शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

मध्यप्रदेश की झांकी ’बाघ प्रिन्ट’ पर आधारित

गणतंत्र दिवस परेड: मध्यप्रदेश की झांकी ’बाघ प्रिन्ट’ पर आधारित

नई दिल्ली, (ब्यूरो)। वर्ष 2011 की गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष मध्यप्रदेश के बाघ प्रिन्ट पर आधारित झांकी राजपथ की शोभा बढ़ायेगी। झांकी के आगले हिस्से में शाल भंजिका की विशाल मूर्ति दिखायी गयी है। झांकी के मध्य में बाघ के छापे की कारीगरी को दर्शाया गया है।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में वस्त्रों की बुनाई और छापे की परम्परा सदियों पुरानी है। बाघ की छापाकला देश में लकड़ी के छापों से कपड़े पर होने वाली छपाई परम्परा की कड़ी है। कपड़ों की छपाई के प्रमाण प्राचीन कला की मूर्ति शिल्पों मंे भी दिखायी देते हैं। जैसे 11वीं शताब्दी की विख्यात शाल भंजिका प्रतिमा में छपे वस्त्र स्पष्ट दिखते हैं।

बाघ वह स्थान है जहां वस्त्र छपाई की परम्परा अपने शीर्ष पर दिखायी देती है। इसमें क्षेत्र की विशेष भौगोलिक स्थितियों की भी भूमिका है। इस क्षेत्र के कारीगरों ने वर्षों अपनी कला को निखारा है, यहां की भूगर्भीय स्थितियों को भी समझा है और अभिव्यक्ति का अनुपम उदाहरण बाघ के वस्त्र छपाई के रूप में दुनिया को दिया है। लाल और काले रंगों के प्रयोग से बने बाघ के वस्त्र अपनी साड़ी अभिव्यक्ति में अद्भुत रचना होते हैं। वस्त्रों पर रंगों की यह चमक कहीं और सम्भव नहीं है। यह छपाई रासायनिक रंगों की विशेष प्रकृति के कारण होता है। ज्यामितीय रूपकारों और रंगों का अद्भुत प्रयोग बाघ की वस्त्र छपाई मध्यप्रदेश को विशेष पहचान देता है।

M P TABLEAU ON BAGH PRINT

Republic Day Parade 2011: Madhya Pradesh Tableau on Bagh Prints







New Delhi, January 21, Madhya Pradesh Tableau on Bagh Prints will grace the Republic Day Parade 2011at Rajpath. The front portion of the float shows a huge Shal Bhanjika which depicts the celestial beauty of 11th Century droped in printed cloth.


Bagh prints of Madhya Pradesh represents one of the most ancient traditions of wooden block printings on cloths. Weaving and block printing traditions goes back to centuries.


Bagh with its unique geographical locations and is the place where the craft and art of block printing has reached its pinnacle. The use of colours red and black create a wondrous effect, which is impossible to get any where else. This is possible only because of chemical properties of the area.


Geometric designs and imaginative use of colours give Bagh prints a distinct identity.

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

राष्ट्रधर्म के बजाए गठबंधन धर्म निभाया कांग्रेस ने

आजाद भारत के सबसे बेबस प्रधानमंत्री साबित हुए मनमोहन

इससे बेहतर तो पुराना चेहरा ही था

कांग्रेस के अंदर ही उबल रहा है असंतोष

(लिमटी खरे)

भारत गणराज्य भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार की आग में जल रहा है, उधर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहे हैं। कांग्रेस के युवराज ने कुछ दिन पहले गठबंधन की मजबूरियों पर प्रकाश डाला था। देशवासियों के जेहन में एक बात कौंध रही है कि बजट सत्र के ठीक पहले हुए इस फेरबदल और विस्तार के जरिए कांग्रेस क्या संदेश देना चाह रही है? संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की दूसरी पारी में जितने घपले घोटाले सामने आए हैं, वे अब तक का रिकार्ड कहे जा सकते हैं। मंत्रियों, अफसरशाही की जुगलबंदी के चलते लालफीताशाही के बेलगाम घोड़े ठुमक ठुमक कर देशवासियों के सीने पर दली मूंग के मंगौड़े तल रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है, आम आदमी मरा जा रहा है, प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि वे ज्यांतिषी नहीं हैं कि बता सकें कि आखिर कब महंगाई कम होगी। मनमोहन भूल जाते हैं कि वे भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री हैं। भारत के संविधान में भले ही महामहिम राष्ट्रपति को सर्वोच्च माना गया हो किन्तु ताकतवर तो प्रधानमंत्री ही होता है। अगर मनमोहन सिंह चाहें तो देश में मंहगाई, घपले घोटाले, भ्रष्टाचार पलक झपकते ही समाप्त हो सकता है, किन्तु इसके लिए मजबूत इच्छा शक्ति की आवश्यक्ता है, जिसकी कमी डॉ.मनमोहन सिंह में साफ तौर पर परिलक्षित हो रही है।

उन्नीस माह पुरानी मनमोहन सरकार में पिछले लगभग अठ्ठारह माह से ही फेरबदल की सुगबुगाहट चल रही थी। तीन नए मंत्रियों को शामिल करने, तीन को पदोन्नति देने और चंद मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के अलावा मनमोहन सिंह ने आखिर किया क्या है? हमारी नितांत निजी राय में यह मनमोहनी डमरू है, जो देश की मौजूदा समस्याओं, घपलों, घोटालों, भ्रष्टाचार, नक्सलवाद, अलगाववाद, आतंकवाद की चिंघाड़ से देशवासियों का ध्यान बंटाने का असफल प्रयास कर रहा है। संप्रग दो में असफल और अक्षम मंत्रियों को बाहर का रास्ता न दिखाकर प्रधानमंत्री ने साबित कर दिया है कि वे दस जनपथ (श्रीमति सोनिया गांधी के सरकारी आवास) की कठपुतली से ज्यादा और कुछ नहीं हैं। आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे मंत्रियों को बाहर करके मनमोहन सिंह अपनी और सरकार की गिरती साख को बचाने की पहल कर सकते थे, वस्तुतः उन्होंने एसा किया नहीं है। आज देश प्रधानमंत्री से यह प्रश्न पूछ रहा है कि जो मंत्री अपने विभाग में अक्षम, अयोग्य या भ्रष्टाचार कर रहा था, वह दूसरे विभाग में जाकर भला कैसे ईमानदार, योग्य और सक्षम हो जाएगा? साथ ही साथ प्रधानमंत्री को जनता को बताना ही होगा कि आखिर वे कौन सी वजह हैं जिनके चलते मंत्रियों के विभागों को महज उन्नीस माह में ही बदल दिया गया है। क्या वजह है कि सीपीजोशी को ग्रामीण विकास से हटाकर भूतल परिवहन मंत्रालय दिया गया है?

दरअसल विपक्ष द्वारा शीत सत्र ठप्प किए जाने के बाद अब बजट सत्र में अपनी खाल बचाने के लिए मंत्रियों के विभागों को आपस में बदलकर देश के साथ ही साथ विपक्ष को संदेश देना चाह रही है कि अब भ्रष्ट मंत्रियों की नकेल कस दी गई है। वैसे कांग्रेस की नजरों में भविष्य के प्रधानमंत्री और युवराज राहुल गांधी की युवा तरूणाई को इस मंत्रीमण्डल में स्थान न देकर कांग्रेस ने एक संदेश और दिया है कि आने वाले फेरबदल में भ्रष्टों को स्थान नहीं दिया जाएगा, बजट सत्र के बाद जो फेरबदल होगा वह राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का रोडमेप हो सकता है। इसी बीच इन तीन चार माहों में भ्रष्ट और नाकारा मंत्रियों को भी अपना चाल चलन सुधारने का मौका दिया जा रहा है, किन्तु मोटी खाल वाले मंत्रियों पर इसका असर शायद ही पड़ सके। इसी बीच मंहगाई पर काबू पाने के लिए भी कुछ प्रयास होने की उम्मीद दिख रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की जो छवि है, वह भी बचाकर रखने के लिए कांग्रेस के प्रबंधकों ने देशी छोड़ विदेशी मीडिया को साधना आरंभ कर दिया है। कांग्रेस के प्रबंधक जानते हैं कि देश में मीडिया को साधना उतना आसान नहीं है, क्योंकि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बाद अघोषित चौथे स्तंभ ‘‘मीडिया‘‘ के पथभ्रष्ट होने के उपरांत ‘ब्लाग‘ ने पांचवे स्तंभ के बतौर अपने आप को स्थापित करना आरंभ कर दिया है।

