बुधवार, 30 मई 2012

एमपी में अघोषित प्रेस सेंसरशिप लागू


एमपी में अघोषित प्रेस सेंसरशिप लागू

लाजपत आहूजा जैसा नहीं कोई दूजा

(अब्दुल रशीद)

भोपाल (साई)। मिशन 2013 में जुटे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अब मीडिया पर शिकंजा कसना आरंभ कर दिया है। मध्य प्रदेश में अघोषित तौर पर प्रेस की सेंसरशिप लागू कर दी गई है। भाजपा या सरकार के पक्ष वाले संस्थानों को विज्ञापनों से लादा जा रहा है जबकि अन्य मुंह ताकने पर मजबूर हैं।
मध्य प्रदेश में भले ही अपराधियों, भ्रष्टाचारियों और बलात्कारियों के मामले हर रोज उजागर हो रहे हैं लेकिन विकास और जन कल्याण के क्षेत्र में व्याप्त भारी निराशा के बाद भी भाजपा ने जनसंपर्क विभाग की पीठ पर सवार होकर चुनाव की वैतरणी पार करने की व्यूह रचना की है। इसी के तहत सबसे पहले अखबारों को सरकारी विज्ञापन का चाबुक दिखाकर अपने कब्जे में करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है।
जनसंपर्क विभाग के सर्वाधिक रसूखदार और अमीर अपर संचालक लाजपत आहूजा को इसी रणनीति के अंतर्गत हाल ही में विज्ञापन के साथ-साथ समाचार शाखा का प्रभार भी सौंपा गया है। दरअसल इन्हीं दो शाखाओं में जनसंपर्क विभाग समाहित है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार इस तरह विज्ञापन और समाचार शाखा एक ही अधिकारी के हाथों में सौंपी जा रही है।
यूं तो जनसंपर्क विभाग में कई अपर संचालक हैं, किंतु लाजपत आहूजा भारतीय जनता पार्टी का सर्वाधिक चहेता अधिकारी है। फर्क इतना ही है कि वह भाजपा के कार्यालय दीनदयाल परिसर की बजाय जनसंपर्क संचालनालय में बैठते है। भाजपा सरकार के नौ वर्ष के कार्यकाल में सरकारी विज्ञापन के कुबेर के खजाने की चाबी कमोबेश आहूजा की जेब में ही रही है। पूर्व मुख्य सचिव राकेश साहनी भी इस अधिकारी के साथ बहुत कृपालु थे। फलस्वरूप अघोषित रिश्तों के कारण उनके कार्यकाल में तो इसकी सभी उंगलिया घी में डूबी रहती थीं।
सरकारी विज्ञापनों को एक ‘‘काले धंधे’’ में परिवर्तित करने में लाजपत आहूजा का बड़ा योगदान रहा है। सरकारी विज्ञापन के बल पर कई ‘‘नाकुछ’’ तथाकथित बैठकबाज पत्रकारों को करोड़पति बनाने का श्रेय इसी अधिकारी को है। भाजपा को यह अधिकारी इतना रास आ गया है कि जनसंपर्क विभाग चाहे किसी भी मंत्री के पास क्यों न रहा हो, ढे़र सारी शिकायतों के बाद