बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 9
दिग्वियज सिंह से बुरी तरह भयाक्रांत हैं मनमोहन
दिग्गी राजा के जहर बुझे तीरों की काट नहीं है मन के पास
अहमद पटेल को साधकर मन की मुक्ति के मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं दिग्गी
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। घपालों, घोटालों और भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक की अघोषित उपमा पा चुके वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह की बिदाई की बेला नजदीक ही नजर आ रही है। मनमोहन सिंह की बिदाई में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, सोनिया के सचिव विसेंट जार्ज के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह महती भूमिका में नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी के नाक, कान, आंख और मस्तिष्क बने उनके अघोषित राजनैतिक गुरू राजा दिग्विजय सिंह कांग्रेस के लिए भस्मासुर की भूमिका में ही नजर आ रहे हैं। जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वाले उत्तर प्रदेश, सोनिया के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल के सूबे गुजरात और राजा दिग्विजय सिंह के गृह प्रदेश मध्य प्रदेश में कांग्रेस का नामलेवा नहीं बचा है उसी तरह अब केंद्र में भी यही हाल होने के संकेत मिले हैं।
अपनी मुखालफत से आहत प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह का खेमा भी अब सक्रिय होता नजर आ रहा है। मनमोहन मण्डली ने अब अपने विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मनमोहन मण्डली के शब्द बाणों का असर साफ दिखने लगा है। कांग्रेस के अंदखाने में चल रही चर्चाओं के अनुसार अब तो सोनिया, राहुल गांधी, अहमद पटेल और दिग्विजय सिंह से ही यह पूछा जाना चाहिए कि उनके सूबों में कांग्रेस औंधे मुंह क्यों गिरी है? जब वे अपना घर ही नहीं संभाल सकते तो फिर किस मुंह से देश में कांग्रेस का परचम लहराने की बात कर रहे हैं। अब मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के बीच आर पार की लड़ाई आरंभ हो चुकी है।
(क्रमशः जारी)

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