सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

क्या अण्णा कांग्रेस के दुश्मन हैं!



ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

क्या अण्णा कांग्रेस के दुश्मन हैं!
अण्णा हजारे की एक हुंकार ने देश में आग सी लगा दी। अण्णा के अनशन के चलते कांग्रेस घुटनों पर आ गई थी। चूंकि अण्णा की राजनैतिक महात्वाकांक्षाएं नहीं के बराबर थीं अतः लोग अण्णा को तहे दिल से समर्थन दे रहे थे। अण्णा के हालिया बयानों से लगने लगा है कि वे संघ या भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। अण्णा अब भ्रष्टाचार को छोड़कर कांग्रेस के पीछे पड़े हैं, जबकि केंद्र में कांग्रेसनीत संप्रग सरकार है। संप्रग के घटक दलों के बारे में टीम अण्णा मौन ही साधे हुए हैं। टीम अण्णा अब चुनावों में भी कांग्रेस को वोट न देने की अपील करने लगी है। अण्णा का कहना है कि वे ईमानदार प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। अण्णा की नजरों में ईमानदारी की क्या परिभाषा है इस बारे में डरी हुई कांग्रेस पूछने का दुस्साहस नहीं कर पा रही है। अण्णा से कांग्रेस इतनी खौफजदा है कि कोई भी उनसे या टीम अण्णा से प्रश्न प्रतिप्रश्न करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।

किसका आशियाना बनेगा रायसीना हिल्स
जुलाई 2012 में देश की पहिला महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उसके बाद रायसीना हिल्स स्थित महामहिम के आवास पर किसका कब्जा होगा इसके लिए कवायद अभी से तेज हो गई है। वाम दलों की ओर से उपराष्ट्रपति हादिम अंसारी, कांग्रेस इसके लिए मीरा कुमार, ए.के.अंटोनी और प्रणव मुखर्जी तो भाजपा फिर से ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का नाम आगे बढ़ाने का मन बनाया जा रहा है। अण्णा हजारे का कांटा निकालने के लिए उन्हें इस पद के लिए माकूल समझा जा रहा है। सभी अपने अपने लिए लाबिंग करने लगे हैं। वैसे प्रतिभा ताई को इस बात का अफसोस अवश्य ही रहेगा कि उनके कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज एवं लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार के रहते भी महिला आरक्षण बिल संसद की सीढ़ीयां नहीं चढ़ सका।

परेशान हैं अमरीकि जासूस
भारत गणराज्य के राजनैतिक हालातों पर अमेरिका अपनी पैनी निगाह रखता है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। पिछले दिनों अमेरिका के भारत में पदस्थ अधिकारी हलाकान हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें राजनैतिक समीकरणों और सरकार के अंदर की इंटरनल केमिस्ट्री का पता नहीं चल पा रहा है। उधर अमेरिका में बैठे उनके आका दिन रात ईमेल और फोन कर उन्हें परेशान किए हुए हैं। अमेरिका से भारत के राजनेताओं ने दूरी क्यों बनाई यह तो वे ही जाने पर जब भी कोई अमेरिकी अधिकारी बड़े नेता से मिलने का समय मांगता है तो व्यस्तताओं का रटा रटाया बहाना उन्हें सुनने को मिल जाता है। सरकार के कुछ मंत्रियों जिनके अमेरिका दौरे बहुतायत में होते हैं अलबत्ता इन अफसरों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। अधिकारी परेशान हैं कि आखिर भारत के नेताओं को अमेरिका के नाम पर सांप क्यों सूंघ रहा है।

जब दादा हुए असहज!
एक समय में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अघोषित मोर्चा खोलने वाले प्रणव मुखर्जी इन दिनों काफी परेशान हैं। लगता है उनका शनि भरी चल रहा है। जैसे ही वे उप प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब पहुंचे उन्हें गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम का भारी विरोध झेलना पड़ा। हाल ही में जब प्रधानमंत्री डाॅ.एम.एम.सिंह ने उन्हें वाशिंगटन से न्यूयार्क बुलाया तब रात काटने के लिए दादा को भारी मशक्कत करनी पड़ी। पीएम पैलेस होटल में रूके थे। वहां एक भी सूईट खाली नहीं था। बाद में प्रणव दा पार्क सेंट्रल होटल पहुंचे तो वहां भी उन्हें सुईट नसीब नहीं हुआ। इस होटल में पीएम के साथ गए पत्रकार रूके थे। इन पत्रकारों की सेवा टहल में लगे विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव विष्णु प्रकाश ने अपना कमरा खाली कर प्रणव दा की रात गुजारने में मदद की। इस तरह बेईज्जती होने पर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचना स्वाभाविक ही है।

आम आदमी का गला रेतती केंद्र सरकार
केंद्र की कांग्रेसनीत संप्रग सरकार भले ही आंकड़ों की बाजीगरी में गरीबी कम होना दर्शाए किन्तु वास्तविकता इससे ठीक उलट ही है। देश में हर चीज के भाव तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पहले थाली से दाल गायब हुई अब हरी सब्जियां भी लोगों की पहुंच से बहुत दूर जा चुकी है। केंद्र सरकार की तीन सौ करोड़ की लोगों की थाली में सब्जी पहुंचाने की योजना में भी पलीता लग गया है। मंहगाई से वैसे भी लोगों के मुंह का जायका खराब ही हो चुका है। उल्लेखनीय है कि शहरी आबादी के लिए सस्ती सब्जी मुहैया करवाने की घोषणा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में की थी। इसके तहत दस लाख की आबादी या अधिक वाले हर शहर को उत्तम गुणवत्ता वाली सब्जियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सब्जियों के समूह को विकसित करने पर विचार विमर्श किया गया।

केंद्रीय मंत्रियों से दूर हुए युवा
भारत के युवाओं का नेताओं से मोहभंग होता जा रहा है। इन परिस्थितियों में राहुल गांधी का युवा भारत बनाने का सपना चूर चूर होता ही दिख रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़े ही यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि देश के हृदय प्रदेश में युवाओं का किस कदर चुनाव से मोह भंग हो रहा है। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में युवाओं का रूझान मतदान की ओर न होना इनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 18 से 19 साल की आयु वाले युवाओं की तादाद 94 हजार 566 है इसके एवज में इस आयु वर्ग के वोटर्स की संख्या महज 15 हजार 77 ही है। इसी तरह ग्वालियर में 88 हजार 481 के मुकाबले 7828, भोपाल में 94 हजार 271 की जगह 10 हजार 763, जबलपुर में एक लाख दस हजार 5 के स्थान पर ग्यारह हजार 334 का आंकड़ा सामने आया है।

लाल किले की प्राचीर से संबोधन चाह रहे हैं मोदी
भाजपा के युवा तुर्क नरेंद्र मोदी के मन में 7, रेसकोर्स रोड़ (प्रधानमंत्री आवास) को आशियाना बनाने का सपना पल रहा है। कहते हैं मोदी को भाजपाध्यक्ष बनाना चाह रहा था संघ। मोदी ने इससे साफ इंकार कर दिया। भाजपा और संघ चाह रहा है कि उनकी छवि का लाभ उठाकर अगले आम चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को सुधारा जाए। इसके लिए मोदी तैयार नहीं दिख रहे हैं। गड़करी का कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है। लोकसभा चुनाव 2014 में होना है। मोदी ने संघ को यह कहकर चुप करा दिया कि उनके मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस उनका बाल भी बांका नहीं कर सकती और अगर वे भाजपाध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें सीएम की कुर्सी तजना होगा। सूत्रों की मानें तो मोदी ने संघ को दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अगर कुछ करना है तो उनके प्रधानमंत्री बनने के मार्ग प्रशस्त करें, ताकि वे स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित कर सकें।

