गुरुवार, 5 जनवरी 2012

जानलेवा होता कुहासा!


जानलेवा होता कुहासा!



(लिमटी खरे)

दिसंबर की हाड गलाने वाली ठण्ड के आते ही आवागमन ठहर सा जाता है। पर इस बार तो दिसंबर ने ठण्ड का एहसास ज्यादा नहीं करवाया। नए साल का स्वागत बारिश, बर्फ, ओले मवाठे से हुआ। नए साल में ठण्ड और कोहरे ने देश को जकड़ ही लिया है। वैसे तो समूचे भारत में कोहरे की मार इन दिनों में जबर्दस्त होती है, किन्तु उत्तर भारत विशेषकर झांसी से उत्तर भारत की ओर के इलाकों में कोहरा शनैः शनैः बढता ही जाता है। कोहरे के कारण जन जीवन थम सा जाता है।
आंकडों के अनुसार सडक दुर्घटनाओं में साल दर साल मरने वालों की संख्या में बढोत्तरी के लिए कोहरा एक प्रमुख कारक के तौर पर सामने आया है। अमूमन नवंबर के अंतिम सप्ताह से फरवरी के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्र काहरे की चादर लपेटे हुए रहते हैं। कोहरे के चलते कहीं कहीं तो दृश्यता (विजीबिलटी) शून्य तक हो जाती है। रात हो या दिन वाहनों की तेज लाईट भी बहुत करीब आने पर चिमनी की तरह ही प्रतीत होती है। यही कारण है कि घने कोहरे के कारण सर्दी के मौसम में सडक दुर्घटनाओं में तेजी से इजाफा होता है।
कोहरे के बारे मंे प्रचलित तथ्यों के अनुसार सापेक्षिक आद्रता सौ फीसदी होने पर हवा में जलवाष्प की मात्रा एकदम स्थिर हो जाती है। इसमें अतिरिक्त जलवाष्प के शामिल होने अथवा तापमान में और अधिक कमी होने से संघनन आरंभ हो जाता है। इस तरह जलवाष्प की संघनित सूक्ष्म सूक्ष्म पानी की बूंदें इकट्ठी होकर कोहरे के रूप में फैल जातीं हैं।
पानी की एक छोटी सी बूंद के सौंवे हिस्से को संघनन न्यूक्लियाई अथवा क्लाउड सीड भी कहा जाता है। धूल मिट्टी के साथ तमाम प्रदूषण फैलाने वाले तत्व क्क्लाउड सीड की सतह पर आकर एकत्र होते हैं, और इस तरह होता है कोहरे का निर्माण। वैज्ञानिकों के अनुसार यदि वायूमण्डल में इन सूक्ष्म कणों की संख्या बहुत ज्यादा हो तो सापेक्षिक आद्रता शत प्रतिशत से कम होने के बावजूद भी जलवाष्प का संघनन आरंभ हो जाता है।
दरअसल बूंदों के रूप में संघनित जलवाष्प के बादल रूपी झुंड को कोहरे की संज्ञा दी गई है। कोहरा वायूमण्डल में भूमि की सतह से कुछ उपर उठकर फैला होता है। कोहरे में आसपास की चीजें बहुत ही कम दिखाई पडती हैं, कहीं कहीं तो विजिबिलटी शून्य तक हो जाती है।
देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में दिसंबर से फरवरी तक आवागमन के साधन निर्धारित समय से देरी से ही या तो आरंभ होते हैं अथवा पहुंचते हैं। इसका प्रमुख कारण कोहरा ही है। कोहरे के चलते सडक और रेल मार्ग से आवागमन बहुत धीमा हो जता है। रही बात हवाई मार्ग की तो एयरस्ट्रिप ही कोहरे के कारण नहीं दिखाई देगी तो भला पायलट अपना विमान कहां उतारेगा। अनेकों बार पुअर विजिबिलटी के चलते या तो हवाई जहाज या चौपर घंटों हवा में लटके रहते हैं या फिर आसपास के किसी अन्य एयरापोर्ट पर उतरने पर मजबूर होते हैं।
दरअसल प्रदूषण भी कोहरे के बढने के लिए उपजाउ माहौल पैदा कर रहा है। आंकडे बताते हैं कि 1980 के दशक में देश में घने कोहरे का औसत समय आधे घंटे था, जो बढकर 1995 में एक घंटा और फिर गुणोत्तर तरीके से बढते हुए 2 से 4 घंटे तक पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि साठ के दशक के उपरांत आज घने कोहरे का समय लगभग बीस गुना बढ चुका है।
पिछले साल के आंकडे काफी भयावह ही लगते हैं। दिसंबर 2008 से जनवरी 2009 के बीच दिल्ली में ही साढे सोलह सौ गाडियां विलंब से चलीं। इतना ही नहीं इन दो माहों में 71 उडाने रद्द करनी पडी, साढे सात सौ का समय और लगभग डेढ सौ उडानों का मार्ग बदलना पडा। अनेक बार तो उडान भरने के लिए धूप निकलने का इंतजार करना होता है। धूप में कोहरा धीरे धीरे छटना आरंभ हो जाता है।
कोहरे के कारण रेलगाडियों का विलंब से चलना कोई नई बात नहीं है। रेल चालक को सिग्नल अस्पष्ट दिखाई देने से दनादन चलने वाली रेल गाडियां भी चीटिंयों की तरह रेंगने को मजबूर हो जाती हैं। उत्तर भारत में कोहरे में रेल चालन के लिए पटरी पर पटाके बांधे जाते हैं, जो रेल के इंजन जितना भार पडने पर ही फटते हैं। इनमें पटाखों की संख्या रेल चालक के लिए संकेत का काम करती है।
उत्तर भारत में विशेषक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड, बिहार, आदि में कोहरे का कहर सबसे अधिक होता है। दिल्ली जैसे शहर में एक ओर जहां प्रदूषण कोहरे को बढाने में सहायक होता है, वहीं दूसरी ओर खुले इलाकों में सर्दी के मौसम में खेतों में होने वाली सिचाई कोहरे को पनपने के मार्ग प्रशस्त करती है।
विडम्बना ही कही जाएगी कि इक्कीसवीं सदी में भी भारत ने कोहरे से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना अब नहीं बना सकी है। माना जाता है कि सरकार इस समस्या को साल भर में एक से डेढ माह की समस्या मानकर ही छोड देती है, जबकि वास्तविकता यह है कि कोहरे के चलते देश में हर साल आवागमन के दौरान होने वाली मौतों में से 4 फीसदी मौतें पुअर विजिबिलटी के कारण होती हैं।

(साई फीचर्स)

कार्यकारी अवस्था में किया ही नहीं गया वृक्षा रोपण!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 45

कार्यकारी अवस्था में किया ही नहीं गया वृक्षा रोपण!

