गुरुवार, 12 जनवरी 2012

खून जमाने वाली ठण्ड का कहर


खून जमाने वाली ठण्ड का कहर



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। हाड़ गलाने और खून को जमाने वाली ठण्ड से संभवतः पहली मर्तबा देशवासी रूबरू हो रहे हैं। आलम यह है कि चढ़ती दोपहर में भी लोग घरों में ही दुबके रहने को मजबूर हैं। देश के अनेक सूबों में तो शासन प्रशासन ने शालाओं के अवकाश घोषित कर दिए हैं, किन्तु मध्य प्रदेश में सुबह आठ नौ बजे ठिठुरन और गलन भरी सर्दी में दुधमुंहे बच्चे स्कूल जाने पर मजबूर हैं।
सर्द हवाओं के आगे धूप की एक न चली। पूरा उत्तार भारत बुधवार को भी कड़ाके की ठंड की चपेट में रहा। शिमला सहित हिमाचल में कई स्थानों पर फिर बर्फबारी हो गई। वादी कश्मीर में तो सर्दी का आलम यह है कि मगाम क्षेत्र की सखनाग दरिया जम गई है। अधिकांश क्षेत्र में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे गिरा रहा। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मौसम जस का तस तेवर अख्तियार किए रहेगा।
घाटी और वादी वाले कश्मीर में बुधवार को भी ठंड से लोगों को कोई राहत नहीं मिली। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में गिरावट से नदी-नाले जम गए हैं। मगाम के निकट सखनाग दरिया जहां बहती है, वहां बुधवार को बच्चे खेलते-मौज मस्ती करते नजर। नदी पूरी तरह जम गई है। डल झील और झेलम दरिया के ऊपर पर बर्फ की पतली परत कांच की तरह पसर गई है। दिनभर घाटी में बर्फीली हवाओं का राज रहा, बादल छाए रहे।
अगले 24 घंटों के दौरान मौसम शुष्क ही रहेगा। बर्फबारी और फिसलन के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने से जम्मू बस स्टैंड में फंसे पांच सौ यात्रियों को लगातार छठे दिन भी मुश्किलों से दो-चार होना पड़ा। यात्री दिन भर यहां-वहां घूम फिर कर समय व्यतीत करते रहे, जबकि बच्चों व महिलाओं ने बस स्टैंड होटल की छत पर बैठकर दिन गुजारा।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बुधवार दोपहर बाद मौसम ने फिर करवट लेते हुए मिजाज बदला और बर्फबारी शुरू हो गई। इससे प्रशासन द्वारा बमुश्किल खोले मार्ग फिर से बाधित हो गए। शिमला, कुफरी और नारकंडा में अचानक हुई तेज बर्फबारी से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। चंबा के खजियार, कालाटोप और डैणकुंड की पहाड़ियों पर बर्फ के फाहे गिरते देखे गए। मनाली में शाम होते ही ऊचे क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी का क्रम शुरू हो गया। कुल्लू, मंडी, हमीरपुर बिलासपुर व ऊना में लोगों ने दिनभर धूप का आनंद उठाया।
शिमला से साई ब्यूरो ने खबर दी है कि चांशल घाटी में भारी हिमपात के चलते अति दुर्गम क्षेत्र डोडरा क्वार का संपर्क एक सप्ताह से संपर्क कटा हुआ है। बनी हुई है पारे में गिरावट। उत्ताराखंड में बर्फबारी और बारिश से लोगों को निजात मिल गई है, लेकिन पारे में गिरावट अभी भी बनी हुई है। बुधवार को पूरे प्रदेश में आसमान साफ रहा, लेकिन ठंडी हवा चलने से लोग परेशान रहे। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि अब 15 जनवरी को बारिश और बर्फबारी होगी। वहीं, बर्फबारी और बारिश से बंद कई मार्ग अभी भी अवरुद्ध हैं।
मध्य प्रदेश से साई ब्यूरो नंद किशोर जाधव ने कहा कि  मौसम केंद्र भोपाल ने अगले छत्तीस घंटों के दौरान प्रदेश के रीवा, शहडोल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और चम्बल संभागों में कहीं-कहीं शीत-लहर चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। इन संभागों में कहीं-कहीं न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस या उससे कम रहने की चेतावनी दी गई है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान
प्रदेश में नौगॉंव में सबसे कम न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उधर, उमरिया में भी न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। जिले के धवईझर गॉंव में कड़ाके की ठंड से कई पशुओं की मौत होने की खबर है। राजधानी भोपाल में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है और यहॉं न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस से भी कम हो गया है। उधर, शिवपुरी में आज धूप निकलने से लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली।
वहीं महाकौशल अंचल में ठण्ड से बुरे हाल हो रहे हैं। रात का पारा नौ डिग्री से भी नीचे जा रहा है। तो दिन में थोड़ी धूप निकलने से राहत महससू की जा रही है। बालाघाट से साई ब्यूरो महेंद्र देशमुख ने खबर दी है कि वहां बैहर तहसील में ठण्ड सबसे ज्यादा सितम ढा रही है। साई ब्यूरो सिवनी से शिवेश नामदेव ने बताया कि यहां शाम ढलते ही बाजार सूने हो जाते हैं। लोगों ने प्रशासन से ठण्ड के चलते शालेय अवकाश देने की मांग की है।
देहरादून साई ब्यूरो अर्जुन कुमार ने बताया कि बर्फबारी के चलते पौड़ी जिले के एक सौ छत्तीस मतदान केंद्र पूरी तरह बर्फ से ढक गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी एमसी उप्रेती ने चुनावों में लगे अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई। उन्होंने बैठक में अधीक्षण अभियंता को बर्फ हटाने वाली मषीनों की जानकारी लेने के साथ ही जो मार्ग बर्फ से अवरुद्ध हो गए हैं।
उनको खुलवाने की व्यवस्था करने के निर्देष दिए। जिला निर्वाचन अधिकारी ने आषंका व्यक्त की है कि चुनावों के दौरान या चुनाव से पहले बर्फ गिरती है, तो जिले के तीन सौ से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान पार्टियों का पहंुचना मुष्किल हो जाएगा। उधर, चमोली जिले में इस समय एक सौ बावन मतदान केंद्र बर्फ से ढके हुए हैं, जिसमें बदरीनाथ विधानसभा के अंतर्गत बहत्तर मतदान केंद्र शामिल हैं।
इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी रंजीत सिन्हा ने बताया कि जिले में पूर्व से ही पैंसठ मतदान केंद्रों को हिमाच्छादित केंद्रों के रूप में चिन्हित किया गया था, लेकिन बीते तीन दिनों से हुई बर्फबरी के कारण अब एक सौ बावन मतदान केंद्र बर्फबारी की चपेट में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग को सूचित कर दिया गया है।
वहीं देहरादून साई ब्यूरो से दिशा कुमारी ने बताया कि शीत लहर के चलते उत्तरांचल उच्च न्यायालय में आज से शीतकालीन अवकाष घोषित कर दिया गया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल राम सिंह ने बताया कि शीतकालीन अवकाष के बाद इक्कीस फरवरी से उच्च न्यायालय में कामकाज शुरु हो जाएगा। शीतकालीन अवकाष के दौरान भी एक न्यायाधीष आवष्यक मामलों की सुनवाई करेंगे।
उधर, नैनीताल-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग गत दिन दिनों की बर्फबारी के कारण बन्द पड़ा था, जिसे प्रषासन द्वारा आज प्रातः खोल दिया गया है। इस मार्ग के बन्द होने से पर्यटकों को नैनीताल पहंुचने के लिए चार किलोमीटर पैदल चलकर यात्रा पूरी करनी पड़ रही थी। मार्ग खुल जाने से पर्यटकों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। पर्यटक नैनीताल में बर्फबारी का आनन्द ले रहे। पर्यटकों की भारी संख्या देखते हुए व्यावसायी भी खुष हैं।
शिमला से साई ब्यूरो स्वाति सिंह ने बताया कि  प्रदेश के अनेक भागों में बर्फबारी के कारण बाधित हुई यातायात व्यवस्था, विद्युत जल तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किए गए प्रबंधों की मुख्य सचिव राजवंत संधु ने शिमला में एक उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा की। बैठक में बताया कि चौपाल के लिए कल पावंटा साहिब होते हुए एक बस भेजी गई जबकि रामपुर तथा किन्नौर के लिए वाया धामी बसें भेजी जा रही हैं। कुल्लू जिले के पतलीकुहल तक सड़क पर यातायात बहाल कर दिया गया है। जबकि शाम तक मनाली तक यातायात बहाल कर दिया गया।
प्रदेश में बीते दिनों हुई बर्फबारी के बाद अभी भी जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है। विभिन्न क्षेत्रों मंे यातायात व संचार सुविधाएं अभी भी बाधित हैं। राजधानी शिमला के कई इलाकों मे अभी भी बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है। शिमला के उपरी इलाकों में अभी भी बस सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं और कुफरी, नारकण्डा, सराहन तथा सांगला शेष राज्य से कटे हैं।
वहीं कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल स्पीति जिले के अनेक क्षेत्रों का संपर्क भी देश के अन्य भागों से कटा हुआ है। हालांकि राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश भागों में आज दिन की शुरूआत खिली धूप से हुई है जिससे जनजीवन के सामान्य होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के मुताबिक आगामी 24 घंटों के दौरान राज्य में मौसम आमतौर पर साफ रहेगा।
जयपुर साई ब्यूरो से शैलेन्द्र ने खबर दी है कि पाकिस्तान से सटी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल का ऑपरेशन अलर्ट सर्द हवा बुधवार से शुरू हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार तेज ठण्ड और कोहरे के कारण सीमा पर संभावित तस्करी और घुसपैठ की गविविधियों को रोकने के लिए बल के जवानों को अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। 
प्रदेशभर में कड़ाके की सर्दी जारी है। कुछ स्थानों पर आज भी न्यूनतम तापमान जमाव बिन्दू से नीचे है। आज सबसे कम न्यूनतम तापमान सीकर के फतेहपुर में माइनस 1 दशमलव 6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। साई संवाददाता ने बताया  कि कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित हुआ है।माउण्ट आबू और चूरू में आज पारा जमाव बिन्दू पर रहा। सवाईमाधोपुर वनस्थली और पिलानी में दो, चित्तौड़गढ़ में तीन, राजधानी जयपुर, उदयपुर और बीकानेर में चार तथा फलौदी में पांच डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। बूंदी में भी स्कूलों में आज से दो दिन का अवकाश है। तेज ठंड के कारण अलवर के अजबगढ़ गांव में ड्यूटी के दौरान सहायक वनपाल की मौत हो गई।