शिव के खिलाफ मन ने खोला तीसरा नेत्र
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शिवराज सिंह चैहान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि विभाग ने मध्य प्रदेश को नेशनल सरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम (एनआरडीपीडब्लू) के तहत दी जाने वाली राशि पर रोक लगा दी है। मंत्रालय का आरोप है कि शिवराज सरकार ने इस योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा दी गई इमदाद का व्यय प्रतिवेदन केंद्र सरकार को प्रेषित नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य को एनआरडीपीडब्लू की राशि रोकने का कारण भी राज्य को बता दिया है। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार अपनी इमदाद की पाई पाई की रिपोर्ट चाह रही है। केंद्र सरकार को यह भी बताया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा केंद्र से प्राप्त सहायता को मूल मद में व्यय करने के बजाए उसका उपयोग अन्य मदों में किया जा रहा है।

कांगाल हो चुकी भारतीय रेल
स्वयंभू योग गुरू लालू प्रसाद यादव के समय भारतीय रेल मुनाफे का मंत्रालय हुआ करता था। इसके बाद ममता बनर्जी की अनदेखी के चलतेे भारतीय रेल पटरी से उतर गई। आज आलम यह है कि रेल्वे मंत्रालय ने केंद्र सरकार से दो हजार करोड़ की मदद चाही है। अरबों रूपए अपनी अंटी में रखने वाली भारतीय रेल के पास अब नकद के तौर पर महज पचहत्तर लाख रूपए ही बचे हैं। मामला वित्त मंत्रालय के पाले में चला गया है। कहा जा रहा है कि पिछले नौ सालों से यात्री किराया नहीं बढ़ाए जाने से रेल्वे को नुकसान हो रहा है। इन नौ सालों में लालू प्रसाद यादव भी रेल मंत्री रहे हैं और उन्होंने इन्हीं संसाधनों में रेल्वे को लाभ की संस्था बना दिया था। वैसे देखा जाए तो ममता बनर्जी की मनामनी के लिए प्रधानमंत्री डाॅ.मनमोहन सिंह सीधे सीधे जवाबदार हैं।

स्वामी पर टूटेगा कांग्रेस का नज़ला
नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) को पानी पी पी कर कोसने वाले जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्ाम्यणम स्वामी पर अब कांग्रेस की नजरें तिरछी होती दिख रहीं हैं। दिल्ली में स्वामी पर एक लेख के माध्यम से भावनाएं भड़काने का प्रकरण दर्ज किया गया है। स्वामी पर आरोप है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय से मतदान का अधिकार छीन लेने की बात लिखी थी। उन पर लेख लिखकर समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने को लेकर आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दर्ज किया है। वरिष्ठ वकील आर. के. आनंद ने इस संबंध में स्वामी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अगस्त में लेख में स्वामी की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज करने का फैसला किया था। हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल करने वाले स्वामी ने अखबार में लिखे अपने लेख में कहा था कि हिंदुओं को सामूहिक रूप से आतंकवादी वारदातों का जवाब देना चाहिए।

दवा लाबी ने पटका आजाद को
एंटीबायोटिक्स का रिकार्ड रखने के लिए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के शेड्यूल एक्स को अंतत टाल ही दिया गया। गौरतलब है कि वर्तमान में फुटकर दवा विक्रेताओं के पास दवा की बिक्री का रिकार्ड नहीं रहता है। वे महीने में एक बार छःमाही या सालाना बिल कटवाते रहते हैं। इस तरह इनका सेल्स टेक्स इंकम टेक्स आदि का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इसके साथ ही साथ प्रतिबंधित दवाओं को भी इनके द्वारा खुलेआम बेचा जाता है। कहा जा रहा है कि अगर यह लागू हो जाता तो दवा विक्रेताओं को एंटीबायोटिक दवा बेचने के साथ ही साथ मरीज का रिकार्ड जैसे उसकी जांच पर्ची आदि की फोटोकापी संभालकर रखना होता। चर्चा है कि भारी भरकम लेन देन के बाद अंततः केंद्र सरकार द्वारा शेड्यूल एच एक्स को लंबित कर ही दिया। अब देखना यह है कि विपक्ष में बैठी भाजपा और अन्य दल इस मामले को क्या लोकसभा में उठाने की जहमत उठाएंगे?

नितिश के साथ टीम अण्णा
टीम अण्णा भले ही साफ सुथरी राजनीति की बात कर रही हो पर टीम अण्णा के सदस्य अपने अपने गैर सरकारी संगठनों के लिए काम हेतु सरकारों पर दबाव बना रहे हैं। टीम अण्णा के एक महत्वपूर्ण सदस्य अरविंद केजरीवाल अपने एनजीओ के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के पास एक प्रस्ताव लेकर गए थे, चव्हाण ने उन्हें दो टूक मना कर दिया था। उसी प्रस्ताव को लेकर जब केजरीवाल बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के दर पर गए तब नितीश ने उन्हें हाथों हाथ ले लिया। केजरीवाल चहते थे कि आरटीआई को फोन और आॅन लाईन आरंभ करवाना चाह रहे थे। केजरीवाल की योजना आज बिहार में धूम मचाए है। नितीश इससे बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि इसी बहाने वे टीम अण्णा की गुड बुक में आ गए और टीम अण्णा का समर्थन भी पा लिया।

पीसीसी से खफा एमपी के क्षत्रप
मध्य प्रदेश में मृत अवस्था में पहुंच चुकी कांग्रेस को जिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री कांति लाल भूरिया से लाल बत्ती छीनकर कांटों भरा ताज उनके सिर पर रखा गया था। भूरिया लहुलुहान ही दिख रहे हैं। जैसे तैसे उन्होने अपनी टीम को हरी झंडी दिलवाकर उसका एलान करवा दिया। चूंकि भूरिया महज तीन जिलों तक ही अपने आप को सीमित किए हुए थे अतः बाकी जिलों में उन्हें इसका उसका मुंह ताकना पड़ा। मध्य प्रदेश के क्षत्रपों के चहेतों को टीम भूरिया में स्थान न मिल पाने से वे कोप भवन में हैं। दूसरी ओर अनजान चेहरों पर भूरिया ने दांव लगाकर मुसीबत खड़ी कर ली है। अनेक वरिष्ठ नेताओं को कनिष्ठ के नीचे काम करना गवारा नहीं। टीम भूरिया की जंबो सूची भी एमपीसीसी के असंतोष का शमन नहीं कर सकी। कुछ भी हो महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने अपने पट्ठे को मुखिया बनाकर मनमाफिक काम करवा बाकी क्षत्रपों को जमीन दिखा ही दी।

पुच्छल तारा
भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार। भारत गणराज्य इस समय आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। जहां देखो वहां भ्रष्टाचार फैला हुआ है। अण्णा हजारे की मुहिम के बाद भी यह जस का तस ही है। इसी बात पर अहमदाबाद से प्रदीप बैस ने एक संक्षित और सारगर्भित ईमेल भेजा है। प्रदीप लिखते हैं -‘‘भ्रष्टाचार से हर कोई परेशान है। अण्णा हजारे का साथ लोगों ने इसी लिए दिया था। अब अण्णा का ध्यान भ्रष्टाचार से हटकर कांग्रेस पर केंद्रित हो गया है। लगता है अण्णा ने कांग्रेस के सफाए के लिए ही जमीन तैयार की थी। आजादी के बाद महात्मा गांधी ने कांग्रेस को भंग करने का सुझाव दिया था, जिसका पालन अण्णा सुनिश्चित करवा रहे हैं। भ्रष्टाचार का मुद्दा टीम अण्णा भूल चुकी है। भ्रष्टाचार जस का तस खड़ा है। . . . . 

