कौन समझेगा सिवनी की प्रसव वेदन . . .3
आश्वासन के बाद आश्वासन: नहीं मिल पाया
केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा
(लिमटी खरे)
विधानसभा क्षेत्र केवलारी के मुख्यालय
केवलारी के लोगों को इस बात की पीड़ा सालती होगी कि आश्वासन दर आश्वासन मिलने के
बाद भी केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल पाया है। इस क्षेत्र का
प्रतिनिधित्व लगभग बीस सालों तक कांग्रेस के जाने माने क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर
के द्वारा किए जाने के बाद भी केवलारी आज भी विकास के लिए तरस रहा है। केवलारी में
युवाओं का मानना है कि अब तो अण्णा हजारे जैसे आंदोलनों के सहारे ही केवलारी को
नगर पंचायत का दर्जा दिलवाया जा सकता है।
ग्राम पंचायत केवलारी के पास आय के साधन
बेहद सीमित हैं। संभवतः यही कारण है कि केवलारी में न तो पक्की सड़कों का जाल बिछ
पाया और न ही यहां जल निकासी के लिए नालियां ही उचित तरीके की हैं। साफ सफाई और
प्रकाश की व्यवस्था तो है पर केवलारी आज भी कस्बाई शक्ल से अपने आप को निकालने के
लिए कसमसा रहा है।
केवलारी विधानसभा के डेढ़ दर्जन से
ज्यादा गांव में आज भी आज़ादी के साढ़े छः दशकों के बाद भी बिजली का न होना अपने आप
में इस क्षेत्र के विकास की गाथा कहने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। इतना ही
नहीं अनेक गांव के लोगों विशेषकर स्कूली बच्चों को कभी रेल की पातों पर से जान
हथेली पर रखकर सफर तय करना होता है, तो कभी नदी में नाव की सवारी गांठनी
होती है। यह है केवलारी विधानसभा के विकास की तस्वीर!
केवलारी से मण्डला मार्ग पर बैनगंगा नदी
पर पुल निर्माण न हो पाने से जब तब मार्ग अवरूद्ध हो जाया करता है। इस पुल में बड़ी
बड़ी दरारें हैं, जिन्हें विभाग द्वारा भर तो दिया गया है, पर पुल में धपड़े उखड़े अलग ही दिखाई पड़
रहे हैं। इसके अलावा केवलारी उगली मार्ग पर सागर नदी का पुल भी केवलारी के
वाशिंदों के लिए परेशानी का सबब् ही बना हुआ है। इस रपटे पर से बारिश के समय
राहगीर जान हथेली पर रखकर ही आना जाना किया करते हैं। राजा दिग्विजय ंिसंह के
शासनकाल में एक बार यह बात भी सामने आई थी कि झांसी से लखनादौन के राष्ट्रीय
राजमार्ग को पलारी, उगली, पाण्डिया छपारा, लालबर्रा, बालाघाट होकर गोंदिया तक बढ़ा दिया जाए, ताकि दूरी और यातायात के दबाव को कम
किया जा सके। पता नहीं क्यों यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई! केवलारी उगली मार्ग पर
सागर नदी के रपटे पर से दिन रात हल्के और भारी वाहनों का आवागमन जारी रहता है, पर इस रपटे को ऊंचा कर नया पुल बनाने की
जहमत किसी ने नहीं उठाई।
केवलारी अंचल के निवासियों के सामने
अनेक समस्याएं आज भी बरकरार हैं। यहां के निवासियों को रोजी रोजगार के लिए
महानगरों की ओर कूच करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति तब निर्मित होती रही
जबकि केवलारी क्षेत्र को अतिविशिष्ट विधानसभा क्षेत्र की सूची में स्थान मिला।
केवलारी क्षेत्र को विकासशील बनाने के नाम पर चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों
द्वारा समय समय पर अनेक वायदे किए गए, पर अमली जामा एक बार भी नहीं पहनाया जा
सका। वहीं कान्हीवाड़ा उप तहसील का मामला भी आज भी झूला ही झूल रहा है।




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