सोमवार, 19 मार्च 2012

गहरा रहे हैं मनमोहन सरकार पर संकट के बादल


गहरा रहे हैं मनमोहन सरकार पर संकट के बादल

त्रणमूल के बाद डीएमके ने तरेरी आंखें



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने भले ही लंबी जद्दोजहद के बाद त्यागपत्र दे दिया हो पर केंद्र में कांग्रेसनीत संप्रग सरकार पर से संकट के बादल छटने के बजाए गहराते ही जा रहे हैं। त्रणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की प्रेशर टेक्टिस के बाद अब डीएमके ने भी केंद्र सरकार की कालर पकड़ने का मन बना लिया है। एनसीटीसी और श्रीलंका में तमिलों के हालात के मुद्दे पर केंद्र में अहम सहयोगी डीएमके सरकार से किनारा करने के मूड में है। डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के आवास पर पार्टी के आला नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में तय हुआ कि यदि केंद्र सरकार श्रीलंका में युद्ध अपराधों पर संयुक्घ्त राष्ट्र में प्रस्ताव का समर्थन नहीं करती है तो डीएमके के मंत्री सरकार से अलग हो जाएंगे।
डीएमके के सूत्रों के अनुसार एक ओर जहां डीएमके के अधिकतर नेता चाहते हैं कि मंगलवार को ही अपने मंत्रियों को मनमोहन सरकार से अलग कर लिया जाए और सरकार को बाहर से समर्थन देते रहें वहीं केंद्रीय मंत्री एम के अलागिरी और कुछ अन्य का मानना है कि इस तरह का कड़ा फैसला 23 मार्च के बाद ही लिया जाना चाहिए जब यूएन में प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है। उधर, डीएमके सांसद एम कनिमोझी ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी जिससे डीएमके अपने मंत्रियों को केंद्र से हटाने पर मजबूर हो जाए। डीएमके और तमिलनाडु में उसकी धुर विरोधी एआईडीएमके केंद्र सरकार से यूएन में प्रस्घ्ताव का समर्थन करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मसले पर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है।
उधर, रेल किराए बढ़ाने को आधार बनाकर त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी के बहाने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने  का प्रयास जारी है। सूत्रों का कहना है कि इसी आधार पर ममता रेल बजट पास कराने के बहाने केंद्र सरकार से खाली खजाने वाले पश्चिम बंगाल के लिए केंद्र सरकार से खासा पैकेज झटकने में सफल हो सकतीं हैं।
देश में पहला मौका होगा जब रेल मंत्री ने बजट पेश करने के बाद उसके पारित हुए बिना ही अपने पद से त्यागपत्र दे दिया हो। उन्होंने कल नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि इस फैसले के बारे में वे तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी से बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने रेलवे के हित में कार्य करने का प्रयास किया। रेल मंत्री ने कहा कि सिपाही की तरह उन्हें पार्टी के अनुशासन का पालन करना चाहिए। उन्हें यही सिखाया गया है। वे तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी और पूरे मंत्रिमंडल सहित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने मुझे यह अवसर दिया। रेलवे की भलाई के लिए जितना वे कर सकता थे, उन्होंने किया।
त्रिवेदी ने राजधानी दिल्ली में स्थित अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि वे रेल मंत्रालय से चिपके रहना नहीं चाहते लेकिन वहां से भागना भी नहीं चाहते। प्रधानमंत्री को उस पर (त्यागपत्र) निर्णय करना है. मंत्रालय में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। रेलवे किसी की जागीर नहीं है। त्रिवेदी ने कहा कि ममता को यह लिखित में देना चाहिए कि उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए।
इस नाटकीय घटनाक्रम के उपरांत सुश्री ममता बनर्जी कल देर रात नई दिल्ली पहुंच गईं। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे आज तृणमूल कांग्रेस के सांसदों से मिलेंगी। वे राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर मतदान से पहले अपने सांसदों से मिल रही हैं। राष्घ्ट्रपति के धन्घ्यवाद प्रस्घ्ताव में संशोधन की मांग करने का प्रस्ताव बीजेपी ने पेश किया था, जिसे मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस ने भी इसी तरह का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे तकनीकी वजहों से खारिज कर दिया गया। ऐसे में अभी तक साफ नहीं है कि ममता की पार्टी यूपीए के खिलाफ वोट करेगी या नहीं।
गौरतलब है कि यह प्रचारित किया जा रहा है कि तृणमूल सुप्रीमो एनसीटीसी और रेल बजट में किराए में बढोतरी से बेहद नाराज हैं और आखिरकार उन्होंने अपनी ही पार्टी कोटे से रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा भी ले लिया है। अब सूत्रों के जरिए मीडिया में आई खबरों में कहा जा रहा है कि ममता की पार्टी मतदान के खिलाफ वोट नहीं करेगी। लेकिन उनकी पार्टी विरोध जताने के लिए मतदान का बहिष्कार कर सकती है।

