हांफने लगी सदी पुरानी छुकछुक रेल
(ऐश्वर्य पोतदार)
सिवनी (साई)। लगभग 110 साल पुरानी छुक छुक रेलगाड़ी अब हांफने लगी है। इसका कारण सिवनी रेलखण्ड और पांतों पर चलने वाली रेलगाड़ी की अनदेखी ही है। कहने को तो सिवनी के पास दो-दो सांसद हैं पर नेरोगेज और ब्रॉडगेज के नाम पर सदा झुनझुना ही पकड़ाया जाता रहा है।
गौरतलब है कि ब्रितानी हुकूमत के दौर में नागपुर से छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर होकर जबलपुर जाने वाली नेरोगेज रेल को अब 110 साल पूरे होने को हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के अधीन चलने वाली इस रेलगाड़ी में सिवनी से रोजाना लगभग एक हजार से ज्यादा यात्री इसका उपयोग करते हैं।
सुविधाओं का है अभाव
सिवनी रेल्वे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं न के बराबर ही हैं। न तो रेल्वे स्टेशन पर यात्रियों को पीने के लिए साफ पानी ही मिलता है और न ही प्लेटफार्म पर छांव की ही व्यवस्था है। मजबूरी में धूप, गर्मी, बरसात, ठण्ड में यात्री आसमान के नीचे ही खड़े होकर रेल की प्रतिक्षा करने पर मजबूर हैं। प्लेटफार्म पर भी यत्र-तत्र गंदकी का साम्राज्य दिख ही जाता है। यहां अवस्थित मूत्रालय में भी दुर्गन्ध और गंदगी ही व्याप्त है, जिसके चलते यहां जाने के बजाए खुले में ही लोग प्रसाधन करने को मजबूर हैं।
आवारा कुत्ते मवेशियों की फौज
रेल्वे स्टेशन परिसर चारों ओर से खुला होने के कारण यहां आवारा मवेशी, कुत्ते, सुअर आदि स्वच्छंद विचरण करते रहते हैं। यहां यात्रियों के सामान पर भी कुत्ते और मवेशी जब-तब झपटते देखे जा सकते हैं। बरसात और गर्मी के मौसम में ये जानवर यात्री प्रतिक्षालय में अंदर जाकर विश्राम करते रहते हैं, जिससे यात्रियों को सदा ही इनके काटने और मारने का भय बना रहता है। यहां तक कि अनेक बार तो यहां प्रतिक्षालय के अंदर ही गोबर और जानवरों का मल मूत्र भी पड़ा देखा जा सकता है।

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