मंगलवार, 11 जनवरी 2011

पामोलिन तेल घोटाले में सुनवाई को अनुमति

पामोलिन तेल घोटाले में सुनवाई को अनुमति

नई दिल्ली (ब्यूरो)। केेंद्रीय सतर्कता आयुक्त के गले की फांस बने करोड़ों रुपये के पामोलिन तेल घोटाला मामले में आगे की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को अनुमति दे दी। इस मामले में मुख्य सतर्कता आयुक्त पी जे थॉमस और तत्कालीन मुख्यमंत्री के करूणाकरन कथित तौर पर लिप्त बताए जाते हैं।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की पीठ ने करूणाकरन की अपील को उनके निधन के मद्देनजर समाप्त मानते हुए केरल सरकार को मामले की सुनवाई करने की अनुमति दे दी। करूणाकरन का गत 23 दिसंबर को निधन हो गया था। केरल सरकार ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट से पामोलिन तेल आयात मामले में सुनवाई पर लगी रोक वापस लेने के लिए याचिका दायर की थी। इस मामले में थॉमस एक आरोपी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन अगस्त 2007 को इस मामले की केरल में सीबीआई की एक अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी। पामोलिन आयात मामले में आठ आरोपी हैं। 2000 में करूणाकरन और थॉमस सहित राज्य सरकार के सात अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। थॉमस उन दिनों केरल में खाद्य सचिव थे।

पीएम के गले में अजगर की तरह लिपटे हैं थामस

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेतली ने कहा कि पामोलिन आयात घोटाले के आरोपी पीसी थामस को प्रधानमंत्री ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्ति षर्मनाक है। जेटली ने कहा कि आज यह स्थिति है कि वर्तमान सीवीसी प्रधानमंत्री के गले में अजगर की तरह लिपटे हुए हैं। प्रधानमंत्री के बारे लोग कहते हैं कि वह अर्थषाóी हैं और ईमानदार हैं, लेकिन मनमोहन सिंह विचित्र प्रकार के ईमानदार व्यक्ति हैं, जो आजादी के बाद देष की सबसे भ्रश्ट सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

आखिर क्‍या है मिशन सिब्‍बल

सिब्बल सही या सोनिया!

(लिमटी खरे)

कांग्रेस की अंदरूनी संस्कृति बड़ी ही अजीब है। कांग्रेस अध्यक्ष अपना राग मल्हार गाती हैं तो उनके कुनबे के अन्य लोग अपनी ढपली अपना राग बजाते रहते हैं। कहीं किसी पर कोई नियंत्रण नहीं है। कांग्रेस की नीति रीति और कांग्रेस के नताओं के बयान में जमीन आसमान का अंतर होता है। जब विवाद बढ़ता है तब कांग्रेस के प्रवक्ता अपना रटा रटाया जुमला ‘‘यह उनके निजी विचार हो सकते हैं।‘‘ कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। देखा जाए तो हर सियासी दल के पास अपने प्रवक्ताओं की फौज होती है, प्रवक्तओं के अक्षम होने पर दीगर नेताओं द्वारा बयानबाजी की जाना आम बात है। सवाल यह है कि अगर प्रवक्ता अक्षम है तो उन्हें शोभा की सुपारी बनाकर बिठाने का क्या तात्पर्य हो सकता है?

हाल ही में कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र के एटीएस चीफ हेमंत करकरे से बातचीत पर सियासत गर्मा दी। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता इस मामले में अपना मुंह सिले रहे। हायतौबा मचने पर उन्होंने गेेंद एक बार फिर दिग्गी राजा के पाले में ढकेलकर वह सारी बयानबाजी को उनके नितांत निजी विचार बता डाले। जब दिग्गी राजा से पूछा गया कि उन्होंने करकरे से बातचीत के सबूत देने के लिए कांग्रेस मुख्यालय के बजाए कांस्टीट्यूशनल भवन का उपयोग क्यों किया? के जवाब में वे बोले क्या मैं कांग्रेसी नहीं हूं? अरे जनाब आपको कांग्रेसी मानने से इंकार करने की हिमाकत कौन कर सकता है। किन्तु कांग्रेस के उन प्रवक्ताओं को कौन समझाए जो कहे जा रहे हैं कि ये विचार कांग्रेस के नहीं दिग्विजय सिंह के निजी हैं।

बहरहाल अभी वह मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि मानव संसाधन मंत्रालय का भारी भरकम प्रभार संभाले कपिल सिब्बल ने संचार मंत्री के बतौर नियंत्रक महालेख परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को ही सिरे से खारिज कर दिया है। कितने आश्चर्य की बात है कि भारत गणराज्य के एक जिम्मेदार मंत्री होते हुए कपिल सिब्बल यह कह रहे हैं कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में 1.76 लाख करोड़ रूपए का नुकसान नहीं हुआ है। वे कहते हैं कि सरकारी खजाने को एक पैसे का भी नुकसान नहीं झेलना पड़ा है।

अगर सिब्बल सही हैं, तो फिर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा को अपने पद से त्यागपत्र क्यों देना पड़ा और कपिल सिब्बल को दूरसंचार विभाग का नया मंत्री क्यों बनाया गया? क्या यह सच नहीं है कि राजा ने 2008 में नियमों को बलाए ताक रख 2001 की दरों पर 122 कंपनियों को लाईसेंस प्रदाय किया था? इसमें आरकाम, टाटा सहित जीएसएम आपरेटर्स को 6.2 मेगाहर्टज से अधिक का स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया गया था।

सिब्बल उवाच का सबसे अधिक असर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर पड़ेगा जो इन दिनों बजट सत्र के दौरान संसद को चलने देने के लिए विपक्ष के साथ मान मनौअल में जुटे हैं। विपक्ष के तरकश में सिब्बल का छोड़ा नया तीर आ चुका है। विपक्ष मांग कर सकता है कि जब सरकार खुद परोक्ष तौर पर मान चुकी है कि इसमें घपला हुआ है, तब सिब्बल की नई तान पर उनका त्यागपत्र लिया जाए।

अब तो सरकार और सोनिया गांधी की नीयत पर ही संदेह होना स्वाभाविक ही है। लागों को लग रहा था कि भले ही सरकार द्वारा जेपीसी की मांग स्वीकार न की जाए, पर इस मामले की ईमानदारी से जांच अवश्य ही करवाई जाएगी। इसी तारतम्य में जो भी तथ्य उभरकर सामने आएंगे उन्हें सरकार जनता के समक्ष रखेगी, किन्तु अब सिब्बल के इस बयान से तो लगने लगा है कि मानो कुछ हुआ ही नहीं है, बेचारे ए.राजा की नौकरी मुनाफे में ही चली गई।

वैसे कपिल सिब्बल का बयान दूरसंचार मंत्री की हैसियत से आया है, और उन्होंने कैग के प्रतिवेदन पर उंगली उठाई है। अगर सिब्बल सही हैं, तो फिर कैग जैसा ईमानदार संगठन भी भ्रष्टाचार के दलदल का एक नगीना बन गया है, और अगर एसा है तो फिर कैग की विश्वसनीयता ही नहीं रह जाती है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि इसकी जांच अवश्य करवाएं वह भी टाईम फ्रेम में बांधकर। जांच में जो भी गलत साबित हो उसे जनता के सामने लाया जाए बिना किसी राजनैतिक नफा नुकसान को सोचे हुए, क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ही इकलौती एसी संस्था बची है, जिस पर लोगों का भरोसा अभी तक कायम है। सीबीआई और केंद्रीय विजलेंस की कारगुजारियों से तो लोगों के मानस पटल पर इनका होना न होना बराबर ही माना जा रहा है। वैसे भी जब भारत गणराज्य के मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठा शख्स जब संवैधानिक संस्थाओं की ओर उंगली उठाएगा तो इससे इन संस्थाओं की साख में इजाफा तो होने से रहा।

हो सकता है कि सिब्बल को यह मशविरा दिया गया हो कि तमिलनाडू में जल्द ही विधानसभा चुनाव है और टूजी का मसला वहां स्थानीय स्तर पर उठापटक कर सकता हैै, इसलिए इस मामले के पटाक्षेप का प्रयास किया जाए। डीएमके के दबाव में आकर कांग्रेस किसी भी स्तर पर आ सकती है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि गठबंधन धर्म के पहले कांग्रेस का राजधर्म है, जिसकी तह में देश की सेवा करना वह भी सच्चाई और ईमानदारी के साथ है।

पिछले साल ही स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भारत के वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह ने कामन वेल्थ गेम्स के बारे में कहा था कि इसे राष्ट्रीय पर्व के तौर पर लेना चाहिए, प्रधानमंत्री बेहतरीन छवि के कारण उनकी अपील के बाद इसमें हुए भ्रष्टाचार पर चीत्कार कुछ कम हुआ। लोगों को लगा कि जल्द ही जांच हो जाएगी, किन्तु अब लोगों को लगने लगा है कि प्रधानमंत्री की अपील महज दिखावा ही थी। कांग्रेस को लगने लगा है कि देश का मीडिया और अन्य सियासी दल उनकी छवि के चलते खामोश रह सकते हैं। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को यह नहीं भूलना चाहिए कि देश सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है किन्तु उनकी छवि की कीमत पर भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

पिछले कुछ माहों से कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी भी भ्रष्टाचार पर काफी संजीदा प्रतीत हो रही हैं। बार बार वे भ्रष्टाचार पर बोलती नजर आ रही हैं। सोनिया के इस स्वरूप से देश की जनता के मन में एक बार आस जगी थी कि हो सकता है कि सवा सौ साल पुराने सियासी दल द्वारा देश को आज आकंठ भ्रष्टाचार में दलदल में फंसाने के बाद उसका ही एक अध्यक्ष रहनुमा बनकर आया है, जो देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करा सकेंगी।

तीन चार सालों में सोनिया गांधी ने युवराज राहुल गांधी के साथ सादगी का प्रहसन किया। चाटुकार मीडिया ने उसे खूब हवा दी। कम ही ईमानदार पत्रकार होंगे जिन्होंने इस बात को रेखांकित किया होगा कि दिल्ली से मुंबई की सोनिया गांधी की यात्रा इकानामिक क्लास में अवश्य ही हुई किन्तु उनके लिए बीस सीट खाली रखी गईं थीं। इन बीस सीट का भोगमान किसने भोगा, यह बात आज भी किसी को नहीं पता।

इसी तरह युवराज राहुल गांधी ने शताब्दी में यात्रा की। यात्रा के लिए पूरी की पूरी एक बोगी बुक करवा दी गई थी। आलम यह था कि उसके आगे और पीछे के डिब्बे वाले यात्री एक दूसरे के डिब्बे में नहीं जा पा रहे थे। यह थी कांग्रेस की नजर में देश के भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी की सादगी की नौटंकी। मंदी के दौर में मंत्रियों ने पांच सितारा होटलों में रातें रंगीन की, वह भी सरकारी खर्चे पर। न तो प्रधानमंत्री डॉ.एम.एम.सिंह, न सोनिया गांधी, न वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज तक यह पता कर जनता को बताने का प्रयास किया है कि उन होटलों का बिल किस मद से किसने भुगतान किया है?

