सोमवार, 16 जुलाई 2012

पूर्वोत्तर में भारी भूस्खलनः टापू बने अनेक राज्य


पूर्वोत्तर में भारी भूस्खलनः टापू बने अनेक राज्य

(यशवंत श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। पूर्वोत्तर राज्यों में तेज बारिश कहर बनकर टूट रही है। पूर्वोत्तर में मेघालय में एक प्रमुख राजमार्ग पर रविवार को हुए भारी भूस्खलन के कारण पूर्वाेत्तर के राज्यों मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के कुछ हिस्से तथा दक्षिणी असम देश के बाकी हिस्सों से कट गया।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार भारी बारिश के बाद असम की सीमा से लगते पूर्वी मेघालय के जैन्तिया हिल्स जिले सोनापुर और तोंगसेंग में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 भूस्खलन के कारण बंद हो गया। सड़क में बनी खाई को हालांकि बड़े-बड़े पत्थरों से भरा जा रहा है।
ज्ञातव्य है कि मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 150 किलोमीटर दूर सोनापुर और तोंगसेंग इलाकों में सबसे अधिक भूस्खलन होता है। इन इलाकों को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 40 शिलांग और असम के मुख्य शहर गुवाहाटी से जोड़ता है। इसलिए ये इलाके शेष भारत के द्वार माने जाते हैं।
जैन्तिया हिल्स के प्रशासनिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस बड़े सम्पर्क मार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर पहल की जा रही है। प्रशासन के कामगार दिन-रात काम कर कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर दबाव दिया गया है कि वे सड़क से मलबा को हटाने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रबंध करें। उल्लेखनीय है कि भूस्खलन से प्रभावित सड़क के दोनों तरफ सैकड़ों यात्री वाहन और आवश्यक वस्तुओं से भरे ट्रक रुके पड़े हैं।
उधर, नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश और कोसी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। राज्य के जल संसाधन विभाग ने गंडक, बागमती और कोसी के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को लेकर इन नदियों के प्रवाह क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है।
इधर, कटाव के कारण खगड़िया का कई जिलों से सम्पर्क टूट गया है। खगड़िया के प्रशसनिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 107 पर स्थित डुमरी स्घ्टील पुल पर उत्तरी पहुंच पथ पर कोसी के भीषण कटाव को देखते हुए पुल पर परिचालन रोक दिया गया है, जिस कारण खगड़िया का सुपौल, सहरसा और मधेपुरा से सड़क सम्पर्क टूट गया है।
सूत्रों ने कहा कि नदी पार करने के लिए प्रशासन द्वारा चार नौकओं का प्रबंध किया गया है। इधर, सहरसा के मानसी-सहरसा रेलखंड पर कोसी का कटाव जारी है। पटना के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक शनिवार सुबह आठ बजे कोसी नदी के वीरपुर बराज से जल प्रवाह 1,41,980 क्यूसेक था, जो 10 बजे बढ़कर 1,43,370 क्यूसेक तक जा पहुंचा। इधर, वाल्मीकीनगर स्थित गंडक बराज में भी गंडक का जल प्रवाह 1,86,200 क्यूसेक है।
कोसी में जल प्रवाह बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर तटबंध में कटाव की खबर है। राज्य के जल संसाधन विभाग के सूत्रों के मुताबिक बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली गई हैं। सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में कोसी की बाढ़ ने करीब तीन लाख से ज्यादा लोगों को बेघर कर दिया था और कई लोगों की मौत हो गई थी।

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