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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

थापर के गुर्गे पर दुधमुंही मासूम से बलात्कार का आरोप!


थापर के गुर्गे पर दुधमुंही मासूम से बलात्कार का आरोप!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड में काम करने वाले एक कर्मचारी पर चार साल की दुधमुही बच्ची के साथ मुंह काला करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
सिवनी जिले के घंसौर पुलिस थाने के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बिहार निवासी फिरोज खान द्वारा चार साल की दुधमुही बच्ची को केला खिलाने का प्रलोभन देकर अपने साथ ले जाया गया था। इसके उपरांत वह घर से गायब थी। बच्ची के गायब होने पर परिजनों ने उसकी खोजबीन आरंभ की पर वह नहीं मिली। यह घटना 17 अप्रेल को रात्रि सात बजे के आसपास की बताई जाती है।
पुलिस सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि बच्ची की मां की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही आरंभ की। बाद में वह बच्ची 18 अप्रेल को स्थानीय मरघट के पास बेहोश अवस्था में मिली। पुलिस सूत्रों ने कहा कि अभी जांच जारी है अतः उस बच्ची के साथ क्या हुआ यह कहना मुश्किल है। पुलिस सूत्रों के अनुसार भादवि की धारा 366 के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है।
लाख टके का सवाल यही खड़ा हुआ है कि आखिर सिवनी पुलिस को हो क्या गया है। आजादी के पहले से ही यह व्यवस्था लागू है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी अन्य शहर में जाता है तो उसे वहां के संबंधित थाने में अपनी मुसाफिरी दर्ज करानी होती है। सिवनी जनसंख्या के हिसाब से भी काफी संवेदनशील है अतः यहां किराएदारों की जानकारी और मुसाफिरी दर्ज किया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि आरोपी फिरोज खान का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस संबंध में जब प्लांट के महाप्रबंधक विक्रमजीत सिंह से उनके मोबाईल पर और सिवनी जिले में लगने वाले इस पावर प्लांट के जबलपुर स्थित कार्यालय में संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कोई भी उपलब्ध नहीं हो सका।

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

. . . मतलब अवैध पानी लेते आए हैं गौतम थापर!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 21

. . . मतलब अवैध पानी लेते आए हैं गौतम थापर!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। अगर आपका इकबाल सियासी क्षेत्र में बुलंद है तो आप कोई भी अवैध काम को सीना ठोंककर कर सकते हैं, जी हां, यह बात मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में होती दिख रही है। वर्ष 2009 से सिवनी जिले में मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का पावर प्लांट के कदमताल कुछ इसी दिशा में होते दिख रहे हैं। हर साल गर्मी के मौसम में सिवनी को जलाभावग्रस्त घोषित किया जाता है पर 2009 से अब तक गर्मी में भी गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के निर्माणाधीन संयंत्र में निर्बाध रूप से जलापूर्ति कैसे हो रही है यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है?
प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर भरत यादव ने गत दिवस एक आदेश जारी कर आगामी एक अप्रैल से वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने तक संपूर्ण सिवनी जिले को (ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों सहित) जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस संबंध में जारी आदेश में उन्होंने कहा है कि अवर्षा की स्थिति को देखते हुए अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुज्ञा के जिले में किसी भी शासकीय भूमि के जलस्त्रोत से पेयजल तथा घरेलू प्रयोजन को छोडकर औद्योगिक या अन्य किसी भी प्रयोजन के लिये किसी भी साधनों के द्वारा जल उपयोग नहीं करेगा। इसी प्रकार बिना अनुज्ञा के कोई भी व्यक्ति समस्त नदी, नालों, स्टॉप डेम, सार्वजनिक कुंओं, झिरिया तथा अन्य स्त्रोतों का जल, पेयजल तथा घरेलू प्रयोजन को छोडकर औद्योगिक औद्योगिक या अन्य किसी भी प्रयोजन के लिये किसी भी साधनों के द्वारा जल उपयोग नहीं कर सकेगा। इस दौरान कोई भी व्यक्ति जिला कलेक्टर कार्यालय की पूर्व अनुमति लिये बगैर किसी भी प्रयोजन के लिये नवीन नलकूप खनन नहीं करेगा तथा किसी ङ्क्षसचाई/निस्तारी तालाब औद्योगिक प्रयोजन अथवा अन्य प्रयोजन में (घरेलू प्रयोजन को छोडकर) जल का उपयोग नहीं कर सकेगा।
जारी आदेश में जिला दंडाधिकारी यादव ने कहा है कि जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किये जाने से संपूर्ण जिले में नलकूपों/ट्यूबवेल्स का उत्खनन प्रतिबंधित हो जाता है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति इस आदेश के उल्लंघन कर नवीन नलकूप/ट्यूबवेल्स उत्खनन करता है, तो उसके विरूद्व मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम १९८६ के संशोधित अधिनियम २००२ की धारा-९ एवं भारतीय दंड संहिता की धारा १८८ के अंतर्गत दंडनीय कार्यवाही की जायेगी।
आदेश में कहा गया है कि जिले में यदि कोई व्यक्ति सिंचाई अथवा औद्योगिक प्रयोजन के लिये पानी के उपयोग की अनुमति तथा नलकूप/ट्यूबवेल्स उत्खनन की अनुमति चाहता है, तो उसे अधिनियम की धारा-४ व ६ से संबंधित नियमों के अंतर्गत निर्धारित प्रारूप एवं फीस के साथ संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन-पत्र देना होगा। इस कार्य के लिये जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारियों राजस्व को उनके क्षेत्राधिकार में इस निमित्त प्राधिकृत कर दिया गया है। अनुविभागीय अधिकारी किसी को अनुज्ञा देने से पूर्व आवश्यक जांच करेंगे और अनुज्ञा दिये जाने के संबंध में संबंधित क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री/सहायक यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग एवं नगरीय क्षेत्र में मुख्य नगरपालिका अधिकारी से अभिमत एवं अनुशंसा भी प्राप्त करेंगे। जिला दंडाधिकारी के इस आदेश/प्रावधानों को कारगर रूप से क्रियान्वित करने का दायित्व संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)/कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं नगरीय क्षेत्रों में संबंधित मुख्य नगरपालिका अधिकारियों का होगा।
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 2009 के उपरांत मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के निर्माणाधीन पावर प्लांट में पानी की आपूर्ति निर्बाध रूप से की जा रही है, इसके लिए संयंत्र द्वारा किसी भी सक्षम अधिकारी से ग्रीष्मकाल में ना तो अनुमति ही प्राप्त की है और ना ही अनुमति लेने का प्रयास ही किया है। सूत्रों ने बताया कि चूंकि संयंत्र के स्वामी का इकबाल सियासी गलियारों में काफी बुलंद है और संयंत्र में निर्माण कार्य का ठेका भी कांग्रेस और भाजपा के आला नेताओं के इशारों पर दिया गया है इसलिए संयंत्र के कामकाज में कोई भी सरकारी नुमाईंदा दखल देने की हिमाकत नहीं कर पा रहा है।