ये भ्रष्टाचार क्या कुछ ले दे कर खत्म नहीं हो सकता?‘‘

रविवार, 9 अक्टूबर 2011

मध्य प्रदेश को नहीं बसों की दरकार


मध्य प्रदेश को नहीं बसों की दरकार

बसों के लिए कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा केंद्र को

छिंदवाड़ा को दी कमल नाथ ने बड़ी सौगात

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली इमदाद की मध्य प्रदेश सरकार को दरकार नहीं है। यही कारण है कि केंद्र द्वारा बार बार प्रस्ताव भेजने के अनुरोध के बावजूद भी एमपी गर्वमेंट ने कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा है। केंद्र सरकार को मिले छः राज्यों के प्रस्तावों को उसने मंजूरी दे दी है, जिसमें मध्य प्रदेश का नाम शामिल नहीं है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पास किए गए प्रस्तावों में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडू, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक को शामिल किया गया है। गौरतलब होगा कि सूबों की सरकारी या अर्धसरकारी परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली यात्री बसों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब तक कोई मदद नहीं दी जाती थी। पिछले साल मार्च में भूतल परिवहन मंत्रालय के द्वारा एक योजना बनाई थी जिसके मुताबिक अगर सूबों की बसें सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाओं से लैस होंगी तो केंद्र सरकार उन्हें मदद उपलब्ध करवाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इसके उपरांत केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2010 - 2011 के लिए सूबों से प्रस्ताव मांगे गए थे किन्तु मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव ही नहीं मिला। इसके अलावा सूबों में निरीक्षण एवं मरम्मत केंद्र की स्थापना के लिए भूतल परिवहन मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि प्रस्ताव मांगे थे, जिनमें से महज हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से ही प्रस्ताव आ पाए हैं।

अत्याधुनिक सुविधाओं से जुड़ सकेंगी यात्री बस
सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा जिन राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, उसके लिए तीस करोड़ रूपए की राशि चरणों में प्रदान की जाएगी, जिससे बसों में जीपीएस, जीएसएस प्रणाली के अंतर्गत व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, इलेक्ट्रानिक टिकिट वैंडिग मशीन, आटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम के साथ ही साथ सूचना प्रोद्योगिकी की अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य परिवहन निगम में परिचालन क्षमता बढ़ने के साथ ही साथ वाहनों के रखरखाव में मदद मिलेगी।

छिंदवाड़ा को मिल गया एक सेंटर
तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ ने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में दो करोड़ 55 लाख रूपए की लागत से बनने वाले निरीक्षण और मरम्मत केंद्र मंजूर कर दिया गया है, जिसके लिए स्थान की तलाश युद्ध स्तर पर की जा रही है।

चिदम्बरम प्रणव की जंग के पीछे अंबानीज़


चिदम्बरम प्रणव की जंग के पीछे अंबानीज़

अनिल और मुकेश ने साध रखा आला राजनेताओं को

सियासी धुरी घूम रही है अनिल मुकेश के आसपास

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। जीरो से हीरो बनने वाले अंबानीज़ ब्रदर्स के इर्द गिर्द इन दिनों सियासी धुरी घूमती नजर आ रही है। अनिल अंबानी ने पलनिअप्प्म चिदंबरम, कपिल सिब्बल, कमल नाथ और सलमान खुर्शीद को साधा है तो मुकेश सीधे सीधे प्रणव मुखर्जी की गुड बुक्स में हैं। इन दोनों भाईयों के झगड़े की छाया सरकार में भी दिखाई देने लगी है।

गौरतलब है कि धीरू भाई अंबानी के अवसान के उपरांत उनके दोनों ही पुत्रों में घमासान मचा हुआ है। कहते हैं इस विवाद को हवा दी थी एक समाजवादी नेता ने। उन्हीं के कारण भाई भाई के बीच दीवारखड़ी हो गई थी। इस लड़ाई में जब के.जी.बेसिन का मुद्दा सामने आया तब तो दोनों भाई आग बबूला ही हो उठे।

मुकेश अंबानी के करीबी सूत्रों का कहना है कि जब उन्हें यह बताया गया कि इस मामले को हवा देने का काम अनिल कैंप द्वारा किया गया है तब उनके गुस्से का ठिकाना नहीं रहा। प्रणव मुखर्जी से मुकेश की करीबी जगजाहिर है। उधर केंद्र में प्रणव मुखर्जी और पलनिअप्पम चिदम्बरम के बीच रार चल रही है। फिर क्या था दोनों ही भाईयों ने अपने अपने हिसाब से पत्ते फेंके और प्रणव मुखर्जी वर्सेस चिदम्बरम का शुरू हो गया खेल।

जब यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के दरबार में पहुंचा तब दोनों ही ने अपने अपने तरीके से सोनिया को समझाने की कोशिश की। कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ के सूत्रों का कहना है कि प्रणव ने अपनी शिकायत में सोनिया को बताया कि जब उन्होंने वहां आने से पहले चिदम्बरम से चर्चा की और उसके तुरंत बाद ही दोनों के बीच की चर्चा समाचार चेनल्स पर जस की तस ही दिखाई जा रही है। घर की बातें मीडिया तक न पहुंचाई जाएं तो बेहतर होगा। इशारों ही इशारों में राजनीति के चतुर सुजान प्रणव ने अपनी बात कह ही दी कि वरना बात निकली है तो दूर तलक जाएगी . . . की तर्ज पर कांग्रेस को ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दिग्गी ने खीचे मिशन यूपी से हाथ


दिग्गी ने खीचे मिशन यूपी से हाथ

चुनावों में दिग्विजय सिंह की सक्रियता दिख रही कम

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। 2014 में होने वाले आम चुनाव राहुल गांधी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह चुनाव ही उनका भविष्य तय करने में सहायक होंगे। राहुल के अघोषित राजनैतिक गुरू दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की कमान अपने हाथ में ही रखी थी। अब उनकी पकड़ यूपी पर कमजोर ही दिख रही है। दिग्गी विरोधियों ने एसा दांव मारा है कि दिग्विजय सिंह न उगल पा रहे हैं न निगल पा रहे हैं।

देश को सबसे अधिक प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस द्वारा जारी पहली सूची में दिग्वियज के दामाद का नाम गायब करवा दिया गया। वे राम नगर से चुनावी मैदान में उतरने की मंशा रख रहे थे। अपने ससुर साहेब की 10 जनपथ तक पहुंच देखकर वे भी आश्वस्त थे कि उनकी टिकिट रामनगर से पक्की है और जीत भी। जब सूची जारी हुई तो वे हक्के बक्के रह गए।

दिग्गी के निष्क्रीय होते ही उत्तर प्रदेश में बेनी प्रसाद वर्मा और मोहन प्रकाश धूमकेतू की तरह एकाएक राजनैतिक आकाश पर छाते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र भी उत्तर प्रदेश में ही है। इस लिहाज से यूपी में कांग्रेस को अपना प्रदर्शन हर हाल में सुधारना ही होगा।

अवकाश पर हैं केंद्रीय मंत्री!


अवकाश पर हैं केंद्रीय मंत्री!

