रविवार, 26 फ़रवरी 2012


अध्यक्ष प्रवक्ता आमने सामने

मध्यप्रदेश कांग्रेस में कलह

(रवीन्द्र जैन)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश कांग्रेस में भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और पार्टी के प्रवक्ता केके मिश्रा में ठन गई है। उम्मीद है कि जल्दी ही भूरिया, केके मिश्रा को प्रवक्ता पद से हटा सकते हैं। शुक्रवार को भोपाल से इंदौर तक कांग्रेस के कुछ नेताओं ने समझौते का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इस पूरी लड़ाई के पीछे भूरिया के पीए प्रवीण कक्कड़ की कांग्रेस संगठन के मामले में बेवजह हस्तक्षेप माना जा रहा है।
पहले केके मिश्रा के बारे में जान लें। केके मिश्रा कांग्रेस में अपने मुखर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। पहले इंदौर में और उसके बाद भोपाल में उन्होंने विपक्ष में रहकर भाजपा सरकार के खिलाफ कई मामले उठाए। मिश्रा को कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सुभाष यादव भोपाल लेकर आए थे। सुरेश पचौरी ने अध्यक्ष बनने के बाद मिश्रा के कद और पद को बहाल रखा। सरकार के खिलाफ  पचौरी के कार्यकाल मे।भी मिश्रा के हमले जारी रहे। लेकिन कांतिलाल भूरिया के अध्यक्ष बनने के बाद मिश्रा पर लगाम लगा दी गई। पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि भूरिया के पीए प्रवीण कक्कड़ के संबंध इंदौर में जिन व्यवसायियों से हैं उन पर मिश्रा लगातार हमले कर रहे थे। इसी बात को लेकर पहले तो कक्कड़ ने समझौते के प्रयास किये लेकिन मिश्रा नहीं झुके तो उन पर संगठनात्मक प्रतिबंध लगा दिए गए। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय ने केके मिश्रा पर नकेल कसने के लिए ही आदेश जारी किया कि कोई भी प्रवक्ता बगैर पूछे किसी के खिलाफ बयान नहीं दे सकते। यही नहीं इस आदेश में केके मिश्रा को केवल विंध्य क्षेत्र के मामलों में ही बयान देने की छूट दी।
केके मिश्रा अपने ऊपर लगी पाबंदियों से पहले ही नाखुश थे। इसी बीच प्रदेश के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने खबर छापी कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष भूरिया को साधने के लिए उनके पीए प्रवीण कक्कड़ के पुत्र सलिल कक्कड़ के नाम शराब फैक्टरी का लायसेंस जारी किया है। भूरिया कैंप का शक है कि यह खबर केके मिश्रा के दिमाग की उपज है। इसी बीच मध्यप्रदेश लोकायुक्त पीपी नावलेकर के बेटे सिद्धार्थ नावलेकर के जमीन के धंधे से जुड़ी एक खबर और बिच्छु डांट कॉम ने छापी इसका शक भी केके मिश्रा पर किया जा रहा है। बताते हैं कि यह दोनों खबर छपने से पहले भूरिया और कक्कड़ ने इंदौर के कांग्रेस विधायक के जरिए केके मिश्रा को समझाने का प्रयास किया था। जबाब में मिश्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम रुकने वाली नहीं है। मिश्रा ने भूरिया को यह संदेश भी भेजा कि राजनीति उनके परिवार का व्यवसाय नहीं है। वे कुछ सिद्धांतों को लेकर संगठन में काम कर रहे हैं। यदि इन सिद्धांतों पर नहीं चल सकते तो संगठन के पद पर बैठने का कोई अर्थ नहीं है।
भूरिया के खिलाफ हुई अखबारबाजी के बाद प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव रवि जोशी ने मीडिया से ऑफ द रिकार्ड बातचीत में संकेत दिया है कि पार्टी अध्यक्ष भूरिया अब केके मिश्रा को संगठन में नहीं रखना चाहते और इस संबंध में उन्होंने दिल्ली को भी बता दिया है। उम्मीद  की जा रही है कि जल्दी ही केके मिश्रा कांग्रेस के प्रवक्ता पद से बिदा हो जाएंगे।
इस संबंध में केके मिश्रा का कहना है कि संगठन में पद पर रखना न रखना अध्यक्ष का विशेष अधिकार है। लेकिन कांग्रेस और उसकी विचारधारा से मुझे कोई दूर नहीं कर सकता। जोशी और मिश्रा की बातों से लगता है कि आने वाला समय कांग्रेस के लिए भूचाल से कम नहीं होगा। यदि मिश्रा को पद मुक्त किया तो वह पर्दे के पीछे से भूरिया और कक्कड़ को बेनकाब करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

दुधारू पशुओं पर विशेष ध्यान देंगे


दुधारू पशुओं पर विशेष ध्यान देंगे

(अनेशा वर्मा)

चंडीगढ़ (साई)। भारतीय कृषि अनुसधंान परिषद डेयरी विस्तार विभाग के महानिदेषक के डी के कोकाटे ने कहा है कि भविष्य मे डेयरी के विकास हेतु हमें जेनेटिक विकास और बॉझपन को समाप्त करने की और विषेष ध्यान देना होगा। शनिवार को करनाल के एन. डी. आर. आई सस्ंथान मे आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेले के उद्धाटन मौके पर उन्होंने कहा कि गांवों मे जहंा दुधारू पषुओं की संख्या अधिक है वंहा उŸाम नस्ल की सीमन उपलब्ध करवाये है , मोडल पषु ग्राम बनाये जाए तो  डेयरी सेक्टर ओर विकसिल होगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा मे इस दिशा मे काफी कार्य हो रहा है तथा यहंा मुहखुर रोग व अन्य बिमारियों पर नियंन्त्रण हुआ है। एक सवाल के जवाब मे उन्होंने कहा कि डेयरी के विकास के लिए आने वाले बजट मे वर्तमान से तीन गुणा वृद्वि हेतु उन्होंने सरकार को प्रपोजल भेजा है जिसे मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
इस मेले मे हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेष ,उत्तर प्रदेष  व राजस्थान सहित अन्य स्थानों से सैंकड़ो किसान अपने उŸाम नस्ल के पषुओं के साथ आये हुए है। किसानों मेे पषुपालन के प्रति जागरूकता लाने, नई तकनीक की जानकारी देने व उन्हे प्रोत्साहित करने के लिए मेले के दौरान दुध व ब्रीडिंग प्रतियोगिता भी करवाई जाएगी।  

सड़क दुर्घटना में 17 मरे


सड़क दुर्घटना में 17 मरे

(अर्जुन कुमार)

