गुरुवार, 13 सितंबर 2012

आईडिया सहित अन्य कंपनियों पर आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप


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आईडिया सहित अन्य कंपनियों पर आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप

मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सरकार से जवाब तलब किया। याचिका में कहा गया है कि 3जी सेवा में कुछ कम्पनियों ने पिछले दरवाजे से प्रवेश किया है और इससे सरकार को 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि दूरसंचार सेवा प्रदाता कम्पनी भारती एयरटेल लिमिटेड, आईडिया सेल्युलर लिमिटेड और वोडाफोन एस्सार लिमिटेड ने अपने उपभोक्ताओं को 3जी सेवाएं देने के लिए ऐसी अन्य कम्पनियों की सेवा ली, जिनकी इस सेवा के लिए अर्हता नहीं थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कम्पनियों ने आपराधिक षडयंत्र किया और सरकार को धोखा दिया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान हुआ। याचिकाकर्ता ने कहा कि निजी कम्पनियों ने दूरसंचार विभाग के लाइसेंस से सम्बंधित नियमों और शर्ताे तथा दिशा-निर्देशों की अनदेखी की और उन क्षेत्रों में सेवा की आपूर्ति की जिनके लिए उन्हें लाइसेंस नहीं मिला था। याचिकाकर्ता ने कहा, कि निजी कम्पनियों ने आपस में समझौते किए और एक-दूसरे के नेटवर्क और स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया और उन क्षेत्रों में भी 3जी सेवा दी जिनके लिए उनके पास लाइसेंस या 3जी स्पेक्ट्रम नहीं था। इस प्रकार उन्होंने 3जी संचालन क्षेत्र में पिछले दरवाजे से प्रवेश किया।
याचिका को संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने अतिरिक्त महाधिवक्ता ए।एस। चंडिहोक को निर्देश दिया कि वह सरकार से निर्देश प्राप्त कर 30 नवम्बर तक जवाब सौंपे। याचिका में कहा गया, सरकार और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) नियमों की अनदेखी करने वाली कम्पनियों पर कार्रवाई करने में विफल रहे और उन्होंने अवैध तौर पर कम्पनियों को उन कम्पनियों के साथ 3जी स्पेक्ट्रम साझा करने की अनुमति दी, जिन्हें लाइसेंस नहीं मिला था। दूरसंचार विभाग के दिशा निर्देश में कम्पनियों द्वारा स्पेक्ट्रम को साझा करने का प्रावधान नहीं है।
याचिकाकर्ता ने कहा, कि कम्पनियों ने आपस में समझौते कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि उसने यह सुनिश्चित कराने के लिए दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के समक्ष एक प्रस्तुति दी थी कि 3जी सेवाएं गैर लाइसेंसी ऑपरेटरों द्वारा न मुहैया कराई जाएं। याचिकाकर्ता ने कहा, कि दूरसंचार विभाग और ट्राई से कोई जवाब नहीं मिला। याचिकाकर्ता ने पीठ को यह भी सूचित किया कि उसने केंद्रीय सतर्कता आयोग को भी एक विस्तृत ब्योरा भेजा है ताकि मामले की जांच हो सके।

(क्रमशः जारी)

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