सोमवार, 8 अप्रैल 2013

जानिए इस वर्ष के नवरात्र स्थापना के शुभ मुहूर्त


जानिए इस वर्ष के नवरात्र स्थापना के शुभ मुहूर्त

(पं.दयानंद शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। चौत्र नवरात्रों का  शुभारम्भ इस वर्ष 11 अप्रैल 2013 ( गुरुवार ) के दिन से होगा। दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त समय सुबह 6।22 से 7।50 तक रहेगा, उसके बाद सूर्याेदय से सुबह 9।20 बजे तक लाभ, अमृत के चौघड़िए में और सुबह 10।49 से दोपहर 12 बजे तक, देवी पुराण में नवरात्र के दिन देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन का समय प्रातरू काल माना गया है। मगर इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग वर्जित बताया गया है। हालांकि इस दिन वैधृति योग का संयोग तो नहीं हो रहा है लेकिन दोपहर 1।39 बजे चित्रा नक्षत्र आएगा। इसलिए प्रातरूकाल देवी का आह्वान कर घट स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा।
इस वर्ष की चौत्र नवरात्र तिथियाँ इस प्रकार होगी  ------
    पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 11 अप्रैल 2013, दिन बृस्पतिवार
    दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  12 अप्रैल  2013, दिन शुक्रवार
    तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 13 अप्रैल 2013, दिन शनिवार
    चौथा नवरात्र , चतुर्थी तिथि, 14 अप्रैल 2013 , दिन रविवार
    पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 15 अप्रैल 2013, दिन सोमवार
    छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 16 अप्रैल 2013, दिन मंगलवार
    सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 17 अप्रैल 2013,दिन  बुधवारढ
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 18 अप्रैल 2013, दिन बृहस्पतिवार
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 19 अप्रैल 2013, दिन शुक्रवार सुबह 06रू55 तक
    नौवां नवरात्र,  नवमी तिथि 20 अप्रैल, दिन शनिवार सुबह 08रू15 तक
दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ में मई तक बनने वाला चार -पांच ग्रह संयोग राजनैतिक -सामाजिक -प्राकृतिक महोत्पात का कारण बनेगा । 11 अप्रैल 2013 से शुरू होने वाला पराभव संवत का फल शुभ होगा। संवत का वास माली के घर तथा रोहिणी का वास समुद्र में होने से उत्तम बारिश का योग बनेगा। संवत का वाहन मृग है। मंत्री शनि होने से सियासतदारों की अयोग्यता सिद्ध होगी।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं। दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ  इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षाेउल्लास के साथ की जाती है। वर्ष में दो बार की जाने वाली दुर्गा पूजा एक चौत्र माह में और दूसरा आश्विन माह में की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार दुर्गा पूजा के साथ इन दिनों में तंत्र और मंत्र के कार्य भी किये जाते है। बिना मंत्र के कोई भी साधाना अपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार हर व्यक्ति को सुख -शान्ति पाने के लिये किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी ही चाहिए। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्रे के पहले दिन माता दुर्गा के कलश की स्थापना कर पूजा प्रारम्भ की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह समय ओर भी अधिक उपयुक्त रहता है। गृहस्थ व्यक्ति भी इन दिनों में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है। इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता है। मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है। इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व कहा गया है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल से पहले तक शुक्र ही राजा व मंत्री रहेगा। यह संयोग घातक जुनून की तरफ समाज को ले जाएगा। समाज व कानून एक तरफा महिलाओं का सहयोगी होगा। 18 साल बाद (23 दिसंबर) राहु व केतु अपनी राशि बदल कर तुला व मेष में आए हैं। राहु व केतु अब अप्रैल 2014 तक शनि के साथ साथ चलेंगे।
संवत 2070 में उत्साहजनक प्रदर्शन करेगा। विश्व के अन्य देशों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ होंगे तथा तकनीकी क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। सुरक्षा से जुड़े मामलों में विश्व स्तर पर भारत को सहयोग प्राप्त होगा। देश में धन-धान्य की वृद्धि होगी, खाद्य वस्तुओं में वृद्धि की संभावना बन रही है। राजनैतिक क्षेत्र में लगनस्थ राहु के कारण सत्तापक्ष व विपक्ष में मतभेद बने रहने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार सत्ता के विरुद्ध जनता में विद्वेष बढ़ेगा। आंतरिक कलह एवं कुछ राज्यों में सत्ता के विरुद्ध जनता सड़क पर उतर सकती है। धर्मेश वृहस्पति होने के कारण देश में धार्मिक लोगों, संतों, महात्माओं का सम्मान बढ़ेगा। धर्म आधारित राजनीति में वृद्धि की पूर्ण संभावना है। आतंकवाद एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पड़ोसी राष्ट्रों से जुड़े शत्रु वर्ग पराजित होंगे। लग्न कुण्डली में शत्रु स्थान स्थित वृहस्पति शत्रुहंता योग उत्पन्न करेगा।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल 2013 से अगस्त 2013 के मध्य देश के कई राज्यों में दैवीय प्रकोप व किसी भीषण दुर्घटना की संभावना बन रही है। नवम्बर 2013 से जनवरी 2014 के मध्य किसी बड़ी रेल दुर्घटना, भूकंप या समुद्र तटीय क्षेत्रों में जन-धन की हानि संभावित है। जून 2013 से दिसम्बर 2013 के मध्य कुछ आर्थिक सुधार होने की संभावना है। देश में धार्मिक कृत्य बढ़ेंगे। पापाचार करने वाले सावधान रहें, उन्हें कठोर दंड मिल सकता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार जुलाई के प्रथम सप्ताह तक अन्तरिक्ष में गुरु अतिचारी तो शनि वक्री गमन करेगा ,तब तो अंतर्राष्ट्रीय जगत में तहलका मचवायेगा ----