देहरादून (साई)। देहरादून जिले में पिछले चौबीस घंटों के दौरान तीन अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में सत्रह लोगों की मृत्यु हो गई हैं, जबकि बीस से ज्यादा व्यक्ति जख्मी हो गए हैं। जिले की त्यूनी तहसील में आज अपराह्न मेनास के निकट एक बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से आठ लोगों की मृत्यु हो गई है, जबकि नौ अन्य घायल हो गए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
सरकारी सूचना के अनुसार बस में छत्तीस लोग सवार थे। इस बीच, मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूड़ी ने हादसे में शोक व्यक्त करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेष दिए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों व घायलों को अनुमन्य राहत राशि देने के भी निर्देश दिये है। साथ ही जिला प्रशासन को घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं।
उधर, बीती रात ऋषिके8ा थानांतर्गत बडेरना के निकट एक वाहन के पांच सौ मीटर गहरी खाई में गिर जाने से सात लोगों की मृत्यु हो गई है। पुलिस अधीक्षक गिरी8ा चन्द ध्यानी के अनुसार ये लोग वैवाहिक समारोह से लौट रहे थे। उधर, मसूरी से पांच किलोमीटर दूर बाटाघाट के पास एक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से दो लोगोें की मृत्यु हो गई है। 
इस बीच, आपदा प्रबंधन मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बडेरना के निकट हुए हादसे का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पहंुचे और दुर्घटना में मृत लोगों के प्रति दुःख व्यक्त करते हुए घायलों को हर संभव सहायता देने के निर्देश जिला प्रशासन को दिये हैं। उधर, मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने वाहन दुर्घटनाओं में मृत लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों को अनुमन्य राहत राशि देने के निर्देश जिला प्रशासन को दियें है।  

जाट आंदोलन से रेल यातायात प्रभावित


जाट आंदोलन से रेल यातायात प्रभावित

(शैलेन्द्र कुमार)

जयपुर (साई)। हरियाणा के हांसी और सात रोड़ रेलवे स्टेशनों के बीच चल रहे जाट आरक्षण आन्दोलन के कारण उत्तर पश्चिम रेलवे की कई गाड़ियां आज भी प्रभावित हुई है। जयपुर-अमृतसर, भिवानी-रेवाडी और रेवाड़ी-भिवानी सवारी गाड़ियों को आज रद्द कर दिया गया। इसके अलावा सात अन्य गाड़ियां आंशिक रूप से रद्द कर दी गई।
रेल्वे सूत्रों का कहना है कि अगर आंदोलन जारी रहा तो कल 9 रेलगाड़ियां आंशिक तौर पर रद्द रहेगी। वहीं हिसार-जयपुर, रेवाडी-गंगानगर सहित 9 गाडियों को आंशिक तौर पर रद्द किया गया है। दूसरी ओर जोधपुर-मेडता रेलखण्ड पर अण्डर ब्रिज निर्माण के कारण इस मार्ग पर 11 रेलगाडियां कल देरी से चलेंगी। 

स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती होगी


स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती होगी

(स्वाति सिंह)

शिमला (साई)। प्रदेश में शीघ्र ही 4 सौ 58 महिला स्वास्थ्य कर्ता और 4 सौ 8 स्टाफ नर्सों की भर्ती की जाएगी। ये जानकारी स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री राजीव बिंदल ने सिरमौर जिला की ग्राम पंचायत धगेड़ा में सामुदायिक भवन के उद्घाटन अवसर पर दी। बिंदल ने बताया कि सिरमौर जिला में अटल स्वास्थ्य सेवा 108 के अंतर्गत 11 एंबुलेंस कार्यरत्त है जिनके माध्यम से अब तक लगभग 11 हजार रोगियों को लाभ मिला हैं।
उन्होंने धगेड़ा में चिकित्सा विभाग के आवासीय कमरों की मररम्मत के लिए दस लाख रुपए की राशि भी स्वीकत की। उन्होंने कहा कि जिला के दूरदराज क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सड़कों के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

पक्षियों को खरीदा या बेचा तो उसे तीन साल की जेल


पक्षियों को खरीदा या बेचा तो उसे तीन साल की जेल

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। यदि तोता, मुनिया और प्रवासी पक्षियों को किसी ने खरीदा या बेचा तो उसे तीन साल की जेल और 25 हजार रुपए का जुर्माना हो सकता है। यदि किसी के पास कोई पक्षी है तो वो अभी वन विभाग को सौंप दे। उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वन विभाग के अधिकारियों की इस चेतावनी शनिवार को जहांगीराबाद स्थित मुर्गी बाजार में वन विभाग और भोपाल बर्ड संस्था द्वारा पक्षियों के अवैध व्यापार के संबंध में जागरुकता शिविर में दी। वन विभाग के उडऩदस्ते के रेंजर एनडी शर्मा ने बताया कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत कई पक्षियों का व्यापार करना अवैध है। ये पक्षी लुप्त पक्षियों की श्रेणी में आ गए हैं। इनमें पहाड़ी व कंठी वाला तोता, जंगली कबूतर, सभी प्रकार की मुनिया, उल्लू, जल मुर्गियां, बतख टुनियां, बुलबुल, सिंच और सभी प्रकार के प्रवासी पक्षी शामिल हैं।

बुखार में कारगर है सप्तपर्णी


हर्बल खजाना ----------------- 31

बुखार में कारगर है सप्तपर्णी



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। सप्तपर्णी एक पेड है जिसकी पत्तियाँ चक्राकार समूह में सात - सात के क्रम में लगी होती है और इसी कारण इसे सप्तपर्णी कहा जाता है। इसके सुंदर फ़ूलों और उनकी मादक गंध की वजह से इसे उद्यानों में भी लगाया जाता है। इसका वानस्पतिक नाम एल्सटोनिया स्कोलारिस है।
पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि प्रसव के बाद माता को यदि छाल का रस पिलाया जाता है तो दुग्ध की मात्रा बढ जाती है। इसकी छाल का काढा पिलाने से बदन दर्द और बुखार में आराम मिलता है। डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार जुकाम और बुखार होने पर सप्तपर्णी की छाल, गिलोय का तना और नीम की आंतरिक छाल की समान मात्रा को कुचलकर काढा बनाया जाए और रोगी को दिया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिलता है।
आधुनिक विज्ञान भी इसकी छाल से प्राप्त डीटेइन और डीटेमिन जैसे रसायनों को क्विनाईन से बेहतर मानता है। पेड से प्राप्त होने वाले दूधनुमा द्रव को घावों, अल्सर आदि पर लगाने से आराम मिल जाता है। छाल का काढा पिलाने से दस्त रुक जाते है। दाद, खाज और खुजली में भी आराम देने के लिए सप्तपर्णी की छाल के रस का उपयोग किया जाता है।


(साई फीचर्स)

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

शिव को नहीं है परवाह नर्मदा की!