कैसे रोकेगा जेपीएल अब प्रदूषण को?

प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का मौन संदिग्ध



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूचि में शामिल देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले में आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में लगने वाले मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के कोल आधारित पावर प्लांट के संयंत्र प्रबंधन द्वारा कार्यकारी अवस्था में अब तक वृक्षा रोपण का काम न किया जाकर भी पर्यावरण बचाने का अद्भुत और अकल्पनीय, हास्यास्पद दावा किया जा रहा है। वृक्षा रोपण न किए जाने पर भी जिला प्रशासन सहित मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कोई कदम न उठाया जाना अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है।
देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका राजनैतिक क्षेत्र में भी इकबाल बुलंद है, के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा दो चरणों में लगाए जा रहे कोल आधारित पावर प्लांट के पहले चरण में संयंत्र प्रबंधन द्वारा जमा कराए गए कार्यकारी सारांश में साफ तौर पर उल्लेखित किया गया था कि संयंत्र में कोयला ज्वलित बायलर वायु प्रदूषण का मुख्य कारक होगा।
इसके दूसरे चरण के लिए सरकार को संयंत्र प्रबंधन द्वारा भेजे गए कार्यकारी सारांश में कहा गया है कि निर्माण चरण के दौरान क्षेत्र में मुख्य प्रदूषक डस्ट अर्थात धूल मिट्टी ही होगी। संयंत्र प्रबंधन का दावा है कि परियोजना स्थल पर निर्माण प्रक्रिया एवं वाहनों की आवाजाही के कारण यह स्थिति निर्मित होगी। निर्माण चरण के दौरान उत्पादन प्रक्रिया द्वारा व्यर्थ जल को एसटीपी उपचारित करके वृक्षारोपण के लिए उपयोग किया जाएगा।
संयंत्र के सूत्रों का कहना है कि संयंत्र के निर्माण का काम दिसंबर 2009 से आरंभ हो चुका है। दो साल बीतने के बाद भी संयंत्र प्रबंधन द्वारा अब तक कोई वृक्षारोपण नहीं किया गया है। गौरतलब है कि 22 नवंबर 2011 को संयंत्र स्थल के करीब गोरखपुर में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा आहूत लोकसुनवाई में मण्डल और जिला प्रशासन के जिम्मेदार आला अफसरान की उपस्थिति में संयंत्र के महाप्रबंधक श्री मिश्रा ने इस बात को स्वीकार किया था कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा 22 नवंबर 2011 तक कोई वृक्षारोपण नहीं किया गया है।
यक्ष प्रश्न यह उठता है कि जब संयंत्र प्रबंधन द्वारा निर्माण स्थल के इर्दगिर्द वृक्षारोपण किया ही नहीं है तो देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका राजनैतिक क्षेत्र में भी इकबाल बुलंद है, के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा दो चरणों में लगाए जा रहे कोल आधारित पावर प्लांट का प्रबंधन आखिर पर्यावरण के प्रदूषण को नियंत्रित करने का दावा किस आधार पर कर रहा है।
यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

लोकपाल बन सकता है मनमोहन की बिदाई का कारण


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 67

लोकपाल बन सकता है मनमोहन की बिदाई का कारण

टीम अण्णा का पुनर्गठन हो गया है जरूरी



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। समाजसेवी अण्णा हजारे द्वारा उठाए गए लोकपाल के मुद्दे पर समूचा देश सालों बाद एकजुट नजर आया। लगने लगा था मानो अब बस क्रांति आने ही वाली है। टीम अण्णा के कुछ सदस्यों की गलत चालों के कारण अण्णा का आंदोलन और उनकी छवि प्रभावित हो रही है, वरना लोकपाल अकेला एसा मामला है जो वजीरे आजम मनमोहन सिंह की बिदाई का प्रमुख कारक बन सकता है।
समूचा देश केंद्र और राज्य सरकारों के हाकिमों के भ्रष्ट रवैए, घपले, घोटाले, अनाचार आदि से त्रस्त नजर आ रहा है। एसी पस्थिति में नेतृत्व के अभाव का फायदा उठाकर देश के ही लुटेरे अपने ही साथियों को तबियत से लूट रहे हैं। इस माहौल में जब लोगों को अण्णा हजारे जैसा बिना किसी स्वार्थ बिना किसी राजनैतिक लाभ के लिए लड़ने वाला बुजुर्ग किन्तु अनुभवी नेता मिला तो सबने अण्णा को एक ही सुर से कहा -‘‘अण्णा, वी मस्ट सेल्यूट यू।‘‘
गौरतलब है कि इससे पहले भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू रामकिशन यादव उर्फ बाबा रामदेव ने भी अनशन आरंभ किया। सरकार के प्रबंधकों को बाबा रामदेव के मन में हिलोरे मार रही राजनैतिक आकांक्षाओं का पता था इसलिए बाबा रामदेव को पार्श्व में ढकेलने में कांग्रेस के रणनीतिकारों को नौ दिन भी नहीं लगे।
वहीं दूसरी ओर अण्णा हजारे का चूंकि राजनैतिक लेना देना नहीं था अतः अण्णा को साईज में लाने में पूरे नौ महीने लग गए। लोकपाल के मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार बुरी तरह घबराई हुई थी। टीम अण्णा की कोर कमेटी के कुछ सदस्यों पर निशाना साधा गया और बार बार उन्हें इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से लोगों को दिखाया गया। एक सर्वेक्षण के मुताबिक अब टीम अण्णा के उन चेहरों से जो बार बार सामने आ रहे हैं जनता आजिज आ चुकी है। यही कांग्रेस और सरकार की जीत है।
कांग्रेस के अंदरखाने में अण्णा का मुंबई आंदोलन असफल होने पर खुशियां मनाई जा रही है। प्रधानमंत्री बेहद खुश बताए जा रहे हैं। पीएमओ के सूत्रों की मानें तो अण्णा के मुंबई आंदोलन को असफल करने और फिर बीमारी के कारण अण्णा के घर बैठ जाने से टीम अण्णा का बैकफुट में आना प्रधानमंत्री के बचाव के लिए काफी मुफीद ही साबित हो रहा है।
वहीं, अब समाजसेवी अन्ना हजारे ने आगामी पांच राज्यों के चुनाव में प्रचार नहीं करने का एलान किया है। टीम अन्ना की अहम सदस्य किरन बेदी ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। कांग्रेस के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है क्योंकि टीम अन्ना के निशाने पर कांग्रेस ही थी. हालांकि जानकारों ने इसे टीम अन्ना के लिए भी राहत की खबर बताया है। जानकारों का कहना है कि मुंबई में आंदोलन के दौरान जिस तरह कम भीड़ जुटी, उससे चुनाव प्रचार में टीम अन्ना को जनता के समर्थन के लिए जूझना पड़ता। इस कदम से टीम अन्ना राहत महसूस करेगी।
किरन बेदी ने कहा, कि अन्ना की तंदुरुस्ती देश के लिए बहुत जरूरी है। अन्ना बीमार हैं और उनको टोटल केयर की जरूरत है। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने के लिए कहा है, इसलिए वह आने वाले चुनावों में प्रचार करने नहीं जाएंगे। बेदी ने बताया कि शनिवार को कोर कमिटी की बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला किया जाएगा।

(क्रमशः जारी)

कोहरे ने ढाई कयामत!


