मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

रेल संघर्ष समिति ने संभाला मोर्चा


0 सिवनी से चलेगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 10

रामटेक गोटेगांव नई रेल लाईन के लिए रेल संघर्ष समिति ने संभाला था मोर्चा

अगस्त तक 25 हजार हस्ताक्षर का रखा था 2005 में लक्ष्य

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। रामटेक से गोटेगांव के बीच नई रेल लाईन के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर कांग्रेसी नेता हरवंश सिंह ठाकुर के संरक्षण और पूर्व विधायक श्रीमति नेहा सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय रेल संघर्ष समिति का गठन किया जाकर इस मुहिम को तेज कर दिया गया था। इस रेल संघर्ष समिति में कांग्रेस भाजपा के अलावा सभी दलों के प्रतिनिधियों को स्थान दिया गया था।

रेल संघर्ष समिति की अध्यक्ष श्रीमति नेहा सिंह ने छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मण्डला और नरसिंहपुर जिलों के विकास की दृष्टि से रामटेक गोटेगांव नए रेल खण्ड की महत्ता प्रतिपादित करते हुए तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखा। रेल संघर्ष समिति द्वारा इस आशय के पत्र तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह, वाणिज्य और उद्योग मंत्री कमल नाथ, कृषि उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री कांतिलाल भूरिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव सहित अनेक मंत्रियों को लिखे थे।

इन पत्रों पर किसी और नेता ने नहीं वरन् सिर्फ और सिर्फ कांतिलाल भूरिया ने ही संज्ञान लिया। मध्य प्रदेश कोटे से अन्य मंत्रियों ने संघर्ष समिति की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी में मध्य प्रदेश के तत्कालीन क्षत्रपों स्व.कुंवर अर्जुन सिंह, कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरूण यादव, सुरेश पचौरी आदि का झंडा उठाने और नभ को चीरने वाली जय जयकार करने वालों की न तब कमी थी और ना ही अब है। विडम्बना ही कही जाएगी कि छिंदवाड़ा से नैनपुर के महज 139 किलोमीटर लंबे रेल खण्ड के लिए कोई भी अपने आका को सिद्ध नहीं कर सका।

बहरहाल कांतिलाल भूरिया ने 29 अप्रेल 2005 को तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री नाराण भाई राठवा को पत्र लिखकर नेहा सिंह के पत्र पर स्वीकृति देने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में नारण भाई जे.राठवा ने अपने 17 मई 2005 के पत्र में कांतिलाल भूरिया को उत्तर दिया कि वे इस मामले की जांच करवा रहे हैं। इसके उपरांत 26 सितम्बर 2006 के पत्र में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री श्री राठवा ने दुबारा कांतिलाल भूरिया को सूचित किया कि मध्य प्रदेश के गोटेगांव से महाराष्ट्र के रामटेक तक के बरास्ता धूमा, सिवनी, खवासा के नए रेल खण्ड का सर्वेक्षण वित्तीय वर्ष 2001 - 2002 में संपन्न कराया गया था।

इस सर्वे में 275.5 किलोमीटर लंबे रेल खण्ड के निर्माण की लागत वित्तीय वर्ष 2000 - 2001 के अनुसार 528.22 करोड़ रूपए आंकी गई थी जिसके प्रतिफल की दर 11.15 ऋणात्मक आने की बात कही गई थी। श्री राठवा ने साफ कहा था कि इस नए रेल खण्ड के अलाभप्रद स्वरूप, संसाधनों की कमी आदि के कारण इस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा सका।

श्री राठवा ने आगे कहा था कि वित्तीय वर्ष 2004 - 2005 में कराए गए सर्वे के अनुसार उस वक्त इसकी लागत बढ़कर 775.29 करोड़ रूपए हो गई थी। प्रतिफल की दृष्टि से इस समय यह 11 से घटकर 3 फीसदी ऋणात्मक पर आ गया था। इस दौरान भी रामटेक गोटेगांव के नए रेल खण्ड का काम आरंभ कराना व्यवहारिक नहीं पाया गया था। इन पत्रों की प्रति कांतिलाल भूरिया ने रेल संघर्ष समिति की अध्यक्ष श्रीमति नेहा सिंह को उसी वक्त सूचना देने के लिए भेजी थीं।
इस रेल संघर्ष समिति के संरक्षण हरवंश सिंह ठाकुर, अध्यक्ष पूर्व विधायक श्रीमति नेहा सिंह, संयोजक महेश रामानी, मीडिया प्रभारी एड.जकी अनवर खान, के अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष यादोराव राहंगडाले, राकापा के ददुआ पटेल, सपा के जफर पटेल, जदयू के कलीम खान, राजद के एड.याहया आरिफ कुरैशी, भाकपा के हजारीलाल हेडाउ, बीएसपी के रामसिंह राय, आरपीआई के डॉ.राजकुमार बागरे, अजेय भारत पार्टी के अरूण सिंघानिया, शिवसेना के गोविंद बोरकर, नागरिक मोर्चा से नरेंद्र अग्रवाल, गोंगपा के मेहतराम बरकड़े के अलावा चेम्बर ऑफ कामर्स, इंटक, युवा संधि, उपभोक्ता कांग्रेस, बसंतोत्सव समिति, बैनगंगा साहित्य समिति, सिवनी केरल समाज और अंजनी किशोर व्यायाम शाला जैसी संस्थाओं को भी जोड़ा गया था।
(क्रमशः)

निज़ाम नहीं वज़ीरे आज़म बनना चाह रहे हैं मोदी


निज़ाम नहीं वज़ीरे आज़म बनना चाह रहे हैं मोदी

संघ की पेशकश ठुकराई नरेंद्र मोदी ने

मोदी का इंकार दिला सकता है गड़करी को एक्सटेंशन

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के कद को देखकर भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उन्हें भाजपाध्यक्ष की कुर्सी की पेशकश की जो मोदी ने बहुत सम्मान के साथ अस्वीकार कर दी। दरअसल मोदी भाजपा के निजाम बनने के बजाए देश के वजीरे आजम बनने में ज्यादा दिलचस्पी रख रहे हैं। मोदी के इंकार से वर्तमान भाजपा निजाम नितिन गड़करी को एक और कार्यकाल मिलने से कोई नहीं रोक सकता है। मोदी के मन में 7 रेसकोर्स रोड (प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को अपना आशियाना बनाने की आकांक्षाएं बलवती हो रही हैं।

दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि नितिन गड़करी का कार्यकाल 2012 में समाप्त हो रहा है। इसके दो साल बाद आम चुनाव हैं। संघ चाहता है कि आम चुनावों में मोदी की छवि और उनके अनुभवों का इस्तेमाल वह पार्टी के लिए करे। यही कारण है कि संघ के आला नेताओं ने मोदी को भाजपा की कमान संभालने के लिए न्योता दे दिया।

सूत्रों की मानें तो मोदी ने मिशन 2014 के चलते संघ के आला नेताओं को यह कहकर शांत कर दिया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास असीमित संवैधानिक अधिकार हैं, जिनके चलते कांग्रेस चाह कर भी उनका बाल बांका नहीं कर पा रही है। अगर उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा तो कांग्रेस उन्हें चील कौओं के मानिंद नोच खाएगी। उनका आधे से ज्यादा समय कोर्ट कचहरियों में बीतेगा।

बताया जाता है कि मोदी ने अपने पिछले राजनैतिक रिकार्ड और इस दौरान उनके विरोधियों के बिना आवाज शमन के साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों के आक्रमक के बजाए रक्षात्मक रवैए का भी हवाला खुलकर दिया। मोदी ने संघ को दो टूक कह दिया है कि संघ को अगर उनके लिए (मोदी के लिए) कुछ करना है तो वे उनके लिए सीएम से पीएम तक का मार्ग प्रशस्त कर दें।

अब खरबूजे पर खतरे के बादल


अब खरबूजे पर खतरे के बादल

अमेरिका में खरबूजे से 13 मरे

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। दुनिया का चौधरी जो न करे सो कम है। पश्चिमी देशों ने भारत गणराज्य को प्रयोगशाला ही बना रखा है। कभी स्वाईन फलू तो कभी बर्ड फलू के नाम पर अरबों रूपयों की दवाएं खरीदने पर मजबूर कर देते हैं पश्चिमी देश हिन्दुस्तान को। दिल के दर्द की सस्ती दवा डिस्प्रिन को बाजार से बाहर करवा दिया था पश्चिमी देशों ने क्योंकि यह सस्ता इलाज और कारगर था।

नई बीमारियों के बारे में बताकर दुनिया को डराने में अमेरिका का कोई सानी नहीं है। हाल ही में खरबूजे में पाए जाने वाले जीवाणु लिस्टेरिया से खतरा बता रहा है अमरिका। अमरिका का दावा है कि इस जीवाणू से उपजी बीमारी से अब तक तेरह लोग काल कलवित हो चुके हैं वहीं सात दर्जन से ज्यादा इसकी चपेट में हैं।

अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन के अनुसार कोलोराडो में एक फार्म में उगे खरबूजे में यह जीवाणु पाया गया है। प्रशासन ने खरबूजे का उपयोग न करने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रोग नियंत्रण और बचाव केंद्र की वेब साईट बयां कर रही है कि गर्भवती महिलाओं को इससे ज्यादा खतरा है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि मेक्सिको में चार, कोलोराडो और टेक्सास में दो दो तथा कंसास, मैरीलेण्ड, नेब्रस्का, ओकलहोमा और मिसॉरी में एक एक व्यक्ति की मौत हुई है। गौरतलब है कि हिन्दुस्तान में लोग खरबूजे का सेवन बड़े ही चाव के साथ करते हैं। इस तरह की बातों के बाद भारत में खरबूजे की खेती पर संकट के बादल मंडराना लाजिमी है।

शिव के हिसाब न देने से खफा हैं मनमोहन


शिव के हिसाब न देने से खफा हैं मनमोहन

केंद्र पोषित योजनाओं का ब्योरा न मिलने से नाराज है केंद्र

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। एक तरफ तो शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेसनीत केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने के आरोप लगाए जाते हैं वहीं केंद्र द्वारा दी जाने वाली इमदाद के बारे में राज्य सरकार पूरी तरह खामोश हो जाती है। केंद्र को अपनी राशि के खर्च का ब्योरा न मिल पाने से हिसाब मिलाना ही मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार ने अब कड़े कदम उठाते हुए आवंटन की किश्तों को रोकने का फैसला ले लिया है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि विभाग ने मध्य प्रदेश को नेशनल सरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम (एनआरडीपीडब्लू) के तहत दी जाने वाली राशि पर रोक लगा दी है। मंत्रालय का आरोप है कि शिवराज सरकार ने इस योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा दी गई इमदाद का व्यय प्रतिवेदन केंद्र सरकार को प्रेषित नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य को एनआरडीपीडब्लू की राशि रोकने का कारण भी राज्य को बता दिया है।

कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार अपनी इमदाद की पाई पाई की रिपोर्ट चाह रही है। केंद्र सरकार को यह भी बताया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा केंद्र से प्राप्त सहायता को मूल मद में व्यय करने के बजाए उसका उपयोग अन्य मदों में किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फिजूल खर्ची और नई योजनाओं के लिए फंड जुटाने में अपने आप को असहज महसूस किया जा रहा है। यही कारण है कि सरकार को केंद्र से मिलने वाली राशि का उपयोग वह अन्य मदों में धडल्ले से कर रही है।

रेल्वे ने फैलाए वित्त के सामने हाथ


रेल्वे ने फैलाए वित्त के सामने हाथ

दो हजार करोड़ की मांगी इमदाद

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। निजामों के मनमाने रवैए से पटरी पर से उतर चुकी भारतीय रेल को अब सुव्यवस्थित होने के लिए दो सौ करोड़ रूपयों की दरकार है। आर्थिक कंगाली के मुहाने पर खड़े रेल मंत्रालय ने मदद के लिए वित्त मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। उसने फिलहाल वित्त मंत्रालय से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज मांगा है। अपनी आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए कुछ अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

रेलवे के पास महज 75 लाख की ही नगदी बची है। उसका परिचालन व्यय 73,650 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 2007-08 में यह 41,033 करोड़ रुपये था। पेंशन खर्च 7,953 करोड़ रुपये से बढ़कर 16000 करोड़ रुपये हो गया है। रेलवे बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय को एक हफ्ता पहले पत्र भेजकर 2000 करोड़ रुपये ब्रिजलोन के रूप में मांगे गए हैं। पैसा न होने से परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

रेलवे की ओर से वित्त मंत्रालय को करीब एक पखवाड़ा पहले पत्र भेजा गया है। सूत्रों के मुताबिक, रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने इस बारे में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से बात भी की है। तककरीबन 9 साल से रेलवे का किराया नहीं बढ़ा है। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी भी किराया बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। वित्तीय हालात खराब होते देख रेलवे कर्मचारियों की यूनियनें यात्री किराया बढ़ाने का दबाव बना रही हैं।

कैसे हो गया रेल्वे खस्ताहाल!