आईपीएल की तैयारियों में जुट गए हैं शुक्ला

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला इन दिनों अवकाश पर हैं! जी हां, इस तरह की बातें इन दिनों सियासी गलियारों में तेजी से चल रही हैं। दरअसल, आईपीएल के अध्यक्ष बनने के बाद राजीव शुक्ला का सारा ध्यान इन दिनों आईपीएल पर ही केंद्रित हो गया है। उनकी प्राथमिकता में आईपीएल पर लगे दाग धब्बे धोने के साथ ही साथ इसकी ओपनिंग सेरेमनी को कामन वेल्थ गेम्स से ज्यादा भव्य बनाने की है।

उनके करीबियों का कहना है कि वे इन दिनों खिलाड़ियों और फ्रेंचाईजी के लिए गाईड लाईन तैयार कर रहे हैं। इस बार क्रिकेट के इस महाकुंभ में महज 9 टीमें ही हिस्सेदारी रखेंगी। इसके अलावा मैच की पूर्व संध्या से मध्य रात्रि तक चलने वाले भोज में खिलाड़ी नहीं शामिल हो सकेंगे। देर रात पार्टी में रहने के कारण खिलाड़ियों के परफार्मेंस पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस लिहाज से अब आने वाले दिनों में फ्रेंचाईजी द्वारा दी गई पार्टी में खिलाड़ी भाग नहीं ले पाएंगे। यहां विशेष तौर पर उल्लेखनीय होगा कि खुद राजीव शुक्ला पेशे से पत्रकार और पेज थ्री पार्टियों के शौकीन रहे हैं।

आईपीएल प्रतियोगिता का शुभारंभ चेन्नई में होना है अतः शुक्ला इन दिनों सरकारी कामकाज से इतर आईपीएल में ही जुटे नजर आ रहे हैं। वे चाह रहे हैं कि आईपीएल का शुभारंभ इतना भव्य और गरिमामय हो कि लोग ओलंपिक या कामन वेल्थ गेम्स को भूल ही जाएं। इसके लिए विदेशी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों के सतत संपर्क में हैं शुक्ला।

अंकल सैम की नजर में ठग हैं मुलायम सिंह


अंकल सैम की नजर में ठग हैं मुलायम सिंह

विकीलीक्स केबल में हुआ खुलासा

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अमेरिका की नजरों में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ठग हैं। यह खुलासा एक केबल में हुआ है। अमेरिका के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के सम्मान में आयोजित भोज में उस वक्त के राजदूत डेविड मलफोर्ड ने मुलायम पर इस तरह की भद्दी टिप्पणी की थी।

मलफोर्ड ने कहा था कि मुलायम सिंह यादव देश के सबसे गंदे और लगातार रिश्वत लेने वाले राजनेता हैं। कांग्रेस और अनेक लोग मुलायम सिंह यादव को ठग मानते हैं। मुलायम सत्ता की प्राप्ति के लिए हिंसा को अपनाने में भी गुरेज नहीं करते। वोट के लिए मुलायम सिंह यादव किसी भी स्तर तक जा सकते हैं।

उनके मुख्यमंत्रित्व काल में वे वहां बाहरी निवेश करवाने में पूरी तरह असफल ही साबित हुए हैं। अंबानी, सहारा, गोदरेज जैसे समूहों के प्रमुखों की गोद में खेलने वाले मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश का बंटाधार करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी।

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

नेहा सिंह ने कराया था रामटेक गोटेगांव के लिए अशासकीय संकल्प पारित


0 सिवनी से चलेगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 11

नेहा सिंह ने कराया था रामटेक गोटेगांव के लिए अशासकीय संकल्प पारित

विधायक रहते नेहा सिंह ने किए ब्राडगेज के लिए प्रयास

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। सिवनी वासियों के लिए यह सुखद आश्चर्य से कम नहीं था कि केवलारी की तत्कालीन भाजपा विधायक श्रीमति नेहा सिंह ने मध्य प्रदेश विधानसभा से एक अशासकीय संकल्प पारित कर केंद्र को भेजा था जिसमें रामटेक से गोटेगांव तक नई ब्राडगेज रेल लाईन की स्वीकृति देने का अनुरोध किया गया था। सिवनी के इतिहास में यह पहला ही मौका था जब सिवनी में ब्राडगेज के लिए किसी सांसद विधायक ने सीधे पहल की हो।

मध्य प्रदेश के सेवा निवृत मुख्य सचिव और तत्कालीन सचिव परिवहन राकेश साहनी ने 18 जुलाई 1991 को पत्र क्रमांक 10-144-91/ आठ के माध्यम से एक पत्र सचिव रेल्वे बोर्ड रेल मंत्रालय दिल्ली को प्रेषित किया गया था। इस पत्र में उल्लेख किया गया था कि 05 जुलाई 1991 को केवलारी की भाजपा विधायक श्रीमति नेहा सिंह ने एक अशासकीय संकल्प मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किया था।

श्री साहनी ने आगे उल्लेखित किया था कि मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन का मत था कि सिवनी बालाघाट और छिंदवाड़ा जिले की यातायात की समस्या के निवारण हेतु गोटेगांव से रामटेक के मध्य ब्राडगेज रेल्वे लाईन के निर्माण हेतु राज्य सरकार केंद्र सरकार से अनुरोध करे। सदन में चर्चा के दौरान तत्कालीन भाजपा विधायक श्रीमति नेहा सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सिवनी बालाघाट और छिंदवाड़ा जिले खनिज सम्पदा से भरपूर हैं, किन्तु इन जिलों में रेल परिवहन नहीं होने से यहां का औद्योगिक विकास नहीं हो पा रहा है।

चर्चा में श्रीमति नेहा सिंह ने उल्लेख किया था कि रामटेक से गोटेगांव तक 180 किलोमीटर लंबी रेल लाईन बिछाने पर चालीस किलोमीटर की बचत भी होगी। इस चर्चा में विधायक गौरी शंकर बिसेन, चंद्र शेखर साहू, रामजी मस्तकार ने भी मध्य प्रदेश की रेल सुविधाओं को अपर्याप्त बताया था। यह प्रस्ताव सदन द्वारा ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था।

रेल्वे बोर्ड के सचिव को लिखे पत्र में राकेश साहनी ने साफ तौर पर कहा था कि जबलपुर से नागपुर के बीच तीन सौ किलोमीटर की नेरो गेज रेल लाईन उपलब्ध है, जिसके अमान परिवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा 1981 से निरंतर अनुरोध किया जाता रहा है। गौरतलब है कि उस वक्त से अधिकांश समय मध्य प्रदेश और केंद्र में कांग्रेस का ही शासन रहा है। इस लिहाज से कांग्रेस ने सिवनी को सदा ही उपेक्षित रखा माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जबलपुर से नागपुर या तो नेरो गेज या फिर बरास्ता इटारसी से छः सौ किलोमीटर लंबा सफर कर जाना होता है। स्मरणीय होगा कि रामटेक गोटेगांव के नए रेलखण्ड के निर्माण हेतु तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.व्ही.नरसिंहराव ने गोटेगांव में चुनावी आमसभा में घोषणा की थी, किन्तु वे दुबारा प्रधानमंत्री नहीं बन सके और यह घोषणा चुनावी ही रह गई।

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

दवा विक्रेताओं के आगे घुटने टेके आजाद ने


दवा विक्रेताओं के आगे घुटने टेके आजाद ने

शेड्यूल एचएक्स को डाला ठंडे बस्ते में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय सदा से ही चर्चा और विवादों में रहा है। मनमानी जनविरोधी एवं दवा उत्पादकों की सेहत का ध्यान रखने वाली नीतियों के कारण सभी की नजरें इस पर टिकी रहती हैं। हाल ही में एंटीबायोटिक्स के मामले में शेड्यूल एचएक्स को लागू न कर उसे लंबित करने से एक बार फिर केंद्र सरकार इन दवा विक्रेताओं के आगे घुटने टेकते नजर आ रही है।

गौरतलब है कि वर्तमान में फुटकर दवा विक्रेताओं के पास दवा की बिक्री का रिकार्ड नहीं रहता है। वे महीने में एक बार छःमाही या सालाना बिल कटवाते रहते हैं। इस तरह इनका सेल्स टेक्स इंकम टेक्स आदि का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इसके साथ ही साथ प्रतिबंधित दवाओं को भी इनके द्वारा खुलेआम बेचा जाता है।