कोहरे ने ढाई कयामत!



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। उत्तर भारत में ठंड बढ़ गई है। घने कोहरे से क्षेत्र में सड़क, रेल और हवाई यातायात बाधित है। दिल्ली में आज सुबह न्यूनतम तापमान लगभग आठ डिग्री सेल्सियस था और घना कोहरा छाया रहा। घने कोहरे के वजह से राजधानी में हवाई और ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। इसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार रनवे पर दृष्यता सीमा लगभग ५० मीटर रही और खराब दृष्यता की वजह से कुछ उड़ाने देर से शुरू हुई। कोहरे की वजह से दो दर्जन से ज्यादा रेलगाड़िया देर से चल रही है। उत्त्र रेलवे ने कोहरे को देखते हुए पहले ही २० गाड़ियों का परिचालन इस महीने के अंत तक रद्द कर दिया है।
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी कोहरे के कारण सामान्य जीवन पर असर पड़ा है। इन क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रेलवे के सूत्रों ने बताया कि कोहरे के कारण पंजाब और हरियाणा से गुजरने वाली कई रेलगाड़ियां घंटों देरी से चल रही हैं। जम्मू-कश्मीर में कश्मीर घाटी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री सेल्शियस नीचे बना हुआ है।
कोहरे के चलते दिल्ली समेत समूचे एनसीआर क्षेत्र में वाहनों की रफ्तार थम गई है। वहीं कोहरे की वजह से बुधवार रात हुए एक सड़क हादसे में एक बाइक सवार की मौत हो गई। बुधवार रात करीब नौ बजे से ही दिल्ली पर कोहरे की चादर छाने लगी थी जो सुबह होने तक काफी मोटी हो गई। सुबह सात बजे तक सड़क पर लगभग पचास मीटर की दूरी तक ही दिखाई दे रहा था। इसके चलते वाहनों की रफ्तार में काफी कमी आई।
कोहरे का असर न सिर्फ सड़क मार्ग पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगने में दिखाई दिया बल्कि इसकी वजह से रेल और हवाई यातायात भी बाधित रहा। कई ट्रेन अपने तय समय से काफी पीछे चल रही हैं। वहीं ठंड और कोहरे के बीच रेलवे स्टेशनों पर यात्री बेहाल हैं। हवाई यात्रा करने वाले भी एयरलाइन के रद्द होने या फिर उसके देरी से आने से परेशान हो रहे हैं। सुबह करीब आठ बजे रनवे पर विजिबिलिटी कुछ सौ मीटर की थी। जिसके चलते कई हवाई जहाजों के मार्ग में परिवर्तन किया गया।
वहीं मौसम विभाग ने कोहरे समेत समूचे उत्तार भारत में ठंड और अधिक बढ़ने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक कुछ घंटों के भीतर दिल्ली समेत एनसीआर क्षेत्र में बारिश भी हो सकती है। ऐसे में लोगों की मुसीबतें बढ़ने के पूरे आसार हैं। उत्तर भारत में बुधवार को शीतलहर का कहर बढ़ने और घने कोहरे के कारण अधिकांश क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित रहा। हिमाचल प्रदेश में मनाली रोहतांग मार्ग पर भारी हिमपात के कारण 200 पर्यटक फंस गए।
हिमाचल प्रदेश के इस क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन की ओर से चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य के बावजूद इलाके में 50 पर्यटक फंसे हुए हैं। सर्दी के कारण गुलमर्ग में प्रकृति की अनोखी छटा देखने को मिली। साथ ही इलाके में कई इलाकों में 15 दिन के अंतराल के बाद हिमपात हुआ। कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के पास सदना टॉप के पास पांच इंच तक बर्फ गिरी।
इसके अलावा बारामुला, कुपवाड़ा के अन्य इलाकों तथा दक्षिणी कश्मीर में अनंतनाग, पुलवामा, सोपियां और कुलगाम जिले में हिमपात हुआ। जवाहर सुरंग के आसपास भी हल्का हिमपात हुआ। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में वर्षा और हिमपात का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।
राष्ट्रीय राजधानी में आज सुबह धूप खिली लेकिन इसके बावजूद ठंड जारी रही। शहर का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक है जबकि अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इस मौसम का सामान्य तापमान है। आज सुबह शहर के उपर कोहरे का आवरण था। मौसम विभाग के अनुसार आज सुबह शहर में दृश्यता का स्तर 500 मीटर था।
कश्मीर घाटी में भी शीत लहर का कहर जारी रहा। घाटी में न्यूनतम तापमान हिमांक बिंदु से कई डिग्री नीचे बना रहा। मौसम विभाग ने बताया कि श्रीनगर का न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 3.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, कल यह शून्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस नीचे था।
दक्षिणी कश्मीर के रिसोर्ट पहलगाम में तापमान शून्य से 3.2 डिग्री नीचे जबकि उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 7.2 डिग्री नीचे सेल्सियस रहा। लद्दाख के सुदूरवर्ती लेह कस्बे में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि कारगिल के पास रात का तापमान शून्य से नीचे 13.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुमान से अगले तीन दिनों में बारिश और बर्फबारी से घाटी में एक माह से चल रहे शुष्क मौसम का अंत होने की संभावना है लेकिन क्षेत्र में शीतलहर का दौर जारी रहेगा।
मौसम विभाग ने बारिश और हिमपात की वजह से एहतियात के तौर पर भूस्खलन और पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवाई यातायात के बाधित होने की चेतावनी दी है। राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। मौसम विभाग ने कहा कि सीकर का न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि चुरू और वनस्थली में रात का तापमान क्रमशरू 5.1 डिग्री और 5.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बीकानेर में न्यूनतम तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस रहा। पंजाब और हरियाणा तथा चंडीगढ़ के कई हिस्सों में घना कोहरा छाने के कारण आज जनजीवन प्रभावित हुआ। इन जगहों पर कड़ाके की ठंड का असर जारी रहा। अमृतसर 3.4 डिग्री सेल्सियस के न्यूनतम तापमान के साथ दोनों राज्यों में सबसे ठंडा स्थान रहा। लुधियाना में रात का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोलकाता में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले में मनाली के निकट गुलाबा में भारी हिमपात के कारण फंसे सैंकड़ों पर्यटकों को कल रात निकाल लिया गया। हमारी शिमला संवाददाता ने खबर दी है कि सभी पर्यटकों को मनाली लाया गया है और अब वे   सुरक्षित हैं। इस बीच क्षेत्र में हिमपात जारी है। सरकारी प्रवक्ता ने पर्यटकों को दूरदराज के क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी है क्योंकि अगले तीन दिनों में भारी हिमपात होने की आशंका है।
जयपुर से साई ब्यूरो ने बताया कि प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की ठण्ड से जन जीवन प्रभावित हो रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी के बावजूद लोगों को सर्दी से राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज माउंट आबू में 2 दशमलव 6 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। सीकर से साई संवाददाता ने बताया कि तेज सर्दी के कारण जिले में जन-जीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। इसके अलावा चूरू में 5 दशमलव 1, वनस्थली और पिलानी 5 दशमलव 3, एरनपुरा रोड में 6 दशमलव 2, सवाईमाधोपुर में 7 डिग्री सैल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में आज लोगों को सर्दी से थोड़ी राहत मिली और तीन दिनों बाद दिन में धूप खिली रही।
उधर लखनऊ स्थित साई ब्यूरो से रश्मि सिन्हा ने खबर दी है कि प्रदेश में चल रही कड़ाके की ठंड से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह घना कोहरा छाये रहने से आवागमन बाधित रहा। लखनऊ में ठंड से बचने के लिए नगर निगम द्वारा जगह-जगह रैन बसेरा बनाया गया है। मुजफ्फरनगर स्थित साई ब्यूरो ने बताया कि जिले में ठंड के कारण आठवी तक के सभी स्कूल आगामी आठ जनवरी तक के लिए बन्द कर दिये गये हैं। यहॉ का विनिमम तापमान छः डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। 
उधर शिमला स्थित साई ब्यूरो का कहना है कि कुल्लू जिला के मनाली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते गुलाबा व मढी के पास फंसे लगभग एक सौ पर्यटकों को सुरक्षित निकाल दिया गया है। कुल्लू स्थित साई संवाददाता के अनुसार अचानक हुई तेज बर्फबारी में ये पर्यटक गुलाबा तथा मढी क्षेत्रों में फंसे हुए थे। कल शाम सूचना मिलते ही प्रशासन ने पर्यटकों को निकालने के लिए स्नो स्कूटरों का इंतजाम किया और देर रात तक सभी पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया।
इस बीच प्रदेश में बीते रोज से मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी तथा निचले क्षेत्रों में वर्षा से राज्य में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बीती रात राजधानी शिमला, चायल, कुफरी, मनाली और नारकंडा सहित कई अन्य स्थानों पर बर्फबारी हुई। इस बर्फबारी से शिमला-रामपुर सड़क पर नारकंडा और ठियोग-हाटकोटी सड़क पर खड़ा पत्थर के पास यातायात अवरुद्ध हो गया है।
इन दोनों स्थानों पर बीती रात लगभग आधा फुट हिमपात हुआ। कुफरी में भी बर्फबारी के बाद सड़क पर फिसलन की समस्या आने से यातायात में बाधा आ रही है। रामपुर और किन्नौर के लिये फिलहाल किंगल होकर यातायात चलाया जा रहा है। शिमला सहित राज्य के अधिकांश पर्यटक स्थलों पर बीती रात हुए हिमपात के बाद प्रदेश में पर्यटकों की आमद बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने आगामी आठ जनवरी तक राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात और वर्षा की सम्भावना जताई है। ये बर्फबारी फसलों और फलों के लिये भी काफी अच्छी मानी जा रही है।

