बुधवार, 21 मार्च 2012

कार्पोरेट कल्चर में ढलती भाजपा!

कार्पोरेट कल्चर में ढलती भाजपा!

राज्य सभा के लिए कार्पोरेट लाबी के सामने नतमस्तक है 
 भाजपा नेतृत्व



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। ‘‘चाल, चरित्र और चेहरे‘‘ के लिए अलग पहचान रखने वाली भारतीय जनता पार्टी अब कार्पोरेट लाबी के सामने घुटनों पर खड़ी दिख रही है। बड़े औद्योगिक घरानों के इशारों पर कत्थक करती दिखती भाजपा में कार्पोरेट कल्चर तेजी से हावी होता दिख रहा है। नैतिकता को बलाए ताक पर रखकर कांग्रेस की ही तर्ज पर अब भाजपा में भी पूंजी पतियों की तूती बोलती दिख रही है।
चुनाव लड़ने से डरे हुए योद्धाओं द्वारा पिछले दरवाजे यानी राज्य सभा से संसदीय सौंध तक पहुंचने की होड़ मची हुई थी। अगर सरकार गिरे और आम चुनाव हों तब भी राज्य सभा के सदस्य का कार्यकाल तो पूरे छः साल का ही रहता है। यही कारण है कि अनेक नेताओं ने बिना नींव और जमीन के अधपर में ही अपने महल खड़े कर लिए हैं। अनेक नेता तो राजनैतिक दलों की प्रदेश इकाईयों के अध्यक्ष भी हैं। देश के महामहिम प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह एक भी चुनाव नहीं जीते हैं और आठ सालों से देश के प्रधानमंत्री बने बैठे हैं।
बहरहाल, हेमा मालिनी, महेश शर्म, किरीट सौमेया, राजेश शाह, अजय संचेती, विनय सहत्रबुद्धे, श्याम बाजू, फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रहलाद पटेल, अनुसुईया उईके, कप्तान सिंह सोलंकी, विक्रम वर्मा, एस.एस.अहलूवालिया, नारायण सिंह केसनी, मेघराज जैन जैसे नेताओं की लंबी फौज बरास्ता राज्यसभा संसद में जाने के लिए कतारबद्ध थी। अहलूवालिया का शनि भारी हो गया और उनके स्थान पर अरूण जेतली ने अपने विश्वस्त संघ पृष्ठभूमि वाले वकील भूपेंद्र यादव को लाकर खड़ा कर दिया।
भाजपा छोड़कर उमा भारती के साथ भाजश का दामन थामने वाले प्रहलाद सिंह पटेल की घर वापसी तो हो गई है पर उनसे खफा नेताओं ने पटेल की जड़ों में मट्ठा डालना नहीं छोड़ा। यही कारण है कि भाजपा के असंगठित मजदूर मोर्चे का अध्यक्ष बनने के बाद भी प्रहलाद पटेल उतने ताकतवर होकर नहीं उभर सके हैं जितने वे पहले थे। पटेल के समर्थकों में भी निराशा ही है। माना जा रहा था कि इस बार मध्य प्रदेश से पटेल को राज्य सभा में भेज दिया जाएगा, किन्तु पार्टी अध्यक्ष नितिन गड़करी के सामने यह समस्या थी कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के डंपर कांड के जनक और कोई नहीं प्रहलाद पटेल ही थे।
उधर, कुबेर पुत्र मुकेश अंबानी ने अपने साथी वीरेन शाह के पुत्र राजेश शाह को महाराष्ट्र से राज्य सभा में भेजने के लिए एडी चोटी एक कर दी। एल.के.आड़वाणी के करीबी सूत्रों का दावा है कि मुकेश ने शाह के लिए आड़वाणी की जमकर चिरौरी की, किन्तु आड़वाणी राज्य सभा उम्मीदवारों के चयन की बैठक में इस बात को वजनदारी से नहीं उठा पाए।
शाह के स्थान पर गड़करी ने अपने विश्वस्त अजय संचेती को लाने में कामयाबी हासिल कर ली। गड़करी के करीबी सूत्रों का कहना है कि संचेती देश भर में अनेक पावर प्रोजेक्ट लगा रहे हैं। अनेक पावर प्लांट में उनकी भागीदारी भी बताई जाती है। छत्तीसगढ़ के निजाम रमन सिंह से संचेती की गलबहियां किसी से छिपी नहीं हैं। किरीट सौमेया के नाम पर बाबूसिंह कुशवाहा ने फच्चर फंसा दिया।
कुबेर पुत्रों और उद्योगपतियों के प्रति भाजपा का प्रेम देखते ही बन रहा है। झारखण्ड में नितिन गड़करी की पहली पसंद बनकर उभरे अशुंमान मिश्र ने सियासी भूचाल ला दिया है। भापजा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे डाली है। कहा जाने लगा है कि भाजपा में अब प्रजातंत्र के बजाए कांग्रेस के मानिंद ही हिटलरशाही व्याप्त हो चुकी है।
अशुंमान पर आरोप है कि गड़करी के समीप्य का लाभ उठाकर उन्होंने अपने भाई राजीव को रामपुर कारखाना सीट की टिकिट दिलवा दी थी। यह बात अलहदा है कि राजीव चौथी पायदान पर रहे। पैसों के बाजीगर अशुंमान के बारे में कहा जाता है कि वे कल्याण सिंह के काफी करीब रहे हैं। अंशुमान दरअसल गडकरी का पसंदीदा इसलिए भी है क्योकि उसने लंदन समेत तमाम अन्य देशों में गडकरी का निवेश और व्यापारिक संबंधों का प्रबंधन किया है।
संघ मुख्यालय झंडेवालान स्थित केशव कुंज के सूत्रों का कहना है कि अशुंमान की दावेदारी से संघ के आला नेता भी गड़करी से खफा नजर आ रहे हैं। अशंुमान को लेकर संघ में दो फाड़ हो चुका है। संघ के दबाव में अंशुमान का समर्थन करने वाले गडकरी ने देश और भाजपा के कार्यकर्ताओं को यह नहीं बताया कि दरअसल अंशुमान मिश्रा विश्व भर में कट्टर इस्लामिक शिक्षण संस्थाओं को फंडिंग करने वाली अबू धबी की प्रिंस अल्वालीद फाउंडेशन का कर्ताधर्ता और सहयोगी भी है।
कहा जाता है कि अशुंमान मन राखनलाल हैं अर्थात उनकी कांग्रेस में गहरी पकड़ है। अंशुमान का इकबाल कांग्रेस में जमकर बुलंद है। पूर्व कानून मंत्री और राज्यपाल हंसराज भरद्वाज का करीबी होने का ही फायदा है कि टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी शाहिद बल्वा का करीबी होने के बावजूद इसे सीबीआई ने जांच के दायरे में नही लिया। यही नहीं, अंशुमान मिश्रा प्रफुल्ल पटेल के साथ मिलकर विदेशों में तमाम निवेशों में शामिल है।
भाजपा में कौन राज्य सभा के रास्ते जाएगा इसके लिए नेताओं के अलावा धनपति कुमार मंगलम बिड़ला, मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, एस्सार समूह के रईया बंधु, सहारा समूह आदि खासी दिलचस्पी दिखाते हैं। मतलब साफ है कि इनके व्यवसायिक हित इन राज्य सभा सदस्यों के माध्यम से सध जाते हैं। चाल चरित्र और चेहरे के लिए जानी जाने वाली भाजपा का यह कार्पोरेट चेहरा देश के लिए खतरनाक संकेत से कम नहीं है।