इस फेरबदल में वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भारी मशक्कत करनी पड़ी है। एक दूसरे के बीच लगातार संवाद कराने में कांग्रेस अध्यक्ष के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल की महती भूमिका रही। किसी को इस फेरबदल का लाभ हुआ हो अथवा नहीं किन्तु इसका सीधा सीधा लाभ अहमद पटेल को होता दिख रहा है, जिन्होंने एक बार फिर कांग्रेस सुप्रीमो की नजर में अपनी स्थिति को मजबूत बना लिया है। दस जनपथ और सात रेसकोर्स के बीच अहमद पटेल ने सेतु का काम ही किया है। बताते हैं कि फेरबदल में मंत्रियों को बाहर का रास्ता न दिखाने का सुझाव अहमद पटेल का ही था। पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष को मशविरा दिया कि अगर मंत्रियों को हटाया गया तो वे पार्टी के अंदर असंतोष को हवा देंगे, तब बजट सत्र में टू जी स्पेक्ट्रम, विदेशों में जमा काला धन वापस लाना, नामों के खुलासे, महंगाई, सीवीसी की नियुक्ति आदि संवेदनशील मुद्दों पर पार्टीजनों को संभालना बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा। भले ही कांग्रेस प्रबंधकों ने यह सोचा होगा कि टीम मनमोहन से आक्रोश को शांत किया जा सकता है, किन्तु अभी भी पार्टी के अंदर लावा उबल ही रहा है।

मनमोहन ने देश की वर्तमान चुनौतियों को दरकिनार कर गठबंधन का धर्म ही निभाया है। भारत में गठबंधन सरकार का श्रीगणेश सत्तर के दशक में हुआ था। आपातकाल के उपरांत 1977 में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था, उस समय मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गठबंधन सरकार केंद्र पर काबिज हुई थी। इसके बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, नरसिंम्हाराव, अटल बिहारी बाजपेयी, एच.डी.देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल पुनः अटल बिहारी बाजपेयी के बाद डॉ.मनमोहन ंिसह की सरकार द्वारा दो बार गठबंधन के जरिए केंद्र पर राज किया है। इक्कीसवीं सदी में सरकार में शामिल सहयोगी दलों द्वारा जब तब कांग्रेस या भाजपा की कालर पकड़कर उसे झझकोरा है। बिना रीढ़ के प्रधानमंत्रियों ने सहयोगी दलों के इस रवैए को भी बरदाश्त किया है। बहरहाल जो भी हो गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही ने सत्ता की मलाई का रस्वादन अवश्य किया है पर गठबंधन के दो पाटों के बीच में पिसी तो आखिर देश की जनता ही है।

युवाओं को तरजीह न देने से राहुल हैं नाराज!

युवराज खफा हैं टीम मनमोहन के गठन से!

गायब रहे शपथ ग्रहण समारोह से

उप प्रधानमंत्री न बन पाने का मलाल दिखा प्रणव के चेहरे पर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की दूसरी पारी में हुए पहले फेरबदल से राहुल गांधी ने अपने आप को दूर ही रखा। उधर उप प्रधानमंत्री न बन पाने की पीड़ा प्रणव मुखर्जी के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को प्रसन्न करने के लिए फोटो सेशन में भारी उद्योग मत्री प्रफुल्ल पटेल ने उन्हें भी आमंत्रित कर डाला। इस फेरबदल से कांग्रेस में रोष और असंतोष की स्थिति बनती जा रही है। फेरबदल में आपाधापी का माहौल इस कदर था कि मंत्रियों को अपने अपने विभागों के बारे में ही पता नहीं था, जबकि सरकारी वेब साईट पर मंत्रीमण्डल की सूची पहले ही जारी कर दी गई थी।

कांग्रेस की नजर मे ंभविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी को शपथ ग्रहण समारोह में सभी की नजरें तलाशती रहीं किन्तु उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं की। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी देश के वर्तमान हालातों और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली से खासे खफा हैं। राहुल चाह रहे थे कि मंत्री मण्डल से दागदार चेहरों को बाहर कर इसमें युवाओं को मौका दिया जाए। राहुल गांधी की बात कांग्रेस के रणनीतिकारों को जम तो रही थी किन्तु वे फिलहाल बजट सत्र तक कोई जोखम उठाना नहीं चाह रहे थे। सूत्रों की मानें तो राहुल ने अपनी नाराजगी को तल्ख शब्दों में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन ंिसह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी तक पहुंचा दिया है। सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को पूरी उम्मीद थी कि उन्हें केंद्र सरकार में उप प्रधानमंत्री बना दिया जाएगा। अंतिम समय में जब उनकी मनोकामना पूरी नहीं हुई तो वे शपथ ग्रहण समारोह में कटे कटे से नजर आए। समारोह में अधिकांश समय प्रणव ने पत्रकारों से बतियाकर ही गुजारा। बाद में जब प्रधानमंत्री डॉ.एम.एम.सिंह की नजर उन पर पड़ी तो खुद प्रधानमंत्री उठकर प्रणव के पास गए और इशारे से उन्हें बुलाकर उनके कान में कुछ मंत्र फूंका।

समारोह में जब मंत्रियों के साथ प्रेजीडेंट और पीएम का फोटो सेशन हो रहा था, तब पदोन्नत हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को खुश करने की गरज से उन्हें भी फोटो सेशन में शामिल होने का आमंत्रण दे डाला। जैसे ही राकांपा क्षत्रप शरद पंवार ने उन्हें देखा तो इशारे से पास बुलाकर कहा कि प्रोटोकाल के मुताबिक इस सेशन में मंत्रियों के अलावा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ही शामिल हो सकते हैं। यह मंत्रिमण्डल विस्तार कांग्रेस अध्यक्ष के लिए बहुत ही बड़ी चुनौति बना हुआ था, यही कारण है कि इसमें अंतिम समय तक लगाई जा रही अफवाहें अटकलें परवान न चढ़ सकीं। मंत्रियों को अपने अपने विभागों की जानकारी भी पत्रकारों के माध्यम से मिली, क्योंकि मंत्रियों के विभागों की सूची सरकारी वेब साईट पर शपथ ग्रहण से कुछ समय पूर्व ही डाल दी गई थी।



कांग्रेस में फट रहा है असंतोष का लावा

क्षेत्रीय संतुलन न बाना पाने और भ्रष्ट मंत्रियों के पर न कतरे जाने से कांग्रेस के अंदरखाने में रोष और असंतोष तेजी से भड़क रहा है। मीरा कुमार को छोड़कर बिहार से कोई नहीं है, वहीं छत्तीसगढ़ गोवा, त्रिपुरा, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालेण्ड, मिजोरम को भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। आंध्रा की रेणुका चौधरी को उम्मीद थी कि वे लाल बत्ती पा सकती हैं, किन्तु वे निराश ही हुईं। उधर यूपी के बेनी वर्मा को केबनेट मंत्री बनाने का आश्वासन दिया गया था, जिन्होंने शपथ ग्रहण के बाद अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए न तो मीडिया से चर्चा की और न ही वहां से लाल बत्ती वाली गाड़ी की सवारी करना पसंद किया। वर्मा शपथ ग्रहण के बाद अपने उसी वाहन से वापस लौटे जिसमें बैठकर वे आए थे। पीएमओ के सूत्रों ने बताया कि बाद में पीएम के निर्देश पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने वर्मा को समझाया तब जाकर गुरूवार को उन्होंने इस्पात राज्यमंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया।

टेक्निकल एजूकेशन में सेकंड शिफ्ट की मांग की शर्मा ने

तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा तकनीकी शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में सुझाव

टेक्निकल एजूकेशन में सेकंड शिफ्ट की मांग की शर्मा ने

नई दिल्ली (ब्यूरो)। तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने हिन्दीभाषी विद्यार्थियों के हित में संवाद कौशल को तकनीकी पाठ्यक्रम में शामिल करने, उद्योगों की आवश्यकतओं तथा पूर्ति के अंतर के आंकलन के लिए संस्थागत व्यवस्था करने तथा तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में दूसरी पाली शुरु करने की अनुमति दिये जाने का सुझाव दिया है।