कुल मिलाकर नब्बे के दशक की गूंगी गुडिया कही जाने वाली कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को भी सियासी कीचड़ के रंगे हुए सियारों ने अपनी तरह ही बना लिया है। रही राहुल गांधी की बात तो राहुल का भी इसी दिशा में प्रशिक्षण जारी है। सच ही कहा है किसी ने देश में जनसेवक खाएंगे मोती और उन्हें चुनने वाली जनता खाएगी दाना।

प्रियंका की नजरों से सोनिया देख रहीं हैं सियासत

मतलब प्रियंका हैं सोनिया की असली सलाहकार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के सलाहकारों में नंबर वन अहमद पटेल हैं, या महासचिव दिग्विजय सिंह? इस प्रश्न पर समूचा देश उलझा हुआ है, किन्तु हकीकत यह है कि सोनिया गांधी उसी रंग से सियासी दुनिया देख रही हैं, जिस रंग का चश्मा उनकी पुत्री प्रियंका वढ़ेरा उन्हें लगा रही हैं।

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी के लिए सियासी बिछात, जमीनी हकीकत और नेताओं की पोल पट्टी कोई और नहीं उनकी ही अपनी बेटी प्रियंका उपलब्ध कराती हैं। कल तक सियासी गलियारों में चर्चाओं में रहने वाली प्रियंका वढ़ेरा ने एकाएक अपने आप को समेट लिया है। अब वे अपने पति राबर्ट वढ़ेरा और बच्चों के साथ सुर्खियों से दूर ही रह रही हैं।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि प्रियंका द्वारा निजी गुप्तचर एजेंसियों के माध्यम से केंद्रीय मंत्रियों, सूबों में कांग्रेस की इकाईयों के बारे में मालुमात की जाती है, फिर उसे अपने सूत्रों के द्वारा क्रास चेक भी किया जाता है। जब जानकारी पुख्ता हो जाती है तब वे उसे अपनी मां के सामने परोस देती हैं। उन्होंने कहा कि एसा लंबे समय से नहीं हो रहा है, यह सिलसिला पिछले आठ दस माहों से ही आरंभ हुआ है।

उधर सोनिया के करीबी सूत्रों का भी यह दावा है कि नेहरू गांधी परिवार की छटवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए भी भविष्य का रोड़मेप प्रियंका द्वारा ही तैयार किया जा रहा है। यही कारण है कि वे सियासी से चमक दमक से अपने आप को दूर रखते हुए अमेठी और रायबरेली में ही चुनावों के दौरान शिरकत करती हैं।



प्रियंका के लिए प्रायोजित हुए थे टीवी शो

पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान अपनी दादी स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी की साड़ी पहनना, उनके जैसे हेयर स्टाईल बनाना, और प्रियंका की आदतों को प्रियदर्शनी स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी से जोड़ने के फीचर भी मीडिया में जमकर उछले। माना जा रहा है कि सोनिया के करीबी प्रबंधकों ने चुनावों के दौरान कोशिश की थी कि प्रियंका में इंदिरा गांधी का अक्स ढूंढकर सामने लाया जाए ताकि देश में कांग्रेस को इससे फायदा हो सके। बताते हैं कि बाद में प्रियंका की आपत्ति के उपरांत ये फीचर आगे परवान नहीं चढ़ सके।

अविनाश वाचास्‍पति और गिरीश बिल्‍लोरे को सलाम

हिन्‍दी ब्‍लॉंगिंग का एक नया कीर्तिमान अविनाश वाचस्‍पति और गिरीश बिल्‍लौरे मुकुल के नाम



रविवार 9 जनवरी 2011 का दिन हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के सम्‍मेलनीय इतिहास में स्‍वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। इस दिन खटीमा (उत्‍तराखंड) में हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के सम्‍मेलन का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के जरिए पूरे विश्‍व में सफलतापूर्वक विभिन्न एग्रीगेटर्स, खासकर ब्लॉगप्रहरी (दिल्ली), सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक,ट्विटर, गूगल-बज्ज आदि के जरिये किया गया।

हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के सम्‍मेलनीय स्‍वरूप को चहुं ओर इसकी सकारात्‍मकता के साथ प्रवाहित करने वाले चर्चित ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर और ब्‍लॉगर, साहित्‍यकार, व्‍यंग्‍यकार अविनाश वाचस्‍पति ने जबलपुर के मशहूर ब्‍लॉगर गिरीश बिल्‍लौरे ‘मुकुल’ के साथ मिलकर इन पलों को पूरे विश्‍व में प्रसारित करके ऐतिहासिक बना दिया है। इससे साबित होता है कि धुन के धनी जब चाहते हैं तो प्रत्‍येक परिस्थिति को अपने अनुकूल बना नेक कार्यों को सर्वोत्‍तम अंजाम तक पहुंचा देते हैं।

इस अवसर पर साहित्‍य शारदा मंच के तत्‍वावधान में उत्‍तराखंड स्थित खटीमा के ब्‍लॉगर, कवि डॉ. रूपचन्‍द्र शास्‍त्री ‘मयंक’ की दो पुस्‍तकें सुख का सूरज और नन्‍हे सुमन का लोकार्पण डॉ. इन्द्रराम, सेवानिवृत्‍त प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर के कर कमलों द्वारा किया गया । अविनाश वाचस्‍पति जी इस समारोह के मुख्‍य अतिथि रहे। एक साथ कई पायदानों पर सफलतापूर्वक सफर करने वाले अविनाश वाचस्‍पति और गिरीश बिल्‍लौरे के इस कारनामे को, हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग विधा के चितेरे करोड़ों दर्शकों ने लगातार 6 घंटे तक इस जीवंत प्रसारण का भरपूर आनंद लिया और इसके साक्षी बने।

इस संबंध में यह भी उल्‍लेखनीय है कि इस जीवंत प्रसारण को अब भी http://bambuser.com/channel/girishbillore/broadcast/1313259 पर देखा और सुना जा रहा है। इसे टीम वर्क का अन्‍यतम उदाहरण बतलाते हुए अविनाश वाचस्‍पति ने इसका श्रेय जबलपुर के गिरीश बिल्‍लौरे, दिल्‍ली के पद्मसिंह के उनमें अपने प्रति विश्‍वास के नाम करते हुए कहा है कि इस सजीव प्रसारण से हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के शिखर पर पहुंचने के प्रयासों में अभूतपूर्व तेजी देखने में आएगी।

इस अवसर पर खटीमा में मौजूद रहे, प्रख्‍यात हिदी ब्‍लॉगर लखनऊ के रवींद्र प्रभात (परिकल्‍पना) , दिल्‍ली के पवन चंदन (चौखट) , राजीव तनेजा (हंसते रहो) , धर्मशाला के केवलराम (चलते चलते), बाराबंकी के रणधीर सिंह सुमन (लोकसंघर्ष) , खटीमा के रावेन्‍द्र कुमार रवि, डॉ. सिद्धेश्‍वर सिंह और आसपास के क्षेत्रों यथा बरेली, पीलीभीत, हल्‍द्वानी इत्‍यादि के साहित्‍यकार, कवि, प्रोफेसरों और हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत के प्रेमियों सोहन लाल मधुप, बेतिया से मनोज कुमार पाण्डेय (मंगलायतन) ,शिवशंकर यजुर्वेदी, किच्छा से नबी अहमद मंसूरी, लालकुऑ (नैनीताल) से श्रीमती आशा शैली हिमांचली, आनन्द गोपाल सिंह बिष्ट, रामनगर (नैनीताल) से सगीर अशरफ, जमीला सगीर, टनकपुर से रामदेव आर्य, चक्रधरपति त्रिपाठी, पीलीभीत से श्री देवदत्त प्रसून, अविनाश मिश्र, डॉ. अशोक शर्मा, लखीमपुर खीरी से डॉ. सुनील दत्त, बाराबंकी से अब्दुल मुईद, पन्तनगर से लालबुटी प्रजापति, सतीश चन्द्र, मेढ़ाईलाल, रंगलाल प्रजापति, नानकमता से जवाहर लाल, सरदार स्वर्ण सिंह, खटीमा से सतपाल बत्रा, पी. एन. सक्सेना, डॉ. गंगाधर राय, सतीश चन्द्र गुप्ता, वीरेन्द्र कुमार टण्डन आदि उल्‍लेखनीय हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा किया गया।

