बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 25
देश में तीन व्यक्तित्व ही मायने रखते हैं!
गांधी परिवार के अलावा सभी का योगदान नगण्य
(लिमटी खरे)
नई दिल्ली। सवा सौ साल पुरानी और इस देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने देश में नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) ने अपने और अपने वारिसान को महिमा मण्डित करने की गरज से सियासी धुरी तीन लोगों के इर्द गिर्द ही घुमाई हुई है। इस परिवार के तीन सदस्यों ने देश की दिशा और दशा बदल दी। इनके अलावा आजादी के उपरांत भारत गणराज्य की स्थापना के बाद सभी का योगदान नगण्य ही है। यही कारण है कि अब नेहरू गांधी परिवार से इतर सात साल प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले अर्थशास्त्री वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह की रूखसती का ताना बाना बुना जाने लगा है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस ने नेहरू गांधी परिवार के तीन लोगों को ही महिमा मण्डित करने का जतन पूरे जोर शोर से किया है। आजाद भारत के पहले वजीरे आजम पंडित जवाहर लाल नेहरू, उनकी पुत्री श्रीमति इंदिरा गांधी और फिर नवासे राजीव गांधी। इसके अलावा देश के लिए सभी नेता गौड ही हैं। यही कारण है कि देश क बड़े बड़े संस्थानों को इनके नाम पर ही रखा गया है।
नेहरू गांधी परिवार के नाम पर सत्ता की मलाई चखने वाले उनके सिपाहसलारों द्वारा बहुत चतुराई के साथ इस परिवार के आगे सभी को बौना साबित किया गया है। महात्मा गांधी को यह परिवार और इसके चाटुकार नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं, यही कारण है कि इस परिवार ने उन्हें कभी नहीं छेड़ा। अगर नेहरू गांधी परिवार द्वारा मोहन दास करमचंद गांधी को किसी भी एंगिल से टच कर दिया जाता तो देश की जनता यह कभी बर्दाश्त नहीं करती।
(क्रमशः जारी)

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