रमन सिंह हैं आदिवासियों के सच्चे हितैषी


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  77

रमन सिंह हैं आदिवासियों के सच्चे हितैषी

आदिवासियों की जमीनें सुरक्षित करने की दिशा में भाजपा की सार्थक पहल



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। उद्योग के नाम पर देश भर में आदिवासियों की जमीन हथियाने वाले बड़े घरानों पर नकेल कसने के लिए छत्तीसगढ़ सूबे की रमन सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सुध लेना आरंभ किया है। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जमीन पर नगरें गड़ाए बैठे देश भर के बड़े औद्योगिक घरानों को रमन सरकार झटका देने के मूड में दिख रही है। इधर, भाजपा की ही शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार बड़े उद्योगपतियों के सामने घुटने टेककर आदिवासियों के हितों परा हेाता कुठाराघाट साफ देख रही है।
गौरतलब है कि देश भर में आदिवासियों की जमीनों को औने पौने दामों पर खरीदे जाने के उपरांत विद्रोह के स्वर स्थानीय स्तर पर प्रस्फुटित होने लगते हैं। चतुर सुजान उद्योगपतियों द्वारा स्थानीय स्वार्थी और धन लोलुप राजनैतिक दलों के नुमाईंदों और मीडिया के सामने कुछ टुकड़े डालकर इस विरोध के शमन का कुत्सित प्रयास किया जाता रहा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि संघ के निर्देश पर छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले साल गर्मियों में ही संभागायुक्तों को पाबंद किया था कि जिलेवार रिकार्ड खंगाले जाएं और आदिवासियों की जमीनें उन्हें वापस की जाएं। इसका पहला ही झटका पिछले साल जुलाई में वीडियोकोन समूह को लगा था।
सूत्रों की मानें तो छत्तीगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में वीडियोकोन पावर प्लांट के लिए जमीन की खरीदी प्रदेश के प्रदेश के गृह मंत्री ननकी राम कंवर के पुत्र संदीप के नाम पर ही करवा दी गई थी। संघ के निर्देश के उपरांत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कड़े दिशा निर्देश जारी करते हुए आदिवासियों की जमीनों को उन्हें लौटाने की कवायद आरंभ कर दी थी।
विडम्बना ही कही जाएगी कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड के आदिवासियों, जल जंगल और जमीन को परोक्ष तौर पर दौलतमंद गौतम थापर के पास रहन रख दिया गया है और बावजूद इसके केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

