शुक्रवार, 23 मार्च 2012

विकलांगों की सुध लेगा एविएशन


विकलांगों की सुध लेगा एविएशन

(के.रश्मि)

नई दिल्ली (साई)। नागर विमानन मंत्रालय ने विकलांग और चलने फिरने में कठिनाई महसूस करने वाले यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान होने वाली समस्याओं के अध्ययन के लिए एक समिति गठित की है। यह समिति ऐसे यात्रियों के लिए हवाई यात्रा ज्यादा सुविधाजनक बनाने के उपाय सुझाएगी। समिति से आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस समिति के अध्यक्ष नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव जी. अशोक कुमार होंगे।

सीबीएसई स्कूलों ने अधर में छोड़ा विद्यार्थियों को


सीबीएसई स्कूलों ने अधर में छोड़ा विद्यार्थियों को

भगवान भरोसे परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से एफीलेशन की भागमभाग में विद्यार्थियों और पालकों को तरह तरह के प्रलोभन देने वाले गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं द्वारा दसवीं बोर्ड परीक्षा में अपने संस्थान के विद्यार्थियों को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया जा रहा है। दसवीं की बोर्ड परीक्षा में निजी शालाओं के परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में यत्र तत्र भटकते देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि सीबीएसई से संबद्ध सिवनी में केंद्रीय विद्यालय, महर्षि विद्या मंदिर, सेंट फ्रांसिस ऑफ एसिसी, अरूणांचल पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी इस साल दसवीं की परीक्षा दे रहे हैं। इन सभी का परीक्षा केंद्र केंद्रीय विद्यालय सिवनी को बनाया गया है। अब जबकि महज एक परचा ही शेष बचा है तब भी सेंट फ्रांसिस ऑफ एसिसी स्कूल की प्रचार्य सैबी मैरी एवं प्रबंधक फादर जे.पी. के अलावा किसी भी शाला के प्रबंधक, प्राचार्य अथवा शिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों को केंद्रीय विद्यालय में जाकर उनकी बैठक व्यवस्था आदि देखने की जहमत नहीं उठाई है।
संभवतः यही कारण है कि सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध गैर सरकारी विद्यालयों के छात्र छात्राएं भगवान भरोसे ही परीक्षा देने पर विवश हैं। आलम यह रहता है कि अपना रोल नंबर देखने के लिए छात्र छात्राएं काफी मशक्कत करते दिखते हैं। वहीं दूसरी ओर सेंट फ्रांसिस ऑफ एसिसी स्कूल की प्राचार्य, प्रबंधक और अन्य शिक्षकों द्वारा न केवल अपने संस्थान के विद्यार्थियों वरन् शेष शालाओं के बच्चों की भी मदद की जा रही है।

कांग्रेस से पींगे बढ़ रही हैं त्रिवेदी की


कांग्रेस से पींगे बढ़ रही हैं त्रिवेदी की

ममता और त्रिवेदी के बीच बढ़ चुकी है खटास

त्रणमूल के विभीषण बन सकते हैं त्रिवेदी
 
(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस के राजनैतिक प्रबंधकों ने त्रणमूल कोटे से बने पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के माध्यम से ममता बनर्जी को झटका देने की तैयारियों को तेज कर दिया है। ममता बनर्जी द्वारा बड़े ही बेआबरू तरीके से रेल मंत्रालय से बाहर किए गए त्रिवेदी और कांग्रेस के राजनैतिक प्रबंधकों के बीच खिचड़ी पकती दिख रही है। त्यागपत्र देने के पहले दिनेश त्रिवेदी द्वारा ममता बनर्जी के खिलाफ पजाई गई तेज धार से इस बात के संकेत मिल रहे थे कि दिनेश त्रिवेदी ज्यादा समय तक रेल मंत्री नहीं रह पाएंगे साथ ही साथ उनकी त्रणमूल से बिदाई के मार्ग भी प्रशस्त हो चुके हैं।
त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के करीबी सूत्रों का कहना है कि दरअसल, दिनेश त्रिवेदी द्वारा रेल मंत्रालय में त्रणमूल कांग्रेस का प्रभुत्व समाप्त करने के काम की शिकायतें ममता बनर्जी को लगातार मिल रही थीं। सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी के करीबी उद्योगपतियों को भी त्रिवेदी द्वारा घास नहीं डाली जा रही थी। दिनेश त्रिवेदी अपनी कार्पोरेट सोच के चलते कुछ व्यवसाई केंद्रीय मंत्रियों के हाथों की कठपुतली बन गए थे।
उधर, त्यागपत्र के पहले दिनेश त्रिवेदी के हवाले से जो जुमले मार्केट में आए वे ममता बनर्जी और दिनेश त्रिवेदी के बीच कड़वाहट और खुदी खाई को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त माने जा रहे थे। दिनेश त्रिवेदी के हवाले से कहा गया कि ममता बनर्जी अगर उनका त्यागपत्र चाह रहीं हैं तो वे लिखित में दें। फिर यह बात सामने आई कि रेल मंत्रालय रायटर्स बिल्डिंग से नहीं चलता, वे सिर्फ अपनी अंतरात्मा की आवाज ही सुनते हैं।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी की धमकी से नाराज कांग्रेस की राजमाता के इशारों पर कांग्रेस के रणनीतिकारों ने दिनेश त्रिवेदी को त्रणमूल कांग्रेस में दो फाड करवाने की महती जवाबदारी सौंपी गई है।
सूत्रों के अनुसार दिनेश त्रिवेदी को यह आश्वासन दिया गया है कि उन्हें बरास्ता राज्यसभा संसदीय सौंध तक पहुंचाने का जिम्मा कांग्रेस का है, बशर्ते वे त्रणमूल में विद्रोह का बिगुल बजवा दें। वर्तमान में अगर त्रिवेदी त्रणमूल को छोड़ते हैं तो उन्हें दल बदल विधेयक के तहत सात सांसदों की आवश्यक्ता होगी।
उधर, त्रणमूल कांग्रेस में भी ममता बनर्जी की कथित हिटलरशाही से अनेक कार्यकर्ता और सांसद नराज हैं। कहा जा रहा है कि इन नाराज सांसदों की सूची भी कांग्रेस के रणनीतिकारों ने त्रिवेदी को मुहैया करवा दी गई है। कांग्रेस ने अपना विभीषण चुन लिया है। चर्चा है कि पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी इन दिनों त्रणमूल के ममता से नाराज सांसदों सुब्रतो बनर्जी, कबीर सुमन आदि के सतत संपर्क में हैं।