पाला से परेशान किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं

नुकसानी पर मुआवजे का हल्ला केवल झूठी हमदर्दी

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी -: जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में कड़ाके की ठण्ड और पाला पडऩे से कृषकों की फसलें बुरी तरह नष्ट हो गई है, सभी राजनैतिक दलों सहित कृषक हितेषी संगठनों द्वारा नुकसानी की मांग मुआवजे के रूप में किसानों को देेने की मांग की है, और राजनैतिक दल के नेताओं द्वारा किसानों को हुई नुकसानी ने खेतो में जाने का अवसर प्रदान कर दिया है लगभग सभी राजनैतिक दल के नेता क्षेत्रों में भ्रमण कर किसान हितेषी बनने का स्वांग रचा रहे हैं भोला भाला किसान उनकी इस झूठी संवेदना से भावविभोर हो रहा है,हालांकि वह यह बात भी जानता है कि नुकसानी पर संवेदना जताने आ रहे नेतागण झूठी संवेदनाएं ही दे रहें हैें किसानों का इससे कोई भला होने की संभावना नहंीं है । पिछले वर्ष फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में रबी की फसल ओला वृष्टि से चौपट हो गई थी, जिसमें केवलारी विधानसभा क्षेत्र के एवं सिवनी विधानसभा क्षेत्र के कृषकों को भारी नुकसानी हुई थी। केवलारी विधायक ठाकुर हरवंशसिंह ने क्षति ग्रस्त क्षेत्र का दौराकर मुआवजे की मांग की थी, केवलारी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति कर रहे डॉ. ढालङ्क्षसह बिसेन भी कहां पीछे रहने वाले थे उन्होंने ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ओला वृष्टि से बरबाद फसल का मुआयना किया था। सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, बंडोल कलारबांकी क्षेत्र के अनेक ग्रामों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ओला वृष्टि से हुई क्षति को देखने खेतों में पहुंची एवं उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये थे कि किसानों की क्षति का मुआवजा उन्हें एक सप्ताह के भीतर दिया जाये ओवर बुरी तरह चौपट हुई फसल के कारण ग्राम में राहत काल प्रारंभ किये जाये शासन की जन कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित ग्रामों में अधिकतम संचालित की जाये परंतु किसानों के लिए वे सारे वायदे, झूठे साबित हुए न उन्हें मुआवजा मिला और न कोई योजनाएं लाभ पहुंचाने वाली संचालित हुई , फिर इसके पश्चात सावंरदेही नामक फौजी कीट से खरीब की फसल बर्बाद हुई, और कृषक हितेषी बनने वाले सभी नेताओं ने सरकार से मुआवजे की मांग की । यहांतक की नुकसानी राजस्व मंत्री स्वयं खेतों में देखकर गये, केवलारी विधायक ठाकुर हरवंशसिंह, डॉ. ढालसिंह बिसेन, श्रीमती नीता पटेरिया, कमल मर्सकोले,सभी ने मुआवजा देने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा और नुकसानी का सीधा आंकलन कराकर किसानो को मुआवजा दिलाने की बात कही थी, परंतु जब क्षेत्रीय पटवारियों ने नुकसानी का आंकलन दर्शाया तो नुकसानी इतनी निकली जितने में किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता था। हालांकि इसके पश्चात बेमौसम बरसात भी हुई और नुकसानी बढ़ी भी परंतु किसानों को नुकसानी का मुआवजा नहीं मिला। राजस्व अमला किसानों की नुकसानी के आंकलन में जानबुझ कर ऐसा कर रहा है ऐसा प्रतीत होता है जानकार, जानकारों के अनुसार किसानों को मुआवजा की राशि नुकसानी के अनुसार सीधे चैक से भुगतान होना होती है, जिसमें राजस्व अमले की काई फायदा होने की संभावना नहीं होती है समझा जा रहा है कि अपना कोई फायदा न होने के कारण राजस्व अमले के अधिकारियों द्वारा नुकसानी के आंकलन में कंजुसी दिखाई जाती है, कड़ाके की ठण्ड और पाले से हुई नुकसानी ने नेताओं को किसान के पक्ष में झूठी हमदर्दी दिखाने का अवसर अवश्य प्रदान कर दिया परंतु उन्हे मुआवजा प्राप्त हो जायेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है और नेता भी अभी होहल्ला के पश्चात जो मौन धारण करेंगे तो फिर किसानों को मुआवजा मिला या नहीं इसकी उन्हे परवाह नहंी रहेगी। सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि, नेताओं द्वारा अभी किया जा रहा हो हल्ला पटवारियों की कलम से कमजोर पड़ जता है।

सोमवार, 10 जनवरी 2011

गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट के लिए टिकटों की बिक्री

गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट के लिए टिकटों की बिक्री
नई दिल्ली (ब्यूरो)। आम जनता के लिए राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड तथा विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह हेतु टिकटों की बिक्री आरंभ हो गई है। 26 जनवरी, 2011 को गणतंत्र दिवस परेड के लिए आरक्षित सीटों हेतु टिकटों का मूल्य 300. 150 रुपए तथा अनारक्षित सीटों हेतु टिकटों का मूल्य 50,10 रुपए है । 28 जनवरी 2011 को बीटींग रिटरीट समारोह (फुल ड्रेस रिहर्सल) के लिए टिकटों का मूल्य क्रमशः 50. 20. रुपए होगा तथा कोई आरक्षित सीट नहीं होगी।
इस उद्दश्य से जनपथ एवं अशोक होटल के आई टी डी सी ट्रवेल काउंटर, कॉफी होम, बाबा खडग सिंह मार्ग पर डी टी डी सी काउंटरों तथा फूड एवं क्राफ्ट बाजार, दिल्ली हाट आईएनए बाजार के सामने और गांधी आश्रम, चाँदनी चौक पर गैर-विभागीय बिक्री काउंटर स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर केवल कार्य दिवस में टिकट उपब्ध रहेंगे।
नौ विभागीय बिक्री काउंटरों पर भी सभी दिन सुबह दस से शाम पांच बजे टिकट उपलब्ध रहेंगे। ये काउंटर स्थापित किए गए हैं नॉर्थ ब्लॉक गोल चक्कर, साउथ ब्लॉक गोल चक्कर, प्रगति मैदान (गेट नं 1, भैरों मार्ग), जंतर मंतर (मुख्य द्वार), शास्त्री भवन (गेट नं 1 के पास), इंडिया गेट (जाम नगर हाउस के पास), लाल किला (पुलिस पिकेट के पास) तथा संसद भवन (स्वागत कक्ष)। संसद भवन स्वागत कक्ष में टिकट 19 से 28 जनवरी, बीच उपलब्ध रहेंगे। भारत सरकार पर्यटन कार्यालय, 88, जनपथ पर भी टिकट उपलब्धध रहेंगे।

नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा चार दिन के इंडोनेशिया दौरे पर

नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा चार दिन के इंडोनेशिया दौरे पर
नई दिल्ली (ब्यूरो)। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल निर्मल वर्मा 10 जनवरी से चार दिन के सरकारी दौरे पर, इंडोनेशिया के लिए रवाना हुए। एडमिरल वर्मा वहां इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री पुरनोमो युस्जिआंतोरो, इंडोनेशियाई नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुपरनो. कानूनी, राजनीतिक तथा रक्षा मामलों में सहायक मंत्री तथा इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल आगस सुहारतोनो से बातचीत करेंगे।
अपने चार दिन के दौरे के दौरान एडमिरल इंडोनेशियाई सेना, नौसेना तथा वायु सेना की विभिन्न सुविधा केन्द्रों का दौरा करेंगे तथा जकारता के साथ-साथ बैन्डंग एंड बाली का भी दौरा करेंगे। साझा गश्त व मिलान जैसे अभ्यास द्वारा प्रोत्साहित भारतीय एवं इंडोनेशियाई नौसेना के बीच आपसी सहयोग व समझ पर आधारित एक नियमित पुराना उच्च स्ततरीय संबंध है।

थम नहीं रहा ठंड का कहर

यूरोप की बराबरी में पहुंची दिल्‍ली
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राजधानी में अधिकतम तापमान ने पिछले पांच साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। राजधानी में रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री लुढ़ककर 11 डिग्री पर आ गया। न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री खिसककर 5 डिग्री पर आ गया। हालत यह है कि दिल्ली का अधिकतम तापमान यूरोप के बराबर पहुंच गया है। इस समय बार्सिलोना का अधिकतम तापमान 15, मैड्रिड का 9, पैरिस का 8, बर्लिन का 7 और लंदन का 6 डिग्री सेल्सियस है।
मौसम विभाग का कहना है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच कम अंतर के कारण ही ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में बर्फ बारी और बारिश का असर राजधानी में भी पहुंच रहा है। कोहरा भी पसरा हुआ है और सूर्यदेव के ठीक से दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में चल रहे मौसमी बदलाव के कारण आने वाले दिनों में राजधानी में बारिश भी हो सकती है। ठंड और कोहरे की मार हर तरह के ट्रैफिक पर पड़ रही है। एयरपोर्ट पर 2 उडान निरस्त हुईं, 7 के मार्ग बदले गए और 80 से ज्यादा विलंब से चलीं। 70 से ज्यादा ट्रेनें 3 से 27 घंटे लेट थीं। 35 को रीशेड्यूल किया गया और 9 ट्रेनें कैंसल की गईं।
0 वेस्टर्न डिस्टर्बेंर्स
 वेस्टर्न डिस्टर्बेंर्स यानी पश्चिमी विक्षोभ दरअसल बादलों और हवा का वह इलाका है, जो पश्चिम से पूर्व की तरफ बढ़ता है। पहले समझा जाता था कि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर से नमी लेकर आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह कैस्पियन सागर से भी नमी ला सकता है। कभी-कभी यह अपने आप ही बन जाता है। सदिर्यों र्में र्दिल्ली में आम तौर पर पश्चिमी विक्षोभ की एक पूरी सीरीज आती हैए जो अपने साथ बारिश लाती है और कोहरे का कारण बनती है, क्योंकि ये नमी में बढ़ोतरी करती हैं।
 
विंड चिल फैक्टर
यह दरअसल वह तापमान है, जब किसी ठंडे दिन तेज हवाएं चलती हैं। शरीर का तापमान, जो तकरीबन 37 डिग्री से. होता है, इन ठंडी हवाओं के कारण नीचे आ जाता है। ये हवाएं तापमान में एकरूपता लाने का भी काम करती हैं। उŸार की ठंडी हवाएं, जो हिमालय की ऊंची बफीर्ली पहाडिय़ों से बहकर आती हैं, तापमान में और कमी लेकर आती हैं। विंड चिल फैक्टर सिर्फ तभी लागू होता हैए जब तापमान 10 डिग्री से. या उससे नीचे हो और हवाओं की रफ्तार 4.8 किमी. प्रति घंटा हो।
पाला
जब न्यूनतम तापमान 3 डिग्री से. से नीचे जाता है, तो नमी पौधों पर जम जाती है। यह आम तौर पर खुले ग्रामीण इलाकों में होता है, जबकि वहां हवाएं, हॉरिजोंटल और वर्टिकल दोनों, बिना रुके चलती रहें।
कोहरा
पृथ्वी की सतह पर यह बहुत हद तक बादलों जैसा होता है। कोहरा तब बनता है, जब पानी की भाप कम तापमान के दौरान सघन हो जाती है। हालांकि, जब पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस से कम होता है, कोहरा बनना खत्म हो जाता है, क्योंकि भाप पाला (फ्रॉस्ट) में बदल जाती है। कोहरे के कारण दृश्यता 1000 मीटर से भी कम हो जाती है।
अब वेब कास्टिंग के जरिये हो जाएं लाइव

