वर्षा पूर्व जरूरी
हैं आवश्यक तैयारियां!
(लिमटी खरे)
बारिश में जिले भर
में नदी नालों में पानी सड़कों पर से बहना आम बात है। इसके साथ ही साथ शहर का
अव्यवस्थित विकास भी बारिश के पानी को बेतरतीब तरीके से फैलाता जाता है। शहर के ही
मुख्य मार्गों पर बारिश का पानी बुरी तरह से आवागमन को प्रभावित करने से नहीं
चूकता है।
बारिश के मौसम में
निचली बस्तियों में पानी भरने की आशंकाएं सबसे ज्यादा हुआ करती हैं। इन सारी बातों
से निपटने की कार्ययोजना तत्काल बनाना आवश्यक है। पार्षद और नगर पालिका प्रशासन ने
निहित स्वार्थों के चलते सिवनी में जहां जिसका मन आया वहां जैसा चाहे वैसा निर्माण
कार्य कर लिया है,
जो बारिश का पानी निकलने में असुविधा ही पैदा करता है।
पानी की टंकी के
पास से चूना भट्टी होते हुए विवेकानंद वार्ड की ओर बहने वाले पानी का वेग इतना
ज्यादा होता है कि देखते ही बनता है। विवेकानंद वार्ड के अनेक निवासियों के घरों
में बारिश के चार माह दिन हो या रात कोहराम ही मचा रहता है। इस वार्ड में नाला तो
है पर वह सदा ही ओवर फ्लो होकर बहता रहता है।
बुधवारी बाजार में
शंकर मढ़िया के सामने वाले हिस्से में पानी का तांडव देखते ही बनता है। इसका कारण
यहां के बड़े नाले के उपर अतिक्रमण ही है। नगर पालिका की उदासीनता से लोगों ने यहां
नाले के उपर कब्जा कर लिया है, जिससे नाले की सफाई ही नहीं हो पाती है।
परिणामस्वरूप बारिश में यहां पानी भर जाता है।
कमोबेश यही स्थिति
बस स्टेंड से पोस्ट आफिस वाले खण्ड में होती है। यहां भी कामकाजी महिला वसति गृह
के सामने पानी जमकर भरा होता है। पानी भरे होने के कारण छोटे वाहन दूसरी तरफ से ही
आने जाने पर मजबूर रहते हैं। शहर के अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पानी का भराव होता
है।
इसके अलावा छोटे
नदी नालों में जरा सी बारिश में ही उफान आ जाता है, जिससे आवागमन
अवरूद्ध हुए बिना नहीं रहता है। यह तो गनीमत है कि बैनगंगा नदी पर उंचे पुल का
निर्माण हो गया है,
वरना बारिश में छिंदवाड़ा सड़क के बंद होने का ही खतरा मण्डराता
रहता था।
बारिश में फोरलेन
का विवादित हिस्सा भी आवागमन की दृष्टि से काफी नाजुक माना जा सकता है। पिछले साल
कुरई घाट के अनेक हिस्से बहते बहते बचे थे। इस बारे में जिला प्रशासन के आला
अधिकारी अच्छे से जानते होंगे। फोरलेन देश का सबसे लंबा और व्यस्ततम मार्ग है।
इस मार्ग पर
चौबीसों घंटे वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। इन परिस्थितियों में यहां अगर कोई
दुर्घटना घट जाए तो भारी क्षति का सामना भी करना पड़ सकता है। बारिश में पानी को
सहेजने की दिशा में भी प्रयास आवश्यक हैं। जिसका जहां मन आया वहां स्टाप डेम बना
दिया है। बारिश का पानी रोकने के लिए भूजल विद से परामर्श आवश्क होती है। पर यह
परंपरा अब विलुप्त हो चुकी है।
भूजलविदों की मानें
तो आने वाले तीन चार सालों में सिवनी में पानी का हाहाकार चरम पर होगा, जिससे निपटना
आवश्यक है। अभी समय रहते ही इस दिशा में सार्थक प्रयास आवश्यक है। इसके लिए ठोस
कार्ययोजना बनाने से ही काम सफल हो सकता है। सिवनी शहर के कटंगी नाका स्थित श्मशान
घाट पर बना स्टाप डेम भी शोभा की सुपारी ही बना हुआ है।
बारिश के मौसम में
लोगों को पीने को साफ पानी मिले यह भी प्रशासन की ही जवाबदारी है। लगता है ब्रितानी
हुकूमत की सत्ता आ गई है। बड़े बूढ़े बताते हैं कि जब गोरे अंग्रेज गांव या शहरों
में जाते और रियाया उनसे पानी की व्यवस्था की मांग करती तो वे दो टूक जवाब दिया
करते थे कि पानी और प्रकाश की व्यवस्था की जवाबदेही उनकी नहीं है, रियाया खुद इसकी
व्यवस्था करे। आज कमोबेश वही स्थिति बनी हुई है। जनता को ना तो पीने को साफ पानी
मिल रहा है और ना ही पर्याप्त रोशनी।
नवागत युवा एवं
उर्जावान तथा संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव से उम्मीद की जाती है कि वे बारिश
पूर्व बारिश की तैयारियां मुकम्मल अवश्य करेंगे। वैसे भी प्रदेश सरकार के मुख्य
सचिव द्वारा इस संबंध में हाल ही में दिशा निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।


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