अलका सिरोही ने यीपीएससी मेम्बर का प्रभार संभाला


अलका सिरोही ने यीपीएससी मेम्बर का प्रभार संभाला



(विपिन सिंह राजपूत)

नई दिल्ली (साई)। श्रीमती अलका सिरोही ने आज संा लोक सेवा आयोग की सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया। श्रीमती सिरोही भारतीय प्रशासनिक सेवा के मध्यप्रदेश काडर के 1974 बैच की अधिकारी हैं। उन्होंने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की सचिव और भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य और सार्वजनिक विभाग की सचिव के रूप में सेवा की।
इससे पहले वह उसी मंत्रालय में विशेष सचिव और अपर सचिव थीं तथा उन्होंने योजना आयोग की प्रधान सलाहकार के पद पर भी काम किया है। अपने राज्य के काडर में श्रीमती सिरोही ने कृषि सहकारिता, महिला और बाल विकास और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया। श्रीमती सिरोही पश्चिमी इतिहास विषय में स्नातकोत्तर हैं और प्रबंधन तथा धारणीय विकास के मुद्दे पर प्रशिक्षित हैं। 

बर्ड फ्लू का खतरा टला भारत से


बर्ड फ्लू का खतरा टला भारत से



(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। भारत ने अपने आप को बर्ड फ्लू (एच-5एन-1) से मुक्त देश घोषित किया है। यह घोषणा यहां 29 दिसंबर 2011 को की गई और ओआईई को अधिसूचित किया गया। तथापि, देशभर में, विशेष रूप से संक्रमित देशों की सीमा से लगने वाले अतिसंक्रमित क्षेत्रों और प्रवासी पक्षियों के आने वाले क्षेत्रों में चौकसी जारी रखी जाएगी।
कृषि मंत्रालय में पशु पालन, डेरी और मत्स्य विभाग ने राज्यों को इस बीमारी के प्रति सावधानी बरतने को कहा है। बर्ड फ्लू फैलने के बारे में असम के ढुबरी जिले में भामोनडोंगा गांव, अगोमनी ब्लॉक भाग-1 में आठ सितंबर 2011 को अधिसूचित किया गया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल के नाडिया जिले के तहत ब्लॉक बेताई नानशाटोला और पुटिमरी क्रिस्टयानपारा में बीमारी के फैलने के बारे में बताया गया।
तदोपरांत और कहीं से इस बीमारी के फैलने की खबर नहीं मिली। इस रोग की रोकथाम के उपायों में प्रभावित क्षेत्रों में कुकटों की समूची आबादी को समाप्त करना था। इसमें उनके अंडों,खुराक और अन्य संक्रमित सामग्री को बीमारी फैलने के प्रत्येक क्षेत्र के तीन किलोमीटर घेरे में समाप्त करना शामिल है।
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों से कुकटों, कुकट उत्पादों के लाने ले जाने पर रोक, प्रभावित परिसरों को संक्रमण के प्रभाव मुक्त करना आदि शामिल है। यह प्रक्रिया 29 सितंबर 2011को पूरी कर ली गयी। देश भर में चौकसी जारी रखी गयी। बीमारी फैलने के क्षेत्र और शेष देश में चौकसी बरते जाने के परिणाम स्वरूप बर्ड फ्लू (एच-5एन-1) के होने के कोई निशान नहीं मिले हैं।

