बुधवार, 19 जून 2013

पुलिया में गिरी कार: 2 की मौत!

पुलिया में गिरी कार: 2 की मौत!

(जुगल किशोर श्रीवास)

कुरई (साई)। कुरई से दो किलोमीटर की दरी पर ग्राम कोदाझिरी के पास एन.एच.7 में जर्जर स्थिति स्थित पुलिया जिसमें उपर दीवार भी नहीं है वाहन क्रासिंग एवं तेज रफ्तार के चलते मारूति कार क्र. एम.एच.31सी एस 6948 दोपहर लगभग 02 बजे 15 फिट नीचे पुलिया मे जा गिरी।

यह कार सिवनी से नागपुर की ओर जा रही थी। इसमें सवार दो पुरूष एवं एक महिला कार में दब गये थे। ग्रामवासियों एवं पुलिस की भारी मशक्त के बाद तीनों को निकाला गया जिसमें से सतीश पिता पदमसिंग आसर उम्र 70 वर्ष नागपुर निवासी मृत हो गया था। तथा घायल श्रीमति श्यामा बाई पति सतीश आसर उम्र 65 वर्ष एवं सिरिस पाण्डेय उम्र 45 वर्ष को तत्काल संजीवनी 108 में  सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुरई से प्राथमिक के बाद सिवनी रिफर कर दिया गया। जहां श्रीमति श्यामा बाई आसर की मृत्यु हो गई। घायल सिरिस पाण्डेय का इलाज चल रहा है। एन.एच.7 की लापरवाही है कि ऐसी जर्जर पुलिया पर ना तो दीवार है और ना ही कोई संकेत है। भविष्य में फिर इसमें दुर्घटना हो सकती है।

शराब के पैसे से स्वागत की बात पर अण्णा नाराज

शराब के पैसे से स्वागत की बात पर अण्णा ना
राज

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। प्रख्यात समाजसेवी अण्णा हजारे का स्वागत शराब के पैसों से किया जाएगा की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर उछली वैसे ही देश भर में यह खबर आग की तरह फैल गई। इस संबंध में अण्णा हजारे को जब आवगत कराया गया तो उन्होंन ेअपनी तल्ख नाराजगी इस पर जाहिर की।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के महाराष्ट्र ब्यूरो से अतुल खरे ने बताया कि अण्णा के रालेगण सिद्धि स्थित गृह ग्राम में इस खबर की खासी प्रतिक्रिया रही। अण्णा के करीबी इस खबर से बेहद खफा बताए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में अण्णा का स्वागत शराब के पैसे से किया जाएगा।

साई न्यूज ब्यूरो अतुल खरे ने अण्णा के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि अण्णा को यह बात नागवार गुजर रही है कि शराब के करोबारियों को उनके स्वागत में आगे किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि अण्णा ने देश भर में शराब बंदी का मन बनाया हुआ है और वे अगले चुनावों में शराब के कारोबारियों को अपने आप से कतई नहीं जुड़ने देंगे।

लूघरवाड़ा के लॉन बंद कराने की मांग उठी!

लूघरवाड़ा के लॉन बंद कराने की मांग उठी!

ग्राम पंचायत हुई लान के विरूद्ध: विषाक्त भोजन से पांच गौवंश के मरने की खबर

(जितेश अवधवाल)

सिवनी (साई)। शहरी सीमा से लगे ग्राम लूघरवाड़ा में संचालित होने वाले तीन लॉन्स को बंद कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। ग्राम पंचायत लूघरवाड़ा के पंच और स्थानीय निवासियों के पुरजोर विरोध को देखकर लग रहा है कि जिला प्रशासन इस दिशा में जल्द ही कोई कदम उठा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले दिनों इन लॉन में आयोजित समारोहों में जूठन को बाहर फेंक दिया जाता है। पिछले दिनों सुदर्शन बघेल की तीन गाय, ईमान सिंह की एक और मेहतर यादव की एक गाय काल कलवित हो चुकी है। जिससे ग्राम में लान संचालकों के प्रति रोष और असंतोष का वातावरण बनने लगा है।
ज्ञातव्य है कि पूर्व में लूघरवाड़ा ग्राम के अनेक नागरिकों के हस्ताक्षर से युक्त एक लिखित शिकायत लूघरवाड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को 17 जनवरी को प्रेषित की गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत लूघरवाड़ा द्वारा भी इन लान को बंद कराने हेतु कलेक्टर को पत्र लिखा गया था।
हिन्द गजट कार्यालय को लूघरवाड़ा ग्राम पंचायत के लोगों द्वारा उपलब्ध कराई गई शिकायत की प्रति में लूघरवाड़ा ग्राम पंचायत द्वारा जिला कलेक्टर को 25 अप्रेल को लिखे पत्र क्रमांक 11 / ग्रा.पंचा. / लूघरवाड़ा / 2013 में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि 14 अप्रेल को ग्राम सभा की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया है कि लूघरवाड़ा में संचालित रजवाड़ा लान, गुरू कृपा लान औश्र दादा वाड़ी लान को बंद किया जाए।
लूघरवाड़ा की सरपंच श्रीमति सावित्री विश्वकर्मा एवं सचिव के हस्ताक्षरों से जारी इस पत्र में कहा गया है कि वैधानिक तरीके से प्रक्रिया पूर्ण किए बिना तीनों लान का संचालन किया जा रहा है। पत्र में आरोप लगाए गए हैं कि इससे ग्राम की शांति व्यवस्था भंग हो रही है साथ ही साथ समारोहों के दौरान आवागमन भी पूरी तरह बाधित हो जाता है।
समारोहों में बजने वाले साउंड सिस्टम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में खलल उतपन्न होता है और गांव के पशु खराब भोजन, पालीथिन, डिस्पोजेबल आदि खाकर बीमार पड़ रहे हैं, एवं कुछ की तो मृत्यु तक हो जाती है। सरपंच सचिव के हस्ताक्षरों से युक्त इस पत्र में जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह बात भी लाई गई है कि आए दिन विवाह एवं अन्य समारोहों में उपस्थित लोगों और असमाजिक तत्वों द्वारा शराब पीकर झगड़े झांसे, गाली गलौच, मारपीट कर गांव का वातावरण दूषित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के साथ कभी भी किसी गलत घटना के घटने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इस आवेदन की प्रति ग्राम पंचायत लूघरवाड़ा द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सिवनी शहर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को भी प्रेषित की गई थी।