0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  70

शिव को नहीं है परवाह नर्मदा की!

जहरीले पानी से होगा भगवान शिव का अभिषेक



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। भगवान शिव अपनी जटाओं में माता गंगा को समेटे हुए हैं। श्र्द्धालुओं द्वारा भगवान शिव का अभिषेक पुण्य सलिला नर्मदा के पावन जल से बड़े ही भक्तिभाव से किया जाता है। मध्य प्रदेश में शिव के राज में आने वाले दिनों में पुण्य सलिला नर्मदा को जहरीला करने का ताना बाना बुना जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रदूषित और जहरीले नर्मदा जल से अगर भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुण्य सलिला नर्मदा के किनारे मध्य प्रदेश में चार थर्मल पावर प्लांट को भी मंजूरी मिली है। सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर (कहानापस) तहसील के गांव झाबुआ में बनने वाले प्लांट की क्षमता 600 मेगावॉट तय थी जिसे बढ़ाकर 1260 मेगावाट कर दिया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के सूत्रों का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन का दावा है कि दो चरणों में लगने वाले इस संयंत्र की एक हजार फिट उंची चिमनी से प्रतिदिन 1706 टन राख जमीन पर आएगी। इस हिसाब से प्रतिघंटा जमीनी रखा की मात्रा लगभग 72 टन होगी। इसी तरह उड़ने वाली राख जो 275 मीटर उंची चिमनी से उड़ेगी उसकी तादाद दो संयंत्रों मे 6 हजार आठ सौ 32 टन होगी अर्थात प्रतिघंटा जो राख उड़ेगी की तादाद लगभग 285 टन होगी।
पीसीबी के सूत्रों की मानें तो यह आंकड़े तो मानक अवस्था के हैं, जबकि वास्तव में संयंत्र से उड़ने वाली राख की तादाद इससे डेढ़ गुनी होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका निस्तारण जंगल और नर्मदा किनारे किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय संकट पैदा होना तय है। दूसरा कोल पावर प्लांट नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा तहसील के तूमड़ा गांव में एनटीपीसी द्वारा बनाया जाएगा। 3200 मेगावॉट क्षमता के इस प्लांट से नौ गांवों के किसानों की जमीन पर संकट है।
इसके लिए करीब चार हजार हैक्टेयर जमीन ली जानी है, जबकि पास ही तेंदूखेड़ा ब्लाक में करीब 4500 एकड़ सरकारी जमीन खाली पड़ी है। इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस प्लांट की जद में आने वाले गांवों की जमीन एशिया में सबसे अच्छी दलहन उत्पादक है। तीसरा 1200 मेगावॉट क्षमता का थर्मल कोल पावर प्लांट जबलपुर जिले के शहपुरा भिटोनी में बनाया जाना है। इसका निर्माण एमपीईवी द्वारा किया जाएगा। इसका सर्वे किया जा चुका है।
इसकी जद में करीब 800 किसानों की जमीन आ रही है। चौथा थर्मल पावर प्लांट नरसिंहपुर जिले के झासीघाट में मैसर्स टुडे एनर्जी द्वारा 5400 करोड़ की लागत से किया जाएगा। 1200 मेगावॉट क्षमता वाले इस प्लांट के लिए 100 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसमें से करीब 700 एकड़ जमीन सरकारी है। करीब 75 लोगों की 300 एकड़ जमीन ली जा चुकी है। इसका निर्माण 2014 तक पूरा किया जाना है। इनके लिए विदेशों से कोयला मंगाने की तैयारी की जा रही है।
थर्मल कोल पावर प्लांट से निकलने वाली राख आसपास की हजारों एकड़ जमीन की उत्पादन क्षमता को नष्ट कर देगी। अब तक कई अध्ययनों में इस बात का खुलासा हो चुका है। सारणी स्थित सतपुड़ा पावर प्लांट से निकलने वाली राख से हजारों पेड़ नष्ट और तवा का पानी प्रदूषित हो गया है। अगर यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब नर्मदा नदी भारत की सबसे अभिशप्त नदी बनकर रह जाएगी।
मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा एक के बाद एक पावर प्लांट की मंजूरी दी जा रही है ताकि राज्य के विधानसभा चुनावों ‘‘मिशन 2013‘‘ के पहले प्रदेश में बिजली की स्थिति कुछ संतोषजनक हो सके। शिव द्वारा यह सब तो किया जा रहा है पर पर्यावरण और प्रदूषण की शर्त पर। नर्मदा प्रदूषित करने का ताना बाना बुना जा रहा है और कांग्रेस खामोशी अख्तिाया किए हुए है।

(क्रमशः जारी)

मनमोहन के बजाए पुलक की छवि का हो रहा निर्माण


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 92

मनमोहन के बजाए पुलक की छवि का हो रहा निर्माण

नौकरी बचाने के चक्कर में पचौरी दे रहे पुलक को तरजीह

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। ‘यस बॉस‘ ना कह पाने के चलते अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे तीक्ष्ण बुद्धि के धनी रहे पीएम के मीडिया एडवाईजर हरीश खरे के स्थान पर आए पंकज पचौरी की पीएमओ से रूखसती की खबरें अब थमती सी दिख रही हैं। इसका कारण यह है कि मीडिया में आजकल प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के बजाए उनके प्रधान सचिव पुलक चटर्जी का महिमा मण्डन हो रहा है।
कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया का सरकारी आवास) से वरद हस्त प्राप्त पुलक चटर्जी की पीएमओ में आमद हुए महीना बीत चुका है पर वे आज भी अवैतनिक (चटर्जी का वेतन अब तक तय नहीं हो पाया है) ही काम कर रहे हैं। दिल्ली सहित देश भर के भाषाई विशेषकर हिन्दी मीडिया में हरीश खरे की बिदाई को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं सामने आई है।
मीडिया इस बात को पचा नहीं पा रहा है कि 10, जनपथ के करीबी पुलक चटर्जी की पीएमओ में आखिर ताजपोशी कैसे कर दी गई, जबकि पीएमओ और 10, जनपथ के बीच खुद खाई आज भी उतनी ही गहरी ही है। पीएम के करीबी नगीनों को 10, जनपथ एक मिनिट भी बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है, फिर भी पीएम उन्हें नाक का बाल बनाए हुए हैं।
पीएमओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि पुलक चटर्जी की कार्यप्रणाली समझ से परे ही है। पीएम के मीडिया एडवाईजर पंकज पचौरी के पीएमओ में दिन गिनती के ही बचे थे, चटर्जी द्वारा नया मीडिया एडवाईजर खोजा जा रहा था कि चटर्जी और पचौरी के बीच हुई मंत्रणा ने परिदृश्य ही बदल दिया।
उन्होंने कहा कि चटर्जी की शह पर वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाईजर पंकज पचौरी द्वारा मीडिया में प्रधानमंत्री के बजाए प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव पुलक चटर्जी की छवि के निर्माण का काम किया जा रहा है। पंकज पचौरी ने मीडिया के एक तबके को अपने साथ मिलाने की खबरें भी पत्रकारों के मिलन स्थल प्रेस क्लब से छन छन कर बाहर आने लगी हैं।
कहा जा रहा है कि इन पत्रकारों को सुविधाएं मुहैया करवाने, शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के महकमे से बड़े और आलीशान सरकारी आवास दिलाने विदेश यात्राओं आदि का प्रलोभन देकर पुलक चटर्जी की छवि के निर्माण का काम जारी है। इन बातों में सच्चाई कितनी है यह बात तो मीडिया का वह तबका, पुलक चटर्जी अथवा पंकज पचौरी जानें, किन्तु पिछले कुछ दिनों से मीडिया में जिस तरह पीएम से ज्यादा पुलक चटर्जी की चर्चाएं हैं उससे इस बात को दम ही मिल रहा है।

