0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 11
क्या जमीन अधिग्रहण संशोधन लागू होगा झाबुआ पावर में
नए प्रावधान से किसे होगा लाभ!
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। देश की मशहूर थापर ग्रुप के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा देश के हृदय प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के करीब भगवान शिव के सिवनी जिले में लगाए जा रहे कोल आधारित छः सो मेगावाट के पावर प्लांट में जमीन अधिग्रहण में नए प्रावधान लागू हो पाएंगे या नहीं इस बारे में कुहासा अभी छट नहीं सका है।
गौरतलब है कि वर्तमान में जमीन अधिग्रहण एक पेचीदा मसला बनकर उभरा है। किसानों द्वारा जमीन के अधिग्रहण का पुरजोर विरोध किया जा रहा है। वर्तमान में जमीन अधिग्रहण कानून 1894 के अनुसार ही सरकारें अधिग्रहण का काम करती हैं। अधिग्रहण प्रक्रिया में जमीन मालिक से चर्चा अवश्य ही होती है पर जमीन मालिक के पास अधिग्रहण रोकने का कोई अधिकार नहीं होता है।
कानून के अनुसार अगर जमीन का अधिग्रहण जनसेवा के उद्देश्य से किया जाता है तो जमीन के मालिक को वर्तमान दरों के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध इसलिए आरंभ हुआ क्योंकि सरकारों द्वारा अपने हितों के बजाए निजी क्षेत्र के लोगों के लिए जमीन का अधिग्रहण करना आरंभ कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने जमीन अधिग्रहण कानून में कुछ संशोधन किए हैं। इसमें पुराने कानून की विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। नए प्रावधान में अधिग्रहण में सत्तर फीसदी जमीन को बाजार भाव पर खरीदना अनिवार्य किया जा रहा है। इसके अलावा रीहबिलीटेशन और रीसैटलमेंट एक्ट 2007 के अनुसार विस्थापितों को मुआवजा ओर अन्य फायदे देने का प्रावधान किया गया है। इस जमीन अधिग्रहण कानून संशोधन के बारे में सरकार द्वारा मुनादी न पिटवाया जाना भी आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है। घंसौर में निजी कंपनी झाबुआ पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण में संशोधित कानून लागू होता है या नहीं यह भी शोध का ही विषय माना जा रहा है।
(क्रमशः जारी)

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