोल, सिवनी, गोपालगंज तक के मार्ग के सुदृढ़ीकरण की मांग की जिसके कारण आज तक खवासा तक की सड़क जर्जर हालत में है और वहाँ आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. लोगों की जाने जा रही है, एम्बुलैंस समय पर न पहुँच पाने के कारण लोग मर रहे हैं स्थिति यहाँ तक है कि डिलेवरी का कोई ट्रिपिकल केस आता है तो सिवनी के डाँक्टर नागपुर रिफर कर देते हैं और समय पर एम्बुलेंस वाला प्रसूता को नागपुर नहीं पहुँचा पाता और एम्बुलैंस वह तेज इसीलिये नहीं चला पाता क्योंकि गढ्ढों के डर से प्रसूता कहीं कोई दिक्कत न आ जाये. श्री मदने ने कहा कि ऐसा ही एक वाक्या हुआ था जब प्रसूता को चिकित्सकों द्वारा नागपुर रिफर किया गया और वह रास्ते में थी और उसे तेज दर्द हुआ और एंबुलेंस में ही बड़ी मुश्किल से उसकी डिलेवरी हुई.
श्री मदने ने कहा कि सड़क की जर्जर हालत को देखते हुए प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस.के. सिंघई द्वारा दिनांक 30 अगस्त 2011 को ही एनएचएआई के चीफ जनरल मेनेजर को आगाह करते हुए एक पत्र जिसका क्रमांक एनएचएआई/पीआईयू/एनएआर/अतिरिक्त कार्य/2011/8424 है लिखा गया था. पत्र में कहा गया था कि सड़क भारी बारिश और यातायात के कारण अत्यंत जीर्ण शीर्ण अवस्था में आ चुकी मोहगाँव से आगे नागपुर तक की रोड यातायात के योग्य नहीं है. विशेषतौर से वह रोड जो कुरई घाटि के जंगलों के किनारे से गुजरती है के रखरखाव की कमी के कारण अब यातायात के लायक ही नहीं बची है. इस रोड पर बने सभी पुल और पुलिया बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं. अतः सिवनी कलेक्टर ने भी रोड के रख रखाव और वाहनों के यातायात को सुगम बनाने के लिये निर्देशित किया है.
श्री मदने ने कहा कि प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस.के. सिंघई द्वारा अपने पत्र में अलोनिया स्थिति टोल प्लाजे के बारे में अपनी टिप्पणी देते हुए यह भी लिखा है कि टोल प्लाजा में वाहनों से शुल्क वसूलने के मामले में भी सिवनी जिले के लोग नाराज हैं. और वे लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सिवनी से खवासा के बीच खस्ताहाल सड़क को तत्काल ही सुधारा जाये.
श्री मदने ने कहा कि हरवंश सिंह न फोरलेन ला पा रहे हैं न ही पुरानी सड़क को सुधरवा पा रहे हैं और तो और हरवंश सिंह की ही वजह से लोगों से सिवनी से छपारा जान का 100 रूपये देना पड़ रहा है जो कि किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है.

जल संकट के वर्तमान हालात और उपाय


जल संकट के वर्तमान हालात और उपाय



(श्याम नारायण रंगा अभिमन्यु’)

जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अतः जल जीवन की वह ईकाई है जिसमेें जीवन छीपा है। वर्तमान मंे इस जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जल की कमी ने मानव जाति के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। जल के लिए दुनिया के कईं राष्ट्रों में हालात विकट है।
अगर हम विष्व परिदृष्य पर गौर करें तो कईं चौकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। विष्व में 260 नदी बेसिन इस प्रकार के हैं, जिन पर एक से अधिक देषों का हिस्सा है, इन देषों के बीच जल बंटवारे को लेकर किसी प्रकार का कोई वैधानिक समझौता नहीं है। दुनिया के कुल उपलब्ध जल का एक प्रतिषत ही जल पीने योग्य है। हमें पीने का पानी ग्लेष्यिरों से प्राप्त होता है और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ा है और इस कारण भविष्य में जल संकट की भयंकर तस्वीर सामने आ सकती है। दुनिया में जल उपलब्धता 1989 में 9000 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति थी जो 2025 तक 5100 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति हो जाएगी और यह स्थिति मानव जाति के संकट की स्थिति होगी। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में आधी से ज्यादा नदियॉं प्रदूषित हो चुकी है और इनका पानी पीने योग्य नहीं रहा है और इन नदियों में पानी की आपूर्ति भी निरन्तर कम हो रही है। विष्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में 86 फीसदी से अधिक बीमारियों का कारण असुरक्षित व दूषित पेयजल है। वर्तमान में 1600 जलीय प्रजातियॉं जल प्रदूषण के कारण लुप्त होने के कगार पर है। विष्व में 1.10 अरब लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर है और साफ पानी के बगैर अपना गुजारा कर रहे हैं।
इसी संदर्भ में अगर हम भारतीय परिदृष्य पर गौर करें तो हालात और भी विकट है। वर्तमान में 303.6 मिलियन क्यूबिक फीट पानी प्रतिवर्ष एषियाई नदियों को हिमालय के ग्लेषियर्स से प्राप्त हो रहा है। जल विषेषज्ञों का अनुमान है कि सन् 2100 के समाप्त होते होते हिमालय के आधे ग्लैषियर सूख चुके होंगे और ऐसी स्थिति में पेयजल की क्या स्थिति होगी इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 4.4 करोड़ लोग भारत में बेहद प्रदूषित जल का सेवन करने को मजबूर है। हमारे देष में सिंचाई कार्यों के लिए 70 प्रतिषत जल भूमिगत जल स्रोतों से प्राप्त होता है और घरेलू कार्यों के लिए 80 प्रतिषत जल की आपूर्ति भूमिगत जल स्रोतों से की जाती है। वर्तमान में देष की राजधानी दिल्ली में चार घण्टे व देष की औद्योगिक राजधानी माने जाने वाले मुम्बई में लगभग 5 घण्टे जलापूर्ति की जा रही है। भारत की तीसरी लघु सिंचाई जनगणना के आंकड़ों के अनुसार   1.90 करोड़ कुएॅं और गहरे ट्यूबवेल है। भारत में 39 प्रतिषत परिवारों को ही घरों में पेयजल की सुविधा उपलबध है और 22 प्रतिषत परिवारो को ही नल द्वारा जलापूर्ति की सुविधा उपलब्ध हो रही है। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रषासन संस्थान द्वारा करवाए गए एक सर्वे के अनुसार हमारे देष में 2 लाख से भी अधिक स्कूल ऐसे हैं जिन्हें पीने का पानी आज तक उपलब्ध नहीं करवाया जा सका है। एक अनुमान के मुताबिक 28.6 प्रतिषत परिवारों को पीने का पानी लाने के लिए 500 मीटर से अधिक का फासला तय करना पड़ता है।
ऊपर लिखे गए तथ्यों से ये स्पष्ट होता है वर्तमान में भी जल संकट अपने विकराल रूप में आ चुका है। मानव सभ्यता के लिए वर्तमान में यह सच है कि पर्याप्त विकास के बावजूद भी करोड़ों लोग आज भी पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। पेयजल की यह स्थिति न जाने कितने लोगों का जीवन समाप्त कर देती है और न जाने कितने लोगों को बीमारियॉं दे जाती है।
अब हमें जब यह पता है कि जल संकट का विकट दौर चल रहा है तो हमंे यह समझना होगा कि जल का कोई विकल्प नहीं है, मानव का अस्तित्व जल पर ही निर्भर है, जल सृष्टि का मूल आधार है, जल है तो खाद्यान है, जल है तो वनस्पतियॉं हैं, जल का कोई विकल्प नहीं है, जल संरक्षण से ही पर्यावरण संरक्षण है, जल का पुरर्भरण करना ही जल का उत्पादन करना है और हमंे कुल मिलाकर ये समझना ही होगा कि जल है तो कल है। हमें यह मानना ही होगा कि मानव की जल की आवष्यकता किसी अन्य आवष्यकता से काफी महत्वपूर्ण है। हमें यह समझना और समझाना होगा कि जल सीमित है और विष्व में कुल उपलब्ध जल का 27 प्रतिषत ही मानव उपयोगी है। अब हमें यह गौर करना होगा वर्तमान में इस जल संकट के प्रमुख कारण क्या है।
जल का अंधाधुंध व विवेकहीन प्रयोग जल संकट का सबसे बड़ा कारण है। औद्योगिकरण व जल प्रदूषण के कारण हमारी नदियॉं व जल स्रोत प्रदूषित होते जा रहे हैं और इस कारण पेयजल का संकट उत्पन्न हो रहा है। बढती आबादी के कारण व औद्योगिकरण के कारण जल की मांग बढ़ी है और इस कारण भी जल संकट सामने आया है। बरसाती पानी का समुचित संरक्षण नहीं होने के कारण भी जल संकट की स्थिति बन रही है।