(क्रमशः जारी)

गृहमंत्री ने लिखा मुख्यमंत्रियों को पत्र


गृहमंत्री ने लिखा मुख्यमंत्रियों को पत्र

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम ने देश के दस मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के मुद्दे पर उनकी आशंकाओं को दूर किया। उन्होंने कहा है कि आतंकवाद का मुकाबला करना साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया है कि केंद्र और राज्य दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद देश के लिए गंभीर खतरा है और इससे मिल कर निपटना होगा।
श्री चिदम्बरम ने मुख्यमंत्रियों को बताया कि गृह सचिव राज्यों के पुलिस प्रमुखों तथा आतंकवाद निरोधक संगठनों और राज्य सरकारों के सुरक्षा बलों के प्रमुखों की बैठक बुलाएंगे जिसमें राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के कामकाज के बारे में विस्तार से चर्चा होगी। गृहमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री उनसे जो भी जानना चाहते हैं उसे बताने में उन्हें प्रसन्नता होगी।
गृह मंत्री ने राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के उद्देश्यों, संरचना और अधिकारों के बारे में तीन पृष्ठ का एक नोट भी भेजा है। इस नोट में कहा गया है कि इस केन्द्र को तलाशी और गिरतारी के लिए बस उतने ही अधिकार होंगे जो आतंकवाद से निपटने के लिए किसी संस्था के पास होने चाहिए। कई अन्य मुद्दों की भी विस्तार से जानकारी दी गई है।

रिलायंस बिजली संयंत्र को नहीं मिलेगी गैस!


रिलायंस बिजली संयंत्र को नहीं मिलेगी गैस!

(यशवंत श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह ने तेल और प्राकृतिक निगम ओएनजीसी द्वारा उत्पादित गैस की सप्लाई गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से हटा कर बिजली संयंत्रों को न देने का फैसला किया है, क्योंकि उपलब्ध गैस का भंडार बहुत कम है। पेट्रोलियम मंत्री एस. जयपाल रेड्डी ने कल नई दिल्ली में मंत्रिसमूह की बैठक के बाद यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह का मानना है कि सरकारी मूल्य निर्धारण प्रणाली एपीएम के तहत उपलब्ध यह गैस बहुत कम है, इसलिए इस मुद्दे पर यथास्थिति रखने का फैसला किया गया। एपीएम गैस की कीमत, आयातित गैस की कीमत से एक चौथाई है।
गौरतलब है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी डी-६ गैस क्षेत्र से उत्पादन में भारी कमी को देखते हुए बिजली क्षेत्र एपीएम गैस हासिल करने की कोशिश कर रहा है। श्री रेड्डी ने बताया कि मंत्रिसमूह ने उनके मंत्रालय का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है कि केजी डी-६ गैस की सप्लाई उन बिजली उत्पादकों को न की जाये, जो नियंत्रित दरों पर बिजली नहीं बेचते।

मीडिया की सेंसरशिप नहीं: अंबिका


मीडिया की सेंसरशिप नहीं: अंबिका

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने कहा है कि सरकार मीडिया पर सेंसर लगाने के पक्ष में नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय प्रेस संस्थान के भारत क्षेत्र के पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिये २०११ के पुरस्कार प्रदान करने के बाद श्रीमती सोनी ने कल नई दिल्ली में यह बात कही। यह पुरस्कार संयुक्त रूप से तहलका और द वीक पत्रिकाओं को दिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया से प्रचारित-प्रसारित सामग्री पर कोई नियमन नहीं करना चाहती। सरकार चाहेगी कि मीडिया स्वयं नियमन करे। अंबिका सोनी ने कहा कि सरकार सेल्फ सेगुलेशन चाहते हैं कि जो कानून है जो सेल्फ रेगुलेशन के लिए पार्लियामेंट ने केबल रेगुलेटरी एक्ट पारित किया है तो उसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

छटवें चरण में प्रचार चरम पर


छटवें चरण में प्रचार चरम पर

(दीपांकर श्रीवास्तव)

कानपुर (साई)। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के छठे चरण के लिए प्रचार चरम पर है। इस चरण में सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा डिवीजनों के १३ जिलों में ६८ निर्वाचन क्षेत्रों में मंगलवार को वोट पड़ेंगे। यहां चुनाव प्रचार कल शाम समाप्त हो जाएगा। साई संवाददाता के अनुसार सभी दलों के बड़े नेता मतदाताओं को अपने उम्मीदवारों के पक्ष में करने के लिए जोरदार प्रचार में जुटे हैं।
साई ब्यूरो ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मेरठ और आगरा में रैलियां की हैं, जबकि कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने मुरादाबाद में जनसभा को संबोधित किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजीत सिंह की संयुक्त जनसभाएं बुलंदशहर, मुजफरनगर और आगरा में हुई हैं।
भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन गडकरी ने भी बुलंदशहर में एक जनसभा को संबोधित किया है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने जहां मुजफरनगर और गाजियाबाद में चुनावी रैलियां की हैं, वहीं समाजवादी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अलीगढ़ और बुलंदशहर में जनसभाएं की हैं। निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को उनके राष्ट्रपति शासन संबंधी बयान को लेकर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किया है।

गोवा में चुनाव प्रचार तेज


गोवा में चुनाव प्रचार तेज

(सुनील सोनी)