हेल्थ मिनिस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि एंटीबायोटिक्स पर शेड्यूल एचएक्स लागू करने की घोषणा की थी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद ने। कहा जा रहा है कि अगर यह लागू हो जाता तो दवा विक्रेताओं को एंटीबायोटिक दवा बेचने के साथ ही साथ मरीज का रिकार्ड जैसे उसकी जांच पर्ची आदि की फोटोकापी संभालकर रखना होता।

सूत्रों का कहना है कि एसा करने से दवा विक्रेताओं की हेराफेरी करने की गुंजाईश नगण्य हो जाती। इस मामले में जैसे ही दवा उत्पदकों में हडकम्प मचना आरंभ हुआ वैसे ही यह लाबी सक्रिय हो गई और गुलाम नबी आजाद पर दबाव बनाया गया। चर्चा है कि भारी भरकम लेन देन के बाद अंततः केंद्र सरकार द्वारा शेड्यूल एच एक्स को लंबित कर ही दिया। अब देखना यह है कि विपक्ष में बैठी भाजपा और अन्य दल इस मामले को क्या लोकसभा में उठाने की जहमत उठाएंगे?

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

शिव के राज में माता के वाहन पर संकट!


शिव के राज में माता के वाहन पर संकट!

(लिमटी खरे)

भगवान शिव बेहद भोले हैं वे थोड़ी सी ही भक्ति में प्रसन्न हो जाते हैं। मध्य प्रदेश में शिव का ही राज है। ये हैं पांव पांव वाले भईया शिवराज सिंह चौहान। शिव के गणों में वनों की देखभाल का जिम्मा है सरताज सिंह के कांधों पर। सरताज तो सरताज हैं उनकी देखरेख में एक के बाद एक जंगली जानवरों का आखेट में दम लिया जा रहा है। भेडिया बालक मोगली की कर्मस्थली पेंच नेशनल पार्क इन दिनों शिकारियों के लिए साफ्ट टारगेट बनकर रह गया है।  एक के बाद एक बाघ कालकलवित होते जा रहे हैं और वनाधिकारी अपनी मटरगश्ती में ही मशगूल नजर आ रहे हैं। सिवनी के विधायक और सांसदों को सालों साल में यह भी आभास नहीं हुआ कि लगभग पांच हजार स्कव्यर किलोमीटर में फैले चंदन बगीचे जिसमें बेशकीमती चंदन हुआ करता था आज बंजर जमीन में कैसे तब्दील हो गया है। निश्चित तौर पर जनसेवक और लोकसेवक की गठजोड़ से वनसंपदा और वन्य प्राणी संकट में हैं।

देश के हृदय प्रदेश में पिछले कुछ सालों से शिवराज सिंह चौहान का राज कायम है। शिवराज सिंह चौहान के राज में सूबे के सिवनी जिले में मां दुर्गा के वाहन शेर का अस्तित्व समाप्ति की ओर है। भारी भरकम वन महकमे की फौज, विशेष सशस्त्र बल और पुलिस के जवानों के होने के बावजूद भी शिकारी सरेआम जंगल महकमे के अफसरान की खुली आंख से काजल चुराकर भागने में सफल हो रहे हैं। विश्व भर में अपनी पहचान बना चुके भेडिया बालक ‘‘मोगली‘‘ की कर्मस्थली सिवनी जिले के पेंच नेशनल पार्क के इर्दगिर्द तो क्या समूचे सिवनी जिले में वन्य जीव विशेषकर बाघ बुरी तरह संकट में हैं।

पेंच नेशलन पार्क वैसे भी देश में पिछले सालों में काफी हद तक चर्चा का विषय बना हुआ है, इसका कारण तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ और तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के बीच पेंच नेशनल पार्क को लेकर खिची तलवारें हैं। गौरतलब होगा कि स्वर्णिम चतुर्भुज के अंर्तगत उत्तर दक्षिण गलियारे का निर्माण पेंच नेशनल पार्क के करीब से हो रहा है। कहते हैं जयराम रमेश को यह बताया गया है कि उक्त सडक कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र से होकर जा रही है, (जो कि सर्वथा गलत है) जिसके चलते रमेश के वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस मार्ग के निर्माण में अनेक पेंच और फच्चर फसा दिए हैं।

इसके साथ ही साथ पेंच नेशनल पार्क कथित तौर पर जंगल में पले बढे भेडिया बालक मोगली की कर्मस्थली माना जाता है सो इसकी पहचान न केवल हिन्दुस्तान वरन् विश्व के अनेक देशों में बन चुकी है। यहां व्यवसायिक उपयोग के लिए आदिवासियों की जमीनों को धनपतियों और यहां पदस्थ रहे अधिकारियों ने कोडियों के भाव खरीदक उन पर मंहगे आलीशान स्टार होटल का निर्माण करवा दिया। पूर्व में यहां पदस्थ रहे एक अनुविभागीय दण्डाधिकारी, ने नेशनल पार्क से सटे इलाके में जमीन खरीदी थी। इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्व के एक अनुविभगीय अधिकारी के लिए यह काम कितना मुश्किल होगा! इसी तरह एक अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी ने भी सिवनी से नागपुर मार्ग पर अपने परिजन के नाम से बहुत बडा सा फार्म हाउस खरीद लिया है। चर्चा है कि सिवनी से खवासा का निर्माण करा रही सदभाव कंपनी ने इस फार्म हाउस को पूरी तरह विकसित कर कुआ आदि खोदा गया है जिसमें लगभग एक करोड रूपए की राशि खर्च की गई है। ‘‘जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का‘‘ की तर्ज पर अधिकारियों द्वारा पेंच नेशनल पार्क के आसपास और जिले की जमीनों पर कब्जा जमा लिया है।

जहां तक रही वन्य जीवों के शिकार की बात तो इस मामले में इतिहास के चंद पन्ने पलटने आवश्यक होंगे। नब्बे के दशक के आरंभ में जिले की वन संपदा इतनी जबर्दस्त थी कि लोग यहां सागौन के साथ ही साथ चंदन बगीचा घूमने देखने आया करते थे। बताते हैं कि कुरई के सकाटा का जंगल इतना सघन हुआ करता था कि लोगों के आकर्षण का केंद्र था यह। इसके उपरांत जब दिग्विजय ंिसह की सरकार सत्ता में आई उसके बाद के वनमंत्रियों की अर्थलिप्सा और निहित स्वार्थ तथा कर्तव्यों के प्रति अनदेखी के चलते सिवनी जिले के जंगल बुरी तरह साफ हो गए। जिले का इतना विशाल चंदन बगीचा आज किन हालातों में हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस के शासनकाल में दुर्दशा का शिकार हुआ चंदन बगीचा और उजडी वन्य संपदा को विपक्ष में बैठी भाजपा और उसके विधायक, सांसदों ने चुपचाप उजडने दिया। इस तरह देखा जाए तो जिले की वन्य संपदा के उजडने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बराबरी के दोषी हैं। यहां एक बात उल्लेखनीय होगी कि कांग्रेस के शासनकाल में हरवंश सिंह ठाकुर तो भाजपा की सरकार में डॉ.ढाल सिंह बिसेन सूबे के वन मंत्री रहे हैं।