श्री शर्मा आज यहाँ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा अर्हता ढाँचा निर्धारित करने के लिए आयोजित राज्यों के तकनीकी शिक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रदाय की जा रही अर्हताओं में एकरुपता लाने की दृष्टि से तैयार किये जा रहे एकीकृत ढांचे को सराहनीय और स्वागत योग्य बताते हुए, इसमें राज्य सरकारों के विचारों तथा प्रस्तावों को शामिल करने का आग्रह किया।

तकनीकि शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिन्दी भाषी प्रदेशों के विद्यार्थी तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद कौशल की कमी के कारण रोजगार प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करते हैं। इसे दूर करने और बेहतर नियोजन के लिए आवश्यक कौशल तथा संवाद कौशल को पाठ्यक्रम का आवश्यक अंग बनाया जाए।

श्री शर्मा ने सुझाव दिया कि उद्योगों की आवश्यकताओं तथा मांग और पूर्ति के अंतर के आंकलन के लिए एक बार व्यवस्था की जगह इसे संस्थागत स्वरूप दिया जाना चाहिए, ताकि प्रादेशिक स्तर पर इस प्रकार के आंकलन के डाटा का सतत रूप से पाठ्यक्रम के पुनरीक्षण, नवीन पाठ्यक्रमों को शुरू करने तथा अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों को बंद करने में किया जा सके। श्री शर्मा ने पारम्परिक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ गौ संवर्द्धन एवं जैविक खेती के काम आने वाले पाठ्यक्रमों को भी इसमें शामिल करने का सुझाव दिया।

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की गुणवŸाा से ही व्यावसायिक शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त हो सकता है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और उन्मुखीकरण के लिए प्रदेश में एडवान्सड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि आईटीआई संस्थाओं के भवनों के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश को लगभग 160 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उन्होंने केन्द्र से यह राशि एक मुश्त उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में तकनीकी ज्ञान एवं प्रशिक्षण देने के लिए बड़ी अधोसरंचना उपलब्ध है। एआईसीटीई द्वारा इन महाविद्यालयों तथा पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों को द्वितीय शिफ्ट में आईटीआई प्रारम्भ करने की स्वीकृति दी जाए। इससे बड़े पैमान पर कौशल विकास का कार्य किया जा सकेगा।

श्री शर्मा ने कहा कि पीपीपी मोड में पॉलीटेकनिक स्थापित करने की योजना के तहत मध्यप्रदेश को 97 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये प्रस्ताव छानबीन और दिशा निर्देशों के लिये भारत शासन को भेज दिये गये हैं। उन्होंने इन प्रस्तावों को शीघ्र मंजूर किये जाने का अनुरोध किया, जिससे प्रदेश के पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों में प्रवेश क्षमता में लगभग 30 हजार की वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पीपीपी मोड में 110 आईटीआई तथा 313 कौशल विकास केन्द्र खोले जाने का प्रस्ताव भारत शासन के पास लंबित है जिसे शीघ्र स्वीकृति दी जाए। श्री शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में गुणवŸाा सुनिश्चित करने के लिये व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन संस्थाओं की रेकिंग और ग्रेडिंग करने का निर्णय लिया गया है।

श्री शर्मा ने व्यावसायिक कम्प्युनिटी पॉलीटेकनिक योजना प्रदेश के सभी पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों में लागू किये के प्रस्ताव के बारे में भी जानकारी दी । उन्होंने मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के विस्तार और गुणवŸाा में सुधार के लिये राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की भी विस्तार से जानकारी दी।

आवाम ए हिन्‍द 05 जनवरी 2011

ये है दिल्‍ली मेरी जान

बेईमान ही बेईमान

हम भी बेईमान तो तुम भी बेईमान....


(मनोज मर्दन त्रिवेदी)
सिवनी। किसानों के खेत में ओला गिरे, पाला गिरे, सूखा पड़े या अतिवृष्टि हो,इल्लियों से फसल नष्ट हो जाये। किसानों क बर्बादी पर राजनैतिक व्यक्ति जश्र मनाते नजर आते हैं। किसानों की फसल चौपट चाहे किसी भी कारण से हो,किसानों पर विपदा आते ही राजनीति करने वालों की फसल लहलहा जाती है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनो अपने-अपने स्तर की राजनीति करते हैं। उन्हे किसानों की आपदा पर सुनहरा अवसर मिल जाता है। हाल ही में सिवनी सहित पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड में गिरे पाले और तुषार से किसानों की फसलें चौपट हो गयी हैं,प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह घोषणा कर रहे हैं कि 50 प्रतिशत नुकसानी को 100 प्रतिशत मानकर किसानों को राहत प्रदान की जायेगी। कोई उन्हे किसान विरोधी नेता न कह दे इसका उन्हे भय ऐंसा सताया कि उन्होने दर्जन भर घोषणाऐं किसानों के हित में कर डाली,जिसके साथ उन्होने एक ऐंसी हास्यप्रद घोषणा भी की है जिसे पूरी करना सरकार के वश की बात नहीं और यदि किसान उनकी घोषणा का पालन करता है तो और भी बड़े नुकसान में चला जायेगा,परंतु उस बात की ओर प्रशासन तंत्र की तो हिम्मत नहीं है कि उन्हे सलाह दे सके,सत्ता पक्ष के और विपक्ष के नेता भी उस बात का उल्लेख करने से बच रहे हैं। मुख्यमंत्री की यह घोषणा साहूकारों का ऋण अदा न करने से संबंधित है। यह बात मुख्यमंत्री भी अच्छी तरह जानते हैं कि साहूकार जितना ऋण देता है,उससे दुगनी कीमत की मूल्यवान वस्तु अपने पास गिरवी रख लेता है। किसान यदि उसका ऋण अदा नहीं करेगा तो किसान को साहूकार को ब्याज देना पड़ेगा साथ ही यदि समय बीत जाता है तो किसान का जेवर या जो वस्तु उसने गिरवी रखी है वह डूब जायेगी।

50 प्रतिशत नुकसानी को 100 प्रतिशत नुकसानी मानने की परिभाषा बड़े राजनैतिक व्यक्ति बेहतर समझते हैं, परंतु किसानों को वे समझाने से हमेशा परहेज करते हैं। ठाकुर हरवंश सिंह क्षेत्र का सघन दौरा कर किसानों के हमदर्द बनने की नौटंकी कर रहे हैं,उन्हे कम से कम उस 50 प्रतिशत की परिभाषा किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिये था परंतु सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की मजबूरी उन्हे ऐंसा करने से रोक देती है। किसानों के धरना कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके समर्थकों द्वारा किसानों और उनका अभिनंदन संबंधी विज्ञापन जारी होना किसानों के प्रति क्या पीड़ा है कांगे्रस की उस मानसिकता को प्रकट करता है। ठाकुर हरवंश सिंह मामूली एक विधायक नहीं पूरी सरकार हैं, वे चाहें तो विधानसभा उपाध्यक्ष के नाते राजस्व पुस्तिका में संशोधन करा सकते हैं,परंतु इसके लिए राजनैतिक ईमानदारी की आवश्यकता है जो राजनैतिक व्यक्तियों में कम पायी जाती है। राजस्व रिकार्ड के अनुसार प्रति एकड़ जो उत्पादन दर्ज है,आज किसान उससे दुगना-तिगना उत्पादन अपने खेतों में कर रहा है परंतु यह किसानों द्वारा महंगे बीज,खाद महंगी दवाईयां और महंगी तकनीकियों के बल पर किया जा रहा है। उत्पादन का आंकलन पुराने रिकार्ड के अनुसार होता है जबकि वर्तमान में लागत अधिक लगाकर किसान अपने उत्पादन को बढ़ा चुका है। यह संशोधन जब तक नहीं होगा किसानों को पर्याप्त नुकसानी मिलना संभव नहीं है। ठाकुर हरवंश सिंह को विरोध नहीं विधानसभा उपाध्यक्ष के नाते संशोधन पर बल देना चाहिये। किसानों की आपदा पर अभिनंदन नहीं उनके साथ ईमानदारी से खड़े होकर साथ निभाना चाहिये। जनता उन पर अटूट विश्वास जताते रही है,उस विश्वास के अनुरूप उन्हे अपनी भूमिका निभाकर अपने विशाल हृदय का परिचय दें। किसानों की आपदा पर जारी हुए विज्ञापन किस मानसिकता से जारी किये गये थे संभव है कांग्रेस इस पर मंथन कर रही हो,परंतु आम जनता एक ही राग अलाप रही है कि नेता बेईमान तो चेला बेईमान। परेशानियों से जूझता किसान फिर भी मेरा देश महान।

जारी......