सीबीआई ने यूपी को बनाया निशाना


सीबीआई ने यूपी को बनाया निशाना

(अभिषेक दुबे)

नई दिल्ली (साई)। उत्तर प्रदेश में सीबीआई ने राज्य सरकार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गिरतार किया है। जिनमें परिवार कल्याण विभाग के दो पूर्व महानिदेशक और जल निगम का महाप्रबंधक शामिल हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले के संबंध में छापेमारी के बाद ये गिरतारियां हुई हैं।
सीबीआई ने इन अधिकारियों के आवासों से अनेक दस्तावेज और भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। सीबीआई ने इसके संबंध में आठ एफआईआर दर्ज की है। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने इससे पहले कल लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, बांदा, नोएडा, मुरादाबाद, अमेठी और गाजियाबाद सहित साठ स्थानों पर छापे मारे।
उधर, केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित नेता और प्रदेश के तत्कालीन परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के निकट सहयोगियों के आवासों और प्रतिष्ठानों पर छापे डाले हैं। जांच एजेंसी ने बहुजन समाज पार्टी के विधायक रामचन्द्र प्रधान, परिवार कल्याण विभाग के दो सेवा निवृत्त महानिदेशक डा० एस पी राम और आर आर भारती, उत्तर प्रदेश जल निगम के महाप्रबंधक पी के जैन और उत्तर प्रदेश उद्योगिक विकास निगम के प्रमुख अभय कुमार वाजपेयी के आवासों पर भी छापे डाले हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से जुड़े निजी प्रतिष्ठान भी सीबीआई के निशाने पर थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पिछले वर्ष नवम्बर में सीबीआई को इस मामले के जांच का अदेश दिया था।

ग्यारहवां ऑटो एक्सपो आज से


ग्यारहवां ऑटो एक्सपो आज से

(अमेय)

नई दिल्ली (साई)। नई दिल्ली में आज से ग्यारहवां ऑटो एक्सपो शुरू हो रहा है। बताया जाता है कि हर दो साल पर आयोजित इस ऑटो प्रदर्शनी में कई नई कारें पेश की जाएंगी। ऑटो एक्सपो के नवीनतम संस्करण में तकरीबन ५० अंतर्राष्ट्रीय वाहन निर्माता अपने आधुनिकतम वाहनों का प्रदर्शन करेंगे।
एक सप्ताह तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में २४ भारतीय और आठ अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियां हर उपभोक्ता की जेब के लिए नये-नये डिजाईनों की कारें दिखायेंगे। इसके अलावा आठ भारतीय कम्पनियां अपने दो पहिये वाहन भी दर्शकों के नज$रे इनायत के लिए पेश करेंगी। आम दर्शकों के लिए ये प्रदर्शनी शनिवार से बुधवार तक खुली रहेगी।

बडे काम की मेंहदी


हर्बल खजाना .... 3

बडे काम की मेंहदी



(डॉ दीपक आचार्य)

घरों में बाडे के रूप में लगायी जाने वाली मेंहदी न सिर्फ़ सौंदर्य कला में उपयोग में लायी जाती है बल्कि ये औषधिय गुणों से भी भरपूर है और जिसका उपयोग ग्रामीण अंचलों और आदिवासी बाहुल्य भागों में प्रचुरता से होता है। इसका वानस्पतिक नाम लासोनिया इनर्मिस है।
आधुनिक विज्ञान भी किटाणुओं और फ़फ़ूँदो के नाश के लिये मेंहदी की उपयोगिता साबित कर चुका हैं। मेंहदी शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है जिससे पैर के तालुओं की जलन, सरदर्द, बुखार और गुस्से पर काबू पाने में काफ़ी हद तक सफ़लता मिलती है।
यदि मेंहदी को नाखूनों पर लगाया जाए, नाखूनों की चमक बढ जाती है और यदि कोई बर्निन्ग फ़ीट सिन्ड्रोम से परेशान है, मेंहदी का लेप तालुओं मे लगातार लगाया जाए, कुछ ही दिनों में समस्या का अंत हो जाता है। डाँग- गुजरात के आदिवासी इसकी पत्तियों को रात में पानी में डुबोकर रखते है और सुबह इसे छानकर पीलिया ग्रसित रोगी को देते है।
शहजीरा और मेंहदी के बीजों को साथ मिलाकर पीस लिया जाए और इसमें सिरका या पानी मिलाकर इसका लेप तैयार कर माथे पर २५ मिनट लगाया जाए तो सरदर्द और माईग्रेन में आराम मिलता है। मेंहदी बालों के लिये उत्तम है, ये बालों का झडना भी कम कर देती है।
पातालकोट के आदिवासी भुमकाओं का मानना है कि यदि कपडों और किताबों की अलमारी में इसकी सूखी पत्तियाँ रख दी जाए तो कीडे नही पडते। जानवरों को यदि बार बार मल के साथ खून आ रहा हो तो मेंहदी की पत्तियाँ खिलाने से आराम मिलता है।

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बुधवार, 4 जनवरी 2012

पर्यावरण प्रदूषण की जानबूझकर की जा रही है अनदेखी!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 44

पर्यावरण प्रदूषण की जानबूझकर की जा रही है अनदेखी!

