सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

रियाया पीएम नहीं दुल्हा बनाना चाहती हैं युवराज को


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

रियाया पीएम नहीं दुल्हा बनाना चाहती हैं युवराज को
उत्तर प्रदेश के अमेठी की जनता को इस बात की चिंता कम है कि उनके सांसद और कांग्रेस के कथित युवराज राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनें। अमेठी की रियाया इस बात को लेकर ज्यादा उत्सुक नजर आ रही है कि उनके युवराज कब दूल्हा बनकर घर बसाएंगे। अमेठी के हाल ही के दौरे में चंदन गारमेंट्स नामक दुकान के मालिक देवी प्रसाद से चर्चा के दौरान देवी प्रसाद ने राहुल से कहा कि अमेठी वासियों की इच्छा उनकी दुल्हन देखने की है। इस सवाल पर राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा कि जल्द ही एसा होगा। राहुल के इस बार के अमेठी दौरे के दरम्यान एक बात ही सामने आई, हर कोई राहुल को प्रधानमंत्री से ज्यादा घोड़ी चढ़ दुल्हा बनाने को आतुर नजर आ रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में ज्योतिषियों ने राहुल की शादी 48 साल के उपरंात ही होने का दावा किया था।

नाथ की शरण में शिंदे!
केंद्रीय गृहमंत्री को इस समय संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ तारण हार से कम नजर नहीं आ रहे हैं। जयपुर के कांग्रेस चिंतन शिविर में सोनिया और राहुल की नजरों में नंबर बढ़ाने की गरज से उन्होंने भगवा आतंकवाद के मसले को उछाला अवश्य पर अब वे विपक्ष विशेषकर भाजपा के निशाने पर हैं। झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज के सूत्रों का कहना है कि संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस मसले को गंभीरता से लिया है और भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोश और सुषमा स्वराज को तलब कर 21 फरवरी से आरंभ होने वाले लोकसभा सत्र में शिंदे को घेरने के हुक्म जारी कर दिए हैं। इसकी कमान सुषमा स्वराज को दी गई है। इस बारे में जब जानकारी शिंदे को मिली तो वे बुरी तरह भयाक्रांत नजर आ रहे हैं। अब फ्लोर मैनजमेंट में माहिर कमल नाथ पर ही जाकर उनकी नजरें आ टिकी हैं। देखना है कि कमल नाथ किस तरह विपक्ष की धार को बोथरा करते हैं।

मैया मो तो चंद्र खिलौना लेंहूं. . .
कांग्रेस के नेता देश चला रहे हैं या फिर बाल हट कर रहे हैं। हर मामले में कमोबेश कांग्रेस का यह रूख साफ दिखाई देता है कि कांग्रेस के मंत्री अपनी हठ के आगे किसी की नहीं सुनना पसंद करते हैं। कितने आश्चर्य की बात है कि दिसंबर में गैंगरेप पीड़िता को सिंगापुर भेजने के पक्ष में खुद स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद नहीं थे पर फिर भी गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उसे सिंगापुर भेज दिया। शिंदे का कहना था कि इस मामले में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ नरेश त्रेहन के साथ अनेक विशेषज्ञों से सलाह मशविरा हो चुका है अतः इस फैसले पर पुर्नविचार की आवश्यक्ता ही नहीं थी। कैबनेट की बैठक में एक मंत्री ने यहां तक कहा कि त्रेहन हार्ट स्पेशलिस्ट हैं पर शिंदे थे कि मैया मो तो चंद्र खिलौना लेंहूं का रट लगाकर पीडिता को सिंगापुर भेजने पर आमदा थे। पीडिता को सिंगापुर क्यों भेजा यह आज भी लोगों के लिए अबूझ पहेली ही है। विपक्ष भी इस मसले पर मौन ही है।

पुलक की संजीवनी पर सांसे ले रहे नायर!
पुलक चटर्जी के प्रधानमंत्री कार्यालय आते ही टी.के.नायर को किनारे लगा दिया गया था, पीएमओ में। लोगों को यहां तक कि पीएमओ कव्हर करने वाले मीडिया पर्सन्स को भी यह लगने लगा था कि टी.के.नायर अब काम के नहीं बचे हैं। जमीनी हकीकत इससे उलट ही है। नायर आज भी वहां ताकतवर बने हुए हैं। कहते हैं नायर ने सबसे पहले पुलक चटर्जी को साधा। पुलक चटर्जी की गुड बुक्स मेें आने के उपरांत नायर का रसूख फिर से पुराने जैसा हो गया है। कहते हैं नायर अब पुलक चटर्जी को इनपुट्स देने का काम बखूबी करने लगे हैं। इतना ही नहीं महत्वपूर्ण निर्णयों में भी नायर की महती भूमिका रहती है। पीएमओ के सूत्रों का दावा है कि टी.के.नायर पीएमओ में विदेश मामलो को छोड़कर हर मामले में अपनी राय देते हैं और उनकी राय को महत्व भी दिया जाता है।

रीढ़ तलाशते बिना रीढ़ के नेता!
कांग्रेस में राज्यसभा के रास्ते चुनावी बिसात में कूदने वाले नेता अब बरास्ता लोकसभा राजनीति करने का मन बना रहे हैं। 2014 में जो राज्यसभाई नेता चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं उनमें केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, जयंती नटराजन, अश्विनी कुमार, रहमान खान, जी.के.वासन, सुरेश पचौरी आदि प्रमुख बताए जा रहे हैं। एआईसीसी के सूत्रों का कहना है कि राजीव शुक्ला उत्तर प्रदेश से अपनी पसंदीदा सीट पर संभावनाएं तलाश रहे हैं। बरास्ता सतीश मिश्रा उनकी सीधी पहुंच मायावती तक है, इसलिए वे अपने खिलाफ बसपा के वाकोवर के प्रयास में लगे हैं। वहीं जयंती नटराजन तमिलनाडू के श्रीपेरंबदूर, जी.के.वासन मल्लादुराई या चेन्नई के दक्षिण इलाके से, रहमान खान कर्नाटक तो अश्विनी कुमार पंजाब से किस्मत आजमाना चाह रहे हैं। सुरेश पचौरी का मन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद से चुनाव लड़ने का बन रहा है।

संघ और भाजपा में खुदी खाई!
भारतीय जनता पार्टी और उसके पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बीच अब रिश्ते बहुत सामान्य नहीं प्रतीत हो रहे हैं। गौरतलब है कि जब अटल आड़वाणी की जोड़ी भाजपा में शीर्ष पर थी तब इन दोनों के रिश्तों की तल्खी पर संघ बारीक नजर रखा करता था। आज हालात एकदम बदल चुके हैं। गड़करी को दूसरा कार्याकाल देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा के आला नेताओं को बुलाकर सर जोड़कर बैठाने की जहमत नहीं उठाई है। लगता है संघ का शीर्ष नेतृत्व अब भाजपा के नंबर दो वाले नेताओं के कदमताल और कांग्रेस के प्रति नरम रवैए से नाखुश है। संघ मुख्यालय केशव कुंज के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी ने जनता का ध्यान देने के बजाए अब कांग्रेस के इशारों पर खुद का ज्यादा ध्यान रखना आरंभ कर दिया है। भाजपा भी अब कांग्रेस की ही तरह प्राईवेट लिमिटेड पार्टी के रूप में चलने लगी है।