भी कोई उसके अंगदी पैर को विज्ञापन शाखा से एक इंच भी हिला नहीं पाया। पत्रिका अथवा अखबार की 100 प्रतियां छपवाकर 25 से लेकर 50 हजार तक का सरकारी विज्ञापन झटक लेने का गोरखधंधा आहूजा के कार्यकाल में ही पनपा है और अब तो वह पूरे शबाब पर है। लोग आहूजा को जनसंपर्क विभाग में ‘‘लॉ और आर्डर’’ का जनक भी कहते हैं। अब तो हजारों तथाकथित पत्रकार आहूजा की कृपा की ही रोटी खा-पचा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे लाजपत आहूजा को विज्ञापन और समाचार शाखा का एक साथ प्रभार भाजपा के मुख्यालय में बनी गुप्त रणनीति के तहत सौंपा गया है। समाचार शाखा के प्रभारी अपर संचालक के रूप में आहूजा अब हर दिन निगरानी रखेगा कि किस अखबार ने भाजपा और उसकी सरकार के बारे में क्या तथा कैसा छापा है। यह निश्चित है कि जो अखबार नकारात्मक समाचारों और टिप्पणियों के द्वारा भाजपा सरकार की विफलताओं को जनता के सामने लाने का दुस्साहस करेंगे, उन्हें आहूजा की विज्ञापनी कृपा के लिए निश्चित ही तरसना पड़ेगा। अब आहूजा के जरिये राज्य सरकार का एक ही सूत्र काम करेगा-‘‘भाजपा और उसकी सरकार के भले की बात छापो, अन्यथा रस्ता नापो।‘‘ भविष्य में रात को दिन और स्याह को सफेद बताने वाले अखबारों को ही सरकारी विज्ञापन मिलेंगे, जनसंपर्क विभाग की इस नई प्रशासनिक व्यवस्था ने बड़ी बेशर्मी के साथ यह तय कर दिया है। कांग्रेस इसको भाजपा सरकार द्वारा लादी गई ‘‘अघोषित सेंसरशिप’’ मानती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा है कि जनसंपर्क विभाग के बजट में विज्ञापन मद में हर साल जो अरबों का प्रावधान किया जाता है, वह सरकार की योजनाओं और सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए है। जनसंपर्क विभाग इस बजट से यह बुनियादी काम न करते हुए भारतीय जनता पार्टी को चुनावी लाभ पहुंचाने वाले विज्ञापन जारी करके शासकीय धन का आपराधिक दुरूपयोग कर रहा है। दरअसल यह बजट जनसंपर्क विभाग का खुद का न होकर विभिन्न विकास विभागों के प्रचार मद को काटकर जनसंपर्क विभाग को स्व. अर्जुनसिंह के मुख्य मंत्री काल में सौंपा गया बजट है। इस निर्णय के पीछे उद्देश्य यह था कि जनसंपर्क विभाग योजना मूलक प्रचार करेगा, किंतु विज्ञापनों के जरिए ऐसे प्रचार की बजाय अधिकांश बजट मुख्य मंत्री और मंत्रियों तथा भाजपा की छवि सुधारने पर खर्च हो रहा है।