नई दिल्ली (ब्यूरो)। ब्लाग की दुनिया में कुछ चमत्कार एसे हो रहे हैं जिन पर लोग सहज ही भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। इंटरनेट पर ब्लागर्स ने जबर्दस्त तरीके से धूम मचाई हुई है। ब्लागर्स ने ब्लाग मंच को देश का पांचवा स्तंभ भी निरूपित कर दिया है। बीते 9 और 10 जनवरी को ब्लाग जगत में ऐसी घटना हुई जिससे न केवल ब्लाग जगत बल्कि सारे वे लोग आश्चर्य चकित हो गये जो संचार-क्रांति से जुड़े हुए हैं. हुआ यह कि खटीमा उत्तरांचल में एक ब्लागर्स मीटिंग होने वाली थी. इस में देश के कई नामी गिरामी ब्लागर इकट्ठा होने थे. दिल्ली से अविनाश वाचस्पति इस मीटिंग का जीवंत प्रसारण चाहते थे.उनके साथ समस्या यह थी कि उनको मीटिंग में सक्रिय रूप से उपस्थित रहना था और वे वेब पर लाइव भी रहें ऐसा संभव न था. इस समस्या का निदान हिन्दी ब्लाग जगत के प्रसिद्ध हस्ताक्षर गिरीश बिल्लोरे को जो जबलपुर में हैं को सौंप दी गई. विश्व में इन्टरनेट के जरिये हिंदी के प्रचार-प्रसार लिये काम करने वाले गिरीश बिल्लोरे स्वीडन की वेब साईट  www.bambuser.com के सदस्य हैं जिसके जरिये वे अब तक सामाजिक एवम साहित्यिक मुद्दों पर 56 वेब प्रसारण कर 1820 दर्शकों तक पहुंच चुके हैं. जो अपने आप में एक रिकार्ड है . उनके द्वारा जबलपुर के श्री अमृतलाल वेगड़ की कृति- अमृतस्य नर्मदा का पाठ (5 भागों में), बेलफास्ट से हिन्दी कवि दीपक मशाल से भेंट्वार्ता,ब्लागर समीरलाल (कनाडा) तथा बी०एस०पाबला(छतीसगढ़),लिमटी खरे(दिल्ली), डा०सुभाष शर्मा एवम डा० उमाशंकर नगाइच (भोपाल), डा०अजित गुप्ता (मेवाड़-राजस्थान) से बातचीत सर्वाधिक लोकप्रिय रहे प्रसारणों सहित “अब तक 56” प्रसारण किये हैं. गिरीश बिल्लोरे द्वारा सीमित साधन और असीमित प्रयास से खटीमा उतरांचल से प्राप्त वीडियो का लाईव-रिले,(अनुप्रसारण)अपने ब्लाग मिसफिट: सीधीबात http://sanskaardhani-blogspot-com/2011/01/live&from&khateema_08-html पर किया. साथ ही विभिन्न एग्रीगेटर्स खासकर ब्लागप्रहरी (दिल्ली), सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक,ट्विटर, गूगल-बज्ज आदी के जरिये भी वेबकास्टिंग की गई.

वेबकास्टिंग क्या है
बैमबजर एवम नेजममउ नामक दो वेब साइटस अपने पंजीकृत सदस्यों को निःशुल्क वेब पर प्रसारणों का अवसर देती है. थ्री-जी तकनीकि के आने के बाद आप सेलफोन के जरिये भी इसका लाभ ले सकते हैं. वर्तमान में इस तकनीकी का प्रयोग (ब्लाग जगत में ) कम ही लोग कर पा रहे हैं उनमे अविनाश वाचस्पति (दिल्ली), अर्चना चावजी (इन्दौर) तथा गिरीश बिल्लोरे (जबलपुर) . इनका कहना है कि इस कार्य को आसानी से सीखा एवम किया जा सकता है. करने में सतत अभ्यास एवम प्रसारण हेतु सर्व सुविधा युक्त साउन्ड-प्रूफ स्टूडियो आवश्यक होती है किंतु हम देर रात तक काम करके पाडकास्ट और वेब कास्ट तैयार करतें हैं. यह हम शौकिया करते हैं बिना किसी आर्थिक लाभ के.