पर्यावरण प्रदूषण के बारे में स्थिति है पूरी तरह अस्पष्ट

झाबुआ पावर के संयंत्र से होगा पर्यावरण का जमकर नुकसान



(लिमटी खरे)
नई दिल्ली (साई)। केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में शामिल मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका राजनैतिक क्षेत्र में भी इकबाल बुलंद है, के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा दो चरणों में लगाए जा रहे कोल आधारित पावर प्लांट से क्षेत्र में कहर बरपने के साथ ही साथ पर्यावरण का जमकर नुकसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 600 मेगावाट के पहले चरण की लोकसुनवाई के पूर्व मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को जमा कराए गए कार्यकारी सारांश के सातवें सफे पर लिखी इबारत से साफ हो जाता है कि मेसर्स झाबुआ पावर प्लांट के द्वारा स्थापित किए जाने वाले इस संयंत्र का पर्यावरण प्रदूषण प्रभाव मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के जिम्मेदार विभागों द्वारा जनबूझकर अनदेखा किया गया है। दोनों ही चरणों की लोकसुनवाई में पर्यावरण प्रदूषण के मामले में जब भी कोई प्रश्न दागा गया संयंत्र प्रबंधन और मध्य प्रदेश प्रदूषण मण्डल के सैटकारिंदों ने बात को घुमा फिरा कर प्रस्तुत कर दिया।
कार्यकारी सारांश में साफ कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण प्रभाव का अनुमान संयंत्र में होने वाली कार्यवाही का प्रकार तथा मात्रा और प्रदूषण रोकथाम के लिए किए गए उपायों पर निर्भर करता है। आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण पर प्रभाव दो स्थितियों में होगा।  प्रदूषण स्तर की निर्धारित सीमाओं के अंतर्गत रखने के लिए व्यवस्थापन द्वारा जो उपाय किए जाएंगे उनमें निर्माण और कार्यकारी अवस्था के अलग अलग प्रभाव दर्शाए गए हैं।
निर्माण अवस्था में एसपीएम, आरपीएम, सल्फर डॉय आक्साईड, एनओएक्स, एचसी, और कार्बन की अधिकता निर्माण कार्य गतिविधियों तथा वाहनों के आवागमन से होगी। संयंत्र प्रबंधन का दावा है कि यह प्रभाव अस्थाई तथा निर्धारित सीमाओं के अंतर्गत ही होगा। यक्ष प्रश्न यह हैै कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा निर्धारित सीमाएं कहां तक रखी गई हैं इस बारे में संयंत्र प्रबंधन पूरी तरह मौन ही है।
मजे की बात तो यह है कि इस प्रदूषण को मापने के लिए क्षेत्र में न तो मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और ना ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कोई दल अब तक भेजा गया है जो यहां आकर प्रदूषण का पैमाना मापे। बताया जाता है कि कागजो।पर अवश्य ही खानापूरी की जा रही है कि क्षेत्र में पर्यावरण और प्रदूषण एकदम चाक चौबंद ही है। राजनैतिक रसूखदार संयंत्र प्रबंधन के मालिकान द्वारा अपने प्रभावों का उपयोग कर पर्यावरण के नियमों की सरेआम मुनादी पीटी जा रही है और यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

राहुल की अपरिपक्वता बचा रही मनमोहन को


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 66

राहुल की अपरिपक्वता बचा रही मनमोहन को

किस्मत के धनी हैं मनमोहन



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के अब तक के सबसे लाचार और बेबस वजीरे आजम तथा भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक होने का अघोषित खिताब पा चुके डॉ.मनमोहन सिंह का भाग्य बेहद प्रबल है, यही कारण है कि इतने विरोध के बाद भी अब तक इस कुर्सी पर विराजमान हैं। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की नजर में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी की अपरिपक्वता मनमोहन सिंह के लिए वरदार ही साबित हो रही है।
देश में पिछले दो सालों से अराजकता की स्थिति बनी हुई है। निरंकुश मंत्री और नौकरशाहों को रियाया की मानो फिकर ही नहीं रह गई है। जिसे मौका मिल रहा है देश को लूटने मे ही लगा हुआ है। इक्कीसवीं सदी के पहले ही दशक में जितने घपले घोटाले भ्रष्टाचार के मामले जनता के सामने प्रमाणिक तरीके से आए उसके बाद तो देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस को जनता से नजरें मिलाने का दुस्साहस कतई नहीं करना चाहिए।
कांग्रेस अब पूरी तरह राहुल की बैसाखी पर ही चल रही है। राहुल भी राजनैतिक तौर पर अभी परिपक्व नहीं कहे जा सकते हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2011 के दरम्यान कांग्रेस की राजमाता और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की चेयरपर्सन श्रीमति सोनिया गांधी को रहस्यमय बीमारी (जो अब तक सार्वजनिक नहीं की गई, अफवाहों में जिसे कैंसर माना गया था) ने अपनी चपेट में ले लिया था।
इस बीमारी के कारण सोनिया गांधी को लंबे समय तक देश के बाहर ही रहना पड़ा था। देश में आरक्षण की हिमायती सोनिया गांधी को अपने देश के चिकित्सकों पर विश्वास नहीं था। यही कारण था कि उन्होंने दुनिया के चौधरी अमेरिका की शरण में जाकर करोड़ों अरबों रूपए फूंककर अपना इलाज करवाया। इस पूरे इलाज का भोगमान किसने भोगा है यह बात भी अभी तक भविष्य के गर्भ में ही है।
सोनिया की अनुपस्थिति का लाभ लेने में नाकाम रहे विपक्ष की जुगलबंदी भी कांग्रेस के साथ अच्छी ही दिखाई पड़ी। एक तरफ कांग्रेस के नेता अपनी राजमाता की अनुपस्थिति में असहाय महसूस करते रहे वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रबंधकों ने विपक्ष को अच्छी तरह साधे रखा ताकि कोई बखेड़ा खड़ा न हो पाए।
इस मौके का फायदा उठाने से राहुल गांधी चूक ही गए। अगर सोनिया की अनुपस्थिति में राहुल गांधी कांग्रेस का नेतृत्व कर अपने आप को साबित कर पाते तो उनके नेतृत्व में देश के कांग्रेसी चलने को राजी हो जाते। कहा जा रहा है कि यह तो चतुर सुजान मनमोहन सिंह का कुशल प्रबंधन था कि राहुल गांधी को सियासी गलियारों से दूर गांव की मिट्टी की सौंधी गंध लेने दौड़ाए रखा गया।

(क्रमशः जारी)

गौर की बात फिर मानी कमल नाथ ने


गौर की बात फिर मानी कमल नाथ ने

बड़ी झील के लिए मिले दस करोड़

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय शहरी विकासमंत्री कमलनाथ ने भोपाल की बड़ी झील की साफ-सफाई और विकास के लिए एक डेªजर मशीन खरीदने और दस करोड़ रूपए का अनुदान उपलब्ध कराने के लिए अपनी सहमति दी है। उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकासमंत्री बाबूलाल गौर से भेंट के दौरान यह सहमति दी।
श्री गौर ने कमलनाथ का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया कि केंद्र सरकार उड़ीसा के चिल्का झील के रख-रखाव और साफ-सफाई के लिए चिल्का डेवलपमेंट अथॅारिटी को हर वर्ष दस करोड़ रूपए का अनुदान देती है और उसे बारह करोड़ रूपए लागत की एक डेªजर मशीन भी प्रदान की गई है। श्री गौर ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि चिल्का झील का पानी खारा होने के चलते उसका पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता, जबकि भोपाल के बड़े तालाब का पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

