मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मध्य प्रदेश मूल के शेखर सोनी के चित्रों ने मचाया धमाल

सराही जा रही है सलवा जुडूम पर आधारित फोटो प्रदर्शनी

नई दिल्ली (ब्यूरो)। नई दिल्ली के इंडिया हेबीटेट सेंटर में इन दिनों देश भर के चुनिंदा प्रेस फोटोग्राफर्स की छाया चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। नेशनल फाउंडेशन फार इंडिया द्वारा हर साल दो फोटोग्राफर्स को चुनकर उन्हें एक लाख रूपए की फैलोशिप प्रदान की जाती है। इस साल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा ग्राम निवासी शेखर सोनी को यह प्रदान की गई है।
इस बार इंडिया हेबीटेट सेंटर की ओपन आर्ट गैलरी में शेखर सोनी के अलावा मुंबई के अमित मधोशिय जिनकी फोटो का विषय मुंबई का फुटपाथ है और कोलकता की सुचेता दास जिन्होनंे बाल बीडी मजदूरों के संघर्ष को रेखांकित किया है, की फोटो प्रदर्शित की गई हैं। इस प्रदर्शनी में कुल 76 फोटो प्रदर्शन हेतु लगाई गई हैं।
श्री शेखर सोनी ने बताया कि उन्होंने नक्सलवाद के सलवा जुडूम अर्थात शांति मार्च पर आधारित छाया चित्रों को प्रदर्शन हेतु उपलब्ध कराया है। इस विषय पर उन्हंे प्रेरणा कहां से मिली इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि 2005 में एक यात्री बस को नक्सलियों द्वारा उड़ा दिया गया था, उसके बाद ही उन्होंने इस विषय पर काम करने की ठानी। उन्होंने कहा कि पांच साल में उन्होंने नक्सलवाद के प्रभाव को छत्तीसगढ़ जाकर काफी करीब से देखा है।
श्री सोनी ने कहा कि नक्सवादियों के बीच जाकर उनके विरोध में चल रहे इस अभियान के बारे में जानकारी और छायाचित्र लेना बहुत ही कठिन काम था, पर जान हथेली पर रखकर उन्होंने इसे अंजाम दिया। महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले शेखर सोनी कहते हैं कि वे हर छः महीने में नक्सल प्रभावित क्षेत्र मंे जाकर अपने काम को अंजाम देते थे।
वे कहते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नि को सदा ही भरोसे में लेकर अपने इस अभियान के बारे मेें बताया। उन्होंने कहा कि हर बार वे एक ही बात अपनी अर्धांग्नी को बताकर जाते थे कि अगर वे नहीं लौटे तो उनके दस लाख रूपए के बीमें की राशि से ही आगे गुजर बसर करना।
उनका कहना है कि रमन सरकार द्वारा अगर थोडी और ईमानदारी से इस काम को अंजाम दिया जाता तो आज छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की जड़ें उखड़ चुकी होतीं। सरकारों की अनदेखी के चलते ही आज नक्सलवाद देश के 22 राज्यों में फैल चुका है। हर राज्य को सलवा जुडुम लागू करे तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इस प्रदर्शनी को केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक सहित अनेक गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों, नेताओं द्वारा सराहा जा रहा है।

सोमवार, 24 जनवरी 2011

भारद्वाज के तीर के मायने

कहां जाकर लगेगा भारद्वाज का तीर

(लिमटी खरे)

कर्नाटक में महामहिम राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ तलवार तानकर भले ही कांग्रेस का हित साधा हो पर उनके इस तरह के कदम से संवैधानिक विवाद आरंभ होना स्वाभाविक है। भारत गणराज्य की स्थापना के साथ ही साथ देश के अंदर जिस तरह की संवैधानिक व्यवस्था को लागू किया गया है, उसके तहत लाट साहेब यानी राज्यपाल को इस तरह की सिफारिश करने का अधिकार शायद नहीं हैं। मूलतः राज्यपाल मंत्रीमण्डल की सिफारिश पर ही काम करता है, मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के मंत्रीमण्डल ने राज्यपाल से गुहार लगाई थी कि मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न दी जाए। इसके पीछे मंत्रीमण्डल का तर्क था कि कर्नाटक के लोकायुक्त के साथ ही साथ सूबाई सरकार द्वारा गठित एक न्यायिक जांच आयोग भी इसकी जांच में लगा हुआ है। कर्नाटक के लाट साहेब हंसराज भारद्वाज मंझे हुए राजनेता हैं, इस बात में कोई शक नहीं, वे मध्य प्रदेश कोटे से राज्य सभा सदस्य रहते हुए केंद्र में कानून मंत्री रह चुके हैं। उनके अनुभव और काबिलियत पर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए, किन्तु विधि द्वारा स्थापित परंपराओं का पालन उन्हें हर हाल में करना ही होगा। भारद्वाज ने दो अधिवक्ताओं द्वारा दायर याचिका के आधार पर मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। हो सकता है भारद्वाज का निर्णय नैतिकता के तकाजे पर खरा उतरे पर भारत गणराज्य में स्थापित विधि मान्यताओं के अनुसार विशेषज्ञ इस पर उंगली उठा ही रहे हैं। पहले भी कुछ लाट साहबों द्वारा इसी तरह के प्रयास किए जा चुके हैं। वस्तुतः राज्यपाल को जनसेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने देने की अनुमति देने का अधिकार है, पर आम धारणा है कि राज्यपाल चूंकि राजनैतिक परिवेश से आते हैं अतः वे पूरी ईमानदारी से इस तरह की अनुमति देने के बजाए पूर्वाग्रह से ग्रसित ज्यादा नजर आते हैं।

मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के मामले में अब कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे के सामने ही दिखाई पड़ रही हैं। कांग्रेस के तेवर तीखे हैं, उसका कहना है कि राज्यपाल ने सही किया है। कांग्रेस के अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री या मंत्रीमण्डल के किसी भी सदस्य के अनाचार, कदाचार या भ्रष्टाचार अथवा अनैतिक आचरण के मामलों में भारत का संविधान सूबे के राज्यपाल को स्वविवेक से फैसला लेने की इजाजत देता है। दूसरी तरफ भाजपा भी मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के बचाव में खड़ी दिखाई दे रही है। भाजपा की दलील है कि राज्य का राज्यपाल हर हाल में हर काम के लिए मंत्रीमण्डल की सलाह से बंधा हुआ है। जब मंत्रीमण्डल ने मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा पर मुकदमा न चलाने की सिफारिश की थी, तब राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने कैसे मंत्री मण्डल की सिफारिश को दरकिनार कर दिया। कुछ भी हो पर यह मसला बड़ा ही गंभीर है और इस पर राष्ट्रव्यापी बहस की दरकार है कि कोई राज्यपाल किसी भी मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार अथवा अनैतिक आचरण को आखिर किस सीमा तक बर्दाश्त करे। भाजपा मानसिकता के लोग लाट साहेब के इस कदम को गलत तो कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले इसे सही ठहरा रहे होंगे। आज आवश्यक्ता इस बात की है कि बहस इस पर हो कि क्या राज्यपाल को मंत्री मण्डल की सिफारिश से इतर जाकर स्व विवेक से स्वतंत्र तौर पर फैसला लेने का हक है?

मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ जिस तरह का वातावरण कांग्रेस बनाना चाह रही है, राज्य की स्थितियां देखकर लगता नहीं कि कांग्रेस अपने मंसूबों में कामयाब हो पा रही है। मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के समर्थन में राज्य की भाजपा द्वारा शनिवार को आहूत कर्नाटक बंद को मिली आशातीत सफलता ने कांग्रेस के रणनीतिकारों के होश उड़ा दिए होंगे। भले ही राज्य में सरकारी मशीनरी पुलिस और प्रशासन के सहयोग से बंद कराने की बातें प्रकाश में आ रहीं हों पर कर्नाटक राज्य की जनता ने जिस तरह का जनता कफर््यू लगाया उससे लगने लगा है कि मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा पर लगे आरोंपों में बहुत दम नहीं है, या जनता को उन आरोपों से बहुत सरोकार नहीं है। कमोबेश यही स्थिति मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस द्वारा उठाए गए डंपर मामले में हुआ था। कांग्रेस ने एम पी की जनता को शिवराज के डंपर मामले से रूबरू करवाया। कमोबेश हर किसी की राय बनी कि महज चार डंपर के लिए कोई मुख्यमंत्री इस स्तर तक नहीं जाएगा। बाद में कांग्रेस की अपनी ही कार्यप्रणाली के चलते मध्य प्रदेश में डम्पर मामले की हवा ही निकल गई थी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा पर आरोप है कि उन्होंने अपने अनेक रिश्तेनातेदारों को मंहगी सरकारी जमीन सस्ती दरों पर बांट दी है। मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा ने अपने उपर लगे आरोपों को न केवल स्वीकारा वरन् उन जमीनों को वापस भी करवा दिया। मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा का दावा है कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों को जमीनें बांटकर कोई अनैतिक काम नहीं किया है। कोई भी मुख्यमंत्री अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर सरकारी जमीन किसी को भी आवंटित कर सकता है, यह गैरकानूनी किसी भी दृष्टिकोण से नहीं कहा जा सकता है। इसके साथ ही साथ उनके मंत्रीमण्डल ने तो यहां तक कहा है कि अभी जांच जारी है, किसी को भी दोषी करार नहीं दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह भ्रष्टाचार का मामला बनता ही नहीं है। इन सारी स्थिति परिस्थितियों में महामहिम राज्यपाल द्वारा किस बिनहा पर मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे डाली।

