सोमवार, 6 अगस्त 2012

उत्तराखण्ड में बाढ़ का तांडव जारी


उत्तराखण्ड में बाढ़ का तांडव जारी

(अर्जुन कुमार)

देहरादून (साई)। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं है। उत्तराखंड में अलकनंदा और यमुना नदियों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है, लेकिन भागीरथी में पानी का स्तर घटना शुरू हो गया है। रविवार को आई अचानक बाढ़ से हुई तबाही के बाद वहां राहत और बचाव कार्य जोरों पर है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कल केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। राज्य में बाढ़ से अब तक ३१ लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के गोरखपुर संवाददाता ने खबर दी है कि उत्तर प्रदेश में मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभावित जिलों के प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुट गए हैं। राजस्व अधिकारी प्रभावित गांवों में पहुंच गए हैं और बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचा रहे हैं। गोंडा और बाराबंकी में अनेक परिवारों ने तटबंधों पर शरण लेना शुरू कर दिया है।
इन स्थानों पर घाघरा और सरयु नदियां पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गोंडा जिले में ३०० गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। चित्रकूट में मंदाकनी नदी ऊफान पर है। कुशीनगर के खड्डा इलाके में बूढ़ी गंढक नदी खतरे के निशान से ऊपर है, लेकिन वहां के जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
हिमाचल प्रदेश में मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। शुक्रवार की रात को पालचान के निकट व्यास नदी में अचानक बाढ़ आ जाने से इस राजमार्ग को नुकसान पहुंचा है, हालांकि अब भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।
इसके साथ ही साथ आईटीबीपी और पुलिस अधिकारियों ने बाढ के कारण तबाह हुए उत्तराखंड में ढह गये मकानों और अन्य जगहों के मलबों से शवों की तलाश का काम जारी रखा। लगातार बारिश और उसके कारण आयी बाढ से राज्य में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढकर 34 हो गयी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उत्तरकाशी जिले में छह लोग अभी तक लापता है। जिला मजिस्ट्रेट आर राजेश कुमार ने कहा कि भारी बारिश के कारण अकेले उत्तरकाशी में 31 लोगों की जान गयी और छह अभी तक लापता है। उत्तरकाशी की उपरी पहाडियों में बादल फटने से शनिवार की सुबह सरकार द्वारा संचालित यूजीवीएन लि के असी गंगा पनबिजली परियोजना के लापता हुए 23 कामगारों को मृत घोषित कर दिया गया है।
कुमार ने कहा, ‘‘हम अब इन 23 लोगों को मृतकों की सूची में शामिल मान रहे हैं।’’ पिछले दो दिनों में भारी वर्षा के कारण यह पर्वतीय राज्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। वर्षा के चलते भूस्खलन, बादल फटने और तेज बाढ आयी जिससे मकान नष्ट हो गये और चार धाम की यात्र में शामिल सैकडों तीर्थयात्री फंस गये।
भारी वर्षा के चलते प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक दुष्प्रभाव गढवाल पर पडा है। सरकार ने राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। उत्तराखंड में भारी वर्षा के चलते सेना को भी सतर्क कर दिया गया। शनिवार से हो रही भारी वर्षा के कारण चमोली जिले में तीन लोगों की जान गयी है। सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान शुरु किया है तथा प्रभावित लोगों तक खाने के पैकेट पहुंचाये जा रहे हैं। उत्तरकाशी और चमोली जिलों में करीब 250 परिवारों को सुरक्षित स्थलों पर पहुंचा गया है।

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