ष्ष्ष्अतिचारी गते जीवे वक्री भूते शनैश्वरे ।हा !हा !भूतं जगत्सर्वं रुण्डमाला महीतले ष्ष्ष्ष्
अमेरिका आदि देश तथा खाड़ी के देश त्रस्त रहेंगें ।युद्धोत्पाति भयान्तक से हा हाकार मचेगा ।किन्हीं देशों में रक्त की धारा वहेगी ।प्रजाजन दुखी होंगें ।शांति के सभी प्रयास निष्फल होंगें ।--
----जून -जुलाई 15 तक भयानक गर्मी पड़ेगी ।शनि के वक्रत्व काल में यातायात से सम्बंधित दुर्घटनाएँ बहुत होंगीं ।सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है ।सक्रीय आंतंकवादी प्रबल होती
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नव वर्ष का प्रारम्भ हिन्दू, चौत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानते हैं क्योंकि
ऽ इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
ऽ मर्यादापुर्षाेत्तम भगवान रामचन्द्र जी का इस दिन राज्याभिषेक हुआ।
ऽ इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।
ऽ देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।
ऽ महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।
ऽ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा। केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
ऽ महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज का स्थापना दिवस।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। चौत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है। इन दिनों नवरात्र में शास्त्रों के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है। नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र नवरात्र  पूजन का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रातरू स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है। व्रत का संकल्प लेने के पश्चात मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है। इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। तथा ष्दुर्गा सप्तशतीष् का पाठ किया जाता है। पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए।