शीतलहर कोहरे ने तोड़ी लोगों की कमर


शीतलहर कोहरे ने तोड़ी लोगों की कमर

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के उत्तरी भागों में न्यूनतम तापमान और गिरने से शीतलहर तेज हो गई है और पूरे क्षेत्र में कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तापमान कुछ और नीचे आ गया और तड़के कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के सूत्रों ने बताया कि अगले २४ घंटों के दौरान कश्मीर घाटी में हिमपात की संभावना है।
जम्मू काश्मीर स्थित साई ब्यूरो से नवनीता वर्मा ने खबर दी है कि नव वर्ष के आगमन के साथ ही कश्मीर घाटी आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है। हालांकि घाटी अभी इस मौसम की पहले व्यापक हिमपात की प्रतीक्षा कर रही है। मौसम विभाग ने वर्षा और हिमपात की संभावना जतायी है। फिलहाल लद्दाक की पूरी घाटी खुष्क शीतलहर की चपेट में हैं। घाटी आने वाले पर्यटकों को हिमपात की स्थानीय लोगों से भी ज्यादा चाहत है। राज्य सरकार ने पर्यटकों के लिए तमाम प्रबंध कर रखे हैं। इस वर्ष पहली बार गुलमर्ग के अलावा पहलगांव और सोनमर्ग में भी फ्लीस्किंग का आयोजन किया जा रहा है।
शिमला स्थित साई ब्यूरो का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में भी पर्वतीय क्षेत्रों में तापतान शून्य से नीचे रिकॉर्ड किया गया। हिमाचल प्रदेश की जनजातीय इलाकों में सुबह और शाम कड़ाके की ठंड के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों से बर्फबारी अभी फिलहाल नदारत है, लेकिन तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शिमला का न्यूनतम तापमान कल रात दो दशमलव छह डिग्री सेल्सियस रहा जबकि अधिकतम तापमान १२ दशमलव नौ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पहाड़ में रह रहे लोग बर्फबारी का बेसब्री से इंताजर कर रहे हैं ताकि ठंड कुछ कम हो सके।
नवनीता वर्मा ने आगे बताया कि पूरे प्रदेश में बीते कई दिनों से अच्छी वर्षा न होने से बागवानों को अपनी फसलों तथा फलदार पौधों के बारे चिंता बढ़ने लगी है। आज भी अच्छी वर्षा के प्रतिकूल प्रदेशभर में मौसम खुश्क रहा। प्रदेश में किसानों की 50 प्रतिशत से ज्यादा गंदम की फसल पीली पड़नी शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने हालांकि अगले एक दो दिनों में प्रदेश में वर्षा होने की उम्मीद जताई है लेकिन फिलहॉल किसान बादलों की आंख मिचौली के बीच मायूस हो रहे हैं। पिछले 24 घण्टों के दौरान प्रदश में सबसे न्यूनतम तापमान केलंग में शून्य से 6 दशमलव एक डिग्री सैल्सियस नीचे रिकार्ड किया गया। 
उधर मैदानी इलाकों में रायुपर से साई ब्यूरो अभय नायक का कहना है कि आने वाले चौबीस घण्टों में बादल छंटने के बाद एक बार फिर से राज्य में ठण्ड बढ़ने के आसार है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में आया चक्रवात का असर अब छत्तीसगढ़ पर कम हो गया है। इसी वजह से बारिश थम चुकी है, लेकिन नमी के कारण बादल छाए हुए हैं। इसके चलते ठण्ड में कमी महसूस की जा रही है। आगामी चौबीस घण्टों में मौसम शुष्क रहेगा।  मौसम विभाग के अनुसार बीते चौबीस घण्टों के दौरान बिलासपुर और बस्तर संभाग के कुछ स्थानों में हल्की बारिश दर्ज की गई। सभी संभागों के न्यूनतम तापमान में मामूली बदलाव हुआ। इस दौरान सबसे कम तापमान चौदह डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर और पेण्ड्रारोड में दर्ज किया गया।
राजस्थान से साई ब्यूरो शैलेन्द्र का कहना है कि समूचा राजस्थान शीतलहर से कांप रहा है। हाड़ गला देने वाली ठण्ड ने लोगों की सांसें थाम रखी हैं। प्रदेश में तेज सर्दी का दौर बना हआ है। मांउट आबू में जहॉं न्यूनतम तापमान जमाव बिंदू पर बना हुआ है। वहीं चूरू में न्यूनतम तापमान दो दशमलव सात डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसक अलावा बीकानेर में न्यूनतम पांच दशमलव तीन जोधपुर में 6 दशमलव चार और डबोक मे 6 दशमलव सात डिग्री सेल्सियस रहा। बीकानेर में जिला प्रशासन ने तेज सर्दी के कारण आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए तीन दिन का अवकाश घोषित कर दिया है और बारहवीं कक्षा तक के स्कूलों का समय बदल दिया है। 
उधर चंडीगढ़ से साई ब्यूरो ने समाचार दिया है कि जिला फतेहबाद क्षेत्र मे पड़ रही ठण्ड एंव धंुध को देखले हुए जिले भर के सभी स्कूलों का समय 10 बज कर दिया गया है। प्रषासन ने ये आदेष भी दिए है कि बच्चों लाने वाले वाहनों की स्थिति अच्छी हो, उन पर फोग लाईट लगी तथा प्रत्येक वाहन के साथ स्क्ूल का एक जिम्मेवार प्रतिनिधि हो।

रोजगार की दर बढ़ी


रोजगार की दर बढ़ी

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। देश में, सितम्बर में समाप्त तिमाही के दौरान रोजगार में तीन प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। श्रम तथा रोजगार मंत्रालय के १२वे त्वरित रोजगार सर्वेक्षण के अनुसार चमड़ा और परिवहन क्षेत्रों को छोड़ कर बाकी सभी क्षेत्रों में रोजगार के अधिक अवसर पैदा हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चमड़ा और परिवहन क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में मामूली गिरावट आई है। क्षेत्रवार स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी और बी पी ओ क्षेत्र में रोजगार के दो लाख से अधिक अवसरों की अधिकतम वृद्धि हुई। इसके बाद वस्त्र, धातु, मोटर गाड़ियां, हथकरघा और विद्युत करघा तथा जवाहरात और जेवरात क्षेत्रों में रोजगार में इजाफा हुआ है। सरकारी सूत्रों ने बताया है कि श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा सितम्बर २००८ से विश्व वित्तीय संकट और देश में आर्थिक मंदी के प्रभावों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मीडिया पर जमकर भड़की नीता