चौदह पेज का अस्पष्ट कार्यवाही विवरण फिर आया पीसीबी की वेब साईट पर


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  79

चौदह पेज का अस्पष्ट कार्यवाही विवरण फिर आया पीसीबी की वेब साईट पर

लोकसुनवाई में रिकार्ड हुए महज 97 सुझाव/ आपत्ति

अब शुरू होगा थापर का अदृश्य जादू



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अंततः 22 नवंबर 2011 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में डलने वाले गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के दो चरणों में डलने वाले 1200 मेगावाट (अब संभवतः 1260 मेगावाट, 60 मेगावाट क्यों और कब बढ़ा यह स्पष्ट नहीं) के कोल आधारित पावर प्लांट की लोकसुनवाई का कार्यवाही विवरण मध्य प्रदेश सरकार की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के अधीन काम करने वाले प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने अपनी वेब साईट पर चार माहों बाद डाल ही दिया।
गौरतलब है कि 22 नवंबर 2011 को ग्राम गोरखपुर में संपन्न हुई हंगामाई लोकसुनवाई में अनेकों विसंगतियां प्रकाश में आईं थी। इस संबंध में मध्य प्रदेश के एक लोकसभा सदस्य द्वारा ध्यानाकर्षण लगाने की तैयारी भी पूरी कर ली है। अगर यह मामला संसद में उठता है तो मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल सहित जिला प्रशासन सिवनी पर गाज गिरने की संभावना है। गौतम थापर की थाप पर मुजरा करने वाले सरकारी नुमाईंदों पर आदिवासियों की उपेक्षा और नियम कायदों के खिलाफ काम करने के अनेक आरोप हैं।
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की आधिकारिक वेब साईट पर डले इस चौदह पृष्ठीय कार्यवाही विवरण में इस बार भी अस्पष्ट प्रति ही डाली गई है, जबकि 22 नवंबर को संपन्न लोकसुनवाई में पीसीबी के मुख्य रसायनज्ञ पी.आर.देव और वैज्ञानिक एस.के.खरे के संज्ञान में यह बात लाई गई थी कि 22 अगस्त 2008 के कार्यवाही विवरण को इंटरनेट पर पीसीबी की वेब साईट पर अस्पष्ट डाला गया था जो पठनीय नहीं था। बावजूद इसके 22 नवंबर 2011 को संपन्न लोक सुनवाई का कार्यवाही विवरण भी पूरी तरह अस्पष्ट ही डाला गया है।
पीसीबी के सूत्रों का कहना है कि मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के हाथों बिक चुके प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड को प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर फायदा पहुंचाने की गरज से सरकारी नियम कायदों को गौतम थापर के घर की लौंडी बना दिया है।
दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड के आदिवासियों, जल जंगल और जमीन को परोक्ष तौर पर दौलतमंद गौतम थापर के पास रहन रख दिया गया है और बावजूद इसके केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

वोडाफोन मामले में सरकारी अर्जी खारिज


वोडाफोन मामले में सरकारी अर्जी खारिज

(ब्यूरो)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार कम्पनी वोडाफोन कर मामले में सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कल अपने फैसले में आयकर विभाग से कहा कि वह वोडाफोन द्वारा जमा कराये गए ढाई हजार करोड़ रुपये चार प्रतिशत ब्याज के साथ दो महीने के अंदर लौटाए।
इस मामले में बम्बई उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त करने वाले उच्चतम न्यायालय के पहले के आदेश पर सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि वोडाफोन इंटरनेशनल होल्डिंग्स और हचिसन ग्रुप के बीच विदेश में हुए बारह अरब डॉलर के सौदे पर ग्यारह हजार करोड़ रुपये का कर लगाने का आयकर विभाग को कोई अधिकार नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने चार प्रतिशत ब्याज के साथ ढाई हजार करोड़ रुपये कल कम्पनी को लौटा दिए। इस बीच, सरकार ने आयकर कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसके अनुसार इस प्रकार के विलय तथा अधिग्रहण पर वर्ष १९६२ से कर लगाया जा सकता है।

डेढ़ फीसदी की दर से कम हुई गरीबी


डेढ़ फीसदी की दर से कम हुई गरीबी

(ब्यूरो)

नई दिल्ली। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया ने कहा है कि २००४-०५ और २००९-१० के बीच पांच वर्षों में गरीबी में कमी की दर करीब डेढ़ प्रतिशत वार्षिक रही। नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने यह जानकारी दी। गरीबी के बारे में जो कुछ भी हुआ है उसकी हमे जानकारी है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में गरीबी में और कमी आएगी, और वास्तव में इस अवधि में हर साल गरीबी की दर में लगभग डेढ़ प्रतिशत की कमी आई है।
श्री आहलुवालिया ने कहा कि योजना आयोग से गरीबी रेखा का निर्धारण फिर से करने को कहा गया था। श्री आहलुवालिया ने कहा कि गरीबी के स्तर को ताजा उपभोक्ता सर्वेक्षण के अनुसार कम किया गया है। श्री आहलुवालिया ने कहा कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़ीशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचलप्रदेश और सिक्किम में गरीबी में कमी का स्तर औसत से ज्यादा रहा है।
योजना आयोग ने कल गरीबी के स्तर के अनुमान जारी किए थे, जिनमें कहा गया है कि देश में गरीबी के स्तर में सात दशमलव तीन प्रतिशत की कमी हुई है। यह २००४-०५ के ३७ दशमलव दो प्रतिशत से घटकर २००९-१० में २९ दशमलव आठ प्रतिशत रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में २००९-१० में गरीब लोगों की कुल संख्या ३४ करोड़ ४७ लाख होने का अनुमान है, जबकि २००४-०५ में यह संख्या चालीस करोड़ ७२ लाख थी।