जानिए इस वर्ष के नवरात्र स्थापना के शुभ मुहूर्त


जानिए इस वर्ष के नवरात्र स्थापना के शुभ मुहूर्त

(पं.दयानंद शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। चौत्र नवरात्रों का  शुभारम्भ इस वर्ष 11 अप्रैल 2013 ( गुरुवार ) के दिन से होगा। दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त समय सुबह 6।22 से 7।50 तक रहेगा, उसके बाद सूर्याेदय से सुबह 9।20 बजे तक लाभ, अमृत के चौघड़िए में और सुबह 10।49 से दोपहर 12 बजे तक, देवी पुराण में नवरात्र के दिन देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन का समय प्रातरू काल माना गया है। मगर इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग वर्जित बताया गया है। हालांकि इस दिन वैधृति योग का संयोग तो नहीं हो रहा है लेकिन दोपहर 1।39 बजे चित्रा नक्षत्र आएगा। इसलिए प्रातरूकाल देवी का आह्वान कर घट स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा।
इस वर्ष की चौत्र नवरात्र तिथियाँ इस प्रकार होगी  ------
    पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 11 अप्रैल 2013, दिन बृस्पतिवार
    दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  12 अप्रैल  2013, दिन शुक्रवार
    तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 13 अप्रैल 2013, दिन शनिवार
    चौथा नवरात्र , चतुर्थी तिथि, 14 अप्रैल 2013 , दिन रविवार
    पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 15 अप्रैल 2013, दिन सोमवार
    छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 16 अप्रैल 2013, दिन मंगलवार
    सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 17 अप्रैल 2013,दिन  बुधवारढ
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 18 अप्रैल 2013, दिन बृहस्पतिवार
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 19 अप्रैल 2013, दिन शुक्रवार सुबह 06रू55 तक
    नौवां नवरात्र,  नवमी तिथि 20 अप्रैल, दिन शनिवार सुबह 08रू15 तक
दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ में मई तक बनने वाला चार -पांच ग्रह संयोग राजनैतिक -सामाजिक -प्राकृतिक महोत्पात का कारण बनेगा । 11 अप्रैल 2013 से शुरू होने वाला पराभव संवत का फल शुभ होगा। संवत का वास माली के घर तथा रोहिणी का वास समुद्र में होने से उत्तम बारिश का योग बनेगा। संवत का वाहन मृग है। मंत्री शनि होने से सियासतदारों की अयोग्यता सिद्ध होगी।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं। दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ  इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षाेउल्लास के साथ की जाती है। वर्ष में दो बार की जाने वाली दुर्गा पूजा एक चौत्र माह में और दूसरा आश्विन माह में की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार दुर्गा पूजा के साथ इन दिनों में तंत्र और मंत्र के कार्य भी किये जाते है। बिना मंत्र के कोई भी साधाना अपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार हर व्यक्ति को सुख -शान्ति पाने के लिये किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी ही चाहिए। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्रे के पहले दिन माता दुर्गा के कलश की स्थापना कर पूजा प्रारम्भ की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह समय ओर भी अधिक उपयुक्त रहता है। गृहस्थ व्यक्ति भी इन दिनों में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है। इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता है। मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है। इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व कहा गया है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल से पहले तक शुक्र ही राजा व मंत्री रहेगा। यह संयोग घातक जुनून की तरफ समाज को ले जाएगा। समाज व कानून एक तरफा महिलाओं का सहयोगी होगा। 18 साल बाद (23 दिसंबर) राहु व केतु अपनी राशि बदल कर तुला व मेष में आए हैं। राहु व केतु अब अप्रैल 2014 तक शनि के साथ साथ चलेंगे।
संवत 2070 में उत्साहजनक प्रदर्शन करेगा। विश्व के अन्य देशों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ होंगे तथा तकनीकी क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। सुरक्षा से जुड़े मामलों में विश्व स्तर पर भारत को सहयोग प्राप्त होगा। देश में धन-धान्य की वृद्धि होगी, खाद्य वस्तुओं में वृद्धि की संभावना बन रही है। राजनैतिक क्षेत्र में लगनस्थ राहु के कारण सत्तापक्ष व विपक्ष में मतभेद बने रहने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार सत्ता के विरुद्ध जनता में विद्वेष बढ़ेगा। आंतरिक कलह एवं कुछ राज्यों में सत्ता के विरुद्ध जनता सड़क पर उतर सकती है। धर्मेश वृहस्पति होने के कारण देश में धार्मिक लोगों, संतों, महात्माओं का सम्मान बढ़ेगा। धर्म आधारित राजनीति में वृद्धि की पूर्ण संभावना है। आतंकवाद एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पड़ोसी राष्ट्रों से जुड़े शत्रु वर्ग पराजित होंगे। लग्न कुण्डली में शत्रु स्थान स्थित वृहस्पति शत्रुहंता योग उत्पन्न करेगा।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल 2013 से अगस्त 2013 के मध्य देश के कई राज्यों में दैवीय प्रकोप व किसी भीषण दुर्घटना की संभावना बन रही है। नवम्बर 2013 से जनवरी 2014 के मध्य किसी बड़ी रेल दुर्घटना, भूकंप या समुद्र तटीय क्षेत्रों में जन-धन की हानि संभावित है। जून 2013 से दिसम्बर 2013 के मध्य कुछ आर्थिक सुधार होने की संभावना है। देश में धार्मिक कृत्य बढ़ेंगे। पापाचार करने वाले सावधान रहें, उन्हें कठोर दंड मिल सकता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार जुलाई के प्रथम सप्ताह तक अन्तरिक्ष में गुरु अतिचारी तो शनि वक्री गमन करेगा ,तब तो अंतर्राष्ट्रीय जगत में तहलका मचवायेगा ----