बेटे को टाईम फ्रेम में बांधा नेताजी ने
नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव अपने मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव की कार्यप्रणाली से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। मुलायम के करीबी सूत्रों का कहना है कि नेताजी ने अपने पुत्र को सीधे सीधे अल्टीमेटम देकर दो माह में अपना चाल चलन (कार्यप्रणाली) में सुधार करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि खुफिया रिपोर्ट और सर्वे ने नेताजी की नींद उड़ा दी है, जिसमें अखिलेश यादव की कार्यप्रणाली के चलते राज्य में एक बार फिर बसपा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। मुसलमान भी समाजवादी पार्टी से दूरी बनाते जा रहे हैं। मुलायम सिंह को कार्यकर्ताओं ने भी आगाह किया है। अगर अखिलेश यादव ने अपना तौर तरीका नहीं बदला तो मजबूरी में मुलायम सिंह लोकसभा चुनाव तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते हैं, क्योंकि हालात अगर यही रहे तो लोकसभा में सपा को अपने पुराने 22 सीट को बरकरार रखना भी दुष्कर ही साबित होगा।

उत्तर प्रदेश से प्रफुल्ल का लेना देना!
राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं। उत्तर प्रदेश से उनका खास लेना देना नहीं है पर पिछले दिनों कैबनेट की बैठक में वे उत्तर प्रदेश के एक सार्वजनिक उपक्रम स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड के लिए बेल आउट पैकेज की मांग करते देखे गए। इसका पुरजोर विरोध किया वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम ने। फिर क्या था यंत्रचलित मुद्रा में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने इसमें दखल दिया और कहा कि इसे दो सौ करोड़ा का पैकेज दिया ही जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के दबाव में आकर प्रफुल्ल पटेल ने यह कदम उठाया है और चिदम्बरम को इसकी जानकारी नहीं थी, पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को भी साफ तौर पर निर्देश देकर इस पैकेज को जारी करने को कहा था इसीलिए अमूमन साईलेंट मोड में रहने वाले मनमोहन सिंह ने अपना मुंह इस मसले पर खोला था।

चिदम्बरम से परेशान हैं अश्विनी!
कानून मंत्री अश्विनी कुमार इस समय वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम से बुरी तरह नाराज बताए जा रहे हैं। इसका कारण चिदम्बरम का सीधा सीधा कानून मंत्रालय में दखल और वर्चस्व बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कानून मंत्री चाहे जो कर लें, पर अंतिम मुहर चिदम्बरम की ही लगती है। गैंगरेप के मामले में न्यायिक आयोग पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने अश्विनी कुमार से मुखातिब होकर उनका पक्ष जानना चाहा। छूटते ही अश्विनी कुमार ने मामला चिदम्बरम के पाले में डालते हुए कहा कि इनसे ही पूछ लीजिए कानून मंत्रालय के मामलों में अंतिम फैसला यही करते हैं। अश्विनी कुमार को चिदम्बरम द्वारा सुपरसीट करने पर उनकी पीड़ा पर प्रधानमंत्री ने अपनी चिरपरिचित मुस्कान फैंकते हुए चिदम्बरम की ओर देखा और अंत में चिदम्बरम के ही मश्विरे को अंतिम माना गया।

जयराम और विजय!
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश इन दिनों काफी परेशान चल रहे हैं। उनकी परेशानी का कारण विजय नाम होना है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का फिल्मों में पसंदीदा नाम रहा है विजय! और यही नाम अब जयराम रमेश के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। दरअसल, ग्रामीण विकास मंत्रालय में विजय नाम के अनेक अधिकारी हैं। विभाग में एस.विजय कुमार सचिव हैं, अतिरिक्त सचिव हैं विजय आनंद, अतिरिक्त सचिव हैं विजय श्रीवास्तव, तो टी.विजय नाम के दो अफसर हैं संयुक्त सचिव। बताते हैं कि एक विजय के खिलाफ गोपनीय शिकायत पर कार्यवाही के लिए जयराम रमेश ने एक रूक्का दूसरे विजय के पास भेजा। विजय विजय के हेर फेर में वह रूक्का उसी विजय के पास पहुंच गया जिसके खिलाफ वह शिकायत थी। मामला जब जयराम रमेश को पता चला तो उन्होंने अपना सर पीट लिया। अब वे अपने मंत्रालय में विजय एक विजय दो विजय तीन विजय चार जैसे नामकरण करने पर विचार कर रहे हैं।

 धरी रह गई सारी तैयारी!
भारतीय जनता पार्टी के निर्वतमान अध्यक्ष नितिन गड़करी अपने दूसरे कार्यकाल के प्रति इतने आश्वस्त थे कि वे इसके लिए सारी तैयारियां कर चुके थे। 11 अशोक रोड़ स्थित अपने कार्यालय और तीन मूर्ति लेन स्थित उनके आवास को उनके अनुरूप एक बार फिर सजाया गया था। भाजपा मुख्यालय में उनके कार्यालय का नवीनीकरण, कांफ्रेंस हाल का सौंदर्यीकरण, उनके आवास में रंग रोगन सुधार आदि का काम उनके मन मुताबिक हो गया था। इसका भोगमान किसने भोगा यह बात तो गड़करी ही जानते होंगे या इस काम की देख रेख करने वाला किन्तु लाखों रूपए पानी में ही बह गए हैं। इसका कारण यह है कि वर्तमान निजमा राजनाथ सिंह सीधी सादी सोच वाले हैं जबकि गड़करी तड़क भड़क शोशा पसंद करते थे। भाजपा के मुख्यालय में इस बारे में चर्चा गर्म है कि पता नहीं राजनाथ सिंह आगे गड़करी के सुसज्जित लकझक कार्यालय को ही अपनाएंगे या फिर अपने मुताबिक सादगी भरा नया कार्यालय तैयार करवाएंगे।

पुच्छल तारा
सोशल नेटवर्किंग वेब साईट फेसबुक पर तरह तरह के अपडेट आते रहते हैं। इन अपडेट्स के बारे में कुछ सच्चाई तो कुछ झूठी बातों का समावेश रहता है। पिछले दिनों हृदय प्रदेश में भगवान शिव की नगरी मानी जाने वाली सिवनी में कर्फ्यू लगा दिया गया। आश्चर्य इस बात पर हुआ कि मीडिया को ही घरों में कैद कर दिया गया। पता नहीं हालात किस कदर बेकाबू थे या होने को थे कि अखबारों का वितरण तक नहीं होने दिया गया। मीडिया को हालात का जायजा लेने नहीं जाने दिया गया। बाद में मीडिया को शाम पांच बजे तक ही पास दिए गए, सवाल यह है कि अगर सवा पांच बजे कहीं कोई घटना घटती तो मीडिया असहाय रहता। इस मामले में प्रशासन और मीडिया के बीच के सेतु जनसंपर्क के जिला प्रमुख अपने आप को प्रशासन के सामने असहाय बताकर अपनी जान बचा रहे थे। यह शिवराज सिंह चौहान के लिए वाकई शर्मनाक है कि उनके राज में एक जिले में मीडिया पर अघोषित सैंसरशिप लागू कर दी गई। मजे की बात यह है कि समाचार चेनल्स के संवाददाताओं पर घरों से फोन से समाचार भेजने पर प्रतिबंध नहीं था। देश दुनिया में सिवनी वालों के रिश्ते नातेदारों को सोशल मीडिया के सहारे ही खोज खबर लेने देने पर निर्भर रहना पड़ा।