आदर्श सोसायटी मामले में धरपकड़ आरंभ


आदर्श सोसायटी मामले में धरपकड़ आरंभ

(ब्यूरो)

नई दिल्ली। सीबीआई ने करोड़ों रुपये के आदर्श हाऊसिंग सोसायटी घोटाले में धर पकड़ आरंभ कर दी है। आदर्श सोसायटी के चीफ प्रमोटर आर.सी. ठाकुर, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर और सेना के एस्टेट अधिकारी एम.एम. वांचू, महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग के पूर्व उपसचिव पी.वी. देशमुख और कांग्रेस के पूर्व विधान परिषद् सदस्य कन्हैयालाल गिडवानी सहित चार लोगों को आज सुबह गिरतार किया गया। इन चारों को कल सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
इस मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल एफआईआर के अनुसार गिरतार किए गए पी.वी. देशमुख, आर.पी. ठाकुर और एम.एम. वांचू ने महाराष्ट्र सरकार और रक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर आदर्श सोसायटी के लिए अवैध तरीके से जमीन प्राप्त की। वहीं गिरवानी पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने राजनैतिक प्रभाव से आदर्श सोसायटी की फाइलें मंजूर करवा ली और बदले में राज्य सरकार के अधिकारियों को आदर्श सोसायटी में लैट दिलवायें। पिछले हते इस मामले की जांच धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

मंगलवार, 20 मार्च 2012

अधनंगों की खरबपति राजमाता!


अधनंगों की खरबपति राजमाता!

(लिमटी खरे)


 
एक समय था जब अविभाजित भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। देश की अकूत धन संपदा को पहले मुगल आक्रमणकारियों ने फिर ब्रितानी गोरों ने तबियत से लूटा। कहते हैं भारत देश वह कपड़ा था जिसे जब भी हाथ लगाया जाता पानी उसमें से निकल पड़ता। मुगलों और गोरों के द्वारा इस कपड़े का सारा पानी अर्थात धन निचोड़कर इस कपड़े को तार तार कर दिया गया। जब भारत देश अति गरीब होने की कगार पर आया तब देश को बमुश्किल गोरों ने छोड़ा। 1947 में आजादी और उसके उपरांत भारत गणराज्य की स्थापना के बाद आधी सदी से ज्यादा इस देश पर कांग्रेस ने शासन किया। आज भी देश के अस्सी फीसदी लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं है। इन परिस्थितियों में कांग्रेस की सर्वशक्तिमान राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी की संपत्ति खरबों रूपयों की होना अपने आप में एक आश्चर्य ही है। अधनंगों की खरबपति राजमाता और अरबपति युवराज को देश की हालत पर शर्म नहीं आती है, यही कारण है कि कलमाड़ी, राजा जैसे देशी लुटेरे आज भी देश को लूटने पर आमदा है।