बुधवार, 19 जनवरी 2011

कमल नाथ को शहरी विकास

मनमोहन मंत्रीमण्डल में फेरबदल

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संप्रग के दूसरे कार्यकाल में 19 माह पुरानी मनमोहन सरकार के मंत्रिमंडल में पहला फेरबदल बुधवार शाम किया गया। इसमें प्रफुल्ल पटेल, श्रीप्रकाश जायस्वाल और सलमान खुर्शीद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ को शहरी विकास मंत्रालय सौंपा गया है।



सीपी जोशी सड़क परिवहन और राजमार्ग

मुरली देवड़ा कोरपोरेट मामले

वायलार रवि नागरिक उड्डयन अतिरिक्त भार, प्रवासी भारतीय मामले यथावत

कमलनाथ शहरी विकास

विलासराव देशमुख ग्रामीण विकास पंचायती राज

जयपाल रेड्डी पेट्रोलियम और प्राकृतिक

कपिल सिब्बल दूरसंचार एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय बरकरार

अश्विनी कुमार योजना, संसदीय कार्य, विज्ञान-प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (राज्य मंत्री)

केसी वेणुगोपाल ऊर्जा राज्य मंत्री

एमएस गिल सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन

अजय माकन खेल एवं युवा मामले
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

शरद पवार कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उपभोक्ता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति छिना

वीरभद्र सिंह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग

प्रफुल्ल पटेल भारी उद्योग व सार्वजनिक उपक्रम

बीके हांडिक पूर्वाेŸार क्षेत्र विकास

कुमारी शैलजा संस्कृति का अतिरिक्त प्रभार पर्यटन छिना

सुबोध कांत सहाय पर्यटन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

पवन कुमार बंसल संसदीय कार्य जल संसाधन छिना

सलमान खुर्शीद जल संसाधन

श्रीप्रकाश जायसवाल कोयला मंत्रालय कैबिनेट दर्जा

बेनी प्रसाद वर्मा इस्पात स्वतंत्र प्रभार

केवी थॉमस उपभोक्ता मामले खाद्य नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

दिनशा पटेल खनन (स्वतंत्र प्रभार) लघु मध्यम कुटीर उपक्रम

विभिन्न राज्यमंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल

ई अहमद विदेश

हरीश रावत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

वी नारायणसामी प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, संसदीय कार्य




अवाम ए हिन्‍द में 13 दिसंबर को

दिल्‍ली मेरी जान

लाल बत्ती के लिए सियासत तेज

18 जनवरी 2011

मंत्रीमण्डल विस्तार आज शाम

मंत्रीमण्डल विस्तार और फेरबदल ने उड़ाई कईयों की नींद

मध्य प्रदेश पर पड़ेगा इसका सबसे ज्यादा असर

प्रणव बन सकते हैं उपप्रधानमंत्री

कुछ मंत्रियों को भेजा जा सकता है संगठन में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दूसरे कार्यकाल में मंत्रीमण्डल विस्तार और फेरबदल के लिए उल्टी गिनती आरंभ हो चुकी है, विस्तार आज शाम पांच बजे होगा। मौजूदा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने तो युवा सांसद जोड़ तगाड़ कर कुर्सी पाने की जुगत में लग गए हैं। इसी बीच कल प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल तो आज कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री आवास पर अपने राजनैतिक सचिव अहमद पटेल की उपस्थिति में लगभग दो घंटे गुफ्तगू की। इन दोनों ही भेंट को मंत्रीमण्डल फेरबदल के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मंत्रीमण्डल के पुनर्गठन की सुगबुगाहट के साथ ही दिल्ली में राजनैतिक फिजां बहुत गर्म हो गई है। कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार अपेक्षाकृत युवा दिखने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि एमपी कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को पीएमओ में भेजा जा सकता है, किन्तु उनके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इन परिस्थितियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीएमओ में राज्यमंत्री बनाकर सूचना प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार भी सौंपा जा सकता है, सिंधिया को विदेश राज्य मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी बलवती ही मानी जा रही हैं। उधर अरूण यादव की पदोन्नति भी निश्चित मानी जा रही है। एमपी कोटे से कांतिलाल भूरिया के आदिवासी विकास विभाग की कमान उड़ीसा के हेमनंद विस्वाल को दी जा सकती है। एम पी को बेलेंस करने के लिए राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री चाहते हैं कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को वित्त मंत्री बनाया जाए। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को उप प्रधानमंत्री बनाकर गृह मंत्रालय की कमान सौंपी जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि आज उन्होंने इसी तारतम्य में वीरभद्र सिंह, कांतिलाल भूरिया और नारायण सामी के साथ सोनिया गांधी से भेंट भी की है। उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की गरज से वहां से किसी ठाकुर नेता को केंद्रीय मंत्री बनाने पर विचार किया जा रहा है। मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्री बनाकर एचआरडी का चार्ज जनार्दन द्विवेदी को दिया जा सकता है। उधर श्रीप्रकाश जायस्वाल, बेनी प्रसाद वर्मा, जगदंबिका पाल अपना अपना दावा मजबूत करने में जुटे हुए हैं, तो सलमान खुर्शीद के लिए कानून मंत्रालय को तैयार करवाने की संभावनाएं हैं। टूजी के कारण बाहर हुए ए.राजा के स्थान पर इलानगोवान या टी.आर.बालू का दावा पुख्ता माना जा रहा है। ममता बनर्जी से हलाकान रेल राज्य मंत्री ई.अहमद चाहते हैं कि उन्हें वापस विदेश मंत्रालय में भेज दिया जाए।

कामन वेल्थ गेम्स घोटाले के छींटे जयपाल रेड्डी और मनोहर सिंह गिल पर भी पड़ सकते हैं, उधर आदर्श सोसाईटी घोटाले में भारी उद्योग मंत्री विलास राव की कुर्सी हिलने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। ढलती उमर वीरभद्र सिंह और बी.के.हांडिक के आड़े आने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। सोनिया के पीहर वालों के खास मित्र आनंद शर्मा नए विदेश मंत्री हो सकते हैं। उधर गिरिजा व्यास को पंचायत एवं ग्रामीण विकास का प्रभार दिया जा सकता है। मंहगाई रोकने में अक्षम रहे शरद पवार से कृषि अथवा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय में से एक वापस लिया जा सकता है। उधर राजीव शुक्ला भी संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनने के लिए अपने अपने आकाओं को सिद्ध करने में जुटे हुए हैं।

जिन मंत्रियों को सत्ता से हटाकर संगठन में लेने की चर्चाएं हैं उनमें सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नवी आजाद, शिपिंग मंत्री जी.के.वासन, भारी उद्योग मंत्री विलास राव देशमुख, खान राज्य मंत्री बी.के.हांडिक, भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के नाम सबसे अधिक चर्चाओं में हैं। इन सभी की संगठनात्म क्षमताओं के चलते कांग्रेस आलाकमान इनका भरपूर उपयोग करने के मूड में दिख रहा है। इसके अलावा विदेश मंत्री एम.एस.कृष्णा को आंध्र प्रदेश के राजभवन मंे भेजा जा सकता है। वैसे छत्तीसगढ़, बिहार, गोवा और मणिपुर से केंद्र में प्रतिनिधित्व नगण्य है, इस बारे में भी विचार चल रहा है।

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

खस्ताहाल है युवराज की जागीर

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

खस्ताहाल है युवराज की जागीर

कांग्रेसियों की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री और युवराज राहुल गांधी समूचे देश में युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने का जतन कर रहे हैं, किन्तु उन्हें अपनी जागीर यानी संसदीय क्षेत्र अमेठी की कोई परवाह ही नहीं है। अमेठी का आलम यह है कि वहां न बिजली है, न पानी का ठिकाना है, रही बात उद्योग धंधों की तो लगभग उद्योग विहीन हो चुका है अमेठी। कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के बावजूद भी लगभग सवा लाख गैस कनेक्शन धारकों वाली अमेठी में रसोई गैस का जबर्दस्त संकट है। राजनैतिक कारणों से सदा चर्चा में रहने वाली अमेठी में केप्टन सतीश शर्मा ने सांसद रहते बहादुर पुर में पेट्रोलियम इंस्टीटयूट की घोषाण की थी, 97 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात ही है। बतौर सांसद पहले कार्यकाल में राहुल गांधी ने अमेठी को एजूकेशन हब बनाने का सपना दिखाया था, किन्तु न तो इंस्टीट्यूट ऑफ इंफरमेशन तकनालाजी ने यहां डिस्कवरी पार्क बनाया और न ही दिल्ली पब्लिक स्कूल ने ही यहां काम आरंभ किया। मौजूदा हालात में अमेठी की बदहाली को देखकर यहां के नागरिक अपने सांसद पर आंसू ही बहा रहे है। अमेठी में इन दिनों एक पुराना चुटकुला चर्चा में है।

