सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

हिमाच्छादित गांवों की भाजपा सरकार ने सुध लेना तक छोडा


हिमाच्छादित गांवों की भाजपा सरकार ने सुध लेना तक छोडा

(चन्द्रछशेखर जोशी)

देहरादून (साई)। उत्तराखण्ड  विधानसभा चुनावों  के दौरान मनमोहक नारों से लुभाने के बाद हिमाच्छादित गांवों को भाजपा सरकार ने सुध लेना तक छोड दिया है। जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।
उत्तरकाशी के यमुनोत्री, गंगोत्री तथा टौंस हरकीदून घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्र में कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा हो गई है। बर्फबारी होने के कारण रास्ते बंद हो गए हैं। कड़ाके की ठंड और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में रास्ते बंद होने से हनुमानचट्टी, चानकीचट्टी, ओसला, पंवाणी, फतेहपर्वत तथा उपला टकनौर क्षेत्र के गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बर्फबारी और बर्फीले तूफान से मोरी, भटवाड़ी, डंडालगांव, राड़ी, जानकीचट्टी, सांकरी और हर्षिल क्षेत्र में तथा यमुनोत्री राजमार्ग पर डंडालगांव से राड़ी टॉप व सयानाचट्टी से आगे तथा हरकीदून घाटी में सांकरी से ऊपर के गांवों में भारी बर्फबारी शुरू होने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। ऊंचाई वाले हिस्सों में यातायात ठप हो गया है। लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता पूछ रही है कि कौन है जरूरी, विज्ञापनों पर भरोसा करते हुए हमने मतदान कर दिया अब आप भी हमारे लिए क्घ्या है जरूरी, समझ पर हम पर तरस खाओ, आवश्घ्यक सुविधा उपलब्घ्ध कराओ, उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के हिमाच्छादित गांवों में कैद लोगों की समस्याएं बढ़ गयी हैं।  यहां सड़क, पेयजल, विद्युत और संचार जैसी ढांचागत सुविधाओं के अभाव से क्षेत्र वीरान पड़े हुए हैं। फरवरी बीतने को है, लेकिन जिले के आठ हजार फिट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अब भी दो से छह फीट तक बर्फ जमा है।
वहीं दूसरी ओर जिले के डोडीताल, दयारा, हर्षिल, गंगोत्री, गोमुख, तपोवन, केदारताल, कुश कल्याण, जौराई, यमुनोत्री, सांकरी, हरकीदून और केदारकांठा आदि तमाम पर्यटक स्थल और ट्रैक बर्फ से लकदक हैं। बर्फबारी के बाद खुशगवार हुए मौसम में इन पर्यटक स्थलों का नैसर्गिक सौंदर्य देखते ही बनता है। समान भौगोलिक परिस्थितियों वाले जम्मू कश्मीर और हिमाचल में हिमाच्छादित पर्यटक स्थलों का लुत्फ लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां पर्यटकों का टोटा है ऐसा नहीं कि पर्यटक यहां आना नहीं चाहते, बल्कि ढांचागत सुविधाओं के अभाव तथा ट्रैकिंग की अनुमति न मिलने से फिलहाल साहसिक पर्यटन पर ब्रेक लगे हुए हैं। ऐसे में यहां पर्यटन का अपेक्षित विकास न होने से इस पर टिकी आजीविका वाले लोग मायूस हैं। 
वहीं बारिश और बर्फबारी के बाद जिले में फिर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बर्फबारी और घाटी वाले क्षेत्रों में बारिश से जहां कई रास्ते बंद हो गए हैं, वहीं जिले के ऊंचाई वाले गांवों का देश दुनिया से संपर्क कट गया है। हरकीदून और टौंस घाटी में सांकरी ताल्लुका तथा फतेह पर्वत क्षेत्र में बर्फबारी से फिर कई सड़कों पर यातायात ठप हो गया है।
गंगोत्री राजमार्ग का आबादी से जुड़ा 32 किमी हिस्सा बर्फ से पटने से उपला टकनौर के सीमावर्ती क्षेत्र के गांव एक बार फिर बर्फबारी में कैद होकर अलग-थलग पड़ गए हैं। यमुनोत्री, टौस और हरकीदून घाटी में बर्फबारी से क्षेत्र की मुश्घ्किलें बढ गयी है। गंगोत्री राजमार्ग पर गंगनानी से धराली आबादी क्षेत्र तक कई किमी हिस्सा बर्फ से ढक गया है।

बड़े काम की है अरण्डी


हर्बल खजाना ----------------- 29

बड़े काम की है अरण्डी



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। अरण्डी की खेती भारत के अनेक हिस्सों में की जाती है। आयुर्वेद में अरण्डी के एक विरेचक औषधि के तौर पर उत्तम माना गया है। अरण्डी का वानस्पतिक नाम रिसिनस कम्युनिस है। अरण्डी के तेल को मुख्यतः जुलाब लेने के लिए उपयोग में लिया जाता है।
एक कप दूध में २ चम्मच तेल डालकर सोते समय पीना चाहिए। असर न होने पर इसकी मात्रा दूसरे दिन बढ़ाकर लेना चाहिए। स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके या नीबू रस में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है।
अरण्डी पुराने मल को निकालकर पेट को हल्का करती है। यह वात, साइटिका, पेट में पानी की अधिकता, समस्त वायुरोगों की नाशक है। इसके पत्ते, जड़ और बीज उसका तेल सभी औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते है। डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार अरण्डी के फूल ठंड से उत्पन्न रोग जैसे खांसी, जुकाम और बलगम तथा पेट दर्द संबधी बीमारी का नाश करते है।
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार ऐसे शिशु जिनके सिर पर बाल नहीं उगते हो या बहुत कम हो या ऐसे पुरुष-स्त्री जिनकी पलकों व भौंहों पर बहुत कम बाल हों तो उन्हें एरंड के तेल की मालिश नियमित रूप से सोते समय करने की सलाह देते है। अरण्डी की जड़ का काढ़ा छानकर एक-एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें, ऐसा करने से मोटापा कम हो जाता है।

(साई फीचर्स)

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

ओले पाले पर सवार शिवराज की विकास यात्रा!


ओले पाले पर सवार शिवराज की विकास यात्रा!