लगता है भारत देश में प्रजातंत्र की हत्या हो चुकी है और सदियों पुराना सामंती राज कायम हो चुका है। उस वक्त भी राजे महाराजों के पास अकूत धन संपदा होती थी और रियाया फटेहाल। अंतर महज इतना था कि उस समय राजपरिवार के सदस्यों द्वारा रियाया का पूरा पूरा ध्यान रखा जाता था। राजनीति तब भी थी किन्तु नैतिकता की नींव पर खड़ी थी राजनीति।
आजादी के उपरांत भारत देश की जनता ने आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली कांग्रेस पर पूरा भरोसा जताया और अपने सुनहरे भाग्य के निर्माण का जिम्मा कांग्रेस को सौंप दिया। कांग्रेस के नैतिकतावान नेताओं ने देश को गढ़ना आरंभ किया। देश की सबसे बड़ी पंचायत के पंच यानी सांसद और सूबों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा बहुत ही कम पारिश्रमिक पर देश सेवा आरंभ कर दी।
जैसे जैसे समय बीतता गया, बेईमानी नैतिकता पर हावी होने लगी। देश और राज्यों की सेवा करने वाले जनसेवकों ने अपने वेतन भत्ते और सुविधाएं खुद तय करना आरंभ कर दिया। आज जनता फटेहाल की फटेहाल ही है पर नेता हैं तो मालामाल से मालामाल होते चले जा रहे हैं। नीरा राडिया कांड में नेताओं की असलियत सामने आई। कोई सीधे कमीशन तो कोई पंद्रह फीसदी लेकर देश सेवा को राजी होने की बातें सुनाई पड़ीं। मोटी चमड़ी वाले नेताओं को शर्म नहीं आई।
सांसदों के वेतन भत्तों को बढ़ाने के मामले में इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के स्वयंभू प्रबंधन गुरू लालू प्रसाद यादव चीख चीख कर संसद में कहते सुने गए कि सांसद का वेतन झूनियर क्लर्क से भी कम है। एक जूनियर क्लर्क और सांसद में क्या समानता? सांसद विधायकों को आना जाना निशुल्क, बिजली पानी रहना निशुल्क, फिर मोटा वेतन! आखिर किस दिशा में ले जा रहेे हैं राजनेता इस देश को।
इक्कीसवीं सदी के ही स्वयंभू योग गुरू राम किशन यादव उर्फ बाबा रामदेव ने जब स्विस बैंकों में देश के काले धन को उजागर करने का अभियान छेड़ा तो राज माता ने अपने चार वरिष्ठ मंत्री बाबा को शीशे में उतारने भेजे। योग गुरू से हठ योगी बने बाबा रामदेव नहीं माने तो पूरे खेल की परिणति ‘रामलीला मैदान - रात्रि काण्ड’ के रूप में सामने आई। कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के कारिंदे तो स्वामी रामदेव को ‘ठग’ पुकारने लगे।
दुनिया के चौधरी अमेरिका की एक वेब साईट ‘बिजनिस इन्साईटर‘ ने विश्व के 23 धनकुबेरों की सूची प्रसारित की तो हंगामा मच गया। इस सूची में चौथे स्थान पर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी तो सातवें स्थान पर कांग्रेस के कुरूक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल की माता और हिसार से कांग्रेस विधायक सावित्री जिंदल का नाम सातवीं पायदान पर है।
इस वेब साईट में इटली मूल की श्रीमति सोनिया माईनो उर्फ सोनिया गांधी के नाम पर दो से 19 अरब डालर अर्थात 10 से 45 हजार करोड़ रूपए की संपत्ति होने का दावा किया गया है। उधर, कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कुनबे में शामिल सावित्री जिंदल के पास 13.2 अरब डालर की संपत्ति होने का दावा किया गया है। इस खबर का स्त्रोत वर्ल्ड लग्ज़री गाईड को माना गया।
आश्चर्यजनक कड़वा सत्य तो योजना आयोग द्वारा गरीबों के प्रतिशत और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर एक राज्यवार सूची जारी होना है। अगर इसके राष्ट्रीय औसत को लिया जाए तो ग्रामीण इलाकों में 672.8 रुपए मासिक और शहरी इलाकों में 859.6 रुपये मासिक से कम आय वाला व्यक्ति गरीब है। ये प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े हैं। एक परिवार में औसतन पांच व्यक्ति माने गए हैं।
इस आधार शहरों में 28.65 रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना 22.42 रुपए से अधिक खर्च करने वाला गरीब नहीं है। गौरतलब है कि योजना आयोग ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को दिए एक हलफनामे में कहा था, ‘‘जून 2011 के मूल्य स्तर के लिहाज से शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा को अनंतिम तौर पर 32 रुपए प्रतिदिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 26 रुपए प्रतिदिन रखा जा सकता है।‘‘
योजना आयोग ने सोमवार को दावा किया कि पिछले पांच साल में देश की कुल आबादी में से 7.3 फीसदी गरीबों की गरीबी दूर हो गई है। 2004-05 में जहां देश में 40.72 करोड़ गरीब थे, वहीं 2009-10 में गरीबों की संख्या घटकर 34.47 करोड़ रह गई। यानी देश में कोई 6 करोड़ 30 लाख गरीबों की गरीबी दूर हो गई है।
2009-10 के लिए गरीबी आकलन से संबंधित योजना आयोग के आंकड़े कहते हैं कि गांवों में गरीबी, शहरों में गरीबी के मुकाबले ज्यादा तेजी से घटी है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी 41.8 प्रतिशत से घटकर 33.85 प्रतिशत (८ प्रतिशत की कमी) रह गई है, जबकि शहरी इलाकों में गरीबों की संख्या 25.7 प्रतिशत से कम होकर 20.9 प्रतिशत (4.8 प्रतिशत की कमी) रह गई है। कुल मिलाकर देश में 2004-05 में आबादी का 37.2 प्रतिशत गरीब थे। 2009-10 में इनकी संख्या 29.8 फीसदी ही रह गई।
गरीबी प्रतिशत के मामले में बिहार (53.3 प्रतिशत) सबसे आगे। उसके बाद छत्तीसगढ़ (48.7 प्रतिशत), मणिपुर (47.1 प्रतिशत), झारखंड (39.1 प्रतिशत), असम (37.9 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (37.7 प्रतिशत)। इन आंकड़ों से साफ है कि खेतिहर श्रमिक सबसे ज्यादा ज्यादा गरीब। 50 प्रतिशत खेतिहर श्रमिक और 40 प्रतिशत अन्य श्रमिक गरीब शहरी इलाकों में सबसे अधिक 47.1 प्रतिशत अस्थायी श्रमिक गरीब। कृषि प्रधान संपन्न हरियाणा में 55.9 खेतिहर श्रमिक गरीब जबकि पंजाब में 35.6 प्रतिशत खेतिहर किसान गरीब।
उधर सरकारी सूत्रों के अनुसार आंकड़ों को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है कि सभी को यह प्रतीत हो कि देश में ग़रीबी में ७ दशमलव ३ प्रतिशत की कमी आई है। यह वर्ष २००४-०५ में ३७ दशमलव २ प्रतिशत से घटकर वर्ष २००९-१० में २९ दशमलव ८ प्रतिशत हो गई। योजना आयोग द्वारा कल जारी अनुमानों के अनुसार, वर्ष २००४-०५ और २००९-१० के दौरान शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबी तेजी से कम हुई। देश में वर्ष २००९-१० में ग़रीबों की कुल संख्या ३४ करोड़ ४७ लाख होने का अनुमान है, जबकि वर्ष २००४-०५ में यह संख्या ४० करोड़ ७२ लाख थी।
गरीबी में दस प्रतिशत से भी अधिक की कमी हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़ीशा, सिक्किम, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तराखंड में दर्ज की गई है। हालांकि पूर्वाेत्तर राज्यों-असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड में ग़रीबी बढ़ी है। बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ बड़े राज्यों में, विशेषरूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, ग़रीबी के अनुपात में केवल मामूली गिरावट आई है।
अब इन परिस्थितियों में अगर सोनिया गांधी सुरक्षा कारणों से अपनी संपत्ति उजागर न करने को ढाल बना रही हैं तो इससे बड़ा दुर्भाग्य भारत गणराज्य के लिए और कुछ नहीं हो सकता है। अगर उक्त वेब साईट के आंकड़े वाकई सही हैं तो फिर सोनिया गांधी के सामने सुरेश कलमाड़ी, कनिमोझी, अदिमत्थू राजा आदि तो बच्चे ही हैं।

(साई फीचर्स)

देश को मिला इंटर पास रेल मंत्री!


देश को मिला इंटर पास रेल मंत्री!