(क्रमशः जारी)

गुरुवार, 21 मार्च 2013

रोजगार के नाम पर थापर छल रहे है आदिवासियों को


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 20

रोजगार के नाम पर थापर छल रहे है आदिवासियों को

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। देश के नामी गिरामी उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में लगाए जाने वाले कोल आधारित पावर प्लांट में नियम कायदों का सरेआम माखौल उड़ाया जा रहा है। सामाजिक जिम्मेदारी और सामाजिक पहलुओं की जमकर उपेक्षा संयंत्र प्रबंधन द्वारा की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड को निर्माण अवस्था और कार्यकारी अवस्था दोनों ही में स्थानीय लोगों को रोजगार दिए जाने की व्यवस्था की जानी थी। आरोपित है कि निर्माण अवस्था में ही स्थानीय लोग रोजगार के लिएभ्ज्ञाटक रहे हैं। संयंत्र प्रबंधन ने सरकार से वायदा किया था कि वह स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा और बाहरी लोगों को कम रोजगार मुहैया करवाएगी। वस्तुतः जमीनी हकीकत इससे उलट ही है।
संयंत्र में होने वाले हर काम को सिवनी जिले के निवासियों के बजाए संस्कारधानी जबलपुर, नरसिंहपुर, बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोगों के माध्यम से करवाने के आरोप आरंभ से ही संयंत्र प्रबंधन पर लगने लगे थे। यहां एक बात और उल्लेखनीय है कि अगर घंसौर थाने में दर्ज मर्ग के प्रकरणों में मृतकों के मूल निवास का पता और उनकी अंतिम क्रिया कहां की गई है की जानकारी निकाली जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र में अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक लोग असमय ही काल कलवित हो चुके हैं जो सिवनी जिले के थे ही नहीं। इससे साफ हो जाता है कि संयंत्र में बाहर से मजदूरों को बुलवाकर काम करवाया जा रहा है। वैसे संयंत्र प्रबंधन द्वारा सिवनी की उपेक्षा का प्रमाण इससे ही मिल जाता है कि मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा जिला मुख्यालय सिवनी में संयंत्र से संबंधित एकभ्ज्ञाी कार्यालय की स्थापना नहीं की गई है, जबकि जबलपुर में कंपनी ने अपना कार्यालयभ्ज्ञाी बनाया हुआ है।
कंपनी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा अपने संयंत्र की स्थापना में कराए जाने वाले हर काम को आउटसोर्स कर सिवनी जिले को छोड़कर अन्य जिलों से संपादित करवाया जा रहा है। संयंत्र प्रबंधन पर रोजगार के नाम परभ्ज्ञाोलेभ्ज्ञााले आदिवासियों को छलने के संगीन आरोपभ्ज्ञाी अब सार्वजनिक होने लगे हैं।

