शनिवार, 2 जून 2012

कोल ब्लाक में कोई भ्रष्टाचार नहीं: श्रीप्रकाश


कोल ब्लाक में कोई भ्रष्टाचार नहीं: श्रीप्रकाश

(शिल्प)

भुवनेश्वर (साई)। केंन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने पिछले १५ वर्षों के दौरान कोयला ब्लाकों के आवंटन में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि आवंटित कंपनियों ने कोयले का दुरूपायोग किया है कि नहीं, इसका पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
भुवनेश्वर में कल शाम संवाददाताओं से बातचीत में श्री जायसवाल ने कहा कि अब तक की सरकारों ने आम आदमी को मुनासिब दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए निजी कंपनियों को कोयला ब्लाकों के आबंटन की नीति अपनाई, क्योंकि अकेले कोल इंडिया बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर सकता था।
उनहोंने कहा कि पिछले पंद्रह सालों में जो कोल ब्लॉक दिये गये उसके पीछे मोटिव यह था कि देश की पॉवर रिक्वायरमेंट को हम सब्सिडाइज रेट पर दे सकें। कोल ब्लॉक के एलोकेशन में कहीं कोई स्कैम नहीं है, कोई गलती नहीं है, कोई घोटाला नहीं है। अब कोल ब्लॉक लेने के बाद इन लोगों ने क्या किया है, यह इन्क्वायरी का विषय हो सकता है।
श्री जायसवाल ने बताया कि कंपनियों के सरकार के साथ किये गए बिजली की खरीद संबंधी समझौतों के बाद ये आंवटन किये गए । उन्होंने ये भी बताया कि १९९३ और १९९९ के दौरान आठ ब्लाकों के आवंटन किये गए जबकि एनडीए सरकार ने १९९९ से २००४ के बीच ३२ ब्लाकों के आबंटन किये और यूपीए सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान १५३ आबंटन किये गए।
श्री जायसवाल ने कहा कि सौ प्रतिशत मामलों में बिजली खरीद समझौते किये गए। टीम अण्णा द्वारा कोयला ब्लॉको के आवंटन में सीएजी के रिपोर्ट के हवाले से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना के संबंध में एक प्रश्न के जवाब में कोयला मंत्री ने कुछ लोगों और राजनीतिक दलों के आरोपों का खंडन किया।
उधर, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो-सी बी आई ने २००६ से २००९ के बीच निजी कंपनियों को कोयला खंडों के आवंटन में अनियमितताओं और निजी कंपनियों द्वारा इसका दुरूपयोग करने के आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। सी बी आई प्रवक्ता धारिणी मिश्रा ने कल आकाशवाणी को बताया कि एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस बारे में भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश जावड़ेकर और हंसराज अहीर के आरोपों को सी बी आई को भेज दिया था।

पवित्रता और स्वाद का संगम है आम में


पवित्रता और स्वाद का संगम है आम में

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। गरमी आते ही बाजारों में आम की बहार छा जाती है। सुनहरा रूप लिये आम अपने गुणों व विभिन्न स्वादों के कारण ही फलों का राजा कहलाता है। गर्मी में आने वाले लगभग सभी फल रसीले होते हैं जैसे लीची, आलूबुखारा, आड़ू आदि, पर आम के रसीले स्वाद के सामने मानो सब फीके पड़ जाते हैं। अंग्रेजी शब्द मैंगो यानी आम भी तमिल शब्द के मैनके या मैनगे से बना है।
हालांकि हिंदी में आम शब्द संस्कृत के आम्र शब्द से लिया गया है। इसके मीठे रस में शरीर को लू से बचाने की अद्भुत क्षमता है। भारत में आम की सबसे ज्यादा किस्में पायी जाती हैं। एक लोककथा के अनुसार भगवान हनुमान ने रावण के बगीचे से इस पेड़ के बीज लिये थे। महाभारत और रामायण में आम का उल्लेख एक से अधिक बार हुआ है इसलिए आम के फल, पेड़ और पत्तियों को भारतीय संस्कृति में पवित्र स्थान प्राप्त है।
इसी आम के पेड़ के नीचे अनेक धार्मिक उपाख्यान व घटनाएं हुई। शिव-पार्वती का विवाह, राधा-कृष्ण की प्रणय लीला। गौतम बुद्ध विश्रम करने के लिए आम के पेड़ की छाया ही पसंद करते थे।
आम की अनेक प्रजातियां है और हर प्रजाति की अपनी एक विशिष्ट महक और स्वाद है। प्रजातियों के हिसाब से इनके आकार-प्रकार में भी भिन्नता देखी जा सकती है। कच्चे आम को अमिया अथवा कैरी कहा जाता है। कैरी के विशिष्ट औषधीय उपयोग हैं। पका आम रसायनिक तत्वों से परिपूर्ण होता है। इसमें विटामिन, प्रोटीन, वसा और विभिन्न खनिज पाये जाते हैं।