साक्षरता का ढोल पीटने वाली कांग्रेस ने गठबंधन को माना राष्ट्रधर्म से उपर!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के लोगों को साक्षर करने के लिए जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को पानी की तरह बहाने वाली कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार सत्ता की मलाई चखते रहने के लिए अपने सहयोगी दलों के सामने घुटनों पर खड़ी दिखाई दे रही है। ममता बनर्जी की दादा गिरी के आगे नतमस्तक कांग्रेस ने बारहवीं (इंटर) पास मुकुल राय को रेल विभाग का नया निजाम बना दिया है।
देश के इतिहास में संभवतः यह पहला ही मौका होगा कि रेल बजट पेश करने के बाद उसे पास करवाने का काम नया रेल मंत्री करेगा। यह देश के संसदीय इतिहास की एक बहुत बड़ी विडम्बना के बतौर सामने आया उदहारण ही माना जा सकता है। राष्ट्रधर्म के उपर गठबंधन धर्म का आलम यह है कि मुकुल राय को एक साल पहले मनमोहन सिंह ने रेल मंत्री बनाने से मना कर दिया था। तब राय रेल राज्य मंत्री थे। उन्होंने प्रधानमंत्री के कहने के बावजूद एक रेल दुर्घटनास्थल का दौरा करने से मना कर दिया था।
देश के नए रेल मंत्री मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को उत्तर 24 परगना जिले के कंचरपाड़ा में हुआ था। 12वीं पास मुकुल ने कलकत्ता विश्वविद्यालय में बीएससी में दाखिला लिए लेकिन प्रथन वर्ष तक ही पढ़ाई कर पाए। मुकुल रॉय अप्रैल 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। रॉय 28 मई 2009 के बाद से ही जहाजरानी राज्य मंत्री हैं।
उधर दिनेश त्रिवेदी का जन्म 4 जून 1950 को नई दिल्ली में हुआ था। त्रिवेदी ने बी.कॉम के बाद कलकत्ता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से एमबीए किया और फिर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस से भी एमबीए की डिग्री ली। वे पहली बार 1990 में राज्य सभा के लिए चुने गए थे। 2002 में वे दोबारा राज्यसभा में आए। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और केंद्र सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री बने। जुलई 2011 में वे रेल मंत्री बनाए गए, लेकिन रेल बजट 2012  में किराए में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
सियासी बियावान में चल रही चर्चाओं के अनुसार एक पढ़े लिखे रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बेवजह बाहर का रास्ता दिखाकर बारहवीं पास मुकुल राय को रेल मंत्री बनाकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और त्रणमूल कांग्रेस आखिर देश को क्या संदेश देना चाहती है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मनमोहन सिंह और ममता बनर्जी के तेवरों से एक बात तो साफ होती दिख रही है कि पढ़े लिखे शिक्षित लोगों को राजनीति में आगे आने की बातें महज भरमाने के लिए ही लोगों के सामने की जाती हैं।

बजट के बाद कांग्रेस करेगी लोगों की जेब खाली


बजट के बाद कांग्रेस करेगी लोगों की जेब खाली



(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव निपट जाने के बाद अब सरकार डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने की तैयारी में है। जल्द ही कोई चुनाव न होने का फायदा उठाकर बजट सत्र के एन बाद ही सरकार इसमें बढ़ोत्तरी की घोषणा कर सकती है। इन दोनों ही चीजों की कीमतों के बढ़ने का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संकेत दिए हैं कि बजट सत्र के बाद डीजल-रसोई गैस के दाम बढ़ सकते हैं। मुखर्जी ने कहा कि इस मसले पर राजनीतिक सहमति बनाने की जरूरत होगी। बजट सत्र के बाद वे इस पर विभिन्न राज्यों की सरकारों और राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे। सरकार पेट्रोल के दाम जून 2010 में नियंत्रणमुक्त कर चुकी है जबकि डीजल और घरेलू रसोई गैस को वह रियायती दाम पर बेच रही है।
प्रणव मुखर्जी ने बताया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर पांच रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। जबकि डीजल पर 14.73 रुपए लीटर, केरोसीन पर 30.10 रुपए प्रति लीटर और घरेलू रसोई गैस पर 439.50 रुपए प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है। डीजल महंगा होने से जहां बाहर के राज्यों से आयात किया जाने वाला लगभग हर सामान महंगा हो जाएगा, वहीं रसोई गैस भी किचन का बजट बिगाड़ेगी।

राजूखेड़ी ने की जयराम से शिवराज की शिकायत


राजूखेड़ी ने की जयराम से शिवराज की शिकायत

(धीरेंद्र श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। मध्यप्रदेश संसदीय दल के संयोजक एवं धार - महू लोक सभा सांसद गजेन्द्र सिंह राजुखेडी ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश से मुलाकात कर अवगत कराया की मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा केंद्र सरकार द्वारा चलायी जा रही जन कल्याणकारी योजनायो को अपनी योजना बता कर प्रदेश की जनता को दिगभ्रमित किया जा रहा है जबकि मध्य प्रदेश सरकार को हर कार्य में जितना जिसका योगदान हो उसका उल्लेख सम्बंधित विभाग के बोर्ड पर करना चाहिए।
श्री राजुखेडी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया की मनरेगा में जो पांच लाख से कम राशि की कार्याे पर जो मध्य प्रदेश सर्कार ने रोक लगाई है उसको अविलम्ब समाप्त किया जाए। साथ ही साथ जिस ग्रामीण क्षेत्र के आसपास बैंक नहीं है या कर्मचारियों की कमी हो वहा नगद राशि की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने धार जिले में लंबित प्रधान मंत्री सड़कों में जो गाँव नहीं जोड़े गए है उन्हें भी इसमें जोड़ने का आग्रह केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश से किया। इस अवसर पर श्री राजुखेडी के साथ धार जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज सिंह गौतम, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राजा मोदी, कैलाश रघुवंशी, दिलीप गुप्ता सहित कई जन प्रतिनिधि मौजूद थे।

छग में पावर प्लांट ने लौटाई आदिवासियों की जमीन


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  78

छग में पावर प्लांट ने लौटाई आदिवासियों की जमीन

एमपी में शिवराज हैं थापर पर मेहरबान



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आदिवासियों के साथ अन्याय होने की बात पता चलते ही आदिवासियों के हितों में काम करना आरंभ कर दिया है। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कंवर के पुत्र संदीप द्वारा आदिवासियों की लगभग 14 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने पर जैसे ही शोर शराबा हुआ रमन सिंह के निर्देश पर जांजगीर चांपा जिला प्रशासन ने आनन फानन कड़े तेवर अपनाते हुए आदिवासियों की जमीन वापस करवा दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संदीप कंवर के नाम पर जिले के पांच आदिवासियों की चौदह एकड़ से अधिक जमीन का सौदा पचपन लाख रूपए में कर दिया गया था। इस ममाले में बवाल मचते ही आनन फानन में प्रशासन ने निर्णय लेते हुए आदिवासियों की जमीन लौटाने के निर्देश दे दिए।
इसके साथ ही साथ आदिवासियों ने वीडियोकोन कंपनी पर फर्जीवाड़े का आरोप चस्पा कर दिया। संघ के दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि चूंकि इस मामले संघ के कड़े तेवर थे इसलिए छग शासन के दबाव में जिला प्रशासन ने उक्त कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
बताया जाता है कि आदिवासियों को धोखे में रखकर उनकी बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री संदीप कंवर के नाम पर करवा दी गई थी। आदिवासियों को तयशुदा रकम भी नहीं मिल सकी। इसके उपरांत आदिवासियों ने जिला प्रशासन से शिकायत की जिसका कोई हल नहीं निकला। बाद में ‘उपरी दबाव‘ में प्रशासन ने कार्यवाही की।
विडम्बना ही कही जाएगी कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड के आदिवासियों, जल जंगल और जमीन को परोक्ष तौर पर दौलतमंद गौतम थापर के पास रहन रख दिया गया है और बावजूद इसके केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