(क्रमशः जारी)

ठेकेदारों, शराब व्यवसाईयों के कारिंदों के चरित्र सत्यापन की मांग की प्रदीप ने

ठेकेदारों, शराब व्यवसाईयों के कारिंदों के चरित्र सत्यापन की मांग की प्रदीप ने

(गोपाल शर्मा)

सिवनी (साई)। जिले में चल रहे निर्माण कार्यों, झाबुआ पावर प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों, शराब व्यवसाईयों के पास काम करने वालों और सड़क किनारे जहां तहां बैठकर पंचर सुधारने वाले कारिंदों का चरित्र सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
जिला कलेक्टरेट के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उक्ताशय की मांग जिला सतर्कता एवं मानिटरिंग समिति की बैठक में युवा नेता प्रदीप पटेल द्वारा की गई। 29 मई को जिला कलेक्टरेट में संपन्न बैठक जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा की गई थी में जिला कलेक्टर द्वारा समिति के सदस्यों से सुझाव चाले जाने पर समिति के सदस्य और लखनादौन विधायक के प्रतिनिधि प्रदीप पटेल द्वारा झाबुआ पावर प्लांट कार्यों से जुड़ी संस्थाएं (टीसीआईएल), एनएच सात के निर्माण कार्यों में लगी एजेंसी, शराब व्यापारियों के यहां कार्यरत कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन किया जाए।
सूत्रों ने आगे कहा कि इसके साथ ही साथ लखनादौन विधायक प्रतिनिधि प्रदीप पटेल द्वारा सिवनी जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्य मार्गों पर टायर वर्क्स की दुकानें संचालित करने वाले व्यक्तियों जो विशेषकर अन्य राज्यों से आते हैं का चरित्र सत्यापन की मांग की गई।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि श्री पटेल की इस मांग का समिति के अन्य सदस्य तेईसिंह उइके एवं बिसन सिंह परतेती द्वारा किया जाकर बताया गया कि धनोरा, घंसौर एवं केवलारी में शराब व्यापारियों द्वारा गाड़ियों में शराब की पेटियां भरकर गांव में बेची जा रही हैं। ज्ञातव्य है कि घंसौर में मासूम गुडिया के साथ हाल ही में दुष्कर्म हुआ था और दुष्कर्म का आरोपी झाबुआ पावर प्लांट का कर्मचारी था, जिसका पुलिस वेरीफिकेशन नहीं किया गया था।
सूत्रों के अनुसार जिला कलेक्टर ने समिति के सदस्यों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जिले भर में विशेषकर लखनादौन, धूमा, कुरई, घंसौर एवं धनोरा से जुड़े ठेकेदारों के स्टाफ का चारित्रिक रिकार्ड संबंधित थाना स्तर पर संधारित किया जाए।

सूत्रों का कहना है कि अवैध शराब के बिकने पर जिला कलेक्टर भरत यादव काफी नाराज हुए और जिला कलेक्टर ने यह आदेश दिया कि जिले के सभी अंचलों में अवैध रूप से शराब बेचने वालों पर दबिश डालकर इनको घेरने के लिए पुलिस एवं आबकारी विभाग संयुक्त अभियान चलाए और धरपकड़ की कार्यवाही करे।

नकली खाद बीज और किसान!

नकली खाद बीज और किसान!

(शरद खरे)

किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है इस बात को आजादी के पहले से नेता कहते आए हैं। किसान असली अन्नदाता है। अगर किसान मेहनत करना छोड़ दे तो लोग भूखे मर जाएं। किसानों की बदहाली भी आजादी के उपरांत किसी से छिपी नहीं है। किसानों की दुर्दशा पर आंसू बहाने की फुर्सत किसी को नहीं है। किसानों के हित की बातें राजनेताओं के भाषणों में तो स्थान पा जाती हैं, पर जब अमली जामा पहनाने की बारी आती है तो मामला ठंडे बस्ते के हवाले हो जाता है।
सिवनी जिले में नकली खाद बीज बिकने की खबरें सालों से सुनी जाती रही हैं। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि प्रदेश सरकार की ओर से नकली खाद बीज रोकने की जवाबदेही जिन सरकारी अमलों पर आहूत होती है उन्हीं के द्वारा नकली खाद बीज प्रदाय किया जाए।
पिछले दिनों छपारा में नकली खाद बीज बिकने की खबर आई वह भी सरकारी सिस्टम से। जैसे ही यह बात सामने आई वैसे ही देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ किसान की रूह कांप गई। अगर बीज ही नकली और घटिया क्वालिटी का होगा तो भला किसान को उपज का पूरा पैसा कैसे मिल सकेगा?
अधिवक्ता किसान अजय बाबा पाण्डे ने बीज विकास निगम के द्वारा बांटे जा रहे खाद के बोरों में टेग नहीं होना पाया गया। उन्होंने जब इस संबंध में वहां के प्रभारी श्री मांझी से संपर्क किया तो पता चला कि लिखा पढ़ी के लिए किसानों के खाद के बोरों से टैग निकाल लिए गए हैं।
जब अधिवक्ता किसान बाबा पाण्डे ने इस संबंध में गहरी छानबीन की और 44 बैग में टैग नहीं पाए तो उन्होंने पुनः श्री मांझी से कहा कि श्री मांझी के पास महज 12 टैग हैं और बाकी के 44 कहां गए? यह बात सच है कि अगर लिखा पढ़ी के लिए टैग निकाल लिए गए थे तो बाकी के टैग भी वहां होना चाहिए था।
इसी तरह एक अन्य किसान संतोष सिसोदिया ने बीज विकास निगम से जब 8 बोरी खरीदी और उसमें टैग नहीं पाए गए तो उन्होंने इसकी शिकायत की। कैश मेमो में भी बीज का लाट नंबर नहीं डाला गया था। इससे साफ हो जाता है कि कहीं ना कहीं दला में काला नहीं वरन यह तो दाल ही काली है।
शिकायतें यह भी हैं कि एफ वन क्वालिटी की गुणवत्ता वाले बीजों के स्थान पर एफ टू क्वालिटी की गुणवत्ता के बीच किसानों को बांटे जा रहे हैं। किसानों को बीज की क्वालिटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है पर अधिकारी जो इसके विशेषज्ञ हैं वे तो हर बात से वाकिफ हैं, फिर आखिर इस धांधली को कैसे अंजाम दिया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि सालों से किसानों को सरकारी नुमाईंदे छलते आ रहे हैं। किसानों का हक मारा जा रहा है और जिला प्रशासन भी मूक दर्शक बना ही बैठा है। वैसे यह बात संतोषजनक मानी जाएगी कि युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर इसे रोकने की बात कही है।
जिला कलेक्टर खुद तो एक एक सौसायटी में जाकर इसे देख नहीं सकते हैं। इसे देखने का काम तो जमीनी स्तर के अधिकारी कर्मचारियों को ही करना है। पर जब सारे कुंए में ही भांग धुली हो तो किया भी क्या जा सकता है। कलेक्टर के अधीन अनुविभागीय दण्डाधिकारी होते हैं।
एसडीएम के पास काम का बोझ होता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु एसडीएम के मातहत तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी आदि तो इस काम को अंजाम दे सकते हैं, पर वे भी नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहे हैं मानो कुछ हुआ ही नहीं हो।
सुरसा की तरह बढ़ती मंहगाई के चलते किसानों की कमर पहले से ही टूटी पड़ी है। किसान किसी तरह जोड़ तगाड़ कर अपना घर चलाते हुए पैदावार बढ़ाने का जतन कर रहे हैं। किसानों को पानी के अभाव का सामना करना पड़ता है उपर से दूबरे पर दो असाढ़ की कहावत चरितार्थ कर उन्हें नकली खाद और बीज टिकाया जाए तो उनकी पैदावार कैसे बढ़ेगी?
वैसे भी किसानों का ज्यादातर पैसा साहूकारों की तिजोरियों में ही ब्याज भरते भरते चला जाता है। प्राकृतिक आपदाएं भी किसानों की रीढ़ तोड़कर रख देती हैं। आपदाओं के चलते शासन द्वारा तय की जाने वाली आनावारी भी किसानों के बीच की लागत तक नहीं निकाल पाती है। इन परिस्थितियों में किसान आखिर जाए तो जाए कहां?
एक ओर तो प्रदेश और केंद्र सरकार अपने बड़े बड़े विज्ञापनों में अपने आप को किसान हितैषी बताने से नहीं चूक रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनके ही कारिंदे अगर थाली में छेद पर अमादा हैं तो फिर गल्ति तो निश्चित तौर पर निजामों की ही मानी जाएगी, क्योंकि उनके राज में कसावट का अभाव है।
बहरहाल, किसानों के साथ सिवनी जिले में होने वाले इस छल के लिए जवाबदेह अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन समयसीमा में कठोर कार्यवाही करे ताकि आने वाले समय में कोई भी सरकारी नुमाईंदा किसानों को छलने की बात सपने में भी ना सोच सके।

मंगलवार, 18 जून 2013

वेतन के लाले हैं आयुष कर्मचारियों को

वेतन के लाले हैं आयुष कर्मचारियों को

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। जिले में जिला आयुष अधिकारी की मनमानी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर आयुष विभाग के कर्मचारियों का मई माह का वेतन आज तक नहीं निकल सका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला आयुष अधिकारी डॉ.एस.डी.गर्ग को प्रभार तो मिल गया है किन्तु आहरण वितरण अधिकार उनके पास ना होने से कर्मचारियों का वेतन अब तक नहीं निकल सका है।
जिला कलेक्टरेट के सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में एक नोटशीट जिला कलेक्टर कार्यालय में चल रही थी, जिस पर आज यह आदेश किए गए हैं कि जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के आहरण वितरण अधिकार उप जिलाध्यक्ष सुनीता खण्डाईत को दिए गए हैं।
संभवतः वे एक दो दिन में जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के आहरण वितरण अधिकार प्राप्त करेंगी, जिसके उपरांत इस कार्यालय में कर्मचारियों के देयक बनाए जाकर जिला कोषालय भेजे जाएंगे। माना जा रहा है कि अगले सोमवार तक जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों को वेतन प्राप्त हो सकता है।
0 अस्पताल में नहीं चिकित्सक
जिला आयुष अधिकारी का पदभार ग्रहण करने के उपरांत जिला चिकित्सालय की आयुष विंग सूनी ही नजर आ रही है। चिकित्सालय में ना तो कोई चिकित्सक ही अपनी सेवाएं दे रहा है और ना ही अन्य कर्मचारी।
बताया जाता है कि अपनी शिकायत से आजिज आकर डॉ.गर्ग ने जिला चिकित्सालय से आयुष विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों को वापस बुलवा लिया है।
0 भटक रहे हैं पैंशनर्स
जिला चिकित्साालय में आर्युवेद पर भरोसा करने वाले पेंशनर्स को इससे सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है। पैंशनर्स आयुष विभाग में जाते हैं तो ना तो उन्हें देखने के लिए कोई चिकित्सक वहां मौजूद रहता है और ना ही उन्हें आर्युवेदिक दवाएं ही मुहैया हो पा रही हैं।

जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि इस दिशा में शीध्र ही उचित कार्यवाही सुनिश्चित करे।

नाथ के स्वागत से गायब रहे हुकुम व दरबार

नाथ के स्वागत से गायब रहे हुकुम व दरबार

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय संसदीय कार्य और शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के सिवनी आगमन पर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री और घंसौर क्षेत्र में हुकुम के नाम से मशहूर कुंवर शक्ति सिंह एवं लखनादौन नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय की अनुपस्थिति ने लोगों को चौंका दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में परिवर्तन यात्रा का आगाज करने आए केेंद्रीय मंत्री कमल नाथ, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांति लाल भूरिया एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के द्वारा स्थानीय महावीर लान में एक कार्यक्रम रखा गया था।
बताया जाता है कि इस कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के अंदर व्याप्त विभिन्न धड़ों ने अपना असहयोग साफ तौर पर दर्शाया। एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार (हिन्द गजट नहीं) के अनुसार कमल नाथ के सिवनी कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर लखनादौन में कांग्रेस की बैठक में दिनेश राय ने शिरकत कर चौंका दिया। माना जा रहा था कि दिनेश राय 13 जून को कमल नाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे।
इस दिन लखनादौन घंसौर क्षेत्र से कांग्रेस के कार्यकर्ता तो उपस्थित हुए किन्तु इसमें कुंवर शक्ति सिंह के समर्थकों का टोटा साफ दिखाई पड़ा। कांग्रेस के खेमे में व्याप्त चर्चाओं को अगर सही माना जाए तो कुंवर शक्ति सिंह का अब कांग्रेस से मन भर चुका है।
वहीं पिछले कुछ दिनों से कुंवर शक्ति सिंह के भाजपा में जाने, केवलारी से दावेदारी पेश करने की खबरें आम हो रही थीं। माना जा रहा है कि कल तक कांग्रेस के कद्दावर नेता ठाकुर हरवंश सिंह की उंगली पकड़कर राजनीति के बियावान में राजनीति का ककहरा सीखने वाले कुंवर शक्ति सिंह उनके जाते ही अब कांग्रेस को ही आंखें दिखाने लगे हैं।
केवलारी से टिकिट की दावेदारी की खबरो ंने लोगों को चौंका दिया है। कांग्रेस में चल रही चर्चाओं के अनुसार हरवंश सिंह के अवसान के साथ ही कुंवर शक्ति सिंह के बारे में केवलारी की टिकिट मांगने की खबरें आना इस बात का घोतक है कि अब वे राजनीश सिंह पर दबाव बनाकर अन्य कहीं से टिकिट की दावेदारी करने जा रहे हैं।

कहा तो यह भी जा रहा है कि कुंवर शक्ति सिंह अब प्रेशर टेक्टिस अपनाकर कांग्रेस पर जमकर दबाव बना रहे हैं ताकि उन्हें जबलपुर जिले की सिवनी से लगी किसी सीट से कांग्रेस का टिकिट मिल सके।

मूत्रालय, शौचालय को तरसता शहर!

मूत्रालय, शौचालय को तरसता शहर!

(शरद खरे)