पणजिम (साई)। गोआ विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रचार जोर पकड़ रहा है। राज्य में ४० सदस्यों की विधानसभा के लिए ३ मार्च को वोट डाले जाएंगे। साई ब्यूरो ने बताया कि ने खबर दी है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेता चुनाव प्रचार में लगे है। गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों के प्रचार अभियान में शामिल होने हेतु कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी का आज राज्य में आगमन हो रहा है।
इससे पूर्व दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने मडगांव में दाबरलिम तथा कारमोना और केंद्रीय मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने बिचोलिम की प्रचार सभा में भाग लिया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री राजनाथ सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार हेतु वास्को में आयोजित सभा को संबांधित कर अभियान का प्रारंभ किया। आगामी कुछ दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता तथा स्टार प्रचारकों को भी इसमें जोड़ने का कार्यक्रम बनाया गया है।

शुगर के लिए लाभकारी है मेथी


हर्बल खजाना ----------------- 30

शुगर के लिए लाभकारी है मेथी



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। मेथी बहुत ही कारगर औषधि है। इसकी पत्तियों की तरकारी औषधिय गुणों से भरपूर होती है। इसका वानस्पतिक नाम ट्राईगोनेला फ़ीनम-ग्रीकम है। इसके बीजों में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन होने से ये कॉड लिवर ऑयल जैसे पोषक और बल प्रदान करने वाले होते हैं।
इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। मेथी पाचन शक्ति और भूख बढ़ाने में मदद करती है। आधा चम्मच मेथी दाना को पानी के साथ निगलने से अपचन की समस्या दूर होती है। मेथी के बीज आर्थराइटिस और साईटिका के दर्द से निजात दिलाने में मदद करते हैं।
इसके लिए १ ग्राम मेथी दाना पाउडर और सोंठ पाउडर को थोड़े से गर्म पानी के साथ दिन में दो-तीन बार लेने से लाभ होता है। इस रोग से दूर रहने के लिए प्रतिदिन १ चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें, इसके अलावा एक चम्मच मेथी दाना को एक कप पानी में भिगो कर रात भर के लिए छोड़ दीजिए, सुबह इसका पानी पिएं।
इससे सीरम लिपिड लेवल कम होता और वजन भी संतुलित रहता है। स्तनपान कराने वाली मांए दूध बढ़ाने के लिए इसका सेवन करें तो निश्चत ही फ़ायदा होता है। बालों में रूसी होने पर मेथी दानों का पेस्ट बालों में लगाएं और आधा घंटे बाद धो लें। पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार डायबिटीज के मरीज जो बढ़ते शुगर लेवल से परेशान रहते हैं, वे २५-५० ग्राम मेथी के दानों का सेवन रोज करें तो लाभ होगा।

(साई फीचर्स)

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

सोलह करोड़ का टेंडर किसी को कानो कान खबर नहीं!


सोलह करोड़ का टेंडर किसी को कानो कान खबर नहीं!

इस बार श्रेय लेने का मौदा नहीं दिया सीपी जोशी ने

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। न तो किसी राजनेता को और ना ही एनएचएआई के अधिकारियों को इस बात की भनक लगी कि सिवनी जिले के मोहगांव से खवासा तक के फोरलेन मार्ग का ठेके की 16 करोड़ 41 लाख रूपए की निविदा जारी हो गई है। इस बार केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी ने कांग्रेस भाजपा के नेताओं को चकमा देते हुए चुपचाप ही निविदा जारी करवा दी गई।
एनएचएआई के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि मोहगांव से खवासा सेक्शन में किलोमीटर 623 से किलोमीटर 652 तक लगभग 29 किलोमीटर तक के काम को हरी झंडी प्रदान कर दी गई है। सूत्रों ने कहा कि इस मार्ग के पुर्ननिर्माण सुधार कार्य की 1641 लाख रूपए की निविदा जारी की गई है। इसके साथ ही साथ समस्त प्रकार के पूर्ण कार्य 2006 - 2007 से अब तक के लिए निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 19 मार्च निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में विधानसभा चुनावों के समय से इस मार्ग के निर्माण में वन एवं पर्यावरण का फच्चर अशोक कुमार नामक एक व्यक्ति के एनजीओ द्वारा फंसा दिया गया था। राजनैतिक बियावान में सीढीयां चढ़ने उतरने, कांग्रेस भाजपा के आश्वासनों के समुंदर में गोते लगाने के बाद भी इस सड़क के रखरखाव पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया, जिसके परिणाम स्वरूप आज चार सौ साल पुराने शेरशाह सूरी के जमाने के इस मार्ग में गड्ढ़ों में सड़क ढूंढने का काम जारी है।
इस सड़क के रखरखाव की मांग जब भी की जाती तभी सिवनी में बैठे राजनेताओं द्वारा माननीय न्यायालय की अवमानना का भय बताकर लोगों को शांत कर दिया जाता। मजबूर सिवनी वासी इस तरह के जर्जर मार्ग से होकर गुजरने को मजबूर हो रहे हैं। इतना ही नहीं खवासा से मोहगांव के हिस्से में कुरई घाट सहित समूचे भाग में रोजाना ही दुर्घटनाएं घट रही हैं, असमय ही लोग काल कलवित हो रहे हैं, पर मोटी चमड़ी वाले राजनेताओं के कानों में इस चीख पुकार का कोई असर नहीं हुआ।
सिवनी शहर सहित मार्ग में पड़ने वाले सिवनी जिले के शहरों के अंदर की सड़कों के जीर्णोद्धार हेतु भी कांग्रेस ने बड़ी बड़ी विज्ञपितयों के माध्यम से लोगों को दो तीन सालों से भरमाया जा रहा है, पर जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आई है। शहर के अंदर की सड़कों पर चलना अब सर्कस के बाजीगरों के बस की ही बात बची है।
एनएचएआई के सूत्रों का कहना है कि इस साल बारिश के पहले ही मोहगांव से खवासा तक के वर्तमान के टू लेन को सुधारकर ब्लेक टाप का काम अर्थात सड़क को पूर्व जैसी ही टूलेन बनाने के लिए 16 करोड़ 41 लाख की प्रथम निविदा जारी कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस साल गर्मी के मौसम में इस सड़क को पूरी तरह सुधार दिया जाएगा। फोरलेन के मामले में वन विभाग के अडंगे की समाप्ति के बाद ही काम आरंभ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस संबंध में जब एनएचएआई के परियोजना निदेशक श्री सिंघई से फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने इस तरह की किसी निविदा के जारी होने से साफ इंकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर सिवनी में पदस्थ श्री पुरी ने दूरभाष पर बताया कि इस मार्ग के सुधार की प्रथम निविदा जारी हो चुकी है। श्री पुरी ने उम्मीद जताई कि बारिश के पहले पहले तक सिवनी से नागपुर मार्ग का सुधार पूरा हो जाएगा।
इस निविदा के बारे में कांग्रेस और भाजपा के विज्ञप्तिवीरों के तरकश इसलिए खाली हैं क्योंकि इस बारे में उन्हें पूर्व में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अब जबकि इसकी निविदा ही जारी होकर समाचार पत्रों में स्थान पा चुकी है अतः अब इसका श्रेय लेने की कवायद तेज हो सकती है। 

