सोमवार, 21 जनवरी 2013

भावी दस्तावेज तैयार हुआ कांग्रेस का


भावी दस्तावेज तैयार हुआ कांग्रेस का

(शैलेन्द्र)

जयपुर (साई)। कांग्रेस के नवनियुक्त उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आम आदमी के लाभ के लिए पार्टी के कामकाज और व्यवस्था में व्यापक बदलाव का आह्घ्वान किया है। कल जयपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अधिवेशन में राहुल गांधी ने कहा कि बदलाव के साथ हर कदम सोच समझकर उठाना होगा।
उन्होंने कहा कि राजनीति में मैं अब आठ नौ साल से हूं और मैं एक बात समझा हूं काम करना है सोच समझकर करना है। गहराई से करना है और जल्दी से नहीं करना है। बदलाव हो तो लंबे तौर पर हो और गहराई से हो। राहुल गांधी ने कहा कि अब सरकारी कामकाज की केन्द्रीयकृत और उदासीन शैली पर सवाल उठाने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि लीडरशिप डिवेलपमेंट की जरूरत है और इसके लिए ढांचे की जरूरत है सिस्टम की जरूरत है। इर्न्फाेमेशन की जरूरत है, क्योंकि यहां पर जो नहीं होता है, इसलिए नहीं होता है क्योंकि कोई चाहता नहीं। इसलिए नहीं होता है क्योंकि सिस्टम नहंी और सिस्टम बनाया जा सकता है और इस सिस्टम को आप लोग बनाओगे और आप लोग चलाओगे।
कांग्रेस पार्टी ने जयपुर घोषणा पत्र भी जारी किया इसमें सभी धर्मनिर्पेक्ष और प्रगतिशील ताकतों से समाज को बांटने वाली शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होने को कहा गया। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने भाषण में जयपुर घोषणा को पार्टी का भावी दस्तावेज बताया।
उधर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने कहा कि ये जयपुर घोषणा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन यह ध्यान रखना है कि यह दस्तावेज एक तरह से हमारे निकट भविष्य का मार्ग दर्शन हैं। अगर हम इसके अनुरूप चलेंगे तो कोई भी बाधा हमारा रास्ता नहीं रोक सकती।
कांग्रेस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि ५६ सूत्री घोषणा में कहा गया है कि पार्टी विशेषकर नौकरशाही और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ने में सबसे आगे रहेगी। इसमें हर साल एक करोड़ नौकरियां जुटाने का वायदा किया गया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार मजबूत लोकपाल के प्रति संकल्पबद्ध है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें महिलाएं अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। जिस काम के लिए कानून में जो भी बदलाव हो रहे हैं। वो करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। लेकिन ये करना काफी नहीं होगा। हमें अपने सामाजिक मूल्यों में भी बदलाव लाना होगा।

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