850वीं पोस्‍ट

जनता मरे प्‍यासी पर बस धुलेंगी आरओ वाटर से

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

जनता के बजाए बसों की चिंता में घुल रही हैं शीला
दिल्ली के बारे में कहा जाता है कि जो भी कंकड़ पत्थर पचाने का हाजमा रखता हो, वह भी अगर छः महीने तक दिल्ली का बिना फिल्टर का पानी पी ले तो उसे पीलिया या पेट की बीमारियां होना निश्चित है। दिल्ली के दो तिहाई इलाकों में साफ पानी भी मयस्सर नहीं है। एसे हालातों में दिल्ली की कुर्सी पर तीसरी बार बैठने वाली मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार ने लाखों रूपयों की लागत वाली लकझक लो फ्लोर बसों की चमक बनाए रखने के लिए रिवर्स आस्मोसिस प्यूरीफायर प्लांट (आरओ वाटर प्लांट) से इन बसों को धोने की सोची है। दिल्ली के डीटीसी के बेड़े मंे वर्तमान में 3200 बस हैं। इनकी चमक दमक बनाए रखने के लिए वर्तमान में 27 डिपो में से 13 में आरओ तो 14 में सॉफ्टनिंग प्लांट लगाने की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। अभी हसनपुर डिपो में आरओ प्लांट लगा दिया गया है। अब शीला जी को कौन समझाए कि बस खराब होती है तो होती रहे पर दिल्ली के रहवासियों की सेहत खराब होने से बचाया जाए तो बेहतर होगा, बसों की चमक धमक बनी रहे पर उनकी रियाया के चेहरे की चमक चली जाए इससे उनकी सेहत पर कोई अंतर पड़ता नहीं दिखता।
इसे विकास की संज्ञा न दी जाए जयराम जी
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश पर्यावरण के प्रति काफी जागरूक नजर आ रहे हैं। वनों की कटाई और पर्यावरण के नुकसान को वे विनाश के कारण हुआ मानते हैं। रमेश ने पर्यावरण के नाम पर अनेक परियोजनाओं को ग्रीन सिग्नल के बजाए रेड सिग्नल दिखाते हुए अपने कदम मजबूती के साथ जमाए। हाल ही में उनके अधीन आने वाला पर्यावरण मंत्रालय जिस जगह पर बनाया जा रहा है, उसके लिए तीन दर्जन से अधिक पेड़ों की बली चढ़ाई जाने वाली है। अब सवाल यह उठता है कि राजग सरकार की महात्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना और उसके उत्तर दक्षिण गलियारे में वनों की कटाई के चलते अडंगा लगाने वाले वन एवं पर्यावरण मंत्री अपने ही मंत्रालय के भवन के लिए लगभग छः दर्जन पुराने झाड़ों में से तीन दर्जन झाड़ हटाने कैसे राजी हो गए। अब यक्ष प्रश्न यह है कि जयराम रमेश इसे विकास की संज्ञा देंगे या विनाश की।
बिग बी उलझे वन्य जीव नियमों के उल्लंघन में
बीते साल के अंतिम पखवाड़े में एक निजी समाचार चेनल को बाघ बचाने की सूझी और उसने आनन फानन मध्य प्रदेश के पेंच नेशनल पार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन कर डाला। इस कार्यक्रम में जान डालने के लिए उसने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को भी आमंत्रित कर लिया। बिग बी आए और कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मध्य प्रदेश के बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले और छिंदवाडा संसदीय क्षेत्र में आने वाले इस नेशनल पार्क में वन्य जीवों से संबंधित नियमों का जमकर उल्लंघन किया अमिताभ बच्चन ने। फिर क्या था सिवनी के उत्साही युवा संजय तिवारी ने मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में उच्च न्यायालय में दायर कर दी याचिका। यद्यपि इसमें सीधे सीधे अमिताभ बच्चन को पार्टी नहीं बनाया गया है, फिर भी याचिका में उल्लेखित तथ्यों पर अगर उच्च न्यायालय ने संज्ञान ले लिया तो आने वाले दिनों में अमिताभ बच्चन को जबलपुर आकर सफाई पेश करनी पड़ सकती है।
घोषणामंत्री बनीं ममता बनर्जी
संप्रग के पहले कार्यकाल में स्वयंभू प्रबंधन गुरू बनकर उभरे तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का अब नाम लेवा भी नहीं बचा है। उनके बाद रेल महकमा संभालने वाली ममता बनर्जी ने आते ही अनेक चमत्कार कर दिए। सबसे पहले तो उन्होंने लीक से हटकर अपना कार्यकाल ही पश्चिम बंगाल में जाकर संभाला। इसके बाद उन्होंने त्रणमूल कांग्रेस के मंत्रियों को फरमान जारी कर दिया कि मंत्री वेस्ट बंगाल में ज्यादा समय दें। दरअसल ममता की चाहत बंगाल का मुख्यमंत्री बनने की है। रेल मंत्री रहते हुए ममता ने जितनी भी घोषणाएं की वे महज घोषणा ही रहीं, उन्हें अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। अब लोग ममता को भारत गणराज्य की रेल मंत्री के बजाए घोषणा मंत्री के तौर पर अधिक पहचानने लगे हैं। पिछले बजट में ममता ने एक हजार किलोमीटर लंबी रेल लाईन बिछाने की घोषणा की थी, अफसोस नवंबर के अंत तक महज 123 किलोमीटर ही रेल की पांते बिछ पाईं दिसंबर समाप्त होते होते यह आंकड़ा 200 तक बमुकिल पहुंच सका। यद्यपि अधिकारियों का दावा है कि मार्च तक आठ सौ किलोमीटर की पांतें बिछा दी जाएंगी। भगवान ही जानता होगा कि घोषणावीर रेल मंत्री ममता बनर्जी की घोषणाओं को अधिकारी यात्रियों की जान के एवज में आठ सौ किलोमीटर पांते बिछाकर कैसे पूरा करेंगे?
अफसरों से हलाकान लवली
अमूमन देखा गया है कि फोन की घंटी बजती रहे और मंत्री फोन न उठाए, पर दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली की परेशानी इससे उलट ही है। वे फोन लगाते हैं, और उनके मातहत अफसरान उनका फोन ही उठाने से गुरेज करते हैं। परिवहन मंत्री के सचिव एच.पी.एस.सरीन ने अपने आला मंत्री की नाराजगी का इजहार करते हुए अपने विभाग के अफसरों को पत्र लिखा है। इस पत्र की इबारत में साफ किया गया है कि परिवहन मंत्री के आवासीय या मंत्रालय के कार्यालय से जब भी अफसरों को फोन किया जाता है तो उनके फोन या तो स्विच ऑफ मिलते हैं या फिर घन्टी घनघनाती रहती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर कोई अफसर न्यायालय या जरूरी बैठक मंे व्यस्त है तो उससे कम से कम यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वह मिस्ड काल देखकर कर काल बैक करे, जो अमूमन नहीं होता है। परिवहन उपायुक्त प्रशासन ने मंत्री की नाराजगी से अफसरों को आवगत कराते हुए साफ किया है अवकाश के दिनों में भी अफसर अपना फोन बंद न रखें।
महामहिम को भी नाप दिया कलमाड़ी ने
कामन वेल्थ गेम्स में आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे सुरेश कलमाड़ी की हिमाकत तो देखिए उन्होंने भारत गणराज्य के पहले नागरिक अर्थात महामहिम राष्ट्रपति को भी नहीं बख्शा है। कलमाड़ी की मण्डली ने महामहिम के नाम का सहारा लेकर क्वींस बेटन का बजट आनन फानन छः गुना बढ़ा दिया। मई 2009 में इसका बजट दो करोड़ 20 लाख रूपए था, जो बढ़ाकर 12 करोड़ 77 लाख रूपए कर दिया गया। इसके लिए इवेंट मेनेजमेंट कंपनी मेसर्स जैक मॉर्टन वर्ल्ड वाईड एवं ए.एम.कार एण्ड वैन हायर्स को अक्टूबर 2009 में अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया गया। उधर महामहिम के करीबी सूत्रों का कहना है कि महामहिम की लंदन यात्रा का प्रोग्राम महीनों पहले ही बन गया था, जिसका क्वींस बेटन से कोई सरोकार ही नहीं था। घाघ और शातिर राजनेता सुरेश कलमाड़ी ने महामहिम राष्ट्रपति की उपस्थिति को जिस तरह भुनाया है, उसकी जितनी निंदा की जाए कम ही होगा।
बाबा रामदेव को बाजपेयी की चुनौति
इक्कसवीं सदी में अमीरों और पहुंच सम्पन्न लोगों के स्वयंभू योग गुरू बनकर उभरे बाबा रामदेव के मन में भले ही राजनीति करने की बलवती इच्छाएं कुलाचें मार रहीं हों पर देश के अनेक योगियों और अन्य लोगों से उन्हें निरंतर चुनौतियां मिल रही हैं। यह अलहदा बात है कि रामकिशन उर्फ बाबा रामदेव इन चुनौतियों पर कान न दे रहे हों। हाल ही में बाराबंकी जिले के शरीफाबाद निवासी भारतीय पर्वतारोही फाउंडेशन के लाईजनिंग अफसर अजय कुमार बाजपेयी ने बाबा रामदेव को नए तरीके की चुनौति दे दी है। यूपी के एक योग प्रशिक्षक और पर्वतारोही बाजपेयी का कहना है कि बाबा रामदेव भी बाजपेयी की तरह ही बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच शून्य से कम तापमान पर खुले बदन योग कर दिखाएं तब दुनिया उनका लोहा मानेगी। गौरतलब है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया को अपनी जेब में रखते हुए चुनिंदा आध्यामिक चेनल्स के माध्यम से बाबा रामदेव ने अपने आप को स्थापित कर लिया है, किन्तु आज भी बाबा की कीर्ति उन्हीं के बीच है जिनकी जेबें गर्म हैं।
चोर के हाथ खजाने की चाबी!
पुरानी कहावत है कि चोर के हाथ खजाने की चाबी देने से क्या खजाना सुरक्षित रह सकता है? जवाब नकारात्मक ही आएगा। महाराष्ट्र प्रदेश के नए निजाम पृथ्वीराज चव्हाण ने एक दागी नौकरशाह को ही सूबे का मुख्य सचिव बना दिया है। आदर्श घोटाले में महती भूमिका निभाने वाले नौकरशाह रत्नाकर गायकवाड़ जो मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमआरआरडीए) के आयुक्त थे ने सूबे के नए चीफ सेकेरेटरी की भूमिका संभाल ली है। आदर्श हाउसिंग सोसायटी को मंजिल दर मंजिल निर्माण की अनुमति देने में एमआरआरडीए की भूमिका सबसे अहम रही है। एमआरआरडीए ने आठ करोड़ 11 लाख 80 हजारख् 436 रूपए लेकर 27 मंजिला इमारत की अनुमति प्रदान कर दी थी। इस अनुमति पत्र पर गायकवाड़ की सही है। इसके बाद इसमें 31 मंजिल हो गईं और एमआरआरडीए ने 39 लाख 74 हजार 235 रूपए प्रति मंजिल के हिसाब से जुर्माना वसूला था। माना जा रहा है कि आदर्श हाउसिंग घोटाले के मामले को डाल्यूट करने के लिए गायकवाड़ की तैनाती की गई है ताकि अन्य महकमों के अफसरान को हड़का कर फाईलों को दुरूस्त किया जा सके।
माननीयों के पास महंगी कार का क्या काम
हरयाणा सरकार ने कामकाज को सुगम तरीके से संचालित करने की गरज से नौ मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। इन सीपीएस के आवागवमन को सुलभ बनाने के लिए सरकारी खजाने पर जमकर बोझ डाला गया है। सरकार ने इनके लिए नौ हॉंडा सीआरवी कार खरीदने का फरमान जारी किया है। एक कार की कीमत 21 लाख रूपए है, इस लिहाज से 1 करोड़ 89 लाख् रूपए महज खरीदी में ही खर्च हो जाएंगे। हरियाणा के एक अधिवक्ता जेएस.भट्टी को यह नागवार गुजरा और उसने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की शरण ले ली है। उधर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि राज्य में दस मंत्री हैं, जिनके पास एक से अधिक विभाग हैं, जिससे काम सुगम तरीके से नहीं हो पा रहा है, इसीलिए सीपीएस की नियुक्ति की गई है। वकील भट्टी की दलील है कि ये नियुक्तियां राजनैतिक हित साधने और सामंजस्य बनाने के लिए की जाती हैं। गौरतलब होगा कि पूर्व में हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय द्वारा इस तरह की नियुक्तियों को अवैध ठहराया जा चुका है।
राजनेताओं की भाषा बोलते नौकरशाह
अपने राजनैतिक नफा नुकसान के राजनेता तो चाहे जो भाषा का इस्तेमाल कर लेते हैं किन्तु अब तक नौकरशाहों द्वारा जनता के हितों को ध्यान में रखकर ही बयान जारी किए जाते रहे हैं, संभवतः यह पहला ही मौका होगा जब किसी सूबे के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी द्वारा राजनेताओं की भाषा बोली गई हो। हाल ही में देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा महाराष्ट्र के मुख्य सचिव द्वारा की गई टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए तीन सप्ताह में स्पष्टीकरण देने की बात कही है। महाराष्ट्र के एक एनजीओ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र के मुख्य सचिव जे.जे.डांगे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोई योजना आरंभ नहीं कर सकते। यह बेघर लोगों का मामला है, इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है। एसे बहुत से आदेश हैं और हम इनकी परवाह नहीं करते। बेघर लोग महाराष्ट्र से नहीं वरन बाहरी राज्यों से हैं। यद्यपि डांगे को सीएस के पद से हटाया जा चुका है, किन्तु उन्होंने जो कुछ कहा वह चीफ सेकेरेटरी की हैसियत से कहा तो राज्य सरकार को इसका भोगमान तो आखिर भोगना ही होगा।
कमजोर हो गए हैं अहमद पटेल
कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल के सितारे इन दिनों गर्दिश में ही दिख रहे हैं। कांग्रेस के एक ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह की सोनिया गांधी से नजदीकी के बाद अहमद पटेल का ग्राफ नीचे की ओर आने लगा है। पटेल के दरबार में अब भीड़ भी कम दिखने लगी है। महाराष्ट्र के एक क्षत्रप कांग्रेस महासचिव और केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक जो कल तक अहमद पटेल के नौ रत्नों में से एक हुआ करते थे, ने नजाकत को भांपते हुए अपना गाड फादर ही बदल लिया है। वैसे भी मौसम और कपड़ों की तरह अपने आका बदलना वासनिक की फितरत में शामिल है। वासनिक को एनएसयूआई में रमेश चेन्नीथेला लाए फिर सीताराम केसरी और आस्कर फर्नाडिस इनके आका रहे। इसके बाद गुलाम नवी आजाद फिर अंबिका सोनी के रास्ते वासनिक पटेल के पास पहुंचे। वासनिक आजकल गुलाम नवी की देहरी चूम रहे हैं। वैसे यह बात है कि वासनिक जिसके दरबार में हाजिरी बजाते हैं वह राजनैतिक शिखर पर गुंजायमान ही रहता है।
दिग्गी राजा हुए बाग बाग
महाराष्ट्र एटीएस चीफ हेमंत करकरे के साथ हुई बातचीत का ब्योरा देने कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह द्वारा प्रेस कांफ्रेस का आयोजन किया गया। रफी मार्ग पर कांस्टीट्यूशन सेंटर में हाल मीडिया कर्मियों से लबालब भरा था। एक के बाद एक प्रश्नों के जवाब दिग्गी राजा दे रहे थे। इसमंे खास बात यह थी कि प्रश्न का जवाब देते समय दिग्विजय सिंह द्वारा पत्रकार को बाकायदा नाम से पुकारा जा रहा था। मीडिया पर्सन्स कायल थे, कि राजा इतने सारे लोगों को नाम से पहचानते हैं। पत्रकार वार्ता के उपरांत चाय और चिरपरिचित ‘‘दिग्गी ठहाकों‘‘ का दौर चला। चुनिंदा मीडिया पर्सन्स ने राजा दिग्विजय सिंह को घेर रखा था। कुछ राजा की तारीफों में कशेदे गढ़ रहे थे। राजा भी चश्मे के भीतर से चिरपरिचित अंदाज में झांकते हुए मंद मंद मुस्करा रहे थे। इसी बीच किसी ने कह ही दिया -‘‘प्रधानमंत्री के बाद मीडिया का हाउस फुल आपकी पीसी अर्थात प्रेस कांफ्रेंस में ही रहता है।‘‘ राजा पहले तो चौंके फिर सहज होकर मुस्कराकर बोले -‘‘नहीं एसा नहीं है, भई।‘‘ आखिर तारीफ सुनना किसे बुरा लगता है।
शीला रमेश आमने सामने
कांग्रेस के अंदरखाने में नंबर दो नेताओं के बीच जबर्दस्त जंग छिड़ी हुई है। चिदम्बरम प्रणव, अहलूवालिया कमल नाथ, श्रीप्रकाश जास्वाल, वीरप्पा माईली, एस.एम.कृष्णा, आदि की आपस में नहीं बन रही है। हाल ही में पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर और खेल गांव के बारे में बयान दे डाला कि पर्यावरण अनुमति के बिना ही इन दोनों का निर्माण हो गया। दिल्ली की निजाम शीला दीक्षित को यह नागवार गुजरा। शीला ने हुंकार भरी और कह डाला कि अक्षरधाम और खेल गांव को यमुना के तट पर बनाने के लिए पर्यावरण विभाग की बाकायदा अनुमति ली गई थी। अब कौन है सच्च कौन है झूठा हर चेहरे पर नकाब है की तर्ज पर यह कहना मुश्किल है कि सच कौन कह रहा है। रमेश पर्यावरण मंत्री हैं, सो उन्हें वास्तविक स्थिति पता होना स्वाभाविक है, वहीं दूसरी ओर शीला दीक्षित तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं इस लिहाज से उनकी जानकारी को भी कमतर नहीं आंका जा सकता है।
पुच्छल तारा
दिल्ली में ठंड पड़ रही है, सारी दिल्ली जम चुकी है। तापमान नीचे आता जा रहा है। ठंड के कारण लोग घरों में दुबके पड़े हैं। अपने अपने कार्यालयों से झूठ बोलकर अवकाश ले रहे हैं। कोई बीमारी का तो कोई किसे के फायनल होने का बहाना बना रहा है। 
दिल्ली में रोहणी में रहने वाले संजय पोतदार ने ईमेल भेजा है, 
संजय लिखते हैं कि एक बॉस ने अपने मातहत से पूछा -‘‘क्या तुम मृत्यु के बाद जीवन पर यकीन करते हो?‘‘
कर्मचारी बोला -‘‘जी नहीं साहेब।‘‘
बॉस फिर बोला -‘‘ठीक बात है, पर अब करने लगो। जिस दादी की मौत पर तुमने परसों अवकाश लिया था, उनका फोन तुम्हारे जाने के बाद आया था, कि तुम्हें जतला दिया जाए कि बाजार से एक पाव प्याज जरूर ले आना।‘‘