प्रियंका हुईं चालीस की


प्रियंका हुईं चालीस की

(राजीव सक्सेना)

नई दिल्ली (साई)। मीडिया में इंदिरा गांधी की छवि सी दिखने वाली प्रियंका वढ़ेरा चालीस के पेटे में पहुंच गईं हैं। चुनाव के दौरान मीडिया मैनेजमेंट करने वाले कांग्रेस के प्रबंधकों द्वारा प्रियंका गांधी में स्व.इंदिरा गांधी की छवि उनकी साड़ी आदि को मुद्दा बनाकर प्रियंका में प्रियदर्शनी का अक्स उभारने की नाकाम कोशिश की जाती रही है।
हर समय कांग्रेसियों की उम्मीद और भरोसा बने रहने वाली प्रियंका गांधी गुरुवार को 40 साल की हो गईं। प्रियंका अपना जन्मदिन परिवार और बच्चों के साथ सादगी से मनाती हैं। प्रियंका हालांकि सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। मगर वे पिछले दो दशक से ज्यादा समय से चुनावों के दौरान अमेठी और रायबरेली में जाती रही हैं। इस बार भी वह इन दोनों जगहों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगी। प्रियंका का अगले हफ्ते अमेठी, रायबरेली जाने का कार्यक्रम है। इन दोनों क्षेत्रों से राहुल गांधी और सोनिया सांसद हैं।
प्रियंका जब भी अपने इन पारिवारिक संसदीय इलाकों में जाती हैं विपक्ष पर करारे तीर छोड़कर आती हैं। अपने बड़े भाई राहुल (42 वर्ष) के मुकाबले प्रियंका ज्यादा मुखर और हाजिरजवाब हैं। हालांकि इस बार यूपी चुनाव में राहुल भी अपने सौम्य रूप के विपरीत गुस्सैल युवा (एंग्री यंग लीडर) की छवि में दिख रहे हैं।

भाजपा के साथ नीता भी झूठ बोल रही है: इमरान


भाजपा के साथ नीता भी झूठ बोल रही है: इमरान



(वेद बघेल)

सिवनी (साई)। सिवनी विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया खुद को बेकसूर साबित करने के लिए एक सरकारी कार्यक्रम को निजी बताने जी जुर्रत करतीं हैं और उनके इस झूठ में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई से लेकर नगर इकाई तक उनका साथ दे रही है, जिसकी निंदा व्यापक स्तर पर की जाना जरूरी है। उक्ताशय की बात कहते हुए नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेन ने भाजपा से इस बात का खुलासा करने को कहा है कि अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिन पर स्थानीय मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित कार्यक्रम नीता पटेरिया का निजी था या फिर सरकारी तौर पर या पार्टी स्तर पर आयोजित किया गया था।
श्री पटेल ने कहा कि अगर श्रीमति नीता पटेरिया ने यह कार्यक्रम निजी बताया और भाजपा भी इस बात से इत्तेफाक रखती है तो यह जिला भाजपा के लिए शर्म की ही बात है, कि वह अपने आदर्श अटल बिहारी बाजपेयी को ही स्मृति से विस्मृत कर चुकी है। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा ने अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर इसके अलावा और कोई कार्यक्रम आयोजित ही नहीं किया।
इमरान पटेल ने आगे कहा कि सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया जब पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए लेते पकड़ी गईं तब इसकी सफाई में समाचार चेनल्स पर उन्होंने कहा था कि वह उनका निजी कार्यक्रम था और वहां कोई पुरोहित की व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे साफ है कि पूजा की थाली में रखे पैसों पर उनका ही हक बनता है। उन्होंने कहा कि भाजपा को चाहिए कि जनता के सामने इस बात का खुलासा अवश्य करे कि यह कार्यक्रम निजी था या सरकारी अथवा पार्टी का!
नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने अरोप लगाया कि जिला, नगर भाजपा के साथ ही साथ विधायक नीता पटेरिया भी झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रही हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमति नीता पटेरिया के लेटर हेड पर हस्त लिखित उनके हस्ताक्षरों से युक्त एक आवेदन अनुविभागीय अधिकारी सिवनी को 8 दिसंबर 2011 को दिया गया था जिसमें 25 दिसंबर 2011 को मिशन हायर सेकन्डरी स्कूल के मैदान को विधायक निधि से प्रदत्त टेंकरों के वितरण के लिए आरक्षित करने का आग्रह किया था।
इमरान पटेल ने कहा कि अनुविभागीय अधिकारी द्वारा आठ दिसंबर को ही इस पत्र को मूलतः प्राचार्य मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला को अग्रेषित कर उनका अभिमत मांगा था। जिस पर प्राचार्य द्वारा 25 दिसंबर 2011 को टेंकर वितरण हेतु स्कूल प्रांगण प्रयोग में लाने की अनुमति प्रदान करने की अनुशंसा के साथ पत्र को मूलतः अनुविभागीय अधिकारी सिवनी को वापस भेज दिया गया था।
इमरान पटेल ने भारतीय जनता पार्टी की जिला और नगर इकाई से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि सिवनी विधायिका और पूर्व सांसद श्रीमति नीता पटेरिया के किस कथन को सही माना जाए। क्या समाचार चेनल्स में दिए उनके साक्षात्कार जिसमें उन्होंने इस कार्यक्रम को निजी बताया उसे या हस्तलिखत उनके हस्ताक्षरों से युक्त अनुविभागीय अधिकारी को लिखे पत्र को जिसमें विधायक निधि से टेंकर बांटने का उल्लेख किया गया है। इमरान पटेल ने जिला भाजपा से पूछा है कि विधायक निधि क्या श्रीमति नीता पटेरिया की निजी निधि है जिस मद में खरीदे गए टेंकर के वितरण के कार्यक्रम को श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा निजी कार्यक्रम निरूपित किया जा रहा है। इमरान पटेल ने कहा कि इस घटनाक्रम से साफ हो जाता है कि भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा क्या है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की जिला और नगर इकाई के पास इस बात का कोई जवाब ही नहीं है।

