नए रोजगार की तलाश में राजनाथ!
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी जल्द ही नए निजाम के निर्देशन में चलना आरंभ करने वाली है। भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह की बिदाई की बेला करीब ही है। भाजपा और संघ के आला नेताओं को अब चिंता सताने लगी है कि निर्वतमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह को किस भूमिका में रखा जाए।
इस तरह का संकट पूर्व में उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत के साथ भी आ चुका है। उपराष्ट्रपति पद से हटने के बाद पार्टी में उनके हिसाब का पद संघ और भाजपा दोनों ही सृजित नहीं कर पाई। साल दर साल भाजपा को मजबूती प्रदान करने वाले शेखावत अब हाशिए पर ही चल रहे हैं।
संघ के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह को लाल कृष्ण आडवाणी के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष बनाने की चर्चाएं भी चल रहीं हैं, किन्तु इस ताजपोशी में भाजपा की गृहणी की छवि वाली जनाधारयुक्त नेत्री सुषमा स्वराज अडंगे के तौर पर सामने आ रहीं हैं। वैसे भी सुषमा स्वराज का संसदीय अनुभव उनके लिए सबसे बडा प्लस प्वाईंट बनकर उभर रहा है। वर्तमान में स्वराज उपनेता हैं, किन्तु महिलाओं की उपेक्षा के आरोप से बचने के लिए सुषमा को नेता प्रतिपक्ष बनाना भाजपा की मजबूरी है।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा में उपनेता सुषमा स्वराज को अगर नेता प्रतिपक्ष बना दिया जाता है तो राजनाथ को उपनेता का पद आफर किया जा सकता है। वैसे संघ के नेता परोक्ष तौर पर यह भी कह रहे हैं कि जब राज्य सभा में अरूण जेतली के नीचे पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू काम कर सकते हैं तो सुषमा के अधीन राजनाथ को काम करने में दिक्कत नहीं होना चाहिए।
राजनाथ सिंह की हालिया संघ के आला नेताओं के साथ बैठकों के बाद अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि राजनाथ सिंह पद से हटने के बाद माकूल जिम्मेदारी लेने की फिराक में हैं, ताकि केंद्र की राजनीति में उनका दखल बरकरार रहे। इसके लिए वे संघ प्रमुख मोहन भागवत और सह सरकार्यवाहक सुरेश सोनी से अलग अलग गुफ्तगू कर चुके हैं।


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