ष्ष्ष्अतिचारी गते जीवे वक्री भूते शनैश्वरे ।हा !हा !भूतं जगत्सर्वं रुण्डमाला महीतले ष्ष्ष्ष्
अमेरिका आदि देश तथा खाड़ी के देश त्रस्त रहेंगें ।युद्धोत्पाति भयान्तक से हा हाकार मचेगा ।किन्हीं देशों में रक्त की धारा वहेगी ।प्रजाजन दुखी होंगें ।शांति के सभी प्रयास निष्फल होंगें ।--
----जून -जुलाई 15 तक भयानक गर्मी पड़ेगी ।शनि के वक्रत्व काल में यातायात से सम्बंधित दुर्घटनाएँ बहुत होंगीं ।सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है ।सक्रीय आंतंकवादी प्रबल होती
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नव वर्ष का प्रारम्भ हिन्दू, चौत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानते हैं क्योंकि
ऽ इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
ऽ मर्यादापुर्षाेत्तम भगवान रामचन्द्र जी का इस दिन राज्याभिषेक हुआ।
ऽ इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।
ऽ देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।
ऽ महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।
ऽ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा। केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
ऽ महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज का स्थापना दिवस।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। चौत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है। इन दिनों नवरात्र में शास्त्रों के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है। नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र नवरात्र  पूजन का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रातरू स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है। व्रत का संकल्प लेने के पश्चात मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है। इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। तथा ष्दुर्गा सप्तशतीष् का पाठ किया जाता है। पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए।

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(पं.दयानंद शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। चौत्र नवरात्रों का  शुभारम्भ इस वर्ष 11 अप्रैल 2013 ( गुरुवार ) के दिन से होगा। दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त समय सुबह 6।22 से 7।50 तक रहेगा, उसके बाद सूर्याेदय से सुबह 9।20 बजे तक लाभ, अमृत के चौघड़िए में और सुबह 10।49 से दोपहर 12 बजे तक, देवी पुराण में नवरात्र के दिन देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन का समय प्रातरू काल माना गया है। मगर इस दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग वर्जित बताया गया है। हालांकि इस दिन वैधृति योग का संयोग तो नहीं हो रहा है लेकिन दोपहर 1।39 बजे चित्रा नक्षत्र आएगा। इसलिए प्रातरूकाल देवी का आह्वान कर घट स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा।
इस वर्ष की चौत्र नवरात्र तिथियाँ इस प्रकार होगी  ------
    पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 11 अप्रैल 2013, दिन बृस्पतिवार
    दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  12 अप्रैल  2013, दिन शुक्रवार
    तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 13 अप्रैल 2013, दिन शनिवार
    चौथा नवरात्र , चतुर्थी तिथि, 14 अप्रैल 2013 , दिन रविवार
    पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 15 अप्रैल 2013, दिन सोमवार
    छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 16 अप्रैल 2013, दिन मंगलवार
    सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 17 अप्रैल 2013,दिन  बुधवारढ
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 18 अप्रैल 2013, दिन बृहस्पतिवार
    आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 19 अप्रैल 2013, दिन शुक्रवार सुबह 06रू55 तक
    नौवां नवरात्र,  नवमी तिथि 20 अप्रैल, दिन शनिवार सुबह 08रू15 तक
दिनांक 11अप्रैल 2013 से शुरू संवत -2070 के प्रारम्भ में मई तक बनने वाला चार -पांच ग्रह संयोग राजनैतिक -सामाजिक -प्राकृतिक महोत्पात का कारण बनेगा । 11 अप्रैल 2013 से शुरू होने वाला पराभव संवत का फल शुभ होगा। संवत का वास माली के घर तथा रोहिणी का वास समुद्र में होने से उत्तम बारिश का योग बनेगा। संवत का वाहन मृग है। मंत्री शनि होने से सियासतदारों की अयोग्यता सिद्ध होगी।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं। दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ  इत्यादि धार्मिक किर्या पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षाेउल्लास के साथ की जाती है। वर्ष में दो बार की जाने वाली दुर्गा पूजा एक चौत्र माह में और दूसरा आश्विन माह में की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार दुर्गा पूजा के साथ इन दिनों में तंत्र और मंत्र के कार्य भी किये जाते है। बिना मंत्र के कोई भी साधाना अपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार हर व्यक्ति को सुख -शान्ति पाने के लिये किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी ही चाहिए। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। नवरात्रे के पहले दिन माता दुर्गा के कलश की स्थापना कर पूजा प्रारम्भ की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिये यह समय ओर भी अधिक उपयुक्त रहता है। गृहस्थ व्यक्ति भी इन दिनों में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है। इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता है। मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है। इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व कहा गया है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल से पहले तक शुक्र ही राजा व मंत्री रहेगा। यह संयोग घातक जुनून की तरफ समाज को ले जाएगा। समाज व कानून एक तरफा महिलाओं का सहयोगी होगा। 18 साल बाद (23 दिसंबर) राहु व केतु अपनी राशि बदल कर तुला व मेष में आए हैं। राहु व केतु अब अप्रैल 2014 तक शनि के साथ साथ चलेंगे।
संवत 2070 में उत्साहजनक प्रदर्शन करेगा। विश्व के अन्य देशों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ होंगे तथा तकनीकी क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। सुरक्षा से जुड़े मामलों में विश्व स्तर पर भारत को सहयोग प्राप्त होगा। देश में धन-धान्य की वृद्धि होगी, खाद्य वस्तुओं में वृद्धि की संभावना बन रही है। राजनैतिक क्षेत्र में लगनस्थ राहु के कारण सत्तापक्ष व विपक्ष में मतभेद बने रहने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार सत्ता के विरुद्ध जनता में विद्वेष बढ़ेगा। आंतरिक कलह एवं कुछ राज्यों में सत्ता के विरुद्ध जनता सड़क पर उतर सकती है। धर्मेश वृहस्पति होने के कारण देश में धार्मिक लोगों, संतों, महात्माओं का सम्मान बढ़ेगा। धर्म आधारित राजनीति में वृद्धि की पूर्ण संभावना है। आतंकवाद एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पड़ोसी राष्ट्रों से जुड़े शत्रु वर्ग पराजित होंगे। लग्न कुण्डली में शत्रु स्थान स्थित वृहस्पति शत्रुहंता योग उत्पन्न करेगा।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार 11 अप्रैल 2013 से अगस्त 2013 के मध्य देश के कई राज्यों में दैवीय प्रकोप व किसी भीषण दुर्घटना की संभावना बन रही है। नवम्बर 2013 से जनवरी 2014 के मध्य किसी बड़ी रेल दुर्घटना, भूकंप या समुद्र तटीय क्षेत्रों में जन-धन की हानि संभावित है। जून 2013 से दिसम्बर 2013 के मध्य कुछ आर्थिक सुधार होने की संभावना है। देश में धार्मिक कृत्य बढ़ेंगे। पापाचार करने वाले सावधान रहें, उन्हें कठोर दंड मिल सकता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार जुलाई के प्रथम सप्ताह तक अन्तरिक्ष में गुरु अतिचारी तो शनि वक्री गमन करेगा ,तब तो अंतर्राष्ट्रीय जगत में तहलका मचवायेगा ----