(क्रमशः जारी)

बुधवार, 20 मार्च 2013

सिवनी : संयंत्र प्रबंधन की ना पर पीसीबी की हां!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 19

संयंत्र प्रबंधन की ना पर पीसीबी की हां!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में लगाए जा रहे 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट में कंपनी की पगार कौन ले रहा है इस बात को लेकर संशय बना ही हुआ है। संयंत्र प्रबंधन द्वारा प्रदूषण रोकने और पर्यावरण को बनाए रखने के मसले पर कहा जाता है कि उनके द्वारा वृक्षारोपण अब तक नहीं किया गया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश प्रदूषण मण्डल का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा पिछले तीन सालों में साईट पर कोई वृक्षारोपण नहीं किया गया है।
ज्ञातव्य है कि मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा घंसौर के बरेला ग्राम में 600 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट के लिए लोकसुनवाई के दौरान ही पर्यावरण से बचाव के लिए वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया गया था। इसके उपरांत 22 नवंबर 2011 को हुई इसके दूसरे चरण (600 या 660 मेगावाट कुल मिलाकर 1200 या 1260 मेगावाट स्पष्ट नहीं) की लोकसुनवाई में संयंत्र के महाप्रबंधक मिश्रा ने साफ तौर पर स्वीकार किया था कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा 22 नवंबर 2011 तक कोई वृक्षारोपण नहीं करवाया गया था।
इसके उपरांत जब इस संबंध में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर के प्रभारी बुन्देला से चर्चा की गई तो उन्होंने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र प्रबंधन ने वृक्षारोपण करवाया था। बकौल बुन्देला, वे इस बात की तसदीक करके बताएंगे कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा कराए गए वृक्षारोपण में से कितने वृक्ष अब तक बचे हुए हैं। वस्तुतः जब संयंत्र प्रबंधन स्वयं ही स्वीकार कर रहा है कि उसके द्वारा वृक्षारोपण नहीं कराया गया से साफ हो जाता है कि मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर के प्रभारी बुन्देला किसी कारण विशेष के चलते ही संयंत्र प्रबंधन का पक्ष ले रहे हैं।
श्री बुंदेला ने साई न्यूज से चर्चा के दौरान कहा कि संयंत्र प्रबंधन द्वारा पिछली बरसात में वृक्षारोपण करवाया था। जब उनके संज्ञान में संयंत्र प्रबंधन मिश्रा की नकारोक्ति लाई गई तो उन्होंने कहा कि पता नहीं क्या बात है पर हम दावे के साथ कह सकते हैं कि वृक्षारोपण पिछली बरसात में कराया गया था। अब शोध इस बात पर किया जाना चाहिए कि आखिर मध्य प्रदेश सरकार से कौन पगार ले रहा है और गौतम थापर की जेब से किसकी पगार निकाली जा रही है।
एक तरफ तो संयंत्र के महाप्रबंधक मिश्रा द्वारा मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड से पगार लेकर वास्तविकता सामने लाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर के प्रभारी बुंदेला द्वारा मध्य प्रदेश सरकार से तनख्वाह लेकर बिना मौका मुआयना किए हुए ही पता नहीं किस दबावमें संयंत्र का पक्ष आंख बंद कर लिया जा रहा है।
2009 से संयंत्र की स्थापना आरंभ हो चुकी है। इसके उपरांत दिसंबर 2011 तक की अवधि में वाहनों की आवाजाही आदि से पर्यावरण का जो नुकसान हुआ है उसका भोगमान कौन भोगेगा इस बारे में भी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल खामोशी ही अख्तिायार किए हुए है। अब वृक्षारोपण होने पर संयंत्र के आरंभ होने तक पौधे पेड़ का रूप धारण नहीं कर पाएंगे जिससे पर्यावरण का असंतुलन बरकरार रहने की ही उम्मीद है।