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

सिवनी में कर्फयू जारी


सिवनी में कर्फयू जारी

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सिवनी से लगभग 33 किलोमीटर दूर छपारा की संजय कालोनी निवासी मानसिक रूप से विक्षिप्त तीस वर्षीय सदाराम डहेरिया के साथ दो युवकों द्वारा किए गए अमानवीय कृत्य के उपरांत छः फरवरी को जिला मुख्यालय में दो गुटों के बीच हुई झड़प के उपरांत उपजी परिस्थितियां कभी काबू तो कभी बेकाबू होती रहीं। सात फरवरी की रात अचानक एक र्धालय में हुई घटना के बाद तनाव इस कदर बढ़ गया कि जिला प्रशासन को एहतियातन कफर््यू लगाना पड़ा।
गुरूवार की रात सुभाष वार्ड महावीर टाकीज के पास स्थित चित्रगुप्त मंदिर के समीप एक अन्य मंदिर में कुछ मांस जैसा टुकड़ा पड़े मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते युवाओं की भीड़ वहां एकत्र हो गई। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव और नगर निरीक्षक हरीओम शर्मा द्वारा समझाईश देकर हालात को संभालने की कोशिश की गई, किन्तु युवाओं ने किसी की एक ना सुनी।
इसी बीच घटनास्थल पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी चंद्र शेखर शुक्ला भी मौके पर पहुंचे। बाद में जब युवाओं का आक्रोश बढ़ा तब युवाओं को वहां से हटाया गया। इसके उपरांत पुलिस वाहन पर लगे स्पीकर से कफर््यू की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद भी युवाओं का रोष नहीं थमा तब पुलिस को शुक्रवारी का इलाका खाली कराने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
रात में जगह जगह शादी के रिसेप्शन आयोजित थे, जिससे लोगों को आने जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही साथ स्थानीय समाचार पत्रों को इस बात की चिंता सता रही थी कि कफर््यू के चलते सुबह उनके समाचार पत्रों का वितरण कैसे होगा। इस संबंध में अनेक पत्रकारों द्वारा जनसंपर्क विभाग के जिला प्रमुख श्री सिरसाम से संपर्क स्थापित किया गया। उन्होंने इसका हल निकलवाने का आश्वासन दिया गया।
सुबह जब लोगों के घरों में समाचार पत्र नहीं पहुंचे तो लोग हलाकान हुए। बताते हैं कि लोगों ने अखबारों के कार्यालय और पत्रकारों से इस बारे में पतासाजी आरंभ की, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि शुक्रवार को सुबह का सूरज निकलने तक उन्हें प्रशासन द्वारा अखबार वितरण के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी।
इस संबंध में जब एक पत्रकार द्वारा जिला जनसंपर्क प्रमुख से दूरभाष पर चर्चा की गई तो उन्होंने अपने आप को असहाय ही बताते हुए कहा कि रात साढ़े बारह बजे तक उन्होंने जिला प्रशासन से पत्रकारों और हाकर्स को पास देने की बात कही थी किन्तु इस बारे में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।
दोपहर दो बजे तक पत्रकार इसी हालत में हाथ पर हाथ रखे घरों में कैद रहे। उधर, दूसरी ओर शुक्रवार को लोगों के घरों के नलों में पानी ना आने से लोग परेशान रहे। बताया जाता है कि नगर पालिका परिषद के जो कर्मचारी नलों की चाबी खोलते हैं उन्हें भी पास मुहैया नहीं हो पाए थे अतः आज लोग अपने घरों में बिना पानी अखबार आदि के बैठे रहे।
इस संबंध में जब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क किया गया तो कांग्रेस के नेताओं ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उनकी बात कोई सुन ही नहीं रहा है। युवा कांग्रेसी नेता राजकुमार खुराना ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के संज्ञान में बात लाई गई है। गौरतलब है कि सिवनी जिले के केवलारी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर भी इस मसले में मौन ही साधे रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस के प्रवक्ता जे.पी.एस.तिवारी भी कांग्रेस की एक बैठक में भाग लेकर लौटते समय पुलिस के लाठी चार्ज का शिकार हो गए।
उधर, भाजपा के नेताओं का कहना था कि इस बारे में वे हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक सिवनी में पत्रकारों को हालात का जायजा लेने के लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई। शुक्रवार को कफर््यू के चलते शिक्षण संस्थाएं, एवं अन्य कार्यालयों में कामकाज ठप्प रहा।

सीएम तीर्थ दर्शन योजना ही अब पड़ने लगी भारी


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 50

सीएम तीर्थ दर्शन योजना ही अब पड़ने लगी भारी

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। इसे अफसरों का भाजपा से प्रति घटता मोह कहें या फिर कुछ और कि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना ही अब भारतीय जनता पार्टी के लिए भारी पड़ने लगी है। भाजपा के खण्डवा इकाई के प्रवक्ता ने भी इसे भाजपा के खिलाफ साजिश ही निरूपित किया है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वरा चलाई जा रही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना खंडवा जिले में उस समय यात्रियों के लिए मुसीबत साबित हुई जब यात्रियों को करीब 16 घंटे रेल्वे स्टेशन पर ट्रेन का इन्तेजार करना पड़ा पूरी रात ठण्ड में करीब 750 तीर्थ यात्री रेल्वे स्टेशन पर परेशान होते रहे इस दौरान रात के अँधेरे में एक बुजुर्ग महिला तीर्थ यात्री भी फिसलने से घायल हो गई। रामेश्वरम के लिए रवाना होने वाली इस तीर्थ दर्शन यात्रा में खंडवा ,खरगोन बडवानी के बुजुर्ग यात्री शामिल थे।
खंडवा रेल्वे स्टेशन पर आज अलग ही नजारा था चारो तरफ अफरा -तफरी के बीच खचा खच भरे रेल्वे स्टेशन पर बुजर्ग यात्री करीब 16 घंटे से उस ट्रेन का इन्तेजार कर रहे थे जिसमे सवार होकर ये यात्री मध्य प्रदेश सरकार द्वरा चलाई जा रही तीर्थ दर्शन के तहत रामेश्वरम दर्शन जाने के लिए खंडवा जंक्सन पर इकट्ठा हुए थे बडवानी से आई तीर्थ यात्री रेखा शर्मा ने तेज़ न्यूज़ को बताया कि सर्दी के इस मौसम में इन बुजुर्ग यात्रियों ने रातभर ट्रेन का इन्तेजार किया, स्पेशल ट्रेन को भोपाल से खंडवा आने में करीब 5 घंटे लगते है लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ और ट्रेन करीब 16 घंटे देरी से खंडवा पहुंची।
तीर्थ यात्रियों के साथ लगा सरकारी अमला भी रातभर उनकी चौकीदारी और सेवा में परेशान होता रहा ट्रेन में खाने की व्यवस्था होने के कारण अधिकांश यात्री एक टाइम का खाना साथ लाये जो ट्रेन के इन्तेजार में ही ख़त्म हो गया था द्य तीर्थ यात्रा नोडल अधिकारी जी,एस बोथरा ने तेज़ न्यूज़ को बताया कि सरकारी अमले और सामाजिक संस्थाओ ने इन तीर्थ यात्रियों के खाने पीना की व्यवस्था की रेल्वे प्रशासन ने अधिकारियो को भी ट्रेन लेट होने की सही सुचना नहीं दी जिससे वह भी परेशान होते रहे।एक बुजुर्ग महिला तीर्थ यात्री को सिर में चोट लगने से यह परेशानी और बढ गई।
5 घंटे में भोपाल से खंडवा का सफ़र तय करने वाली स्पेशल ट्रेन 16 घंटे देरी से आई यह ट्रेन बुधवार रात में ही 11.15 पर भोपाल से निकल चुकी थी इस पुरे मामले में जब उप स्टेशन प्रबंधक अलोक चौरे से बात की गई तो उन्होंने इसकी सही जानकारी भोपाल से लेने कि बात कही। ट्रेन की इस लेटलतीफी पर भी राजनीति लोग अपने पक्ष में भुनाने से नहीं चुके जिला भाजपा प्रवक्ता सुनील जैन ने इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बढती लोकप्रियता को धूमिल करने के लिए कांग्रेस की सुनियोजित साजिश बताया।
ट्रेन की इस लेटलतीफी पर रेल्वे प्रबंधन की उन तमाम घोषणाओ की हकीकत सामने आ गई है जिसमे यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की बात कही जाती रही है इस मामले में भोपाल रेल मंडल और भारतीय रेल टूरिज्म कारपोरेशन के बीच समन्वय का अभाव साफ़ झलकता है।

श्रृमिक की मोत पावर प्रोजेक्ट का काम ठप्प!