यह वाकई दुखद और निराशाजनक ही कहा जाएगा कि सिवनी शहर में सार्वजनिक स्तर पर ना तो मूत्रालय ना ही शौचालय ही हैं। नगर पालिका प्रशासन का यह दायित्व है कि वह नगर के लोगों को कम से कम जरूरी सुविधाएं तो उपलब्ध करवाए। नगर पालिका प्रशासन की हठधर्मिता के चलते दलसागर के मुहाने पर विसर्जन घाट पर अधबने शौचालय पर भी स्टे दे दिया गया है।
सिवनी शहर में कहने को तो बस स्टेंड के अंदर राज्य परिवहन का सुलभ शौचालय है। निजी बस स्टेंड पर सुलभ शौचालय है। बुधवारी बाजार में सिर्फ मूत्रालय है जिसे भी तोड़ने के षणयंत्र का ताना बाना बुना गया था। पुराने शौचालय जिन्हें चालू भाषा में बम पोलस भी कहा जाता था, एक दो जगह हैं पर दुर्गंध और गंदगी से बजबजा ही रहे हैं।
शहर की आबादी में इजाफा हुआ है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लोगों को साफ सफाई, पानी, प्रकाश सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। इसके साथ ही साथ सुलभ शौचालय की तो सबसे अधिक जरूरत है, पर इस ओर ध्यान देना किसी ने मुनासिब नहीं समझा है।
ऐसा नहीं है कि पार्षदों से उनके वार्ड की दुरावस्था छिपी हुई है। पार्षद भी अपने अपने वार्ड में विकास कार्य के नाम पर सिर्फ निर्माण कार्य ही करवाना चाहते हैं। ये निर्माण कार्य कितनी गुणवत्ता के होते हैं यह बात भी सभी जानते हैं। इसमें कमीशन का गंदा खेल भी किसी से छिपा नहीं हैं।
मूत्र विसर्जन और विष्ठा विसर्जन किसी के बस में नहीं है। कोई भी शौच या मूत्र को अधिक देर तक नहीं रोक सकता है। इन दोनों ही के निष्पादन के लिए उसे एक स्थान की आवश्यक्ता होती है। घरों में शौचालय या बाथरूम का उपयोग चौबीस घंटे में महज दस से पंद्रह मिनिट के लिए होता है पर घरों के निर्माण के समय इनकी अनदेखी नहीं की जाती है।
ठीक इसी तरह शहर के विकास के लिए मल त्यागने या मूत्र विसर्जन के लिए स्थान सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। सड़कों किनारे लोग पाखाना करते अलह सुब्बह दिख जाते हैं। सड़कों पर पड़ी मल की गंदगी दिन भर आने जाने वालों को परेशान ही किया करती है।
सिवनी में मूत्रालय की आवश्यकता सबसे अधिक है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण जनपद पंचायत और टेलीफोन एक्सचेंज के बीच की गली में देखा जा सकता हैै। इस गली से होकर शहर की शालाओं के विद्यार्थी विशेषकर छात्राएं बहुतायत में गुजरती हैं। मिशन शाला, गणेश चौक, कचहरी चौक, दलसागर के आसपास मूत्रालय ना होने से यह गली अब ‘‘पेशाब वाली गलीके नाम से पहचानी जाने लगी है जो नगर पालिका प्रशासन के मुंह पर तमाचे से कम नहीं है।
कुछ साल पहले हरे पीले रंग के प्लास्टिक के मूत्रालय नगर पालिका परिषद द्वारा खरीदे गए थे। गुणवत्ता विहीन इन डब्बों ने कुछ ही माह में दम तोड़ दिया। अब ये कहां हैं किसी को पता नहीं है। इसके परिणाम स्वरूप लोगों को दीर्घ या लघु शंका के लिए स्थान ढूंढना पड़ता है।
सिवनी शहर को काम्प्लेक्स या दुकानों का शहर बना दिया गया है यह बात भी जगजाहिर ही है। शहर में मकान कम दुकानें बहुतायत में है। कमोबेश हर घर में एक शटर लगा दिखाई दे जाता है। पता नहीं नगर पालिका की नजरों से ये बचे हुए कैसे हैं अब तक।
युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव अगर शहर के समस्त शापिंग काम्प्लेक्स का अवलोकन कर लें तो वे पाएंगे कि शहर में किसी भी काम्प्लेक्स में (स्मृति धर्मशाला को छोड़कर) ना तो पार्किंग की सुविधा है, ना ही आवागमन के लिए कारीडोर की और ना ही मूत्रालय वहां है।
शहर के मुख्य बाजार बुधवारी में मूत्रालय का अभाव साफ दिखाई पड़ता है। बुधवारी में नगर पालिका के काम्प्लेक्स के मूत्रालय पर विदेशी शराब दुकान का कब्जा है, तो बारापत्थर के काम्प्लेक्स में मूत्रालय ना होने से अस्पताल के आसपास लोग लघुशंका करने पर विवश हैं।
शहर में महिलाओं के लिए प्रथक से मूत्रालय की व्यवस्था ना होने से महिलाओं विशेषकर ग्रामीण अंचलों से आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुरूष वर्ग तो निस्तार के लिए कहीं भी खड़े हो जाते हैं पर महिलाओं की पीड़ा को आखिर कौन समझेगा? महिला संगठन, नगर पालिका की महिला पार्षद भी इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझती हैं।

युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव से अपेक्षा है कि शहर में मूत्रालय और शौचालयों की कमी को गंभीरता से लेते हुए शहर में इनकी व्यवस्था सुनिश्चित करवाने के लिए नगर पालिका प्रशासन को निर्देशित करें। साथ ही साथ इनके निर्माण में इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाए कि इनके निर्माण के चलते कहीं आवागमन, जनभावनाएं, धार्मिक भावनाएं आहत ना हों।

सोमवार, 17 जून 2013

किसानों को टिकाया जा रहा घटिया खाद बीज

किसानों को टिकाया जा रहा घटिया खाद बीज

बीज विकास निगम कर रहा किसानों के साथ जमकर छलावा

(गजेंद्र ठाकुर)