. . . तो मवेशियों के पीने लायक भी नहीं बचेगी नर्मदा


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  69

. . . तो मवेशियों के पीने लायक भी नहीं बचेगी नर्मदा

जानबूझकर पुण्य सलिला को जहरीला बनाने की हो रही तैयारी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर दौलतमंद उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड घंसौर में स्थापित किए जाने वाले 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट से न केवल पर्यावरणीय खतरा पैदा होने की आशंका है वरन् खेतों की उर्वरक क्षमता कम होगी और आसपास के समस्त जल स्त्रोतों के जहरीला होने की आशंकाएं बलवती हो रही हैं।
जानकारो का कहना है कि थर्मल कोल पावर प्लांट से निकलने वाली राख से पानी इतना प्रदूषित हो जाएगा कि इसे मवेशी भी नहीं पी सकेंगे। गौरतलब है कि 500 मेगावाट के सारणी स्थित सतपुड़ा थर्मल कोल पावर प्लांट से निकलने वाली राख से तवा नदी का पानी इसी तरह प्रदूषित हो चुका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तवा नदी में नहाने पर लोगों की चमड़ी जलती है और त्वचा रोग हो जाते हैं। इसकी राख के निस्तारण के लिए हाल ही हजारों पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई, जबकि पहले से नष्ट किए गए जंगल की भरपाई नहीं की जा सकी है। इतने दुष्परिणामों के सामने आने के बावजूद मध्यप्रदेश में देवी स्वरूप नर्मदा के किनारे थर्मल कोल पावर प्लांट की अनुमति देना जनहित में नहीं है।
नर्मदा में लाखों लोग डुबकी लगाकर पुण्य का अनुभव करते हैं। उनकी रूह भी इस पानी में नहाने के नाम से कांप उठेगी। राख से नर्मदा की गहराई पर भी असर होगा। वहीं गंगा के जहरीले होने के कारण सरकार ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि इसके किनारे अब ऐसा कोई निर्माण नहीं किया जाएगा, तो नर्मदा की चिंता क्यों नहीं की जा रही है?
मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के कोल आधारित पावर प्लांट से उड़ने वाली राख आसपास के खेतों में कहर बरपाएगी। इतना ही नहीं इसकी राख से पुण्य सलिला नर्मदा के प्रदूषित होने का खतरा बरकरार ही है। जानकार बताते हैं कि इससे उड़ने वाली जहरीली राख से नर्मदा का पानी इतना जहरीला हो जाएगा कि इसमें नहाने से खुजली आदि जैसे त्वाचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाएगा।
पुण्य सलिला नर्मदा का जो हाल होना है वह तो होकर ही रहेगा। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल एवं केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा अथाह जल संपदा अपने दामन में समेटने वाली रानी अवंती बाई सागर परियोजना के बरगी बांध के पानी को जहरीला करने की तैयारी की जा रही है।
यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

गैर राजनैतिक होने का खामियाजा भुगतेंगे मनमोहन


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 91

गैर राजनैतिक होने का खामियाजा भुगतेंगे मनमोहन

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। भारत गणराज्य में संभवतः मनमोहन सिंह पहले एसे वज़ीरे आज़म हैं जो गैर राजनैतिक हैं। यही कारण है कि उनके इर्द गिर्द भीड़ भाड़ नहीं हुआ करती है। चापलूस, चाटूकार भी मनमोहन के आसपास नहीं फटक पाते हैं। राजनैतिक लोग भी प्रधानमंत्री के पास जाकर चर्चाओं में बोरियत ही महसूस करते हैं। गैर राजनैतिक होने के बाद भी देश पर आठ साल तक उन्होंने कैसे राज कर लिया इस बारे में लोग शोध ही कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास के सूत्रों का कहना है कि मनमोहन सिंह खालिस गैर राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी हैं। अगर कोई उनके पास जाकर किसी भी विषय पर राजनैतिक दृष्टिकोण से बात करता है तो प्रधानमंत्री बस चुपचाप खामोशी के साथ हल्की मुस्कुराहट भर देते हैं। कुछ देर में चर्चा करने वाला शांत हो जाता है। लोगों को आज भी प्रधानमंत्री के विचार ही नहीं पता है। लोगों को मनमोहन सिंह की रीति नीति के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि देश के सबसे ताकतवर पद पर आसीन डॉ.मनमोहन सिंह के पास कोई फैसला लेने का अधिकार ही नहीं है। वे हर मामले में कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी का सरकारी आवास) पर ही आश्रित हैं। माना जा रहा है कि गैर राजनैतिक होने का खामियाजा मनमोहन सिंह को अपनी कुर्सी से उतरकर ही चुकाना होगा।
सूत्रों ने बताया कि जब मनमोहन सिंह की पुत्री ने मनमोहन सिंह को टीवी पर चल रहे एक चुटकला सुनाया। जिसमें कहा गया है कि मनमोहन सिंह से किसी ने पूछा कि दो और दो कितने होते हैं। जिसके जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा कि वैसे तो दो और दो चार होते हैं पर अगर सोनिया जी से एक बार पूछ लेते तो बेहतर होता। यह सुनते ही मनमोहन सिंह ठहाके मारकर हंसने लगे। सूत्रों ने कहा कि यद्यपि उनके ठहाके से पीएमओ गूंज उठा पर उनके चेहरे पर उपेक्षा का दर्द अलग दिख रहा था।

(क्रमशः जारी)