बहरहाल जो भी हो राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ जांच की अनुमति देकर अनेक अनुत्तरित प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब यक्ष प्रश्न तो ये हैं कि क्या राज्य के मंत्रीमण्डल की सलाह को धता बताकर राज्यपाल स्वविवेक से निर्णय ले सकता है? क्या मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा के खिलाफ अनुमति मिलने के बाद वे अपने पद पर बने रह सकते हैं? मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा निर्वाचित नेता हैं और सूबे की जनता ने बंद रखकर उन पर भरोसा जताया है, तब क्या राज्यपाल का निर्णय सही है?, एक तरफ लगता है कि राज्यपाल का भरोसा मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा की सरकार पर से उठ गया है दूसरी और भाजपा के आव्हान पर जनता द्वारा किया गया बंद दर्शा रहा है कि वह अब भी अपने निजाम पर पूरा भरोसा जता रही है। कुल मिलाकर अच्छा मौका है, केंद्र सरकार को चाहिए कि सूबों में बिठाए जाने वाले राज्यपालों को कठपुतली न बनने दे, संविधान में संशोधन कर राज्यपाल के अधिकारों को बढ़ाए ताकि वे हाथी के दिखाने वाले दांतों के बजाए खाने वाले दांत बनें। अगर एसा नहीं है तो फिर किसी भी राज्य में रबर स्टेंप संवैधानिक पद का आखिर मतलब ही क्या है?

टीम सोनिया में दिखेगी राहुल की परछाईं

सोनिया बना रहीं हैं राहुल के लिए रोड़मेप

सरकार के फेरबदल पर एलायंस का साया, किन्तु संगठन में सोनिया दिखाएंगी अपनी ताकत

केरल, तमिलनाडू, बंगाल, असम और पाण्डिचेरी चुनाव होंगे निशाने पर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी जल्द ही अपनेी कार्यकारणी का गठन करने वाली हैं। मंत्रीमण्डल के आधे अधूरे विस्तार ने सोनिया की टीम के गठन में शूल बो दिए हैं। अभी सोनिया गांधी कांग्रेस कार्यकारिणी तय करने में पशोपेश में ही दिखाई पड़ रही हैं। सोनिया गांधी के करीबी सूत्रों का दावा है कि फरवरी के पहले सप्ताह तक सोनिया गांधी कांग्रेस की कार्यसमिति की घोषणा कर सकती हैं, इसके लिए कवायद लगभग हो चुकी है।

सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ माहों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, असम, पाण्डिचेरी, केरल के चुनावों को मद्देनजर सोनिया गांधी ने अपनी टीम में चेहरों को चुना है। कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा 23 सदस्यों वाली कांग्रेस कार्यसमिति के बनने के बाद चुनावी राज्यों के प्रभारियांे की तैनाती नए सिरे से होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के लिए भविष्य का रास्ता बनाने के लिए युवाओं के साथ ही साथ अनुभवी लोगों को संगठन में लाकर सोनिया गांधी उनके प्रधानमंत्री बनने के मार्ग प्रशस्त करने वाली हैं।

सोनिया गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौति राज्यों के अध्यक्षों को चुनने की हैै। बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्यों में कांग्रेस संगठन दम तोड़ चुका है। इन राज्यों में कांग्रेस संगठन मंे जान फूंकने के लिए युवा तुर्को की जरूरत महसूस की जा रही है। संगठन में राहुल गांधी के बेदाग छवि और युवाओं को आगे लाने के फार्मूले पर गंभीरता के साथ विचार किया जा रहा है। इसके अलावा एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत को भी कड़ाई से लागू किया जा सकता है। वर्तमान में मुकल वासनिक, गुलाम नवी आजाद, वी, नारायणसामी केंद्र सरकार में तो पृथ्वीराज चव्हाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होने के साथ ही साथ संगठन में महती जवाबदारी निभा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी इस बारे में भी विचार कर रही हैं कि वर्तमान में छोटे से विस्तार के उपरांत बजट सत्र के उपरांत सरकार की बड़ी सर्जरी होने के बाद ही वे अपनी टीम का असली स्वरूप कार्यकर्ताओं के सामने लाएंगी।

राजमाता के घर में ही है अंधेर

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

अपने घर की हालत तो सुधरिए राजमाता

देश की सबसे ताकतवर महिला श्रीमति सोनिया गांधी को सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस द्वारा राजमाता के रूप में देखा जाता है। श्रीमति सोनिया गांधी महिला हैं, पर महिला आरक्षण विधेयक वे पिछले छः से अधिक सालों में पारित नहीं करवा सकीं हैं। राजमाता की रियासत अर्थात लोकसभा के हाल बेहाल हैं। राजमाता के संसदीय क्षेत्र में प्राईमरी स्तर पर शिक्षकों की जबर्दस्त कमी है, पर राजमाता हैं कि अपनी रियाया की ओर देखने की जहमत ही नहीं उठा रही है। आंकड़ों पर अगर गौर फरमाया जाए तो रायबरेली जिले में विद्यालयों में तीन लाख चालीस हजार 274 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से प्राईमरी स्तर पर दो लाख 59 हजार 130 का आंकड़ा है। अगर देखा जाए तो सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में प्राथमिक स्तर पर दो हजार दो सौ 39 और माध्यमिक स्तर पर एक हजार 143 शिक्षकों की कमी है। एक तरफ कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार कानून को लागू कर दिया गया है, वहीं दूसरी और इस सरकार की चाबी अघोषित तौर पर अपने हाथों में रखने वाली श्रीमति सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र का यह हाल है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजनाएं और कानून सूदूर ग्रामीण अंचलों में किस तरह अमली जामा पहन रहे होंगे।

राजा, राडिया, कलमाड़ी बने भ्रष्टाचारियों के आईकान

लगता है संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की दूसरी पारी में एक प्रतिस्पर्धा चल रही है, वह है कि कौन कितना अधिक भ्रष्टाचार कर सकता है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को घोलकर पी जाओ, कोई कुछ भी कहने वाला नहीं है। देश की पुलिस हो या दूसरी जांच एजेंसियां सब के सब आंख और मुंह पर पट्टी बांधकर ध्रतराष्ट्र के मानिंद बैठे हैं। हिन्दुस्तान की तो छोडिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरेश कलमाड़ी, नीरा राडिया, ए.राजा जैसे लोगों ने धूम मचा रखी है। सभी हत्प्रभ हैं कि आखिर भारत गणराज्य में यह क्या हो रहा है, सरेआम भ्रष्टाचार, घपले, घोटाले फिर भी इसमंे लिप्त लोग मिस्टर क्लीन बने बैठे हैं। अब तो इंटरनेशनल लेबल पर कहा जाने लगा है कि एक हजार करोड़ का भ्रष्टाचार मतलब कलमाड़ी, दस हजार करोड़ रूपए का हुआ तो नीरा राडिया और अगर एक लाख करोड़ के उपर गया तो उसे ए.राजा के नाम से ही पुकारा जाए तो बेहतर होगा। देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस इससे ज्यादा दुर्दिन आम हिन्दुस्तानी को और क्या दिखाएगी!

थर्ड ग्रेड की है मध्य प्रदेश की झांकी

गणतंत्र दिवस परेड में मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली बिना आकर्षण वाली है, जिसके बल बूते एमपी इस परेड में अव्वल की बजाए फिसड्डी ही बना रहेगा। दिल्ली के छावनी इलाके में बन रही इस झांकी को जिस तरीके से बनाया जा रहा है, उससे इस बात में संशय ही लग रहा है कि इसे कोई पुरूस्कार मिल सके। बाघ प्रिंट पर आधारित इस झांकी में विदिशा जिले की शाल भंजिका की प्रतिमा को अगर छोड़ दिया जाए तो शेष में कुछ भी एसा नहीं प्रतीत हो रहा है, जो दर्शकों को बांधे रखे। झांकी की तैयारियों को देखकर लगता है मानो अफसरान ने बला टालने के उद्देश्य से किसी अनाड़ी कलाकार को इसे तैयार करने के काम में लगा दिया है। इस तरह बेरौनक और आकर्षण विहीन झांकी के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है, यह बात तो एमपी के नौकरशाह और जनसेवक ही जाने पर यह तय है कि इस तरह की झांकियों से सूबे की नाक उंची होने के बजाए सूबा उपहास का ही पात्र बनकर रह जाएगा।