याद पडता है कि जब प्रहलाद सिंह पटेल संसद सदस्य थे, उस दौरान 1995 में तीन शेरों का शिकार कर बेकार अंगो को सडक के किनारे फेंक दिया गया था। उस समय प्रहलाद सिंह पटेल ने इस मामले को संसद में गुंजाया था। केंद्रीय दल इसकी जांच के लिए आया, किन्तु वन्य जीवों के तस्कर और लकडी माफिया इतना ताकतवर था कि केंद्रीय दल ने इसे दुर्घटना में मौत बताकर मामले को रफा दफा कर दिया था। वन्य जीवों के तस्करों का साहस तो देखिए। पेंच नेशनल पार्क में सेलालियों के आकर्षण का केंद्र रही एक शेरनी को परधियों ने 1999 में जिंदा ही उठा लिया गया था। दरअसल यह शेरनी इतनी सीधी थी कि पर्यटक इसे नजदीक जाकर छू भी लिया करते थे।

पिछले साल ही एक शेर की संदेहास्पद मौत हुई थी। वन्य महकमे ने अपनी खाल बचाने के लिए इसे स्वाभाविक मौत ही बता दिया था। इतना ही नहीं इसके चंद माह बाद एक बाघ की जहर से मौत हो गई थी। साफ साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मौत पानी में जहर मिले होने के कारण हुई थी। वन विभाग इसे भी स्वाभाविक मोत ही बताने पर आमदा था। बाद में फोरंेसिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो सकी कि उसकी मौत जहर देने से हुई थी। हाल ही में पेंच पधारे प्रदेश के वन मंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी गोल मोल जवाब देकर वन महकमे की खाल बचाने का ही उपक्रम किया है।

इसके उपरांत एक के बाद एक मामले प्रकाश में आते रहे जो नागरिकों के होश उड़ाने के लिए पर्याप्त माने जा सकते हैं पर अधिकारियों और सांसद विधायकों को जगाने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा सकते हैं। एक अन्य मामले ने तो होश ही उडा दिए हैं। पेंच नेशनल पार्क से गायब एक शावक का शव एक माह बाद वन विभाग को दिखाई देना अपने आप मंे ही अनेक प्रश्नों को अनुत्तरित ही छोड गया है। कहा जा रहा है कि इस शावक को तंत्र मंत्र के लिए मौत के घाट उतार दिया गया। इस शावक के दो पंजे एक तांत्रिक के पास ले जाते समय छिंदवाडा के वन महकमे द्वारा जप्त किए गए। आश्चर्य की बात तो यह है कि पंेच के रखरखाव के लिए राज्य शासन द्वारा भारी भरकम अलमा पदस्थ किया है जो जनता के द्वारा दिए जा रहे कर से भारी भरकम वेतन पा रहा है फिर एसी लापरवाही कैसे! क्या शिवराज सिंह चौहान स्वयं इस मामले में संज्ञान लेकर वन विभाग में शिख से लेकर नख तक माता दुर्गा के वाहन के साथ किए इस वीभत्स काम के लिए दण्ड देने का साहस कर पाएंगे?

कहा जा रहा है कि 9 मई 2010 को उक्त शावक को पंेच नेशनल पार्क के उप संचालक ने स्वयं ही कमजोर हालत में देखा था, इसके बाद से वह कथित तौर पर ‘‘लापता‘‘ था। एसा नहीं कि जिस स्थान पर उसका शव मिला है, वहां पर से उडन दस्ता न गुजरा हो। अगर नहीं गुजरा तो उडन दस्ते को वेतन और उडन दस्ते का डीजल कौन पी जाता है। जब बागड ही खेत को चरने लगे तो फिर खेत को कोई ताकत नहीं बचा सकती है। जब वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी ही अपने कर्तव्यों में बेशकीमती इमारती लकडी और वन्य जीवों का दोहन करने का मानस बना लें तो फिर इनकी रखवाली भगवान ही आकर कर सकता है।

सिवनी जिले में काले हिरण भी बहुतायत में पाए जाते हैं। जिला मुख्यालय सिवनी से बमुश्किल पांच सात किलोमीटर के दायरे में ही काले हिरणों के झुण्ड दिखाई पड जाते हैं। इन काले हिरणों का शिकार बडे पैमाने पर किया जा रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। हमने अपने पूर्व के आलेख में इन काले हिरणों के लिए एक सेंचुरी बनाने की बात कही थी, पर न तो मध्य प्रदेश सरकार के कानों में ही जूं रेंगी और न ही केंद्र की सरकार को इससे कोई सरोकार दिख रहा है। वन्य जीवों के शिकार और इमारती लकडी की दनादन कटाई को लेकर प्रहलाद सिंह पटेल के अलावा किसी और ने बात किसी मंच पर उठाई हो इसका उदहारण अभी तक तो नहीं मिल सका है। क्या कांग्रेस के जिले के इकलौते विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष ठाकुर हरवंश सिंह सहित सत्तारूढ भाजपा के विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, श्रीमति शशि ठाकुर सहित केंद्र में सत्ता और विपक्ष में बैठे जिले के दोनों सांसद बसोरी सिंह मसराम और के.डी.देशमुख इस मामले को उठाने का मद्दा रखते हैं।

इस तरह के शिकार को दुर्घटना में मौत बताकर एनएचएआई के उत्तर दक्षिण गलियारे के गुजरने में अडंगे कसे जा रहे हैं। एक बार चर्चा के दौरान जिले के एक वरिष्ठतम अधिकारी ने एनएचएआई के सडक निर्माण में फसे पेंच कारीडोर के फच्चर के बारे में अनोपचारिक तौर पर कहा गया था कि शिकारियों द्वारा किए गए शिकार को सडक दुर्घटना बताने से इस सडक का निर्माण और दुष्कर होता जा रहा है। सवाल यह उठता है कि केंद्र में बैठे वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश जो वनों और पर्यावरण के बारे में अपनी चिंता का स्वांग रचते हैं वे क्या पेंच का दौरा कर इन सारे अनसुलझे सवालों पर गौर फरमाएंगे। अगर वे एसा करते हैं तो यह न केवल वन और पर्यावरण के मामले में उनका स्वागतयोग्य और अनुकरणीय प्रयास समझा जाएगा, वरन् सिवनी वासियों के साथ पूरा न्याय भी माना जाएगा।

रेल संघर्ष समिति ने संभाला मोर्चा


0 सिवनी से चलेगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 10

रामटेक गोटेगांव नई रेल लाईन के लिए रेल संघर्ष समिति ने संभाला था मोर्चा

अगस्त तक 25 हजार हस्ताक्षर का रखा था 2005 में लक्ष्य

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। रामटेक से गोटेगांव के बीच नई रेल लाईन के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर कांग्रेसी नेता हरवंश सिंह ठाकुर के संरक्षण और पूर्व विधायक श्रीमति नेहा सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय रेल संघर्ष समिति का गठन किया जाकर इस मुहिम को तेज कर दिया गया था। इस रेल संघर्ष समिति में कांग्रेस भाजपा के अलावा सभी दलों के प्रतिनिधियों को स्थान दिया गया था।

रेल संघर्ष समिति की अध्यक्ष श्रीमति नेहा सिंह ने छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मण्डला और नरसिंहपुर जिलों के विकास की दृष्टि से रामटेक गोटेगांव नए रेल खण्ड की महत्ता प्रतिपादित करते हुए तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखा। रेल संघर्ष समिति द्वारा इस आशय के पत्र तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह, वाणिज्य और उद्योग मंत्री कमल नाथ, कृषि उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री कांतिलाल भूरिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव सहित अनेक मंत्रियों को लिखे थे।