भारतीय रेल के पटरी पर से उतरने के अनेकों कारण हैं। इसका पहला कारण है छठा वेतन आयोग। इसके चलते रेलवे को अपने कर्मचारियों के वेतन और पूर्व कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। इसके अलावा माल ढुलाई में बाधा, नक्सली आंदोलन के कारण ट्रेनों और मालगाड़ियों के आवागमन पर विपरीत असर, ईंधन के बढ़ते दाम, हर साल बड़े पैमाने पर नई ट्रेनों का ऐलान ऐसे कारण हैं, जिन्होंने रेलवे की तिजोरी पर डाका डाला है। रेल मंत्रालय यह भी चाहता है कि केंद्र उसे एकमुश्त सहायता दे। यह संभव न हो तो कम से कम हर साल ब्याज के रूप में वसूले जाने वाले 6 हजार करोड़ रुपये की वसूली ही स्थगित कर दे।

स्वामी फंसे लेख लिखकर


स्वामी फंसे लेख लिखकर

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। कांग्रेस की नाक का बाल बनकर रोजना ही खुलासों से यूपीए सरकार की नाक में दम करने वाले जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी एक अखबार में लिखे अपने लेख को लेकर फंस गए हैं। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को स्वामी के खिलाफ समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया।

स्वामी के खिलाफ यह केस उनकी इस उस टिप्पणी के लिए दर्ज किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों से मतदान का अधिकार छीन लेना चाहिए। एक वरिष्ठ पुलिस ऑफिसर ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने स्वामी के खिलाफ इस साल जुलाई में एक अखबार में लेख लिखकर समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने को लेकर आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दर्ज किया है।

वरिष्ठ वकील आर. के. आनंद ने इस संबंध में स्वामी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अगस्त में लेख में स्वामी की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज करने का फैसला किया था। हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल करने वाले स्वामी ने अखबार में लिखे अपने लेख में कहा था कि हिंदुओं को सामूहिक रूप से आतंकवादी वारदातों का जवाब देना चाहिए।

गृह मंत्रालय ने कसा आईपीएस पर शिकंजा


गृह मंत्रालय ने कसा आईपीएस पर शिकंजा

संपत्ति का ब्योरा जमा करें 10 तक

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा देने से बच रहे भारतीय पुलिस सेवा के अफसरों को गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है। सूत्रों के मुताबिक, अफसरों से कहा गया है कि अगर उन्होंने 2010 का अपना ब्यौरा 10 अक्टूबर तक दाखिल नहीं किया, तो न केवल भविष्य में दूसरी जगह तैनाती के लिए उन्हें सतर्कता मंजूरी नहीं दी जाएगी, बल्कि उनके नाम भी सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

मंत्रालय ने अफसरों से यह भी कहा है कि अपने ब्यौरे में अपनी संपत्ति की स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दें। काम चलाऊ भाषा का इस्तेमाल न करें। मंत्रालय के परिपत्र के मुताबिक, जिन अफसरों ने 10 अक्टूबर तक 2010 के लए अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया, उनके नाम मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिए जाएंगे।

एमटीएनएल की आकर्षक योजना: 21 रू.में साठ मिनिट


एमटीएनएल की आकर्षक योजना: 21 रू.में साठ मिनिट

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। मोबाइल फोन ग्राहकों को लुभाने के लिए सरकारी दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल अपने प्री-पेड ग्राहकों के लिए एक शानदार योजना लेकर आई है। दिल्ली-मुंबई के प्री-पेड ग्राहकों को एमटीएनएल सिर्फ 21 रुपये में 60 मिनट के एसटीडी कॉल करने की सुविधा दे रही है। एसटीडी के साथ ही कंपनी की तरफ से 11 रुपये में 60 मिनट के लोकल कॉल करने की भी सुविधा दी गई है। कंपनी के इन दोनों लुभावने वॉउचर के साथ सिर्फ एक दिन की ही समय सीमा दी जा रही है।

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

प्रदेश टुडे 3 अक्‍टूबर 2011


लालू से मिलने का भी नहीं हुआ कोई फायदा


0 सिवनी से चलेगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 9

फरवरी 2006 में कांग्रेस का प्रतिनिधिमण्डल मिला था लालू से

हरवंश सिंह के नेतृत्व में दो मर्तबा रेल मंत्री से मिलने का भी नहीं हुआ कोई लाभ

कांग्रेस के क्षत्रपों ने भी बनाई सिवनी के विकास से पर्याप्त दूरी

पेंच के लिए कमल नाथ से लगाई थी गुहार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। सिवनी में रेल संघर्ष समिति का अभ्युदय हुआ और मामला कुछ हद तक इस समिति के पक्ष में आता दिखा। श्रेय की राजनीति के चलते कांग्रेस और भाजपा के लंबरदारों ने इस मामले को किसी ओर के हाथ चले जाने के भय से अब सक्रिय होना आरंभ कर दिया। फरवरी 2006 में कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल दिल्ली आया और अनेक मांगें जिनमें छिंदवाड़ा नैनपुर का अमान परिवर्तन भी शामिल था को लेकर तत्कालीन मंत्रियों से मुलाकात की।

