रविवार, 17 जून 2012

कलेक्टर दिलाएंगे अनाथ बच्चों को तालीम


कलेक्टर दिलाएंगे अनाथ बच्चों को तालीम

(अभय नायक)

रायपुर (साई)। नक्सली हिंसा में मां बाप को खो चुके बच्चों की शिक्षा दीक्षा का बीड़ा उठाकर राजनांदगांव के जिला कलेक्टर ने एक परमार्थ का काम आरंभ किया है। राजनांदगांव के युवा कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने नक्सली हिंसा में अनाथ हुए बस्तर के आदिवासी बच्चों को तालीम दिलाने का बीड़ा उठाया है। उनके प्रयास से दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर जिलों के 138 बच्चे राजनांदगांव जिले के ऐसे अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जिनमें गरीब लोग अपने बच्चों को पढ़ाने की सोच भी नहीं सकते।
इनमें दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), युगांतर और इंडियन पब्लिक स्कूल जैसे दर्जन भर उम्दा शैक्षणिक संस्थान हैं, जिनकी सालाना फीस एक से डेढ़ लाख रुपए तक है। इनमें कई बोर्डिंग स्कूल हैं, जहां आदिवासी बच्चों के रहने, खाने-पीने समेत किताब-कॉपी का खर्च भी स्कूल प्रबंधन उठा रहा है। जिन स्कूलों में छात्रावास नहीं हैं, वहां बच्चों के लिए सरकारी छात्रावास का इंतजाम है।
इनमें से कई बच्चों के मां-बाप लाल आतंक के शिकार हो चुके थे। उनकी परवरिश करने वाला कोई रिश्तेदार भी नहीं बचा था। बीजापुर के उसूर गांव की लिपिका डीपीएस में दूसरी क्लास में पढ़ती है। वह बताती है, श्श्रात में खाना खाकर सोने जा रहे थे कि नक्सली धमक आए और मेरे पिता को लेकर जंगल चले गए। दो दिन बाद जंगल से उनकी लाश मिली।श्श् इसी जिले की मीना युगांतर स्कूल में पांचवीं में पढ़ती है। मीना के पिता लछमैया को नक्सलियों ने गांव में गोली मार दी।
2010 में जब इन बच्चों का पब्लिक स्कूलों में दाखिला हुआ था, तब वे ठीक से हिंदी नहीं बोल पाते थे। अधिकांश बस्तर की स्थानीय बोली गोंडी में बात करते थे, मगर अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। दो साल पहले बस्तर में जब नक्सली हिंसा चरम पर थी, तब बच्चों के अनाथ होने की लगातार आ रही खबरों ने परदेशी को झकझोर दिया।
उन्होंने बस्तर संभाग के कलेक्टरों से बात कर ऐसे बच्चों की सूची मंगवाई। इसके बाद राजनांदगांव जिले के बड़े स्कूलों के प्रबंधकों की बैठक ली। बताते हैं, कि पहले तो स्कूल वालों ने ना-नुकूर की मगर फिर तैयार हो गए। परदेशी कहते हैं, श्श्अनाथ बच्चों के बारे में सुनकर मन में टीस उठती थी। इस काम से मुझे सुकून मिलता है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।श्श् उधर, उनके काम को रोल मॉडल मानते हुए राज्घ्य सरकार आदिवासी बच्चों के लिए सभी जिलों में मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना लागू करने जा रही है।
महाराष्ट्र निवासी 34 वर्षीय परदेशी 2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आइएएस अधिकारी हैं। वे लीक से हटकर काम करने वाले अफसर के रूप में जाने जाते हैं। बिलासपुर जिला पंचायत के सीईओ रहने के दौरान रोजगार गारंटी योजना में कई अनोखे काम करने के लिए भारत सरकार ने बिलासपुर को न केवल नंबर वन जिला पंचायत का खिताब दिया था बल्कि 2008 में देश के 480 कलेक्टरों को दिल्ली बुलाकर मनरेगा के बारे में जानकारी से परिचित करवाया गया।
इस घटना के बाद राज्घ्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने परदेशी को पहले अपने गृह जिले कवर्धा और 2010 में अपने निर्वाचन क्षेत्र राजनांदगांव का कलेक्टर बनाया। उन्होंने राजनांदगांव में जल संरक्षण के लिए पिछले साल से अभियान छेड़ा हुआ है। जिसके तहत कई तालाबों और जलाशयों का जीर्णाेद्धार किया गया है।

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