(लिमटी खरे)

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के निराशजनक प्रदर्शन, कमजोर विपक्ष के बल पर भाजपा अपने नौ साल का शासन पूरा करने जा रही है। सूबे में भाजपा की विकास यात्रा निकल रही है। भाजपा कहती है यह विकास यात्रा संगठन की है, सत्ता को इससे कुछ लेना देना नहीं है। उधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पगड़ी वाली फोटो के साथ सूबे का जनसंपर्क महकमा पूरे पेज के मंहगे रंगीन विज्ञापन जारी कर विकास यात्रा का गुणगान करता है। यह बात समझ से परे है कि विकास यात्रा सत्ता की है या संगठन की! इस मामले में कांग्रेस को मानो सांप सूंघ गया है। सिवनी जिला मुख्यालय में विकास यात्रा का आगाज 17 फरवरी से किया गया, 15 फरवरी को ग्रामीण अंचलों में ओले से गरीब अन्नदाता किसानों की फसलें खराब हुईं, भाजपा पर सेठ साहूकारों की पार्टी होने का आरोप भी है अब भाजपा शहर के सेठ साहूकारों से पूछती फिर रही है कि उन्हें कितना नुकसान हुआ है! गरीब गुरबों की सुध लेने वाला कोई भी नहीं है। अभी 2010 में हुई अतिवृष्टि ओला वृष्टि का मुआवजा भी नहीं मिल पाया है।

भारतीय जनता पार्टी की किस्मत वाकई मध्य प्रदेश में बेहद अच्छी कही जा सकती है, क्योंकि 2003 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस के मुंह की खाने के उपरांत किसी भी नेता ने इसे उठाने का जतन नहीं किया। तत्कालीन अध्यक्ष सुभाष यादव, उसके बाद सुरेश पचौरी और अब कांतिलाल भूरिया भी कमजोर विपक्ष के सूत्रधार माने जा सकते हैं। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेस को न जाने कितने लुभावने मौके दिए जिन पर अगर कांग्रेस अड़ जाती तो शिवराज सिंह चौहान को बैकफुट पर जाने पर मजबूर होना पड़ता। विडम्बना यह है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस बिना रीढ़ की हो चुकी है।
मीडिया में कांग्रेस पर ‘‘मैनेज‘‘ होने के आरोप लग रहे हैं। विदिशा में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल अपना फार्म ही दाखिल नहीं कर पाते हैं। जनता हैरान हुई, राजकुमार पटेल जो दिग्विजय सिंह के खासुल खास हैं और मध्य प्रदेश सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री रहे हैं, उनसे इस तरह की गल्ति की उम्मीद नहीं की जा सकती। जनता परेशान पर कांग्रेस के नेता तो नीरो के मानिंद बजाते ही रहे बांसुरी।
भाजपा की विकास यात्रा के बारे में सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि यह यात्रा सरकारी नहीं संगठन की है। सरकार को इससे कुछ लेना देना नहीं है। नरोत्तम मिश्रा के बयान के तीन दिन बाद ही अखबारों में भर पेज के रंगीन विज्ञापन जारी कर दिए जाते हैं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट द्वारा। क्या माना जाए? यह विकास यात्रा सरकारी है या पार्टी की? इस मसले पर भी कांग्रेस ने अपना मुंह सिल रखा है। यह सरकारी पैसे के दुरूपयोग का मामला है। कांग्रेस और भाजपा की नूरा कुश्ती में मध्य प्रदेश की जनता पिस रही है।
विधायक और सांसद विकास यात्रा में जी जान से जुटे हैं कहीं कहीं सांसदों विधायकों के कन्नी काटने की खबर भी है। कुल मिलाकर विकास यात्रा में शिवराज सिंह चौहान ने सरकारी मशीनरी को पूरी तरह झोंक दिया है। विकास यात्रा की आड़ में केंद्र सरकार से आई इमदाद का मद ही बदलकर उसे बलराम योजना का नाम दिया जाकर हर गांव में भूमिपूजन का प्रोग्राम किया जा रहा है। एकाध जिले को छोड़कर बाकी हर जिले में कांग्रेस यहां तक कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस मामले में अपना मौन तोड़ने को तैयार नहीं दिख रही है।
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में भी शिवराज सिंह का विकास रथ दौड़ रहा है। गति इस कदर तेज है मानो आंधी आ रही हो। परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद और जिला मुख्यालय सिवनी को अपने में समाहित करने वाली सिवनी विधानसभा की विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा एक सप्ताह में दौ सौ गांवों का दौरा कर लिया जाता है। देश भर के लोग हैरान हैं कि आखिर किस गति से विधायिका जी ने शिव के रथ को दौड़ाया?
कहा जाता है कि श्रीमति पटेरिया में गजब की संगठनात्मक ताकत है। वे गजब की तेजी से जनसंपर्क करतीं हैं। पूर्व में सांसद रहते श्रीमति पटेरिया के बारे शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल ने आरोप लगाया है कि उन्होंने एक सरकारी अधिकारी के परिजन के नाम से आरटीओ पंजीबद्ध निजी वाहन को अपना बताकर एक दिन में सात सौ किलोमीटर का जनसंपर्क पर डीजल भी ले लिया था। जबकि डीजल उन्हें उनके अपने वाहन के नाम पर ही मिल सकता है। तत्कालीन जिलाधिकारी सिवनी रहे पिरकीपण्डला नरहरि को शायद इस बात की भनक थी, पर वे मजबूरी में शांत रहे। तत्कालीन सांसद का साथ देने का ईनाम उन्हें अब मिला और वे आज ग्वालियर जैसे संभागीय मुख्यालय में कलेक्टर की आसनी पर विराजमान हैं।
सिवनी शहर से लगे ग्राम डोरली छतरपुर के आसपास एक शेरनी और दो शावकों के होने की खबर है। एक बुजुर्ग के शिकार की चर्चा भी इस शेरनी द्वारा किए जाने की है। इस मामले में मीडिया चीख पुकार कर रहा है, पर सांसद विधायक को अब तक शिवराज सिंह चौहान की विकास यात्रा से फुर्सत नहीं मिल पाई कि वे वन विभाग से इस बारे में मालुमात कर सकें। जबकि विकास यात्रा में पूरा सरकारी अमला विधायक सांसद के साथ कदम से कदम मिलाकर ही चल रहा है।
15 फरवरी को सिवनी में गजब का तूफान आया। ओलों ने किसानों की खड़ी फसले और वृक्षों पर बैठे परिन्दों को अपनी चपेट में ले लिया। चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है। अब चूंकि विकास यात्रा में  परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद और जिला मुख्यालय सिवनी को अपने में समाहित करने वाली सिवनी विधानसभा की विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया अपनी विधानसभा के दो सौ से भी ज्यादा गांवों का दौरा करके आ चुकीं हैं अतः दुबारा किसानों का दुख दर्द भला वे कैसे पूछने जाएं।
विकास यात्रा का अंतिम चरण यानी शहर में यह यात्रा आरंभ हो चुकी है। अमूमन शहर में संपन्न किसान यानी सेठ साहूकार ही बसते हैं जिनके पास जमीनों की कमी नहीं है। क्या इन परिस्थितियों में यह माना जाए कि सेठ साहूकारों की पार्टी होने का तमगा पीठ पर लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी अब सेठ साहूकारों से उनकी फसलों की नुकसानी जानने आतुर है।
वस्तुतः होना तो यह चाहिए था कि सिवनी में भाजपा को अपनी विकास यात्रा का रूख शहर के बजाए गांव की ओर करना चाहिए था। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी को साथ लेकर देश के अन्नदाता किसान की रिसते घावों पर मरहम लगाना था। कुछ दिन पूर्व भी बरघाट के विधायक कमल मस्कोले और सिवनी विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया ने किसानों से हमदर्दी बताकर दौरा करने की बात मीडिया में सुर्खियों में आई थी। होना तो यह चाहिए था कि विधायकों को विकास यात्रा के इस ढकोसले को तजकर अब तक प्रशासन से मिलकर आनावारी तक तय करवा दी जानी चाहिए थी। वस्तुतः एसा हुआ नहीं है।
वैसे मध्य प्रदेश के किसान इस बात को अभी नहीं भूले होंगे कि वर्ष 2010 में उनकी फसलें ओला पाला से नष्ट हो गईं थीं। इसके बाद लुभावने वादे करने में अग्रणी सूबे के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने चार सौ करोड़ रूपयों से ज्यादा बांटने की बात बुरदलोई मार्ग पर स्थित मध्य प्रदेश भवन में पत्रकारों से रूबरू होकर कहीं थीं। उन्होने कहा था कि कांग्रेसनीत केंद्र सरकार द्वारा मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
वास्तविकता यह थी कि ओला पाला प्राकृतिक आपदा में शामिल ही नहीं है। इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार आखिर मध्य प्रदेश के किसानों को कैसे मदद करती। 2011 के शुरूआती माहों में जब भी शिवराज सिंह चौहान दिल्ली आए उन्होंने केंद्र से मुआवजा नहीं देने के आरोपों को मीडिया के सामने जमकर उछाला। वस्तुः शिवराज सिंह चौहान को यह मांग प्रधानमंत्री से करना था कि आला पाला को प्राकृतिक आपदा में शामिल किया जाए ताकि भविष्य में किसानों को इसका लाभ मिले।
शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार और प्रभात झा के नेतृत्व में भाजपा संगठन विकास यात्रा पर है। यह विकास यात्रा में 2010 में ओला पाला प्रभावित किसानों के रिसते घावों पर मरहम लगाएगी या नकम छिड़केगी, यह तो वक्त ही बताएगा पर सिवनी जिले में विकास यात्रा का रूख पुनः गांव की ओर कर किसानों को सांत्वना देने के बाजए सेठ साहूकारों के बीच जाकर भाजपा आखिर साबित क्या करना चाह रही है यह प्रश्न अवश्य ही विचारणीय कहा जा सकता है।