(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 19 मार्च 2013

बिजली कम परेशानी ज्यादा पैदा करेंगे गौतम थापर।


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 18

बिजली कम परेशानी ज्यादा पैदा करेंगे गौतम थापर।

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। देश के जाने माने उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में डाले जाने वाले 1260 मेगावाट के पावर प्लांट से बिजली तो कम स्थानीय स्तर पर निवासियों के लिए परेशानी ज्यादा पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की सांठगांठ से नियम कायदों को दरकिनार कर डाले जा रहे इस पावर प्लांट के आरंभ होते ही स्थानीय स्तर पर लोगों को बीमारियां अगर घेर लें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑॅफ इंडिया को बताया कि पर्यावरण मामलों की जानी-मानी संस्था ग्रीनपीस और अर्बन इमिशंस द्वारा मुंबई के कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट की अगुवाई में की गई एक स्टडी से अनेक चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश मे डले पावर प्लांट्स से उत्सर्जित उर्जा, विकिरण, धुआं, राख आदि तमाम कारणों से अकेले 2011-12 में ही करीब एक लाख लोग अकाल मौत के शिकार हो गए। इसके अलावा लाखों अन्य लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं और इनके इलाज पर हर साल आम जनता का करीब 23 हजार करोड़ रुपया खर्च हो रहा है। कोयला आधारित पावर प्लांट्स के कारण होने वाली मौतों और बीमारियों के बारे में यह देश की पहली व्यापक स्टडी है। इसमें 111 पावर प्लांट्स से जुड़े आंकड़ों को शामिल किया गया है।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में इन प्लांट्स से पैदा होने वाली समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है। 2012 में इन प्लांट्स से होने वाले उत्सर्जन के कारण दिल्ली और हरियाणा क्षेत्र में 8800 और पश्चिम बंगाल, झारखंड में 14900 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में इसी दौरान 11 हजार लोगों की जान गई।
सूत्रों ने बताया कि उत्सर्जन के कारण वर्ष 2011-12 में पांच साल से कम उम्र के करीब 10 हजार बच्चों की मौत हुई, इसके अलावा 62 करोड़ को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं 84 लाख को सीने में जलन आदि जैसी समस्याएं सामने आईं और दो करोड़ लोगों को अस्थमा की बीमारी हुई। इस दौरान अस्पताल में आपातकाल विभाग में नौ लाख लोगों ने आमद दी थी।
इस आधार पर यह माना जा सकता है कि अगर सावधानी के बिना सरकारी तंत्र के साथ मिलकर सांठगांठ के जरिए घंसौर में मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का पावर प्लांट और अन्य दो प्रस्तावित पावर प्लांट डलते हैं तो आने वाले समय में सिवनी जिले के घंसौर में बीमारों और बीमारी से मरने वालों की तादाद में विस्फोटक बढ़ोत्तरी होना तय है।
(क्रमशः जारी)

बुधवार, 13 मार्च 2013

अनेक हत्याओं का पाप हो सकता है गौतम थापर के सर!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 17

अनेक हत्याओं का पाप हो सकता है गौतम थापर के सर!

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। देश के जाने माने उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में डाले जाने वाले कोल आधारित 1260 मेगावाट के पावर प्लांट की संस्थापना के पहले ही संकट के बादल छाने लगे हैं। कोयले से बनने वाली बिजली अब आसपास के रहवासियों के लिए काल ही साबित होती जा रही है।
एक आंकलन के अनुसार कोयले से बनने वाली बिजली आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, कोयला आधारित पावर प्लांट्स से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण देश में 2011-12 में करीब एक लाख लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। इनमें से करीब 8800 लोग दिल्ली और हरियाणा इलाके के हैं। इसके अलावा इससे बड़ी तादाद में लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आए हैं।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑॅफ इंडिया को बताया कि पर्यावरण मामलों की जानी-मानी संस्था ग्रीनपीस और अर्बन इमिशंस द्वारा मुंबई के कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट की अगुवाई में की गई एक स्टडी से ये आंकडे़ सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन प्लांट्स की वजह से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई है। बुजुर्गों और बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
आंकलन से साफ हो गया है कि इन पावर प्लांट्स से बड़े पैमाने पर सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पारे के साथ भारी मात्रा में कार्बन और अन्य महीन कण निकलते हैं। इनकी चपेट में आने वाले लोग अस्थमा, सांस और फेफड़ों की दूसरी कई बीमारियों, कैंसर और दिल के रोगों के शिकार हो रहे हैं।
(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 12 मार्च 2013

पीसीबी सरकार का या गौतम थापर का!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 15

पीसीबी सरकार का या गौतम थापर का!

(सुरेंद्र जायस्वाल)