ज्योतिषी नहीं राजनेता हैं मनमोहन

मंत्रीमण्डल के बहुचर्चित किन्तु नीरस फेरबदल के उपरांत वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह ने मंहगाई के मामले में अप्रत्याशित जवाब देते हुए कहा कि वे ज्योतिषी नहीं हैं, कि बता सकें कि मंहगाई कब कम होगी, वैसे उन्होंने भरोसा दिलाया कि मार्च तक महंगाई काबू में आ जाएगी। वजीरे आजम की हैसियत से बोलते वक्त डॉ.मनमोहन सिंह यह भूल जाते हैं कि वे प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं, अर्थशास्त्र के गणित को वे बेहतर समझते हैं। सारी स्थितियां परिस्थितियां उनके सामने हैं। सहयोगी दल यहां तक कि कांग्रेस के मंत्री भी आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं। मनमोहन क्या करें? वे भी तो पिछले सदन के भरोसे ही हैं। कठोर कदम उठाते हैं तो सरकार गिरने का डर, नहीं उठाते हैं तो मंत्री और सहयोगी दल कालर पकड़ने पर आमदा हैं। मनमोहन यह बात भी भूल गए कि उन्होंने पिछले साल आरंभ में कहा था कि मंहगाई अक्टूबर तक काबू में आ जाएगी। फिर क्या हुआ मनमोहन जी, आप भी वालीवुड के चर्चित चलचित्र ‘दामिनी‘ की तरह ‘‘तारीख पर तारीख‘ ही दिए जा रहे हैं। देश की जनता की कमर मंहगाई से टूट रही है, आपके मंत्री शरद पवार कहते हैं कि मंहगाई है कहां? अरे आप या पवार साहेब एकाध मर्तबा बाजार जाएं और वहां खीसे से पैसा निकालकर कुछ खरीदें तब तो ‘आटे दाल का भाव‘ पता चलेगा।

राहुल की जमानत पर छूटे मोईली

केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोईली की बिदाई तय थी। आश्चर्यजनक तरीके से उनकी कुर्सी बच गई। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह उनसे आजिज आ चुके थे। अब लोग पतासाजी में लगे हैं कि आखिर क्या कारण था कि माईली बच गए। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त मोईली के दमाद आनंद इनके अघोषित जमानतदार बने जो राहुल गांधी के बचपन के अंतरंग मित्र हैं। फेरबदल के दो घंटे पहले तक संशय बरकरार रहा। कांग्रेस आलाकमान भी मोईली के आंध्र के कारनामों से नाखुश हैं, वे भी उनकी रूखसती की हिमायती थीं। फेरबदल के दो घंटे पहले मोईली को दस जनपथ का बुलावा आया। वहां प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह तब तक मोईली की बिदाई का सारा ताना बाना बुन चुके थे। सूत्र बताते हैं कि इसके पहले कि प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी कोई फैसला ले पाते, कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने फच्चर फसा दिया, और मोईली के तारणहार बनकर उभरे। सूत्रों ने बताया कि मोईली का कद और पद दोनों ही बचाए रखने में वीरप्पा माईली के दमाद आनंद अदकोली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मोईली ने भी आनंद के माध्यम से राहुल को साधा और हो गए अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब।

इस नौटंकी का क्या मतलब हुआ जैन साहेब

केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन पिछले दिनों लखनउ में रिक्शे पर चले और उनके पीछे पीछे उनकी सुरक्षा में चल रहा स्कार्ट चलता रहा। दरअसल यूपी की निजाम मायावती ने एक फरमान जारी किया है कि अगर कोई केंद्रीय मंत्री अपने निजी या पार्टी के काम से उत्तर प्रदेश आता है तो उसे राजकीय अतिथि का दर्जा नहीं दिया जाएगा, न उसे सरकारी वाहन मिलेगा और न ही सरकारी खर्च पर रूकने खाने की व्यवस्था ही की जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही मंत्री जतिन प्रसाद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति के अध्यक्ष पी.एल.पूनिया को भी अपनी जेबें हल्की करनी पड़ी थीं, पर उन्होंने तो बवाल नहीं काटा। प्रदीप जैन का यह आडंबर समझ से परे है, क्योंकि वे अपनी पार्टी के काम से लखनउ गए थे। बतौर सांसद रेल में उनका किराया नहीं लगा, जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें कम से कम एक टेक्सी ही कर लेना था। मगर अगर जैन एसा करते तो मीडिया की सुर्खियां कैसे बटोर पाते। मायावती का कदम एकदम न्यायसंगत है, आप सरकारी खर्चे पर अपनी पार्टी कैसे मजबूत कर सकते हैं, आखिर वह पैसा जनता के गाढ़े पसीने की कमाई का जो ठहरा।

हाईटेक भ्रष्टाचार हुआ है कामन वेल्थ में

कामन वेल्थ गेम्स को भ्रष्टाचार का महाकुंभ कहा जाने लगा है। इसके शिकंजे में आते ही आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने चिंघाड़ा कि वे अकेले नहीं हैं इस दलदल में। कलमाड़ी ने परोक्ष तौर पर कह दिया था कि हमाम में बड़े बड़े निर्वस्त्र खड़े हुए हैं। सीबीआई ने जांच चालू की, नेताओं की सांसें थमी हुईं हैं। इसमें ज्यादा कुछ निकलकर आने की उम्मीद इसलिए नहीं है क्योंकि यह सर्वदलीय भ्रष्टाचार का नायाब नमूना था। चंद दिनों में लोग इसके बारे में भूल जाएंगे और फिर फाईलें धूल खाती फिरंेगी। वैसे सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने अब तक इस महाघोटाले में 154 ईमेल को खंगाला है। बताते हैं कि ईमेल के माध्यम से ही ठेकेदारों से सौदेबाजी होती थी, फिर उस हिसाब से ही बजट बनाकर पास करवा लिया जाता था। सूत्र बताते हैं लगभग पांच दर्जन ईमेल आयोजन समिति और ठेकेदारांे के बीच हुई सांठगांठ की ओर इशारा कर रहे हैं। इनमें से कुछ मेल क्विंस बेटन से संबंधित भी हैं।

राहुल की गणेश परिक्रमा में जुटे जोगी

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जलजला एक बार फिर बढ़ सकता है। जोगी आजकल राहुल गांधी को प्रसन्न करने में जुटे हुए हैं। कांग्रेसियों की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी अपने अपने हिसाब से रोड़ मेप तैयार करने में जुटा हुआ है, ताकि कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र दस जनपथ का आर्शीवाद उसे मिल सके। इसी तारतम्य में अजीत जोगी द्वारा राहुल बिग्रेड के प्रचार प्रसार का जिम्मा अपने कांधों पर ले रखा है। अजीत जोगी द्वारा राहुल बिग्रेड की शाख देश के हर सूबे में खुलवाई जा रही है। इसके जरिए कमजोर तबके के लोगों की मदद, अन्न, वस्त्र वितरण के साथ ही साथ कांग्रेस शासित राज्यों और केंद्र सरकार की विकासोन्मुखी योजनाओं की जानकारियां देने का काम प्रमुख तौर पर किया जाएगा। कांग्रेस के अंदरखाने में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि राहुल बिग्रेड के नाम पर कांग्रेस की राजनीति में हाशिए पर ला दिए गए अजीत जोगी हर राज्य में अपने समर्थकों की खासी फौज खड़ी करने की तैयारी में हैं, ताकि आने वाले समय में वे कांग्रेस के आला नेताओं के साथ बारगेनिंग करने की स्थिति में आ जाएं।

फिर उलझे बाबा रामदेव!

बाबा रामदेव और विवादों का चोली दामन का साथ है। न बाबा बयान बाजी छोड़ते हैं, और न ही विवाद उनका दामन। इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव ने जगन्नाथ पुरी में मंदिर में सबके प्रवेश की वकालत कर डाली। फिर क्या था पुरी में मच गया धमाल। लोगों ने बाबा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, बाबा रामदेव के पुतले फूंके यहां तक कि उनकी गिरफ्तारी की मांग तक कर डाली। लोगों का कहना है कि मंदिर में प्रवेश के मसले पर निर्णय लेने का अधिकार पुरी के शंकराचार्य को है, न कि स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव को। गौरतलब है कि इस मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। स्वाभिमान पार्टी के जरिए देश की सत्ता हथियाने के लिए लालायित बाबा रामदेव राजनीति में अभी कच्चे खिलाड़ी हैं। किस वक्तव्य का क्या असर होगा इस बात से वे अनजान हैं, साथ ही बाबा के पास राजनैतिक समझ बूझ वाले कुशल प्रबंधक और रणनीतिकारों की कमी है, जिससे वे आए दिन उल जलूल बयानबाजी कर मीडिया की सुर्खियां अवश्य ही बटोर लेते हैं, पर ये सारी बातें बाबा रामदेव के खाते में उनकी लोकप्रियता में इजाफा तो कतई नहीं कर रही हैं।

दुलर्भ जीवों की तस्करी कर रही हैं कार्गो विमान कंपनियां

एक तरफ केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश द्वारा वन्य जीवों को बचाए रखने के लिए अनेक मंत्रियों से दो दो हाथ किए जा रहे हैं वहीं दूसरी और पूर्व उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और वर्तमान वायलर रवि के नेतृत्व वाला नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस बात से अनजान है कि देश के कार्गाे विमान संचालकों द्वारा इनके माध्यम से दुर्लभ वन्य जीवों की तस्करी की जा रही है। मध्य प्रदेश काडर की भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी एवं वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की निदेशक रीना मित्रा कहती हैं कि वन्य जीवों की तस्करी करने वाली दो कार्गाे एयरलाईंस के बारें में जांच जारी है, जब तक शक यकीन में नहीं बदल जाता तब तक इनके नाम उजागर नहीं किए जा सकते। वन एवं पर्यावरण मंत्री को जैसे ही इस बात की भनक लगी, उन्होंने तत्काल ही इस मामले को नागरिक उड्डयन मंत्री के समक्ष रखने का मन बना लिया है, अब देखना यह है कि फेरबदल के बाद जयराम रमेश की पहली भिडंत वायलर रवि से किस तरह और किस स्तर पर होती है।

भाजपा के गांधी ने पीछे छोड़ा युवराज को

भले ही कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी भाजपा के वरूण गांधी से उमर में दस साल बड़े हों पर एक मामले में राहुल गांधी को वरूण गांधी ने मात दे दी है, और वह है शादी का मसला। 19 जून 1970 को जन्मे राहुल गांधी की शादी की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हो सकी है, पर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के वरूण गांधी शादी की तैयारियां सप्तपुरियों में से एक पवित्र नगरी वाराणसी के हनुमान घाट पर कांची मठ में आरंभ हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि मेनका गांधी की तमन्ना है कि यह विवाह शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हो एवं इसके साक्षी बनें स्वयं कांची कामकोटी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती। काशी में विवाह के उपरांत दिल्ली में एक प्रीतिभोज का आयोजन भी किया जाने वाला है। राहुल गांधी को महिमा मण्डित करने के कारण भले ही उनका ग्लेमर सर चढ़कर बोल रहा हो, किन्तु देश की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि वरूण की शादी में उनकी ताई सोनिया, बहन प्रियंका वढ़ेरा और बड़े भाई ‘‘कुंवारे जेठ‘ राहुल गांधी शामिल होते हैं या नहीं!