सिवनी को क्या हालिस हुआ पावर ग्रिड से!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  68

सिवनी को क्या हालिस हुआ पावर ग्रिड से!

विकास के नाम पर विनाश के ठेकेदार हैं क्यों मौन



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर दौलतमंद उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड घंसौर में स्थापित किए जाने वाले 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट से सिवनी जिले को आखिर क्या मिलेगा? विकास की दुहाई देने वाले जिले के सियसी नेता आखिर इस मामले में शांत क्यों हैं कि सिवनी शहर के पास स्थापित पावर ग्रिड के बावजूद सिवनी की झोली में आखिर क्या आया।
गौरतलब है कि देश के सबसे बड़े पावर ग्रिड की स्थापना मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में की गई है। यह पावर ग्रिड सिवनी शहर की उत्तर दिशा में शहरी सीमा से महज तीन किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में नेशनल हाईवे पर अवस्थित है। इस पावर ग्रिड के लिए बड़ी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इसके बनने के उपरांत इसे राष्ट्र को समर्पित किए बिना ही आरंभ कर दिया गया है।
माना जा रहा था कि इसके बनने से यहां आबादी रहेगी और सिवनी के बाजार को प्रत्यक्ष तौर पर इसका लाभ मिलेगा। विडम्बना है कि इसका कोई भी लाभ प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर सिवनी को नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं सिवनी में स्थापित होने के बाद भी एक यूनिट बिजली भी सिवनी को इससे नहीं मिल पा रही है।
सिवनी में जबसे थापर के पावर प्लांट का विरोध आरंभ हुआ है तबसे सियासी नेजा संभालने वालों के पेट में मरोड़ उठने लगी है। चौक चौराहों पर ‘‘बताओ यार, विकास का विरोध कर रहे हैं‘‘ जैसे जुमले आम हो चुके हैं। जिले की जनता इन सियासी नेताओं से इस प्रश्न का उत्तर चाहती है कि आखिर पावर ग्रिड से सिवनी को क्या हासिल हुआ जो पावर प्लांट से होगा?
आज भी पावर प्लांट को लेकर यक्ष प्रश्न बने हुए हैं कि क्या इससे उतपन्न होने वाली बिजली का कोई भाग या प्रतिशत सिवनी जिले को मिलेगा? क्या जिला मुख्यालय सिवनी में संयंत्र प्रबंधन ने तीन साल में अपना कोई कार्यालय खोला है? क्या सिवनी के लोगों को इससे कोई लाभ होगा? सिवनी जिले के कितने कुशल और अकुशल कर्मचारियों को अब तक संयंत्र प्रबंधन ने रोजगार दिया है? संयंत्र प्रबंधन ने प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर नरसिंहपुर और जबलपुर के प्रभावशाली लोगों को ही इससे लाभ पहुंचाया है।
अगर यह सब सच है तो फिर ये सियासी नेता सिवनी को कर्मभूमि बनाने के बजाए बेहतर होगा कि नरसिंहपुर या जबलपुर जाकर नेतागिरी करें। सच्चाई यह है कि गौतम थापर के कोल आधारित पावर प्लांट से सिवनी जिले में कहर बरपेगा। इतना ही नहीं गौतम थापर के पावर प्लांट के उपरांत दो और कोल आधारित पावर प्लांट केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित घंसौर विकास खण्ड में लगने की तैयारी में हैं।
कुल मिलाकर घंसौर के आदिवासियों के सीनों को छलनी करने का ताना बाना बुना जा रहा है और यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