लालू से चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमण्डल ने छिंदवाड़ा से नैनपुर (मण्डला फोर्ट तक नहीं) के रेल खण्ड के अमान परिवर्तन की मांग की। इसके बाद जब लालू यादव केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की कर्मभूमि छिंदवाड़ा आए और छिंदवाड़ा नागपुर के अमान परिवर्तन की आधार शिला रखी तब भी सिवनी के कांग्रेसी नेताओं ने लालू यादव से इसकी मांग दुहराई। लालू प्रसाद यादव ने अपने चिर परिचित अंदाज में फिर से इसे मुस्कुराकर टाल दिया।

केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, सिवनी के क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर की उपस्थिति में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का यह आश्वासन कितना कोरा था इसका पता जल्द ही लग गया। कुछ दिनों बाद छिंदवाड़ा दौरे पर आए मण्डल रेल प्रबंधक नागपुर से जब मीडिया ने लालू यादव के आश्वासन की चर्चा की थी,, तो ठेठ देसी अंदाज में उन्होंने कहा था कि मंत्री का आश्वासन नहीं वे रेल्वे बोर्ड के रूक्के (आदेश) पर काम करते हैं। जाहिर था रेल मंत्री ने आश्वासन दिया था इसके लिए विभाग से कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था तो डीआरएम कैसे काम आरंभ करवाते।

हालात देखकर सिवनी वासियों के मन में एक ही बात उठ रही थी कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही यह नहीं चाह रहे थे कि सिवनी में छोटी लाईन पर चलने वाली नेरो गेज रेल की न तो गति बढ़े और न ही सिवनी वासियों को ब्राडगेज की सुविधा मिले। सिवनी के सांसदों ने अमान परिवर्तन के लिए उपयुक्त मंच जिसे संसद के नाम से जाना जाता है में छिंदवाड़ा से नैनपुर के बीच के खण्ड के अमान परिवर्तन की बात न रखना अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं माना जा सकता है।

सिवनी लोकसभा विलोपन के पूर्व में सांसदों ने इस मांग को लोकसभा में क्यों नहीं उठाया इसका जवाब तो वे ही बेहतर तरीके से दे सकते हैं। उन्होंने जनता के विश्वास और प्यार के साथ क्या विश्वास घात किया है इसका जवाब भी उन्हें ही देना है। वर्तमान में बालाघाट संसदीय क्षेत्र जिसमें सिवनी और बरघाट विधानसभा का समावेश है के सांसद के.डी.देशमुख और मण्डला संसदीय क्षेत्र जिसमें लखनादौन और केवलारी विधानसभा का समावेश है के सांसद बसोरी सिंह मसराम ने लोकसभा में प्रश्न क्यों नहीं उठाया है इसका जवाब जनता अवश्य जानना चाह रही है। साथ ही साथ जनता को यह जानने का भी हक है कि क्या दोनों ही सांसद महोदय आने वाले लोकसभा सत्र में इस प्रश्न को लोकसभा में गुंजायमान करने की जहमत उठाएंगे या फिर इसके लिए भी उन्हें जगाने के लिए जनता को ही आगे आकर आंदोलन जैसे तरीकों को अपनाना होगा?

(क्रमशः जारी)

रामदेव के बाद अब सियासी मैदान की ओर अण्णा


रामदेव के बाद अब सियासी मैदान की ओर अण्णा

ईमानदार प्रत्याशी का समर्थन करेंगे अण्णा

अण्णा की ईमानदारी की क्या होगी परिभाषा

कौन मापेगा प्रत्याशी को इस पैमाने पर

अण्णा के आंदोलन में सेंध लगाने में कामयाब हो रहे हैं सियासी कारिंदे

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव की तरह ही गैर राजनैतिक आंदोलन का आगाज कर सरकार को हिलाने वाले अण्णा के मन में अब सियासी महत्वाकांक्षाएं हिलोरे मारने लगी हैं। अण्णा हजारे आने वाले चुनावों में सियासी नजर आएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अण्णा के मन में सियासत के बीज प्रस्फुटित करने में कुटिल राजनैतिक प्रबंधक पूरी तरह सफल ही नजर आ रहे हैं।

एक निजी समाचार चेनल को दिए साक्षात्कार में अण्णा हजारे ने कहा कि वे लोकसभा चुनाव में वो भी मैदान में होंगे। हालांकि अन्ना स्वयं की कोई पार्टी नहीं बनाएंगे और न ही खुद चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे दो तीन साल बाद ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे जो ईमानदार होंगे। उन्होंने कहा कि वे ऐसे उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार करने भी जाएंगे।

गौरतलब है कि अपने अनशन से सरकार को हिला देने वाले अन्ना हजारे हमेशा राजनीति से दूर रहने की बात करते रहे हैं, लेकिन अब उनका नजरिया बदल रहा है। अण्णा ने आगे कहा कि वह चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़े ईमानदार युवाओं का समर्थन करेंगे। अण्णा के इस नजरिए से अब राजनैतिक दलों के नुमाईंदो के चेहरों पर मुस्कुराहट झलकने लगी है। अब लगने लगा है कि अण्णा का हश्र भी बाबा रामदेव जैसे किया जा सकता है।

उल्लेखनीय होगा कि इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव द्वारा भी काले धन के अलावा चुनाव सुधार और साफ छवि के उम्मीदवारों के समर्थन की बात से अपना सफर आरंभ किया गया था, जो बाद में भारत स्वाभिमान के सियासी इरादों में तब्दील हो गया था।

दाल के बाद सब्‍जी भी गायब हुई गरीब की थाली से


कांग्रेस के कहर से डरा आम आदमी

दाल के बाद अब थाली से गायब हुई सब्जी

योजना आयोग कर रहा गरीबों के साथ मजाक

राज्य और केंद्र के सामंजस्य के अभाव की भेंट चढ़े तीन अरब रूपए

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार चाहे जो कर ले उसका हर कदम भारत गणराज्य के आम आदमी की गरदन को रेतने का ही काम कर रहा है। केंद्र सरकार की तीन सौ करोड़ की लोगों की थाली में सब्जी पहुंचाने की योजना में भी पलीता लग गया है। आधी राशि डकारने के बाद भी सूबों ने इस मामले में डकार भी नहीं ली है। मंहगाई से वैसे भी लोगों के मुंह का जायका खराब ही हो चुका है।