यह है आरटीई का हाल सखे

देश में बच्चों को शिक्षित करने के लिए कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून आरटीई को लागू किया है। गैर कांग्रेसी सरकारों वाले सूबों में आरटीई का परवान न चढ़ पाना समझ में आ सकता है कि वे कांग्रेस के फैसलों को अंगीकार करने से गुरेज कर रहे हों, किन्तु कांग्रेस की ही राजस्थान सरकार द्वारा आरटीई में कोताही समझ से परे है। राजस्थान में बारह लाख से अधिक बच्चों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा है। इतना ही नहीं सूबे 72 हजार शालाओं में 23 हजार शिक्षकों की कमी है। राजस्थान में तकरीबन सात लाख 14 हजार कन्याएं ौर चार लाख 77 हजार बालक स्कूल जाने से वंचित हैं। राजस्थान में बालिकाओं के स्कूल से विमुख होने पर खासा आश्चर्य होता है। कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी खुद महिला हैं, देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी महिला हैं, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी महिला हैं, फिर कांग्रेस की राजस्थान सरकार द्वारा बालिकाओं की शिक्षा दीक्षा के मामले में कोताही ही बरती जा रही है। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के द्वारा बच्चों की शिक्षा को लेकर बनाए गए कानून में राज्यों की अनदेखी पर सजा का प्रावधान अवश्य ही होगा, अगर नहीं तो इसमें संशोधन पर प्रावधान करे और केंद्र को उसका उपयोग करना ही चाहिए।

आईटीडीपी में महिला बटालियन

भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने एक नया इतिहास रचते हुए महिलाओं की पहली बटालियन को अपने आप में समाहित कर लिया है। इस बटालियन में देश की 209 महिलाओं को शामिल किया गया है। इस बटालियन में उत्तराखण्ड से 44, राजस्थान की 13, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और दिल्ली की चार चार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की दो दो एवं हिमाचल प्रदेश की एक महिला शामिल है। अर्धसैनिक बलों में अब तक पुरूषों का ही वर्चस्व रहा है, महिलाएं भी किसी से कम नहीं है, यह बात साबित करते हुए देश की महिलाओं ने आईटीबीपी के माध्यम से देश की सेवा करने की ठानी है। इन महिलाओं को प्रशिक्षण के कठिन दौर से गुजरना पड़ रहा है। बावजूद इसके ये महिलाएं अपने आप को इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जब पूरी तरह से यह बटालियन तैयार हो जाएगी तब इनकी सेवा कैलाश मानसरोवर और नाथुला दर्रे में चुनौतिपूर्ण जवाबदारी भी दी जा सकती है। आने वाले समय में समूची दुनिया ‘भारत की स्त्री शक्ति‘ को सलाम करती नजर आएगी।

फिर केंद्र पर बरसे शिवराज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगता है रह रह कर केंद्र सरकार पर बरसने का भूत सताता है। वे अनेक मामलों में केंद्र से पक्षपात का आरोप लगाते हैं फिर दिल्ली आकर मध्य प्रदेश भवन में पत्रकारों को चाय पर बुलाकर अपनी भड़ास निकाल देते हैं। केंद्र सरकार क्या दे रही है क्या नहीं इस बात से शायद उनको बहुत ज्यादा लेना देना नहीं है। मध्य प्रदेश में सड़कों की दुर्दशा को लेकर सूबे की भाजपा ने पहले भूतल परिवहन मंत्री को घेरने की घोषणा की, इसके लिए हस्ताक्षर अभियान और मानव श्रंखला की घोषणा की गई इसके बाद प्रधानमंत्री से मिलने की बात थी। मध्य प्रदेश की भाजपा ने तो यह नहीं किया, कुछ दिनों बाद शिवराज सरकार ने भी भूतल परिवहन मंत्रालय को घेरने की बात कही। शिवराज की हुंकार के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। रही बात शिवराज सिंह की दिल्ली में पत्रकार वार्ताओं की तो उसमें भूतल परिवहन मंत्रालय को छोड़ बाकी सभी मंत्रालयों को घेरने में शिवराज सिंह चौहान कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।

बताएं बापू का आई क्यू लेबल

देश में सूचना का अधिकार कानून क्या लागू हुआ लोगों ने जो मर्जी चाहे वो जानकारी मांगना आरंभ कर दिया है। अहमदाबाद के एक शस्ख ने केंद्रीय सूचना आयुक्त से एक जानकारी मांगी है, जो हैरतअंगेज ही कही जा सकती है। उसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित अनेक पूर्व राष्ट्रपतियों के बौद्धिक स्तर (आई क्यू लेबल) के बारे में जानकारी चाही है। उधर केंद्रीय सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्र का मानना है कि इस तरह की सूचनाएं मागने से साफ हो जाता है लोग अब सूचना के अधिकार के नाम पर हदें पार करते जा रहे हैं। बकौल मिश्र यह सूचना के अधिकार दायरे का उल्लंघन है, जिसे रोका जाना चाहिए। वैसे कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार कानून के जरिए न जाने कितने लोगों को बेनकाब कर दिया है, और कुछ ने इसके जरिए दुकानदारी भी आरंभ कर दी है। पहले जानकारी मांगो फिर उससे सौदा कर लो। कुछ जगहों पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां मांगने पर लोगों का कत्लेआम तक मच गया है। कुछ भी हो सूचना का अधिकार कानून है बड़े काम की चीज। सरकार को इसका और अधिक प्रचार प्रसार करना चाहिए, ताकि व्यवस्था को चाक चौबंद बनाया जा सके।

आड़वाणी का ब्लाग भारती नहीं भाया भाजपाईयों को

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी बहुत बड़े ब्लागर हो गए हैं। आड़वाणी अब अपनी मंशाएं और पार्टी की अंदरूनी बातें अपने ब्लाग पर लिखाकर सार्वजनिक करते हैं। आड़वाणी बहुत बड़े नेता हैं, और उनके लिए भाजपा का मंच है, फिर भी उन्होंने ब्लाग की दुनिया में जाकर अपने आप को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया है। आड़वाणी ने मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भाजपा वापसी की मंशा को अपने ब्लाग पर उजागर कर दिया था, उसके बाद से ही भाजपा में उफान आ गया। उमा भारती ने भाजपा में रहते और छोड़ने के बाद जिन जिन लोगों को कोसा था, वे सब लामबंद होकर उमा भारती की वापसी में शूल बोने लगे। पहले लगने लगा था कि जब आड़वाणी ने अपने ब्लाग पर उमा भारती का भविष्य तय कर दिया है तो फिर भला कोई संसदीय बोर्ड में इसका प्रतिकार करने का साहस जुटा पाएगा। उमा विरोधियों ने जमकर सियासत की कहा कि उमा ने टीवी के सामने ही आड़वाणी को जमकर कोसा था, और तो और भाजपा को हराने के लिए एक पार्टी तक बना डाली थी, नतीजा सामने है उमा भारती को अभी वेट करना पड़ रहा है।

एम्स के पानी में हैं लाख बीमारियां

देश का आला दर्जे का चिकित्सालय अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान मरीजों या उसके परिजनों को पानी ही नहीं बीमारियां पिला रहा है। यह सच है, संस्थान के लेबोरेटरी मेडीसिन विभाग की रिपोर्ट यह सब कह रही है। प्रतिवेदन कहता है कि पानी के नमूने लेकर उसकी जांच में पाया गया है कि इसमें पैथोजीन है, जो टाईफाईड, हेपीटाईटिस ए एवं सी के साथ ही साथ पेट की अनेक बीमारियांे का कारक है। इसमें ओपीडी, इंडियन रोटरी केंसर हॉस्पिटल का पानी सबसे ज्यादा दूषित है। उम्दा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विख्यात एम्स में गरीबों के लिए प्रदूषित पानी पिलाया जा रहा है इसमें मरीजों के साथ ही साथ उनकी तीमारदारी में लगे लोग भी प्रभावित हुए बिना नहीं है। वहीं दूसरी ओर पाईवेट वार्डस और व्हीव्हीआईपी क्लीनिक्स में रसूखदारों के लिए आरओ मशीन लगा दी गईं हैं। बहरहाल डिपार्टमंेट द्वारा एम्स निदेशक डॉ.आर.सी.डेक्का को लिखे पत्र में इन बातों का सविस्तार से उल्लेख कर दिया है। अब देखना यह है कि लोगों को भला चंगा करने वाला अस्पताल कब लोगों को साफ सुथरा पानी मुहैया करवाता है।

