दिग्विजय का नाम आते ही असहज हो जाते हैं शिवराज
नई दिल्ली (ब्यूरो)। आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र सरकार पर जमकर बरसे। मध्य प्रदेश भवन में मीडिया से रूबरू शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मध्य प्रदेश के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करने का आरोप लगाया। जैसे ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आरोपों का जिक्र आया, वैसे ही शिवराज सिंह बिदक गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमपी में 34 लाख किसानों की 35 लाख हेक्टेयर खड़ी फसल पाले ने चौपट कर दी है, जिससे लगभग साढ़े सात हजार करोड़ रूपए का नुकसान होने का अनुमान है। राज्य ने इसके लिए केंद्र से चोबीस सौ करोड़ रूपए की मांग की है। श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने इसके लिए तत्काल 600 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं।
संवाददाताओं द्वारा जब मुख्यमंत्री से धार्मिक आतंकवाद के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम के बयान के बारे में पूछा गया तो शिवराज सिंह चौहान सहज नहीं थे। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह केवल राजनीति करते हैं। मध्य प्रदेश धार्मिक आतंकवाद की जद में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे दिग्विजय सिंह की बातों पर टिप्पणी करना मुनासिब नहीं समझते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसानों की फसलें जिस तरह से तबाह हुई हैं, उसे देखकर उनकी मदद करना अत्यावश्यक है, वरना आने वाले समय में खाने पीने के लाले के चलते ये किसान ही कानून व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में बंग्लादेशी घुसपेठिए एक बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। लूट, डकैती, राहजनी आदि की अनेक वारदातों में बंग्लादेश के नागरिकों को भी पकड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधि तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 भी केंद्र के पास भेजा गया है, जिस पर केंद्र अपनी मुहर लगाकर वापस भेज दे ताकि सूबे में इसे कारगर तरीके से लागू किया जा सके। इसके अलावा भोपाल के समीप डीएसपी स्तर के अधिकारियों के प्रशिक्षण स्कूल के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के लिए बालाघाट जिले में भूमि की खोज जारी है। केंद्र सरकार अन्य सुरक्षा इकाईयों को मध्य प्रदेश में स्थापित करना चाहे तो सूबा उसका स्वागत करेगा।

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