लोक बिल और सब्सिडी बिल पर सभी से चर्चा: मुखर्जी


लोक बिल और सब्सिडी बिल पर सभी से चर्चा: मुखर्जी

काले धन से निपटने आठ आयकर कार्यालय विदेशों में



(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के लोक वित्त और सब्सिडी बिल पर पड़ने वाले विपरीत असर की समस्या से निपटने के लिए सभी संबद्ध पक्षों से सलाह मशविरा कर फैसला लेगी। श्री मुखर्जी ने रविवार को नई दिल्ली में उद्योगपतियों के साथ बजट पश्चात बातचीत में उनसे आर्थिक विकास की गति तेज करने के लिए सहयोग देने को कहा।
उन्होंने कहा कि भारत पर भी यूरो जोन के संकट का असर पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल, अनिश्चितता की स्थिति और विकासशील देशों में कमजोर आर्थिक विकास का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विपरीत असर की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, राजनीतिक संगठनों और उद्योग जगत को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में लगातार बढ़ोतरी, कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय तक मंदी तथा काफी लंबे समय से विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि में अस्थिरता जैसे मामलों से सरकार राजनीतिक दलों, उद्योगों तथा सभी लोगों को एकसाथ मिलकर निपटने की जरूरत है। श्री मुखर्जी ने कहा कि कुछ राजनीतिक विवशताओं के कारण उन्हें बजट बनाने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ी है।
उधर, विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन की समस्या से निपटने के लिए विदेशों में आठ नये आयकर कार्यालय खोलने के वास्ते वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अगले वित्त वर्ष के बजट में आवंटन बढ़ाकर लगभग नौ गुणा करने का प्रस्ताव किया है। इस बजट में इसे १८ करोड़ बीस लाख रुपये कर दिया गया है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह दो करोड़ ४१ लाख रुपये था।
ये कार्यालय अमरीका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, साइप्रस, जमर्नी, फ्रांस, जापान और संयुक्त अरब अमीरात में खोले जाएंगे। ये, भारतीय कर कानूनों और प्रक्रियाओं को समझने में वहां के निवेशकों की  मदद करेंगे। इन कार्यालयों में वरिष्ठ आयकर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो अंतर्राष्ट्रीय कर संधियों और कर चोरी के मामलों के विशेषज्ञ होंगे। सिंगापुर और मॉरिशियस में दो हजार दस  से इस प्रकार का कार्यालय काम कर रहा है।

इंटरनेट के प्रति सरकार संजीदा


इंटरनेट के प्रति सरकार संजीदा

(यशवंत श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। सरकार ने दो हजार सत्रह तक १७ करोड़ ५० लाख और दो हजार बीस तक ६० करोड़ ब्रोडबैंड कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है। ये कनेक्शन कम से कम दो मेगाबाइट्स प्रति सेकेण्ड की डाउंनलोड स्पीड पर दिये जायेंगे। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सचिन पायलट ने संसद में बताया  है कि दिसंबर दो हजार ग्यारह तक देश में कुल एक करोड़ ३३ लाख ५० हजार ब्रोडबैंड कनेक्शन दिये जा चुके थे। उन्होंने बताया कि गोवा और  महाराष्ट्र में सबसे अधिक २३ लाख ५५ हजार कनेक्शन दिये गये हैं। दस लाख १५ हजार कनेक्शनों के साथ दिल्ली का स्थान पांचवां है।

ठंड का मजा खत्म अब झुलसने को हो जाईए तैयार

मौसम ने बदला मिजाज, गर्मी ने दी दस्तक



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। कहा जाता है कि देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में सारे मौसम पूरी तरह मेहरबान रहते हैं। बारिश इस कदर की कोई सूखा ना बचे, ठंड एसी कि हाड जम जाए और गरमी तो बस मत पूछिए इस कदर कि लोग बेहोश तक हो जाते हैं। खून जमाने वाली ठंड से लगातार आज़िज आ चुके लोग इस समय गुलाबी ठंड का मजा ले रहे हैं, पर सोमवार से मोसम के तेवर तल्ख होने वाले हैं।
इस सप्ताह भगवान भास्कर अपने पूरे शबाब पर आने वाले हैं। इस सप्ताह में ही पारा 37 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ऊपर पहुंच सकता है। न्यूनतम तापमान भी 19 डिग्री सेल्सियस यानी सामान्य से काफी ऊपर पहुंच सकता है। बीते 24 घंटे के दौरान दिल्घ्ली-एनसीआर का अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से करीब छह डिग्री अधिक है।
हवा में नमी की मात्रा 88 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि सोमवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री तक पहुंच सकता है। इस दौरान न्यूनतम तापमान 19 डिग्री रहने की उम्मीद है। मंगलवार को भी तापमान 37 डिग्री रहने की उम्मीद है। हालांकि इसके अगले दिन यानी बुधवार को पारा 34 डिग्री तक खिसकेगा।
मौसम विभाग के मुताबिक इन दिनों एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों के ऊपर सक्रिय है। ऐसे में न सिर्फ दिल्ली बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्‍थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तापमान में तीन से पांच डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मौजूदा सिस्टम का प्रभाव खत्म होने के बाद तापमान में गिरावट शुरू होगी और अधिकतम तापमान 31-32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।
मौसम विभाग के सूत्रों का कहना है कि ठंड की तरह ही इस बार गरमी का तेवर भी काफी तीखा रहेगा। अगले तीन महीनों के अधिकांश दिनों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि एक्सट्रीम वेदरकी पुनरावृत्ति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि लंबे समय तक लोगों को तैयार रहना चाहिए। ऐसे में इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस बार भीषण गरमी से दिल्लीवालों को दो-चार होना पड़ेगा, वो भी काफी लंबे समय के लिए।
इस बार दशकों बाद दिल्ली-एनसीआर में विंटर सीजन इतना लंबा हुआ। यहां तक कि मार्च के पहले पखवाड़े में भी ठंड ने अपना बखूबी एहसास कराया। मौसम विभाग के आंकड़े के मुताबिक बीते जनवरी और फरवरी महीने में औसत तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया।