आम है कुछ खास
0 आम सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि गुणों का भी खजाना है। आम कई घातक बीमारियों को मिटाने में हमारी मदद करता है।
0 शहद के साथ पक्केआम के सेवन से वायु तथा कफ दोष दूर होता है।
0 यूनानी चिकित्सकों के अनुसार पक्का आम आलस्य दूर करता है।
0 आम के अंदर कैंसर को रोकने की विशेषता पायी जाती है।
0 आम को खाने से पाचन तंत्र अच्छा होता हैाने से हमारी स्मरण शक्ति अच्छी रहती है।

शुक्रवार, 1 जून 2012

अमेरिका की प्रवासी लेखिका श्रीमती इला प्रसाद का रचनापाठ

अमेरिका की प्रवासी लेखिका श्रीमती इला प्रसाद का रचनापाठ

प्रवासी दुनिया

 के तत्वावधान मे
 अक्षरम
का आयोजन
 अमेरिका की प्रवासी लेखिका
 श्रीमती इला प्रसाद
 का रचना पाठ
व
संवाद
अध्यक्षता – डॉ सुरेश ऋतुपर्ण
संचालन- बलराम अग्रवाल
दिनांक – 4 जून , सोमवार, सायं 6 बजे
स्थान – दीवानचंद ट्रस्ट सभागार, 2 जैन मंदिर मार्ग
कनॉट प्लेस, (शिवाजी स्टेडियम के सामने)
अनिल जोशी         नरेश शांडिल्य      नारायण कुमार          अवधेश सिंह
 09899552099       09868303565     09268766150       09868228699
इला प्रसाद का परिचय
 झारखंड की राजधानी राँची में जन्म। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सी.एस. आई. आर. की रिसर्च फ़ेलॊशिप के अन्तर्गत भौतिकी(माइक्रोइलेक्ट्रानिक्स) में पी.एच. डी एवं आई आई टी मुम्बई में सी एस आई आर की ही शॊध वृत्ति पर कुछ वर्षों तक शोध कार्य । राष्ट्रीय एवं अन्तर-राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित । भौतिकी विषय से
जुड़ी राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय कार्यशालाओं/ सम्मेलनों में भागीदारी एवं शोध पत्र का प्रकाशन/प्रस्तुतीकरण। कुछ समय अमेरिका के कालेजों में अध्यापन।
छात्र जीवन में काव्य लेखन की शुरुआत । प्रारम्भ में कालेज पत्रिका एवं आकाशवाणी तक सीमित। “इस कहानी का अन्त नहीं ” कहानी , जो जनसत्ता में २००२ में प्रकाशित हुई , से कहानी लेखन की शुरुआत। अबतक देश-विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं यथा, वागर्थ, हंस, कादम्बिनी, आधारशिला , हिन्दीजगत, हिन्दी- चेतना, निकट, पुरवाई , स्पाइल आदि तथा अनुभूति- अभिव्यक्ति , हिन्दी नेस्ट, साहित्य कुंज सहित तमाम वेब पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ प्रकाशित। “वर्तमान -साहित्य” और “रचना- समय” के प्रवासी कथाकार विशेषांक में कहानियाँ/कविताएँ संकलित । डा. अन्जना सन्धीर द्वारा सम्पादित “प्रवासिनी के बोल “में कविताएँ एवं “प्रवासी आवाज” में कहानी संकलित। कुछ रचनाओं का हिन्दी से इतर भाषाओं में अनुवाद भी। विश्व हिन्दी सम्मेलन में भागीदारी एवं सम्मेलन की अमेरिका से प्रकाशित स्मारिका में लेख संकलित। कुछ संस्मरण एवं अन्य लेखकों की किताबों की समीक्षा आदि भी लिखी है । हिन्दी में विज्ञान सम्बन्धी लेखों का अनुवाद और स्वतंत्र लेखन। आरम्भिक दिनों में इला नरेन के नाम से भी लेखन।
कृतियाँ :   “धूप का टुकड़ा ” (कविता संग्रह) एवं “इस कहानी का अंत नहीं”,
’उस स्त्री का नाम’ ( कहानी- संग्रह) ।
शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास : ’रोशनी अधूरी-सी’
लेखन के अतिरिक्त योग, रेकी, बागवानी, पर्यटन एवं पुस्तकें पढ़ने में रुचि।
सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन ।
सम्पर्क : 12934, MEADOW RUN
HOUSTON, TX-77066 USA
ई मेल ; ila_prasad1@yahoo.com

 

भाजपा में खदबदाता असंतोष सड़कों पर!