मीडिया पर जमकर भड़की नीता

कहा निजी कार्यक्रम के हास परिहास के क्षण मीडिया ने कर दिये षड़यंत्र कर कर दिये सार्वजनिक



(वेद बघेल)

सिवनी (साई)। पी.जी. कॉंलेज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन में बतौर विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारी श्रीमती नीता पटैरिया को जब मंच पर उद्बोधन हेतु आमंत्रित किया गया तो उन्होंने माइक संभालते ही भारत माता की जय के नारे लगाये और अपना संबोधन शुरू करते हुए कहा आज के कार्यक्रम में मंच पर विराजमान ...इतना कहते ही उनकी नजर सामने खड़े मीडिया कर्मियों पर ़पड़ी तो वे अपने आप को रोक नहीं पायी और मुख्य अतिथि श्री बिसेन का नाम लेना छोड़ उन्होंने हाथ जोड़कर कहा भैया सब फोटोग्राफर से निवेदन है कि अच्छी अच्छी फोटो लेना.
श्रीमती नीता पटैरिया ने कहा जय प्रकाश (गजल गायक जो मुंबई से है) जी आये हैं हम बताना चाहेंगे कि आप तो बंबई में म्यूजिक डायरेक्ट करते हैं हमारे यहॉं भी होता है पता चला हम भाषण दें आपके सम्मान में और बाद में भाषण काट उसमें कुछ और जो़ड़ दिया जाये और उसे प्रसारित कर दिया जाये राष्ट्रीय स्तर पर. तो इसीलिये भैया (मीडिया वालों को संबोधन) अच्छी अच्छी खीचना.
श्रीमती नीता पटैरिया ने कहा भैया हम जो कहें, हम जैसा हिले (एक्टिंग करते हुए) वैसा ही खीचना नहीं तो बड़ा बुरा लगता है. मैसेज भी राष्ट्रीय स्तर पर गलत जाता है. इसीलिये जो हम हैं वैसे ही फोटो खीचना. ऐसा मत करना की हम भाषण कुछ दे और उसकी जगह गाना आ जाये और राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रसारित हो जाये कि अब नीता पटैरिया गाना भी गाने लगी. इतना कह नीता पटैरिया ने उपस्थित छात्र छात्राओं की ओर मुखातिब होकर कहा ऐसा भी होता है बच्चों ये हमने तुम्हे बताया है.
इसके बाद कुछ देर के औपचारिक भाषण के बाद पुनः श्रीमती नीता पटैरिया पत्रकारों पर भड़कने लगी. उन्होंने कहा कि ये मेरी विधानसभा है मेरे लोग यहॉं बैठे हैं मैं अपनी बात खत्म करके रहूंगी. उन्होंने कहा मेरे प्यारे बच्चों 25 तारीख को (अटल जी के जन्म दिन के दिन) मैने अपना एक व्यक्तिगत कार्यक्रम आयोजित किया पहले इसे मैं घर पे आयोजित करने जा रही थी कैंपस छोटा था तो सोचा कि बाहर आयोजन कर लिया जाये. वो पब्लिक मीटिंग नहीं थी सरकारी कार्यक्रम नहीं था. वो मेरा कार्यक्रम था. मेरी थाली थी मेरा दीपक था. एक हास परिहास का मंत्री के साथ क्षण था कि उनने एक रूपया रखे और मैने उठाये और कहा कि ये मेरी दक्षिणा है. नीता पटैरिया ने कहा कि मैं ब्राम्हण हूँ वहॉं मैने किसी पुजारी को नहीं बुलाया था वो तो मैने केवल अपने कार्यकर्ताओं को भोजन पर बुलाया था. मेरे मंत्री ने कहा कि तुम मेरी ताई हों, तुम मेरी बहन हो तो मैने कहा कि ये सौ का नोट मेरा तो वे हॅंसे और मेरे पॉंव पढ़े. नीता पटैरिया ने कहा कि वो एक हास परिसाह का क्षण था जिसे कैसा दिखाया. श्रीमती नीता पटैरिया ने कहा कि मैं जानती हूँ कि मेरे सिवनी का मीडिया बहुत अच्छा है. और सिवनी के मीडिया की ही दम है कि नीता पटैरिया गृहणी से जनपद सदस्य और जनपद सदस्य से सांसद और अब विधायक है प्रदेश अध्यक्ष है. सिवनी के मीडिया ही ने मुझे इतनी बुलंदियों पर पहुँचाया कि आडवाणी जी नीता कहकर पुकारते हैं.
श्रीमती नीता पटैरिया ने चिल्लाते हुए हाथ ऊपर उठा कर दिखाते हुए कहा लेकिन एक ऐसा व्यक्ति विक्षिप्त जिसके  मन में ....थी ने मेरी आवाज को काट दिया उसकी जगह म्युजिक डाल दिया बकायदा प्लानिंग से षड़यंत्र करके उसे चलवाया और जब वो चला तो मेरे प्यारे भाई सभी भ्रमित हो गये. लेकिन इसका परिणाम नीता पटैरिया क्या भुगतेगी ? आज विधायक हैं कल पार्टी टिकिट देगी तो रहेंगे नहीं तो नहीं रहेंगे. .. इसके बाद श्रीमती नीता पटैरिया ने अपनी उपलब्धियों का बखान करना शुरू कर दिया जो कि उनकी उपलब्धि है ही नहीं.

सीआपीएफ जवान लड़े तीन की मौत


सीआपीएफ जवान लड़े तीन की मौत

(सोनाली मजूमदार)

कोलकता (साई)। पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के लालगढ़ में शिलापारा कैम्प में कल रात सीआरपीएफ के दो गुटों के बीच झड़प में तीन जवान मारे गए। पश्चिमी रैंज के सूत्रों ने बताया कि इस झड़प में एक गुट के जवान ने दूसरे गुट के दो जवानों को गोली मार दी।
बताया जाता है कि उक्त जवान ने अपने साथियों को गोली मारने के बाद में उसने अपनी सर्विस रिवालवर से खुद को भी मार डाला। झड़प के कारणों का फिलहाल पता नहीं चला है। बताया जाता है कि इलाके में तनाव का माहौल है। वरिष्ठ जिला पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।