आरवी गार्डनर का सख्त विरोध


आरवी गार्डनर का सख्त विरोध

(चन्द्रशेखर जोशी)

देहरादून (साई)। कांग्रेस द्वारा विधानसभा के 71 वें विधाय्ाक के रूप में एंग्लो इंडिय्ान सदस्य्ा को मनोनीत करने को आरवी गार्डनर की ताजपोशी की तैय्ाारी शुरू कर दी गय्ाी, उत्तराखण्ड की त्र्ािशंकु विधानसभा में मनोनीत विधाय्ाक की तैय्ाारी होते देख भाजपा की त्य्ाौरिय्ाां चढ गय्ाी है। राज्य्ा सरकार ने सदन में अपना बहुमत तक साबित नहीं कर पाई है और उससे पहले ही एंग्लो इंडिय्ान विधाय्ाक के मनोनय्ान को लेकर दबाव बनना शुरू हो गय्ाा हैं।
उत्तराखंड की विधानसभा का 71वां, मनोनीत विधाय्ाक बनने के लिए आरवी गार्डनर का नाम फाइनल माना जा रहा है। वहीं एंग्लो इंडिय्ान समुदाय्ा द्वारा आरवी गार्डनर के नाम का विरोध शुरू हो गय्ाा है, एंग्लो इंडिय्ान समुदाय्ा द्वारा कहा जा रहा है कि पिछली कांग्रेस सरकार में आरवी गार्डनर मनोनीत विधाय्ाक के रूप में उनका बेहद निराशाजनक कायर््ाकाल रहा, उनकी क्य्ाा उपलब्धिय्ाां रही, य्ाह सामने नहीं आ पाय्ाा है, 71वें मनोनीत विधाय्ाक के रूप में उनकी विधाय्ाक निधि तक खर्च नहीं हो पाय्ाी थी, और वह बेहद व्यस्त हैं, वह सिर्फ सामाजिक रूतबे के लिए विधाय्ाक बनना चाहते हैं, और उनके विद्यालय्ा ने समाज के लिए क्य्ाा किय्ाा, य्ाह भी राज्य्ा की जनता जानना चाहती है, ऐसे में अगर कांग्रेस ऐसे व्यक्ति को पुनः विधाय्ाक बनाना चाहती है तो इससे कांग्रेस की छवि पर असर पडेगा।
वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड विधानसभा के लिए मनोनीत होने वाले एंग्लो इंडिय्ान विधाय्ाक को लेकर कांग्रेस के रुख का भाजपा ने कड़ा विरोध किय्ाा है। भाजपा नेताओं ने राजभवन जाकर राज्य्ापाल के समक्ष य्ाह मामला उठाय्ाा। साथ ही पार्टी ने बहुमत साबित करने से पहले सरकार द्वारा किसी भी तरह के नीतिगत निर्णय्ा लेने पर भी आपत्ति जताई है।
भाजपा ने राज्य्ापाल के समक्ष य्ाह सवाल उठाय्ाा कि जब सरकार ने विश्वासमत ही हासिल नहीं किय्ाा है तो वह नीतिगत निर्णय्ा कैसे ले सकती है। श्री खंडूड़ी के मुताबिक, जानकारी मिली है कि कांग्रेस सरकार ने एंग्लो इंडिय्ान समुदाय्ा के सदस्य्ा के मनोनय्ान के लिए राजभवन को सिफारिश की है। भाजपा ने कहा कि संवैधानिक रूप से कोई सरकार है ही नहीं। य्ाह राष्ट्रपति शासन जैसी स्थिति है। मुख्य्ामंत्र्ाी के साथ एक भी कैबिनेट मंत्र्ाी होता तो तब य्ाह सरकार कही जाती। मुख्य्ामंत्र्ाी सदन के सदस्य्ा भी नहीं हैं। मंत्र्ािमडल के गठन और बहुमत साबित करने से पहले य्ाह सरकार नीतिगत निर्णय्ा कैसे ले सकती है।
दूसरी तरफ, राज्य्ा के कई स्वय्ांसेवी संगठनों की तरफ से एंग्लो इंडिय्ान समुदाय्ा के प्रतिनिधि के रूप में साइरिल आर रेफल का नाम भी चलाय्ाा जा रहा है। श्री रेफल के लिए बाकाय्ादा स्वय्ांसेवी संगठनों ने अभिय्ाान चलाय्ाा है
मनोनीत विधाय्ाक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्रपति चुनाव को छोड़कर सदन में मतविभाजन में उसे भी समान रूप से वोट देने का अधिकार है। वर्ष 2002 में बनी कांग्रेस की सरकार में पहली बार एंग्लो इंडिय्ान विधाय्ाक की व्य्ावस्था की गई थी। तब कांग्रेस ने आरवी गार्डनर को 71वें विधाय्ाक के तौर पर मनोनीत किय्ाा था। इस बार भी कांग्रेस की तरफ से श्री गार्डनर का नाम ही प्रस्तावित किए जाने की चर्चा है। कहा तो य्ाहां तक जा रहा है कि श्री गार्डनर का नाम कांग्रेस की तरफ से राजभवन को भेज दिय्ाा गय्ाा है। गार्डनर की दावेदारी को इसलिए भी पुख्ता माना जा रहा है क्य्ाोंकि उत्तराखंड में चुनावी नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेता विधाय्ाक दल चय्ान की पक्रिय्ाा के दौरान श्री गार्डनर केंद्रीय्ा पयर््ावेक्षक गुलाम नबी आजाद से मिल चुके हैं।
दूसरी तरफ, राज्य्ा के कई स्वय्ांसेवी संगठनों की तरफ से एंग्लो इंडिय्ान समुदाय्ा के पतिनिधि के रूप में साइरिल आर रेफल का नाम भी चलाय्ाा जा रहा है। श्री रेफल के लिए बाकाय्ादा स्वय्ांसेवी संगठनों ने अभिय्ाान चलाय्ाा है।