कड़कड़ाती ठंड में नौनिहाल व पालक हो रहे परेशान


कड़कड़ाती ठंड में नौनिहाल व पालक हो रहे परेशान

शैक्षणिक संस्थाओं व प्रशासन का ध्यान आपेक्षित

सुबह होने वाली विद्युत कटौती भी बनी व्यवधान

(संतोष श्रीवास)

सिवनी (साई)। ठंड इन दिनों अपने पूरे यौवन पर है और न केवल बच्चों बल्कि नौजवानों और बुजुर्गों तक को हिलाकर रखे हुए है। लोग दिन के समय भी ठंड की मार से बचने के लिए अपने आपको गर्म कपड़ों में ढांके हुए हैं और दिन के समय सूर्य की तपन का सहारा लेने तथा सूर्य के ढलते ही घरों में अंगीठी जलाकर या फिर चौक-चौराहों में अलाव जैसी स्थिति बनाकर आग की तपन से ठंड का छुटकारा पाने की जुगत भिड़ाये हुए हैं।
उल्लेखनीय होगा कि विशेषकर सिवनी जिले में दिसम्बर और जनवरी माह कड़ाके की ठंड के होते हैं और इस दौरान न केवल लोगों को ठिठुराने और दांत कटकटाने वाली ठंड की अनुभूति होती है बल्कि कई बार तेज हवा, वर्षा और ओलावृष्टि के कारण घर से बाहर निकलने की स्थिति भी नहीं रहने देती। पिछले 03-04 दिनों में इस तरह का मौसम बना लेकिन वह ज्यादा गंभीर नहीं हो सका। उसके बाद जैसे ही मौसम खुला तो कड़ाके की ठंड ने अपना असर दिखा ही दिया।
इस मौसम के चलते जहॉं लोग विशेषकर सुबह के समय अपना बिस्तर छोड़ना भी उस समय तक पसंद नहीं करते जब तक कि सूर्य नारायण अपने पूरे तेज के साथ दिखाई न दे दें। इसके बाद भी सिवनी नगर में विपरीत मौसम के चलते अनेक शिक्षण संस्थाओं में विशेषकर 05 से 10 वर्ष तक के विद्यार्थियों की कक्षाओं को प्रातःकाल की पारी में लगाये जाने का सिलसिला जारी है जो न केवल उन नन्हे शिशुओं जो नर्सरी से लेकर कक्षा 05वीं तक विभिन्न शासकीय और अशासकीय शालाओं में अध्ययनरत हैं उन छात्र-छात्राओं की कक्षायें सुबह की पाली में लगायी जा रही हैं जो उनके साथ घोर अन्याय है। वैसे भी जन्म से लेकर 07 वर्ष की आयु तक बालक-बालिकाओं के लिए शैशवकाल और फिर 09 से 12 की आयु बाल्यकाल मानी जाती है। इस आयु में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा तो मिलना आवश्यक होता ही है किंतु न केवल माता-पिता बल्कि उन्हें शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं की भी यह नैतिक जिम्मेदारी हो जाती है कि वे उन्हें मौसम के अनुरूप शिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
आज देखने में यह आ रहा है कि चाहे वे शासकीय अथवा अशासकीय या पूरी तरह निजी शैक्षणिक संस्थायें हों कम से कम 10 वर्ष की आयु तक के बच्चों को जो शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध करायी जा रही है वह प्रातःकाल ही होती है जिसके लिए न केवल बच्चों को तड़के सबेरे बल्कि उनके माता-पिता को भी उठना पड़ता है। इस कड़ाके की ठंड में जबकि सुबह 06 बजे से विद्युत कटौती प्रारंभ हो जाती है उसके चलते बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना एक जटिल समस्या बनी हुई है। न तो विद्युत कटौती और न ही ठंड को रोका जा सकता है ऐसी स्थिति में अभिभावकगण किस परिस्थिति में अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते होंगे इसका अनुभव वीआईपी वर्ग को छोड़ केवल आम आदमी ही समझ सकता है।
चूंकि इन दिनों शीत घ्तु अपने पूरे यौवन और शबाब पर है तो शासन-प्रशासन और विशेषकर शैक्षणिक संस्थाओं के प्रमुखों की यह नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि वे मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते कम से कम नर्सरी से प्राथमिक स्तर की कक्षाओं तक के समयचक्र में परिवर्तन करायें और आवश्यकता पड़ने पर इस कड़ाके की ठंड भरे मौसम में उन्हें या तो अवकाश प्रदान करें या फिर उनकी कक्षाओं के समय में कुछ ऐसा परिवर्तन करें जिससे वे बच्चे ठंड की मार से बचकर अध्यापन में अपनी रूचि ले सकें और अभिभावक भी निश्ंिचतता का अनुभव कर सकें।
उल्लेखनीय होगा कि नगर में शासकीय शालाओं के अलावा नर्सरी से लेकर प्राथमिक, माध्यमिक और हाई व हायर सेकेंड्री तक की शैक्षणिक व्यवस्थायें निजी शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं और ऐसी संस्थायें अपने विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए स्वंय की या फिर विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा विशेष वाहनों की व्यवस्था स्कूल जाने और घर वापस आने के लिए की जाती है। विशेषकर प्रायवेट स्कूलों में जो विद्यार्थी अध्ययनरत हैं उनके घरों की विद्यालय से दूरी इतनी अधिक होती है कि ले जाने वाला वाहन कई बार उनके घर विद्यालय लगने के 30 से 45 मिनट पूर्व पहुँच जाता है। मतलब यह कि यदि शाला लगने का समय प्रातः 08 बजे है तो किसी विद्यार्थी के घर में वाहन 07 से 0715 के बीच ही पहुँच जाता है और वाहन में बैठने के लिए विद्यार्थी और उसके अभिभावक को इस समय के 01 घंटे पूर्व उठना इसलिए आवश्यक हो जाता है क्योंकि उस दौरान उसे मुंह धोने, चाय पीने और साथ में बच्चों के टिफिन ले जाने और स्कूल वाहन तक छोड़ने की भी व्यवस्था करनी होती है। इस पर भी कई बार यदि बच्चे का मूड बिगड़ जाने या फिर विद्युत अवरोध के कारण व्यवस्था करने में व्यवधान उत्पन्न होने पर चूक हो गयी तो स्कूल वाहन आगे बढ़ जाता है।
मौसम की इस स्थिति को देखते हुए न केवल प्रशासन बल्कि शैक्षणिक संस्थाओं से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे विशेषकर नर्सरी से प्राथमिक कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों को या तो इस कड़कड़ाती ठंड में शाला से अवकाश प्रदान करें या फिर उनकी कक्षायें प्रातः के स्थान पर मध्यान्ह समय में लगाये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

बचकर भी नहीं बचा के.के.


बचकर भी नहीं बचा के.के.