प्रहलाद का प्रथम नगर आगमन हुआ भव्यता पूर्ण

नेताओं का विरोध भी नहीं रोक पाया जन सैलाब
 
(मनोज मर्दन त्रिवेदी)
 
सिवनी :- पूर्व केन्द्रीय मंत्री और महाकौशल के कद्दावर नेता प्रहलाद सिंह पटेल की भाजपा में सक्रिय राजनीति में वापसी से भाजपाई हल्के के ऐसे नेता जो भाजपा की लोकप्रियता के कारण  सतासुख भोग रहे हैं, और पब्लिक में कोई इमेज नहीं है ऐसे नेताओं में हड़कंप मच गया है, सत्ता की बैशाखी पर खड़े होकर जिन्होनें  जन हितों को दर किनार कर जनकल्याण की योजनाओं में दलाली खाने तक अपने आप को सीमित रखा है प्रहलाद पटेल का आगमन उनके लिए अनेक मुश्किलें  खड़ी कर सकता है यह भय दलाली खाने वाले नेताओं को बुरी तरह सता रहा यह सर्व विदित है कि प्रहलाद पटेल ने अपने सार्वजनिक राजनैतिक जीवन की शुरूआत सिवनी से की थी, उनका का यहां  प्रारंभिक दौर ही पार्टी से नहीं आम जनता के विश्वास से प्रारंभ हुआ था, भारतीय जनता पार्टी ने उस समय भी चुनाव चिन्ह आवंटित करने के पश्चात अपना अधिकृत प्रत्याशी उन्हें घोषित नहंीं किया था, पार्टी के हर बड़े नेता ने हाई कमान के निर्देश पर उन्हे बीच मंझधार में में छोड़ दिया था,  परंतु सिवनी जिले की जनता ने उनकी स्पष्ट वादिता, जुझारूपन,पर अटूट विश्वास व्यक्त किया था। प्रहलाद पटेल ने जनता के उस विश्वास को आज भी कायम रखा है और सिवनी जिले से  अपने गहरे संबंध स्थापित कर लिये हैं,  सिवनी जिले का  ऐसा कोई दरवाजा नहीं होगा जहां प्रहलाद पटेल ने जीवंत संपर्क नहीं किया है यही कारण है कि केवल प्रहलाद पटेल के नाम पर सिवनी में अपार जनसमुदाय एकत्रित होकर उनका नेतृत्व स्वीकार करता रहा है। जिले में इस प्रकार का विश्वास आम जनता में पैदा करने में अन्य कोई नेता सफल नहीं हो पाया आज भी बड़े-बड़े पदों पर भाजपाई नेता विराजमान हैं,  परंतु आम जनता का आकर्षण उनके प्रति नहंी बन पाया है और वे नेता आम जनता  और भाजपा कार्यकर्ताओं मे ंवैसा विश्वास पैदा नहीं कर पाये जैसा प्रहलाद पटेल ने किया है। परिणाम सामने हैं जिला भाजपा के और जिले के सभी जिम्मेदार नेताओं के सहयोग के बिना प्रहलाद पटेल का आगमन सुनकर ही भाजपा के सभी मंडलों के अध्यक्ष जिले के पदाधिकारी उनका का गर्म जोशी से स्वागक करने के लिए आतुर दिखाई दे रहे थे। जिला मुख्यालय के जिस मार्ग से उनका जुलुस निकला स्वागत के लिए भाजपा कार्यकर्ता और उनके समर्थक टूट पड़े इतना ऐतिहासिक स्वागत भाजपा के अन्य किसी नेता का न होना भी ईर्षा का कारण बना हुआ है । हालांकि  अपने आपको जो बड़ा नेता समझने लगे हैं, ऐसे नेताओं के जन्मदता भी प्रहलाद पटेल ही हैं परंतु राजनैतिक क्षेत्र में काम करते हुए इन नेताओं ने अपने पदों का उपयोग अपने व्यक्तिगत लाभ तक सीमित रखा है, जनहित की उपेक्षा के कारण जनता में वह सम्मान नहीं बन पाया जो प्रहलाद पटेल का बना हुआ है। शासकीय योजनाओं में कमीशन आम जनता से केवल वोट तक के संबंध और सस्ती लोक प्रियता के लिए की जानेवाली बयानबाजी इन नेताओ का सगल बन गया है,न क्षेत्र के विकास की और न क्षेत्र की समस्याओं से इनका कोई वास्ता है बड़ी-बड़ी किसानों से संबंधित समस्याओ गरीब मजदूरों की समस्याओं पर, बेरोजगारों की समस्याओं पर, छात्रों की समस्याओं पर भी नेताओं का कोई ध्यान नहीं है एसे असंवेदनशील नेताओं को यदि सम्मान नहीं मिल पा रहा है, तो इसमे ईष्र्या का कोई स्थान नहीं होना चाहिए जनता के हितों के लिए संघर्ष करने की क्षमता ऐसे नेताओं को पैदा कर जनता में विश्वास बनाने का प्रयास करना चाहिए प्रहलाद पटेल के आगमन पर यदि भव्य स्वागत होने की संभावना का विरोध करने का प्रयास किया जाये तो इस प्रकार जनाधार विहीन नेताओं को मुंह की खाना पड़ेगी।
गत ४ जनवरी को पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भारतीय जनता असंगठित् कामगार मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के पश्चात जब प्रथम बार सिवनी आये तो उनका जिला मुख्यालय में अभूतपूर्व स्वागत हुआ है। जिसकी चोरी छिपे विरोध करने वालों ने विडियों रिकार्डिंग भी बुलवाई है, जिन्हे वे अभी तक अपना खास समझ रहे थे। ऐसे कार्यकर्र्ता और पदाधिकारियों को प्रहलाद जी के कार्यक्रम में शामिल होने पर अनेक तरह की धमकियां भी देने से नहीं चूक रहे हैं। भाजपाई खेमे में प्रहलाद जी का आगमन व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि उनके कार्यक्रम में पूर्व त्रिविभागीय मंत्री डॉ. ढालसिंह बिसेन, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक तेकाम, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, पार्वती जंघेला जिला भाजपा के अधिकांश पदाधिकारी शामिल रहे। सभी मंडलों के अध्यक्ष शामिल रहे , भाजपा समर्थित जनपद अध्यक्ष जिला पंचायत सदस्य शामिल रहे, शामिल नहीं रहने वालों में भाजपा जिला अध्यक्ष सुजीत जैन, सिवनी जिला मुख्यालय की विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, लखनादौन विधायक श्रीमती शशि ठाकुर, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, शामिल नहीं रहे। भाजपा नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने प्रहलाद पटेल का गर्मजोशी से भारी जन सैलाब के साथ उनकी अगवानी की और स्थानीय बाहुबली लॉन में प्रहलाद पटेल का जैसा गरिमामय कार्यक्रम संपन्न हुआ वैसा जिला भाजपा के इतिहास में कोई कार्यक्रम संपन्न हुआ हो ऐसा याद नहीं है।

रविवार, 9 जनवरी 2011

सुमित शर्मा से प्रेरणा लें आईएएस अधिकारी

सुमित शर्मा से प्रेरणा लें आईएएस अधिकारी

(लिमटी खरे)