पुच्छल तारा

देश के वजीरे आजम ने आखिरकार अपने उन्नीस माह पुराने मंत्रीमण्डल को मथ दिया है। इस मंथन के बाद जो निकलकर आया है वह विष है या अमृत यह तो भविष्य के गर्भ में ही छिपा हुआ है। आज के समय में मनमोहन सिंह मजाक का विषय बने हुए हैं। मध्य प्रदेश के दमोह से शुभी ने एक ईमेल भेजा है, शुभी लिखती हैं कि एक बूढ़े पहलवान ने दावा किया कि आज भी उनके अंदर उतनी ही ताकत है, जितनी कि जवानी में थी। लोगों ने पूछा कैसे भई? पहलवान बोला -‘‘वो बड़ा पत्थर देख रहे हो न, में उसे जवानी में भी नहीं उठा पाता था, और आज भी नहीं उठा पाता हूं। इसी तर्ज पर मनमोहन सिंह ने मंत्रीमण्डल फेरबदल के बाद सोचा होगा कि वे आज भी उतने ही ताकतवर हैं जितने कि चंद साल पहले थे। वे आज भी कड़े फैसले नहीं ले सके और चंद साल पहले भी कड़े फैसले नहीं ले पाए थे।

नर्मदा कुंभ की तैयारियां जोरों शोरों से

नर्मदा सामाजिक कुम्भ की तैयारियां

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी आगामी फरवरी माह में १०-११ एवं १२ फरवरी को मंडला मे आयेाजित नर्मदा सामाजिक कुम्भ की तैयारियां अपने अंतिम चरण में है। सामाजिक कुम्भ में व्यवस्था की दृष्टि से अन्न एवं धन संग्रह समाज द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेंवक संघ सहित कुम्भ के आयोजन में सक्रिय येागदान करने वाले संगठनों द्वारा नर्मदा सामाजिक कुम्भ में प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अतिरिक्त व्यवस्थाएं कुम्भ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रदान करने के लिए बड़ी तैयारियां की गई हैं अनुमान है कि नर्मदा सामाजिक कुम्भ में २० से ३० लाख श्रद्धालुओ शामिल होंगे, इस सामाजिक महाकुम्भ में देश भर से श्रद्धालु पहुंचेेगे जिसके लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं म.प्र. में महाकाल की नगरी उज्जेन में कुम्भ लगने की परम्परा सनातन काल से रही है यह पहला अवसर है जब आदिवासी क्षेत्र के गोण्डवाना क्षत्रपों के गढ़ मण्डला में नर्मदा सामाजिक कुम्भ का आयोजन किया जा रहा है नर्मदा सामाजिक कुम्भ की सारी तैयारियां लगभग पुरी कर ली गई है श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए ५१ उपनगरों का निमार्ण किया गया है। जिन्हे छ: महानगरों में विभाजित किया जायेगा। यह महानगर देश के महापुरूषों के नाम पर बसाये जा रहे हैं त्रि दिवसीय समाजिक महाकुम्भ में देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए छ: भोजनालय अलग-अलग महानगरों में बनाये जायेंगे महा कुम्भ आयोजन समिति द्वारा भिन्न मार्गों से आनेवाले श्रद्धालुओ को अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित कर मार्गो के अनुसार व्यवस्थाएं प्रदान की जा रही हैं, मंडला में सामाजिक कुम्भ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तो है ही यह ऐतिहासिक और म.प्र. की जीवन रेखा का उदगम क्षेत्र है इसके साथ ही आदिवासी समुदाय जो प्रकृति के पूजक हैं उस संस्कृति से देश की जनता को परिचित करना भी सामाजिक महाकुम्भ का उद्देश्य है। सामाजिक महाकुम्भ को लेकर प्रदेश में एक धार्मिक वातावरण निर्मित हो रहा है, पूरे प्रदेश में नर्मदा सामाजिक कुम्भ को लेकर आम जनता में व्यापक उत्साह देख जा रहा है। मंडला से लगे हुए जिलों में कुम्भ में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्री वाहनों की अतिरिक्त व्यवस्था भी की जा रही है, जिस प्रकार की व्यवस्थाएं नर्मदा सामाजिक कुम्भ में की गई हैं उससे स्पष्ट होता है कि यह सामाजिक महाकुम्भ मण्डला जिले को ही नहीं पूरे प्रदेश को एक अलग पहचान प्रदान करेगा। सामाजिक कुम्भ की कल्पना ही मण्डला के धार्मिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को प्रतिपादित करने की है मण्डला जिले में निवास करने वाली जनजातियां विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जुझ रही है। प्रकृति से आगाध प्रेम रखने वाली पराक्रमी ये जनजातियां शिक्षा के पर्याप्त अवसर प्राप्त न होने के कारण विकास की मुख्य धारा से कटी हुई नजर आती हैं इन्हें शिक्षा का पर्याप्त अवसर मिल जाये तो इनके प्रकृति सम्बन्धी ज्ञान का व्यापक उपयोग देश में सार्थक परिणाम देने वाला सिद्ध होगा। सामाजिक कुम्भ देश की एकता अखण्डता और राष्ट्रीयभक्ति जागृत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण हैं पूरे प्रदेश में कुम्भ में शामिल होने के लिए हिन्दुवादी संघठनों के कार्यकर्ता और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक कुम्भ में पहुंचने का संदेश दे रहे हैं। अनेक जिलो एवं प्रदेशो से कुम्भ के लिए धन संग्रह और अनाज संग्रह हो रहा है। ट्रकों से भरकर अनाज व्यवस्था के लिए पहुंच रहा है हर दिन कुम्भ स्थल पर दो लाख व्यक्तियों को लिए भोजनालयों में भोजन बनाया जायेगा। कुम्भ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल प्राप्त हो, रूकने की बेहतर व्यवस्था, स्नान,आदि की व्यवस्थाएं, चिकित्सा व्यवस्था बेहतर ढंग से की गई है राज्य सरकार भी कुम्भ के सफल आयोजन के लिए व्यवस्थाएं जुटा रही हैं इस धार्मिक कुम्भ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन राव भागवत, सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, निर्वतमान संघचालक कुप्पसी सुदर्शन, सरकार्यवाह सुरेश सोनी, दत्ता होसबोले, गोविंद गिरी महाराज, जगत्गुरूबद्रीपीठ, वासुदेवानंद सरस्वती, पूज्य दीदी मां ऋतम्भरा, भारतमाता मंदिर के संस्थापक, स्वामी सत्यमित्रानंद जी, आचार्य महामण्डलेश्वर श्यामदास जी महाराज जबलपुर, सुखदेवानंद जी अमरकंठक, जगत्गुरू राज-राज सेवा आश्रम, हरिद्वार रामानंदचार्य जी स्वामी, सहित बड़ी संख्या में विद्वान एवं साधु संतों का सानिध्य प्राप्त होगा।

शनिवार, 22 जनवरी 2011

Offering comfort


Offering comfort

Jan 22, 2011  PTI.Share..
Madhya Pradesh BJP president Prabhat Jha seeks the blessings of senior leader Sushma Swaraj at her residence in Bhopal on Friday. Mr Jha met Ms Swaraj to express his condolences over the demise of her brother. PHOTO : PTI