ष्ष्ष्अतिचारी गते जीवे वक्री भूते शनैश्वरे ।हा !हा !भूतं जगत्सर्वं रुण्डमाला महीतले ष्ष्ष्ष्
अमेरिका आदि देश तथा खाड़ी के देश त्रस्त रहेंगें ।युद्धोत्पाति भयान्तक से हा हाकार मचेगा ।किन्हीं देशों में रक्त की धारा वहेगी ।प्रजाजन दुखी होंगें ।शांति के सभी प्रयास निष्फल होंगें ।--
----जून -जुलाई 15 तक भयानक गर्मी पड़ेगी ।शनि के वक्रत्व काल में यातायात से सम्बंधित दुर्घटनाएँ बहुत होंगीं ।सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है ।सक्रीय आंतंकवादी प्रबल होती
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार नव वर्ष का प्रारम्भ हिन्दू, चौत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानते हैं क्योंकि
ऽ इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
ऽ मर्यादापुर्षाेत्तम भगवान रामचन्द्र जी का इस दिन राज्याभिषेक हुआ।
ऽ इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।
ऽ देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।
ऽ महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।
ऽ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा। केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
ऽ महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज का स्थापना दिवस।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 11 अप्रैल 2013 के दिन से होगा। इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है। चौत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है। इन दिनों नवरात्र में शास्त्रों के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है। नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानंद शास्त्री के अनुसार चौत्र नवरात्र  पूजन का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रातरू स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है। व्रत का संकल्प लेने के पश्चात मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है। इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है। घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है। तथा ष्दुर्गा सप्तशतीष् का पाठ किया जाता है। पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए।

आज भी ताकतवर हैं नितिन गड़करी


ये है दिल्ली मेरी जान


(लिमटी खरे)

आज भी ताकतवर हैं नितिन गड़करी
नितिन गड़करी को भले ही आरोपों के चलते भाजपाध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा हो, पर संगठन के अंदर उनकी तूती आज भी बोल रही है। भाजपा के नए निजाम राजनाथ सिंह हर मामले में गड़करी की राय को पूरा पूरा तवज्जो दे रहे हैं। भाजपाई सूत्रों का कहना है कि गड़करी के आज भी भैय्यू जी जोशी और मोहन भागवत से जीवंत संपर्क है। हाल ही में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजनाथ से मिलकर राजस्थान का प्रभार नितिन गड़करी के हवाले करने का आग्रह किया है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र मोदी, रमन सिंह आदि के भी गड़करी से खासे रिश्ते थे जो अब भी चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गड़करी पदच्युत जरूर हो गए हैं, पर वे कहीं भीतराघात कर कोई बखेड़ा ना खड़ा कर दें इसलिए राजनाथ सिंह उन्हें कदम कदम पर साधे हुए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि संघ मुख्यालय में गड़करी आज भी वहां की हर वस्तु का भोगमान भोग रहे हैं।