सियासी गलियरे की पसंद नहीं बन पाए पचौरी


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 90

सियासी गलियरे की पसंद नहीं बन पाए पचौरी

पीएम के नए मीडिया सलाहकार की तलाश तेज



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। तीक्ष्ण बुद्धि के धनी वज़ीरे आज़म के मीडिया सलाहकार हरीश खरे को भले ही पीएमओ से विदा कर उनके स्थान पर पंकज पचौरी को बिठा दिया गया हो, पर पीएमओ के सबसे ताकतवर अधिकारी पुलक चटर्जी को अभी भी मनमोहन सिंह के लिए उचित मीडिया सलाहकार की तालश है। दरअसल, यह तलाश मनमोहन सिंह के लिए नहीं वरन्, संभावित प्रधानमंत्री राहुल गांधी के लिए जारी है।
भगवान किसन की नगरी मथुरा मूल के पंकज पचौरी की लाटरी कैसे लगी इस बारे में अभी शोध थमा नहीं है। लोग पचौरी की पीएमओ में आमद को लेकर तरह तरह की शंकाएं कुशंकाएं अनुमान लगा रहे हैं। कहा जा रहा है कि पंकज पचौरी को न तो पुलक चटर्जी को ‘यस बॉस‘ कहने में और ना ही भाषाई पत्रकारों से मेल जोल में कोई एतराज था इसलिए फिलहाल उन्हें पीएमओ में एक कमरा दे दिया गया है।
पचौरी की इन विशेषताओं के अलावा एक और विशेषता भी सियासी गलियारों में चर्चित है। पचौरी की पत्नि मराठी मूल की हैं। इसलिए मराठी पत्रकार लाबी भी उनसे प्रसन्न ही रहेगी। हिन्दी के छोटे बड़े पत्रकारों से पंकज की अच्छी बनती है इसलिए उन्हें हिन्दी भाषी पत्रकारों का सहयोग भी मिल सकता है। पीएमओ में चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाए तो पुलक चटर्जी की अंतिम पसंद के बतौर पंकज पचौरी नहीं हैं, चटर्जी को सटीक मीडिया सलाहकार की आवश्यक्ता है जिसकी खोज वे कर रहे हैं।
पीएमओ की इस तरह की चर्चाएं प्रधानमंत्री के कार्यालय से बाहर भी आ चुकी हैं। संभवतः यही कारण है कि पीएम के नए मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी सियासी गलियारे में अपने पैर नहीं जमा पाए हैं। पीएमओ के भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि पंकज पचौरी ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और भाजपा के वयोवृद्ध नेता एल.के.आड़वाणी से औपचारिक मुलाकात के लिए वक्त मांगा। दोनों ही घाघ नेताओं ने फिजां की ठण्डक को पहचानते हुए पचौरी को समय ही नहीं दिया।
खबर है कि अब पचौरी ने नया दांव खेलना आरंभ किया है। पत्रकारों को बरास्ता राज्य सभा आगे बढ़ाने के लिए पचौरी ने नए शिगूफे छोड़े हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के एजेंडे को जनता के सामने पकाकर परोसने वाले पत्रकारों को पचौरी की यह चाल बहुत रास आ रही है।
चर्चा है कि राज्यसभा से रास्ते संसदीय सौंध तक पहुंचने की मंशा जिनके दिल में कुलांचे मार रहीं हैं उनमें विनोद मेहता, आलेक मेहता, विनोद शर्मा, मृणाल पाण्डे, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई के साथ ही साथ मध्य प्रदेश से प्रकाशित एक दैनिक के मालिक जैसी हस्तियां शामिल हैं। इनमें से कुछ ने 10 जनपथ के अति करीब सुमन दुबे की परिक्रमा भी आरंभ कर दी है।

(क्रमशः जारी)

एनसीटीसी पर राज्यों से होगी बातचीत


एनसीटीसी पर राज्यों से होगी बातचीत

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। केन्द्र सरकार ने कहा है कि वह राष्ट्रीय आतंकवादरोधी केन्द्र (एनसीटीसी) के गठन का विरोध कर रहे राज्यों से बातचीत कर इस मुद्दे को हल करने की कोशिश करेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर इन राज्यों के साथ चर्चा करेगी। केन्द्रीय गृहसचिव आर के सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि आतंकवाद से कारगर तरीके से निपटने में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए इस केन्द्र का गठन किया जा रहा है।
नारायण सामी ने कहा कि जो सरकार के ऑपरेशन्स होते रहे हैं, पिछले वर्षों में उस पर सरकार ने देखा कि डिफरेन्ट एजेन्सी जो यहां काम करती है, उनको एक एजेन्सी को यह जानकारी नहीं रहती कि दूसरी एजेन्सी क्या कर रही है। एक एजेन्सी और दूसरी एजेन्सी के बीच में कोर्डिनेशन के अभाव में कुछ टेररिस्ट भाग जाते हैं। अभी हाल ही कुछ ऐसी घटना हुई इससे पहले भी हुई है।
गृहसचिव ने कहा कि इसकी अधिसूचना जारी करने से पहले राज्यों से परामर्श करने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि इसका गठन वर्तमान कानूनों के तहत ही किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय आतंकवादरोधी केन्द्र के गठन को संघीय स्वायत्तता के विरुद्ध बताया है। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि केन्द्र सरकार जिस तरह काम कर रही है उससे राज्य खुश नहीं हैं।
भाजपा नेता अरुण जेटली ने इस मसले पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवाद से संघर्ष और संघीय ढांचे का सम्मान साथ-साथ किया जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि इस केन्द्र के गठन का विरोध कर रहे कुछ दल एन डी ए का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने वर्ष २००२ में विवादास्पद पोटा कानून पारित किया था।
उधर, पार्टी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि एन डी ए सरकार में उस समय कई सहयोगी दल थे, जब इस प्रकार के सख्त कानून पारित किए गये थे। ममता बनर्जी, जयललिता, नवीन पटनायक और रमण सिंह सहित कई मुख्यमंत्रियों ने एन सी टी सी के गठन का विरोध किया है।

शिवसेना का मुंबई पर कब्जा बरकरार


शिवसेना का मुंबई पर कब्जा बरकरार

गढ़ में गडकरी ने दिखाई ताकत

(अतुल खरे)

मुंबई (साई)। शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन का बृहन मुंबई नगर निगम में लगातार चौथी बार कब्जा निश्चित लग रहा है। बृहन मुंबई नगर निगम के २२७ वार्डों में से शिवसेना ने ७५, भारतीय जनता पार्टी ने ३२, कांग्रेस ने ५० और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने १४ सीटों पर जीत हासिल की है।
राज ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने २८ वार्डों में, जबकि निर्दलीय और अन्य ने भी २८ वार्डों में जीत दर्ज की है।  बहुमत के लिए शिवसेना-भाजपा-आर पी आई गठबंधन के पास कुछ सीटें कम हैं। गठबंधन को भरोसा है कि उसे कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन मिलेगा।
नागपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। कुल १४५ सीटों में से भाजपा को ६२ सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस ने ४१ सीटों पर जीत दर्ज की है। बहुजन समाज पार्टी को १२ सीटें मिली हैं, जबकि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने छह-छह सीटें जीती हैं। दस सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से में आई हैं। अमरावती और अकोला नगर निगमों में खण्डित जनादेश सामने आया है। यहां किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिला है।
विदर्भ क्षेत्र में जिला परिषद् और पंचायत समिति के चुनावों में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चंद्रपुर, गड़चिरौली, अमरावती, वर्धा और यवतमाल जिलों में अपने परम्परागत प्रतिद्वंद्वियों भाजपा और शिवसेना पर अपना प्रभुत्व बरकरार रखा है। नागपुर जिला परिषद् में भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ा है जबकि अकोला में दोनों ही पार्टियों की स्थिति एक जैसी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी के लिए ये नतीजे चौंकाने वाले हैं।