उल्लेखनीय है कि शहरी आबादी के लिए सस्ती सब्जी मुहैया करवाने की घोषणा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में की थी। इसके तहत दस लाख की आबादी या अधिक वाले हर शहर को उत्तम गुणवत्ता वाली सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सब्जियों के समूह को विकसित करने पर विचार विमर्श किया गया। इसके उपरांत आए नतीजों से उत्साहित केंद्र सरकार ने कृषि विभाग के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस योजना का आगाज किया था।

पिछले माह तक केंद्र सरकार द्वारा इस मद में राज्यों को 137 करोड़ 94 लाख रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच सामंजस्य के अभाव के चलते यह योजना परवान ही नहीं चढ़ पा रही है। दस लाख की आबादी से अधिक वाले शहरों में आज भी मंहगी और गुणवत्ता विहीन सब्जी ही मिल रही है। कहा जा रहा है कि अंबानीज के रिलायंस फ्रेश के दबाव में सरकारों द्वारा नीतियों पर अमल नहीं किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्रियों से मोहभंग हुआ युवाओं का


केंद्रीय मंत्रियों से मोहभंग हुआ युवाओं का

युवा मतदाता दूर हैं मतदान से

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आने वाला भारत कहलाने वाला देश का युवा अब मतदान से अपने आप को दूर ही रखे हुए है। चुनाव आयोग के आंकड़े ही यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि देश के हृदय प्रदेश में युवाओं का किस कदर चुनाव से मोह भंग हो रहा है। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में युवाओं का रूझान मतदान की ओर न होना इनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। युवाओं द्वारा अब तक मतदाता सूची में अपने नाम भी दर्ज न कराया जाना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।

भारत सरकार के दो विभागों के आंकड़ों का ही अगर अध्ययन किया जाए तो विसंगति सामने आती है। इसमें जनगणना के आंकड़ें कुछ कहते हैं तो भारत सरकार के निर्वाचन आयोग का कहना कुछ और ही है। दोनों ही आंकड़ों का अंतर मन में भ्रम भी पैदा करता है कि कौन से आंकड़े सच्चे हैं। साथ ही साथ दोनों ही आंकड़े अगर सच्चे हैं तो फिर निश्चित तौर पर युवाओं का मन चुनावी प्रणाली से भर चुका ही माना जा सकता है।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 18 से 19 साल की आयु वाले युवाओं की तादाद 94 हजार 566 है इसके एवज में इस आयु वर्ग के वोटर्स की संख्या महज 15 हजार 77 ही है। इसी तरह ग्वालियर में 88 हजार 481 के मुकाबले 7828, भोपाल में 94 हजार 271 की जगह 10 हजार 763, जबलपुर में एक लाख दस हजार 5 के स्थान पर ग्यारह हजार 334 का आंकड़ा सामने आया है जो साबित करता है कि युवाओं का केंद्रीय मंत्रियों सहित पूरी व्यवस्था से ही मोह भंग हो गया है। मध्य प्रदेश में सर्वाधिक दशमलव 68 प्रतिशत का अंतर छिंदवाड़ा में ही देखने को मिला है।

आड़वाणी की रथयात्रा को तलाश है फायनेंसर की


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

आड़वाणी की रथयात्रा को तलाश है फायनेंसर की
भाजपा के पीएम इन वेटिंग की दौड़ से अपने आप को बाहर करने वाले एल.के.आड़वाणी की रथयात्रा होगी या नहीं अभी यह सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद भी कुहासा छट नहीं सका है। आड़वाणी जुंडाली परेशान है। उनकी परेशानी का कारण है कि आखिर वो कौन होगा जो इस रथ यात्रा के लिए फंड जुटाएगा। इस रथयात्रा के खर्च का अनुमान लगाकर ही लोगों के हाथों के तोते उड़ गए हैं। इसमें करोड़ों रूपए खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पिछली मर्तबा तो प्रमोद महाजन ने इस काम को बखूबी अंजाम दे दिया था। इस बार कौन इसका झंडा थामेगा। वैसे भी आड़वाणी जब से पीएम इन वेटिंग की दौड़ से बाहर हुए हैं तबसे उनके आसपास समर्थकों की भीड़ जबर्दस्त तरीके से छट चुकी है।

आखिर कौन सी बीमारी है राजमाता को!
कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी की बीमारी क्या है, इस बारे में गांधी परिवार के निकट होने का दावा करने वालों के साथ ही साथ कांग्रेस के आलंबरदार मौन साधे हुए हैं। कांग्रेस और गांधी परिवार के चाहने वालों की चुप्पी से अब उनकी बीमारी को लेकर अफवाहों का बाजार गर्मा गया है। जितने मुंह उतनी बात की तर्ज पर अब लोगों के मुंह खुलने आरंभ हो गए हैं। निश्चित तौर पर सोनिया की बीमारी या उनकी शल्य क्रिया उनका निजी मामला है, किन्तु वे नेशनल फिगर हैं इसलिए उनके हर निजी या सार्वजनिक मामलों का सरोकार जनता से है। वैसे भी सोनिया गांधी के हर कदम की जानकारी उनके मीडिया प्रबंधकों द्वारा पब्लिसिटी के लिए तो मुहैया करवा दी जाती है किन्तु इस मामले में इन सभी की चुप्पी आश्चर्य को ही जन्म दे रही है।

संदीप शिव की जुगलबंदी!
मध्य प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान की मित्र मण्डली में इन दिनों एक नया चेहरा दिख रहा है। इस नए चेहरे को लेकर सब ओर चर्चाओं का बाजार गर्मा गया है। शिवराज के नए मित्र हैं संदीप नावलेकर। ये साहेबजादे हैं मध्य प्रदेश के लोकायुक्त के। संदीप को साथ लेकर शिवराज पिछले दिनों चीन यात्रा पर गए थे। संदीप शिव की दोस्ती को लोग अब शिवराज के डंपर कांड से जोड़कर देख रहे हैं। नावलेकर ने लोकायुक्त बनते ही पहली फुर्सत में शिवराज को डंपर मामले में क्लीन चिट प्रदाय कर दी थी। इसमें शिवराज द्वारा जमुना देवी को भी साधा गया बताया जा रहा है। कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी मीडिया में इस बात का प्रचार प्रसार कर भी रहे हैं कि जमुना देवी का कर्ज उतारने उनकी पुण्य तिथि पर शिवराज खुद चलकर पीसीसी गए और वहां श्रृद्धासुमन अर्पित किए।