भाजपा में खदबदाता असंतोष सड़कों पर!

गड़करी, आड़वाणी में खिची तलवारें

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। ‘चाल, चरित्र और चेहरा एवं कथित अनुशासन के लिए मशहूर भारतीय जनता पार्टी के अंदर खदबदाता असंतोष अब सड़कों पर आ गया है। अपनी उपेक्षा से नाराज लाल कृष्ण आड़वाणी ने अब पार्टी मंच से इतर ब्लाग के जरिए अपनी व्यथा सार्वजनिक की तो उधर, गड़करी ने अब आड़वाणी की उपेक्षा आरंभ कर दी है। गड़करी की जुंडाली सार्वजनिक तौर पर आड़वाणी को लानत मलानत भेजने का काम करने में जुट गई है।
कांग्रेस के पेट्रोल की कीमतों के बढ़ाने का विरोध करने के लिए भाजपा ने 31 मई का दिन चुना। इसी दिन अपनी उपेक्षा से दुखी राजग के पीएम इन वेटिंग रहे एल.के.आड़वाणी ने ब्लाग पर भाजपा के बारे में उल जलूल लिखकर सनसनी पैदा कर दी। आड़वाणी के निशाने पर इस समय भाजपा के निजाम नितिन गड़करी हैं।
भाजपा के शीर्ष नेता आड़वाणी ने अपने ब्लाग पर लिखा है कि भाजपा के रवैए से लोग निराश हैं, इन परिस्थितियों में भाजपा को आत्म विश्लेषण की महती आवश्यक्ता है। चर्चा है कि आड़वाणी को उम्मीद थी कि इस बार भी उन्हें 2014 के आम चुनावों के लिए भाजपा के चेहरे के बतौर इस्तेमाल किया जाएगा। वस्तुतः एसा हुआ नहीं।
भाजपा में चल रही चर्चाओं के अनुसार आड़वाणी को अगर पुनः पीएम इन वेटिंग बना दिया जाता तो वे भाजपा की कार्यप्रणाली से कतई नाखुश नहीं रहते, और ना ही आत्म विश्लेषण का सुझाव देते। एक पदाधिकारी ने अपना नाम उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि उमर दराज आड़वाणी अगर वाकई भाजपा की हालत से दुखी हैं तो उन्हें इस बारे में पहले ही चिंता करनी चाहिए थी। भाजपा के इस तरह के हालात रातों रात तो बने नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश चुनावों के नतीजे आने के महीनों बाद आड़वाणी यूपी चुनाव का विश्लेषण कर लिख रहे हैं कि पार्टी में जोश की कमी यूपी चुनाव है। यूपी मंे बसपा के नकारे गए कुशवाह को पार्टी में लेना आत्मघाती ही साबित हुआ है। इसी तरह झारखण्ड और कर्नाटक के मसलों पर भाजपा के रवैए से भाजपा का भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान कमजोर ही साबित हो रहा है।
कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में स्वास्थ्य घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को भाजपा में शामिल करना, भ्रष्टाचार के आरोपों में आकंठ डूबे तत्कालीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के खिलाफ कड़ा कदम ना उठाना आड़वाणी की नाराजगी की वजहंें प्रमुख तौर पर सामने आ रही हैं।
इसके अलावा झारखण्ड में राज्य सभा चुनावों में भाजपा की जिस तरह भद्द पिटी है उससे पार्टी का नाम ही खराब हुआ है। सूबे में एस.एस.अहलूवालिया के स्थान पर विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोपी अंशुमान को टिकिट देना फिर वापस अहलूवालिया को लाना और अहलूवालिया का हार जाना पार्टी की साख पर खासा धब्बा है।
31 मई को भारत बंद के उपरांत दिल्ली स्थित नितिन गड़करी के निवास पर हुई समीक्षा बैठक में आड़वाणी की अनुपस्थिति पर भी विश्लेषक शोध में जुट गए हैं। एक तरफ कहा जा रहा है कि इस बैठक का आड़वाणी ने बहिष्कार किया तो दूसरी ओर यह बात भी फिजां में तैर गई है कि आड़वाणी की गड़करी द्वारा जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है। इस बैठक में आड़वाणी को आमंत्रित ही नहीं किया गया था।
उधर, झारखण्ड प्रकरण में आड़वाणी के वीटो से नाखुश अंशुमान मिश्रा ने भी आड़वाणी के खिलाफ तलवार निकाल ली है। भाजपाई सूत्रों का कहना है कि अंशुमान मिश्रा ने राजग के पीएम इन वेटिंग रहे एल.के.आड़वाणी को एक कड़ा और खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में अंशुमान ने अपने सारे अरमान निकाल लिए हैं। पत्र में लिखा गया है कि अब आपकी (आड़वाणी की) उम्र नाती पोते खिलाने की है, आप अब राजनीति से तौबा कर वानप्रस्थ आश्रम का लाभ उठाएं। आप नाहक ही राजनैतिक अड़ंगेबाजी को अंजाम ना दें।
इस तरह आरोप प्रत्यारोप के दौर में भाजपा के अंदर मची कलह अब सड़कों पर आने से संघ बेहद खफा नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि गड़करी की दूसरी पारी में इसके पहले की वे कड़े और अप्रिय फैसले लें उन्हें हर तरफ से हताश करने का प्रयास जारी है। एकाएक बलात हाशए पर ढकेल दिए गए आड़वाणी को अब चहुंओर अंधकार ही नजर आ रहा होगा तभी उन्होंने अब अपने सारे घोड़े छोड़ दिए हैं।