छपारा (साई)। बीज विकास निगम द्वारा छपारा क्षेत्र में किसानों के साथ जमकर छल किया जा रहा है। किसानों को गुणवत्ता विहीन खाद बीज, बिना टेग लगी खाद की बोरियां, एफ वन के स्थान पर एफ टू क्वालिटी का बीज देने की अनेक शिकायतें प्रकाश में आई हैं।
क्षेत्र मे वर्षो से संचालित कृषि फार्म बीज निगम जहां किसानों का उच्च गुणवत्ता का उत्पादित अनाज खरीदा जाता है जिसकी ग्रेडिंग के पश्चात बीज को उच्चकोटी का बनाकर व उसकी अंकुरण क्षमता का परीक्षण करवा कर किसानों को बेचा जाता है लेकिन छपारा के बीज निगम मे लगे अधिकारी कर्मचारी किसानों के साथ खिलवाड कर रहे है। निगम के अधिकारी घटिया किस्म के बीज को आधार प्रमाड़ित बीज बता कर अधिक मुल्य पर बेच रहे है।
अधिवक्ता किसान ने पकड़ी चोरी
अधिवक्ता किसान अजय बाबा पाण्डे ने बीते दिवस छपारा में अधिकारियों को गुणवत्ता विहीन खाद बीज देते हुए पकड़ा। जब बाबा पाण्डे स्वयं खाद बीज लेने पहुंचे तो वहां किसानों ने उनसे शिकायत की कि उन्हें बिना टेग लगी खाद की बोरी दी जा रही है। इस पर उन्होंने वहां उपस्थित अधिकारी श्री मांझी से इसकी शिकायत की तो श्री मांझी ने उन्हे बताया कि किसानों के खाद के बैग से टेग लिखापढ़ी पूरी करने के लिए निकाल लिया जाता है।
श्री पाण्डे द्वारा मौके पर श्री मांझी के पास महज 12 टेग पाए गए, जबकि 44 टेग गायब थे। श्री पाण्डे ने इनका हिसाब मांगा। श्री मांझी ने कहा कि वे किसानों के पास हो सकते हैं। तब श्री पाण्डे ने कहा कि अगर 44 टेग किसानों के पास हैं तो श्री मांझी ने अपने पास महज 12 टेग लिखा पढ़ी के लिए क्यों रखे हैं। इसका जवाब श्री मांझी के पास नहीं था।
किसान ने की शिकायत
शनिवार को कृषक संतोष सिसोदिया खरीफ सीजन के लिये सोयाबीन बीज को खरीदने के लिये बीज निगम गया जहां  उसने 8 बोरी बारह हजार छःसौ छियत्तर रूपये में खरीदा। जब किसान ने बीज के बैग को बीज निगम से उठा लाया तब उसने बैग मे देखा तो उसमे प्रमाणित सफेद टेग नही लगा था और ना ही मैटल सील लगी थी। जब खरीदे गये कैस मेमो को देखा गया तो उसमे भी बीज का लाट नम्बर नही डाला गया था। जो यह साबित करता है कि बीज निगम मे अधिकारी वर्ग घटिया बीज बेच कर किसानों को बर्बाद करने मे तुले है।
वर्षो से चल रहा था खेल
छपारा तहसील क्षे़त्र के किसान वर्षों से बीज निगम से बीज खरीद रहे हैं। लेकिन किसानो ने कभी गंभीरता से इन सब बातों को नही देखा क्योंकि बीज निगम मे ग्रेडिंग मशीन से बीज को साफ कर बनाया जाता है और यहां ही बीज के बैग तैयार होते हैं। जिसमें अधिकारी कितनी मात्रा मे सैकंेड का बीज किसानों को बेच रहे है यह तो वे ही जानते है बेचारा किसाना शासन की ईकाई होने से बीज निगम पर भरोसा कर बीज खरीद लेता है और खेत मे बीज अंकुरित नही हुआ या कम हुआ तो किसान भगवान व प्रकृति को दोष देता है कि अधिक पानी गिर जाने से या अंकुर के समय तेज धूप निकल जाने से बीज अंकुरित नही हुआ। जबकि असल बात घटिया बीज की होती है जिसे प्रमाणित नही किया जा सकता इस लिये किसानो को जागरूक होने की जरूरत है।
बनाया गया पंचनामा
जब इस मामले कि शिकायत विभाग के बडे अधिकारियों को की गयी तो अधिकारियों ने एसडीओ एस.एल.नाईक लखनादौन एंव वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बीएल परते को को मामले की जांच करने के निर्देश दिये। जिसके आधार पर अधिकारियों ने मौके पर खरीदे गये बीज का निरीक्षण किया जांच मे बीज के बेगो पर सफेद रंग का टेग लगा होना चाहिए जो नही लगा था। और धातु की कोई सील पैकिंग धागा मे नही लगी पायी गयी।
साथ ही कैश मेमों क्र0 0440 दिनांक 15 जून मे लाट नम्बर भी अंिकंत नही था जिससे साफ जाहिर होता है कि बीज निगम के कर्मचारी फैल लाट जो बीज निगम मे रखा है उसको ही बीज बनाकर बेच रहे है इस तरह जांच अधिकारियों ने बीज निगम की गोदाम मे जाकर निरीक्षण भी किया जिसमे निगम के प्रभारी अधिकारी ने उक्त बीज के लाट के बारे मे जानकारी नही दिया। इस तरह पंचानाम मे निगम को निर्देशित किया गया कि उक्त संबंध मे जानकारी उपलब्ध करायी जाये।

मैने भी 10 बोरी सोयाबीन बीज निगम से खरीदा है लेकिन उसमे सफेद कागज और धातु की कोई सील नही लगी है कागज मे क्या लिखा है देख कर बता पाउंगा।
रगंलाल धुर्वे जनपद अध्यक्ष एंव कृषक

मैने बीज निगम से 8 बैग खरीदा है बैग मे तो आधार प्रमाणित हाथ की सियाही से लिखा है, लेकिन सफेद टेग व धातु सील नही लगी है। साथ ही बीज को निकाल कर देखा गया तो वह घटिया किस्म का पाया गया है। निगम के अधिकारी लाभ कमाने के लिये ऐसा कर रहे है।
संतोष सिसोदिया कृषक

मेरे पास शिकायत आई थी, जिस पर मैने एसडीओ व स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी को निर्देश कर जांच करवाया है। जांच रिर्पोट मेरे पास नही आयी है, जैसे ही जांच रिर्पोट आती है निगम को नोटिस देकर पुछा जायेगा नही तो आवश्यक कार्यवाही की जावेगी।
एस.आर.धुर्वे उपसंचालक कृषि विभाग सिवनी

शिकायत के आधार पर मौका निरीक्षण कर पंचनामा बनाया गया है आगामी कार्यवाही वरिष्ठ अधिकारी करंेगे।

बी.एल.परते वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी छपारा

शराब विरोध अण्णा का स्वागत होगा शराब के पैसों से!