हृदय प्रदेश में भाजपा की हालत पतली


हृदय प्रदेश में भाजपा की हालत पतली

आधी से ज्यादा सीटें खतरे में

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। लगातार दूसरी पारी खेल रही मध्य प्रदेश भाजपा को 2013 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भारी मशक्कत करना पड़ सकता है। 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में 155 सीटों पर भाजपा की हालत पतली ही दिख रही है। इसका कारण शिवराज सिंह चौहान का मूल रूप से नौकरशाहों पर निर्भर होना ही बताया जा रहा है। शिव के इशारों को नौकरशाह बखूबी समझ रहे हैं किन्तु सांसद विधायकों और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा शिवराज पर भारी पड़ने वाली है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी सूत्रों का कहना है कि शिव का राज पांच लोग मिलकर चला रहे हैं। ‘‘मुख्यमंत्री जी की मंशा है‘‘ के जुमले को पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी के शासनकाल की तरह ही इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सीएम द्वारा दिए गए निर्देशों को सिर्फ मुख्य सचिव को दिया जाता है। फिर सीएस द्वारा संभागायुक्तों को बुलाकर उन्हें मुख्यमंत्री की इच्छा से आवगत करा दिया जाता है। तीसरी कड़ी में संभागायुक्तों द्वारा जिला कलेक्टर्स को बुलाकर निर्देश दे दिए जाते हैं। अगर कोई कलेक्टर इस बारे में सवाल करता है कि अगर विधायक या सांसद ने कुछ हटकर चाहा तो? इस पर उन्हें कह दिया जाता है कि सीएम साहब की यही इच्छा है बस, बाकी सबको हाशिए पर डाल दिया जाए।
संभवतः यही कारण है कि काडर बेस्ड भारतीय जनता पार्टी का जनाधार दिनों दिन गिर रहा है। इसके साथ ही साथ प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों द्वारा रोजाना करोड़ों रूपए उगले जा रहे हैं। कार्यकर्ता इससे आज़िज आ चुके हैं। कहा जा रहा है कि सांसद और विधायक निधि में भी बंदरबांट जारी है। आलम यह है कि प्रदेश में अनेक सांसद विधायकों द्वारा समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाकर विज्ञापन के देयकों के भुगतान भी पत्रकारों से दो तीन नाम मांगकर उनके नाम पर किए जाने की शिकायतें अब आम हो गई हैं।
शिवराज हैटट्रिक करेंगे या नहीं, इस सवाल का जवाब ढूंढने में लगी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश की 155 से ज्यादा सीटों पर भाजपा की हालत बहुत खराब है। जिन मुद्दों पर भाजपा 2003 में जीती थी, उन्हीं मुद्दों पर अंडरकरंट दिख रहा है। लोकसभा चुनावों के अप्रत्याशित परिणामों का असर भी इन सीटों पर दिखाई दे रहा है। अन्य राज्यों से लगी विधानसभा सीटों पर भी भाजपाविरोधी लहर साफ दिख रही है।
मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है। लेकिन 2003 में दिग्विजय सिंह को गद्दी से उतारकर भाजपा ने जिन मुद्दों पर सरकार बनाई थी, वह मुद्दे आज उसके खिलाफ जा रहे हैं। इसके बाद भी भाजपा फीलगुड में है। दूसरी ओर कांग्रेस में गुटबाजी हावी है। बावजूद इसके अंडरकरंट कांग्रेस के पक्ष में है। भोपाल से प्रकाशित पाक्षिक ‘बिच्छू डॉट कॉम‘ ने खुफिया एजेंसी के सर्वे का हवाला देकर कहा है कि कि 230 सीटों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा की 155 सीटों पर भाजपा की हालत बेहद खराब है।
सरकार विरोधी अंडरकरंट बहुत तेज है। इसकी झलक प्रदेश 2009 के लोकसभा चुनावों में देख चुका है। सालों से संसद जा रहे भाजपा के धुरंधरों को उनकी परंपरागत सीटों पर ही ध्वस्त होते देखा था। 2013 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार ने एक खुफिया एजेंसी से सर्वे कराया है। इसमें सिर्फ वास्तविक राजनीतिक स्थिति का आकलन करने का काम सौंपा गया था। कई जिलों में 2003 में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ किया था। इनमें अधिकांश विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग से थी। अब हालात बदल गए हैं। इन जिलों में कांतिलाल भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने (केबी फेक्टर) और विधानसभा में विपक्ष की नेता रहीं जमुनादेवी के सुहानुभूति वोटों का असर दिखाई देगा। उत्तरप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र की सीमा से लगी सीटों पर दूसरे राज्यों की राजनीति का सीधा असर है।

फीलगुड कहीं शाइन कम न कर दें
2004 के लोकसभा चुनावों में फीलगुड और इंडिया शाइनिंग ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। इसके बाद भी मध्यप्रदेश सरकार इसी फार्मूले पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। भाजपा के खिलाफ ग्वालियर-चंबल, विंध्य और बुंदेलखंड में जबरदस्त अंडरकरंट हैं। मालवा के कई आदिवासी क्षेत्रों में जहां भाजपा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए तेजी से सक्रिय है वहां बेरोजगारी के चलते तेजी से पलायन हो रहा है। विंध्य में कुपोषण और भुखमरी के कारण लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश है तो बुंदेलखंड में बेरोजगारी उसकी मुश्किल बढ़ा सकती है। चुनाव से पहले सड़कों को ठीक करने की सरकार की मंशा भी उसके लिए उल्टा-दांव पड़ सकती है। सड़कों की दुर्दशा से भाजपा के शहरी मतदाता भी उससे नाराज हैं। इन मतदाताओं की माने तो वे भी जानते हैं कि चुनाव से पहले सरकार इन सड़कों को ठीक कर एक बार फिर वोटर को ठगने का जतन करेगी। चुनाव के समय किसानों को भरपूर बिजली देने के लिए बिजली की खरीदी भी होगी, इसके बाद फिर पांच साल तक किसान खाद, बीज, पानी और सड़क के लिए तरसेगा। भाजपा के मंत्रियों का बड़बोलापन और प्रदेश में भ्रष्टाचार भी उसके लिए मुसीबत बन सकता है।

कांग्रेस को दूर करनी होगी गुटबाजी
कांग्रेस की हर बैठक में गुटबाजी के कारण झगड़े होते हैं। बड़े नेता कार्यक्रमों और बैठकों से किनारा कर रहे हैं। इससे कांग्रेस में कलह साफ दिख रही है। भोपाल में पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता नदारद थे। सभी सांसदों और विधायकों ने भी इसमें उपास्थिति दर्ज नहीं कराई। जेल भरो आंदोलन से भी बड़े और दिग्गज नेताओं ने दूरियां बना रखी है। बेटे को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर करने के कारण पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यादव नाराज चल रहे हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय जमुना देवी की गैरमौजूदगी में कांग्रेस के लिए आदिवासी वोट बैंक बरकरार रखने के लिए कड़ी मशक्कत करना पड़ेगी। भूरिया क्षेत्र से निकलकर पहली बार प्रदेश के आदिवासी नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी हाईकमान भी उन्हें आदिवासी नेता के रूप में प्रदेश में स्थापित कराना चाहता है, इसमें कितनी सफलता मिलती है यह अगले चुनाव में ही स्पष्ट होगा।