‘डियर मिनिस्टर‘ का खौफ

केंद्रीय मंत्रियों मंे इन दिनों एक नया खौफ देखने को मिल रहा है। केबनेट सचिव के.एम.चंद्रशेखर ने एक पत्र लिखकर मंत्रियों को हलाकान कर रखा है। कैबनेट सचिव ने केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के एक निर्देश की याद दिलाई है, जिसमें प्रधानमंत्री ने मंशा व्यक्त की थी कि केंद्रीय मंत्री सांसदों का पूरा पूरा ध्यान रखें, उनसे समय समय पर भंेट मुलाकात करें। केबनेट सचिव चंद्रशेखर ने पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे पूर्व राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के पत्र की याद भी दिलाई है। मंत्री हैरान हैं कि आखिर एक नौकरशाह को मंत्रियों को पत्र लिखकर याद दिलाने की क्या जरूरत पड़ गई। मंत्रियों का कहना है कि एसा प्रतीत होता है कि वे सांसदों की उपेक्षा कर रहे हैं और सांसदों ने जाकर केबनेट सचिव के सामने अपना दुखड़ा रोया है। इसके पहले भी कैबनेट सचिव ने मंत्रियों को अपने अपने महकमों की परफार्मेंस रिपोर्ट तैयार करने संबंधी पत्र लिखा था। गौरतलब होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी के कार्यकाल में उनके सचिवों और कंाग्रेस के आला नेताओं द्वारा अपनी इच्छा को राजीव जी की इच्छा बताकर काम साध लिए जाते थे।

बापू को सच्ची श्रृद्धांजली दे रहे हैं अश्विनी

‘रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम‘ अहिंसा के पुजारी मोहन दास करमचंद गांधी जिन्होंने आधी धोती पहनकर उन ब्रितानियों को भारत से खदेड़ दिया था, जिनके बारे में मशहूर था कि उनका सूरज कभी डूबता नहीं है। मौजूदा सियासी हालात देखकर लगने लगा है कि भारत गणराज्य में आज नेताओं के लिए बापू आप्रसंगिक हो गए हैं। आज के समय में सरकारों द्वारा 30 जनवरी को दो मिनिट का मौन रखकर और दो अक्टूबर को सरकारी अवकाश के साथ ही साथ मांस मदिरा की दुकानें बंद करवाकर बापू को श्रृद्धा सुमन अर्पित किए जाते हैं। दिल्ली में संपन्न नौवें प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए महात्मा गांधी के पुजारी सखामित्र अश्विनी ने एक अनोखा संकल्प लिया है। अश्विनी ने बापू के शांति और अहिंसा के संदेश को समूचे विश्व में गुंजायमान कारने का बीड़ा उठाया है। सम्मेलन में लंदन, कनाड़ा, आफ्रीका से आए भारतवंशियों ने उनसे मिलकर इन देशों में बापू के संदेश के प्रचार प्रसार का आग्रह किया है। अश्विन का मानना है कि बापू हमेशा निचले तबके के सहारा माने जाते रहे हैं। फिल्म और थियेटर की दुनिया के सशक्त हस्ताक्षर अश्विनी ने पीस टू जर्नी नामक एलबम के माध्यम से इसका प्रचार प्रसार करने का निर्णय लिया है, यह एलबम इस साल गांधी जयंती पर लांच होने की उम्मीद है।

अब नहीं लगा सकोगे विदेशियों को चूना

जब भी कोई गोरी चमड़ी वाला हिन्दुस्तान की सैर पर आता है, उसे लूटना भारत के आटो चालक अपना धर्म समझते हैं। एक के बदले दस वसूलने के आदी हो चुके महानगरों के आटो चालकों को सबक सिखाने के लिए दुनिया के चौधरी अमेरिका में नायाब मुहिम छेड़ी है। अमेरिका की एक कंपनी ने अपनी वेब साईट पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) सहित अठ्ठारह शहरों के लिए फेयर पोर्टल लांच किया है। टेक्सीआटोफेयर डॉट काम नामक इस वव साईट पर देशी विदेशी पर्यटक अपने रूट मेप, आटो का किराया आदि की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसमें दिल्ली, एनसीआर के अलावा मुंबई, बंगलुरू, कोलकता, पुणे, अहमदाबाद, अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़, औरंगाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, त्रिवेंद्रम, पटना, मंगलौर, नागपुर शहरों की जानकारी का समावेश किया गया है। अब अमेरिका वालों को कौन समझाए कि आप भले ही पोर्टल पर चाहे जो जानकारी डाल दंे, पर यह हिन्दुस्तान की बिगड़ैल व्यवस्था है, इसमें कोई लगाम नहीं लगा सकता है। यहां नियम कायदे कानून हैं, आटो का किराया भी निर्धारित है, किन्तु उसका पालन करने की फुर्सत न तो आटो चालकों को है, और ना ही यातायात पुलिस के बस की ही बात है।

पुच्छल तारा

स्वच्छ छवि वाले अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार, घपले घोटालों की भरमार देखकर कांग्रेस के आला नेताओं को छोड़कर समूचा देश हैरान परेशान है। इसी मामले में केरल के त्रिशूर से सविता नायर ने ईमेल भेजा है। सविता लिखती हैं कि स्विस बैंक में जमा धन, घपले, घोटाले भ्रष्टाचार में कांग्रेस ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। अब तो लोग कहने लगे हैं कि दो सौ सालों में अंग्रेजों ने हमें क्या लूटा होगा जितला महज साठ सालों में ही देश के जनसेवकों और नौकरशाहों ने हमें लूट लिया है।

ये है दिल्‍ली मेरी जान

आवाम ए हिन्‍द 18 जनवरी 2011

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

विदेशी कम्पनी मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा शिक्षा तंत्र पर अध्ययन

शिक्षा के विकास में मध्यप्रदेश सर्वश्रेष्ठ राज्य

नई दिल्ली (ब्यूरो)। मध्यप्रदेश को शिक्षा के विकास के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया। विदेशी कम्पनी मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा 20 देशों में शिक्षा तंत्र पर किये गये अध्ययन पर जारी रिपोर्ट में शिक्षा तंत्र को खराब से बेहतर कैसे बनाया जाए, बेहतर से अच्छा कैसे बनाया जाए और अच्छे से सर्वश्रेष्ठ कैसे किया जाए। यह अध्ययन आर्मीनिया, बोस्टन, चिली, इंग्लैण्ड, घाना, हॉग कॉग, जॉर्डन, लात्विया, लिथुवानिया, कैलीफोर्निया, ब्राजील, ओन्टेरिया, पोलैण्ड, सैक्सोनी, सिंगापुर, सिलोवानिया, दक्षिण कोरिया, वेस्टर्न केप (दक्षिण अफ्रीका) जैसे देशों में किया गया।

मैकेन्सकी एण्ड कम्पनी द्वारा ’विश्व के स्कूल शिक्षा तंत्र को कैसे बेहतर बनायें’ के अध्ययन पर हाल ही में जारी रिपोर्ट में विश्व के लगभग 20 स्कूल तंत्रों पर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों पर अध्ययन किया गया। जिसमें लगभग 200 लोगों से साक्षात्कार और 600 लोगों से उनके विचार लिये गये।

रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में पिछले दो से चार सालांें के अंदर प्रदेश में साक्षरता और शिक्षित लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग और सम्पन्न वर्गों के बीच की खाई के अंतर में काफी कमी आयी है। मध्यप्रदेश में शिक्षा तंत्र के अनुसार कक्षा 2 से 5 तक जो छात्र गणित में गुणा भाग में दक्ष हो और पठन में कक्षा 2 की पुस्तक को पढ़ सके, के मापदंड रखे गये हैं। इसके अनुसार पिछले 2 से 4 सालों में गणित की दक्षता में 8 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है जबकि राष्ट्रीय औसत सामान्य से घटकर 9 अंक हो गयी है। इसी तरह पढ़ने के क्षेत्र में 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 2 प्रतिशत बढी है।

शिक्षा तंत्र में आये भारी बदलाव प्रदेश में समर्पित नेतृत्व, तय मानकीकरण, शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण और विद्यार्थियों को सामान्य जरूरतों को पूरा करना जिसमें मध्यान भोजन, मुफ्त वर्दी और साइकिल आदि उपलब्ध कराना है।

Latest Report on Education System by Mckinsey & companyNew Delhi, January 14, 2011

Madhya Pradesh Adjudged the Best State in the Field of Education Development



Madhya Pradesh (in India) was adjudged as the best state in the field of education development particularly,Ow does a school system with poor how does a school system with poor performance become good? And how does one good performance become excellent. The study was conducted in the countries like Armenia, Aspire (a US charter school sytem), Boston, Chile, England, Ghana, Hong Kong, Jordon, Latvia, Lithuania, California, Minas Gerais(Brazil) Ontario, Poland, Saxony, Singapore, Slovenia, South Korea and Western Cape (South Africa) by Mckinsey &company .