कहते हैं देश को चलाने वाले भारतीय प्रशासिनक सेवा (आईएएस) अधिकारी होते हैं, इन नौकरशाहों के आगे राजनेताओं के साथ ही साथ अन्य अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी बौने ही साबित होते हैं। आईएएस जब किसी जिले का जिलाधिकारी यानी कलेक्टर बनकर पदस्थ होता है, तब उसका रूतबा कुछ और होता है। वह जिले का अघोषित मालिक होता है। जिलाधिकारी जिले में जिला दण्डाधिकारी के बतौर भी काम करता है।
सत्तर के दशक तक की समाप्ति तक अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को बड़े ही सम्मान के साथ देखा जाता था। उस वक्त अधिकारियों को भय होता था कि अगर उन्होंने किसी से भी रिश्वत ली तो समाज उन्हें हेय दृष्टि से देखेगा। शनैः शनैः नौकरशाह, मीडिया और राजनेताओं के गठजोड़ ने समूची व्यवस्था को ही पंगु बना डाला है।
पिछले तीन दशकों में देश में अखिल भारतीय स्तर के चुनिंदा अधिकारी ही हैं, जिनके नाम पर आज भी लोग गर्व करते हैं। आज भी इन नौकरशाहों के साथ काम करने वाले सेवानिवृत या सेवानिवृति की कगार पर पहुंचने वाले बाबुओं को अपने संस्मरण सुनाने में काफी हर्ष महसूस होता है।
याद पड़ता है मध्य प्रदेश में भी एक आईएएस अधिकारी हुए हैं, जिनका नाम था, मोहम्मद पाशा राजन। एम.पी.राजन के बारे में कहा जाता था कि वे शासन की सेवा के एवज में महज एक रूपए ही वेतन लिया करते थे। उनकी ईमानदारी की कस्में खाई जातीं थीं, किन्तु जब वे सेवानिवृति के मुहाने पर पहुंचे तो उनका दामन इतना दागदार निकला कि कसमें खाने वालों के मुंह का स्वाद ही कसैला हो गया।
राजस्थान संवर्ग के युवा आईएएस अधिकारी डॉ.सुमित शर्मा ने इस भ्रष्टाचारी जमाने में एक मिसाल कायम की है। शर्मा ने जता दिया है कि कलेक्टर वाकई जिले का मालक नहीं पालक होता है। सच है कि अगर जिले का कोई आला अधिकारी पूरी ईमानदारी, कार्यकुशलता, संवेदनशीलता, मेहनत और लगन के साथ काम करे तो वह जिले का कायापलट कर सकता है।
अमूमन देखा गया है कि जब भी कोई आला अधिकारी किसी जिले में पदस्थ होता है, तो वह दिखावे के लिए स्वांग रच लेता है कि उस जिले के निवासी उसके परिवार का हिस्सा है। दरअसल वह अधिकारी उस जिले में जाकर अपनी तैनाती के समय को सफलता के साथ काटना चाहता है। वह नहीं चाहता कि किसी भी तरह का कोई पंगा हो जिसकी आंच उसके गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) पर पड़े। यही कारण है कि आज जिलों में पदस्थ अधिकारी अपने काम को ईमानदारी के साथ करने के बजाए समय काटने में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। अनेक एसे भी अधिकारी हैं, जो दूसरी या तीसरी बार उस जिले में पदस्थ होते हैं, उन अधिकारियों का अवश्य ही जिले के साथ लगाव समझा जा सकता है, वे जिले के विकास के प्रति कुछ ज्यादा फिकरमंद हुआ करते हैं।
होता यह है कि अगर कोई अधिकारी कर्मठता का परिचय देना आरंभ करता है तो स्थानीय राजनेता, विधायक, सांसद उसे सही रास्ते पर चलने नहीं देते। जरा जरा सी बात पर शिकायतों के माध्यम से उस अधिकारी के सर पर निलंबन या स्थानांतरण की तलवार लटकना आम बात है। अगर किसी अफसर ने जनसेवक की सही गलत बात नहीं मानी बस हो जाती हैं उनकी नजरें तिरछी। यही कारण है कि अफसरों ने भी अपने आप को राजनेताओं की मंशा के अनुरूप ही ढालने में भलाई समझी है।
बहरहाल राजस्थान के नागौर जिले में जो भी घटित हुआ है, वह निस्संदेह ही देश के सवा छः सौ जिलों के मालिकों के लिए नजीर बन सकता है। नागौर के जिला कलेक्टर डॉ.सुमित शर्मा का तबादला कर दिया गया, फिर क्या था जिले की जनता सड़कों पर उतर आई। कहा जा रहा है कि उन्होंने एक पहुंच संपन्न इंडस्ट्रीयलिस्ट का शराब कारखाना बंद करवा दिया था, जिसका भोगमान उन्हें भुगतना पड़ा। डॉ.शर्मा के साथ यह पहली मर्तबा नहीं हुआ, इसके पहले जब वे चित्तोड़गढ़ में पदस्थ थे, तब भी उनके स्थानांतरण पर जनता ने सड़कों को थाम लिया था। अमूमन इस तरह की बातें या दृश्य हिन्दुस्तानी सिनेमा में ही देखने को मिला करते हैं, वास्तविकता में यह देखने को नहीं मिलता है। पेशे से पशु चिकित्सक रहे डॉ. शर्मा ने अपने कर्तव्यों के साथ ही साथ जिले में रहते हुए नियमित जनसुनवाई को संपादित किया जिससे वे जनता के दिलों के काफी करीब आ गए।
बताते हैं कि डॉ.शर्मा पुराने राजाओं की तरह भेस बदलकर जिले का भ्रमण कर रियाया का हाल चाल दुख दर्द जाना करते थे, बाद में उसे दूर करने की दिशा में प्रयास किया करते थे। नागौर के हर कार्यालय में ‘‘रिश्वत न देने‘‘ संबंधी जुमलों के साथ बोर्ड लगे हुए हैं। एसा नहीं कि ये बोर्ड हाथी कि मंहगे दांतों की तरह हों, इन पर बाकायदा उन्होंने कार्यवाही भी की है। नागौर की जनता को कलयुग के इस काल में राम राज्य की कुछ तो अनुभूति हुई ही होगी। पहले भी अनेक जिलों के जिलाधीशों ने इस तरह का दिखावा करने का प्रयास किया किन्तु वे बाद में जनता के सामने एक्सपोज हो गए। देश के हर प्रांत की सीमाओं पर परिवहन, सेल टेक्स, मण्डी, आदि की जांच चौकियां आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हैं, यहां से हर माह लाखों रूपए चौथके तौर पर राजनैतिक दलों, राजनेताओं, पत्रकारों और अधिकारियों को जाता है। सब कुछ देखने सुनने जानने के बाद भी जिला कलेक्टरों की खामोशी उनकी कार्यप्रणाली की ओर इशारा करने के लिए पर्याप्त मानी जा सकती है।
कुछ सालों पूर्व महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में एक जिला कलेक्टर द्वारा एकल खिड़की प्रणाली आरंभ की थी। वह प्रणाली इतनी सफल हुई कि अनेक सूबों में अहमदनगर प्रणालीके नाम से हर जिलों में काउंटर खोल दिए गए थे। जिला कलेक्टरों की अनदेखी के चलते इस व्यवस्था ने अहमदनगर सहित समस्त जिलों में दम ही तोड़ दिया।
हमारी निजी राय में तो डॉ.सुमित शर्मा के बतौर कलेक्टर कार्यकाल को एक नजीर मानकर आईएएस के प्रशिक्षण में इसे शामिल करना चाहिए, ताकि देश के जिलों को चलाने वाले जिलाधीशों को कम से कम इस बारे में तो जानकारी मिल सके कि जिस मिशन जिस उद्देश के तहत उनके कांधों पर जिलों की कमान सौंपी जा रही है, वह मुकाम वे कैसे पा सकते हैं। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि आज अनेक सूबों में जिलों में कलेक्टरी तक की बोली लगने लगी है। डॉ.सुमित शर्मा द्वारा किए गए अनूठे, अद्भुत, जनकल्याणकारी प्रयासों के लिए वे बधाई के पात्र हैं, किन्तु यह वाकई उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा ही रहे तो बेहतर होगा, कहीं एसा न हो कि आने वाले समय में उनके बारे में भी कोई कहानी सुनने को मिल जाए।

शनिवार, 8 जनवरी 2011

इसी साल ब्राम्हण कन्या बन सकती है नेहरू गांधी परिवार की सदस्य

युवराज की दुलहनिया की तलाश तेज

(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष चाहतीं हैं कि उनके दुलारे और कांग्रेस की नजरों में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी की शादी इसी साल संपन्न करवा दी जाए, यही कारण है कि राहुल गांधी के लिए दुल्हनिया की तलाश तेज हो गई हैै। राहुल पर दवाब है कि वे देशी कन्या से ही विवाह संपन्न करें ताकि आने वाले समय में उनके प्रधानमंत्री बनने में कोई रोढ़ा न आए।
 
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने अब बहू लाने की अपनी साफ मंशा अपने सिपाहसलारों को सुना दी है। सोनिया के हरकारे अब राहुल के लिए देशी दुल्हन की तलाश में निकल पड़े हैं। कहा जा रहा है कि अपनी कोडंबियाई गर्ल फ्रेंड के चलते राहुल गांधी पर परोक्ष तौर पर आरोप प्रत्यारोपों के चलते अब सोनिया गांधी को मशविरा दिया गया है कि राहुल के लिए खालिस हिन्दुस्तानी दुल्हन की ही तलाश की जाए।
 
19 जून 1970 को जन्मे राहुल गांधी इस साल 41 बसंत पूरे कर लेंगे। पिछले साल ज्योतिषियों द्वारा उनके बारे में भविष्यवाणी की थी कि राहुल का ब्याह 10 साल तक नहीं होने के योग उनकी कुण्डली में बने हुए हैं। ज्ञातव्य है कि नेहरू गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी के प्रतिनिधि राहुल गांधी ने मार्च 2004 में सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा की और मई 2004 में यूपी के अमेठी संसदीय क्षेत्र से तीन लाख पांच सौ मतों के अंतर से जीत भी दर्ज की।

सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि प्रियंका गांधी के प्रेम विवाह किए जाने के उपरंात अब सोनिया की मंशा है कि राहुल गांधी के लिए ब्राम्हण बहू ही लाई जाए, अगर राहुल विदेशी बाला से शादी करते हैं तो उसे भी भविष्य में वैसे ही ताने सुनने पड़ सकते हैं जिनसे विवाह के उपरांत सोनिया को दो चार होना पड़ा था। चर्चा तो यहां तक है कि मध्य उत्तर प्रदेश के एक लोकसभा सदस्य की बहन के नाम का प्रस्ताव भी सोनिया तक पहुंचाया गया है, जिस पर सोनिया गांधी सहमत होती नजर आ रही हैं।

सीबीएसई 10वीं व 12वीं की परीक्षा 1 मार्च से

सीबीएसई 10वीं व 12वीं की परीक्षा 1 मार्च से
नई दिल्ली (ब्यूरो)। दसवीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा एक मार्च से होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने परीक्षा की तिथियों की घोषणा कर दी।  सीबीएसई ने विषयवार तिथियों का एलान कर दिया है जिससे 10वीं व 12वीं के लाखों छात्र-छात्राओं के दिल की धड़कनें बढ़ गई हैं। दसवीं की परीक्षा यूं तो पहली मार्च से शुरू हो जाएगी, लेकिन मुख्य विषयों की परीक्षा की शुरुआत पांच मार्च को गणित के साथ होगी। इसके अलावा 12वीं की परीक्षा की शुरुआत पहली मार्च से साइंस के मुख्य विषय फिजिक्स के साथ होगी।
10 वीं का परीक्षा कार्यक्रम
तारीख         विषय
1 मार्च     उर्दू, बंगाली, मराठी, तमिल, नेपाली, कश्मीरी सहित 24 क्षेत्रीय भाषाएं।
3 मार्च     पंजाबी और मलयालम
5 मार्च     गणित
7 मार्च     संस्कृत
09 मार्च     गृह विज्ञान
10 मार्च     सामाजिक विज्ञान
12 मार्च     चित्रकला
14 मार्च     हिंदी कोर्स-ए और हिंदी कोर्स-बी
16 मार्च     फाउंडेशन आइटी
18 मार्च     अंग्रेजी
23 मार्च     साइंस व साइंस प्रैक्टिकल स्किल
25 मार्च     संगीत
 
12 वीं का परीक्षा कार्यक्रम 
 
तारीख     विषय
1 मार्च     फिजिक्स
3 मार्च     बिजनेस स्टडी
4 मार्च     फैशन स्टडीज
5 मार्च     हिस्ट्री, फाइनेंसियल एकाउंटिंग
7 मार्च     केमेस्ट्री
8 मार्च     पंजाबी
9 मार्च     बायोटेक्नोलॉजीए एकाउंटेंसी
11 मार्च अंग्रेजी इलेक्टिव और अंग्रेजी कोर
14 मार्च     बायोलॉजी
16 मार्च     इकोनोमिक्स
18 मार्च     हिंदी इलेक्टिव और हिंदी कोर
22 मार्च     गणित, माक्रोबायोलॉजी
25 मार्च     पोलिटिकल साइंस
26 मार्च     चित्रकला
28 मार्च     फिजिकल एजुकेशन
30 मार्च     कंप्यूटर साइंस
31 मार्च     फिलॉस्फी और नृत्य
1 अप्रैल     संगीत
2 अप्रैल     एंटररप्रेन्योरशिप
5 अप्रैल     जियोग्रॉफी और मार्केटिंग
7 अप्रैल     साइकोलॉजी
9 अप्रैल     होम साइंस
11 अप्रैल    उर्दू, बंगाली, फ्रेंच, तमिल सहित सात क्षेत्रीय भाषा
13 अप्रैल     सोशियोलॉजी,