जबलपुर (साई)। मध्य प्रदेश में प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए गठित किए गए प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के आला अधिकारी आखिर प्रदूषण नियंत्रित करने का काम कर रहे हैं या देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर की देहरी पर कत्थक कर रहे हैं? जी हां, संचार क्रांति के इस युग में एमपीपीसीबी की आधिकारिक वेबसाईट कुछ यही बयां करती नजर आ रही है।
एमपीपीसीबी की वेब साईट पर देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश की संस्कारधानी से महज सौ किलोमीटर दूर सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्राम बरेला में लगाए जा रहे पावर प्लांट की संस्थापना लगभग आधी हो चुकी है और संयंत्र के पहले और दूसरे चरण की लोकसुनवाई के बारे में वेब साईट का नजरिया अस्पष्ट ही नजर आ रहा है।
ज्ञातव्य है कि 22 अगस्त 2009 को संपन्न पहली लोकसुनवाई की ना तो मुनादी पीटी गई और ना ही कहीं प्रचारित किया गया। मजे की बात तो यह है कि इस लोकसुनवाई में पीसीबी की वेब साईट मौन रही। बाद में हो हल्ला होने पर 17 अगस्त 2009 को इसकी कार्यवाही का विवरण डाला गया। इस लोकसुनवाई का विवरण आज भी पीसीबी की वेब साईट पर अस्पष्ट और अपठनीय ही प्रस्तुत किया गया है।
इस लोकसुनवाई में 600 मेगावाट के दो पावर प्लांट यानी कुल 1200 मेगावाट के पावर प्लांट को डालने की बात कही गई थी। इसके उपरांत दूसरी जनसुनवाई 22 नवंबर 2011 को संपन्न हुई। यह लोकसुनवाई संपन्न होने तक पीसीबी की वेब साईट पर डले कार्यकारी सारांश में 1200 मेगावाट की ही लोकसुनवाई बताया जा रहा था। बाद में इसे बदलकर 1260 मेगावाट कर दिया गया।
आज लगभग 16 माह बीत जाने के बाद भी एमपीपीसीबी की वेब साईट पर 22 नवंबर 2011 को संपन्न लोकसुनवाई में उठाए गए मामले, मुद्दे, आपत्तियां आदि क्या आईं और क्या एवं किस रूप में सरकार को प्रेषित की गईं हैं इस बारे में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेब साईट मौन है, जिससे लगने लगा है मानो एमपीपीसीबी सरकार के अधीन ना होकर गौतम थापर की मिल्कियत बन गया है।
(क्रमशः जारी)

सोमवार, 11 मार्च 2013

थापर से जुड़ सकते हैं ताम्रकार के तार!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 15

गौतम थापर से जुड़ सकते हैं ताम्रकार के तार!

(सुरेंद्र जायस्वाल)

जबलपुर (साई)। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के विजय नगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ सहायक अभियंता गिरीश ताम्रकार के तार देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर से जुड़ सकते हैं। उक्त सहायक अभियंता को 7 मार्च को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते धर दबोचा था। लोकायुक्त द्वारा गिरीश ताम्रकार से गहन पूछताछ का निर्णय भी लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि गिरीश ताम्रकार को सुभाष कोठारी की एनओसी नवीनीकरण के मामले में नौ हजार रूपए रिश्वत लेते पकड़ा गया था। लोकायुक्त पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि गौतम ताम्रकार से जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। उनसे गहरी पूछताछ भी की जाएगी, जिसमें एनओसी की नस्ती किस किसकी टेबिल से होकर गुजरती है इस बारे में भी पता लगाया जाएगा।
वहीं पीसीबी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑॅफ इंडिया को बताया कि सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट में भी प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को गिरवी रखा गया है। पीसीबी द्वारा नियमों को अपरोक्ष तौर पर शिथिल करते हुए संयंत्र प्रबंधन को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
पीसीबी के सूत्रों ने साई न्यूज के साथ चर्चा के दौरान यह आशंका भी व्यक्त की कि अगर पीसीबी के धरे गए सहायक अभियंता गिरीश ताम्रकार से गहरी पूछताछ की गई तो तार बड़े बड़े उद्योगपति यहां तक कि अवंथा समूह के स्वामी गौतम थापर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

झाबुआ पावर का मामला उठेगा ध्यानाकर्षण में: शशि ठाकुर


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 14

झाबुआ पावर का मामला उठेगा ध्यानाकर्षण में: शशि ठाकुर

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। देश के नामी गिरामी उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले क्राम्पटन ग्रीव्ज, शराब के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम प्रीस्टीज वाईन, थापर यूनिवर्सिटी और अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकास खण्ड में बनाए जा रहे 1260 मेगावाट के पावर प्लांट में मजदूरों की मौत का सिलसिला थम ही नहीं पा रहा है। गत दिवस प्लेट ढहने से हुई दो लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक श्रीमति शशि ठाकुर का कहना है कि वे इस मामले को विधानसभा में ध्यानाकर्षण में जरूर उठाएंगी।
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र में मजदूरों की सुरक्षा के इंतजामात ना के बराबर ही हैं। संयंत्र में अब तक लगभग दो दर्जन लोगों की असयम मौत हो चुकी है। इसके पहले नवंबर माह में भी दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है। बताया जाता है कि अधिकांश मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं। मजदूरों की मौत के बाद संयंत्र प्रबंधन द्वारा पुलिस के साथ मिलकर मामले को रफा दफा करने की जुगत लगाते ही दिखता है।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि बृहस्पतिवार को बरेला स्थित निर्माणाधीन संयंत्र में बायलर की प्लेट टूटकर गिर गई। इस प्लेट के नीचे दबकर दो मजदूर बुरी तरह घायल हो गए हैं। संयंत्र के अंदर मीडिया का प्रवेश लगभग बैन ही बताया जाता है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो ने बताया कि मीडिया जब भी कोई जानकारी लेने का प्रयास करता है तो गुडगांव में एमजी रोड स्थिति वाटिका सिटी प्वाईंट के कार्यालय में और दूरभाष नंबर 014 4392000 पर किसी को भी यह नहीं पता है कि एमपी के सिवनी में डलने वाले इस पावर प्लांट के बारे में किससे चर्चा की जाए।
इस संबंध में जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने क्षेत्रीय विधायक श्रीमति शशि ठाकुर से संपर्क किया गया तो उन्होने दूरभाष पर कहा कि उनके संज्ञान में यह बात लाई गई है और महिला दिवस के मौके पर वे आज घंसौर में ही हैं अतः वे इस संबंध में पूरी जानकारी लेकर इसे विधानसभा के चालू सत्र में ध्यानकर्षण में अवश्य ही लगाएंगी।