(नीलेश स्थापक)

लखनादौन (साई)। सिवनी जिले की लखनादौन पुलिस द्वारा आज बस स्टैंड में लोगों की मदद से जबलपुर की ओर जाने वाली एक स्कार्पियो वाहन को उस समय पकड़ा गया जब वाहन में सवार एक युवक खिड़की से अपना सिर बाहर निकालकर बचाओ-बचाओ की गुहार लगा रहा था।
आवाज सुनकर लोग यही समझ रहे थे कि हो सकता है वाहन में जो अन्य लोग बैठे हैं वे उसे अपहृत कर कहीं ले जाने वाले हैं इसलिए सभी ने सतर्कता बरत कर न केवल वाहन को रोका बल्कि युवक सहित उक्त वाहन को थाने पहुँचाया। थाने में जाकर जब पूछताछ की गयी तो पता चला कि अपने आप को बचाने की गुहार लगाने वाला एक ठग था जिसे वाहन में सवार अन्य लोग जबलपुर पुलिस के हवाले करने ले जा रहे थे।
पुलिस ने उक्त युवक के अपने कब्जे में होने की जानकारी आधारताल पुलिस को दी और उसके आने की प्रतीक्षा में जुट गयी।
उल्लेखनीय होगा कि कृष्णकुमार नामक एक युवक जो कि  जबलपुर के भेड़ाघाट थाना अंतर्गत रहने वाला है के द्वारा नरसिंहपुर के अनेकों युवकों से रेल्वे विभाग में नौकरी लगाने के नाम पर 03-03 लाख रूपये बटोर लिये गये थे लेकिन जितनों से भी उसने पैसा लिया था उनमें से किसी को भी वह नौकरी नहीं दिला सका था। पैसा देने वाले बेरोजगारों ने किसी तरह उसे पकड़ लिया और आज वे एक स्कार्पियो वाहन में उसे अपने साथ जबलपुर ले जा रहे हैं क्योंकि झांसा देकर कृष्ण कुमार के विरूद्ध वे लोग जबलपुर में इसकी रिपोर्ट दर्ज करा चुके हैं। आज कृष्णकुमार द्वारा इन बेरोजगारों के चंगुल से बचने के लिए लखनादौन बस स्टैंड में बचाओ-बचाओ की आवाज लगाकर अपने आप को बचाने की जो कोशिश की गयी वह उसके लिए दोहरी मुसीबत का कारण बनी जो पुलिस के हाथों चढ़ गया है जहॉं उसने अपना अपराध स्वीकारते हुए यह बताया कि उसके द्वारा वसूले गये पैसे उसने जिस व्यक्ति को दिया था वह भी उसे धोखा दे चुका है।

यूनिवर्सल में 13 से प्रायोगिक परीक्षा


यूनिवर्सल में 13 से प्रायोगिक परीक्षा

(विपिन सिंह राजपूत)

सिवनी (साई)। यूनिवर्सल कम्प्यूटर एकेडमी सिवनी के बीसीए, एमएससी के समस्त सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं की प्रायोगिक परीक्षा 13 से 15 जनवरी तक आयोजित है जिसका टाईम टेबिल कक्षा व विषयवार संस्थान के नोटिस बोर्ड में चस्पा कर दिया गया है।
यूनिवर्सल कम्प्यूटर संस्थान के डायरेक्टर श्री अभय निगम द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है छात्र निर्धारित समय पर प्रवेश पत्र के साथ अपनी उपस्थिति देवें।

डॉक्टर के साथ पुलिस कर्मी ने की अभद्रता


डॉक्टर के साथ पुलिस कर्मी ने की अभद्रता

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। जिला चिकित्सालय में आज आपातकालीन सेवा में तैनात डॉ. दीपक अग्निहोत्री के साथ एक पुलिस कर्मी जो उस समय यूनिफार्म में नहीं था के द्वारा न केवल अभद्रता की गयी बल्कि डॉ. की कालर तक पकड़ ली गयी जिसे लेकर कुछ समय के लिए अस्पताल में अफरा-तफरा और आक्रोश का माहौल भी निर्मित हो गया था।
घटना के तत्काल बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के आक्रोश के चलते डॉ। अग्निहोत्री द्वारा आज अपने साथ हुए घटनाक्रम की लिखित शिकायत सिविल सर्जन के माध्यम से प्रेषित कर दी गयी है।
आज घटित इस घटनाको लेकर जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों और अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों में व्यापक रोष्ज्ञ व्याप्त है। यद्यपि पूरा दिन बीत जाने के बाद भी सिवनी पुलिस द्वारा उक्त घटित घटना की जॉंच पड़ताल किये जाने या संबंधित आरोपी के विरूद्ध कोई कार्यवाही किये जाने का प्रमाण अब तक नहीं मिला है।

नसबंदी कार्य में लापरवाही, 03 कर्मचारी निलंबित


नसबंदी कार्य में लापरवाही, 03 कर्मचारी निलंबित

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। डॉ. जेएल मिश्रा संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें जबलपुर संभाग जबलपुर द्वारा 04 जनवरी को जिले की समीक्षा बैठक के दौरान नसबंदी कार्य में सेक्टर बरघाट एवं सेक्टर कुड़ारी विकासखंड धनौरा की सबसे कम उपलब्धि पायी गयी थी।
संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवायें जबलपुर संभाग द्वारा कार्य का सुपरवीजन ठीक ढंग से न करने पर तथा नसबंदी कार्य में लापरवाही बरतने, पदीय कर्तव्यों के निर्वहन न करने पर तीन सेक्टर सुपरवाईजर जिनमें आरएन बागेश्वर सेक्टर बरघाट, श्रीमती मीरा डोंगरे सेक्टर सुपरवाईजर बेहरई विकासखंड बरघाट तथा श्रीमती एस सोनवाने सुपरवाईजर सेक्टर कुड़ारी विकासखंड धनौरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में श्री बागेश्वर एवं श्रीमती मीरा डोंगरे का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोपालगंज एवं श्रीमती एस सोनवाने का मुख्यालय घंसौर किया गया है।

गुप्ता की सुनवाई टली


गुप्ता की सुनवाई टली

(अनेशा वर्मा)

चंडीगढ़ (साई)। सी बी आई की विषेष अदालत ने चण्डीगढ़ में पंजाब एवं हरियाणा उच्च नयायलय की पूर्व न्यायाधीष निर्मल यादव के खिलाफ उनके घर नकदी  भेजने सम्बन्धी मामलें कीं सुनवाई 4 फरवरी तक स्थगित कर दी है। सी बी आई ने अदालत में अनुपम गुप्ता की विषेष सरकारी वकील के तौर पर नियुक्ति को सही ठहराया और उनकी नियुक्ति के बारे विस्तार से जवाब दाखिल किया।
गौरतलब है कि पहले इस मामले में एक आरोपी हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल ने सी बी आई अदालत में याचिका दायर कर, पक्षपात के आधार पर विषेष सरकारी वकील श्री गुप्ता को हटाने की मॉग की थी। पिछली 15 दिसम्बर को, श्री गुप्ता ने अदालत से सी बी आई द्वारा उनकी नियुक्ति को मिली चुनौती का जवाब दाखिल करने के लिए समय मॉगा था। वे न्यायाधीष यादव, सी बी आई न्यायाधीष रितु टैगोर की अदालत में निजी तौर पर पेष हुईं हालॉकि पिछली सुनवाई के दौरान  उन्होने स्वास्थ्य के आधार पर अदालत मे पेष होने से स्थाई छूट देने की मॉग की थी।

मतदाताओं को जागरूक करने अभियान


मतदाताओं को जागरूक करने अभियान

(अर्जुन कुमार)