अखिलेश ने फेंटे पत्ते: 50 विभाग रखे अपने पास


अखिलेश ने फेंटे पत्ते: 50 विभाग रखे अपने पास

राजा भैया का नहीं टूट रहा जेल से नाता



(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अंततः अपनी कैबनेट में विभागों का बटवारा कर ही दिया है। अखिलेश ने आधा सैकड़ा विभाग अपने पास ही सुरक्षित रखे हैं। उधर, बार बार जेल जाने के लिए मशहूर राजा भैया का नाता मानो जेल से छूट ही नहीं पा रहा है, राजा भैया को अखिलश यादव ने जेल विभाग की जिम्मेवारी सौंपी है।
गौरतलब है कि पोटा और गैंगस्टर एक्ट समेत कई संगीन मामलों में आरोपी रहे कुंडा के निर्दलीय विधायक राजा भैया मुलायम सिंह की सरकार में साल 2005 में भी मंत्री रह चुके हैं। शपथ ग्रहण के बाद बतौर सीएम अखिलेश यादव ने कहा था कि राजा भैया के खिलाफ सभी मुकदमे राजनीतिक साजिश के तहत दर्ज किए गए हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पास सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गृह गोपन सतर्कता नियुक्ति, कार्मिक सूचना, आबकारी, उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा सहित 50 विभाग अपने पास रखे हैं। जबकि मंत्रिपरिषद के वरिष्ठतम मंत्री आजम खां को संसदीय कार्य मुस्लिम वक्फ नगर विकास जल आपूर्ति नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज विभाग की जिम्मेदारी दी है।
सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव को लोक निर्माण और सिंचाई विभाग, अहमद हसन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के साथ परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु कल्याण डा वकार अहमद शाह को श्रम एवं सेवा योजन विभाग आवंटित किया गया है। राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह को परिवहन आनंद सिंह को कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान तथा धर्मार्थ कार्य, अम्बिका चौधरी राजस्व सहायता एवं पुनर्वास, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया खाद्य एवं रसद तथा कारागार, बलराम यादव को पंचायती राज, अवधेश प्रसाद को समाज कल्याण अनुसूचित एवं जनजाति कल्याण तथा सैनिक कल्याण विभाग दिया गया है।

गुप्‍ता होंगे यूपी के नए महाधिवक्‍ता


गुप्‍ता होंगे यूपी के नए महाधिवक्‍ता

(दीपाली सिन्हा)

लखनऊ (साई)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य प्रकाश गुप्ता प्रदेश के नए महाधिवक्ता बनाए गए हैं। 83 वर्ष के गुप्ता 1995 में भी महाधिवक्ता रह चुके हैं। वे संवैधानिक मामलों के साथ ही सिविल एवं कंपनी मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
मुरादाबाद में जन्मे एसपी गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 1960 में वकालत शुरू की थी। 1979 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया। वे एडवोकेट एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने ही हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों की नियुक्ति व स्थानांतरण का बहुचर्चित केस लड़ा था जिसमें वह खुद ही याची भी थे।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की हार के बाद मायावती शासन में महाधिवक्ता रहे ज्योतींद्र मिश्र ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से ही इस पद पर नियुक्ति के लिए कई नामों की चर्चा चल रही थी जिसमें रविवार को एसपी गुप्ता के नाम पर मुहर लग गई।

विदेश पर्यटकों को छोड़ने पटनायक की अपील


विदेश पर्यटकों को छोड़ने पटनायक की अपील

(प्रतिभा सिंह)

