सिवनी के साथ
फिर सौतेला व्यवहार किया सांसद देशमुख ने!
सिवनीवासी सोच रहे कब टूटेगा बसोरी का मौन
(शिवेश नामदेव)
सिवनी (साई)।
परिसीमन में कांग्रेस और भाजपा नेताओं की नूरा कुश्ती के चलते विलुप्त हुई सिवनी लोकसभा
सीट का खामियाजा अब भी सिवनीवासी भुगत रहे हैं। परिसीमन के उपरांत सिवनी को दो सांसद
अवश्य ही मिल गए है पर दोनों ही सांसदों द्वारा सिवनी के मसलों में पूरी तरह उदासीनात्मक
रवैया अपनाया जा रहा है जिससे जनता अपने आप को निरीह और ठगा सा महसूस कर रही है।
सिवनी से होकर
गुजारने वाली उत्तर दक्षिण की जीवनरेखा नेशनल हाईवे नंबर सात जो अब उत्तर दक्षिण फोरलेन
गलियारे में तब्दील हो चुकी है, में सिवनी जिले में बंजारी के पास और मोहगांव, कुरई होकर खवासा मार्ग को षणयंत्र
पूर्वक रोकने के चलते वर्ष 2008 के उपरांत इसमें रखरखाव बंद कर दिया गया है। आलम यह है कि आए दिन कोई ना कोई
वाहन इस मार्ग में पसरा पड़ा होता है। इस संबंध में बालाघाट सिवनी के भाजपाई सांसद केशव
दयाल देशमुख और मण्डला सिवनी के सांसद बसोरी सिंह मसराम ने लोकसभा में मौन ही साधे
रखा गया है।
इतना ही नहीं
हाल ही में बालाघाट जिले की रेल सुविधाओं को लेकर बालाघाट सिवनी के भाजपाई सांसद केशव
दयाल देशमुख ने रेल्वे के मामले में बालाघाट जिले की उपेक्षा को लेकर दक्षिण पूर्व
मध्य रेल के मण्डल प्रबंधक को कड़ी चिट्ठी लिखकर अपने गुस्से का इजहार किया था। यहां
उल्लेखनीय होगा कि सांसद देशमुख ने अपने संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले वाले हिस्से
के बारे में पूरी तरह सौतेला व्यवहार करते हुए मौन ही साधे रखा है।
सांसद देशमुख
ने जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए लोकसभा में शून्यकाल में प्रश्न करते हुए नक्सल
प्रभावित बालाघाट जिले के कटंगी, बालाघाट, गोंदिया के बीच अमान परिवर्तन होने के बाद बालाघाट से गोंदिया और कटंगी के
बीच रेल के फेरे बढ़ाने की अपनी मांग को तवज्जो ना मिलने पर असंतोष जताया। इसी तरह बालाघाट
से रायपुर और नागपुर सीधी रेल सेवा आरंभ करने की मांग पुनः दुहराई।
विडम्बना ही कही
जाएगी कि सांसद देशमुख को लोकसभा में भेजने में सिवनी जिले के बरघाट और सिवनी विधानसभा
क्षेत्र की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। सांसद देशमुख का सिवनी जिले से किया
जाने वाला सौतेला व्यवहार समझ से ही परे है। सिवनी जिले के मामलों को लेकर भाजपाई सांसद
देशमुख का मौन आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। सांसद देशमुख को संभवतः इस बात का भी
इल्म नहीं है कि सिवनी जिला भी अब नक्सल प्रभावित जिलों की फेहरिस्त में शामिल हो गया
है। इस लिहाज से सिवनी जिले को भी पूरी तवज्जो मिलना चाहिए।
उधर, मण्डला सिवनी संसदीय क्षेत्र के
सांसद बसोरी सिंह मसराम द्वारा सिवनी में हाहाकार मचने के बाद भी नीरो के मानिंद चैन
की बंसी बजाई जा रही है। मण्डला संसदीय क्षेत्र में सिवनी जिले की केवलारी और लखनादौन
विधानसभा का समावेश होने के बाद भी सिवनी जिले के मामले में बसोरी सिंह मसराम सदा ही
‘नाट रीचेबल‘ रहते हैं।
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