देहरादून (साई)। निर्वाचन आयोग के महानिदेषक अक्षय राउत ने मतदान के प्रति मतदाताओं को जागरुक करने के लिए जिला
निर्वाचन अधिकारियों को अधिकाधिक कार्यक्रमों के आयोजन को कहा है। दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से प्रदेष के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से वार्ता कर उन्होंने शत-प्रतिषत मतदान के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने आगामी पच्चीस जनवरी को मनाये जाने वाले राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों के सम्बन्ध में भी जानकारी ली और आवष्यक निर्देष व सुझाव दिये।
अल्मोड़ा के जिला निर्वाचन अधिकारी डीएस गर्ब्याल ने बताया कि मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने को सभी प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न विकास खण्डों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ  ही षिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालयों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्र व छात्राओं को संदेष दिया जा रहा है कि वे अपने अभिभावकों को मतदान की महत्ता बताते हुए उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करें। महानिदेषक द्वारा पेड न्यूज हेतु की गयी व्यवस्था के सम्बन्ध में पूछे गये प्रष्न के उत्तर में जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इसकी समीक्षा के लिए एक समिति निर्वाचन कार्यालय में कार्य कर रही है। वीडियो कान्फ्रेन्सिंग में देहरादून से मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी भी मौजूद थी।
उधर, राज्य विधानसभा की सत्तर सीटों के लिए आज प्रदेष में करीब डेढ़ सौ उम्मीदवारों ने विभिन्न विधानसभाई क्षेत्रों के लिए नामांकन पत्र जमा किए हैं। देहरादून स्थित साई ब्यूरो के अनुसार नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तारीख कल है। देहरादून में ताजा सूचना मिलने तक चालीस उम्मीदवारों के नामांकन की खबर है। इस बीच, नामांकन करने वालों के समर्थकों की भीड़ की वजह से विभिन्न जिला मुख्यालयों और तहसीलों पर स्थित निर्वाचन कार्यालयों के आस-पास यातायात प्रभावित रहा। हालांकि, प्रषासन की ओर से व्यापक बन्दोबस्त किए गए थे।
पौड़ी साई ब्यूरो ने बताया कि जिले की छह विधानसभाओं के लिए दस प्रत्याषियों ने नामांकन किया है, जबकि रुद्रप्रयाग जिले की केदारनाथ विधानसभा सीट से चार और रुद्रप्रयाग सीट से एक प्रत्याषी ने नामांकन किया है। अल्मोड़ा जिले की छह विधानसभा सीटों के लिए कुल दस नामांकन हुए। उधर, ऊधमसिंह नगर जिले में बत्तीस नामांकन हुए हैं, जबकि, बागेष्वर में छह उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है। इसके अलावा हरिद्वार में उनतालीस उम्मीदवारों ने नामांकन किया है।
रूद्रप्रयाग के साई ब्यूरो के अनुसार आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में रुद्रप्रयाग के जिला निर्वाचन अधिकारी चन्द्रेष कुमार ने भाजपा के प्रत्याषी मातबर सिंह कण्डारी के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देष दिए हैं। आरोप है कि श्री कण्डारी ने मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से एक लाभार्थी को लाभ पहंुचाने की स्वीकृति दी। दूसरी तरफ बसपा के प्रत्याषी रमेष चमोला द्वारा जनता को लुभावने भाषण पर भी जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस दिया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने राज्य में वाहन दुर्घटनाओं को देखते हुए इस प्रकार के हादसों पर काबू पाने के लिए परिवहन और पुलिस विभाग का संयुक्त चैकिंग अभियान चलाने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिये है। श्रीमती रतूड़ी समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उन्होने इस संबंध मे मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव परिवहन से भी अनुरोध किया है कि वे रात्रि में वाहनों के आवागमन हेतु समय निर्धारण जैसे आवश्यक उपाय करने  के निर्देश देने का आग्रह किया है, ताकि वाहन दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नेे बताया कि विगत दिन बारिश और हिमपात के कारण नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि नामांकन में पर्याप्त समय होने के कारण समस्त प्रत्याशियों ने अपना नामांकन कर लिया है। श्रीमती रतूड़ी ने बताया कि मतदाताओं को मतदान पर्चियां पहुंचाने का कार्य जोरों पर है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के मतदान सुनिश्चित करने के भी सभी आवश्यक इंतेजाम किए गए हैं।

2020 तक हो जाएगा बिजली उत्पादन आरंभ


2020 तक हो जाएगा बिजली उत्पादन आरंभ

(शैलेंद्र कुमार)

कोटा (साई)। प्रदेश में 2020 तक परमाणु उर्जा से 20 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। कोटा में रावतभाटा परमाणु बिजलीघर के परियोजना निदेशक ओ पी अरोड़ा ने बताया कि रावतभाटा में पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम की आपूर्ति होने से पूरी क्षमता से उत्पादन हो रहा है। ये यूरेनियम पिछले साल हुए परमाणु समझौते के बाद आयात हो रहा है। उन्होंने बताया कि देश में इस समय सभी परमाणु रिएक्टर स्वदेशी डिजाइन के हैं और इनसे प्रतिवर्ष करीब 32 हजार अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
परमाणु उर्जा निगम की ओर से कोटा में रेडिएशन और कैंसर विषय पर एक वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोेजन किया गया। इसे संबोधित करते हुए मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल के रेडिएशन विशेषज्ञ डॉ जे पी अग्रवाल ने बताया कि कैंसर का सबसे बड़ा कारण तम्बाकू है और रेडिएशन से केवल दो प्रतिशत कैंसर के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से परमाणु रिएक्टरों के आसपास के इलाकों में कैंसर के मामले दूसरे क्षेत्रों से काफी कम है।
उन्होंने कहा कि देश में आज कैंसर 30 से 70 साल के आयुवर्ग में होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है और इसका इलाज भी रेडिएशन तकनीक से ही ज्यादा सफलता से किया जा सकता है। संगोष्ठी में रावतभाटा परमाणु बिजलीघर के परियोजना निदेशक ओ पी अरोड़ा ने बताया कि कोटा मेडिकल कॉलेज का एक दल रावतभाटा क्षेत्र में रेडिएशन से होने वाली बीमारियों के अध्ययन के लिए विशेष सर्वेक्षण करवाएगा। उन्होंने कहा कि परमाणु उर्जा पूरी तरह सुरक्षित है।
केन्द्रीय अक्षय उर्जा मंत्री डॉ फारूख अब्दुल्ला ने कहा है कि आने वाले समय में राजस्थान देश के अन्य राज्यों को बिजली आपूर्ति करने वाला प्रदेश बनेगा। डॉ अब्दुल्ला आज जोधपुर जिले के रावरा और तिंवरी गांव में सोलर पावर प्लांट के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू सोलर मिशन का पहला चरण 2013 में पूरा होगा और इस अवधि तक 13 सौ मेगावाट सौर उर्जा पैदा करने का लक्ष्य है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान आने वाले समय में सौर उर्जा पैदा करने वाला देश मंे अव्वल राज्य होगा। आईआईटी राजस्थान सौर उर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। ग्रीन एंड क्लीन एनर्जी के मामले में राजस्थान देशभर में पहचान बनाएगा।डॉ अब्दुल्ला और श्री गहलोत ने आज ही तिंवरी 5-5 मेगावाट के एईएस सौलर पावर प्लांट और मोजेर-बीयर्स सौलर पावर प्लांट का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उर्जा मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह भी मौजूद थे।

जारवाओ का खण्‍डन


जारवाओ का खण्‍डन 

(साक्षी शाह)

पोर्ट ब्लेयर (साई)। इलैक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में जारवाओं को लेकर प्रसारित और प्रकाशित समाचारों का अंडमान निकोबार पुलिस प्रशासन ने खंडन किया है। पुलिस विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि टीवी चैनलों पर नृत्य करते हुए जारवाओं को दिखाना और एक खाकी वर्दी धारी को रिश्वत लेते दिखाना तथ्यों से परे है। क्योंकि रिश्वत लेते जिस व्यक्ति को दिखाया गया है वह पुलिस कर्मी नहीं है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरवाइवल इंटरनेश्नल नाम के स्वयं सेवी संगठन ने अधिक से अधिक अनुदान हासिल करने के उद्देश्य से इस मुद्दे को सनसनी खेज बनाकर पेश किया है। एक अन्य प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने कहा है कि लंदन के ऑबजर्वर समाचार पत्र ने तथ्य प्रकाशन से पहले अंडमान निकोबार पुलिस से पूछताछ नहीं की। खाकी वर्दीधारी प्राइवेट सुरक्षा गार्ड भी हो सकता है। इस बीच ऑबजर्वर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए अंडमान निकोबार पुलिस से क्षमा याचना की है।