अब पासपोर्ट हासिल करना होगा आसान

अब पासपोर्ट हासिल करना होगा आसान
नई दिल्ली (ब्यूरो)। पासपोर्ट के लिए आम जनों को होने वाली दुश्वारियों में कुछ कमी होने की उम्मीद जताई जा रही है। पासपोर्ट जारी करने के लिए देशभर में तीन चरणों में 77 पासपोर्ट सेवा केन्द्र और 14 मिनी पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जाएंगे। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने यहां संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई योजना से पासपोर्ट हासिल करना आसान हो जाएगा, क्योंकि इनसे देशभर में पासपोर्ट काउंटरों की संख्या तीन गुनी बढ़कर 1250 तक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने के लिए जगह की पहचान चल रही है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल देशभर में 37 पासपोर्ट कार्यालय हैं और पांच करोड़ लोगों के पास पासपोर्ट हैं। अब हर साल 50 लाख पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नए पासपोर्ट सेवा केन्द्र में नवीनतम तकनीक की मदद से प्राइवेट सेक्टर और सरकार की भागीदारी होगी। उन्होंने बताया कि 2009 में एक करोड़ दस लाख भारतीय विदेश गए, जबकि 2000 में 44 लाख भारतीय विदेश गए थे। इन भारतीयों का विदेश दौरा आसान बनाने के लिए सरकार ने पासपोर्ट सेवा को अधिक सुलभ बनाने की योजनाओं पर काम शुरू किया है।

पारदर्शिता के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव के प्रयास जारी: प्रधानमंत्री

पारदर्शिता के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव के प्रयास जारी: प्रधानमंत्री
नई दिल्ली (ब्यूरो)। नवमें प्रवासी भारतीय प्रवासी सम्मेलन में विभिन्न घोटालों को लेकर सरकार की आलोचना की पृष्ठभूमि में प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता तथा निगरानी सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव लाने के प्रयास जारी हैं।
तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन में दुनिया भर से आए करीब 1,500 अप्रवासियों और भारत वंशियों को संबोधित कर रहे सिंह ने कहा कि हम इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं कि चरणबद्ध तरीके से बदलाव कैसे लाया जाए ताकि हमारी प्रशासनिक प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शी प्रक्रियाएं तथा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

भारत और फ्रांस ने सड़क परिवहन और राजमार्ग के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए

भारत और फ्रांस ने सड़क परिवहन और राजमार्ग के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय सड़क कांग्रेस और फ्रांस के परिस्थितिकीए ऊर्जाए टिकाऊ विकास और समुद्र मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और सड़क नीति, निर्माणए रख-रखाव और सड़क परिवहन के क्षेत्र में तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग को प्रात्साहित करने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए है। कमल नाथ की पेरिस यात्रा के दौरान बुधवार को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने के समय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमल नाथ और फ्रांस की परिस्थितिकी, टिकाऊ विकास, परिवहन और आवास मंत्री सूश्री नथाली कोसक्यिूको मोरीजट भी उपस्थिति थी।
सहमति पत्र से पूलों और सुरंगों सहित राजमार्गों र्की योजना, डिजाइन, निर्माण, संचालन, रख-रखाव और वित्त पोषण के क्षेत्र में दोनों देशों के राजमार्ग विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह सड़क प्रशासन और प्रबंध नीतियों, उपकरण, सामग्री, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और पर्यावरण से संबंधित मामलों पर विशलेषण और विचारों के आदान-प्रदान का मंच भी उपलब्ध कराएगा।

कमलनाथ ने बांटे सड़क सुरक्षा ईनाम

सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन


नई दिल्ली (ब्यूरो)। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने सभी हितधारकों से सड़कों को सुरक्षित बनाने और देश भर में टिकाऊ सड़क परिवहन प्रणाली विकसित करने के सरकार के प्रयास में हाथ बंटाने का आग्रह किया है। आज यहां 22वें सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन समारोह के अवसर पर श्री कमलनाथ ने कहा कि यह न सिर्फ वर्ष 2011 के लिए हमारी सभी सड़क सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए योजना बनाने और उनकी समीक्षा करने का समय है बल्कि नए दशक के लिए भी योजना बनाने का समय है जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई का दशक कहा है जो बिलकुल उचित है। 22वां सड़क सुरक्षा सप्ताह देश भर में 1 जनवरी से 7 जनवरी, 2011 के दौरान मनाया गया।
देश में परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचे तथा सेवाओं की जबरदस्त वृद्धि की चुनौती के बारे में कमल नाथ ने कहा कि मंत्रालय ने वाहनों के लिए नियमों, उत्सर्जन नियमों, वाहनों के इस्तेमाल से प्रदूषण के नियंत्रण के नियमों में सामंजस्य बिठाने के संबंध में प्रयास किए हैं। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बस/ट्रक बॉडी बनाने के लिए बस/ट्रक बॉडी संहिता तैयार करने, प्रमाणपत्र केंद्रों की स्थापनाए ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूलों के साथ-साथ कई अन्य उपाय भी किए गए।
इस अवसर पर श्री नाथ ने वर्ष 2007 - 08 और 2008 - 09 के लिए प्रथम और दूसरे स्थान पर रहने वाले विजेताओं को ट्राफी भी प्रदान की। 2007 - 08 के विजेता हरियाणा राज्य परिवहन, हिमाचल सड़क परिवहन निगम और बंग्लूरू महानगर परिवहन निगम रहे। 2008 - 09 के लिए पंजाब राज्य बस स्टैंड प्रबंध कंपनी लिमिटेड, हिमाचल सड़क परिवहन निगम और राज्य परिवहन पंजाब को विजेता घोषित किया गया।

मंत्री मण्डल विस्तार 17 को

ज्योतिरादित्य, अरूण यादव की हो सकती है पदोन्नति

एक दूसरे के पर कतरने में लगे मंत्री

प्रणव, चिदम्बरम और मोईली कृष्णा आमने सामने

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह 17 जनवरी को अपने पत्ते फेंट सकते हैं। केंद्रीय मंत्रीमण्डल के बहुप्रतिक्षित फेरबदल में अनेक मंत्रियों का वजन कम तो कुछ युवाओं को महत्वपूर्ण जवाबदारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसमें मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव की पदोन्नति की संभावनाएं प्रबल हैं। नीरा राड़िया के टेप कांड में नाम आने के बाद एक केंद्रीय मंत्री पर गाज गिरने की अटकलें भी लगाई जा रहीं हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि मंत्रीमण्डल के संभावित नामों और उनके विभागों के बारे में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी से चर्चा कर ली है। उधर युवा महासचिव राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप मंत्रीमण्डल में युवा कांधों पर अधिक जवाबदारी देने का प्रयास प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। पीएमओ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए कि अगर किसी कारणवश 17 को मंत्रीमण्डल में फेरबदल नहीं हो पाता है तो यह शनिवार 22 जनवरी को होगा।

मंत्रीमण्डल में फेरबदल की संभावनाओं की अटकलों के साथ ही मौजूदा मंत्रियों द्वारा एक दूसरे से ‘‘हिसाब किताब‘‘ चुकता करने की कवायद भी की जा रही है। कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के छींटे प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के दरबार तक पहुंच रहे हैं। एक दूसरे को निपटाने की मुहिम से कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी खासी खफा बताई जा रही हैं।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम के बीच अनबन अब सड़कों पर आ गई है। मंहगाई पर चिदम्बरम के हालिया बयान को प्रणव को उस बात का जवाब माना जा रहा है जिसमें आशंका व्यक्त की गई थी कि गृह मंत्रालय के कामकाज पर उठती उंगलियों के पीछे प्रणव मुखर्जी का हाथ है।

स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद से खफा कुछ मंत्रियों द्वारा उनकी कारगुजारियों के चिट्ठे सोनिया गांधी तक पहुंचा दिए हैं। उधर भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के खिलाफ मीडिया में बने माहौल, नीरा राडिया प्रकरण में 15 फीसदी कमीशन के आरोप और स्वर्णिम चतुर्भुज के उत्तर दक्षिण गलियारे के विवाद के चलते उन्हें खुद प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी को सफाई भी देनी पड़ी थी।

इसी तरह कर्नाटक की राजनैतिक फिजां में विदेश मंत्री एम.एस.कृष्णा और कानून मंत्री वीरप्पा मोईली के बीच चल रहे विवाद को वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा हवा दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि आनंद शर्मा वाणिज्य विभाग के बजाए अपने पुराने पसंदीदा विदेश मंत्रालय को पाना चाह रहे हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि आनंद शर्मा की शह पर फारेन मिनिस्ट्री के अधिकारी पीएमओ को ही गलत जानकारियां भेज रहे हैं ताकि कृष्णा की स्थिति उनके सामने कमजोर की जा सके।

इसके अलावा मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को संचार मंत्रालय का प्रभार मिलना अनेक मंत्रियों की आंखों में खटक रहा है। भारी उद्योग मंत्री विलासराव देशमुख, सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, सी.पी.जोशी, वी.नारायणसामी, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायस्वाल, अल्पसंख्यक मंत्री सलमान खुर्शीद, तेल मंत्री मुरली देवड़ा, उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे आदि के कारनामों पर भी सोनिया गांधी गौर फरमा सकती हैं।

सोनिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के दो युवा क्षत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव सोनिया और राहुल की नजरों मे उभरकर सामने आए हैं। सूत्रों ने संकेत दिए कि इन दोनों में से किसी एक को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बिठाया जा सकता है, सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर दोनों ने इस जवाबदारी के लिए मना किया तो इन दोनों की पदोन्न्ति तय है।

कृष्णा ने दी सफाई
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा को मंत्री मण्डल से हटाने की अटकलें और अफवाहें इस कदर फैल चुकी हैं कि उनको इस मामले में सफाई देना पड़ा। उन्होंने खुद को विदेश मंत्री पद से हटाए जाने से जुड़ी अटकलों को शुक्रवार को खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बारे में फैसला लेना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। विदेश मंत्रालय से भी बड़ी जिम्मेदारी सम्भालने के सवाल पर कृष्णा ने कहा कि अटकलें मीडिया के कुछ भद्रजनों की हैं। आप अटकलें लगाते रहें और हम उसके बारे में पढ़ते और देखते रहें।