शराब विरोध अण्णा का स्वागत होगा शराब के पैसों से!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। गांधी वादी समाज सेवी अण्ण हजारे ने भले ही महाराष्ट्र के अपने गृह ग्राम रालेगण सिद्धि में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया हो पर सिवनी में उनके स्वागत की तैयारियों में शराब के पैसों के इस्तेमाल की चर्चाएं आरंभ हो गई हैं।
शहर में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार 8 जुलाई को अण्णा हजारे का सिवनी आने का कार्यक्रम तय किया गया है। इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने अण्णा के समर्थकों की फौज सिवनी में सक्रिय हो चुकी है।
चर्चा है कि अण्णा की इस सभा के लिए एक बड़बोले नेता जो शराब व्यवसाय में लिप्त हैं ने अचानक ही अपनी सक्रियता दिखाना आरंभ कर दिया है। एक ओर तो अण्णा हजारे शराब के कारोबार को समाप्त करने पर आमदा हैं, इसका उदहारण उनके गृह ग्राम की शराब वेदी से मिल जाता है।

वहीं, दूसरी ओर शराब के पैसों से अण्णा हजारे के स्वागत की तैयारियों की चर्चाएं भी शहर में तेज हो गई हैं, जिसकी प्रतिक्रियाएं बहुत अच्छी नहीं कही जा रही हैं।

गौर का फूंका पुतला: आज रखेंगे प्रतिष्ठान बंद

गौर का फूंका पुतला: आज रखेंगे प्रतिष्ठान बंद

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। मप्र शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा सिंधी समाज के द्वारा दिये गये आपत्तिजनक बयान को लेकर पूरे प्रदेश के सिंधी समाज में आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते आज नगरपालिका के सामने सिवनी के सिंधी समाज के लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए बाबूलाल पुतला दहन किया।
स्थानीय सिंधी समाज द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में उक्ताशय की बात कहते हुए कहा गया है कि प्रदेश के स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर की मति भ्रष्ट हो गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सिंधी समाज के सदस्य सोमवार 17 जून को नगर में अपने अपने प्रतिष्ठान विरोध स्वरूप एक बजे तक बंद रखेंगे।
इसके अलावा सोमवार 17 जून को अपरान्ह बारह बजे पूज्य सिंधी पंचायत की अगुआई में सिंधी समाज द्वारा महामहिम राज्यपाल राम नरेश यादव एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाकर बाबू लाल गौर को प्रदेश कैबनेट से हटाने की मांग की जाएगी।
पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा सिंधी समाज के समस्त सामाजिक व्यवसाईयों के साथ ही साथ अन्य व्यापारी बंधुओं से भी सहयोग की अपील की है।
पुतला दहन करने वालों में प्रमुख रूप से संतोष पंजवानी, हीरा आसवानी, मनोज गुरूनानी, हरीश रावलानी, राजकुमार पंजवानी, विनोद रावलानी, अशोक आहूजा, आनंद पंजवानी, सुशील आडवानी, बलराम गनवानी, भारत चेनानी, मुकेश आहूजा, अनिल बच्छानी, जीतू काछेलानी, दिलीप सच्चानी सहित बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग मौजूद थे।
सिंधी समाज के लोगों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार जबसे केंद्र में लाल कृष्ण आड़वाणी कमजोर हुए हैं तबसे भाजपा के आला नेताओं के निशाने पर सिंधी समाज के लोग आने लगे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि भाजपा के आला नेता अब सिंधि समाज के प्रतिनिधि ईश्वर दास रोहाणी पर भी बयानों के तीर चलने लगें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

कुरई घाट का बस हादसा!

कुरई घाट का बस हादसा!

(शरद खरे)