अनजान चेहरा बने हुए हैं भूरिया
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया को मध्य प्रदेश के कांग्रेसी नेता ही ठीक से नहीं पहचानते हैं। अनेक जिलों में लोग आज भी सुभाष यादव या दिग्विजय सिंह को ही कांग्रेस का अध्यक्ष मान रहे हैं। इसका कारण यह है कि यादव के बाद निजाम बने पचौरी ने मध्य प्रदेश का दौरा नहीं किया। अब कांतिलाल भूरिया इसी तर्ज पर मालवा के तीन जिलों में ही अपने आप को साधे हुए हैं। मध्य प्रदेश में उनकी बिरादरी के 22 विधायक हैं पर उनका भी समर्थन भूरिया को नहीं है। हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के एक कार्यक्रम की चर्चाएं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में हो रही हैं। कहा जा रहा है कि इस प्रोग्राम में कांतिलाल भूरिया को प्रोटोकाल के हिसाब से दिग्विजय सिंह के बाद बोलना था। जैसे ही राजा दिग्विजय सिंह का भाषण समाप्त हुआ वहां उपस्थित हजारों की भीड़ में से महज गिनती में ही लोग बचे जो भूरिया को सनुना चाह रहे थे।

सम्मान पाना है तो कांग्रेस को कोसो
कांग्रेस के राजनैतिक प्रबंधकों को पता नहीं क्या हो गया है। वे कांग्रेस को गरियाने वालों को ही गोद में बिठाए घूम रहे हैं। पिछले दिनों वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के पुत्र अभिजीत जो विधायक हैं को दिल्ली में मीडिया सर्किल में लांच किया गया। इनकी लांचिग भी आड़वाणी के एक बेहद करीबी ने की। इतना ही नहीं 2004 में संप्रग के आते ही दूरदर्शन से एक पत्रकार को यह कहकर निकाल दिया गया था कि वह भाजपा मानसिकता का है। आज वही पत्रकार कांग्रेस की नाक का बाल बना हुआ है। अंबिका सोनी ने तो उस पत्रकार को अधिमान्यता समिति में स्थान भी दे दिया है। और तो और एक दिन जब कांग्रेस बीट कव्हर करने वाले पत्रकार जनार्दन द्विवेदी से मिलने घंटों कमरे के बाहर बैठे रहे तब अंदर द्विवेदी और उन्हीं भाजपा मानसिकता वाले पत्रकार के बीच हंसी ठठ्ठों के दौर भी चलते रहे।

तिहाड़ बन सकता है प्रफुल्ल का आशियाना
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट पर अगर अमल हुआ और सरकार ने गठबंधन धर्मसे उपर राष्ट्र धर्म को समझा तो पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का आशियाना आदिमत्थू राजा, सुरेश कलमाड़ी जैसे दिग्गजों के साथ तिहाड़ में बन सकता है। पटेल पर आरोप है कि उन्होने एविएशन मिनिस्टर रहते हुए अपने चाहने वालों को तबियत से फायदा पहुंचाया है। जांच में साफ हो जाएगा कि एवीएशन विभाग द्वारा किस तरह एयर इंडिया और इंडियन एयरलाईंस को दरकिनार कर निजी एयर लाईंस को बढ़ावा देने की गरज से मार्गों को खोला था। पटेल के कार्यकाल में 111 नए बोईंग विमान खरीदने का आदेश भी विवादों में ही है। चर्चा है कि जिस कंपनी से पटेल ने सौदा किया वह पटेल की ही कंपनी के नाम से जानी जाती है। इसके अलावा पटेल के अन्य सांसद या मंत्री मित्र भी वायूयानों में खासी दिलचस्पी रखते हैं।

गड़करी और मनमोहन में समानता
भाजपा के निजाम नितिन गड़करी और देश के वजीरे आजम में क्या समानता है? दोनों ही ने आज तक एक भी चुनाव नहीं जीता है। गड़करी ने 1985 में एकमात्र विधानसभा चुनाव नागपुर पश्चिम से लड़ा था और औंधे मुंह गिरे थे। भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी अगला लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर से लड़ने जा रहे हैं। उनके लिए नागपुर लोकसभा क्षेत्र को तैयार करवाया जा रहा है। वैसे उन्हें प्रफुल्ल पटेल के संसदीय क्षेत्र को सुझाव भी दिया गया है। राकांपा भले ही कांग्रेस के टूटकर अस्तित्व में आई हो और वह कांग्रेस की सहभागी हो पर भाजपाध्यक्ष के लिए प्रफुल्ल पटेल यह त्याग कर सकते हैं। कहा जाता है कि सियासी लड़ाई झगड़े जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए होते हैं। उपर के स्तर पर तो सभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे होते हैं। यह गड़करी के जीवन का पहला लोकसभा चुनाव होगा।

मीडिया को साधने की जुगत में राहुल
घपलों, घोटालों और भ्रष्टाचार से आजिज आ चुके हैं कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी। राहुल को अब इमेज बिल्डिंग की धुन सवार हो चुकी है। तीन प्रधानमंत्री के वंशज राहुल गांधी ने मसल और मनी पावर बेहद करीब से देखा होगा इस बात से इंकार नहीं कहा जा सकता है। उनके पिता राजीव गांधी, दादी इंदिरा गांधी और इंदिरा गांधी के पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू सालों साल देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। कांग्रेस के नेहरू गांधी से इतर प्रधानमंत्री रहे नरसिंहराव और मनमोहन ंिसंह ने कांग्रेस के ताबूत में खीलें ठोंकने का काम ही किया है। राहुल गांधी को डर है कि कहीं उन्होंने सत्ता संभाली तो उनकी छवि भी खराब न हो जाए। शायद इसीलिए राहुल ने पीआर कंपनियों के माध्यम से अपनी छवि का निर्माण आरंभ कर दिया है। कंपनियों ने उन्हें मशविरा दिया है कि इस दलदल में वे वर्तमान में न तो सत्ता का पद लें और ना ही संगठन का।