In its new Report by on How the World's most improved school system keep getting better by Mckinsey and company, 20 school systems from around the World were analyzed, all with improving but differing level of performance, examining how each was achieved significant, sustained, and widespread gains in students outcomes as measured by international and national assessments. Based on over 200 interviews with system stakeholders and analysis of some 600 interventions carried out by these systems. The Report identifies the reform elements that are applicable for school systems elsewhere as they move from poor to fair to good to great to excellent performance.

The Report says that, "even systems starting from low level of performance, such as Madhya Pradesh in India have significantly improved their literacy and numeracy levels within just 2 to 4 years, while making strides in narrowing the achievement gap between students from different socio-economic background. Improvement can start from any student outcome level, whatever the geography, culture or income."

In Madhya Pradesh, the education system aspire from every student in class 2 through 5 to be proficient in reading and mathematics (mathematics is proficiency in division: reading is proficiency in reading standard 2 text). In

mathematics there was 8 per cent increase in proficiency compared to the national average which was minus 9 per cent. As regards reading there was 9 per cent increase in proficiency compared to national level i.e. 2 per cent increased.

The drastic change in the education system is possible because of the committed leadership, standardized, scripted teaching techniques (highly prescriptive curriculum, teaching methods), teachers coaches, data monitoring and basic needs provisions like mid day meal programme, free uniform and bicycles etc.

जनपद सदस्य का चुनाव जीतने के बाद से लालचंद ने अपने ग्राम मे नही रखा है पैर

अनोखा संकल्प लालचंद की गले की फांस बना

महज 3 किलोमीटर सड़क बनाने का संक ल्प नही कर पाया है पूरा *
नेताओ और अधिकारियो के दरवाजो पर माथा टेकने मे निकल गये 1 वर्ष 
* सिवनी विधान सभा की इससे अधिक दुर्दशा की कहानी और क्या होगी

सिवनी आदिवासी विकास खंड छपारा का एक जनपद सदस्य पिछले एक वर्ष से जनपद सदस्य का चुनाव जीतने के पश्चात आज तक अपने ग्राम मे नही पहुंचा है। उस जनपद सदस्य को पूरे ग्राम के व्यक्तियो एवं उसके परिजन उसके समर्थक और जनप्रतिनिधि मना मना कर थक गये है। परन्तु वह अपने संकल्प को जब तक पूरा नही करेगा। तब तक ग्राम मे पैर नही रखेगा। उक्त जनपद सदस्य ने कोई बडा संकल्प नही लिया है। बहुत छोटा सा संकल्प है। परन्तु विकास की गंगा बहाने वाला शिवराज सिंह का शासन उसके उस संकल्प को पूर्णता प्रदान नही कर रहा है। जिससे आदिवासी क्षेत्रो का विकास करने के प्रति सरकार की गति को और मानसिकता को समझा जा सकता है। इस क्षेत्र से बहुत ही संवेदन शील मानी जाने वाली सिवनी विधायक का बड़ा गहरा संबंध है। जनपद सदस्य से अपना राजनैतिक सफर प्रारंभ करने वाली श्रीमति नीता पटेरिया इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य रही फिर ५ वर्ष सांसद भी रही और अब सिवनी विधान सभा क्षेत्र से विधायक होने के साथ ही महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष है। परन्तु इनकी विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाला एक आदिवासी ग्राम जहां से हर वर्ष २५ से ३० लाख रूपये का सीताफल दिल्ली सहित अन्य प्रदेश को लिये निर्यात होता है। ऐसे वन ग्राम मे महज तीन किलोमीटर की सड़क नही बन पा रही है। क्षेत्र के लोगो ने अपने क्षेत्र की सबसे बडी इस समस्या के निराकरण के लिये लालचंद धुर्वे नामक व्यक्ति को जनपद सदस्य निर्वाचित किया छपारा जनपद पंचायत के वार्ड क्र मांक १२ से निर्वाचित जनपद सदस्य लालचंद धुर्वे ने भी बहुत छोटा काम समझकर संकल्प ले लिया कि जब तक उसके ग्राम खैरमटाकोल से बंधानी तक ३ किलोमीटर की पक्की सड़क नही बन जायेगी। वह अपने ग्राम मे पैर नही रखेगा। परन्तु लाल चंद धुर्वे को वह संकल्प बहुत अधिक मंहगा साबित हो रहा है। लगभग १ वर्ष का समय बीत चुका है। वह अपने ग्राम मे पैर नही रख पाया है। महज तीन किलोमीटर की सड़क बनाने के लिये उसने हर सक्षम जनप्रतिनिधि और हर अधिकारी की चौखट पर माथा रगड़ लिया है। परन्तु सड़क बनने का आश्वासन भी अभी तक कही से प्राप्त नही हुआ है। पूरे मध्यप्रदेश की राजनीति मे छायी रहने वाली इस क्षेत्र की दो महान हस्तियां आदिवासी जनपद सदस्य की पीड़ा को नही समझ पा रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह जो आदिवासियो के हितो के प्रति हमेशा सजग रहते है। और अपने आप को उनका सबसे अधिक हितेषी बताते है। वही छपारा क्षेत्र मे विकास की गंगा बहाने वाली सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया भी अपनी उपलब्धियो का बखान करते रहती है। परन्तु आदिवासी निर्वाचित जनप्रतिनिधि महज तीन किलोमीटर की सड़क बनाने के संकल्प पूरा करने के लिये दर-दर की ठोंकरे खा रहा है जो बडबोले नेताओ की करनी और कथनी को स्पष्ट करता है। मध्यप्रदेश विधान सभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह को ऐसे छोटे मोटे कार्य कराने के लिये केवल आदेश देने की आवश्यकता काम चुटकि मे हो सकता है सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया भी इस काम को कराने मे रूचि ले ले तो कार्य होना कोई मुश्किल नही है। और इस प्रकार के कार्य कराने की उनकी अपनी नैतिक जिम्मेदारी है। क्योकि वे इस क्षेत्र से निर्वाचित विधायक है। हलांकि पहले सांसद भी रह चुकी है। जो संकल्प जनपद सदस्य ने लिया है उसकी आवश्यकता ही नही पड़ऩी थी। सिवनी बालाघाट सांसद के.डी. देशमुख ने भी उक्त जनपद सदस्य की समस्या को टालते हुए सी.सी. एफ के पास पहुंचा दिया जबकि वह सी.सी.एफ के यहां चक्कर काट काट कर अपनी चप्पल घिस चुका है। रोजगार गारंटी योजना, प्रधान मंत्री सड़क योजना, मुख्यमंत्री सड़क एवं वनसुरक्षा समीतियो द्वारा किये जाने वाले विकास कार्यो के मद से इस छोटी सी सड़क निर्माण आसानी से किया जा सकता है परन्तु सड़क निर्माण न होना कही न कही किसी बडे जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत अरूचि का कारण और आदिवासी समाज के प्रति घटिया सोच का परिणाम कहा जा सकता है। विकास अपने क्षेत्र विकास के प्रति संकल्पवान जनप्रतिनिधियो की कैसे दुर्दशा होती और आदिवाासियो के साथ किस प्रकार का दुव्र्यहार हो रहा है यह लालचंद धुर्वे की दशा क ो देखकर अनुमान लगाया जा सकता है। और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जो मंच से यह घोषणा करते नही थक रहे है कि खजाने पर सबसे पहला अधिकार आदिवासियो का है उन्हे इस प्रकार के बाधित कार्यो की समीक्षा अवश्य करना चाहिए।