आरोपियों के लिए रेड कारपेट बिछाती कांग्रेस!
क्या आज आप आजाद भारत गणराज्य में सांसें ले रहे हैं? इस देश में कानून व्यवस्था नाम की चीज बची है? क्या इंटरनेशनल ट्रीटी के नाम पर कुछ भी किया जा सकता है? इस तरह के प्रश्न कमोबेश हर भारतीय के दिल दिमाग में घुमड़ रहे होंगे। मछुआरों के हत्यारे कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के पीहर के सैनिकों पर जिस तरह लाड़ प्यार लुटाया जा रहा है उससे लगता है मानो इटली शिशुपाल और भारत भगवान श्रीकृष्ण हो गया है। बोफोर्स से लेकर हर मामले में इटली के नागरिकों का हर अपराध क्षम्य है। इन सैनिकों को मौत की सजा ना देने का वायदा भी कर दिया गया है। अब यह बात भी सुनाई देने लगी है कि पुरूलिया में हथियार गिराने वाले डेनमार्क के आरोपी किम डेवी को भी भारत लाकर पांच सितारा होटल में ठहराने की बात सीबीआई ने की थी। आखिर क्या वजह है कि इंटरनेशनल आरोपियों के लिए कांग्रेस द्वारा आवभगत में रेड कारपेट बिछाया जा रहा है।

राहुल के सामने बगलें झांकते भूरिया!
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब सख्ती के मूड में दिख रहे हैं। प्रदेशों के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों से भेंट के दौरान उनसे की जाने वाली पूछताछ लोगों की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलका देती है। अमूमन अब तक नेहरू गांधी परिवार के नाम पर सियासी बियावान में अपनी धाक जमाने वाले पुराने कांग्रेसी राहुल के नए अवतार से परेशान नजर आ रहे हैं। राहुल से जब भी कोई मिलने जाता है वे फौरन उनके प्रदेश की गतिविधियों की जानकारी तफसील से लिया करते हैं। राहुल गांधी के जासूस देश के कोने कोने में फैले हुए हैं। टीम राहुल का एक विंग सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट्स पर भी सक्रिय है। दिन भर की गतिविधियों की जानकारी तीन चार बार राहुल को ईमेल से भेजी जाती है, ताकि वे कहीं भी रहें अपडेटेड रहें। पिछले दिनों एमपीसीसी चेयरमेन कांतिलाल भूरिया राहुल से मिले तो राहुल के प्रश्नों का वे उत्तर देते समय काफी असहज दिखे और राहुल की भुकटी तनी दिखीं।

दूरदर्शन का कांग्रेसीकरण!
प्रसार भारती का दूरदर्शन अब कांग्रेस का भोंपू साबित हो रहा है। भारतीय मछुआरों के हत्यारे इतालवी नौ सेनिकों के मामले में एक प्रोग्राम में सांसद तरूण विजय ने सोनिया गांधी को इतालवी मूल के होने के कारण घेरे में लिया। इसके बाद से डीडी न्यूज में मानो सांप सूंघ गया हो। प्रसार भारती में उच्च पदस्थ नौकरशाहों ने इस मामले में गंभीर मंथन के बाद डीजी न्यूज एस.एम.खान और सीईओ जवाहर सरकार को पाबंद किया है कि उनके ग्रीन सिग्नल के बाद ही कोई काम हो। दूरदर्शन में अब नया फरमान जारी हो चुका है जिसमें प्राईम टाईम के सलाहकार संपादक संजीव श्रीवास्तव के पर कतर दिए गए हैं। श्रीवास्तव सहित साभी को अतिथियों की सूची और प्रोग्राम को तय करने के लिए खान और सरकार पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। चर्चा है कि सोनिया के पीहर की अगर किसी ने छिया तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।