लालटेन युग में है कांग्रेस
इक्कीसवीं सदी के भारत के स्वप्नदृष्टा तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अर्धांग्नी एवं विश्व की ताकतवर महिलाओं में शुमार श्रीमति सोनिया गांधी के नेतृत्व में सवा सौ साल पुरानी और देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस का नेशनल हेडक्वार्टर आज भी बाबा आदम के जमाने में सांसे ले रहा है। तकनीकि मामलों में यह कार्यालय अन्य राजनैतिक पार्टियों के मुकाबले बेहद पिछड़ा ही है। कांग्रेस के पदाधिकारी निजी तौर पर तो अपने पास अत्याधुनिक तकनीकि उपकरण रखते हैं पर जब बात पार्टी मुख्यालय की आती है तब वे मौन साध लेते हैं। अनेक जिलों में यह आलम है कि वहां आज भी हस्त लिखित या मेन्युअल टाईपराईटर पर विज्ञप्तियां बनाई जा रही हैं। कांग्रेस के सांसद विधायकों द्वारा अपने लग्गू भग्गुओं के लिए जनसंपर्क निधि से रामायण मंडल या क्रिकेट क्लब के लिए राशि आवंटित कर दी जाती है, पर पार्टी के नाम पर राशि खर्च करने में वे पीछे हट जाते हैं। सूचना के अधिकार में अगर यह जानकारी निकाली जाए तो देश भर में रामायण मंडल या क्रिकेट क्लब की तादाद जानकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेगा।

फिर चला अण्णा को रायसीना हिल्स पहुंचाने का अभियान
मैं भी अण्णा, तू भी अण्णा। इस तरह के नारों ने देश को जगा दिया था। अण्णा के रामलीला मैदान के सफलतम अनशन के बाद लोग उनकी तुलना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से करने लगे थे। इंटरनेट पर तो अण्णा हजारे के चित्र वाले नोट भी बनकर आ गए थे। 16 अगस्त की धूम देशवासियों के सर चढ़कर बोल रही थी। लोगों का जोश और जुनून देखते ही बन रहा था। अण्णा प्रकरण में सत्ताधारी कांग्रेस के प्रबंधकों के सारे दांव उल्टे पड़ने के बाद अब सियासी दलों के नेता अण्णा की चौखट चूमते नजर आ रहे हैं। अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में हर सियासी दल अण्णा को अपना केंडीडेट बनाने की जुगत लगा रहा है।

शिवराज धूमिल, गौर चमके, सूचना केंद्र का कारनामा
मध्य प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए पाबंद दिल्ली स्थित सूचना केंद्र ने अब सत्ता, मुख्यमंत्री और संगठन के बीच दूरियां बढ़ाने की कवायद आरंभ कर दी गई है। इस बात के संकेत तब मिले जब एमपी के नगरीय कल्याण मंत्री बाबू लाल गौर दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कमल नाथ से मिले ओर दस सौ अस्सी करोड़ रूपए झटक लिए। एक तरफ तो शिवराज सिंह चौहान और भाजपा संगठन द्वारा चीख चीख कर केंद्र से आवंटन न देने और सौतेला व्यवहार करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सूचना केंद्र द्वारा जारी विज्ञप्ति में एक ही दिन में एक हाजर करोड़ का अवंटन मिलना साबित करता है कि शिवराज सिंह चौहान और प्रभात झा के द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप मिथ्या और राजनीति से प्रेरित हैं। इस मामले में सूचना केंद्र बधाई के पात्र हैं।

नोट फॉर वोट मामले में नपेंगे महाकौशल के सांसद
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज द्वारा मण्डला में आयोजित जनाक्रोश महारैली में सुषमा स्वराज ने अनेक गूढ़ अर्थों वाली बात कह डाली। सुषमा ने 22 जुलाई 2008 को संसद में नोटों की गड्डियां लहराने का जिकर करते हुए कहा कि अल्पमत में आ चुकी केंद्र सरकार बचाने के लिए 19 सांसदों की दरकार थी और इस हेतु सांसदों को करोड़ों रूपयों की रिश्वत दी गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बहुमत जुटाने के लिए गरीब परिस्थिति के सांसदों और विशेषकर उन सांसदों को लक्ष्य बनाया गया जिनके संसदीय क्षेत्र या तो परिसीमन में विलुप्त हो रहे थे या फिर आरक्षित हो रहे थे। उल्लेखनीय है कि महाकौशल क्षेत्र का तीस साल पुराना सिवनी संसदीय क्षेत्र परिसीमन में विलुप्त हो गया है साथ ही साथ नोट फॉर वोट मामले में जेल में बंद फग्गन सिंह कुलस्ते भी महाकौशल के मण्डला संसदीय क्षेत्र के सांसद थे।

नए पुष्पक की सवारी गाठेंगे शिवराज
पांव पांव चलने वाले भईया के नाम से विख्यात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब हवा में उड़ रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान का उड़न खटोला राष्ट्री़़य राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सजा धजा तैयार खड़ा है। पुष्पक विमान का उल्लेख भगवान राम के काल में मिलता है, पर शिव राज में भी इसका उल्लेख मिल रहा है। मध्य प्रदेश जैसे गरीब राज्य में फ्रांस की यूरोकाप्टर कंपनी से ईसी 155बी चौपर सिर्फ 66 करोड़ रूपए में खरीदा गया है। शिवराज के विमान बेड़े में वर्तमान में एक सिंगल तो एक डबल एंजिन हेलीकाप्टर मौजूद है। मैया मो तो चंद खिलोना लैंहूंकी तर्ज पर दो दो चौपर के होते हुए भी सुरक्षा कारणों का अचूक अस्त्र चलाकर शिवराज ने जनता के गाढ़े पसीने के 66 करोड़ रूपयों में आग लगा दी।

