अपराधियों को प्रश्रय - - -3
इसलिए अभिनंदन विलंब से करवाया हुकुम ने!
(शरद खरे)
सिवनी (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा
समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के एक वेल्डर फिरोज द्वारा
गत दिवस चार साल की दुधमुंही बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसके निधन का असर भी
हुकुम के मौन वृत पर पड़ता दिख रहा है।
बताया जाता है कि कुंवर शक्ति सिंह जिन्हें लोग हुकुम के नाम से भी जानते
हैं का घंसौर विशेषकर मेसर्स झाबुआ पावर प्लांट में इकबाल जमकर बुलंद है। हुकुम
अपना मौन वृत समाप्त कर 19 अप्रेल को
रामनवमी के दिन सिवनी वापस आ गए थे। उस वक्त घंसौर की गुड़िया का मामला मीडिया की
सुर्खियां बन चुका था।
हुकुम के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि छपास का
खासा प्रभाव है हुकुम पर। उस समय संभवतः हुकुम ने मीडिया में अपने मौन वृत को जमकर
प्रचारित करवाने का मन बनाया था। बताया जाता है कि हुकुम के सलाहकारों ने उन्हें
मशविरा दिया कि वह माकूल वक्त नहीं था जबकि वे अपने आप को महिमा मण्डित करते।
संभवतः यही कारण है कि 19 अप्रेल को अपना
मौन वृत समाप्त कर सिवनी वापस लौटे हुकुम ने गुड़िया के अंतिम संस्कार के उपरांत मई
के पहले सप्ताह में अपना कथित तौर पर अभिनंदन मीडिया के माध्यम से करवाया। इसमें
धारा 324 के एक आरोपी जो कि फरारी काट रहा है का नाम उसमें आने से
हुकुम की किरकरी हो गई।
कहा जा रहा है कि अगर 19 अप्रेल को मौन
वृत समाप्त कर वापस लौटे शक्ति सिंह अगर उसी समय इसे प्रचारित करवाते तो मीडिया
उनसे यह अवश्य पूछती कि गुड़िया के लिए वे क्या कर रहे हैं? उनके करीबी सूत्रों का दावा है कि उन परिस्थितियों में शक्ति
सिंह के पास कोई जवाब नहीं होता क्योंकि वे सदा से ही मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड
के बरेला प्लांट के बारे में अपना मुंह खोलने से बचते आए हैं।
चर्चा है कि बरेला प्लांट प्रबंधन द्वारा बार बार आदिवासियों को छला है, ना तो क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त मात्रा में रोजगार मिला
है, ना ही आदिवासियों और स्थानीय किसानों को उनकी जमीन की वाजिब
कीमत मिली है, ना ही क्षेत्र में झाबुआ पावर
लिमिटेड द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य की दिशा में कोई ठोस पहल की है। इतना सब होते
हुए भी कुंवर शक्ति सिंह का झाबुआ पावर लिमिटेड के खिलाफ मुंह ना खोलना अनेक मिली
भगत की ओर इशारा कर रहा है।
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