गांधी के मुकाबले अब और युवा गांधी!
नेहरू गांधी परिवार की विरासत यानी वर्तमान पीढ़ी और स्वदेशी और विदेशी बहुओं को कांग्रेस और भाजपा ने बराबर बांट लिया है। संजय की पत्नि मेनका और वरूण भाजपा में तो राजीव की पत्नि सोनिया और राहुल कांग्रेस में हैं। कांग्रेस के गांधियों का जलजला है तो भाजपा के गांधी हाशिए पर ही रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश को देखकर भाजपा ने अपने गांधी को झाड़ पोंछकर सामने लाया है। 42 साल के कुंवारे राहुल के सामने भाजपा ने 33 साल के शादी शुदा वरूण को खड़ा किया है जिसका परिणाम आने वाले समय में ज्ञात हो सकेगा। राहुल की युवा नीति की काट भाजपा ने इस कदर फेंकी है कि आम चुनावों में राहुल गांधी चित हो जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए, बस इसके लिए भाजपा को अपना मीडिया मैनेजमेंट तगड़ा रखना होगा। लोग तो यह भी कहने लगे हैं कि राहुल गांधी 42 के हो गए और कुंवारे हैं अतः अब उन्हें फ्रस्टेशन होने लगा है और यह कांग्रेस के नेताओं पर ही उतरता दिखता है।

भाई मिले पर मोहतरमाएं अलग अलग!
अंबानी बंधुओं के मिलन की खबरों से पटा रहा मीडिया पिछले सप्ताह। मुकेश और अनिल अंबानी ने हाथ क्यों मिलाया है इस बारे में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एन 30 मार्च को मुकेश और अनिल के बीच सुलह की आधिकारिक घोषणा की गई है। जानकारों का कहना है कि हो सकता है यह सब कुछ रिलायंस के शेयर में बढोत्तरी दर्ज करने किया गया कदम हो। दोनों भाई अगर मिल जाएं तो संपत्ति आसमान छू सकती है। वहीं दूसरी ओर अंबानीज पर केंद्र सरकार को हांकने का आरोप भी लगा है। हो सकता है किसी मामले में सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी के फेरे में पड़ चुके हों अंबानी। सियासी फिजां में एक बात की चर्चा जोरों पर हो रही है कि अंबानीज का मिलन कागजी है, क्योंकि आज भी मोहतरमाएं यानी नीता और टीना अंबानी एक दूसरे से मुंह फुलाए घूम रही हैं।

ममता की नजरें तख्त पर!
त्रणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी इन दिनों अपना जनाधार बढ़ाने की जुगत में दिख रही हैं। दरसअल, वे दिल्ली के तख्त पर कब्जे का सपना देख रही हैं। सूत्रों की मानें तो ममता को मशविरा दिया गया है अगर वे कम से कम चार राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दें तो त्रणमूल को क्षेत्रीय से राष्ट्रीय दल के बतौर मान्यता मिल जाएगी। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के साथ अब हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अपने पैर पसारने आरंभ कर दिए हैं। इन राज्यों में ममता बनर्जी और त्रणमूल सांसद के.डी.सिंह के फोटो वाले पोस्टर्स बहुतायत में देखने को मिल रहे हैं जिसमें लोगों को त्रणमूल से जुड़ने का आमंत्रण दिया गया है। ममता बनर्जी को यह भी बताया गया है कि राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार ने इसके पहले यह कोशिश की थी पर वे औंधे मुंह ही गिरे थे। ममता की नजरें मध्य प्रदेश की ओर भी दिख रही हैं। वे एमपी में भी संभावनाएं तलाशती नजर आ रही हैं।

नाथ की कायल हुईं सुषमा!
भाजपा की तेज तर्रार नेत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज इन दिनों कमल नाथ पर खासी मेहरबान दिख रही हैं। अब तक के संसदीय कार्य मंत्रियों में कमल नाथ की टीआरपी यानी लोकप्रियता का ग्राफ सबसे उपर ही नजर आ रहा है। विपक्षी दलों में वे खासे लोकप्रिय हैं। मीडिया और कांग्रेस में भले ही उनकी आलोचना हो पर भाजपा उन पर मेहरबान ही नजर आती है। बजट के लिए जब विपक्षी दलों के साथ बैठक चल रही थी तब नाथ ने सुझाव दिया कि सदन आठ घंटे चलना चाहिए। इस पर सुषमा स्वराज बिदक गईं और बोली कि इसके पहले सदन 12 घंटे चलता था। यह सुनते ही कमल नाथ ने अपनी चिरपरिचित अदा में आंखें मिचमिचाई और बोले आई एम स्वारी सुषमा जी, आई एम न्यू इन दिस मिनिस्ट्री। मुझे नहीं पता कि पहले क्या होता था। ठीक है सदन 12 घंटे ही चलेगा। फिर क्या था, सुषमा हो गईं नाथ की कायल, पर किसी ने चुटकी ली कि 1980 से लगातार संसद सदस्य हैं नाथ फिर भी उन्हें बजट के बारे में जानकारी नहीं, आश्चर्य है?