(विस्फोट डॉट काम से साभार)

मंगलवार, 29 मई 2012

शिवी खरे का सुयश


शिवी खरे का सुयश

(ब्यूरो)

सिवनी (साई)। सेंट फ्रांसिस ऑफ एसिसी स्कूल की कक्षा दसवीं की छात्रा शिवी खरे ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में नब्बे फीसदी अंक लाकर शाला और सिवनी को गोरवांवित किया है। गायन और खेलों में रूचि रखने वाली शिवी अपनी इस उपलब्धि के लिए अपने माता पिता के साथ अपने शिक्षकों को इसका श्रेय देती हैं।

सेवानिवृत जिला मलेरिया अधिकारी एस.डी.खरे की पोती और वरिष्ठ पत्रकार लिमटी खरे की ज्येष्ठ सुपुत्री शिवी भविष्य में इंजीनियर अथवा चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहती हैं। शिवी की इस उपलब्धि पर शाला परिवार, परिजनों सहित इष्ट मित्रों, शुभचिंतकों ने उन्हें बधाईयां प्रेषित कर उज्जवल भविष्य की कामना की है।

गड़करी का अमर प्रेम!


गड़करी का अमर प्रेम!

जयाप्रदा भी हैं भाजपा प्रवेश की कतार में!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। भाजपा में दूसरा टर्म पाने वाले अध्यक्ष नितिन गड़करी अब नई जमावट में लग चुके हैं। मिशन 2014 के तहत संध की हिदायतों को ध्यान में रख गड़करी अपनी नई टीम और सूबाई राजनीति के समीकरणों को टटोलने में लगे हुए हैं। मुलायम सिंह यादव से प्रथक हुए कांग्रेस से दुत्कारे अमर सिंह पर गड़करी की नजरें इनायत हो सकती हैं। जया प्रदा और अमर सिंह को भाजपा में सशर्त प्रवेश मिलने के संकेत मिले हैं।

समाजवादी पार्टी की प्राणवायू समझे जाने वाले अमर सिंह को नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव ने छिटकाकर सपा से दूर कर दिया था। मुलायम के भाईयों के भारी विरोध के बाद मुलायम सिंह को अमर प्रेम छोड़ना पड़ा। मजबूरी में अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का गठन किया पर कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाए।

ज्ञातव्य है कि कांग्रेस सुप्रीमो श्रीमति सोनिया गांधी पर व्यक्तिगत आरोप लगाने वाले अमर सिंह की सपा और कांग्रेस से पर्याप्त दूरी बच चुकी है। कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के सूत्रों का कहना है कि अमर सिंह ने पुरजोश कोशिश की कि वे कांग्रेस में प्रवेश पा जाएं, पर सोनिया के करीबी एक गुजराती क्षत्रप के चलते यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई।

उधर, गड़करी के करीबी सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश चुनावों के चलते जब सपा और कांग्रेस के दरवाजे अमर सिंह के लिए बंद हो गए तब उन्होंने भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी को सिद्ध करना आरंभ किया। सूत्रों की मानें तो अमर सिंह ने गड़करी को ना जाने क्या पट्टी पढ़ाई कि भाजपा ने अमर सिंह की पार्टी को सपा के खिलाफ उम्मीदवार चयन में ना केवल मदद की वरन् चुनाव में आर्थिक इमदाद भी उपलब्ध कराई। अमर सिंह और गड़करी का यह अघोषित गठजोड़ भी उत्तर प्रदेश में करिश्मा नहीं दिखा सका। उत्तर प्रदेश के सूबाई नेता विशेषकर उमा भारती अमर सिंह को पचा नहीं पा रही हैं।

सूत्रों ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश चुनावों में औंधे मुंह गिरने के बाद अपनी ताजपोशी तक गड़करी ने अमर सिंह को खामोश रहने को कहा। कहा जा रहा है कि अब जबकि गड़करी की दूसरी पारी पर मुहर लग गई है तब किसी भी समय गड़करी अमर सिंह और जयाप्रदा को भाजपा में प्रवेश दे सकते हैं। इसके लिए शर्त रखी गई है कि अमर सिंह अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करें।

गड़करी के करीबी सूत्रों का कहना है कि अमर सिंह और जयाप्रदा के भाजपा में प्रवेश पर मुख्तार अब्बस नकवी का भारी विरोध सामने आ रहा है। एक तरफ तो गड़करी ने अमर सिंह को आश्वासन दिया है कि जया प्रदा को अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकिट पर रामपुर से ही चुनाव लड़वाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर गड़करी अब नकवी को मनाने में जुट गए हैं।

खफा आड़वाणी कर सकते हैं विस्फोट!


खफा आड़वाणी कर सकते हैं विस्फोट!