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

एपी कांग्रेस अध्‍यक्ष की तलाश तेज

भूरिया के हाथों होगी एमपी कांग्रेस की बागडोर

दिग्विजय सिंह खड़े हैं कांतिलाल के पीछे चट्टान की तरह

सिंधिया, पचौरी को प्रदेश में नहीं पसारने देना चाहते पैर

अरूण यादव पर लग सकता है दांव

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मनमोहन सिंह मंत्रीमण्डल में फेरबदल के उपरांत अब कांग्रेस संगठन की बारी है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस में जान फूंकने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने आदिवासी मामलों के मंत्री कांतिलाल भूरिया को एमपी कांग्रेस कमेटी का नया निजाम बनाने का मन बना लिया है। पिछले दिनों कांतिलाल भूरिया को मंत्री मण्डल से रूखसत होने खबरों को धता बताते हुए उन्होंने अपनी कुर्सी सलामत रखी है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि विस्तार के पहले मंगलवार को भूरिया ने प्रणव मुखर्जी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष के निवास पर जाकर भेंट की थी, और श्रीमति गांधी को राजनैतिक समीकरणों से आवगत कराया था, जिससे उनकी लाल बत्ती बच गई।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में जमुना देवी के अवसान के उपरांत आदिवासी नेतृत्व को उभारने के लिए आलाकमान किसी योग्य आदिवासी नेता के चयन में लगा हुआ है। कांग्रेस के संगठन के सूत्रों का कहना है कि कांतिलाल भूरिया के विभाग में राजस्थान के सीकर से चुने गए महादेव सिंह खंडेला को बतौर राज्यमंत्री इसलिए शामिल किया गया है ताकि अगर भूरिया मध्य प्रदेश में ज्यादा समय दें तो विभाग का कामकाज ज्यादा प्रभावित न हो पाए। उधर कांतिलाल भूरिया के सर पर कांग्रेस के ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह का वरद हस्त है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष सुरेश पचौरी और युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही दिग्विजय सिंह की आखों में खटक रहे हैं। दिग्विजय सिंह की कोशिश है कि इन दोनों ही नेताओं को मध्य प्रदेश से बाहर ही रखा जाए।

कांग्रेस मुख्यालय से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो आलाकमान की नजरों में एमपी के लिए भूरिया के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरूण यादव सबसे उपयुक्त दावेदार नजर आ रहे हैं, किन्तु तीनों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि तीनों ही मंत्री अपनी लाल बत्ती को तजकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कांटों भरा ताज पहनने में दिलचस्पी नहीं रख रहे हैं। भूरिया के नाम पर एमपी के क्षत्रप कमल नाथ और अर्जुन सिंह को भी आपत्ति नहीं होगी। मंत्रीमण्डल विस्तार में सुरेश पचौरी का नाम नहीं आने से अब उनके भविष्य के बारे में भी अटकलों अफवाहों का बाजार गर्मा गया है। कहा जा रहा है या तो उन्हें टीम सोनिया में बतौर महासचिव शामिल किया जा सकता है या फिर उन्हें किसी सूबे में राज्यपाल बनाकर भी भेजा जा सकता है। वैसे मनमोहन सिंह ने बजट के बाद बड़े विस्तार के संकेत देकर साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कुछ और चेहरों को लाल बत्ती से नवाजा जा सकता है।

प्रभात झा पर गरजे भूरिया

झा के आरोप तथ्यहीन: भूरिया

नई दिल्ली, (ब्यूरो)। केंद्रीय जनजाति मंत्री कांतिलाल भूरिया ने मध्य प्रदेश भाजपाध्यक्ष प्रभात झा के उन आरोपों को सिरे से नकार दिया है, जिसमें भाजपाध्यक्ष ने एमपी के चारों केंद्रीय मंत्रियों को नमक हराम बताया था। भूरिया के अतिरिक्त निज सचिव आर.बी.शर्मा के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रभात झा के आरोप तथ्यहीन है, वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। प्रभात झा का कथन उनकी ‘विकृत मानसिकता‘ का घोतक है। भूरिया ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार केंद्र द्वारा दी जा रही धनराशि को ही खर्च नहीं कर पा रही है।

केंद्रीय मंत्री भूरिया का कहना है कि उन्हीं के मंत्रालय द्वारा छः सालों में 13,408 करोड़ रूपए की राशि आवंटित की है, जबकि एनडीए की सरकार ने छः सालों में महज 5,865 करोड़ रूपए ही जारी किए थे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों को देखकर यूपीए सरकार द्वारा ऐतिहासिक वन अधिकार अधिनियम 2006 पारित किया है। इसके तहत पिछले साल दिसंबर तक मध्य प्रदेश से 4 लाख 19 हजार 226 दावे प्राप्त हुए जिसमें से 1 लाख 12 हजार 148 अधिकार पत्र वितरित कर दिए गए एवं 2,58,402 दावों को निरस्त कर दिया गया।

विज्ञप्ति में भूरिया के हवाले से कहा गया है कि आदिवासियों के लिए केंद्र सरकार ने अपना खजाना खोल दिया गया है। आदिवासी विकास के लिए बजट में 3 हजार 936 करोड़ रूपए का प्रावधान करते हुए 1367 करोड़ रूप्ए आवंटित भी कर दिए गए, इसके जवाब में एमपी गर्वमेंट ने महज 672 करोड़ रूपयों का ही उपयोग किया जा सका है। अनुसूचित जाति उपयोजना में दो हजार 714 करोड़ 16 लाख के बजट के एवज में 1262 करोड़ 92 लाख रूपए आवंटित करने के बाद भी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 471 करोड़ रूपए ही व्यय किए जा सके हैं। भूरिया ने आरोप लगाया कि खर्च न हो पाने के कारण हर साल चार पांच सौ करोड़ रूपए लेप्स हो रहे हैं। भूरिया ने मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रभात झा को नसीहत देते हुए कहा है कि वे किसी पर टीका टिप्पणी करने के पहले एक बार अपनी गिरेबान में जरूर झांक लें।

मध्यप्रदेश की झांकी ’बाघ प्रिन्ट’ पर आधारित

गणतंत्र दिवस परेड: मध्यप्रदेश की झांकी ’बाघ प्रिन्ट’ पर आधारित

नई दिल्ली, (ब्यूरो)। वर्ष 2011 की गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष मध्यप्रदेश के बाघ प्रिन्ट पर आधारित झांकी राजपथ की शोभा बढ़ायेगी। झांकी के आगले हिस्से में शाल भंजिका की विशाल मूर्ति दिखायी गयी है। झांकी के मध्य में बाघ के छापे की कारीगरी को दर्शाया गया है।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में वस्त्रों की बुनाई और छापे की परम्परा सदियों पुरानी है। बाघ की छापाकला देश में लकड़ी के छापों से कपड़े पर होने वाली छपाई परम्परा की कड़ी है। कपड़ों की छपाई के प्रमाण प्राचीन कला की मूर्ति शिल्पों मंे भी दिखायी देते हैं। जैसे 11वीं शताब्दी की विख्यात शाल भंजिका प्रतिमा में छपे वस्त्र स्पष्ट दिखते हैं।

बाघ वह स्थान है जहां वस्त्र छपाई की परम्परा अपने शीर्ष पर दिखायी देती है। इसमें क्षेत्र की विशेष भौगोलिक स्थितियों की भी भूमिका है। इस क्षेत्र के कारीगरों ने वर्षों अपनी कला को निखारा है, यहां की भूगर्भीय स्थितियों को भी समझा है और अभिव्यक्ति का अनुपम उदाहरण बाघ के वस्त्र छपाई के रूप में दुनिया को दिया है। लाल और काले रंगों के प्रयोग से बने बाघ के वस्त्र अपनी साड़ी अभिव्यक्ति में अद्भुत रचना होते हैं। वस्त्रों पर रंगों की यह चमक कहीं और सम्भव नहीं है। यह छपाई रासायनिक रंगों की विशेष प्रकृति के कारण होता है। ज्यामितीय रूपकारों और रंगों का अद्भुत प्रयोग बाघ की वस्त्र छपाई मध्यप्रदेश को विशेष पहचान देता है।

M P TABLEAU ON BAGH PRINT

Republic Day Parade 2011: Madhya Pradesh Tableau on Bagh Prints







New Delhi, January 21, Madhya Pradesh Tableau on Bagh Prints will grace the Republic Day Parade 2011at Rajpath. The front portion of the float shows a huge Shal Bhanjika which depicts the celestial beauty of 11th Century droped in printed cloth.


Bagh prints of Madhya Pradesh represents one of the most ancient traditions of wooden block printings on cloths. Weaving and block printing traditions goes back to centuries.


Bagh with its unique geographical locations and is the place where the craft and art of block printing has reached its pinnacle. The use of colours red and black create a wondrous effect, which is impossible to get any where else. This is possible only because of chemical properties of the area.


Geometric designs and imaginative use of colours give Bagh prints a distinct identity.

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

राष्ट्रधर्म के बजाए गठबंधन धर्म निभाया कांग्रेस ने

आजाद भारत के सबसे बेबस प्रधानमंत्री साबित हुए मनमोहन

इससे बेहतर तो पुराना चेहरा ही था

कांग्रेस के अंदर ही उबल रहा है असंतोष

(लिमटी खरे)

भारत गणराज्य भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार की आग में जल रहा है, उधर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहे हैं। कांग्रेस के युवराज ने कुछ दिन पहले गठबंधन की मजबूरियों पर प्रकाश डाला था। देशवासियों के जेहन में एक बात कौंध रही है कि बजट सत्र के ठीक पहले हुए इस फेरबदल और विस्तार के जरिए कांग्रेस क्या संदेश देना चाह रही है? संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की दूसरी पारी में जितने घपले घोटाले सामने आए हैं, वे अब तक का रिकार्ड कहे जा सकते हैं। मंत्रियों, अफसरशाही की जुगलबंदी के चलते लालफीताशाही के बेलगाम घोड़े ठुमक ठुमक कर देशवासियों के सीने पर दली मूंग के मंगौड़े तल रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है, आम आदमी मरा जा रहा है, प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि वे ज्यांतिषी नहीं हैं कि बता सकें कि आखिर कब महंगाई कम होगी। मनमोहन भूल जाते हैं कि वे भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री हैं। भारत के संविधान में भले ही महामहिम राष्ट्रपति को सर्वोच्च माना गया हो किन्तु ताकतवर तो प्रधानमंत्री ही होता है। अगर मनमोहन सिंह चाहें तो देश में मंहगाई, घपले घोटाले, भ्रष्टाचार पलक झपकते ही समाप्त हो सकता है, किन्तु इसके लिए मजबूत इच्छा शक्ति की आवश्यक्ता है, जिसकी कमी डॉ.मनमोहन सिंह में साफ तौर पर परिलक्षित हो रही है।