बसंतेय नवरात्र पर देवालयों की सुध ले जिला प्रशासन: इमरान


बसंतेय नवरात्र पर देवालयों की सुध ले जिला प्रशासन: इमरान

चेत्र शुक्ल प्रतिपदा पर देवालयों की साफ सफाई, प्रकाश और जल की व्यवस्था सुनिश्चित हो

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सनातन धर्म के नव वर्ष गुडी पड़वा पर जिले के हर देवालय विशेषकर माता के मंदिरों के आसपास साफ सफाई, प्रकाश, जल एवं सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। उक्ताशय की मांग नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल द्वारा जिला प्रशासन से की गई है। नगर कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता फिरोज खान के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में इमरान पटेल ने कहा है कि चेत्र शुक्ल प्रतिपदा शुक्रवार 23 मार्च को है।
इमरान पटेल ने आगे कहा कि चेत्र नवरात्र में सनातन धर्म के धर्मावलंबी विशेषकर महिलाएं सुबह सवेरे मुंह अंधेरे ही माता के मंदिरों में जल चढ़ाने और पूजन अर्चन के लिए नंगे पैर निकल जाती हैं। इमरान पटेल ने कहा कि शहर के देवालयों के आसपास गंदगी व्याप्त है, प्रकाश की उचित व्यवस्था के साथ ही साथ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि देवालयों के पहुंच मार्गों पर कम से कम नवरात्र तक पर्याप्त मात्रा में वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था और पर्याप्त मात्रा में पुलिस विशेषकर महिला पुलिस की तैनाती की जाए। देवालयों के उबड़ खबड़ पहुंच मार्गों में मुरम या मिट्टी डालकर उन्हें समतल किया जाए ताकि धर्मावलंबियों को पूजन अर्चन करने जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि नवरात्र के अवसर पर हिंदू धर्मावलंवियों द्वारा उपवास व्रत रखा जाता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन को हर देवालय के आसपास पेयजल, प्रकाश, साफ सफाई के साथ ही साथ सुरक्षा के विशेष इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं ताकि असमाजिक तत्वों द्वारा अपनी कारस्तानी न दिखाई जा सके।
नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल ने चेत्र नवरात्र और हिन्दू नववर्ष पर सभी जिला वासियों को शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की है।

सोमवार, 19 मार्च 2012

गहरा रहे हैं मनमोहन सरकार पर संकट के बादल


गहरा रहे हैं मनमोहन सरकार पर संकट के बादल

त्रणमूल के बाद डीएमके ने तरेरी आंखें



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने भले ही लंबी जद्दोजहद के बाद त्यागपत्र दे दिया हो पर केंद्र में कांग्रेसनीत संप्रग सरकार पर से संकट के बादल छटने के बजाए गहराते ही जा रहे हैं। त्रणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की प्रेशर टेक्टिस के बाद अब डीएमके ने भी केंद्र सरकार की कालर पकड़ने का मन बना लिया है। एनसीटीसी और श्रीलंका में तमिलों के हालात के मुद्दे पर केंद्र में अहम सहयोगी डीएमके सरकार से किनारा करने के मूड में है। डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के आवास पर पार्टी के आला नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में तय हुआ कि यदि केंद्र सरकार श्रीलंका में युद्ध अपराधों पर संयुक्घ्त राष्ट्र में प्रस्ताव का समर्थन नहीं करती है तो डीएमके के मंत्री सरकार से अलग हो जाएंगे।
डीएमके के सूत्रों के अनुसार एक ओर जहां डीएमके के अधिकतर नेता चाहते हैं कि मंगलवार को ही अपने मंत्रियों को मनमोहन सरकार से अलग कर लिया जाए और सरकार को बाहर से समर्थन देते रहें वहीं केंद्रीय मंत्री एम के अलागिरी और कुछ अन्य का मानना है कि इस तरह का कड़ा फैसला 23 मार्च के बाद ही लिया जाना चाहिए जब यूएन में प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है। उधर, डीएमके सांसद एम कनिमोझी ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी जिससे डीएमके अपने मंत्रियों को केंद्र से हटाने पर मजबूर हो जाए। डीएमके और तमिलनाडु में उसकी धुर विरोधी एआईडीएमके केंद्र सरकार से यूएन में प्रस्घ्ताव का समर्थन करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मसले पर अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है।
उधर, रेल किराए बढ़ाने को आधार बनाकर त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी के बहाने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने  का प्रयास जारी है। सूत्रों का कहना है कि इसी आधार पर ममता रेल बजट पास कराने के बहाने केंद्र सरकार से खाली खजाने वाले पश्चिम बंगाल के लिए केंद्र सरकार से खासा पैकेज झटकने में सफल हो सकतीं हैं।
देश में पहला मौका होगा जब रेल मंत्री ने बजट पेश करने के बाद उसके पारित हुए बिना ही अपने पद से त्यागपत्र दे दिया हो। उन्होंने कल नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि इस फैसले के बारे में वे तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी से बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने रेलवे के हित में कार्य करने का प्रयास किया। रेल मंत्री ने कहा कि सिपाही की तरह उन्हें पार्टी के अनुशासन का पालन करना चाहिए। उन्हें यही सिखाया गया है। वे तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी और पूरे मंत्रिमंडल सहित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने मुझे यह अवसर दिया। रेलवे की भलाई के लिए जितना वे कर सकता थे, उन्होंने किया।
त्रिवेदी ने राजधानी दिल्ली में स्थित अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि वे रेल मंत्रालय से चिपके रहना नहीं चाहते लेकिन वहां से भागना भी नहीं चाहते। प्रधानमंत्री को उस पर (त्यागपत्र) निर्णय करना है. मंत्रालय में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। रेलवे किसी की जागीर नहीं है। त्रिवेदी ने कहा कि ममता को यह लिखित में देना चाहिए कि उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए।
इस नाटकीय घटनाक्रम के उपरांत सुश्री ममता बनर्जी कल देर रात नई दिल्ली पहुंच गईं। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे आज तृणमूल कांग्रेस के सांसदों से मिलेंगी। वे राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर मतदान से पहले अपने सांसदों से मिल रही हैं। राष्घ्ट्रपति के धन्घ्यवाद प्रस्घ्ताव में संशोधन की मांग करने का प्रस्ताव बीजेपी ने पेश किया था, जिसे मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस ने भी इसी तरह का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे तकनीकी वजहों से खारिज कर दिया गया। ऐसे में अभी तक साफ नहीं है कि ममता की पार्टी यूपीए के खिलाफ वोट करेगी या नहीं।
गौरतलब है कि यह प्रचारित किया जा रहा है कि तृणमूल सुप्रीमो एनसीटीसी और रेल बजट में किराए में बढोतरी से बेहद नाराज हैं और आखिरकार उन्होंने अपनी ही पार्टी कोटे से रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा भी ले लिया है। अब सूत्रों के जरिए मीडिया में आई खबरों में कहा जा रहा है कि ममता की पार्टी मतदान के खिलाफ वोट नहीं करेगी। लेकिन उनकी पार्टी विरोध जताने के लिए मतदान का बहिष्कार कर सकती है।