अटल आड़वाणी युग की अघोषित बिदाई से खफा हैं उमरदराज नेता

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और नितिन गड़करी की जुगलबंदी ने भाजपा में अटल आड़वाणी के युग का अवसान कर दिया है। आनन फानन लिए गए इस निर्णय से राजग के पीएम इन वेटिंग रहे एल.के.आड़वाणी हतप्रभ हैं। सालों साल भाजपा की सेवा कर दो सीट से सरकार बनाने की स्थिति में लाने वाले आड़वाणी को इस तरह दूध में से मख्खी की तरह निकाले जाने की उम्मीद कतई नहीं थी।
दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी की दूसरी पारी के एन पहले संध ने साफ कर दिया था कि पार्टी के उमर दराज नेता यानी 75 पार के नेताओं को बलात अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। इन नेताओं को पार्टी में अभिभावक, मार्गदर्शक, संरक्षक, पथ प्रदर्शक जैसी भूमिकाओं को अंगीकार करना ही होगा।
इस तरह अचानक ही मीडिया के माध्यम से कंपलसरी रिटायरमेंट पाने की सूचना भाजपा के उमर दराज नेताओं पर गाज की तरह गिरी। संघ के निर्देशों के बाद राजग के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, मुरली मनोहर जैसे सीजन्ड नेता अब घर बैठने पर मजबूर हो रहे हैं।
संघ के सूत्रों का कहना है कि इस बारे में जब आड़वाणी जुंडाली ने यह बात उनके संज्ञान में लाई तब आड़वाणी ने इस संबंध में संघ नेतृत्व से चर्चा की। आड़वाणी का तर्क था कि जब केरल में वाम दलों के पूर्व मुख्यमंत्री अच्चुतानंद अस्सी पार कर सीएम हो सकते हैं तो उनके मुकाबले आड़वाणी, जसवंत, यशवंत और जोशी तो जवान ही हैं। इस पर संघ ने साफ तौर पर कह दिया कि अब समय आ गया है जब भाजपा की कमान युवा हाथों में सौंपी जाए और सत्तर पार के नेता घर बैठ जाएं।
बलात हाशिए पर डाले गए नेता अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि सेवानिवृत्ति की आयु 75 साल के बजाए सरकारी सिस्टम की तरह साठ या बासठ साल कर दी जाए। इससे अनेक नेताओं का घर बैठना तय माना जा रहा है। 11 सितम्बर 1950 को महाराष्ट्र के विदर्भ प्रांत के चंद्रपुर में जन्मे भागवत भी इस साल बासठ साल पूरे कर लेंगे। अब नेताओं की मण्डली भागवत को ही सेवानिवृत्त करने के तरीकों पर विचार में लग गई है।

मिट्टी खुदाई में हो रहे ठेकेदार मालामाल!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  91

मिट्टी खुदाई में हो रहे ठेकेदार मालामाल!

अधिकारी ठेकेदार मिलकर लगा रहे प्रबंधन को चूना

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छटवीं सूची में अधिसूचित आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकास खण्ड के ग्राम बरेला में स्थापित किए जाने वाले 1260 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट में अधिकारी और ठेकेदार मिलकर संयंत्र के मालिकों को जमकर चूना लगा रहे हैं।

संयंत्र के विश्वनीय सूत्रों का कहना है कि संयंत्र के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री मिश्रा द्वारा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के जबलपुर स्थित कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों और खनिज विभाग तथा जिला प्रशासन की मिली भगत से बिना अनुमति के बीस लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी का खनन कर लिया गया था।

सूत्रों ने कहा कि घंसौर के एक नेता नुमा ठेकेदार से डरकर संयंत्र प्रबंधन द्वारा उक्त ठेकेदार के पक्ष मेें अनाप शनाप बिल बनवाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक दिन में पंद्रह सौ क्यूबिक मीटर मिट्टी से ज्यादा की खुदाई नहीं की जा सकती है पर उक्त नेता नुमा ठेकेदार के दबाव में आकर संयंत्र का मौके पर उपस्थित प्रबंधन और अन्य स्टाफ द्वारा एक एक दिन में छः हजार क्यूबिक मीटर से ज्यादा मिट्टी का उत्तखनन दर्शाकर संयंत्र के मालिक गौतम थापर को जमकर चूना लगाया जा रहा है।

चर्चा है कि मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा किए जाने वाले अवैध उत्तखनन के मामले में आदिवासी किसानों, ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन सहित मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। विडम्बना ही कही जाएगी कि प्रशासन ने तो इस मामले में चुप्पी साधे रखी है, किन्तु मुख्यमंत्री के पास से आई शिकायतों को लंबे समय तक दबाकर रखने के बाद उन्हें अग्रिम कार्यवाही के लिए प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को भेज दिया गया है, जहां आज भी ये लंबित हैं।

(क्रमशः जारी)