उन्नीस माह पुरानी मनमोहन सरकार में पिछले लगभग अठ्ठारह माह से ही फेरबदल की सुगबुगाहट चल रही थी। तीन नए मंत्रियों को शामिल करने, तीन को पदोन्नति देने और चंद मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के अलावा मनमोहन सिंह ने आखिर किया क्या है? हमारी नितांत निजी राय में यह मनमोहनी डमरू है, जो देश की मौजूदा समस्याओं, घपलों, घोटालों, भ्रष्टाचार, नक्सलवाद, अलगाववाद, आतंकवाद की चिंघाड़ से देशवासियों का ध्यान बंटाने का असफल प्रयास कर रहा है। संप्रग दो में असफल और अक्षम मंत्रियों को बाहर का रास्ता न दिखाकर प्रधानमंत्री ने साबित कर दिया है कि वे दस जनपथ (श्रीमति सोनिया गांधी के सरकारी आवास) की कठपुतली से ज्यादा और कुछ नहीं हैं। आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे मंत्रियों को बाहर करके मनमोहन सिंह अपनी और सरकार की गिरती साख को बचाने की पहल कर सकते थे, वस्तुतः उन्होंने एसा किया नहीं है। आज देश प्रधानमंत्री से यह प्रश्न पूछ रहा है कि जो मंत्री अपने विभाग में अक्षम, अयोग्य या भ्रष्टाचार कर रहा था, वह दूसरे विभाग में जाकर भला कैसे ईमानदार, योग्य और सक्षम हो जाएगा? साथ ही साथ प्रधानमंत्री को जनता को बताना ही होगा कि आखिर वे कौन सी वजह हैं जिनके चलते मंत्रियों के विभागों को महज उन्नीस माह में ही बदल दिया गया है। क्या वजह है कि सीपीजोशी को ग्रामीण विकास से हटाकर भूतल परिवहन मंत्रालय दिया गया है?

दरअसल विपक्ष द्वारा शीत सत्र ठप्प किए जाने के बाद अब बजट सत्र में अपनी खाल बचाने के लिए मंत्रियों के विभागों को आपस में बदलकर देश के साथ ही साथ विपक्ष को संदेश देना चाह रही है कि अब भ्रष्ट मंत्रियों की नकेल कस दी गई है। वैसे कांग्रेस की नजरों में भविष्य के प्रधानमंत्री और युवराज राहुल गांधी की युवा तरूणाई को इस मंत्रीमण्डल में स्थान न देकर कांग्रेस ने एक संदेश और दिया है कि आने वाले फेरबदल में भ्रष्टों को स्थान नहीं दिया जाएगा, बजट सत्र के बाद जो फेरबदल होगा वह राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने का रोडमेप हो सकता है। इसी बीच इन तीन चार माहों में भ्रष्ट और नाकारा मंत्रियों को भी अपना चाल चलन सुधारने का मौका दिया जा रहा है, किन्तु मोटी खाल वाले मंत्रियों पर इसका असर शायद ही पड़ सके। इसी बीच मंहगाई पर काबू पाने के लिए भी कुछ प्रयास होने की उम्मीद दिख रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की जो छवि है, वह भी बचाकर रखने के लिए कांग्रेस के प्रबंधकों ने देशी छोड़ विदेशी मीडिया को साधना आरंभ कर दिया है। कांग्रेस के प्रबंधक जानते हैं कि देश में मीडिया को साधना उतना आसान नहीं है, क्योंकि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बाद अघोषित चौथे स्तंभ ‘‘मीडिया‘‘ के पथभ्रष्ट होने के उपरांत ‘ब्लाग‘ ने पांचवे स्तंभ के बतौर अपने आप को स्थापित करना आरंभ कर दिया है।

इस फेरबदल में वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भारी मशक्कत करनी पड़ी है। एक दूसरे के बीच लगातार संवाद कराने में कांग्रेस अध्यक्ष के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल की महती भूमिका रही। किसी को इस फेरबदल का लाभ हुआ हो अथवा नहीं किन्तु इसका सीधा सीधा लाभ अहमद पटेल को होता दिख रहा है, जिन्होंने एक बार फिर कांग्रेस सुप्रीमो की नजर में अपनी स्थिति को मजबूत बना लिया है। दस जनपथ और सात रेसकोर्स के बीच अहमद पटेल ने सेतु का काम ही किया है। बताते हैं कि फेरबदल में मंत्रियों को बाहर का रास्ता न दिखाने का सुझाव अहमद पटेल का ही था। पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष को मशविरा दिया कि अगर मंत्रियों को हटाया गया तो वे पार्टी के अंदर असंतोष को हवा देंगे, तब बजट सत्र में टू जी स्पेक्ट्रम, विदेशों में जमा काला धन वापस लाना, नामों के खुलासे, महंगाई, सीवीसी की नियुक्ति आदि संवेदनशील मुद्दों पर पार्टीजनों को संभालना बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा। भले ही कांग्रेस प्रबंधकों ने यह सोचा होगा कि टीम मनमोहन से आक्रोश को शांत किया जा सकता है, किन्तु अभी भी पार्टी के अंदर लावा उबल ही रहा है।

मनमोहन ने देश की वर्तमान चुनौतियों को दरकिनार कर गठबंधन का धर्म ही निभाया है। भारत में गठबंधन सरकार का श्रीगणेश सत्तर के दशक में हुआ था। आपातकाल के उपरांत 1977 में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था, उस समय मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गठबंधन सरकार केंद्र पर काबिज हुई थी। इसके बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, नरसिंम्हाराव, अटल बिहारी बाजपेयी, एच.डी.देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल पुनः अटल बिहारी बाजपेयी के बाद डॉ.मनमोहन ंिसह की सरकार द्वारा दो बार गठबंधन के जरिए केंद्र पर राज किया है। इक्कीसवीं सदी में सरकार में शामिल सहयोगी दलों द्वारा जब तब कांग्रेस या भाजपा की कालर पकड़कर उसे झझकोरा है। बिना रीढ़ के प्रधानमंत्रियों ने सहयोगी दलों के इस रवैए को भी बरदाश्त किया है। बहरहाल जो भी हो गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही ने सत्ता की मलाई का रस्वादन अवश्य किया है पर गठबंधन के दो पाटों के बीच में पिसी तो आखिर देश की जनता ही है।

युवाओं को तरजीह न देने से राहुल हैं नाराज!

युवराज खफा हैं टीम मनमोहन के गठन से!

गायब रहे शपथ ग्रहण समारोह से

उप प्रधानमंत्री न बन पाने का मलाल दिखा प्रणव के चेहरे पर

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की दूसरी पारी में हुए पहले फेरबदल से राहुल गांधी ने अपने आप को दूर ही रखा। उधर उप प्रधानमंत्री न बन पाने की पीड़ा प्रणव मुखर्जी के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को प्रसन्न करने के लिए फोटो सेशन में भारी उद्योग मत्री प्रफुल्ल पटेल ने उन्हें भी आमंत्रित कर डाला। इस फेरबदल से कांग्रेस में रोष और असंतोष की स्थिति बनती जा रही है। फेरबदल में आपाधापी का माहौल इस कदर था कि मंत्रियों को अपने अपने विभागों के बारे में ही पता नहीं था, जबकि सरकारी वेब साईट पर मंत्रीमण्डल की सूची पहले ही जारी कर दी गई थी।

कांग्रेस की नजर मे ंभविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी को शपथ ग्रहण समारोह में सभी की नजरें तलाशती रहीं किन्तु उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं की। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी देश के वर्तमान हालातों और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली से खासे खफा हैं। राहुल चाह रहे थे कि मंत्री मण्डल से दागदार चेहरों को बाहर कर इसमें युवाओं को मौका दिया जाए। राहुल गांधी की बात कांग्रेस के रणनीतिकारों को जम तो रही थी किन्तु वे फिलहाल बजट सत्र तक कोई जोखम उठाना नहीं चाह रहे थे। सूत्रों की मानें तो राहुल ने अपनी नाराजगी को तल्ख शब्दों में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन ंिसह और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी तक पहुंचा दिया है। सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को पूरी उम्मीद थी कि उन्हें केंद्र सरकार में उप प्रधानमंत्री बना दिया जाएगा। अंतिम समय में जब उनकी मनोकामना पूरी नहीं हुई तो वे शपथ ग्रहण समारोह में कटे कटे से नजर आए। समारोह में अधिकांश समय प्रणव ने पत्रकारों से बतियाकर ही गुजारा। बाद में जब प्रधानमंत्री डॉ.एम.एम.सिंह की नजर उन पर पड़ी तो खुद प्रधानमंत्री उठकर प्रणव के पास गए और इशारे से उन्हें बुलाकर उनके कान में कुछ मंत्र फूंका।