आर्थिक समानता से सामाजिक और राजनैतिक समानता आयेगी-मिश्रा

आर्थिक समानता से सामाजिक और राजनैतिक समानता आयेगी-मिश्रा
सिवनी -:''बिना सहकार नहीं उद्धारÓÓ यह सहकारिता का उद्घोष है। सहकार भारती ने इसमें संस्कार शब्द जोड़कर सहकारिता को नया रूप प्रदान किया है, भारत के संस्कारों में सहकार की भावना हजारों-हजारों साल से विद्यमान है पाश्चात्य संस्कृति ने आज स्वरूप को विकृत कर दिया है, परंतु जबतक इसे सशक्त नहीं किया जायेगा। भारत की वर्तमान दुर्दशा को सुधारना संभव नहीं है, सहकार में ही भारत की समृद्धि सामाजिक समानता और राजनैतिक समानता का विकास संभव हैं, यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विवादपूर्ण घनश्याम मिश्रा ने आज सहकार भारती के स्थापना दिवस के अवसर पर जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन के दौरान कही। आज जिला सहकारी बैंक कन्द्रीय बैंक के छत पर सहकार भारती का स्थापना दिवस जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक तेकाम के मुख्य आतिथ्य एवं सहकार भारती के अध्यक्ष राजेन्द्र विश्वकर्मा की अध्यक्षता में मनाया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलिति किया गया अतिथि स्वागत के पश्चात मुख्य अतिथि अशोक तेकाम ने अपना संक्षिप्त उद्बोधन दिया और कहा कि सहकारिता का क्षेत्र इतना विशाल है कि इसके माध्यम से हर क्षेत्र में कार्य किये जा सकते और कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं जहां इस क्षेत्र में कार्य कर रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं वहीं छोटे-छोटे कार्यो में लगे हुए व्यक्तियों को  शोषण से मुक्त कराकर उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सकता है। इसके पश््रचात मुख्य वक्ता श्री घनश्याम मिश्रा ने सहकार से राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने की अवधारणा को प्रतिपादित करते हुए कहा कि सहकार कोई नई कल्पना नहीं है इस प्रकार की व्यवस्था हमारे वेदो मे भी प्राचीन काल से थी, और इसी कारण भारत का सम्मान विश्व मे रहा है। उच्चकोटि के संस्कार और सामाजिक व्यवस्थाये विश्व के  लिये अनुकरणीय रही हैै। संस्कार युक्त सहकार से ही भारत की समस्याओ का निराकरण संभव है।  उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय अध्यात्म, संस्कार और ज्ञान पर व्याख्यान देकर शिकागो धर्म सभा मे भारतीय दर्शन को उच्च कोटि का स्थान दिलाया था। परन्तु भारत की गरीबी अशिक्षा ने उन्हे बुरी तरह झंकझोर दिया था पं. दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार आद्यशंकराचार्य भी हजारो वर्ष पहले आसमानता से व्यथित थे। और उन्होने समाज को एक दूसरे की चिंता करने का संदेश दिया था एक दूसरे का सहयोग करना ही सहकार है। समाज के दबे -कुचले विकास की मुख्य धारा से छुटे हुये व्यक्तियो को विकास की मुख्यधारा से जोडने का सामाजिक प्रयास ही सहकार है। जब तक बेहतर सोच के साथ प्रयास नही होंगे और समाज के व्यक्तियो की रोटी, शिक्षा, मकान की चिंता नही की जायेगी। देश का भला नही हो सकता एक तरफ आधुनिकता की दौड़ बडी-बडी अट्टालिकाऐ और दूसरी तरफ भूखमरी, अशिक्षा और फु टपाथों  पर बड़ी संख्या मे व्यक्ति जीवन यापन कर रहें हैं। यह स्वास्थ्य सामाजिक व्यवस्था नही कही जा सकती भारतीय जीवन दर्शन सभी को एक दूसरे का भाई के रूप मे प्रतिपादित करता है। उसी भावना से हमे अपने जीवन मूल्यो को प्रतिबिंबित करना चाहिए। स्वर्ग मरने के पश्चात ही नही मिलता जहां हम रहते जिस समाज के बीच रहते है। उसे ही स्वर्ग बनाने की भावना से मिलजुलकर काम करे। इसी प्रकार  सहकार से उद्धार की कल्पना की जा सकती है। आर्थिक समानता से सामाजिक समानता और सामाजिक समानता से राजनैतिक समानता आसानी से प्राप्त हो सकती है। जो उपेक्षित और दबा कुचला समाज है उसे पहले आर्थिक रूप से संपन्न करने की आवश्यकता है। और आर्थिक समानता सामाजिक समानता और राजनैतिक समानता लाने मे सक्षम है। यह बहुत दुखद पहलू है कि आज विश्व आधुनिकता के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है, और उसी क्रम में भारत भी विकास की गति में कमजोर नहीं है, परंतु आज भी, समाज के बहुत बड़े वर्ग का उद्धार नहीं हो पाया है, आज भी अशिक्षा, भूखमरी हमारा पीछा नहंी छोड़ रही है, इस कलंक को धोये बिना सशक्त भारत का निर्माण नहीं हो सकता और इसकी जिम्मदारी आपसी सहयोग से ही संभव है, श्री मिश्रा ने कहा कि अपने आने वाले समय को सुख समृद्धिपूर्ण बनाने के लिए सभी वर्गाे के सम विकास की चिन्ता करना होगी।
कार्यक्रम मे विशेष अतिथि के रूप मे संतोष अग्रवाल एवं अधिवक्ता राजेन्द्र विश्वकर्मा, राजेश उपाध्याय, भूमि विकास बैंक के संचालक प्रहलाद पटेल, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी, समीर अग्रवाल, श्रीमती निर्मलाठाकुर, श्रीमती संगीता उपाध्याय श्रीमती आशा अवस्थी, सुश्री रानीबघेल, श्रीमती शान्ति बघेल, श्रीनिवास मूर्ति, नरेंन्द्र टॉक, आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।  कार्यक्रम का संचालन अजय डागोरिया द्वारा किया गया, कार्यक्रम में सहकार भारती के पदाधिकारी एवं अन्य जन बडी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में रजेन्द्र विश्वकर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

कृष्णा की बिदाई लगभग तय

शर्मा और सिब्बल हैं विदेश मंत्रालय के दावेदार

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा का मंत्रालय बदलना लगभग तय ही माना जा रहा है।

भारत गणराज्य के नए विदेश मंत्री के लिए वर्तमान वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और मानव

संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल सशक्त दावेदार बनकर उभरे हैं। आनंद शर्मा सोनिया

गांधी तो सिब्बल प्रधानमंत्री की पहली पसंद बताए जा रहे हैं।ं

कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ

रही खबरों के अनुसार विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर की बिदाई के बाद से ही सोनिया गांधी को

कृष्णा की कार्यप्रणाली पसंद नहीं आ रही है। वहीं दूसरी और वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा

द्वारा बिना नागा के हर सप्ताह अंतर्राट्रीय मसलों पर एक सटीक नोट कांग्रेस अध्यक्ष के

सामान्य ज्ञान को बढ़ाने की गरज से पेश कर दिया जाता है, जिससे आनंद शर्मा के नंबर 10

जनपथ में जबर्दस्त तरीके से बढ़ चुके हैं।

बताते हैं कि आनंद शर्मा वैसे भी प्रधानमंत्री को फूटी आंख नहीं सुहाते, इसलिए वजीरे आजम

डॉ.मनमोहन सिंह चाहते हैं कि कृष्णा के स्थान पर कपिल सिब्बल को फिट किया जाए। सियासी

गलियारों कें चल रही बयार के अनुसार दोनों ही स्थितियों में मौजूदा विदेश मंत्री कृष्णा का

जाना तय है। गौरतलब होगा कि पिछले दिनों एस.एम.कृष्णा को मीडिया के सामने स्पष्टीकरण

भी देना पड़ा था कि उनके हाथ से विदेश मंत्रालय कतई नहीं फिसलने वाला है।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि पीएम चाहते हैं कि कृष्णा के स्थान पर सिब्बल और सिब्बल
की जगह सलमान खुर्शीद को एचआरडी मिनिस्ट्री की कमान सौंपी जाए। अगर एसा हुआ तब
खुर्शीद के स्थान पर अंतुले जैसे कट्टरपंथी नेता को लाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक मजबूत किया
जा सकता है।