फेमली बिजनिस छोड़ सन्यास लेना चाहिए युवराज को!
देश की सियासी फिजां में एक बात तेजी से उभर रही है कि नेहरू गांधी परिवार की वर्तमान पीढ़ी के सदस्य राहुल गांधी को अब फैमली बिजनिस त्यागकर सन्यास लेने की बात सोचना चाहिए। हो सकता है यह बात नरेंद्र मोदी केंप से उछाली गई हो पर लोग गंभीरता से इस बारे में चर्चा करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए राहुल का सन्यास अत्यावश्यक है। हर फैसले के लिए मां बेटे पर निर्भरता के बजाए आम कांग्रेसी को ही निर्णय के लिए बाध्य होना चाहिए। अगर एसा नहीं हुआ तो जल्द ही कांग्रेस का नामलेवा भी नहीं बचने वाला है। कांग्रेस में भाटचारण और गणेश परिक्रमा का आलम चरम पर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मणिशंकर अय्यर को राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल इसलिए मिला क्योंकि मनी लांड्रिग मामले में उन्होंने राबर्ट वढ़ेरा को बचाया।

लाल बत्ती हूटर का कहर
देश भर में लाल बत्तियों और बिना लाल बत्तियों वालों के हूटर्स की चांव चांव ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है। जनता के बीच में जाकर अपना रोब झाड़ने के लिए शहरों के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में हूटर्स जबरन ही बजाए जाते हैं। इसी तरह लाल बत्ती भी नेताओं का प्रिय शगल बन गया है। देश की शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लिया है। इसके गलत प्रयोग के लिए देश की शीर्ष अदालत काफी सख्त नजर आ रही है। लाल बत्ती वाली गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमाम राज्य सरकारों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि गाड़ियों पर रेड लाइट लगाना और सायरन बजाना स्टेटस सिंबल बन गया है। इसका गलत इस्तेमाल करने वालों पर 10 हजार रुपये फाइन लगाया जाए। न मानने वालों की गाड़ियां जब्त की जाएं। कोर्ट ने कहा कि वीआईपी के नाम पर लाल बत्ती वाली गाड़ियों में कमी लाई जाए। अगर 2 जुलाई तक कोई पहल नहीं हुई तो कोर्ट ने खुद इस मामले में आदेश जारी करने का कहा है।

अब सरकारी मीडिया में यौन शोषण
सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की नाक के नीचे प्रसार भारती में यौन शौषण के गंभीर आरोप से कांग्रेस सकते में है। सरकारी रेडियो एफ एम गोल्ड में महिलाओं के यौन शोषण को लेकर दायर याचिका के बाद देश भर में सरकारी भर्राशाही पर बहस शुरु हो गई है। प्रसार भारती के उपक्रमों में अनुबंध के आधार पर काम करने वाली महिलाओं के यौन शोषण की बात सामने आने के बाद प्रसार भारती के नियम-कायदों को भी सवालों के घेरे में लाया जा रहा है। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता मीरा मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एफएम गोल्ड में कार्यरत महिलाओं का यौन उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्टाे के माध्यम से कथित तौर पर एफएम चौनल की महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न के बारे में पता चला था। इन रिपोर्टाे के अनुसार ये लोग पिछले कई वर्षाे से चौनल में काम करती थी। उनकी सेवाओं को बिना कोई कारण बताए समाप्त किया कर दिया गया। दायर याचिका में प्रसार भारती के एफएम गोल्ड तथा ऑल इंडिया रेडियो में महिला रेडियो प्रस्तोताओं का यौन उत्पीड़न एवं शोषण रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है।

पुच्छल तारा
कहते हैं अगर नौकरशाह शीर्ष पर है तो वह कभी रिटायर नहीं होता। अगर वह रिटायर होता भी है तो अपनी सेवानिवृति के छः महीने पहले ही वह अपने लिए नई मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित कर लेता है। यही हाल देश के शीर्ष नौकरशाहों का हो रहा है। कोई कहीं महामहिम राज्य पाल बना बैठा है तो कोई कहीं। अब जम्मू काश्मीर के राज्यपाल बनने के लिए लाबिंग जारी है। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि टी.के.नायर, दुल्लत, संधु जैसे माननीय जेएण्डके में लाट साहब बनने को आतुर दिख रहे हैं। (साई फीचर्स)