केंद्रीय मंत्रियों से मोहभंग हुआ युवाओं का
युवा मतदाता दूर हैं मतदान से
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। आने वाला भारत कहलाने वाला देश का युवा अब मतदान से अपने आप को दूर ही रखे हुए है। चुनाव आयोग के आंकड़े ही यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि देश के हृदय प्रदेश में युवाओं का किस कदर चुनाव से मोह भंग हो रहा है। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में युवाओं का रूझान मतदान की ओर न होना इनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। युवाओं द्वारा अब तक मतदाता सूची में अपने नाम भी दर्ज न कराया जाना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।
भारत सरकार के दो विभागों के आंकड़ों का ही अगर अध्ययन किया जाए तो विसंगति सामने आती है। इसमें जनगणना के आंकड़ें कुछ कहते हैं तो भारत सरकार के निर्वाचन आयोग का कहना कुछ और ही है। दोनों ही आंकड़ों का अंतर मन में भ्रम भी पैदा करता है कि कौन से आंकड़े सच्चे हैं। साथ ही साथ दोनों ही आंकड़े अगर सच्चे हैं तो फिर निश्चित तौर पर युवाओं का मन चुनावी प्रणाली से भर चुका ही माना जा सकता है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 18 से 19 साल की आयु वाले युवाओं की तादाद 94 हजार 566 है इसके एवज में इस आयु वर्ग के वोटर्स की संख्या महज 15 हजार 77 ही है। इसी तरह ग्वालियर में 88 हजार 481 के मुकाबले 7828, भोपाल में 94 हजार 271 की जगह 10 हजार 763, जबलपुर में एक लाख दस हजार 5 के स्थान पर ग्यारह हजार 334 का आंकड़ा सामने आया है जो साबित करता है कि युवाओं का केंद्रीय मंत्रियों सहित पूरी व्यवस्था से ही मोह भंग हो गया है। मध्य प्रदेश में सर्वाधिक दशमलव 68 प्रतिशत का अंतर छिंदवाड़ा में ही देखने को मिला है।


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