समारोह में जब मंत्रियों के साथ प्रेजीडेंट और पीएम का फोटो सेशन हो रहा था, तब पदोन्नत हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को खुश करने की गरज से उन्हें भी फोटो सेशन में शामिल होने का आमंत्रण दे डाला। जैसे ही राकांपा क्षत्रप शरद पंवार ने उन्हें देखा तो इशारे से पास बुलाकर कहा कि प्रोटोकाल के मुताबिक इस सेशन में मंत्रियों के अलावा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ही शामिल हो सकते हैं। यह मंत्रिमण्डल विस्तार कांग्रेस अध्यक्ष के लिए बहुत ही बड़ी चुनौति बना हुआ था, यही कारण है कि इसमें अंतिम समय तक लगाई जा रही अफवाहें अटकलें परवान न चढ़ सकीं। मंत्रियों को अपने अपने विभागों की जानकारी भी पत्रकारों के माध्यम से मिली, क्योंकि मंत्रियों के विभागों की सूची सरकारी वेब साईट पर शपथ ग्रहण से कुछ समय पूर्व ही डाल दी गई थी।



कांग्रेस में फट रहा है असंतोष का लावा

क्षेत्रीय संतुलन न बाना पाने और भ्रष्ट मंत्रियों के पर न कतरे जाने से कांग्रेस के अंदरखाने में रोष और असंतोष तेजी से भड़क रहा है। मीरा कुमार को छोड़कर बिहार से कोई नहीं है, वहीं छत्तीसगढ़ गोवा, त्रिपुरा, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालेण्ड, मिजोरम को भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। आंध्रा की रेणुका चौधरी को उम्मीद थी कि वे लाल बत्ती पा सकती हैं, किन्तु वे निराश ही हुईं। उधर यूपी के बेनी वर्मा को केबनेट मंत्री बनाने का आश्वासन दिया गया था, जिन्होंने शपथ ग्रहण के बाद अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए न तो मीडिया से चर्चा की और न ही वहां से लाल बत्ती वाली गाड़ी की सवारी करना पसंद किया। वर्मा शपथ ग्रहण के बाद अपने उसी वाहन से वापस लौटे जिसमें बैठकर वे आए थे। पीएमओ के सूत्रों ने बताया कि बाद में पीएम के निर्देश पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने वर्मा को समझाया तब जाकर गुरूवार को उन्होंने इस्पात राज्यमंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया।

टेक्निकल एजूकेशन में सेकंड शिफ्ट की मांग की शर्मा ने

तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा तकनीकी शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में सुझाव

टेक्निकल एजूकेशन में सेकंड शिफ्ट की मांग की शर्मा ने

नई दिल्ली (ब्यूरो)। तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने हिन्दीभाषी विद्यार्थियों के हित में संवाद कौशल को तकनीकी पाठ्यक्रम में शामिल करने, उद्योगों की आवश्यकतओं तथा पूर्ति के अंतर के आंकलन के लिए संस्थागत व्यवस्था करने तथा तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में दूसरी पाली शुरु करने की अनुमति दिये जाने का सुझाव दिया है।

श्री शर्मा आज यहाँ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा अर्हता ढाँचा निर्धारित करने के लिए आयोजित राज्यों के तकनीकी शिक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रदाय की जा रही अर्हताओं में एकरुपता लाने की दृष्टि से तैयार किये जा रहे एकीकृत ढांचे को सराहनीय और स्वागत योग्य बताते हुए, इसमें राज्य सरकारों के विचारों तथा प्रस्तावों को शामिल करने का आग्रह किया।

तकनीकि शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिन्दी भाषी प्रदेशों के विद्यार्थी तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद कौशल की कमी के कारण रोजगार प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करते हैं। इसे दूर करने और बेहतर नियोजन के लिए आवश्यक कौशल तथा संवाद कौशल को पाठ्यक्रम का आवश्यक अंग बनाया जाए।

श्री शर्मा ने सुझाव दिया कि उद्योगों की आवश्यकताओं तथा मांग और पूर्ति के अंतर के आंकलन के लिए एक बार व्यवस्था की जगह इसे संस्थागत स्वरूप दिया जाना चाहिए, ताकि प्रादेशिक स्तर पर इस प्रकार के आंकलन के डाटा का सतत रूप से पाठ्यक्रम के पुनरीक्षण, नवीन पाठ्यक्रमों को शुरू करने तथा अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों को बंद करने में किया जा सके। श्री शर्मा ने पारम्परिक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ गौ संवर्द्धन एवं जैविक खेती के काम आने वाले पाठ्यक्रमों को भी इसमें शामिल करने का सुझाव दिया।

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की गुणवŸाा से ही व्यावसायिक शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त हो सकता है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और उन्मुखीकरण के लिए प्रदेश में एडवान्सड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि आईटीआई संस्थाओं के भवनों के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश को लगभग 160 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उन्होंने केन्द्र से यह राशि एक मुश्त उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में तकनीकी ज्ञान एवं प्रशिक्षण देने के लिए बड़ी अधोसरंचना उपलब्ध है। एआईसीटीई द्वारा इन महाविद्यालयों तथा पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों को द्वितीय शिफ्ट में आईटीआई प्रारम्भ करने की स्वीकृति दी जाए। इससे बड़े पैमान पर कौशल विकास का कार्य किया जा सकेगा।

श्री शर्मा ने कहा कि पीपीपी मोड में पॉलीटेकनिक स्थापित करने की योजना के तहत मध्यप्रदेश को 97 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये प्रस्ताव छानबीन और दिशा निर्देशों के लिये भारत शासन को भेज दिये गये हैं। उन्होंने इन प्रस्तावों को शीघ्र मंजूर किये जाने का अनुरोध किया, जिससे प्रदेश के पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों में प्रवेश क्षमता में लगभग 30 हजार की वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पीपीपी मोड में 110 आईटीआई तथा 313 कौशल विकास केन्द्र खोले जाने का प्रस्ताव भारत शासन के पास लंबित है जिसे शीघ्र स्वीकृति दी जाए। श्री शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में गुणवŸाा सुनिश्चित करने के लिये व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन संस्थाओं की रेकिंग और ग्रेडिंग करने का निर्णय लिया गया है।

श्री शर्मा ने व्यावसायिक कम्प्युनिटी पॉलीटेकनिक योजना प्रदेश के सभी पॉलीटेकनिक महाविद्यालयों में लागू किये के प्रस्ताव के बारे में भी जानकारी दी । उन्होंने मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के विस्तार और गुणवŸाा में सुधार के लिये राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की भी विस्तार से जानकारी दी।

आवाम ए हिन्‍द 05 जनवरी 2011

ये है दिल्‍ली मेरी जान

बेईमान ही बेईमान

हम भी बेईमान तो तुम भी बेईमान....


(मनोज मर्दन त्रिवेदी)
सिवनी। किसानों के खेत में ओला गिरे, पाला गिरे, सूखा पड़े या अतिवृष्टि हो,इल्लियों से फसल नष्ट हो जाये। किसानों क बर्बादी पर राजनैतिक व्यक्ति जश्र मनाते नजर आते हैं। किसानों की फसल चौपट चाहे किसी भी कारण से हो,किसानों पर विपदा आते ही राजनीति करने वालों की फसल लहलहा जाती है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनो अपने-अपने स्तर की राजनीति करते हैं। उन्हे किसानों की आपदा पर सुनहरा अवसर मिल जाता है। हाल ही में सिवनी सहित पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड में गिरे पाले और तुषार से किसानों की फसलें चौपट हो गयी हैं,प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह घोषणा कर रहे हैं कि 50 प्रतिशत नुकसानी को 100 प्रतिशत मानकर किसानों को राहत प्रदान की जायेगी। कोई उन्हे किसान विरोधी नेता न कह दे इसका उन्हे भय ऐंसा सताया कि उन्होने दर्जन भर घोषणाऐं किसानों के हित में कर डाली,जिसके साथ उन्होने एक ऐंसी हास्यप्रद घोषणा भी की है जिसे पूरी करना सरकार के वश की बात नहीं और यदि किसान उनकी घोषणा का पालन करता है तो और भी बड़े नुकसान में चला जायेगा,परंतु उस बात की ओर प्रशासन तंत्र की तो हिम्मत नहीं है कि उन्हे सलाह दे सके,सत्ता पक्ष के और विपक्ष के नेता भी उस बात का उल्लेख करने से बच रहे हैं। मुख्यमंत्री की यह घोषणा साहूकारों का ऋण अदा न करने से संबंधित है। यह बात मुख्यमंत्री भी अच्छी तरह जानते हैं कि साहूकार जितना ऋण देता है,उससे दुगनी कीमत की मूल्यवान वस्तु अपने पास गिरवी रख लेता है। किसान यदि उसका ऋण अदा नहीं करेगा तो किसान को साहूकार को ब्याज देना पड़ेगा साथ ही यदि समय बीत जाता है तो किसान का जेवर या जो वस्तु उसने गिरवी रखी है वह डूब जायेगी।