परम्परागत जल स्रोतों के संरक्षण नहीं होने के कारण जल का समुचित भण्डारण नहीं हो पा रहा है और इस कारण भी जल संकट की स्थिति बन रही है। भूमिगत जल के रिचार्ज न होने  के कारण भूमिगत जल का स्तर चिंताजनक स्थिति में घट रहा है और यह जल संकट का महत्वपूर्ण कारण है। जल बंटवारे को लेकर देष में कानून का अभाव है और इस कारण भी जल संकट की स्थितियॉं बन रही है। पारिस्थतिकी में हो रहे अनियंत्रण ने पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ पैदा की है जिस कारण प्रकृति में अकाल व सूखे और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं इस कारण पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है।
इन तथ्यों पर गौर किया जाए तो हमारे सामने काफी भयंकर हालात उत्पन्न होते हैं और स्थितियॉ नहीं बदली तो जल का यह संकट मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर देगा। अतः मानव जाति को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए जल संरक्षण के उपाय करने ही हांेगे। जल संरक्षण के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों पर हम यहॉं चर्चा करेंगे। यह बात गौर करने की है कि प्रकृति हमें इतना पानी देती है कि अगर हम उस पानी को ठीक ढंग से सहेज कर रखें तो कभी भी हमारे सामने जल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। जब बरसात होती है तो बरसात का यह पानी बेकार न जाए इसके हमें मजबूत व पुख्ता इंतजाम करने होंगे। हम अपने घरों की छतों का निर्माण इस प्रकार करें कि बरसात का सारा पानी घर में ही बने एक कुण्ड में इकट्ठा हो जाए। सभी पक्के घरों की छतों की नालियों को पाइपों की सहायता से कुओं, बावड़ियों और तालाबों से जोड़कर इनका पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे बरसात के पानी की एक भी बूंद बेकार नहीं जाएगी और यह पानी हमारे काम भी आएगा। हमारे पूर्वजों ने ऐसी व्यवस्था कर रखी थी और परम्परागत जल स्रोतों का विकास किया था लेकिन हमने इन परम्परागत जल स्रोतों की अनदेखी की और इनको ठुकराया। हमें अपने आस पास के परम्परागत जल स्रोतों को सुधारना होगा और इनके पायतन व आगोर की रक्षा करनी होगी ताकि जल संरक्षण के ये साधन मानव जाति के लिए वरदान साबित हो सके। हमारा दायित्व है कि हम अपने खेतों में व खुले क्षेत्रों में ऐनिकट का निर्माण करे और हमारे आस पास जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण करें ताकि बरसात का सारा पानी भूमि के अंदर जा सके और भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ सके क्योंकि भूमिगत जल अब समाप्त होता जा रहा है और डार्क जोन का क्षेत्र हमारे देष में बढ़ता ही जा रहा है।
हमें हमारी दैनिक दिनचर्या मंे भी परिवर्तन करेन होंगे। जैसे कुल्ला करते वक्त टोंटी या नल बंद करके पानी काम में ले और अच्छा तो ये हो कि हम मग में पानी लेकर कुल्ला करें, इसी तरह सीधा नल से नहाने की बजाय हम बाल्टी में पानी भरकर नहाएॅं, इसी तरह पाखाने में पानी फ्लष से न चलाकर बाल्टी भर कर पानी फेंक दे और अपने बाग बगीचों में पाइप की बजाय बाल्टी से पानी दें, इसी तरह कार, मोटरसाईकिल, स्कूटर जैसे अपने वाहनों को पाइप की बजाय बाल्टी भर कर धोये। हम अपने घरों में पानी को लीक न होने दें, अगर किसी भी प्रकार का लीकेज हो रहा हो तो उसे तुरंत सुधारें क्योंकि हम लीकेज दिन भर में सैंकड़ों लीटर पानी व्यर्थ बहा देता है। हमारे किसान भाईयों को भी हालात को समझते हुए अब कम पानी की फसलों का उत्पादन करना होगा जैसे बाजरा, मूंग, मोठ आदि आदि। किसान भाई बूंद बूंद सिंचाई पद्धति व फव्वारा सिंचाई पद्धति अपनाकर भी पानी की बचत में अपना महत्वपूर्ण योगदान  दे सकते हैं।
इसी के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि हम एक ही जल का बार बार प्रयोग करें जैसे जिस पानी से नहाते हैं उस से कच्चा फर्ष धोया जा सकता है और ऐसे पानी से ग्रामीण क्षेत्रांे में उपले बनाए जा सकते हैं इसी प्रकार औद्योगिक इकाईयो में पानी को साफ करने के प्लांट लगाए जा सकते हैं ताकि खराब पानी वापस काम आ जाए। इस तरह दैनिक जीवनचर्या में छोटे छोटे सुधार करके मानव जाति के इस महान व पुनीत कार्य में प्रत्येक व्यक्ति अपना योगदान दे सकता है।
अंत मे यही कहना चाहूॅंगा कि जल के प्रति स्वामित्व का भाव रखें और यह बात समझे कि जल का विकल्प नहीं है। समाज का हर वर्ग इसके लिए आगे आए। षिक्षक व विद्यार्थी अपने प्रयासों से समाज में उदाहरण पैदा करें, पत्रकार इस संबंध में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करें, राजनैतिक दल जल के इस मुद्दे को देष की केन्द्रीय राजनीति में लाए, समाजसेवी संगठन लोगों को जागरूक कर आम जन की सहभागिता इस कार्य में लें और इर तरह प्रत्येक वर्ग अपने अपने दायित्व को समझ कर उसका निर्वहन करंे तथा जल संरक्षण की इस बात को घर घर पहुॅंचाए। जीवन के इस अमूल्य तत्व की सुरक्षा का दायित्व देष के प्रत्येक नागरिक पर समान भाव से है। एक प्रसिद्ध विद्वान ने कहा था कि विष्व में तीसरा विष्वयुद्ध पानी के कारण होगा और रावला घड़साना जैसे आंदोलन व कावेरी जल विवाद जैसी समस्याएॅं कहीं इस इस भावी विष्वयुद्ध की प्रतिध्वनि तो नहीं है। हमें जल संकट ही इस आहट को पहचानना होगा और इसके लिए सतत प्रयास करने होंगंे।

(साई फीचर्स)