रमन सिंह हैं आदिवासियों के सच्चे हितैषी


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  77

रमन सिंह हैं आदिवासियों के सच्चे हितैषी

आदिवासियों की जमीनें सुरक्षित करने की दिशा में भाजपा की सार्थक पहल



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। उद्योग के नाम पर देश भर में आदिवासियों की जमीन हथियाने वाले बड़े घरानों पर नकेल कसने के लिए छत्तीसगढ़ सूबे की रमन सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सुध लेना आरंभ किया है। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जमीन पर नगरें गड़ाए बैठे देश भर के बड़े औद्योगिक घरानों को रमन सरकार झटका देने के मूड में दिख रही है। इधर, भाजपा की ही शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार बड़े उद्योगपतियों के सामने घुटने टेककर आदिवासियों के हितों परा हेाता कुठाराघाट साफ देख रही है।
गौरतलब है कि देश भर में आदिवासियों की जमीनों को औने पौने दामों पर खरीदे जाने के उपरांत विद्रोह के स्वर स्थानीय स्तर पर प्रस्फुटित होने लगते हैं। चतुर सुजान उद्योगपतियों द्वारा स्थानीय स्वार्थी और धन लोलुप राजनैतिक दलों के नुमाईंदों और मीडिया के सामने कुछ टुकड़े डालकर इस विरोध के शमन का कुत्सित प्रयास किया जाता रहा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि संघ के निर्देश पर छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले साल गर्मियों में ही संभागायुक्तों को पाबंद किया था कि जिलेवार रिकार्ड खंगाले जाएं और आदिवासियों की जमीनें उन्हें वापस की जाएं। इसका पहला ही झटका पिछले साल जुलाई में वीडियोकोन समूह को लगा था।
सूत्रों की मानें तो छत्तीगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में वीडियोकोन पावर प्लांट के लिए जमीन की खरीदी प्रदेश के प्रदेश के गृह मंत्री ननकी राम कंवर के पुत्र संदीप के नाम पर ही करवा दी गई थी। संघ के निर्देश के उपरांत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कड़े दिशा निर्देश जारी करते हुए आदिवासियों की जमीनों को उन्हें लौटाने की कवायद आरंभ कर दी थी।
विडम्बना ही कही जाएगी कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड के आदिवासियों, जल जंगल और जमीन को परोक्ष तौर पर दौलतमंद गौतम थापर के पास रहन रख दिया गया है और बावजूद इसके केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

लोक बिल और सब्सिडी बिल पर सभी से चर्चा: मुखर्जी


लोक बिल और सब्सिडी बिल पर सभी से चर्चा: मुखर्जी

काले धन से निपटने आठ आयकर कार्यालय विदेशों में



(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के लोक वित्त और सब्सिडी बिल पर पड़ने वाले विपरीत असर की समस्या से निपटने के लिए सभी संबद्ध पक्षों से सलाह मशविरा कर फैसला लेगी। श्री मुखर्जी ने रविवार को नई दिल्ली में उद्योगपतियों के साथ बजट पश्चात बातचीत में उनसे आर्थिक विकास की गति तेज करने के लिए सहयोग देने को कहा।
उन्होंने कहा कि भारत पर भी यूरो जोन के संकट का असर पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल, अनिश्चितता की स्थिति और विकासशील देशों में कमजोर आर्थिक विकास का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विपरीत असर की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, राजनीतिक संगठनों और उद्योग जगत को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में लगातार बढ़ोतरी, कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय तक मंदी तथा काफी लंबे समय से विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि में अस्थिरता जैसे मामलों से सरकार राजनीतिक दलों, उद्योगों तथा सभी लोगों को एकसाथ मिलकर निपटने की जरूरत है। श्री मुखर्जी ने कहा कि कुछ राजनीतिक विवशताओं के कारण उन्हें बजट बनाने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ी है।
उधर, विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन की समस्या से निपटने के लिए विदेशों में आठ नये आयकर कार्यालय खोलने के वास्ते वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अगले वित्त वर्ष के बजट में आवंटन बढ़ाकर लगभग नौ गुणा करने का प्रस्ताव किया है। इस बजट में इसे १८ करोड़ बीस लाख रुपये कर दिया गया है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह दो करोड़ ४१ लाख रुपये था।
ये कार्यालय अमरीका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, साइप्रस, जमर्नी, फ्रांस, जापान और संयुक्त अरब अमीरात में खोले जाएंगे। ये, भारतीय कर कानूनों और प्रक्रियाओं को समझने में वहां के निवेशकों की  मदद करेंगे। इन कार्यालयों में वरिष्ठ आयकर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो अंतर्राष्ट्रीय कर संधियों और कर चोरी के मामलों के विशेषज्ञ होंगे। सिंगापुर और मॉरिशियस में दो हजार दस  से इस प्रकार का कार्यालय काम कर रहा है।

इंटरनेट के प्रति सरकार संजीदा


इंटरनेट के प्रति सरकार संजीदा

(यशवंत श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। सरकार ने दो हजार सत्रह तक १७ करोड़ ५० लाख और दो हजार बीस तक ६० करोड़ ब्रोडबैंड कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा है। ये कनेक्शन कम से कम दो मेगाबाइट्स प्रति सेकेण्ड की डाउंनलोड स्पीड पर दिये जायेंगे। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सचिन पायलट ने संसद में बताया  है कि दिसंबर दो हजार ग्यारह तक देश में कुल एक करोड़ ३३ लाख ५० हजार ब्रोडबैंड कनेक्शन दिये जा चुके थे। उन्होंने बताया कि गोवा और  महाराष्ट्र में सबसे अधिक २३ लाख ५५ हजार कनेक्शन दिये गये हैं। दस लाख १५ हजार कनेक्शनों के साथ दिल्ली का स्थान पांचवां है।