यूपी में चौथे चरण का मतदान कल

(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान कल होगा। मतदान के सारे प्रबंध कर लिए गए हैं। मतदान दल आज मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगे। सुरक्षा बल निर्धारित स्थान पर पहुंच गए हैं और उन्होंने कई क्षेत्रों में लैग मार्च किया। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे के बीच वोट डाले जाएंगे। हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि चौथे चरण में ११ जिलों में विधानसभा की ५६ सीटों के लिए ९१ महिलाओं समेत ९६७ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है।
इस चरण में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक नेता, बाहूबली और नेताओं के नजदीकी रिश्तेदार चुनाव मैदान में है। एक करोड़ ७४ लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए १८ जहार पांच सौ ज्यादा मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सुरक्षा की चाक चौबंध व्यवस्था की गई है। संवेदनशील चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़ और लखनऊ जिलों में सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों और पीएसी की सात सौ साठ कम्पनियां तैनात की गई है।

हर्बल खजाना ----------------- 28

सौंफ़: सिर्फ़ एक मसाल नहीं



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। भोजन संपन्न होने के बाद खाना पचाने के तौर पर ली जाने वाली सौंफ़ गजब के औषधिय गुणों वाली होती है। सौंफ़ को लगभग हर भारतीय घरों में किचन में मसाले की तरह और पानदान मुखवास की तरह देखा जा सकता है। सौंफ़ का वानस्पतिक नाम फ़ीनीकुलम वलगेयर है।
सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, फास्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे कई अहम तत्व पाए जाते हैं। आदिवासियों का मानना है कि सौंफ़ के निरन्तर उपयोग से आखों की रौशनी बढती है और मोतियाबिन्द की शिकायत नहीं होती। प्रतिदिन दिन में तीन से चार बार सौंफ के बीजों की कुछ मात्रा चबाने से खून साफ होता है और त्वचा का रंग भी साफ हो जाता है।
डाँग गुजरात के अनुसार सौंफ़ के नित सेवन से शरीर पर चर्बी नही चढती और कोलेस्ट्राल भी काफ़ी हद तक काबू किया जा सकता है और इस बात की प्रमाणिकता आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है। अपचन और खाँसी होने की दशा में एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ को उबालकर दिन में तीन से चार बार पिया जाए तो समस्या समाप्त हो जाती है।
हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया के बीजों और मिश्री को कूट कर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

(साई फीचर्स)

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

लोकसभा में गूंजेगा झाबुआ पावर का मामला!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  67

लोकसभा में गूंजेगा झाबुआ पावर का मामला!

झाबुआ पावर की सारी जानकारियां बुलवाईं कांग्रेस के एक संसद सदस्य ने



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात किए जाने का मामला मध्य प्रदेश के एक कांग्रेसी संसद सदस्य ने उठाने का मन पुनः बना लिया गया है। पूर्व में लोकसभा सत्र में उन्होंने इसे उठाने का मन बनाया था किन्तु प्रपत्रों की कमी के चलते वे इसे सदन में प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। 12 मार्च से आहूत बजट सत्र में इस मामले के उठने की संभावनाएं प्रबल होती दिख रही हैं।
मीडिया के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार उक्त संसद सदस्य ने इस हेतु वे आवश्यक प्रपत्र एकत्रित करने का काम लगभग पूरा कर लिया गया हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जिस स्थान पर यह संयंत्र संस्थापित होने वाला है वहां के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और पड़ोसी भाजपाई सांसद के.डी.देशमुख ने इस बारे में संसद में मौन साध रखा है।
साउथ ब्लाक परिसर में चहलकदमी कर रहे मध्य प्रदेश के एक संसद सदस्य ने मीडिया के एक वरिष्ठ सदस्य से इस बारे में चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से गौतम थापर द्वारा आदिवासियों के हितों के साथ खेलने की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि वे इस बारे में जानकारियां एकत्र कर रहे हैं और संसद में ध्यानाकर्षण में इस बात को उठाने का प्रयास करेंगे।
मीडिया के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार आदिवासियों के नाम पर सालों से राजनीति करने वाली कांग्रेस और भाजपा के क्षेत्रीय सांसदों द्वारा इस मसले को आखिर उठाया क्यों नहीं जा रहा है? गौरतलब है कि परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा का आधा हिस्सा आरक्षित मण्डला और बाकी हिस्सा बालाघाट संसदीय क्षेत्र में मिला दिया गया है।
गौतम थापर के स्वामित्व वाले आवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा 1200 मेगावाट का प्रस्तावित जो कागजों पर अब 1260 मेगावाट का हो चुका है, का कोल आधारित संयंत्र आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में डाला जा रहा है। यह सिवनी जिले का हिस्सा है और मण्डला संसदीय क्षेत्र में आता है। मण्डला से आदिवासी समुदाय के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और जिले के शेष भाग के सांसद भाजपा के के.डी.देशमुख हैं।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सिवनी जिले में परिसीमन के उपरांत बचे चार विधानसभा क्षेत्रों में एक में कांग्रेस और तीन पर भाजपा का कब्जा है। संयंत्र वाला हिस्सा लखनादौन विधानसभा का हिस्सा है यहां की भाजपा विधायक श्रीमति शशि ठाकुर खुद भी आदिवासी समुदाय से हैं। वहीं दूसरी ओर सिवनी से भाजपा की श्रीमति नीता पटेरिया, बरघाट से भाजपा के कमल मस्कोले तो केवलारी से कांग्रेस के हरवंश सिंह ठाकुर विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष हैं।
वर्तमान में लोकसभा के साथ ही साथ मध्य प्रदेश का विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी चल रहा है। इसके वावजूद सिवनी जिले के चार विधायकों द्वारा इस मामले को विधानसभा में न उठाया जाना और दो सांसदों को अपने दामन में सहेजने वाले सिवनी जिले के आदिवासी हित के इस ज्वलंत मुद्दे को संसद में न उठाया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। यहां उल्लेखनीय होगा कि सिवनी जिले के हितों के लिए जिले के सांसदों ने कभी संसद में आवाज बुलंद नहीं की। नैनपुर से सिवनी छिंदवाड़ा अमान परिवर्तन का मामला भी 2005 में बिलासपुर के सांसद पुन्नू लाल माहौले ने ही उठाया था।

(क्रमशः जारी)