इन पत्रों पर किसी और नेता ने नहीं वरन् सिर्फ और सिर्फ कांतिलाल भूरिया ने ही संज्ञान लिया। मध्य प्रदेश कोटे से अन्य मंत्रियों ने संघर्ष समिति की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी में मध्य प्रदेश के तत्कालीन क्षत्रपों स्व.कुंवर अर्जुन सिंह, कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरूण यादव, सुरेश पचौरी आदि का झंडा उठाने और नभ को चीरने वाली जय जयकार करने वालों की न तब कमी थी और ना ही अब है। विडम्बना ही कही जाएगी कि छिंदवाड़ा से नैनपुर के महज 139 किलोमीटर लंबे रेल खण्ड के लिए कोई भी अपने आका को सिद्ध नहीं कर सका।

बहरहाल कांतिलाल भूरिया ने 29 अप्रेल 2005 को तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री नाराण भाई राठवा को पत्र लिखकर नेहा सिंह के पत्र पर स्वीकृति देने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में नारण भाई जे.राठवा ने अपने 17 मई 2005 के पत्र में कांतिलाल भूरिया को उत्तर दिया कि वे इस मामले की जांच करवा रहे हैं। इसके उपरांत 26 सितम्बर 2006 के पत्र में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री श्री राठवा ने दुबारा कांतिलाल भूरिया को सूचित किया कि मध्य प्रदेश के गोटेगांव से महाराष्ट्र के रामटेक तक के बरास्ता धूमा, सिवनी, खवासा के नए रेल खण्ड का सर्वेक्षण वित्तीय वर्ष 2001 - 2002 में संपन्न कराया गया था।

इस सर्वे में 275.5 किलोमीटर लंबे रेल खण्ड के निर्माण की लागत वित्तीय वर्ष 2000 - 2001 के अनुसार 528.22 करोड़ रूपए आंकी गई थी जिसके प्रतिफल की दर 11.15 ऋणात्मक आने की बात कही गई थी। श्री राठवा ने साफ कहा था कि इस नए रेल खण्ड के अलाभप्रद स्वरूप, संसाधनों की कमी आदि के कारण इस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा सका।

श्री राठवा ने आगे कहा था कि वित्तीय वर्ष 2004 - 2005 में कराए गए सर्वे के अनुसार उस वक्त इसकी लागत बढ़कर 775.29 करोड़ रूपए हो गई थी। प्रतिफल की दृष्टि से इस समय यह 11 से घटकर 3 फीसदी ऋणात्मक पर आ गया था। इस दौरान भी रामटेक गोटेगांव के नए रेल खण्ड का काम आरंभ कराना व्यवहारिक नहीं पाया गया था। इन पत्रों की प्रति कांतिलाल भूरिया ने रेल संघर्ष समिति की अध्यक्ष श्रीमति नेहा सिंह को उसी वक्त सूचना देने के लिए भेजी थीं।
इस रेल संघर्ष समिति के संरक्षण हरवंश सिंह ठाकुर, अध्यक्ष पूर्व विधायक श्रीमति नेहा सिंह, संयोजक महेश रामानी, मीडिया प्रभारी एड.जकी अनवर खान, के अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष यादोराव राहंगडाले, राकापा के ददुआ पटेल, सपा के जफर पटेल, जदयू के कलीम खान, राजद के एड.याहया आरिफ कुरैशी, भाकपा के हजारीलाल हेडाउ, बीएसपी के रामसिंह राय, आरपीआई के डॉ.राजकुमार बागरे, अजेय भारत पार्टी के अरूण सिंघानिया, शिवसेना के गोविंद बोरकर, नागरिक मोर्चा से नरेंद्र अग्रवाल, गोंगपा के मेहतराम बरकड़े के अलावा चेम्बर ऑफ कामर्स, इंटक, युवा संधि, उपभोक्ता कांग्रेस, बसंतोत्सव समिति, बैनगंगा साहित्य समिति, सिवनी केरल समाज और अंजनी किशोर व्यायाम शाला जैसी संस्थाओं को भी जोड़ा गया था।
(क्रमशः)

निज़ाम नहीं वज़ीरे आज़म बनना चाह रहे हैं मोदी


निज़ाम नहीं वज़ीरे आज़म बनना चाह रहे हैं मोदी

संघ की पेशकश ठुकराई नरेंद्र मोदी ने

मोदी का इंकार दिला सकता है गड़करी को एक्सटेंशन

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के कद को देखकर भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उन्हें भाजपाध्यक्ष की कुर्सी की पेशकश की जो मोदी ने बहुत सम्मान के साथ अस्वीकार कर दी। दरअसल मोदी भाजपा के निजाम बनने के बजाए देश के वजीरे आजम बनने में ज्यादा दिलचस्पी रख रहे हैं। मोदी के इंकार से वर्तमान भाजपा निजाम नितिन गड़करी को एक और कार्यकाल मिलने से कोई नहीं रोक सकता है। मोदी के मन में 7 रेसकोर्स रोड (प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को अपना आशियाना बनाने की आकांक्षाएं बलवती हो रही हैं।

दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि नितिन गड़करी का कार्यकाल 2012 में समाप्त हो रहा है। इसके दो साल बाद आम चुनाव हैं। संघ चाहता है कि आम चुनावों में मोदी की छवि और उनके अनुभवों का इस्तेमाल वह पार्टी के लिए करे। यही कारण है कि संघ के आला नेताओं ने मोदी को भाजपा की कमान संभालने के लिए न्योता दे दिया।

सूत्रों की मानें तो मोदी ने मिशन 2014 के चलते संघ के आला नेताओं को यह कहकर शांत कर दिया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पास असीमित संवैधानिक अधिकार हैं, जिनके चलते कांग्रेस चाह कर भी उनका बाल बांका नहीं कर पा रही है। अगर उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा तो कांग्रेस उन्हें चील कौओं के मानिंद नोच खाएगी। उनका आधे से ज्यादा समय कोर्ट कचहरियों में बीतेगा।

बताया जाता है कि मोदी ने अपने पिछले राजनैतिक रिकार्ड और इस दौरान उनके विरोधियों के बिना आवाज शमन के साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों के आक्रमक के बजाए रक्षात्मक रवैए का भी हवाला खुलकर दिया। मोदी ने संघ को दो टूक कह दिया है कि संघ को अगर उनके लिए (मोदी के लिए) कुछ करना है तो वे उनके लिए सीएम से पीएम तक का मार्ग प्रशस्त कर दें।

अब खरबूजे पर खतरे के बादल


अब खरबूजे पर खतरे के बादल

अमेरिका में खरबूजे से 13 मरे

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। दुनिया का चौधरी जो न करे सो कम है। पश्चिमी देशों ने भारत गणराज्य को प्रयोगशाला ही बना रखा है। कभी स्वाईन फलू तो कभी बर्ड फलू के नाम पर अरबों रूपयों की दवाएं खरीदने पर मजबूर कर देते हैं पश्चिमी देश हिन्दुस्तान को। दिल के दर्द की सस्ती दवा डिस्प्रिन को बाजार से बाहर करवा दिया था पश्चिमी देशों ने क्योंकि यह सस्ता इलाज और कारगर था।

नई बीमारियों के बारे में बताकर दुनिया को डराने में अमेरिका का कोई सानी नहीं है। हाल ही में खरबूजे में पाए जाने वाले जीवाणु लिस्टेरिया से खतरा बता रहा है अमरिका। अमरिका का दावा है कि इस जीवाणू से उपजी बीमारी से अब तक तेरह लोग काल कलवित हो चुके हैं वहीं सात दर्जन से ज्यादा इसकी चपेट में हैं।

अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन के अनुसार कोलोराडो में एक फार्म में उगे खरबूजे में यह जीवाणु पाया गया है। प्रशासन ने खरबूजे का उपयोग न करने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रोग नियंत्रण और बचाव केंद्र की वेब साईट बयां कर रही है कि गर्भवती महिलाओं को इससे ज्यादा खतरा है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि मेक्सिको में चार, कोलोराडो और टेक्सास में दो दो तथा कंसास, मैरीलेण्ड, नेब्रस्का, ओकलहोमा और मिसॉरी में एक एक व्यक्ति की मौत हुई है। गौरतलब है कि हिन्दुस्तान में लोग खरबूजे का सेवन बड़े ही चाव के साथ करते हैं। इस तरह की बातों के बाद भारत में खरबूजे की खेती पर संकट के बादल मंडराना लाजिमी है।

शिव के हिसाब न देने से खफा हैं मनमोहन


शिव के हिसाब न देने से खफा हैं मनमोहन

केंद्र पोषित योजनाओं का ब्योरा न मिलने से नाराज है केंद्र

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। एक तरफ तो शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेसनीत केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने के आरोप लगाए जाते हैं वहीं केंद्र द्वारा दी जाने वाली इमदाद के बारे में राज्य सरकार पूरी तरह खामोश हो जाती है। केंद्र को अपनी राशि के खर्च का ब्योरा न मिल पाने से हिसाब मिलाना ही मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार ने अब कड़े कदम उठाते हुए आवंटन की किश्तों को रोकने का फैसला ले लिया है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि विभाग ने मध्य प्रदेश को नेशनल सरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम (एनआरडीपीडब्लू) के तहत दी जाने वाली राशि पर रोक लगा दी है। मंत्रालय का आरोप है कि शिवराज सरकार ने इस योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा दी गई इमदाद का व्यय प्रतिवेदन केंद्र सरकार को प्रेषित नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य को एनआरडीपीडब्लू की राशि रोकने का कारण भी राज्य को बता दिया है।

कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार अपनी इमदाद की पाई पाई की रिपोर्ट चाह रही है। केंद्र सरकार को यह भी बताया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा केंद्र से प्राप्त सहायता को मूल मद में व्यय करने के बजाए उसका उपयोग अन्य मदों में किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फिजूल खर्ची और नई योजनाओं के लिए फंड जुटाने में अपने आप को असहज महसूस किया जा रहा है। यही कारण है कि सरकार को केंद्र से मिलने वाली राशि का उपयोग वह अन्य मदों में धडल्ले से कर रही है।

रेल्वे ने फैलाए वित्त के सामने हाथ


रेल्वे ने फैलाए वित्त के सामने हाथ

दो हजार करोड़ की मांगी इमदाद

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। निजामों के मनमाने रवैए से पटरी पर से उतर चुकी भारतीय रेल को अब सुव्यवस्थित होने के लिए दो सौ करोड़ रूपयों की दरकार है। आर्थिक कंगाली के मुहाने पर खड़े रेल मंत्रालय ने मदद के लिए वित्त मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। उसने फिलहाल वित्त मंत्रालय से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज मांगा है। अपनी आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए कुछ अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

रेलवे के पास महज 75 लाख की ही नगदी बची है। उसका परिचालन व्यय 73,650 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 2007-08 में यह 41,033 करोड़ रुपये था। पेंशन खर्च 7,953 करोड़ रुपये से बढ़कर 16000 करोड़ रुपये हो गया है। रेलवे बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय को एक हफ्ता पहले पत्र भेजकर 2000 करोड़ रुपये ब्रिजलोन के रूप में मांगे गए हैं। पैसा न होने से परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

रेलवे की ओर से वित्त मंत्रालय को करीब एक पखवाड़ा पहले पत्र भेजा गया है। सूत्रों के मुताबिक, रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने इस बारे में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से बात भी की है। तककरीबन 9 साल से रेलवे का किराया नहीं बढ़ा है। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी भी किराया बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। वित्तीय हालात खराब होते देख रेलवे कर्मचारियों की यूनियनें यात्री किराया बढ़ाने का दबाव बना रही हैं।

कैसे हो गया रेल्वे खस्ताहाल!

भारतीय रेल के पटरी पर से उतरने के अनेकों कारण हैं। इसका पहला कारण है छठा वेतन आयोग। इसके चलते रेलवे को अपने कर्मचारियों के वेतन और पूर्व कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। इसके अलावा माल ढुलाई में बाधा, नक्सली आंदोलन के कारण ट्रेनों और मालगाड़ियों के आवागमन पर विपरीत असर, ईंधन के बढ़ते दाम, हर साल बड़े पैमाने पर नई ट्रेनों का ऐलान ऐसे कारण हैं, जिन्होंने रेलवे की तिजोरी पर डाका डाला है। रेल मंत्रालय यह भी चाहता है कि केंद्र उसे एकमुश्त सहायता दे। यह संभव न हो तो कम से कम हर साल ब्याज के रूप में वसूले जाने वाले 6 हजार करोड़ रुपये की वसूली ही स्थगित कर दे।

स्वामी फंसे लेख लिखकर


स्वामी फंसे लेख लिखकर

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। कांग्रेस की नाक का बाल बनकर रोजना ही खुलासों से यूपीए सरकार की नाक में दम करने वाले जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी एक अखबार में लिखे अपने लेख को लेकर फंस गए हैं। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को स्वामी के खिलाफ समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया।

स्वामी के खिलाफ यह केस उनकी इस उस टिप्पणी के लिए दर्ज किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों से मतदान का अधिकार छीन लेना चाहिए। एक वरिष्ठ पुलिस ऑफिसर ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने स्वामी के खिलाफ इस साल जुलाई में एक अखबार में लेख लिखकर समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने को लेकर आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दर्ज किया है।

वरिष्ठ वकील आर. के. आनंद ने इस संबंध में स्वामी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अगस्त में लेख में स्वामी की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज करने का फैसला किया था। हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल करने वाले स्वामी ने अखबार में लिखे अपने लेख में कहा था कि हिंदुओं को सामूहिक रूप से आतंकवादी वारदातों का जवाब देना चाहिए।

गृह मंत्रालय ने कसा आईपीएस पर शिकंजा


गृह मंत्रालय ने कसा आईपीएस पर शिकंजा

संपत्ति का ब्योरा जमा करें 10 तक

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा देने से बच रहे भारतीय पुलिस सेवा के अफसरों को गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है। सूत्रों के मुताबिक, अफसरों से कहा गया है कि अगर उन्होंने 2010 का अपना ब्यौरा 10 अक्टूबर तक दाखिल नहीं किया, तो न केवल भविष्य में दूसरी जगह तैनाती के लिए उन्हें सतर्कता मंजूरी नहीं दी जाएगी, बल्कि उनके नाम भी सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

मंत्रालय ने अफसरों से यह भी कहा है कि अपने ब्यौरे में अपनी संपत्ति की स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दें। काम चलाऊ भाषा का इस्तेमाल न करें। मंत्रालय के परिपत्र के मुताबिक, जिन अफसरों ने 10 अक्टूबर तक 2010 के लए अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया, उनके नाम मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिए जाएंगे।

एमटीएनएल की आकर्षक योजना: 21 रू.में साठ मिनिट


एमटीएनएल की आकर्षक योजना: 21 रू.में साठ मिनिट

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली। मोबाइल फोन ग्राहकों को लुभाने के लिए सरकारी दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल अपने प्री-पेड ग्राहकों के लिए एक शानदार योजना लेकर आई है। दिल्ली-मुंबई के प्री-पेड ग्राहकों को एमटीएनएल सिर्फ 21 रुपये में 60 मिनट के एसटीडी कॉल करने की सुविधा दे रही है। एसटीडी के साथ ही कंपनी की तरफ से 11 रुपये में 60 मिनट के लोकल कॉल करने की भी सुविधा दी गई है। कंपनी के इन दोनों लुभावने वॉउचर के साथ सिर्फ एक दिन की ही समय सीमा दी जा रही है।