गुरुवार, 7 मार्च 2013

थापर के गुर्गे कर रहे आदिवासियों से दुर्वयवहार


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 13

थापर के गुर्गे कर रहे आदिवासियों से दुर्वयवहार

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। देश के नामी गिरामी उद्योगपति गौतम थापर जिनका इकबाल सियासी तौर पर काफी बुलंद माना जाता है के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में डाले जा रहे पावर प्लांट में उनके गुर्गों द्वारा आदिवासियों से दुर्वव्हार की शिकायतें आम होने लगी हैं।
संयंत्र के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र में काम करने वाले आदिवासी मजदूरों के साथ संयंत्र में तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा बुरा बर्ताव किया जा रहा है। यहां पहचान पत्र अब सबसे बड़ी परेशानी का सबब बनता जा रहा है। श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें पहचान पत्र के नाम पर छला जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संयंत्र में काम करने वाले श्रमिकों को वेतन संयंत्र द्वारा दिया जा रहा है पर जब उन्हें पहचान पत्र जारी करने की बारी आई तो उन्हें सुरक्षा के लिए पाबंद की गई निजी सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से पहचान पत्र जारी करवा दिए गए। उल्लेखनीय है कि सुरक्षा एजेंसी सिर्फ अपने ही कारिंदों को पहचान पत्र जारी कर सकती है, संयंत्र में काम करने वाले श्रमिकों को वह किस आधार पर पहचान पत्र जारी कर रही है यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
संयंत्र के सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि श्रमिकों की मांग है कि चूंकि वे संयंत्र में काम कर रहे हैं अतः उन्हें संयंत्र का ही पहचान पत्र जारी किया जाए पर वहीं दूसरी ओर संयंत्र प्रबंधन की लालफीताशाही के चलते संयंत्र प्रबंधन ने उनकी इस मांग को सिरे से खारिज कर सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से ही पहचान पत्र जारी करने का अघोषित फरमान जारी किया है जिससे श्रमिकों में रोष और असंतोष बना हुआ है।
(क्रमशः जारी)

सोमवार, 4 मार्च 2013

पानी की समस्या का सामना करना पड़ेगा गौतम थापर को!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 12

पानी की समस्या का सामना करना पड़ेगा गौतम थापर को!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकास खण्ड में स्थापित किए जाने वाले पावर प्लांट में आने वाले समय में संयंत्र प्रबंधन को सबसे ज्यादा पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संयंत्र के अंदर प्रबंधन ने एक तालाब का निर्माण अवश्य ही करवा लिया है पर इस तालाब को भरने के लिए आवश्यक पानी की आपूर्ति नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध से किया जाना प्रस्तावित है। संयंत्र से नर्मदा नदी के घाट की दूरी लगभग दस किलोमीटर है।
इस दस किलोमीटर के रास्तें में पड़ने वाले गावों में बगदरी गांव का सबसे ज्यादा विरोध सामने आ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बगदरी गांव को भी संयंत्र प्रबंधन द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी के गांवों की सूची में शामिल करना अत्यावश्यक है। इस गांव से होकर संयंत्र की पाईप लाईन गुजर रही है इसलिए यहां के किसान आदिवासी रोषित नजर आ रहे हैं।
संयंत्र प्रबंधन को 600 मेगावाट की पहली इकाई में जमीन अधिग्रहण में बेहद विरोध का सामना करना पड़ा था। इसके उपरांत जब बगदरी गांव के अंदर से पाईप लाईन ले जाने के लिए जमीन के अधिग्रहण की बात आई तो मुआवजे में किसानों ने मनमानी का आरोप मढ़ दिया प्रबंधन पर।
(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

समयसीमा में बिजली उत्पादन आरंभ नही कर सकते गौतम थापर!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 11