ध्यानाकर्षण में उठ सकता है झाबुआ पावर का मसला!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  80

ध्यानाकर्षण में उठ सकता है झाबुआ पावर का मसला!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में लगाए जाने वाले कोल आधारित पावर प्लांट के दूसरे चरण की पर्यावरणीय अनुमति मिलने के पूर्व ही इस प्रकरण में हुई गफलतों के बारें में लोकसभा में शून्यकाल में मामले को उठाने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस के एक संसद सदस्य के करीबी सूत्रों ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की मिली भगत से खेले जा रहे आदिवासियों के शोषण के इस खेल की जानकारी मिलने के बाद एक युवा और जुझारू संसद सदस्य ने इस मामले में अनेक साक्ष्य एकत्र करना आरंभ किया। जैसे ही उनके पास पर्याप्त मात्रा में साक्ष्य आ गए उन्होंने इस मामले को लोकसभा के वर्तमान सत्र के शून्यकाल में उठाने की तैयारी कर ली है।
सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में समयसीमा समाप्त हो जाने के कारण वर्तमान सत्र में तारांकित प्रश्न लगाना संभव नहीं है, अतः आदिवासियों के हितों के लिए कटिबद्ध उक्त सांसद ने इस मसले को लोकसभा के अगामी सत्र में उठाने का मन बना लिया है। सूत्रों ने यह भी कहा कि इस मामले में संयंत्र के जिले सिवनी से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की कतरनों को भी आधार बनाया जाएगा।
इसके अलावा कुछ पर्यावरण के पहरूओं ने इस मसले में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही पर्यावरण की अनदेखी पर मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाने की तैयारी भी आरंभ कर ली है। कहा जा रहा है कि संयंत्र प्रबंधन ने मीडिया को अपने कब्जे में करने के लिए कुछ एजेंटछोड दिए हैं। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि लगभग 7000 करोड़ रूपए की लागत से डलने वाले इस पावर प्लांट में मीडिया पर्सन्स को यह संदेश भी दिया गया है कि वे अपने अपने एनजीओ बनाकर लाख दो लाख रूपए के काम संयंत्र प्रबंधन से ले लें।
गौरतलब है कि संयंत्र मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में लग रहा है। सिवनी संसदीय सीट का अवसान हो चुका है। अब इस जिले की दो विधानसभाओं को मण्डला और दो को बालाघाट में समाहित कर दिया गया है। आदिवासी बाहुल्य मण्डला सीट से कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम तो बालाघाट से केशव दयाल देशमुख सांसद हैं, फिर भी दोनों ने ही इस मामले को लोकसभा में उठाने की जहमत नहीं उठाई है।

(क्रमशः जारी)

येदी ने बढ़ाया भाजपा पर दबाव!


येदी ने बढ़ाया भाजपा पर दबाव!

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के नेता बी.एस येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री पद पाने के लिए दबाव बढ़ाने की कोशिश में नई दिल्ली पहुंच गए हैं। उधर, मुख्यमंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा ने खुद को इस पद से हटाए जाने की संभावना से इनकार किया है। श्री येदियुरप्पा ने कल नई दिल्ली में कहा कि उन्होंने पार्टी को कोई समय-सीमा नहीं दी है और फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
बताया जाता है कि श्री येदियुरप्पा के वफादार विधायकों ने अवैध खनन मामले में लोकायुक्त का आदेश रद्द करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का अभियान तेज कर दिया है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सदानन्द गौड़ा, राज्य बीजेपी पार्टी अध्यक्ष इश्वयुरप्पा को भी पार्टी आलाकमान ने मुख्यालय दिल्ली तलब किया है।
सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि सदानन्द गौड़ा के पक्ष में बात करने के लिए कुछ विधायक भी दिल्ली आने वाले हैं। बीजेपी वरिष्ठ यह भी जानते हैं कि वकील श्री राजन बासन ने कल अवैध खनन को लेकर हाई कोर्ट न्यायालय द्वारा दिए गए नतीजे के विरूद्ध अपील सुप्रीम कोर्ट में डाली है।
सुप्रीम कोट द्वारा नियोजित सेंट्रल एमपावरमेंट कमेटी भी अवैध खनन के विचार को सीबीआई को सौंपने के मामले में अपना संदेश सुनाने वाली है। इसके मद्देनजर यदियुरप्पा को फिर से अधिकार देने के विचार पर बीजेपी वरिष्ठों को निर्णय लेना एक मुश्किल बात होगी।