शीला को टेंशन!, एलजी चाह रहे एक्सटेंशन


शीला को टेंशन!, एलजी चाह रहे एक्सटेंशन

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। दिल्ली में भगवान भास्कर अपना कहर बरपा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सियासी पारा भी जमकर उछाल पर है। दिल्ली के एलजी यानी उपराज्यपाल तेजेंदर खन्ना सेवानिवृत्ति की कगार पर हैं। वे एक्सटेंशन की चाहत रख रहे हैं, खन्ना की यह चाहत दिल्ली की निजाम शीला दीक्षित के लिए टेंशन का कारण बनी हुई है।
शीला दीक्षित और तेजेंदर खन्ना के बीच तकरार अनेक मर्तबा हो चुकी है। शीला के कामकाज में दखल और टीका टिप्पणी ेसे खन्ना और शीला के बीच विवाद अनेक मर्तबा गहरा चुका है। खन्ना के समर्थक शीला के विरोध में माहौल बनाते नजर आते हैं तो शीला के समर्थक खन्ना की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते नजर आते हैं।
तेजेंदर खन्ना के करीबी उनके सेवा विस्तार के लिए जमकर लाबिंग करने में जुटे हुए हैं। खन्ना के उपर वाले कनेक्शन्स को उनके समर्थक पानी दे रहे हैं। यहां तक कि कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी तक के पास खन्ना के कार्यकाल को स्वर्णिम बताने वाले पहुंच रहे हैं।
उधर, दूसरी तरफ खन्ना की घुर विरोधी शीला दीक्षित इस प्रयास में हैं कि खन्ना को सेवा विस्तार ना मिल सके। बताया जाता है कि शीला समर्थक एलजी के बारे में यह प्रचारित कर रहे हैं कि एलजी ने दिल्ली की आम समस्याओं और लोगों से मुंह मोड़ लिया है। एलजी के दरबार में जो भी जाता है उसे एलजी से मिलने का सोभाग्य नहीं मिल पाता है। एलजी के कारिंदे लोगों को तेजेंदर खन्ना के कार्यालय या ओएसडी से मिलने का मशविरा दे देते हैं।
वैसे सियासी फिजां में तेजेंदर खन्ना के के सक्सेसर के बतौर नवीन चावला, अरूण भगत, के.के.पॉल, डडवाल, चन्द्रशेखर आदि के नामों की चर्चा तेज हो गई है। जिनके नाम फिजां में तैर रहे हैं वे भी खन्ना को सेवा विस्तार देने का पुरजोर विरोध करते नजर आ रहे हैं। सोनिया के करीबी सूत्रों का कनहा है कि सोनिया तो सेवा विस्तार के लिए लगभग राजी हैं पर युवराज राहुल गांधी ने इस मामले में रेड सिग्नल दिखाया हुआ है।