श्रृमिक की मोत पावर प्रोजेक्ट का काम ठप्प!

(अभिषेक गीते)

खण्डवा (साई)। सिंगाजी ताप परियोजना में सोमवार को हुई एक श्रमिक की मौत के बाद एक बार फिर बुधवार परियोजना के निर्माण कार्य ठप्प हो गए। बुधवार सुबह निर्माण कंपनियों के अधिकारी कर्मचारी परियोजना स्थल तो पहुंचे किन्तु श्रमिको के नदारद रहने से वह निर्माण कार्य आरंभ नहीं करा सके। हालाकि परियोजना के मुख्य निर्माण स्थलों को छोड़ कर बाकी बाहरी कार्याे को अंजाम देने में कुछ निर्माण कम्पनिया पीछे नहीं हटी उन्होंने अपना काम मंगलवार भी जरी रखा।
प्लांट में हो रही इस तरह की दुर्घटनाओ से जहा निर्माण कार्य बाधित हो रहे है वही हुई घोषनाओ के मद्देनजर अब 2013 मे कैसे निर्माणाधीन दोनों यूनिटे बिजली का उत्पादन करने लगेगी यह एक बड़ा सवाल बन गया है। प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा इस प्रोजेक्ट के माध्यम से मध्य प्रदेश को उर्जा के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से परियोजना के निर्माण में व्यक्तिगत रूचि दिखा कर यहाँ का उच्चाधिकारियों सहित दो बार भ्रमण भी किया गया। मुख्यमंत्री इस परियोजना के अवलोकन के लिए पहली बार 17 अप्रेल 2011 में दोंगालिया पहुंचे थे। प्रारंभिक आकार ले रही इस परियोजना के निर्माण कार्याे का निरिक्षण करने के बाद उमीद के साथ उन्होंने यह घोषणा की थी कि परियोजना की प्रथम इकाई दिसम्बर 2012 तक बिजली उगलना प्रारंभ कर देगी। किन्तु उनकी यह उमीद निर्माण कार्याे में बार-बार आ रही अड़चनो के कारण पूरी नहीं हो पाई। इसी के साथ जनवरी 2013 से समूचे मध्यप्रदेश को 24 घंटे बिजली देने की घोषणा भी अमलीजामा नहीं पहन पाई। 17 अक्तूबर 2012 को फिर वे ताप परियोजना में निर्माण कार्याे की प्रगति का जायजा लेने निर्माण स्थल पहुंचे। अपने इस भ्रमण में उन्होंने निर्माण कार्याे के पिछड़ने को लेकर चिंता जताते हुए कड़े रुख के साथ मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियो को परियोजना की निर्माण गति बढाने के निर्देश दिए थे। साथ आये उर्जा सचिव ने तो कुछ निर्माण कंपनियों के अधिकारियो को हुई समीक्षा बैठक में लताड़ लगाते हुए चेतावनी भरे लहेजे में ताकीद दी थी की अगर मगर कुछ नहीं काम चाहिए.....
इस भ्रमण में प्रदेश के मुखिया बोल कर गए थे की 31 मार्च परियोजना से विद्युत उत्पादन प्रारंभ होने की अंतिम तिथि तय की गयी है। किन्तु जिस तरह से परियोजना के निर्माण विभिन्न कारणों से पिछड़ रहे है उसमे प्रथम यूनिट से बिजली बनना मार्च तक भी संभव नहीं दिखता। इसी प्लांट की दूसरी इकाई से बिजली उत्पादन का लक्ष 15 अगस्त 2013 रखा गया है। निर्माण कार्याे की गति कही से कही तक इन लक्षो के आसपास नहीं है। ऐसे में समूचे मध्य प्रदेश में को 1 अप्रेल से 24 घंटे बिजली देने की मंशा को पूरा करने में सिंगाजी ताप प्रोजेक्ट अपना कितना योगदान दे पायेगा इस पर सवालिया निशान खड़े हो गए है।
परियोजना निर्माण के प्रारंभ से ही मूंदी-खंडवा एवं मूंदी सनावद मार्ग की खस्ता हालत के साथ निर्माण स्थल तक का पहुँच मार्ग जीर्ण शीर्णता के साथ आवागमन को लेकर निर्माण कार्याे को प्रभावित करता रहा है। निर्माण स्थल पर पहुँचने वाली सामग्री एवं उसमे लगने वाले उपकरणो को नियत स्थल तक पहुँचाने में प्रारंभिक अवस्था में निर्माण कम्पनियों को भरी मशक्कत करना पड़ी। ऐसे में जहा निर्माण कार्याे की गति तो प्रभावित हुई ही, वही निर्माण कम्पनीयो को भारी आर्थिक हानिया भी उठाना पड़ी। परियोजना निर्माण प्रारंभ करने के पूर्व इन सब तैय्यारियो के प्रति लापरवाही या उदासीनता क्यों बरती गयी ये बड़ा प्रश्न है।अब परियोजना के निर्माण कार्य कर्मियों एवं श्रमिको के साथ हो रही बार बार की दुर्घटनाओ से प्रभावित हो रहे है। एसे में उनसे उपजने वाले हालातो को लेकर दूर द्रष्टि के साथ कोई स्थायी हल अब तक क्यों नहीं निकल गया। आये दिन ऐसी दुर्घटनाये जंहा निर्माण स्थल पर असंतोष को जन्म दे रही है ,वही निर्माण कार्याे के बार-बार बाधित होने से परियोजना की प्रगति भी बाधित हो रही है।
कर्मियों एवं श्रमिको के साथ हुई दुर्घटना एवं उससे उपजे असंतोष के साथ श्रमिको के भुगतानों एवं उनकी मांगो को लेकर अप्रिय स्थितियों का निर्माण हुआ। हालात इतने बेकाबू हुए की निर्माण कार्याे को प्रारंभ करवाने हेतु जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। निर्माण स्थल पर दुर्घटनाओ का सिलसिला 27 फ़रवरी 2011 से पुरनी बेक वाटर में डूबने से दो युवा इंजीनियरों काशिफ रजा एवं पी बी प्रसाद की दर्दनाक मौतों से प्रारंभ हुआ जो अब दुर्घटनाओ के रूप में आज तक जारी है। निर्माण स्थल पर 4 अक्टूबर 11 को श्रमिक कैलाश उर्फ़ गोलू की ग्रेडिंग मशीन से कुचले जाने के बाद म्रत्यु हो गयी थी। इसी तरह 25 मार्च 12 को राजदीप नाम के युवक की प्लांट के समीप ई प्वाईंट पर अज्ञात कारणों से मौत हो गयी , 03 जुलाई 12 को दो श्रमिक कश्मीर सिंह एवं मनीष प्रजापति की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हुई , 12 अगस्त 12 को श्रमिक एस कुमार बायलर कार्य करते 30 मीटर की ऊँचाई से गिरकर मौत का शिकार बन गया , इसके तुरंत बाद इसी माह की 26 तारीख को हेल्पर धर्मेन्द्र यादव की 17 मीटर ऊँचाई से गिर कर म्रत्यु हो गयी थी, तब परियोजना के निर्माण कार्य 5 दिनों तक बंद रहे थे। प्लांट के श्रमिको ने अब अपनी सुविधाओं को लेकर लामबंध होना भी प्रारंभ कर दिया था।
प्लांट में मौतों का सिलसिला इसी तरह जरी रहा 14 सितम्बर 12 को काम के दौरान लगी चोट से बिहार निवासी चन्द्रिका प्रसाद को मौत निगल गयी, 4 अक्तुबर 12 को ऊँचाई पर काम करते हुए तबियेत बिगड़ने से वीरेंद्र सिंह की मौत हो गयी , 1 दिसंबर 12 को परियोजना स्थल से निकलने वाली हाई टेंशन लाइन का कार्य करते हुए 18 मीटर की ऊँचाई से गिर कर हरिनारायण पिता बीरसाईं ने दम तोड़ दिया।
वर्ष 2013 की शुरुवात में ही 2 जनवरी को हेप्पीसिंह निवासी पंजाब की कार्य के दौरान 25 मीटर की ऊँचाई से गिरने पर मौत हो गयी थी। जनवरी माह में ही एक सुरक्षा गार्ड सुरेश पिता पुन की संदेहास्पद मौत के बाद समूचे क्षेत्र एवं निर्माण स्थल पर कार्य करने वालो के लिए देहला देने वाले गोलीकांड ने परियोजना निर्माण कार्य को एक सप्ताह पीछे धकेल दिया। घटना में परियोजना के ही एक सुरक्षाकर्मी द्वारा एक वाहन चालक नर्मदाप्रसाद पर गोली चला दी गयी जिससे उसकी मौत हो गयी। समूची घटना प्रदेश स्तर पर सुर्खियों में रहने के साथ निर्माण स्थल पर भी सबको भयभीत कर गयी।
उक्त समूची दुर्घटनाओ से परियोजना के निर्माण कार्य तक़रीबन 45 से 60 दिनों तक कार्य बंद होने से पिछड़ गए। ऐसे में अगर भविष्य में भी परियोजना के निर्माण कार्याे के लिए जवाबदेह निर्माण एजेंसी मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा प्रभावी कदम नहीं उठाये गए तो सिंगाजी ताप परियोजना से समय पर विद्युत उत्पादन का लक्ष्य आसान नहीं होगा। ऐसी परिस्थितियों में मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार अप्रेल से 24 घंटे बिजली देने में सिंगाजी ताप परियोजना अपना योगदान कैसे दे पाएगी ,यह सरकार के लिए अब चुनोती भरा हो गया है।