भुवनेश्वर (साई)। ओड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने माओवादियों से अपील की है कि वे अगुवा किये गये इटली के दो पर्यटकों को मानवता के आधार पर तुरंत छोड़ दें। उन्होंने कहा कि सरकार अपहरणकर्ताओं के साथ कानून के अंतर्गत हर तरह की बातचीत करने के लिए तैयार है।
उधर, विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने इस बारे में नवीन पटनायक से बातचीत की है। श्री पटनायक ने उन्हें दोनों पर्यटकों की रिहाई के लिए किये जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों के बारे में बताया। श्री कृष्णा इस सिलसिले में इटली के भी संपर्क में हैं और उन्हें ताजा घटनाक्रम की जानकारी दे रहे हैं।
इन दोनों पर्यटकों का कल रात ओड़ीशा में कंधमाल के सीमावर्ती जनजातीय बहुल गंजम जिले से  अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता, सुरक्षा बलों द्वारा उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं। माओवादियों ने ओड़ीशा सरकार के सामने १३ मांगे रखीं हैं। उन्होंने सरकार को ये मांगे पूरी करने के लिए कल तक का समय दिया है।

शनिवार, 17 मार्च 2012

नाथ और स्वराज का रहा रेल बजट में बोलबाला


नाथ और स्वराज का रहा रेल बजट में बोलबाला

प्रदेश के क्षत्रप बोने ही साबित हुए दिनेश त्रिवेदी के आगे

दिल्ली भोपाल छिंदवाड़ा दौड़ सकती है राजधानी एक्सप्रेस



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। रेल किराया बढ़ाकर भले ही रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से बैर मौल लेने का स्वांग कर देश को पार्टी से उपर बता दिया हो पर रेल बजट में मध्य प्रदेश के दो क्षत्रपों ने बाजी मार ली है। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र को रेल बजट में भारी सौगात मिल गई है। मध्य प्रदेश के बाकी सांसदों ने अपने अपने क्षेत्र के विकास में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई है।
सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा में रेल मंत्री ने हाई हार्स पावर के डीजल इंजन के ट्रेक्शन आल्टरनेटर्स के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि विदिशा सदा से ही भाजपा का गढ़ रहा है। विदिशा से पहले भाजपा के शिवराज सिंह चौहान सांसद रहे हैं, इसके बाद अब सुषमा स्वराज यहां से सांसद हैं। कांग्रेस के गढ़ रहे धार, झाबुआ, मण्डला जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की न तो कांग्रेस ने ही सुध ली और ना ही केंद्र सरकार ने।
उधर छिंदवाड़ा के अजेय योद्धा कमल नाथ ने अपने प्रभावों और संपर्कों का पूरा पूरा लाभ उठाया। छिंदवाड़ा को इस रेल बजट में सबसे ज्यादा सौगातें मिली हैं। छिंदवाड़ा के परासिया को माडल रेल्वे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही साथ छिंदवाड़ा से दिल्ली सराय रोहिला चलने वाली रेलगाड़ी को अब सात दिन कर दिया गया है। पांढुर्णा सौंसर के रेल मार्ग के यातायात सर्वेक्षण के लिए वर्ष 2011 -12 के बाद अब नए वित्तीय वर्ष के लिए भी राशि का आवंटन किया गया है।