50 प्रतिशत नुकसानी को 100 प्रतिशत नुकसानी मानने की परिभाषा बड़े राजनैतिक व्यक्ति बेहतर समझते हैं, परंतु किसानों को वे समझाने से हमेशा परहेज करते हैं। ठाकुर हरवंश सिंह क्षेत्र का सघन दौरा कर किसानों के हमदर्द बनने की नौटंकी कर रहे हैं,उन्हे कम से कम उस 50 प्रतिशत की परिभाषा किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिये था परंतु सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की मजबूरी उन्हे ऐंसा करने से रोक देती है। किसानों के धरना कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके समर्थकों द्वारा किसानों और उनका अभिनंदन संबंधी विज्ञापन जारी होना किसानों के प्रति क्या पीड़ा है कांगे्रस की उस मानसिकता को प्रकट करता है। ठाकुर हरवंश सिंह मामूली एक विधायक नहीं पूरी सरकार हैं, वे चाहें तो विधानसभा उपाध्यक्ष के नाते राजस्व पुस्तिका में संशोधन करा सकते हैं,परंतु इसके लिए राजनैतिक ईमानदारी की आवश्यकता है जो राजनैतिक व्यक्तियों में कम पायी जाती है। राजस्व रिकार्ड के अनुसार प्रति एकड़ जो उत्पादन दर्ज है,आज किसान उससे दुगना-तिगना उत्पादन अपने खेतों में कर रहा है परंतु यह किसानों द्वारा महंगे बीज,खाद महंगी दवाईयां और महंगी तकनीकियों के बल पर किया जा रहा है। उत्पादन का आंकलन पुराने रिकार्ड के अनुसार होता है जबकि वर्तमान में लागत अधिक लगाकर किसान अपने उत्पादन को बढ़ा चुका है। यह संशोधन जब तक नहीं होगा किसानों को पर्याप्त नुकसानी मिलना संभव नहीं है। ठाकुर हरवंश सिंह को विरोध नहीं विधानसभा उपाध्यक्ष के नाते संशोधन पर बल देना चाहिये। किसानों की आपदा पर अभिनंदन नहीं उनके साथ ईमानदारी से खड़े होकर साथ निभाना चाहिये। जनता उन पर अटूट विश्वास जताते रही है,उस विश्वास के अनुरूप उन्हे अपनी भूमिका निभाकर अपने विशाल हृदय का परिचय दें। किसानों की आपदा पर जारी हुए विज्ञापन किस मानसिकता से जारी किये गये थे संभव है कांग्रेस इस पर मंथन कर रही हो,परंतु आम जनता एक ही राग अलाप रही है कि नेता बेईमान तो चेला बेईमान। परेशानियों से जूझता किसान फिर भी मेरा देश महान।

जारी......


बुधवार, 19 जनवरी 2011

कमल नाथ को शहरी विकास

मनमोहन मंत्रीमण्डल में फेरबदल

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संप्रग के दूसरे कार्यकाल में 19 माह पुरानी मनमोहन सरकार के मंत्रिमंडल में पहला फेरबदल बुधवार शाम किया गया। इसमें प्रफुल्ल पटेल, श्रीप्रकाश जायस्वाल और सलमान खुर्शीद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ को शहरी विकास मंत्रालय सौंपा गया है।



सीपी जोशी सड़क परिवहन और राजमार्ग

मुरली देवड़ा कोरपोरेट मामले

वायलार रवि नागरिक उड्डयन अतिरिक्त भार, प्रवासी भारतीय मामले यथावत

कमलनाथ शहरी विकास

विलासराव देशमुख ग्रामीण विकास पंचायती राज

जयपाल रेड्डी पेट्रोलियम और प्राकृतिक

कपिल सिब्बल दूरसंचार एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय बरकरार

अश्विनी कुमार योजना, संसदीय कार्य, विज्ञान-प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (राज्य मंत्री)

केसी वेणुगोपाल ऊर्जा राज्य मंत्री

एमएस गिल सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन

अजय माकन खेल एवं युवा मामले
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

शरद पवार कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उपभोक्ता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति छिना

वीरभद्र सिंह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग

प्रफुल्ल पटेल भारी उद्योग व सार्वजनिक उपक्रम

बीके हांडिक पूर्वाेŸार क्षेत्र विकास

कुमारी शैलजा संस्कृति का अतिरिक्त प्रभार पर्यटन छिना

सुबोध कांत सहाय पर्यटन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

पवन कुमार बंसल संसदीय कार्य जल संसाधन छिना

सलमान खुर्शीद जल संसाधन

श्रीप्रकाश जायसवाल कोयला मंत्रालय कैबिनेट दर्जा

बेनी प्रसाद वर्मा इस्पात स्वतंत्र प्रभार

केवी थॉमस उपभोक्ता मामले खाद्य नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

दिनशा पटेल खनन (स्वतंत्र प्रभार) लघु मध्यम कुटीर उपक्रम

विभिन्न राज्यमंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल

ई अहमद विदेश

हरीश रावत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

वी नारायणसामी प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, संसदीय कार्य




अवाम ए हिन्‍द में 13 दिसंबर को

दिल्‍ली मेरी जान

लाल बत्ती के लिए सियासत तेज

18 जनवरी 2011

मंत्रीमण्डल विस्तार आज शाम

मंत्रीमण्डल विस्तार और फेरबदल ने उड़ाई कईयों की नींद

मध्य प्रदेश पर पड़ेगा इसका सबसे ज्यादा असर

प्रणव बन सकते हैं उपप्रधानमंत्री

कुछ मंत्रियों को भेजा जा सकता है संगठन में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दूसरे कार्यकाल में मंत्रीमण्डल विस्तार और फेरबदल के लिए उल्टी गिनती आरंभ हो चुकी है, विस्तार आज शाम पांच बजे होगा। मौजूदा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने तो युवा सांसद जोड़ तगाड़ कर कुर्सी पाने की जुगत में लग गए हैं। इसी बीच कल प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल तो आज कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री आवास पर अपने राजनैतिक सचिव अहमद पटेल की उपस्थिति में लगभग दो घंटे गुफ्तगू की। इन दोनों ही भेंट को मंत्रीमण्डल फेरबदल के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मंत्रीमण्डल के पुनर्गठन की सुगबुगाहट के साथ ही दिल्ली में राजनैतिक फिजां बहुत गर्म हो गई है। कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार अपेक्षाकृत युवा दिखने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि एमपी कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को पीएमओ में भेजा जा सकता है, किन्तु उनके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इन परिस्थितियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीएमओ में राज्यमंत्री बनाकर सूचना प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार भी सौंपा जा सकता है, सिंधिया को विदेश राज्य मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी बलवती ही मानी जा रही हैं। उधर अरूण यादव की पदोन्नति भी निश्चित मानी जा रही है। एमपी कोटे से कांतिलाल भूरिया के आदिवासी विकास विभाग की कमान उड़ीसा के हेमनंद विस्वाल को दी जा सकती है। एम पी को बेलेंस करने के लिए राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री चाहते हैं कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को वित्त मंत्री बनाया जाए। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को उप प्रधानमंत्री बनाकर गृह मंत्रालय की कमान सौंपी जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि आज उन्होंने इसी तारतम्य में वीरभद्र सिंह, कांतिलाल भूरिया और नारायण सामी के साथ सोनिया गांधी से भेंट भी की है। उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की गरज से वहां से किसी ठाकुर नेता को केंद्रीय मंत्री बनाने पर विचार किया जा रहा है। मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्री बनाकर एचआरडी का चार्ज जनार्दन द्विवेदी को दिया जा सकता है। उधर श्रीप्रकाश जायस्वाल, बेनी प्रसाद वर्मा, जगदंबिका पाल अपना अपना दावा मजबूत करने में जुटे हुए हैं, तो सलमान खुर्शीद के लिए कानून मंत्रालय को तैयार करवाने की संभावनाएं हैं। टूजी के कारण बाहर हुए ए.राजा के स्थान पर इलानगोवान या टी.आर.बालू का दावा पुख्ता माना जा रहा है। ममता बनर्जी से हलाकान रेल राज्य मंत्री ई.अहमद चाहते हैं कि उन्हें वापस विदेश मंत्रालय में भेज दिया जाए।

कामन वेल्थ गेम्स घोटाले के छींटे जयपाल रेड्डी और मनोहर सिंह गिल पर भी पड़ सकते हैं, उधर आदर्श सोसाईटी घोटाले में भारी उद्योग मंत्री विलास राव की कुर्सी हिलने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। ढलती उमर वीरभद्र सिंह और बी.के.हांडिक के आड़े आने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। सोनिया के पीहर वालों के खास मित्र आनंद शर्मा नए विदेश मंत्री हो सकते हैं। उधर गिरिजा व्यास को पंचायत एवं ग्रामीण विकास का प्रभार दिया जा सकता है। मंहगाई रोकने में अक्षम रहे शरद पवार से कृषि अथवा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय में से एक वापस लिया जा सकता है। उधर राजीव शुक्ला भी संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनने के लिए अपने अपने आकाओं को सिद्ध करने में जुटे हुए हैं।

जिन मंत्रियों को सत्ता से हटाकर संगठन में लेने की चर्चाएं हैं उनमें सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नवी आजाद, शिपिंग मंत्री जी.के.वासन, भारी उद्योग मंत्री विलास राव देशमुख, खान राज्य मंत्री बी.के.हांडिक, भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के नाम सबसे अधिक चर्चाओं में हैं। इन सभी की संगठनात्म क्षमताओं के चलते कांग्रेस आलाकमान इनका भरपूर उपयोग करने के मूड में दिख रहा है। इसके अलावा विदेश मंत्री एम.एस.कृष्णा को आंध्र प्रदेश के राजभवन मंे भेजा जा सकता है। वैसे छत्तीसगढ़, बिहार, गोवा और मणिपुर से केंद्र में प्रतिनिधित्व नगण्य है, इस बारे में भी विचार चल रहा है।