जाली मुद्रा, कानून में बदलाव ही हल: आरबीआई


जाली मुद्रा, कानून में बदलाव ही हल: आरबीआई

(पुरबाली हजारिका)

गुवहाटी (साई)। भारतीय रिजर्व बैंक ने जाली मुद्रा की समस्या से निपटने के लिए कानूनों में बदलाव की मांग की है। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने बताया कि उनका बैंक इस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून होने चाहिए कि जिनसे जाली मुद्रा छापने वाले लोगों को सजा मिले न कि उन निर्दाेष लोगों को जिनके पास ऐसी मुद्रा मिलती हैं।
श्री सुब्बाराव कल गुवाहाटी में रिजर्व बैंक बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने अपने शाखा प्रबंधकों से कहा है कि जाली नोट लेकर आने वाले लोगों के प्रति नरम रवैया अपनाए और उन परिस्थितियों की जांच करे कि ऐसे जाली नोट किसी व्यक्ति के पास कहां से आए। श्री सुब्बाराव ने ऐसे मामलों में एफ.आई.आर दर्ज करने की प्रक्रिया सरल बनाने पर भी जोर दिया।

कहीं सर्दी कहीं रहा मौसम सुहावना


कहीं सर्दी कहीं रहा मौसम सुहावना

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। देश भर में पश्चिमी विक्षोभ के कारण सर्दी और साधारण तापमान की स्थिति लगातार बनी हुई है। कहीं शीतलहर अपना असर दिखा रही है तो कहीं धूप खिली नजर आ रही है। कहीं बारिश से राहत है तो कहीं ठण्डी हवा का सुर्खा लोगों की परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
शिमला से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से रीता वर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में किन्नौर, लाहौल स्पीति और पांगी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रहे भारी हिमपात के बाद हिमस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। राज्य के जनजातीय तथा अन्य ऊपरी इलाकों में सड़क यातायात तथा बिजली पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त है। जनजातीय क्षेत्रों में सभी स्कूल सोमवार तक बंद कर दिए गए हैं। शिमला, कुल्लु और चंबा जिलों के ऊपरी इलाके राज्य के अन्य हिस्सों से कटे हुए हैं।
उधर, जम्मू से साई ब्यूरो से विनोद नेगी ने खबर दी है कि कश्मीर घाटी फिर से भीषण शीत लहर की चपेट में है और घाटी में रात का तापमान बहुत नीचे चला गया है। वहीं देश के विभिन्न अंचलों से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में धूप खिली रही।
लखनऊ से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से दीपांकर श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में धूप खिलने की वजह से लोगों को सर्दी से राहत मिली है। तीन दिनों तक प्रदेश के विभिन्न भागों में हुई लगातार बारिश से अब कुछ राहत मिली है। इलहाबाद साई ब्यूरो से निधि श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे रोचक बात ये रही कि इलाहाबाद वर्षा से बिलकुल अछूता रहा। वहां चल रहे कुंभ मेले में लाखों लोग खुले में कल्पवास कर रहे हैं। धूप खिलने के कारण दिन का तापमान भी बढ़ने लगा है। हालांकि ओलावृष्टि से कई जिलों में रबी की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
देश के हृदय प्रदेश से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से सोनल सूर्यवंशी ने बताया कि राज्य में कल अपेक्षाकृत मौसम सर्द रहा। आज दिन भर भी धूप में वह तल्खी नहीं दिखाई दी। दिन में बादलों का डेरा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रहा और हवा भी सर्द ही रही।