खूब औषधिय गुण है सीताफ़ल में


हर्बल खजाना ----------------- 8

खूब औषधिय गुण है सीताफ़ल में



(डॉ दीपक आचार्य)
अहमदाबाद (साई)। जंगलों और हमारे आसपास के बाग बगीचों में सीताफ़ल के पेड प्रचुरता से देखे जा सकते हैं। सीताफ़ल का वानस्पतिक नाम अन्नोना स्क्वामोसा है। सीताफ़ल के फ़ल टोनिक की तरह काम करते है तथा इनमें बलगम या कफ़ को बाहर निकाल फ़ेकने का गुण होता है।
पातालकोट के आदिवासी कच्चे फ़ल को को फ़ोडकर सुखा लेते है और इसका चूर्ण तैयार करते है। इस चूर्ण को बेसन के साथ मिलाकर बच्चों को खिलाते है जिससे पेट के कीडघ् मर जाते है। डाँग- गुजरात के आदिवासी सीताफ़ल के बीजों को पीसकर नारियल के तेल में मिला लेते है और नहाने से पहले बालों पर लगाते है, इनका मानना है कि ऐसा करने से बालों में जूँ आदि मर जाते है।
वैसे आदिवासी महिलाएं बीजों के चूर्ण का उपयोग बालों की सफ़ाई में भी करती है। सीताफ़ल की पत्तियों का रस घाव पर लगाने से घाव जल्दी सूखने लगता है। मिर्गी आने की दशा में रोगी को ताजी तोडी हुयी पत्तियाँ सुँघाई जाए तो आराम मिलता है। अत्यधिक दस्त होने पर रोगी को पत्तियों का काढा पिलाया जाए तो आराम मिल जाता है। पातालकोट के भुमकाओं की मानी जाए तो जोडों के दर्द के लिये सीताफ़ल की पत्तियाँ बडी कारगर है।
लगभग ५०० ग्राम पत्तियों को २ लीटर पानी में अच्छी तरह से उबाला जाए और २० लीटर पानी में मिलाकर स्नान किया जाए तो धीरे धीरे जोड के दर्द से छुटकारा मिल जाता है। सीताफ़ल की पत्तियों को चबाने पर मधुमेह में भी काफ़ी फ़ायदा होता है। आदिवासी सीताफ़ल की पत्तियों का उपयोग कर कीटनाशक भी बनाते है।

(साई फीचर्स)

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बुधवार, 11 जनवरी 2012

गुमराह पंचायत या पंच!


गुमराह पंचायत या पंच!

(लिमटी खरे)

सादगी की प्रतिमूर्ति महात्मा गांधी ने आधी धोती पहनकर अपने अहिंसा के हथियार से उन ब्रितानियों के दांत खट्टे किए जिनके बारे में किंवदंती थी कि ब्रितानियों का सूरज कभी डूबता ही नहीं है। बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में महात्मा गांधी की कमी शिद्दत से महसूस की जाने लगी थी। तभी सत्तर के दशक में जयप्रकाश नामक लोकनायक का उदय हुआ। इसके उपरांत इक्कीसवीं सदी में अब अण्णा हजारे में लोग गांधी और जेपी की छवि देख रहे हैं। सांप बिच्छू के मानिंद हो चुकी नेतागिरी के बावजूद अण्णा ने अपने आंदोलन को जिस अहिंसक तरीके से अंजाम दिया वह निश्चित तौर पर सराहनीय कहा जा सकता है। गांधी के इस देश में जनता का जनादेश प्राप्त नुमाईंदे जनता के ही गाढ़े पसीने की कमाई में किस कदर आग लगा रहे हैं, उसे सिर्फ देश ही नहीं वरन् विदेशों में भी देखा जा रहा है।