आमला से छिंदवाड़ा एकल रेल पथ के दोहरीकरण के सर्वेक्षण के लिए भी नए वित्तीय वर्ष में राशि का आवंटन किया गया है। छिंदवाड़ा से करेली होकर सागर एवं छिंदवाड़ा से गाडरवाड़ा, बड़ा मल्हारा होकर खजुराहो रेल पथ के यातायात सर्वेक्षण के लिए भी इस बजट में राशि का आवंटन किया गया है।
कमल नाथ की सबसे बड़ी उपलब्धि छिंदवाड़ा से नागपुर के निर्माणाधीन रेलखण्ड को विद्युतीकृत कराना है। इस बजट में आमला से परासिया होकर छिंदवाड़ा एवं छिंदवाड़ा नागपुर रेलखण्ड के विद्युतीकरण का प्रस्ताव है। अगर इस रेलखण्ड का विद्युतीकरण हो जाता है तो दिल्ली से भोपाल होकर छिंदवाड़ा राजधानी एक्सप्रेेस के दौड़ने के मार्ग प्रशस्त हो जाएंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के करीबी सूत्रों का कहना है कि जैसे ही इस रेलखण्ड का विद्युतीकरण हो जाएगा वैसे ही सतपुड़ा की सुरम्य वादियों वाले पातालकोट को आधार बनाकर दिल्ली से छिंदवाड़ा राजधानी एक्सप्रेस को दौड़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
यहां गौरतलब होगा कि सालों से इटारसी से जबलपुर कटनी रेखण्ड में अप डाउन दोनों ही रेल मार्ग होने के बाद भी यह विद्युतीकरण की बाट जोह रहा है। इसके साथ ही साथ सिवनी से बरघाट होकर कटंगी एवं सिवनी से छपारा लखनादौन के यातायात का सर्वेक्षण भी इस बजट में शामिल किया गया है। सिवनी से बरघाट कटंगी बालाघाट संसदीय क्षेत्र में तो छपारा लखनादौन मूलतः मण्डला संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।
इसको लेकर भी राजनीति आरंभ हो गई है। बालाघाट के भाजपा सांसद केशव दास देशमुख ने दोनों ही रेल खण्डों का सर्वेक्षण अपने ही खाते में डाल दिया है। उधर मण्डला से सांसद बसोरी सिंह मसराम इस मामले में सदा की ही भांति मौन साधे हुए हैं। बताया जाता है कि इस समय सांसद महोदय डिंडोरी जिले में अपने गृह ग्राम में मकान के निर्माण में व्यस्त हैं। बसोरी सिंह मसराम के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे अपने मकान के लिए निर्माण सामग्री छत्तीसगढ़ से आयात करवा रहे हैं, जिसका कारण अभी भी अज्ञात ही है।
गौरतलब है कि सौ साल से अधिक पुरानी छिंदवाड़ा से सिवनी नैनपुर मण्डला फोर्ट और बालाघाट से जबलपुर रेलखण्ड के अमान परिवर्तन के लिए इस बजट में राशि का प्रावधान नहीं किया गया है। इस नेरो गेज को ब्राडगेज करने के मामले में सांसद केशव दास देशमुख ने मौन ही साधा हुआ है।
मध्य प्रदेश के खाते में जो अन्य सौगातों में इटारसी जबलपुर कटनी माणिकपुर रेलखण्ड का विद्युतीकरण, बीना कोटा का विद्युतीकरण, इंदौर उज्जैन देवास मक्सी, इंदौर बेतूल के यातायात सर्वेक्षण, लामटा परसवाडा बैहर का यातायात सर्वे, सागर से मालथौन ललितपुर नई रेल लाईन का यातायात सर्वे, सतना मिर्जापुर नई रेललाईन का यातायात सर्वे, के अलावा बुरहानपुर, दमोह, खण्डवा, मदन महल, उज्जैन को माडल स्टेशन बनाया जाना शामिल है।