ईसी की शिकायत पर पुलिस प्रमुख हटे


ईसी की शिकायत पर पुलिस प्रमुख हटे

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। मेघालय में निर्वाचन आयोग ने मेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की शिकायत पर पुलिस प्रमुख कुलबीर कृष्ण को हटा दिया है। राज्य में इस महीने की २३ तारीख को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। श्री कृष्ण के स्थान पर भारतीय पुलिस सेवा के १९७७ बैच के अधिकारी प्रेम सिंह को पुलिस प्रमुख बनाया गया है।
सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने पुलिस महानिदेशक को बदलने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी एस सम्पत्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया। बैठक में चुनाव आयुक्त एच एस ब्रह्मा और नसीम जैदी भी उपस्थित थे। श्री बलबीर कृष्ण को महानिदेशक-जेल, बनाया गया है। उनके पास नागरिक सुरक्षा और होमगाड्घर््स का अतिरिक्त प्रभार भी होगा।
उधर, नगालैंड में विधानसभा चुनाव के लिए घर-घर जाकर प्रचार का काम जोर-शोर से चल रहा है। राजनीतिक दल तेईस फरवरी को होने वाले इन चुनावों के लिए मतदाताओं को अपने उम्मीदवारों के पक्ष में करने के लिए जनसभाएं और रैलियां कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कल दीमापुर और मोकोकचुंग में दो रैलियों के साथ अपनी पार्टी का चुनाव प्रचार औपचारिक रूप से शुरू किया। सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए दावा किया है कि कांग्रेस के स्टार चुनाव प्रचारकों से चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राज्य के समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और यूएनडीपी ने भी ने भी चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। इस बीच सभी २३२ नामांकन पत्र सही पाए गए हैं। उम्मीदवार शनिवार तक अपने नाम वापिस ले सकते हैं।
वही त्रिपुरा से साई न्यूज ब्यूरो ने बताया कि त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मतदान में अब केवल पांच दिन शेष रह गए हैं। हमारे संवाददाता ने बताया है कि प्रचार बारह तारीख की शाम को बन्द हो जाएगा। चौदह तारीख को वोट पड़ेंगे।
राज्य में सभी दल मतदान से पहले मतदाताओं को रिझाने में पूरे जोर-शोर से जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, त्रिपुरा के मुख्य चुनाव अधिकारी आशुतोष जिंदल ने बताया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ड्यूटी पर मौजूद किसी भी मतदान कर्मी, अधिकारी या सुरक्षाबलों के साथ कोई दुर्घटना होने पर उन्हें एकमुश्त अनुदान दिया जायेगा।
श्री जिंदल ने कहा कि स्वाभाविक मौत होने पर मृतक के परिवार को पांच लाख रूपये और उग्रवादी घटना में मौत होने पर परिवार को दस लाख रूपये दिये जायेंगे। इसी तरह सामान्य दुर्घटना में अपाहिज होने पर पीड़ित को ढाई लाख रूपये और उग्रवादी घटना में ऐसा होने पर पांच लाख रूपये दिये जायेंगे। त्रिपुरा में मतदान ड्यूटी पर मौजूद करीब ५० हजार कर्मचारियों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है।

उद्योगपतियों की हिमायती है सरकार: सीएजी


उद्योगपतियों की हिमायती है सरकार: सीएजी

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। अनेक नीतिगत मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर देने वाले सीएजी विनोद राय ने इस बार सरकार के कामकाज के तरीके पर ही सवाल उठा दिया है। उन्होंने देश में नहीं, एक इंटरनैशनल मंच से सरकार पर हमला बोला है। विनोद राय ने कहा कि सरकार करप्शन को खत्म नहीं कर पा रही है। वह उद्योगों को नहीं, उद्योगपतियों को मदद कर रही है।
प्रतिष्ठित हार्वर्ड केनेडी स्कूल में आयोजित एक सेमीनार में गुरुवार को सीएजी ने कहा कि सरकार सीएजी को ऑडिट करने वाले अकाउंटेंट से ज्यादा नहीं समझती, लेकिन सीएजी नौकरशाहों, नेता और पूंजीपतियों के बीच सांठगांठ का पर्दाफाश करता रहेगा। विनोद राय ने कहा कि सरकार को उद्योगों को समर्थन करने वाली नीतियां बनानी चाहिए, ना कि किसी खास पूंजीपति के समर्थन के लिए नीतियां बने।
वहीं दूसरी और कांग्रेस ने कैग के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा, कि कैग का काम ऑडिट करना है। कैग पॉलिसी बनाने लगेगा तो हम लोग क्या करेंगे? क्या वह पीएम बनना चाहते है? दिग्विजय ने कहा कि विनोद राय जी को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। कैग अगर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो चुनाव लड़े और नीतियां बनाएं। कांग्रेस प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने भी कैग की सीमा में रहकर काम करने की सलाह दी।
राय ने कहा कि हम (कैग) करप्शन को तो पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकते, लेकिन अफसरों-उद्योगपतियों के गठजोड़ को उजागर करते रहेंगे। 2जी और कोयला घोटाला संबंधी अपनी रिपोर्ट को लेकर सरकार के निशाने पर रहे विनोद राय ने कहा कि सीएजी की भूमिका सिर्फ संसद के सामने रिपोर्ट पेश करने तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। हमें उससे आगे जाकर अपनी रिपोर्ट की मदद से जनता को जागरूक करने का काम भी करना है।
अधिकार क्षेत्र उल्लंघन करने संबंधी आरोपों की चर्चा करते हुए सीएजी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र परिपक्व हो रहा है। शहरी मध्यम वर्ग जनसमस्याओं को लेकर अब तेजी से गोलबंद होने लगा है। ऐसी स्थिति में हम नई राह पर यह सोच कर चल रहे हैं कि जनता का हित सबसे पहले है और हमें जनहित में काम करना है।

गूगल ने दी जगजीत सिंह की जयन्ती पर श्रद्धांजलि

गूगल ने दी जगजीत सिंह की जयन्ती पर श्रद्धांजलि

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। इंटरनेट की दुनिया के जबर्दस्त हिट सर्च इंजन गुगल द्वारा आज गजल गायक जगजीत सिंह के 72 वे जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें अपने ‘लोगो’ में शामिल किया। गूगल ‘लोगो’ में कुरता-पैजामा पहने हुए सिंह हारमोनिया ले कर बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
वर्ष 2011 में मस्तिष्क में रक्तस्राव होने के कारण इस दिग्गज गायक का निधन हो गया था। गूगल खोज रुझान के मुताबिक, इस पीढी के लोकप्रिय पंसदीदा गायकों की सूची में भी दिवंगत गायक सिंह अव्वल हैं।
भारत के लुधियाना, भोपाल और इंदौर में सिंह से जुडे सवालों के बारे में अधिकांश जानकारी प्राप्त की गयी। भारत के ‘ऑनलाइन’ लोकप्रियता के मामले में पंकज उधास दूसरे स्थान पर रहे जबकि दुनिया भर में गुलाम अली का नाम रहा।
विश्व के लिहाज से भारतीय महाद्वीप में जगजीत सिंह को सबसे ज्यादा गूगल पर तलाश किया गया उसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात में ढूंढा गया। विश्व भर में सबसे अधिक तलाश किये जाने वाले गजल गायकों मे जगजीत सिंह, गुलाम अली, मेंहदी हसन, पंकज उधास और तलत अजीज शामिल हैं।

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

मीडिया को लेकर मनमोहन चौकस!