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देश की सबसे बड़ी पंचायत के चलने में हर दिन का औसतन खर्च छः करोड़ 35 लाख रूपए बैठता है। इस पंचायत के पंच यानी सांसदों द्वारा जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के पैसों को पानी में बहा दिया जाना निःसंदेह निंदनीय ही माना जाएगा। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के अस्तित्व में आने के उपरांत जून 2004 से 2010 तक कुल 352 बैठकें ही संपन्न हो पाईं। देश के संविधान निर्माताओं ने जब संसदीय लोकतंत्र की परिकल्पना की होगी तब निश्चित रूप से उन्होंने एक खुशहाल भारत का सपना देखा होगा, लेकिन आज की संसद देखकर लगता है कि संसद का मकसद सिर्फ और सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही रह गया है। देखा जाए तो संसद बनती है सांसदों से, और अगर सांसदों का चरित्र और चेहरा बदल जाए तो उसका सीधा असर संसद की गरिमा और संसद के कार्यकलापों पर पड़ना स्वाभाविक ही है।
गणतंत्र की स्थापना के साथ ही जो लोग राजनीति में आए थे, वे आजादी के संघर्ष में तपे हुए थे। उनका उद्देश्य त्याग कर जनसेवा करने का था। कालांतर में इसका स्वरूप विकृत हुआ और यह लाभ कमाने का अच्छा जरिया बन गई। एक लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कम से कम दस से बीस करोड़ रूपयों की आवश्यक्ता होती है। यक्ष प्रश्न यह है कि इतना पैसा व्हाईट मनी के बतौर किसी के पास नहीं है, जाहिर है इसी के चलते चुनाव लड़ने वाले या तो आपराधिक चरित्र के लोगों से गलबहियां करते दिखते हैं या खुद इस चरित्र के लोग राजनीति में आ जाते हैं। अध्ययनों से साफ है कि देश में वर्तमान में 543 सांसदों वाली लोकसभा में करोड़पति सांसदों की तादाद 300 के उपर है।
संसद के मुख्य सात कमों में कार्यपालिका का नियंत्रण, कानून बनाना, वित्त का नियंत्रण, संवैधानिक काम, विमर्श आरंभ करना, न्यायिक कार्य और निर्वाचन संबंधी काम शामिल हैं। एक समय था जब संसद के सत्रों का पचास प्रतिशत से अधिक समय कानून बनाने में व्यतीत होता था। पिछले अनेक सालों में इसकी तादाद घटकर महज 15 प्रतिशत ही रह गई है। शून्य काल को काफी गंभीरता से लिया जाता था आरंभिक वर्षों में किन्तु कालांतर में शून्यकाल को तवज्जो देना ही बंद करने की प्रथा सी चल पड़ी है।
संसद के दोनों सदनों और संसदीय कार्य मंत्रालय का वर्ष 2010-11 के लिए कुल बजट अनुमानतः 535 करोड़ रुपये था। एक साल में संसद तीन बार यानी बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र के लिए बैठती है। पिछले पांच साल में हर साल संसद की औसतन 70 बैठकें हुई हैं। इस तरह एक सत्र की एक दिन की कार्यवाही पर 765 करोड़ रुपये का खर्च आता है। 2010 - 2011 के बजट, मानसून और शीतकालीन, तीनों सत्रों को मिलाकर वर्ष भर में कुल 80 बैठकें हुईं, जिनमें से व्यवधान और स्थगन के चलते 27 दिन कोई कामकाज नहीं हुआ। इस तरह लोकसभा ने 33 फ़ीसदी यानी करीब एक तिहाई समय बर्बाद कर दिया।
बाईस नवंबर को आरंभ हुए शीतकालीन सत्र भी लगभग ही हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। एक समय था जब बांग्लादेश इसके लिए मशहूर हुआ करता था जहां विपक्षी दलों के बरसों लंबे बायकाट के कारण संसदीय साख में भारी गिरावट आई। वर्तमान में संसद सत्र पर हर घंटे खर्च होने वाली 25 लाख रुपए की रकम प्रासंगिक नहीं रह गई है। वर्तमान में धरने, प्रदर्शन, बंद, हड़ताल, की तुलना में संसदीय हंगामा अपनी पसंद के मुद्दों की ओर ध्यान खींचने का आसान जरिया बन रहा है। जिसके फलस्वरूप संसदीय परंपराओं तथा गरिमाओं का क्षरण स्वाभाविक ही है।
संसदीय कायर्वाही के आंकड़े उत्साहजनक किसी भी दृष्टिकोण से नहीं कहे जा सकते हैं। सन 2009 में शुरू हुई पंद्रहवीं लोकसभा में 200 प्रस्तावित विधेयकों में से अब तक सिर्फ 57 विधेयक पारित हो सके हैं। इनमें भी 17 फीसदी विधेयक ऐसे थे जिन पर पांच मिनट से भी कम समय के लिए चर्चा हुई। ऐसी चर्चाओं की सार्थकता का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। इस बार के संसद के मौजूदा सत्र में 21 बैठकें होनी थीं, किन्तु नौ दिन इसमें व्यर्थ ही चले गए। इस बीच 31 विधेयकों के पारित होने और लोकपाल विधेयक समेत 23 बिलों को पेश किए जाने की बात अभी भविष्य के गर्भ में ही है।
विडम्बना है कि जनसेवकों ने संसद को कठपुतली के मानिंद नचाना आरंभ कर दिया है। एक समय जब राजग सरकार थी तब कांग्रेस का विपक्ष के बतौर यही बर्ताव हुआ करता था। कांग्रेस ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीस पर आरोप लगाकर संसद में लंबे समय तक इसी तरह गतिरोध पैदा किया था। आज पात्र बदल चुके हैं। आज फर्नाडीस के स्थान पर पलनिअप्पम चिदम्बरम हैं और कांग्रेस की जगह भाजपा।
पिछले दो दशकों में इस साल के आरंभ का बजट सत्र सबसे संक्षिप्त था। इस सत्र में अनुदान मांगों के लिए 81 फीसदी बजटीय मांगों पर चर्चा ही नहीं हो पाई। इसमें वित्त विधेयक सहित पांच विधेयक पारित ही नहीं हो सके। इसमें लेजिस्लेशन पर लोक सभा में कुल प्रोडक्टिव टाईम का महज 12 तो राज्य सभा में कुल समय का इससे आधा यानी छः फीसदी समय ही खर्च किया गया था।
जनता के जनादेश प्राप्त नुमाईंदे जनता की कितनी परवाह करते हैं इस बात का अंदाजा पिछले साल के शीत कालीन सत्र से ही लगाया जा सकता है। 2010 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में 23 दिनों में से महज सात घंटे 30 मिनिट ही काम हो पाया था। सांसदों ने 124 घंटे 30 मिनिट का समय बर्बाद कर दिया था। राज्य सभा का आलम भी यही रहा। उच्च सदन में 23 दिनों में से महज 2 घंटे 44 मिनिट ही काम हो पाया था, इसमें 130 से ज्यादा घंटे बर्बाद हुए थे। इस दौरान सरकार का डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ था। अमूमन एक सत्र में 15 से 20 विधेयक पारित कर लिए जाते हैं किन्तु इस सत्र में महज पांच विधेयक ही पारित किए जा सके थे।
पूर्व लोकसभाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सांसदों के इस हंगामाई व्यवहार से खासे व्यथित नजर आते थे। जब उनसे नहीं रहा गया तो 20 फरवरी 2009 को उन्होंने संसद में ही सांसदों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी। बकौल सोमदा -‘‘मैने कई बार अपील की है, किन्तु बहुत दुख है कि (सांसदों पर) कोई असर नहीं हुआ है। आप (सांसद) पब्लिक मनी का एक भी पैसा पाने के अधिकारी नहीं हैं। संसदीय लोकतंत्र में संसद देश का सर्वोच्च संसथान है, यह लोकतंत्र का प्रतीक है। यहां देश के कानून बनाए जाते हैं। यहां से देश का शासन चलता है। जब आपको काम करने का मौका मिलता है तब आप काम नहीं करते, इसका क्या फायदा! हलांकि बाद में उन्होंने अपने वक्तव्य पर खेद भी प्रकट किया था किन्तु उस वक्त तो उनका दुख सामने आ ही गया था।
देखा जाए तो इस साल का शीतकालीन सत्र इसलिए भी अधिक महात्वपूर्ण था क्योंकि इसमें देश और सरकार को हिला देने वाले अण्णा हजारे के द्वारा लोकपाल बिल पारित करवाने की बात कही गई थी। भाजपा भले ही अण्णा के साथ खड़ी नजर आए किन्तु जब बात लोकपाल बिल पारित करवाने की आती है तब वह संसद में हंगामा कर गतिरोध पैदा करती नजर आती है। भाजपा ने इतना हंगामा बरपाया पर महिला आरक्षण बिल को भी वह परवान चढ़वाने में सफल नहीं हो पाई।
यहां उल्लेखनीय है कि जार्ज पंचम ने आज से सौ साल पहले दिल्ली के एक छोर पर दरबार लगाया था. वह भी 11 दिसंबर ही था और अण्णा ने भी यही दिन चुना है। पिछले साल नवंबर दिसंबर में यही अन्ना हजारे यहां आये थे तो उनके इर्द गिर्द कुल जमा दो पांच सौ लोग थे। लेकिन आज साल भर बाद न केवल जंतर मंतर अन्ना हजारे के जलवे देख रहा है बल्कि राजनीति भी लुटियन्स जोन से निकलकर जंतर मंतर पर दस्तक दे रही है।
समय के साथ राजनेता कैसी पलटी मारते हैं इसकी मिसाल भी चंद माहों में ही देखने को मिली। इसी साल सितंबर में रामलीला मैदान पर अन्ना हजारे ने जब अनशन शुरू किया तो संसद में खड़े होकर शरद यादव ने अन्ना हजारे की ऐसी खबर ली थी कि राजनीति बनाम सिविल सोसायटी की जंग में वे राजनीति के हीरो नजर आये थे। लेकिन उन्हीं शरद यादव ने आज अन्ना के मंच से अन्ना हजारे को हीरो माना। बकौल शरद यादव भ्रष्टाचार की जो मुहिम चल पड़ी है आदरणीय अन्ना हजारे उसके नेता है। वैसे शरद यादव ऐसे नेता जरूर नजर आते हैं जो भाषण देने की कला में माहिर है। अटल बिहारी बाजनेयी के उपरांत एनडीए में ऐसा वाकपटु नेता दूसरा बचा नहीं है।
एक के बाद एक तारीख देने वाले अण्णा हजारे ने अब 22 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दे दिया है। अण्णा ने सरकार पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि अगर 22 दिसंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 27 दिसंबर से आंदोलन करेंगे। इस बार अण्णा के सुर में सोनिया और राहुल गांधी के लिए भी खासी तल्खी दिखी। राहुल के गरीब की झोपड़ी में रात गुजारने के प्रहसन पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कह ही डाला कि एक दिन झोपड़ी में रहकर कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता। वहीं सोनिया को बीमर कहकर उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
सरकार पर अण्ण बेहद आक्रोषित हैं। अण्ण का कहना है कि कांग्रेस अपने ही प्रधानमंत्री को कुछ नहीं समझ रही है। पीएम का पत्र ही कचरे के डब्बे के हवाले कर दिया जाता है। तीस सदस्यीय संसदीय समिति के 17 लोगों के विरोध में होने के बाद भी प्रतिवेदन संसद पहुंच जाता है, क्या यही लोकतंत्र है?
लोकपाल बिल लोक सभा में 04 अगस्त 2011 को पेश किया गया था और इसे संसद की स्थायी समिति को 8 अगस्त को भेजा गया था। इस बिल का उद्देश्य एक ऐसा कानून बनाना है जो सरकार में विभिन्न पदों पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार के बारे में जांच करेगा। इस कमेटी के सामने विचार के लिए दस हज़ार सुझाव आये। अन्ना हजारे की टीम ने भी समिति के सामने कई बार हाज़िर होकर अपनी बात रखी 23 सितम्बर 2011 के दिन पहली बैठक हुई और अंतिम बैठक 7 दिसंबर को हुई। इस बीच कमेटी के सामने कई न्यायविद, भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश, गैरसरकारी संगठनों के प्रतिनधि, टीम अन्ना के प्रतिनिधि, स्वयं अन्ना हजारे, धार्मिक संगठन, सीबीआई, सीवीसी आदि बहुत सारे लोग पेश हुए। रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद समिति के अध्यक्ष, अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से बात की और बताया कि सरकार के बहुत सारे सुझाव खारिज कर दिए गए हैं। जो ड्राफ्ट कमेटी के पास आया था उसको पूरी तरह से स्वीकार करने का कोई कारण नहीं था। करीब ढाई महीने की बैठकों के बाद जो सिफारिशें सरकार को दी गयी हैं उनमें टीम अन्ना समेत बहुत सारे लोगों के सुझाव हैं। किसी भी संगठन की बात को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया है।