समयसीमा में बिजली उत्पादन आरंभ नही कर सकते गौतम थापर!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा डाले जा रहे 1260 मेगावाट के पावर प्लांट में नई मुसीबतें आरंभ हो गई हैं। मध्य प्रदेश सरकार के साथ किए करार में इस पावर प्लांट को विद्युत उत्पादन की समय सीमा अब समाप्त होने जा रही है और बिजली उत्पादन तो छोड़िए यहां काम पूरा भी नहीं हो सका है।
मध्य प्रदेश सरकार के उर्जा मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड और मध्य प्रदेश सरकार के बीच हुए करार के तहत इस इकाई द्वारा मार्च 2013 से बिजली का उत्पादन आरंभ कर दिया जाना चाहिए। मार्च का महीना आरंभ हो चुका है और संयंत्र में अभी निर्माण काम मंथर गति से ही चल रहा है, जिससे उम्मीद जताई जा रही हे कि कम से कम इस माह तो बिजली का उत्पादन आरंभ हो ही नहीं सकता है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2009 से इसकी स्थापना के पहले दिन से ही यह संयंत्र विवादों के दायरे में रहा है। आरंभ में लोकसुनवाई के पहले और उसके बाद यहां मजदूरों और संयंत्र प्रबंधन के बीच समन्वय का अभाव साफ दिखाई पड़ता रहा है। दिल्ली में बैठे संयंत्र के असली डायरेक्टर्स को जमीनी हकीकत कुछ और ही दर्शाई गई जबकि वास्तव में यहां की स्थितियों उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौला से भिन्न कतई नहीं थीं।
संयंत्र के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि महाकौशल के कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के ठेकेदार नुमा नेता क्षत्रपों ने इस संयंत्र में निर्माण के काम में अपना एकाधिकार जमा लिया है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर आदिवासियों के विरोध का बुरी तरह सामना कर रहा है यह संयंत्र। इस संयंत्र में मजदूरों द्वारा जब तब हड़ताल की जाकर संयंत्र के निर्माण में अवरोध खड़ा कर दिया जाता है जिससे दिल्ली में बैठा प्रबंधन अनजान ही रहता है।
(क्रमशः जारी)

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

सिंधिया की पिच खोद रहे गौतम थापर!


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सिंधिया की पिच खोद रहे गौतम थापर!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। आदिवासी बाहुल्य मध्य प्रदेश में दस सालों से सत्ता से बाहर कांग्रेस भले ही युवा तुर्क और साफ सुथरी छवि वाले केंद्रीय उर्जा मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर दांव लगाकर सत्ता में वापसी का सपना देख रही हो पर देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर जिनका सियासी हल्कों में इकबाल बुलंद है के कदम ताल परोक्ष तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को सामंती सोच का पोषक और आदिवासी विरोधी होने का प्रमाण पत्र देते नजर आ रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि देश के उद्योगों में अग्रणी अवंथा समूह के अध्यक्ष सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौतम थापर के स्वामित्व वाले इस प्रतिष्ठान के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्उ में 1260 मेगावाट क्षमता वाले पावर प्लांट की संस्थापना का काम 2009 से लगातार जारी है।
इस पावर प्लांट की स्थापना जिस जमीन पर की जा रही है वहां आदिवासियों की जमीनों की भरमार है। आदिवासियों का आरोप है कि उनकी जमीनों को झाबुआ पावर लिमिटेड के गुर्गों के इशारों पर कम कीमतों में खरीदकर उन्हें सोने के भाव संयंत्र प्रबंधन को बेचा गया है। जब इन परिवार या क्षेत्र के लोगों को काम देने की बात आती है तो घंसौर विकासखण्ड क्या सिवनी जिले के मजदूरों को काम देने में संयंत्र प्रबंधन पर आनाकानी के आरोप आम हैं।
स्थानीय नागरिकों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि संयंत्र प्रबंधन वादाखिलाफी कर रहा है। संयंत्र प्रबंधन द्वारा लगभग अंठयानवे फीसदी काम ठेके पर दिया है। ठेकेदार चूंकि स्थानीय कुछ नेता नुमा लोगों के साथ ही साथ जबलपुर एवं नरसिंहपुर के राजनैतिक रसूख वाले हैं अतः वे स्थानीय आदिवासियों एवं अन्य लोगों को काम पर नहीं रख रहे हैं। गौतम थापर के गुर्गों द्वारा जो नीति अपनाई जा रही है उससे संयंत्र पर आदिवासी और श्रृमिक विरोधी होने के आरोप लगने लगे हैं। माना जा रहा है कि किसी नेता विशेष के इशारे पर मध्य प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट ज्योतिरादित्य सिंधिया की पिच खोदी जा रही है।
चूंकि मामला केंद्र सरकार के उर्जा मंत्रालय से संबंधित है और भाग्य से मध्य प्रदेश के युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में उर्जा मंत्री हैं अतः प्रदेश में यह संदेश जाने लगा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की शह पर गौतम थापर द्वारा आदिवासियों का शोषण किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर सिवनी के पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी में असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष प्रहलाद सिंह पटेल की भी मजदूरों के मसले में चुप्पी अनेक संदेहों को जन्म दे रही है।
(क्रमशः जारी)