मीडिया को लेकर मनमोहन चौकस!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मीडिया को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय अब पूरी तरह चौकस नजर आ रहा है। देश के नाम संबोधन के दौरान जय हिन्द के स्थान पर ठीक है से पीएम डॉ.मनमोहन सिंह का वक्तव्य समाप्त होने से पीएमओ में खलबली मची हुई है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के पक्ष में मीडिया के माध्यम से माहौल बनाने को लेकर भी पीएमओ चिंतित नजर आ रहा है। पीएमओ अब मीडिया पर बारीक नजर रख रहा है, पर इस सबमें पीएम के मीडिया एडवाईजर पंकज पचौरी की भूमिका नगण्य ही बताई जा रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि गैंग रेप के बाद उपजे तनाव को कम करने की गरज से प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन जारी हुआ और अमूमन प्रधानमंत्री का भाषण या संबोधन जय हिन्द से समाप्त होता रहा है पर इस बार जयहिन्द के उपरांत ठीक है का प्रसारण प्रधानमंत्री सहित कांग्रेस के आला नेताओं को कतई नहीं भाया है।
पीएमओ के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि पीएम ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। इस मामले में पीएम के मीडिया एडवाईजर पंकज पचौरी की नौकरी पर बन आई है। वहीं दूसरी ओर पंकज पचौरी के कक्ष से छन छन कर बाहर आ रही खबरों के अनुसार पचौरी को इस संबोधन के बारे में पता ही नहीं था कि पीएम के द्वारा एसा कोई वक्तव्य दिया जाने वाला है। पीएम का उद्बोधन दूरदर्शन के बजाए समाचार एजेंसी द्वारा जारी किया गया जिसे जल्दबाजी में एडिट ही नहीं किया जा सका।
वहीं दूसरी ओर पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि पीएम के निर्देश पर इंटेलिजेंस ब्यूरो अब लगभग एक दर्जन पत्रकारों पर बारीक नजर रखे हुए है। इन पत्रकारों में उनका शुमार है जो पाकिस्तानी दूतावास के निरंतर संपर्क में रहते हैं।
सूत्रों की मानें तो आईबी को निर्देश दिया गया है कि इन पत्रकारों पर विशेष नजर रखी जाए, क्योंकि इन पत्रकारों की दिलचस्पी पाकिस्तान का पक्ष दिखाने में ज्यादा हुआ करती है। भारत पाक के तलवार की धार पर चल रहे रिश्तों में इन पत्रकारों द्वारा अगर अपनी रिपोर्टिंग, कालम, या टाक शो आदि में पाकिस्तान का पक्ष मंझे रूप में रखा जाता है तो भारत को इंटरनेशनल लेबल पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी दूतावास द्वारा खबरें आदि के लिए पहले तो इंटरनेट और ईमेल को जरिया बनाया गया था पर बाद में मेल के मानिटर होने की खबरोें के बाद अब कोरियर या डाक के माध्यम से इन पत्रकारों से संपर्क किया जा रहा है। आरोप है कि पाकिस्तान के हुक्मरान अपना पक्ष, दृष्टिकोण, सलाह मशविरा आदि इन पत्रकारों के माध्मय से प्रसारित प्रचारित करवाने की कोशिश में है।
वहीं, पीएमाओ सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स जिसे अब सोशल मीडिया का अघोषित दर्जा मिल गया है, से बुरी तरह परेशान नजर आ रहा है। सोशल मीडिया के निशाने पर मनमोहन सिंह और कांग्रेस के आने से भी मनमोहन सिंह और कांग्रेस की भद्द बुरी तरह पिट रही है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह को दो टूक शब्दों में सोशल मीडिया से निपटने की रणनीति बनाने की हिदायत भी दी है।

तमिलनाडू में राष्ट्रभाषा बैन!


तमिलनाडू में राष्ट्रभाषा बैन!

(प्रीति सक्सेना)

चैन्नई (साई)। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और यही भारत को एक सूत्र में पिरो सकती है। यह बात राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने कही थी, पर देश के एक राज्य तमिलनाडू में राष्ट्रभाषा को लेकर एक बार फिर तूफान खड़ा होने लगा है। 60 के दशक में हिंदी विरोधी आंदोलन के गवाह बने तमिलनाडु में एकबार फिर हिंदी को लेकर विरोध शुरू हो गया है। इसके चलते मदुरै जिला प्रशासन को तमिल और अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में साइनबोर्ड लगाने का फैसला वापस लेना पड़ा है।
मदुरई के साई संवाददाता ने जिला कलेक्टोरेट कार्यालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि मंदिरों के शहर कहे जाने वाले मदुरै में आने वाले पर्यटकों की सहूलियत के लिए तमिल और अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में साइनबोर्ड लगाए गए थे। लेकिन स्थानीय लोगों की इच्छा को देखते हुए इन्हें हटा लिया गया है। हिंदी में साइनबोर्ड लगाने के खिलाफ कई स्थानीय संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया था।

सरकारी कर्मचारी मोड रहे भाजपा से मुंह


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------49

सरकारी कर्मचारी मोड रहे भाजपा से मुंह

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोगी अफसरों ने एक के बाद एक एसे कदम उठाने आरंभ कर दिए हैं कि लगने लगा है मानो सरकारी कर्मचारियों ने मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी की बिदाई का ताना बाना बुनना आरंभ कर दिया हो। एक तरफ सरकारी कर्मचारियों को निजी प्रोग्राम्स का आथित्य स्वीकारने से रोका गया है तो वहीं दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान की ही नागरिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी सरकारी कार्यक्रमों के अलावा किसी निजी संस्था, संगठन (एनजीओ) या व्यक्तियों द्वारा आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि अथवा अतिथि के बतौर शामिल नहीं होंगे। इन निर्देशों की अवहेलना करने वाले संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्व कडी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। शासन ने इस बात को संज्ञान में लिया है कि इस संबंध में समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभाग, अध्यक्ष राजस्व मंडल, ग्वालियर, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर्स तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत को भेजे परिपत्र में इन निर्देशों का कडाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। सभी अधीनस्थ कार्यालयों में भी उक्त निर्देशों के अनुपालन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिये कहा गया है।
इसी तरह समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सीहोर ब्यूरो ने बताया कि एसडीएम बुधनी के एक कागज ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की नागरिका पर ही बवाल मचवा डाला। एसडीएम बुधनी ने अपने एक दस्तावेज में बताया है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान जैत जिला सीहोर के निवासी नहीं है। सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि वो जैत के निवासी नहीं है तो कहां के नागरिक हैं।
यह सवाल एसडीएम बुधनी द्वारा युवक कांग्रेस को दिए एक जवाब से उठा है। युवक कांग्रेस ने पिछले दिनों सीएम के गांव जैत में उपवास आयोजन की अनुमति मांगी थी, जिसके जवाब में एसडीएम बुधनी ने लिखा कि चूंकि सीएम शिवराज सिंह चौहान जैत के निवासी नहीं हैं, अतरू यहां पर आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
युवक कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि सीएम जैत जिला सीहोर के निवासी नहीं हैं तो फिर कहां के निवासी हैं। इस मामले में जब बवंडर उठा और मीडिया ने कलेक्टर सीहोर से सवाल किया तो उन्होंने बताया कि यह केवल एक टाइपिंग मिस्टेक है। गलती से यह लिख दिया गया है।
अब सवाल यह उठता है कि यदि सीएम के निवास स्थान को लेकर ही गलतियां होने लगें तो फिर आम आदमी का मध्यप्रदेश में क्या हो रहा होगा। फिलहाल बवाल मच रहा है परंतु प्रशासन ने इस दिशा में जिम्मेदार अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

रेल बजट में फिर बढ़ेगा किराया!


रेल बजट में फिर बढ़ेगा किराया!