चुनाव बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 89

चुनाव बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज

यूपी चुनाव तय करेगा मन और राहुल का भविष्य

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस के अंदर इस बात का मंथन तेज हो गया है कि पांच राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश के चुनावों के परिणामों के साथ ही देश की बागडोर अस्सी साल के बुजुर्ग (डॉ.मनमोहन सिंह) के कांधों से अपेक्षाकृत कुंवारे चालीस साल के युवा (राहुल गांधी) को कैसे हस्तांतरित की जाए। काफी समय से कयास लगाया जा रहा है कि मनमोहन सिंह की छुट्टी किसी भी वक्त हो सकती है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि कांग्रेस ने अगर उत्तर प्रदेश में हाफ सेंचुरी (पचास से अधिक सीटें) मार लीं तो यह समय मनमोहन सिंह की बिदाई और राहुल गांधी की ताजपोशी के लिए मुफीद ही रहेगा। मनमोहन सिंह को पीएम की कुर्सी से उतारकर कहां एडजस्ट किया जाएगा इस बारे में भी अब चर्चाएं चल रही हैं।
उधर, सालों साल कांग्रेस के लिए ट्रबल शूटर बने रहे उमर दराज प्रणव मुखर्जी की सालों साल कांग्रेस की सेवा का सम्मान के बतौर उन्हें भी कहीं एडजस्ट करने पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह, प्रणव मुखर्जी, मोतीलाल वोरी सरीखे उमर दराज नेता अब अपनी आखिरी पारी ही खेल रहे हैं।
इधर, लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार के मन में भी 7, रेसकोर्स रोड़ (प्रधामनंत्री आवास) या फिर रायसीना हिल्स स्थित महामहिम राष्ट्रपति के आवास को आशियाना बनाने की हसरतें कुलांचे भर रही हैं। मीरा कुमार पहली महिला लोकसभाध्यक्ष तो बन गईं पर पहिला महिला महामहिम प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ही रहेंगीं। उर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे की नजरें भी रायसीना हिल्स पर जाकर टिक गईं हैं।
उक्त पदाधिकारी ने आगे कहा कि सोनिया गांधी को यह भी बताया गया है कि अगर 2014 में कांग्रेस बहुमत मे ंनहीं आई और अगर संप्रग भी खेत रहा तो राहुल गांधी को आने वाले पांच सालों तक सत्ता से दूर रहना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि राहुल गांधी को देश का वज़ीरे आज़म बना दिया जाए और ढाई साल उनके नेतृत्व में देश को संचालित कर चुनाव कराए जाएं।
इससे राहुल को सरकार चलाने का अनुभव मिल जाएगा, साथ ही साथ अगर 2014 में कांग्रेस सत्ता में नहीं आती तो राहुल गांधी को विपक्ष का संसदीय अनुभव भी हो जाएगा, जो उनके लंबे राजनैतिक जीवन में काफी हद तक सहायक सिद्ध होगा। राहुल और सोनिया समर्थक इस राय पर दो भागों में विभक्त हैं। समर्थकों का एक धड़ा तत्काल ताजपोशी का पक्षधर है तो दूसरा जल्दबाजी में कोई कदम न उठाने का हामी है।

(क्रमशः जारी)

यादव वोट बैंक में सेंध लगाते गौर!


यादव वोट बैंक में सेंध लगाते गौर!

उमा भारती की राह में शूल बो रहे गौर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मूलतः यादव जाति के बाबू लाल गौर और लोधी समाज की उमा भारती के बीच द्वंद का खामियाजा उत्तर प्रदेश चुनावों में भाजपा भुगतने पर मजबूर है। वहीं उमा भारती की काफी करीब रहीं परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद और सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया की हरकतों का खामियाजा भी उत्तर प्रदेश में उमा भारती को कमजोर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान स्थानीय शासन मंत्री जैसे जिम्मेदार ओहदे पर बैठे वयोवृद्ध भाजपा नेता बाबूलाल गौर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा पहले दूसरे नहीं तीसरे नंबर पर रहेगी। गौर जो स्वयं उत्तर प्रदेश के नागौर जिले से हैं के इस कथन को सियासी हल्कों में बहुत ही गंभीरता से लिया जा रहा है।
एक तरफ तो उमा भारती के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यहां तक कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (जो स्वयं उमा भारती के घुर विरोधी हैं) भी एड़ी चोटी एक किए हुए हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के जीत के दावों की और कोई नहीं भाजपा के ही वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर द्वारा हवा निकाली जा रही है।
उल्लेखनीय होगा कि मध्य प्रदेश में राजा दिग्विजय सिंह के दस साल के राज को उमा भरती ने छीनकर उन्हें दस साल के लिए वनवास पर भेज दिया था। राजा का वनवास 2013 में पूरा होने को है। इसके बाद झंडा प्रकरण में फंसने के कारण उन्हें पद से त्यागपत्र देना पड़ा था, उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था।
बाबू लाल गौर की हरकतों ने उमा भारती को खासा खफा कर दिया था और उसके बाद उमा की जिद पर ही गौर को हटाया जाकार शिवराज को नया निजाम बनाया गया था। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि बाबूलाल गौर ने अपनी कुसी बचाने के लिए हवन पूजन में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने दिल्ली के छतरपुर स्थित मदन लाल राजस्थानी महराज के शनिधाम में जाकर हवन भी करवाया था।
दाती महराज खुद गौर पर इतने मेहरबान थे कि उन्होंने दिन में हुए हवन के उपरांत रात में जब बाबूलाल गौर विमान से दिल्ली से भोपाल वापसी की तैयारी कर रहे थे, तब बुरदलोई मार्ग स्थित मध्य प्रदेश भवन में सीएम सूट में सशरीर जाकर एक तावीज और अंगूठी दी थी। होनी को कोई नहीं टाल सका और अगले ही दिन गौर को जाना पड़ा था।
बहरहाल, बताते हैं कि इसके उपरांत गौर और उमा भारती में छत्तीस का आंकड़ा हो गया था। अब जबकि उमा भारती का चेहरा आगे कर भाजपा उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रही है, तब बाबू लाल गौर का मुलायम सिंह यादव को प्रथम स्थान पर आने की घोषणा करना अपने आप में एक आश्चर्य से कम नहीं है।
सियासी जानकारों के अनुसार बाबू लाल गौर यादव जाति के हैं, उन्होंने भाजपा की जीत की कामना करने के बजाए मुलायम सिंह यादव की सपा को पहले स्थान पर बताया है। साफ है कि गौर से प्रभावित यादव का रूझान अब भाजपा के बजाए सपा की हो जाएगा।
इसके साथ ही साथ उत्तर प्रदेश में एक मामले को और हवा दी जा रही है। कहा जा रहा है कि एक समय उमा भारती के काफी करीब रहीं मध्य प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय सिवनी में विधायक निधि से बांटे गए लगभग सवा लाख रूपए (जिनकी लागत चालीस हजार रूपए से ज्यादा नहीं है) की लागत के लगभग ढाई दर्जन टेंकर वितरण समारोह में पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए चुराने का आरोप है।
इन आरोपों के प्रमाण के बतौर टेंकर वितरण समारोह में प्रभारी मंत्री नाना भाउ माहोड के द्वारा पूजन की थाली में चढ़ाए गए दो सौ रूपए और उसके बाद श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा नजरें बचाकर उन दो सौ रूपयों को अपने कार्डीगन की जेब में डालने के विज्जुअल दिखाए जा रहे हैं।
चर्चा है कि उमा भारती ने पहले बाबू लाल गौर पर दांव लगाया सो उनके बयान आज उमा को तीर की तरह चुभ रहे होंगे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने नीता पटेरिया को गले लगाया तो आज नीता पटेरिया का यह वीडियो उमा के मुंह में कुनैन की तरह कड़वा ही साबित हो रहा होगा।