(साई फीचर्स)

संसद में उपस्थिति में कमजोर हैं माननीय


संसद में उपस्थिति में कमजोर हैं माननीय



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। जनता सांसदों को चुनकर लोकसभा में इसलिए भेजती है ताकि सांसद उनकी बात संसद में रखें, उनके हितों के फैसले लेने में संसद का सहयोग करें। देशहित और जनहित के जुड़ी हर बात के लिए फैसला लेने में महत्वपूर्ण है संसद। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत मानी जाती है, इस पंचायत से पंचों (सांसदों) के गायब रहने का रिवाज सा बन गया है। सांसदों की अनुपस्थिति में संसद की बैठक स्थगित होना आम बात है इससे देश का कीमती वक्त और धन का अपव्यय ही होता है।
संसद में उपस्थिति के मामले में माननीय सांसदों की फेहरिस्त में अगर देखा जाए तो हंसोड़ सांसद नवजोत सिंह सिद्धू वर्ष 2009 - 2011 में 24 तो 2010 - 2001 में महज 24 फीसदी ही उपस्थित रहे। इसी तरह सुरेश कलमाड़ी 13/63, युवा सांसद जितेंद्र सिंह 46/63, मेनका गांधी 52/61, वरूण गांधी 37/59, सोनिया गांधी 24/53, राहुल गांधी 19/55, शरद यादव 52/69, लाल कृष्ण आड़वाणी 68/33, अशोक तंवर 57/72, अनंत कुमार 58/74, राजनाथ सिंह 57/67, मुरली मनोहर जोशी 64/75, कैलाश जोशी 57/69 एवं यशोधरा राजे सिंधिया ने 2011 में 43 तो 2010 में 79 फीसदी ही उपस्थित दर्ज कराई है। इस तरह कुल देखा जाए तो इन सालों में कुल औसत अधिकांश उपस्थिति 72/84 ही रही।

सामाजिक जिम्मेदारी का नहीं हो रहा निर्वहन


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  49

सामाजिक जिम्मेदारी का नहीं हो रहा निर्वहन

प्रशासन की आंाखों में धूल झोंक रहा झाबुआ पावर लिमिटेड



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका राजनैतिक क्षेत्र में इकबाल जमकर बुलंद है, के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की आदिवासी बहुल्य घंसौर तहसील में लगने वाले कोल आधारित पावर प्लांट में नियम कायदों को ताक पर सरेआम रखा जा रहा है और विकास के नाम पर मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और केंद्र में राज करने वाली कांग्रेस दोनों ही दल जानबूझकर आंखें बंद किए हुए हैं।
मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सामाजिक पहलू और सामाजिक जिम्मेदारी के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। आरोपित है कि इस संयंत्र के पहले चरण के कागजात में तो सामाजिक जिम्मेदारी और पहलू के बारे में उल्लेख किया गया था किन्तु जब दूसरे चरण की बारी आई तो इस मद में राशि का प्रावधान करने से मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड ने अपने हाथ ही खींच लिए।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पहले चरण में सामाजिक पहलू के बारे में मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड ने वादा किया था कि वह स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया करवाएगा। यह रोजगार देने का काम निर्माण और कार्यकारी दोनों ही अवस्थाओं में उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित था।
विडम्बना ही कही जाएगी कि निर्माण अवस्था में दो साल बीत जाने के बाद भी स्थानीय लोग आज भी मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के संयंत्र प्रबंधन का मुंह ताकने पर मजबूर हैं। 22 नवंबर 2011 को संयंत्र के पास ग्राम गोरखपुर में हुई लोक सुनवाई में भी अनेक ग्रामीणों ने संयंत्र प्रबंधन द्वारा निर्माण अवस्था में रोजगार नहीं दिए जाने की शिकायतों को पुरजोर तरीके से उठाया था, किन्तु जिला प्रशासन सिवनी और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर से आए आला अधिकारियों की उपस्थिति के बाद भी संयंत्र प्रबंधन ने उनकी बातों को दबा दिया गया। इन ग्रामीणों की आवाज नक्कारखाने में तूती की ही आवाज साबित हुई।
 कुल मिलाकर सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में पर्यावरण बिगड़े, प्रदूषण फैले, क्षेत्र झुलसे या आदिवासियों के साथ अन्याय हो इस बात से मध्य प्रदेश सरकार के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को कुछ लेना देना नहीं है। यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के।डी।देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

ममता से घबराए हैं मनमोहन


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 71

ममता से घबराए हैं मनमोहन

मध्यावधि की पक्षघर लग रहीं हैं ममता



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के निजाम मनमोहन सिंह और कांग्रेस दोनों ही के लिए ममता बनर्जी बुरी तरह से खतरा बनती जा रहीं हैं। ममता बनर्जी चाह रहीं है कि मध्यावधि चुनाव हो जाए, किन्तु कांग्रेस को मध्यावधि चुनाव में खतरा ही महसूस हो रहा है। ममता बनर्जी की धमकियों से अब मनमोहन सिंह की पेशानी पर कड़ाके की सर्दी में भी पसीने की बूंदे साफ दिखाई पड़ने लगी हैं। ममता ने अगर संप्रग का साथ छोड़ा तो ठीकरा मनमोहन सिंह पर फूटना तय माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि संप्रग सरकार की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को अलविदा कहने का मन पूरी तरह बना लिया है। सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस के आला नेताओं को साफ कह दिया है कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के परिणाम के बाद कांग्रेस को आत्मावलोकन करना चाहिए, कि वह कितने पानी में खड़ी हुई है।
उधर, ममता के करीबी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी को मशविरा दिया है कि त्रणमूल कांग्रेस के लिए केंद्रीय राजनीति में अपना ग्राफ बनाने के लिए यह समय मुफीद है। सूत्रों का कहना है कि अगर ममता बनर्जी दिल्ली में अपना किला मजबूत करना चाहती हैं तो उन्हें मध्यावधि चुनाव के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहिए और फिर चुनावी महासमर में उतरना उनके लिए श्रेष्यस्कर ही होगा। ममता बनर्जी को आम चुनावों के लिए निर्धारित 2014 तक रूकने के लिए मना कर दिया गया है। ममता चाहें तो कांग्रेस पर मध्यावधि चुनाव के लिए दबाव बनाना आरंभ कर दें।
ममता के करीबी सूत्रों का पश्चिम बंगाल पर एकछत्र राज करने के बाद अब ममता बनर्जी की महात्वाकांक्षाएं भी हिलोरे मारने लगी हैं। ममता अब मायावती की तरह ही केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर अपने हित साधने का प्रयास करना चाह रही हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि जिस तरह राजग सरकार में चंद्राबाबू नायडू ने बाहर से समर्थन दिया था, उसी तर्ज पर ममता बनर्जी भी अपने मंत्रियों को वापस लेकर सरकार से बाहर रहकर ही केंद्र में समर्थन दे सकती हैं।
त्रणमूल क्षत्रप ममता बनर्जी के इस तरह के बर्ताव ने कांग्रेस के आला नेताओं की घिघ्घी बांधकर रख दी है। कांग्रेस के रणनीतिकार अब इस जोड़तोड़ में लग गए हैं कि किस तरह ममता के इस नए तांडव से निपटा जाए। सबसे ज्यादा घबराए तो प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह लग रहे हैं, क्योंकि अगर स्थिति बिगड़ी तो इसका ठीकरा मनमोहन सिंह पर फूटना तय ही माना जा रहा है।

(क्रमशः जारी)