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

किसके इशारे पर सिंधिया के राह में शूल बिछा रहे थापर!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 09

किसके इशारे पर सिंधिया के राह में शूल बिछा रहे थापर!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय उर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद मध्य प्रदेश में निर्विवाद रूप से तेजी से बढ़ता दिख रहा है, किन्तु उनकी राह में शूल भी नजर आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के प्रभाव वाले महाकौशल के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में आदिवासियों के साथ अन्याय करने के आरोपों के साथ स्थापित होने वाले अवंथा समूह के स्वामी गौतम थापर के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट से सिंधिया की इमेज पर धक्का लगता प्रतीत हो रहा है।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2009 से घंसौर में अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा 600 मेगावाट के दो पावर प्लांट एक ही स्थान पर प्रस्तावित थे। बाद में एक छः सौ तो दूसरा 660 का कर दिया गया। 600 का 660 कैसे हुआ क्यों हुआ इस बारे में संयंत्र प्रबंधन के जबड़े सिले हुए हैं।
बहरहाल इस संयंत्र की स्थापना के साथ ही यहां स्थानीय स्तर पर आदिवासियों के शोषण, जमीनों में गफलत, मंदिर की जमीन का अधिग्रहण, खेती और पीने के लिए बनाए गए बरगी बांध से व्यवसायिक उपयोग के लिए पानी लेना, सिवनी जिले को इसका लाभ ना मिल पाने जैसी गंभीर शिकायतों की भरमार मीडिया में उछलीं थीं। बताया जाता है कि उस वक्त तत्कालीन उर्जा मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के कारण ये शिकायतें ठण्डे बस्ते के हवाले कर दी गई थीं।
अब जबकि उर्जा मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है और मध्य प्रदेश में यह चुनावी साल है तब एक बार फिर ये शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि संभवतः किसी क्षत्रप के इशारे पर ही मशहूर उद्योगपति गौतम थापर द्वारा जानबूझकर इन शिकायतों के उछलने के बाद भी संज्ञान नहीं लिया जा रहा है ताकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस और सिंधिया के आदिवासी विरोधी होने पर मुहर लग सके।
(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

महाराज को कलंक का टीका ना लगा दें थापर!


0 रिजर्व फारेस्ट में कैसे बन रहा पावर प्लांट . . . 08

महाराज को कलंक का टीका ना लगा दें थापर!

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश में दस साल बाद सत्ता में वापसी का सपना देखने वाली कांग्रेस ने भले ही अब युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया पर दांव लगाया हो पर अवंथा समूह के मालिक मशहूर उद्योगपति गौतम थापर कहीं जाने अनजाने ज्योतिरादित्य सिंधिया के माथे पर चुनावों के पहले कलंक का टीका ना लगा दें। दरअसल, मध्य प्रदेश में केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के प्रभाव वाले महाकौशल के सिवनी जिले में प्रस्तावित पावर प्लांट में हो रही अनियमितताएं ही सिंधिया की परेशानी का सबब बनने वाली हैं।
ज्ञातव्य है कि  देश के नामी गिरामी उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा केंद्र सरकार की छटवीं अनुसूची में अधिसूचित मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में लगाए जाने वाले कोल आधारित पावर प्लांट में नियम कायदों का सरेआम माखौल उड़ाया जा रहा है। सामाजिक जिम्मेदारी और सामाजिक पहलुओं की जमकर उपेक्षा संयंत्र प्रबंधन द्वारा की जा रही है।
यह मामला सीधे सीधे केंद्रीय बिजली मंत्रालय के अधीन आता है। उर्जा मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पूर्व में बिजली मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे और गौतम थापर के बीच का याराना किसी से छिपा नहीं था। उस वक्त शिंदे की जमानत पर मेसर्स झाबुआ पावर के निर्माणाधीन पावर प्लांट की सारी की सारी बाधाएं दूर की जाती रही हैं। इस दौरान शिंदे हर बार थापर के लिए ट्रबल शूटर बनकर खड़े दिखाई भी दिए बताए जाते हैं।
अब जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया को अगले चुनावों के लिए आगे किया है, तब समीकरणों के बदलते ही भाजपा और संघ अपने दांव पेंच बदल सकते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुआई वाले उर्जा मंत्रालय के अधीन सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में डलने वाला यह पावर प्लांट सिंधिया के लिए चुनावी दौर मे अनेक मुसीबतें खड़ी कर सकता है, क्योंकि संयंत्र प्रबंधन पर आदिवासियों की अनदेखी के आरोप 2009 से लगातार लगते आ रहे हैं।
(क्रमशः जारी)