(पियूष भार्गव)

नई दिल्ली (साई)। 26 फरवरी को रेल बजट पेश किया जायेगा। परेशानी वाली बात यह है कि रेलमंत्री एक बार फिर रेल किराया बढ़ाने के मूड में हैं। सूत्रों की मानें तो रेल विभाग की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर मंत्री किराये में बढ़ोत्तरी करने वाले हैं। चौतरफा महंगाई की मार झेल रही जनता को सरकार फिलहाल राहत देने के मूड में नहीं दिख रही है।
सरकार ने अभी हाल ही में रेल किराये में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसकी मार से रेलयात्री अभी संभल भी नहीं पाए थे कि एक बार फिर सरकार रेल किराये में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। सूत्रों पर भरोसा करें तो रेल मंत्री पवन बंसल इस बार रेल बजट में यात्री किराए में एक बार और बढ़ोतरी कर सकते हैं। गौरतलब है कि रेलवे की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि रेल मंत्रालय ने रेल बजट में 3 से 5 पैसे प्रति किलोमीटर तक रेल किराया बढ़ाने का फैसला किया है। इस बढ़े किराए का ऐलान रेल बजट में होगा। पिछले दिनों डीजल महंगा होने से रेल मंत्रालय पर किराया महंगा करने का दबाव बढ़ा है। बाजार भाव पर डीजल खरीदने से रेलवे को सालाना 3,300 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जनवरी में रेल किराये में बढ़त से रेलवे को सालाना 6,600 करोड़ रुपये की आमदनी की उम्मीद है। फिर भी रेलवे ने सरकार से 38,000 करोड़ रुपये की बजट सहायता मांगी है, लेकिन वित्त मंत्रालय की तरफ से रेलवे की मांग को पूरा करने की उम्मीद कम है।

कार ना आने पर भड़कीं ममता!


कार ना आने पर भड़कीं ममता!

(प्रतुल बनर्जी)

कोलकता (साई)। कार आने में देर क्या हुई, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने सुरक्षा गार्ड पर ही भड़क गईं। ममता का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने गार्ड को अनाप-शनाप तक कह दिया। यह घटना मेले के गेट नंबर एक पर हुई। वैसे सदा शांत रहने वाली ममता बनर्जी के तल्ख तेवरों से प्रत्यक्षदर्शी भी सहम गए।
दरअसल, ममता बनर्जी कोलकाता पुस्तक मेले गई थीं। मेले से बाहर निकलने के बाद उनको अपनी कार के लिए इंतजार करना पड़ा। फिर क्या था आ गया दीदी को गुस्सा। ममता इस कदर अपना आपा खो बैठीं कि वह अपने सुरक्षाकर्मियों पर चीखने लगीं और अनाप-शनाप कहने लगीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ममता बनर्जी इस कदर गुस्से में थीं कि उन्होंने अपने सुरक्षा गार्डस को यह तक कह डाला कि आप सभी को तो चाबुक से पीटा जाना चाहिए। ममता ने एक नहीं दो मर्तबा इस तरह की भाषा का प्रयोग किया। आर्श्चजनक बात यह है कि ममता जिस पुलिस ऑफिसर पर भड़कीं, उसका नाम कुसुम कुमार द्विवेदी है और वह कई सालों से ममता की निजी सुरक्षा में तैनात है।

आसाराम बापू फिर विवादों में


आसाराम बापू फिर विवादों में

(जया श्रीवास्तव)

विदिशा (साई)। हमेशा विवादों में रहने वाले आसाराम बापू अपनी करतूत और बयान की वजह से एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन पर एक भक्त ने आशीर्वाद लेने के लिए पैर छूने पर लात मारने और प्रवचन में यमदूत को गाली देने का आरोप लगाया है। सोमवार को मध्य प्रदेश के विदिशा में आसाराम के सत्संग का कार्यक्रम था।
आसाराम बापू के उपर अगाध श्रद्धा रखने वाले अमान सिंह दांगी नाम के शख्स ने न्यूज चौनलों से बातचीत में आरोप लगाया है कि प्रवचन खत्म होने के बाद वह जैसे ही आशीर्वाद लेने के लिए आसाराम बापू के कदमों में झुके उन्होंने उन्हें लात मार कर अपने से दूर गिरा दिया। दांगी का कहना है कि इसके बाद वह काफी देर तक ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। दांगी ने यह भी कहा कि आसाराम ने प्रवचन के दौरान भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की। उनका दावा है कि आसाराम ने एक प्रसंग में यमदूत को मंच से ही गाली दी।
दांगी ने मीडिया से कहा कि वह पहले आसाराम की बड़ी इज्जत करते थे लेकिन इस प्रकरण के बाद उनके विचार बदल गए हैं। मीडिया में इस मामले को दिखाए जाने के बाद भी आसाराम की ओर से अब तक कोई टिप्पणी नहीं आई है। वैसे, विवाद और आसाराम बापू का पुराना नाता है। उन्होंने कुछ महीने पहले गाजियाबाद में भी एक पत्रकार के सवाल पूछने पर उसे थप्पड़ रसीद कर दिया था। इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने दिल्ली के बहुचर्चित गैंग रेप प्रकरण में पीड़ित लड़की को भी दोषी बता दिया था। जब मीडिया उनके बयान को दिखाने लगा था तो उन्होंने मीडिया को भी कुत्ता कह डाला था।

लोकगीतों में दिल्ली गेंग रेप की पीड़ा!


लोकगीतों में दिल्ली गेंग रेप की पीड़ा!

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। दिल्ली में मेडिकल छात्रा के साथ हुए गैंगरेप की पीड़ा अब लोकगीतों में सुनाई दे रही है। ‘एइसे बहिनिया के इज्जत लुटाई त कइसे कलइया में राखी बंधाई’ नामक लोकगीत सुनाई दे रहा है। देश को हिला देने वाले इस कांड के दर्द को शब्दों में बांधा है बिरहा गीतकार जोखन मधुकर ने।
दिल्ली गैंगरेप की शिकार बिटिया की कहानी को केंद्र में रखते हुए उन्होंने नारी की व्यथा को आवाज दी है। इनके साथ-साथ एक दर्जन बिरहा गायक दिल्ली गैंगरेप की हृदय विदारक घटना की कहानी अपने-अपने तरीके से जनता में बयां कर रहे हैं। अब तक तीन गायकों के एलबम बाजार में भी आ गए हैं।
बिरहा गायक ओमप्रकाश दिवाना ने ‘गैंगरेप उर्फ चलती बस में बलात्कार’ शीर्षक से बिरहा एलबम जारी किया है। इसकी रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई है लेकिन वीडियो में बिरहा के श्रोताओं, स्टूडियो, घटना का नाटकीय रूपांतरण और इसके विरोध में हुए आंदोलन के फुटेज भी जोड़े गए हैं।
एलबम के गीतकार जोखन प्रसाद मधुकर ने घटना की पुरजोर भर्त्सना की है। उन्होंने गर्भ से लेकर घर के बाहर तक नारी की असुरक्षा का मामला बहुत संजीदा तरीके से प्रस्तुत किया है। वहीं, गायक अमृत लाल यादव का एलबम ‘दिल्ली बस गैंगरेप कांड (श्रद्धांजलि)’ मैक्स म्यूजिक से और धर्मराज का ‘दिल्ली दामिनी कांड’ के नाम से आया है।
ओमप्रकाश के मुताबिक हफ्ते भर में उनके एलबम की 10 हजार से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। एलबमों के थोक विक्रेता कैलाश नाथ ने बताया कि आधा दर्जन और गायक हैं जो इस मुद्दे पर गा रहे हैं। बिरहा में आख्यान गाने का चलन कोई नया नहीं हैं।
गायक अजय अजनबी का कहना है कि रामायण, महाभारत, सोरठा, लोरिकायन जैसे आख्यान गायक जन-जन तक पहुंचाते थे। राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए लोकगायकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है लेकिन इस तरह के आख्यानों पर गाते समय सावधानी जरूरी है।
बिरहा गायक हीरालाल की अमर प्रेम कहानी ‘हे दीदी’ आज भी पुराने लोग भूले नहीं हैं। ओमप्रकाश का कहना है कि बिरहा गायक मनोरंजन के साथ-साथ जनता को जागरूक करता है।