सिवनी जिले की कुरई घाटी सालों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दशकों पहले यहां शेरों की दहाड़ सुनाई देती थी। उसके बाद इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही कुरई घाट में सड़क निर्माण को अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने स्थान दिया। इसके उपरांत पहले दशक की समाप्ति के दौरान ही फोरलेन पर लगे फच्चर के कारण यह घाट चर्चित हुआ। सड़क ना बन पाने के कारण हुए हादसों ने सभी को हिला दिया और अंततः 14 जून को यादव ट्रेवल्स की यात्री बस खाई में गिर गई।
बताते हैं कि पचास के दशक के आसपास कुरई के घाट में शेरों की तादाद बहुत अधिक हुआ करती थी। इसके बाद शिकारियों ने इस घाट को शेरों की दहाड़ से वंचित ही कर दिया। एक समय था जब कुरई घाट के विहंगम दृश्य को देखने बाहर से इस मार्ग से होकर गुजरने वाले बरबस ही रूक जाया करते थे। लोक कर्म विभाग द्वारा कुरई घाट के एक स्थान को चौड़ा कर वहां विहंगम दृश्य देखने की बाकायदा व्यवस्था भी की है।
इक्कीसवीं सदी के आरंभ में युवा एवं उर्जावान तथा प्रदेश के उत्कृष्ठ सर गोविंदराम सक्सेरिया इंजीनियरिंग कालेज इंदौर के प्रोडक्ट इंजीनियर प्रसन्न चंद मालू द्वारा उस समय बनाए गए कुरई घाट का जिकर एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा किया गया था। उस समय इस सड़क के घुमावदार रास्ते पर गुणवत्ता के साथ काम करने के लिए अपने आलेख में उक्त पत्रिका ने इंजीनियर प्रसन्न मालू के नाम का भी उल्लेख किया था।
दिसंबर 2008 में सिवनी के लिए मनहूस थी 18 दिसंबर की तारीख। इस काले दिन तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि द्वारा सीईसी के निवेदन पर एक आदेश जारी कर फोर लेन का काम मोहगांव से खवासा तक रूकवा दिया। इस आदेश में स्पष्ट निर्देश था कि उसके बाद वन और गैर वन भूमि पर सड़क के निर्माण का काम नहीं हो सकेगा।
बस यहीं से एक बार फिर कुरई घाट में स्याह सन्नाटा पसर गया। इस मार्ग का रखरखाव भी 2008 के उपरांत 2013 तक निर्माण में लगी सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा नहीं किया गया। ना ही इस काम को करवाने के लिए जिम्मेदार एनएचएआई के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही इस काम को करवाने की जुर्रत की गई।
इसका नतीजा यह हुआ कि मोहगांव से खवासा तक का मार्ग जिसमें कुरई घाट शामिल है बुरी तरह जर्जर हो गया। इस मार्ग पर भारी ओव्हर लोडेड वाहन इस कदर झूलते चलते थे कि लगता था अब गिरे तब गिरे। इनके पास से निकलने वाले दो और चार पहिया वाहनों के चालक इनकी हाथी जैसी मदमस्त चाल को देखकर सहम ही जाया करते थे। सड़क के इस भाग में हुई दुर्घटनाओं में मरने वालों की भी खासी तादाद है।
सिवनी में सड़क के इस भाग के निर्माण के लिए अनेक गैर राजनैतिक संगठन भी लोगों को लामबंद करते रहे पर सड़क के रखरखाव के लिए किसी ने आवाज नहीं उठाई जो आश्चर्य का विषय ही बनी रही। इस सड़क का रखरखाव ना करके सिवनी के जिम्मेदार लोगों द्वारा प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर सद्भाव कंपनी के करोड़ों रूपए बचवा दिए बताए जाते हैं।
ऐसा नहीं कि अगर जिला प्रशासन, सांसद विधायक एवं सड़क के लिए लड़ने वाले संगठन चाहते तो इस सड़क के रखरखाव का काम आरंभ से ही पूरा होता रहता और सड़क पर हादसों में इस कदर लोग ना तो मारे जाते और ना ही घायल होते। वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं। कहा जा रहा है कि इन सभी ने परोक्ष तौर पर सद्भाव कंपनी का ही साथ दिया है। सच्चाई क्या है यह तो निर्माण कंपनी जाने या बाकी सब, पर यह सच है कि हादसों में लोग काल कलवित हुए हैं।
इस साल के आरंभ में पता नहीं ऐसा क्या हो गया कि एनएचएआई ने इस सड़क को मोटरेबल बनवा दिया। कहा जाता है कि एक वरिष्ठ अधिकारी जबलपुर में पदस्थ थे, और उन्हें हर सप्ताह नागपुर जाना आना पड़ता था। दो तीन बार जब उन्हें तकलीफ हुई उन्होंने मामला बुलवाया अध्ययन किया और फिर एनएचएआई सहित सभी को जमकर लताड़ा। बन गई सड़क रातों रात।
अगर यह सड़क 2013 में बन सकती है तो 2008 के बाद क्यों नहीं बन सकती? क्या इसका जवाब कांग्रेस, भाजपा या अन्य विरोध करने वाले राजनैतिक और गैर राजनैतिक संगठनों के पास है? मतलब साफ है कि मामले को अज्ञानता या जानते बूझते गलत दिशा में ले जाया गया था।
बहरहाल, 14 जून के अंक में दैनिक हिन्द गजट ने कुरई घाट में सड़क में गड्ढ़े होने और किनारे की मिट्टी खिसलने की खबर प्रकाशित की थी। इसी दिन यादव ट्रेवल्स की एक बस खाई में गिर गई। यह हादसा हुआ और एनएचएआई अभी भी कुंभकर्णीय निद्रा में है। कुरई घाट बेहद घुमावदार और खतरनाक है।
बस वैध रूप से संचालित थी या अवैध रूप से बिना परमिट वाली थी, इस बारे में भी तहकीकात करना पुलिस का ही काम है। अगर अवैध रूप से चल रही थी तो उस पर एवं रास्ते में पड़ने वाले पुलिस थानों और यातायात प्रभारी पर भी कार्यवाही करना चाहिए। साथ ही साथ आरटीओ को भी शंका के दायरे में लाया जाएगा।

शासन प्रशासन से अपेक्षा है कि कुरई घाट जैसे घुमावदार और दुर्गम मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों की लगाम कसें, और समय सीमा में उन्हें इस सड़क के दुरूस्तीकरण के लिए आदेशित करें, ताकि लगातार घट रही दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

रविवार, 16 जून 2013

इस सड़क पर चलना सर्कस के बाजीगरों का काम

इस सड़क पर चलना सर्कस के बाजीगरों का काम

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर के ज्यारत नाका क्षेत्र से पॉलीटेक्निक कॉलेज जाने वाले मार्ग की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है। कदम कदम पर उभर आए गड्ढों में पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को इन गड्ढों की गहराई का अंदाज न हो पाने के कारण उनका वाहन अनियंत्रित हो जाता है। पैदल चलने वाले भी, इस मार्ग से निकलने वाले वाहनों से उचटने वाले मैले पानी के छींटों के कारण बेतहाशा परेशान हैं।
इस मार्ग से गुजरने वाले कई लोगों को दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ता है। क्षेत्रीयवासी बताते हैं कि इस मार्ग से रेत, ईंट, पत्थर, मुरम से लोडेड डम्फर निकलते हैं जो मार्ग के जर्जर होने का कारण बनते हैं। इन वाहनों का दबाव यह सड़क सह नहीं पाती है और नतीजतन बड़े-बड़े गड्ढे निर्मित हो जाते हैं। क्षेत्रीयवासियों का कहना है कि इस मार्ग का जीर्णोंद्धार किया जाना अत्यंत आवश्यक है और इसके साथ ही भारी वाहनों का प्रवेश भी इस मार्ग पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि यह मार्ग ज्यारत नाका क्षेत्र को बारापत्थर, पॉलीटेक्निक कॉलेज, बींझावाड़ा, बबरिया से जोड़ता है। इस मार्ग से रात्रि के समय भी आनाजाना जारी रहता है। कई लोग इस मार्ग के जर्जर हो जाने के कारण सर्किट हाउस चौराहे जाने वाले मार्ग का सहारा लेने को मजबूर होते हैं। यदि इस इस मार्ग का कायाकल्प कर दिया जाए तो प्रमुख मार्ग पर पड़ने वाले यातायात के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।