. . . इसलिए नाराज हैं त्रिवेदी से ममता


. . . इसलिए नाराज हैं त्रिवेदी से ममता

दिनेश का कार्पोरेट कल्चर रास नहीं आ रहा ममता को



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। त्रणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के बीच रार बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस के एक केंद्रीय मंत्री के खासुलखास मुकुल राय के नए रेल मंत्री बनने के मार्ग तेजी से प्रशस्त होते दिख रहे हैं। सियासी गलियारों में अब ममता बनर्जी और दिनेश त्रिवेदी के बीच कडवाहट के कारण खोजे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी को दरअसल, दिनेश त्रिवेदी की कार्पोरेट सोच रास नहीं आ रही है।
भारत गणराज्य के इतिहास में संभवतः यह पहला ही मौका होगा जब रेल मंत्री द्वारा बढ़ाए गए यात्री किराए का उन्हीं की पार्टी द्वारा घुर विरोध किया गया हो। पहली ही बार एसा हुआ होगा जब देश के वज़ीरे आज़म को सदन में यह सफाई देना पड़ा हो कि फलां शख्स ही देश के रेल मंत्री हैं। सदन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने सरकार से साफ करने को कहा कि यह बताया जाए कि दिनेश त्रिवेदी देश के रेल मंत्री हैं या नहीं। इस पर मनमोहन सिंह को मजबूरन कहना पड़ा कि दिनेश त्रिवेदी ही देश के रेल मंत्री हैं।
ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों का कहना है कि रेल बजट तैयार होने के बाद ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी साख बचाने के चक्कर में रेल किराया बढ़ाने का विरोध करने का स्वांग रचा था। सूत्रों की मानें तो ममता को रेल बजट के बारे में सब कुछ पहले से ही पता था। पर अगर रेल मंत्री इस बात को स्वीकार करते तो बजट की गोपनीयता भंग होने के आरोपों से निपटना काफी मुश्किल होता।
सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी के संज्ञान में इस बात को लाया गया है कि दिनेश त्रिवेदी द्वारा कार्पोरेट कल्चर अपनाया जा रहा है। बड़े उद्योगपतियों से वे अपने घर पर मिलकर वारे न्यारे करने में जुटे हुए हैं। इस बात में सच्चाई कितनी है यह तो वे ही आने किन्तु ममता बनर्जी को यह भी बताया गया है कि दिनेश त्रिवेदी द्वारा त्रणमूल के कार्यकर्ताओं और ममता बनर्जी के खासुलखास लोगों से पर्याप्त दूरी बना ली गई है।
चर्चा है कि पश्चिम बंगाल में खासी दखल रखने वाले कांग्रेस के एक केंद्रीय मंत्री के बेहद करीबी मुकुल राय को रेल मंत्री बनवाने हेतु लाबिंग आरंभ हो चुकी है। इधर, ममता के करीबी सूत्रों ने यह भी बताया कि इस बार रेल बजट में दिनेश त्रिवेदी ने अनेक घोषणाएं उक्त केंद्रीय मंत्री की सिफारिश पर ही की हैं। यह सब डिनर डिप्लोमेसी में ही तय हो गया था कि उक्त केंद्रीय मंत्री के इशारे पर क्या क्या किया जाना है रेल बजट में।
इधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी और त्रणमूल कांग्रेस द्वारा रेल बजट का विरोध कर एक तीर से कई निशाने साधे जा रहे हैं। पीएमओ के सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी रेल बजट का विरोध कर दिनेश त्रिवेदी को साईज में लाने के साथ ही साथ अपने हित साधना चाह रही हैं। रेल बजट पास करवाने जब कांग्रेस द्वारा त्रणमूल कांग्रेस को राजी करने का प्रयास किया जाएगा तब ममता बनर्जी केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल के लिए अच्छा खास पैकेज झटक लेंगी।

संघ ने कुलस्ते को दिया राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल


संघ ने कुलस्ते को दिया राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश में रिक्त होने वाली राज्य सभा सीटों पर घमासान तेज हो गया है। पांच सदस्य इस साल दो अप्रेल को सेवानिवृत होने वाले हैं। उनके स्थान पर नए चेहरों की तलाश भाजपा और कांग्रेस में तेज हो गई है। विधायकों की तादाद के हिसाब से इस बार एक सीट कांग्रेस तो तीन सीट भाजपा को मिलेगी और एक पर टसल रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
कांग्रेस की एक सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की दावेदारी सबसे प्रबल है। उत्तराखण्ड में सुरेश पचौरी की रणनीति कारगर रही और वहां कांग्रेस की सरकार काबिज हो गई है। गौरतलब है कि वैसे भी सुरेश पचौरी कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के बेहद करीबी और विश्वस्त हैं। पहले भी चार बार राज्य सभा के रास्ते सुरेश पचौरी चोबीस साल तक केंद्रीय राजनीति में रहे हैं। कांग्रेस द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व राज्य सभा प्रत्याशी रहे विवेक तन्खा पर एक बार फिर दांव लगाने का विचार बनाया जा रहा है।
उधर, भाजपा में सेवानिवृत्त होने वाले मेघराज जैन, नारायण सिंह, कप्तान सिंह सोलंकी, विक्रम वर्मा और अनुसुईया उईके पुनः राज्यसभा में दावेदारी के लिए लालायित दिख रहे हैं। छिंदवाड़ा मूल की राज्य सभा सदस्य अनुसुईया उईके द्वारा राज्य सभा के छः साल के कार्यकाल में छिंदवाड़ा में भाजपा को लाभ न दिला पाने के चलते उनकी पुर्नवापसी संदिग्ध ही प्रतीत हो रही है। कांग्रेस के कद्दावर नेता कमल नाथ की घुर विरोधी समझी जाने वालीं अनुसुईया उईके ने कमल नाथ के कद को भी छिंदवाड़ा में कम नहीं किया है।
दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंजके भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि नोट फार वोट कांड में प्रताड़ित हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह उईके को अनुसुईया उईके के स्थान पर राज्य सभा में भेजने के लिए संघ के आला नेताओं ने अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। शेष नामों पर अभी संघ के आला नेता सर जोड़कर बैठे हुए हैं।