इन इलाकों में भाजपा की हालत खराब
दिमनी, अम्बाह, अटेर, मेहगांव, ग्वालियर पूर्व, सेवढ़ा, शिवपुरी, कोलारस, बामोरी, चंदेरी, जतारा, चंदला (अजा), बिजावर, पथरिया, दमोह, पवई, गुन्नौर (अजा), चित्रकूट, रैगांव (अजा), अमरपाटन, देवतालाब, मनगवां (अजा), सिहावल, कोतमा, पुष्पराजगढ़ (अजजा), निवास (अजजा), बैहर (अजजा), लखनादौर (अजजा), अमरवाड़ा (अजजा), सौंसर, परासिया (अजा), बैतूल, घोड़ाडोंगरी (अजजा), नरेला, भोपाल मध्य, नरसिंहगढ़, हाट पिपलिया, खातेगांव, पंधना (अजजा), नेपानगर (अजजा), अलीराजपुर (अजजा), मनावर, धार, इंदौर-5, राऊ, मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद, बीना (अजा), सेमरिया, बडऩगर।

केबी फेक्टर दिखाएगा असर
झाबुआ, धार, बडवानी, खरगोन, खंडवा जैसे महाराष्ट्र-गुजरात से लगे जिलों में उमा भारती की लहर 2003 में दिखाई दी थी, वैसा असर 2008 के चुनावों में नहीं दिखी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कांतिलाल भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने का फायदा भी उनकी पार्टी को मिल सकता है। केबी फेक्टर का असर उन जिलों में देखने को मिल सकता है, जहां उनका अश्छा-खासा प्रभाव है। जमुनादेवी को लेकर सुहानुभूति भी इन सीटों पर दिखाई पड़ सकती है। आदिवासी सीटों पर वैसे ही भाजपा को जैसा समर्थन 2003 में मिला था, वैसा अब नहीं दिखाई दे रहा।

ग्वालियर-चंबल संभाग में सब दमदार
ग्वालियर-चंबल संभाग में भी उत्तरप्रदेश का फेक्टर काम करेगा। बसपा वहां जीती तो इन इलाकों के जिलों में भी अपना असर दिखा सकती है। इस क्षेत्र में फूलसिंह बरैया की पार्टी भी अच्छा-खासा जनाधार रखती है। बसपा से निकाले जाने पर भाजपा ने उन्हें अपनाया लेकिन उन्हें वहां पर्याप्त तवज्जो नहीं मिली। इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी। रीवा से मुरैना तक 31 सीटें ऐसी हैं, जहां बसपा ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

दिग्गी गुट का कब्जा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुट का कब्जा है। कांतिलाल भूरिया और दिग्विजय सिंह समर्थकों के कब्जे के कारण दूसरे गुट के नेता और पदाधिकारी वहां सिर्फ बैठकों में ही बुलाने पर हाजिर होते हैं वे भी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए।

अजय-भूरिया में  श्रेय लेने की होड़
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह में शुरू हुई जुगलबंदी ज्यादा लंबी खिंचती नजर नहीं आ रही है। दोनों में पिछले दिनों जेल भरो आंदोलन की सफलता का श्रेय लेने की होड़ देखी गई। दोनों अलग-अलग दिगी में हाईकमान से मिले और सफलता की जानकारी दी। हालांकि उनके करीबी बताते हैं कि दस जनपथ से दोनों को अलग-अलग समय मिला था लेकिन कांग्रेस में एकता की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को यह तर्क रास नहीं आ रहा है।

कांग्रेस में कलह
कांग्रेस ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव और जेल भरो आंदोलन के जरिए अपने इरादे जाहिर स्पष्ट कर दिए हैं। लेकिन कांग्रेस की कथित एकता खंडित हो रही है। बड़े नेताओं की अरुचि की वजह से कार्यकर्ताओं में जोश नहीं है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ओर प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया की जोड़ी प्रदेश सरकार की नींद उड़ाए हुए है। इस जोड़ी ने पिछले दो महीने में जो सक्रियता दिखाई और सरकार पर जोरदार हमले किए उससे कांग्रेस में नई जान आ गई है।

विंध्य क्षेत्र में बसपा का दबदबा
उत्तरप्रदेश चुनावों का सीधा असर विंध्य क्षेत्र के जिलों रीवा, सतना, सिंगरौली, त्योंथर में दिखाई देगा। यदि बसपा ने उत्तरप्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया तो वह यहां भी पैर पसार सकती है। इस इलाके में अर्जुन सिंह को हराने वाले समानता दल के प्रदेश प्रमुख का भी दबदबा है। महाराष्ट्र की सीमा से लगे छिंदवाड़ा व आसपास के जिलों में एनसीपी का प्रभाव है। यहां यह पार्टियां भले ही सीटें जीत न पाए, लेकिन बड़ी संख्या में वोट काटने में कामयाब जरूर रहेंगी।

इनकी नहीं हो रही पूछ परख
सुभाष यादव, श्रीनिवास तिवारी, इंद्रजीत पटेल, मुकेश नायक, गुफरान ए आजम, अजीज कुरैशी, सुरेश पचौरी, शोभा ओझा, बालकवि बैरागी, किसन पंत

इन मुद्दों पर है अंडरकरंट 
खाद संकट, बिजली, पाला , कुपोषण, सड़क, पानी, घोषणाएं ज्यादा, काम कम

छात्र राजनीति के नाम पर खुली एक और नई दुकान


छात्र राजनीति के नाम पर खुली एक और नई दुकान

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। आजकल राजनीति की दुकान हर बेरोजगार और व्यापारी चलाने में सक्षम नजर आ रहा है। यही सिद्ध हुआ जब विगत दिनों एक नामी शिक्षण संस्थान के संचालक ने छात्र शक्ति संगठन नामक छात्र राजनीति में अपनी पकड बनाने के उद्देश्य से समाज सेवा प्रारंभ की है। इस बार भी यह पुण्य काम डीपी चतुर्वेदी महाविघालय के संचालकों के द्वारा किया गया है। बताया जाता है कि विगत एक वर्ष में कोई अनियमितताओं की जांचों से त्रस्त होकर 2 हजार छात्र- छात्राओं के इस महाविघालय के संचालकों ने एक आसान तरीका यह खोजा कि छात्र राजनीति मंे यदि स्वयं की संस्था बनाकर डाल दी जाए तो शायद आगामी भविष्य में परेशानियां न उठानी पडें और जिस प्रकार पूर्व में आसानी से अनियमितताएं की जा सकती थी, वह फिर से शुरू कर दी जाए। अब देखने वाली यह होगी कि इस नई राजनीति की दुकान का विरोध विघार्थी परिषद पहले करती है या फिर एनएसयूआई...।