कैबनेट सचिवालय के पास नहीं मंत्रियों की विदेश यात्राओं की जानकारी
केंद्र सरकार के कैबनेट सचिवाल के पास केंद्रीय मंत्रियों की विदेश यात्रा में हुए खर्च का कोई ब्योरा नहीं है। सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी के जवाब में आनाकानी ही हाथ लगी आवेदक एस.सी.अग्रवाल को। अग्रवाल ने मजबूरी में एक एक मंत्रालय के दर पर धक्के खाए तब जाकर उन्हें कुछ जानकारी मिल पाई। अग्रवाल को मिली जानकारी में एक बात निकलकर सामने आई है कि कैबनेट मंत्रियों ने एक साल में 37.16 करोड़ तो राज्य मंत्रियों ने 4.76 करोड़ रूपए फूंक दिए। इसमें अनेक मंत्री शामिल नहीं हैं। आरोपित है कि मंत्री अपने निजी और व्यापारिक हित साधने विदेशों की यात्राएं करते हैं वह भी सरकारी खर्च पर। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को शायद भय है कि इसकी जानकारी सार्वजनिक होने पर विपक्ष को एक और मुद्दा मिल जाएगा।

पुच्छल तारा
सोनिया की बीमारी रहस्य बनी हुई है। राहुल गांधी आज भी घपले घोटालों पर खामोश हैं। अण्णा मामला हो या फिर रामदेव बाबा का, हर मामले में राहुल मौन हैं। राहुल को लेकर एक मेल सामने आया है। उत्तर प्रदेश के इलाहबाद से सुहासिनी नायर ने एक ईमेल भेजा है। सुहासिनी लिखती हैं एक एसएमएस इन दिनों घूम रहा है जिसकी इबारत इस प्रकार है:-

‘‘और करो आंदोलन,
देखा,

बोला था न,
मम्मी को आने दो, सब को दिखा दूंगा।

पहले ही दिन तीन रूपए बढ़ा दिया न पेट्रोल,
अब चीखो चिल्लाओ, आंदोलन करो. . .

-- आपका यूथ आईकान

राहुल गांधी!

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

लालू ने फेंकी थी गेंद भाजपा के पाले में



0 सिवनी से चलेगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 8

लालू ने फेंकी थी गेंद भाजपा के पाले में

बड़ी चतुराई से सांप भी मारा और लाठी भी न टूट पाई

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। 2008 में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव ने बतौर रेलमंत्री कल रेल बजट पेश किया। निसंदेह लालू ने लगातार चौथी बार बजट पेश कर वह भी यात्री किराए अथवा मालभाड़े में बढोत्तरी के बिना ही बजट पेश कर अपनी पुरानी शैली को बरकरार रखी। उन्होंने उसी दौरान अस्तित्व में आई 11वीं पंचवर्षीय योजना में मीटर गेज से ब्राड गेज के अमान परिवर्तन की बात कही और इसमें छिंदवाड़ा से नैनपुर बरास्ता सिवनी का शुमार भी किया गया था।

यह लालू की बजीगरी थी कि उन्होंने इस योजना का नाम भी ले लिया और सिवनी की झोली में कुछ आया भी नहीं। लालू के बजट भाषण के उपरांत सिवनी जिले में हर्ष की लहर दौड़ गई। सिवनी के वाशिंदे यह समझने लगे कि वे बड़ी रेल लाईन पर सवारी गांढने ही जा रहे हैं। वस्तुतः इस तरह की कोई भी बात समझ में नहीं आती है। पर यह संतोष की बात है कि सालों बाद कम से कम रेल बजट में इस मार्ग का नाम तो सुनने को मिला। यह योजना अमली जामा कब पहनेगी यह बात तो समय के गर्भ में ही है।

इसके लिए लालू यादव के बजट के मूल पाठ को ध्यान से पढ़ना अत्यंत आवश्यक है कि यह राजनैतिक बाजीगरी है, अथवा वाकई सिवनी को कुछ हासिल हुआ है। अपने 38 पेज के बजट भाषण में उन्होंने 39 वीं कंडिका में इन तत्यों को साफ किया है। प्रस्तुत है उसका अंश। (पाठक चाहें तो डब्लूडब्लूडब्लू डाट इंडियनरेलवेज डाक काम पर इसे पढ़ सकते हैं)

महोदय, अनेक मार्गो का आधा अधूरा अमान परिवर्तन होने के कारण बाकी बची मीटर एवं छोटी लाईने द्वीप की तरह बन गई हैं। प्रमुख नेटवर्क से अलग थलग पड़ जाने के कारण इन लाईनों से रेल्वे को एक प्रतिशत से भी कम फ्रेट प्राप्त होता है, जबकि ये कुल नेटवर्क के 20 प्रतिशत से भी अलग हैं। फलस्वरूप रेल्वे को हजारों करोड़ रूपयों का सालाना घाटा हो रहा है। यहां तक कि इन लाईनों पर माल परिवहन भी घाटे का सौदा बन गया है। अतः 11वीं परियोजना के अंत तक अधिकांश मीटर लाईन को बड़ी लाईन मंे बदलने का कार्य पूरा करने का हम हर संभव प्रयास करेंगे।

एसी योजनाओं को स्वीकृति और क्रियान्वयन में प्राथमिकता दी जाएगी जो व्यस्त नेटवर्क के वेकल्पिक मार्ग उपलब्ध करवाएंगी, जिसमें उदयपुर अहमदाबाद, लखनउ शाहजहांपुर, ढासा जेसलमेर, जयपुर झुंझून, रतलाम खंडवा अकोला, नैनपुर छिंदवाड़ा, अहमदाबाद बोताड़ प्रमुख हैं। एसी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित किया जाएगा जिसमें कुल लागत का पचास फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करने के लिए तैयार हों।

इस तरह लालू यादव ने सांप भी मार दिया और लाठी भी नहीं टूटने दी। मध्य प्रदेश के हिसाब से अगर देखा जाए तो अब उन्होंने सारा दारोमदार भाजपा के उपर ही छोड़ दिया है, कि अगर नैनपुर से छिंदवाड़ा रेल लाईन का अमान परिवर्तन करवाना है, तो इसमें व्यय होने वाली राशि का पचास फीसदी भार उठाने के लिए मध्य प्रदेश की शिवराज चौहान के नेतृत्व वाली सरकार तैयार हो। लालू ने किसके कहने पर इस तरह से बाल उठाकर शिवराज सिंह चौहान के कोर्ट में फेंक दी यह तो शोध का ही विषय है पर इसके बाद यह योजना केंद्र और राज्य के बीच आज तक झूल भैया झूल, तेरी टोपी में फूलकी तर्ज पर ही चल रही है।
(क्रमशः जारी)