समृद्ध और संस्कारित समाज का निर्माण सहकारिता से ही संभव है: देवांगन


समृद्ध और संस्कारित समाज का निर्माण सहकारिता से ही संभव है: देवांगन

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी (साई)। समृद्ध और संस्कारित समाज का निर्माण सहकारिता से ही संभव है। आज जब दुनिया के पूँजीवाद, साम्यवाद और मार्क्सवाद के  पैर उखडऩे लगे हैं तब सभी की निगाहें सहकारिता की ओर ही लगी हुई है। भारत का हजारों लाखों वर्ष पुराना इतिहास इस बात का साक्षी है कि यहाँ के संस्कारों में सहकारिता अक्षुण्य रूप से विद्यमान रही। संस्कारित सहकारिता का स्वरूप स्वर्णिम भारत के स्वरूप की झलक दिखाता है। इस प्रकार के उद्गार सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री विजय देवांगन द्वारा केवलारी में सहकार भारती के विकासखंड स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुये कही गई। विजय देवांगन ने केवलारी में आयोजित सहकार भारती के सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष एवं सहकार भारती के प्रांतीय महामंत्री अशोक टेकाम द्वारा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहकार भारती के क्षेत्र संगठन प्रमुख अजीत जैन रहे। केवलारी विकासखंड मुख्यालय के मंगल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग ५०० सहकार भारती के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम में डॉ. प्रमोद राय,भाजपा नेता देवीसिंह बघेल, मदन चौरसिया, सुभाष यादव, प्रमोद पटेल, लता पटले, भुवन ठाकरे, श्याम मिश्रा, मुकेश बघेल, नरेश सेन, बालसिंह बिसेन, कृष्ण कुमार चौहान, बाबा पांडे, श्रीमति लता पटले, भाजपा मंडल बरघाट के अध्यक्ष श्रीमति किरण वाहने, अजय बाबा पांडे, संजय खंडाईत, डॉ.संजू चौहान, दुर्गा ठाकुर, यदुनाथ गुमास्ता, रंजीत राय, फागूलाल, नवल श्रीवास्तव, जितेन्द्र आदि वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में यह गरिमामय कार्यक्रम आयेाजित था।
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुये मुख्य वक्ता विजय देवांगन ने कहा कि सहकारिता में ही वह सार्मथ्य है कि समय अपने अनुकूल सामाजिक संस्कारों समाज की आर्थिक स्थिति का निर्माण कर सकता है, अन्य व्यवस्थाएँ इतनी अधिक सक्षम नही है। भारत में तेजी से सहकारिता का विकास हो रहा है। आज पूरे भारत वर्ष में ७० लाख स्वसहायता समूह संचालित हो रहे हैं। इन्हीं स्वसहायता समूह की महिलाएँ समाज का नेतृत्व कर रही हैं। आज पंचायती राज व्यवस्था से लेकर राष्ट्रपति के पद तक महिला नेतृत्व का परिणाम है सहकारिता का विस्तार। सहकारिता नेतृत्व की क्षमता प्रदान करता है। जो महिलाएँ सीमित दायरे में घूँघट डालकर काम करने वाली थी आज वे स्वसहायता समूह के माध्यम से समाज का नेतृत्व करने में सक्षम हुई हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियों का बाजार में जो एकाधिकार था उस एकाधिकार को सहकारिता के माध्यम से समाप्त करते हुये अनेक सहकारी समितियाँ अपने उत्पादों को कम मूल्य पर ग्राहकों को प्रदान करने में सक्षम हुई है साथ ही सहकारी समितियों में लाखों रोजगार के अवसर प्रदान किये हैं। विजय देवांगन ने उपस्थित जनसमुदाय को कहा कि सहकार भारती के माध्यम से हमारा प्रयास रहेगा कि हर क्षेत्र में सहकारी समितियाँ निर्माण कर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं एवं बेरोजगारों को रोजगार के अच्छे अवसर प्रदान किये जायें और इन समितियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को क्षेत्रीय संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार उपभोग की वस्तुएँ निर्माण करने वाली संस्थाएँ स्थापित हों।
मुख्य वक्ता विजय देवांगन ने बताया कि हरियाणा में सहकारी संस्था जो महिलाएँ संचालित करती हैं उस सहकारी समिति की महिलाओं ने इतनी अधिक आर्थिक सक्षमता प्राप्त की है कि पूर्व अमेरिका के राष्ट्रपति बिलकिंटन ने भी उसकी आर्थिक सक्षमता की प्रशंसा की। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष को सहकारिता वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। सहकारिता की जानकारी और अध्ययन के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विद्धान भारत आ रहे हैं और मध्यप्रदेश में सहकारिता के हो रहे विकास की ओर आकर्षित हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को एक प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण देने का जो वायदा किया है वह हमारी सहकारिता की उच्च कोटि का स्वरूप है। सहकारिता ही संपूर्ण समाज का समविकास करने की धारणा वाली सोच है। हमारे संयुक्त परिवार से लेकर देश की संसद तक जो कामकाज की परंपरा है वह भी सहकारिता का ही स्वरूप है, परंतु ग्रामीण सहकारी संस्थाओं की दुर्गति के कारण पूँजीवादी व्यवस्था हावी हो रही है जिसके कारण भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा बढ़ रही है। इन अव्यवस्थाओं को सहकारिता के माध्यम से ही सुधारा जा सकता है।
कार्यक्रम में अध्यक्षीय उदबोधन अशोक टेकाम द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना सहकार भारती के क्षेत्र संगठन प्रमुख अजीत जैन द्वारा रखी गई। मंच संचालन सचिन अवधिया द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन मुकेश बघेल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सारी व्यवस्थाएँ अजय डागोरिया के निर्देशन में संपन्न हुई।

बडे काम का नारियल


हर्बल खजाना ----------------- 27

बडे काम का नारियल



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। नारियल का प्रयोग लगभग हर भारतीय घर में होता है। नारियल के पत्तों से लेकर तेल तक सब कुछ हमारे लिए बड़ा उपयोगी होता है। नारियल का वनस्पतिक नाम कोकस न्यूसीफेरा है। नारियल का पानी हल्का, प्यास बुझाने वाला, वीर्यवर्धक, अग्निप्रदीपक तथा मूत्र संस्थान के लिए बहुत उपयोगी होता है।
नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। बच्चों को कच्चा नारियल खिलाने से उनके पेट के कृमि निकल जाते हैं। ब्लड़ प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए नारियल का पानी बहुत उपयोगी होता है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रोलाइट और पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है जो दिल की गतिविधियों को सुचारू रूप से कार्य करने में सहायता करती है।
नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर सिर में मालिश करने से रूसी से छुटकारा मिलता है और बाल स्वस्थ और लंबे होते हैं। दक्षिण भारत में नारियल के तेल का प्रयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है। नारियल तेल में पकाया गया भोजन अधिक देर तक ताजा रहता है और पोषक पदार्थों के अवशोषण में मदद करता है।
नारियल का पानी न केवल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है बल्कि शरीर में मौजूद बहुत से वायरसों से भी लड़ाई करता है।  रात के भोजन पश्चात नियमित रूप से आधा गिलास नारियल पानी पीने से पाचन क्रिया में फायदा होता है और अनिद्रा जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
सुबह नियमित रूप से ५० ग्राम नारियल की गिरी को चबाने से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य में तो लाभ होता ही है। साथ ही गर्भस्थ बालक भी गौरवर्ण का एवं हृष्ट-पुष्ट होता है।  नारियल तेल की मालिश से मस्तिष्क ठंडा रहता है। गर्मी में लगने वाले दस्तों में एक कप नारियल पानी में पिसा जीरा मिलाकर पिलाने से दस्तों में तुरंत आराम मिलता है।

(साई फीचर्स)

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

धूमल को क्यों नहीं फालो करते शिवराज


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  66

धूमल को क्यों नहीं फालो करते शिवराज

वन भूमि बचाने हिमाचल सरकार की अभिनव पहल

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। वन भूमि को बचाने के लिए हिमाचल प्रदेश की प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने एक साहसिक निर्णय लिया है, जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। खतरे में पड़े वनों को उजाड़ने के लिए सरकार ने अब विकास का बहाना नहीं चलने देने की बात कही है। एक तरफ तो धूमल सरकार द्वारा वनों को बचाने की जुगत लगाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा संरक्षित वन में ही उद्योग लगाने की वकालत की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर अब विद्युत परियोजनाएं लगाना आसान नहीं होगा। कैट प्लान के तहत हुई बैठक में वन एवं ऊर्जा विभाग ने यह निर्णय लिया है। इस दौरान कहा गया कि वन भूमि पर यदि एक भी पेड़ लगा हो तो विभाग वहां पर परियोजना लगाने की अनुमति नहीं देगा।
गौरतलब है हिमालच प्रदेश में वन भूमि पर लगी ऐसी अधिकतर परियोजनाओं के लिए विभाग एनओसी जारी करता था, जिस पर बेशक जितने भी पेड़ लगे हों। पहले वन भूमि पर लगी परियोजनाओं से विभाग को रायल्टी के तौर पर मुआवजा भी नहीं मिला है। कुल्लू में पार्वती प्रोजेक्ट, किन्नौर में कड़छम वांगतू और कुडू आदि अनेक परियोजनाओं के लिए हजारों पेड़ों की बलि दी गई।
वन भूमि पर विद्युत परियोजनाओं की स्वीकृति न मिल पाने को प्रदेश में पर्यावरणविद सही मान रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार को वन भूमि पर किसी भी प्रकार की परियोजनाएं चलाने पर बहुत पहले ही रोक लगा लेनी चाहिए थी। इसके अलावा वन भूमि पर अवैध खनन और कटान के मामलों में भी सरकार को सख्त कार्रवाई अमल में लाने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रधान सचिव (वन) एस राय ने कहा कि प्रदेश की वन भूमि पर अब विद्युत परियोजनाओं को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। कैट प्लान के तहत हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार वन भूमि पर अवैध खनन व कटान करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छटवीं सूची में अधिसूचित आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकास खण्ड के ग्राम बरेला में स्थापित किए जाने वाले 1260 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट जो वास्तव में परिसीमन में विलोपित हुई घंसौर विधानसभा का अंग है में स्थापित किया जा रहा है। इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश विधानसभा में श्रीमति उर्मिला सिंह द्वारा सालों साल किया गया है। उर्मिला सिंह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की महामहिम राज्य पाल के पद पर पदस्थ हैं। क्षेत्र के आदिवासी अपनी जनसेवक रहीं श्रीमति उर्मिला सिंह जो स्वयं आदिवासी समुदाय से हैं की ओर बेहद आशा भरी नजरों से ताक रहा है कि वे संबंध में कुछ पहल कर आदिवासियों को न्याय दिलवाने में महती भूमिका निभाएं।

(क्रमशः जारी)

किसके कहने पर खोला भईया जी ने मुंह


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 88

किसके कहने पर खोला भईया जी ने मुंह

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। उत्तर प्रदेश की सियासत में दल बदलकर कांग्रेस में आए केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा (भईया जी) ने प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को सीधे सीधे उमरदराज यानी बूढ़े की संज्ञा दे डाली है। सियासी हल्कों में अब यह शोध हो रहा है कि आखिर भईया जी को यह लाईन दी तो दी किसने। वैसे भी विधानसभा चुनावों में भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक की अघोषित उपाधि पा चुके डॉ.मनमोहन सिंह की डिमांड न होने से वे आराम ही फरमा रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्र में त्रणमूल कांग्रेस द्वारा बार बार कांग्रेस की कालर पकड़कर घुड़की देने से आज़िज आ चुकी कांग्रेस ने अब ममता बनर्जी से किनारा करने का मन बना ही लिया है। कांग्रेस के पास अब मुलायम सिंह की बैसाखी का सहारा दिख रहा है। उधर, मुलायम सिंह ने बेनी को कैबनेट से बाहर का रास्ता दिखाने की शर्त पर ही समर्थन देने का फैसला किया है। इन परिस्थितियों में बेनी वर्मा की बिदाई का ताना बना बुना जा रहा था।
उधर, कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (कांग्रेस अध्यक्ष का सरकारी आवास) के सूत्रों ने बताया कि अगर बेनी को बाहर कर दिया गया तो मुलायम सिंह पर नकेल कसना मुश्किल हो जाएगा। फिर क्या था नेहरू गांधी परिवार की वर्तमान पीढ़ी के सबसे विश्वस्त ट्रबल शूटर यानी कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के पाले में यह गेंद डाल दी गई।
दिग्गी राजा के करीबी सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह ने बेनी वर्मा को फोन पर एक घुटी पिलाई। बेनी वर्मा को इस घुटी का स्वाद इतना जमा कि उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को अस्सी साल का और अगले आम चुनाव में बयासी का होने की बात कह डाली।
जानकारों का कहना है कि इस तीर से राजा दिग्विजय सिंह ने अनेक निशाने साध लिए हैं। अव्वल तो प्रधानमंत्री को ढलती उम्र के साथ आईना दिखा दिया, फिर भाजपा के उमर दराज नेता एल.के.आड़वाणी को भी उनकी उमर का अहसास करवा दिया। भईया जी को राहुल गांधी की गुड बुक्स में ला दिया। ममता बनर्जी को जतला दिया कि अगर उन्होंने ज्यादा तल्खी दिखाई तो सरकार के पास अब मुलायम हैं। इधर मुलायम को जतला दिया कि बेनी वर्मा को निकाल पाना अभी संभव नहीं है।

(क्रमशः जारी)